जेएनयू फीस विवाद: करीब 40% छात्रों के परिवार की सालाना आय ₹ 1,44,000 से भी कम है, तो क्या उनका विरोध करना ग़लत है?...


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professor Govind Tripathi

Professor(P.hd in mathematics)/Social worker

2:46
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मैं प्रोफेसर गोविंद त्रिपाठी आपका प्रश्न है कि करीब 40% परिवारों के इस सालाना आय 144000 से भी कम है तो क्या उल्टा विरोध करना गलत है एक विरोध करना कभी भी गलत नहीं रहा शांतिपूर्वक विरोध करें और तो गलत कभी नहीं रहा और शीशी कितनी है विरोध इस बात से लेकर है कि उन 40% परिवारों के लिए दूसरे लोग क्या कर रहे हैं वहां के बाकी के जो छात्र हैं वह क्या करते हैं पता है प्रतिशत छात्र उनकी भी फीस माफ हो रही है जो अपने मां-बाप से पैसा लेकर क्यों उड़ाते हैं शराब गुटखा इधर उधर की चीजों में पैसा बर्बाद करते हैं और उन 40 छात्रों को नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए जो गवर्नमेंट ने फीस वृद्धि की है वह जो सतीश चंद्र बच्चे हैं उनके लिए होना चाहिए और जो 40 बच्चे हैं सबके लिए स्पेशल छूट होनी चाहिए सरकार को देखना चाहिए कि जो छात्र गरीब परिवार से हैं उनकी फीस बिल्कुल माफ कर दे लेकिन जो छात्र गरीब परिवार से नहीं है पैसा है उनके पास और उसके बावजूद भी छूट का ले रहे हैं वह गलत है विरोध नहीं होना चाहिए लेकिन जेएनयू में रोज के लिए विरोध होता है सरकार अच्छा काम करेगी उसका विरोध होता है क्योंकि उनकी विचारधारा वामपंथी विचारधारा है उनका काम ही विरोध करना कि जेएनयू मैं आपको बता दूं जीवनी के बारे में जीवनी बहुत अच्छा इंस्टिट्यूट है वर्ल्ड फेमस इंस्टिट्यूट है और वहां के छात्र बहुत आगे निकलते हैं निर्मला सीतारमण अरुण जेटली के जजों के छात्र हैं और बहुत अच्छा अच्छे से अच्छे छात्र भी निकले हैं और वहां का एवरेज छात्र बहुत अच्छा होता है पढ़ाई में लेकिन सिर्फ विरोध और इधर-उधर की बातें करना देश विरोधी नारे लगाना यह गलत धन्यवाद

namaskar main professor govind tripathi aapka prashna hai ki kareeb 40 parivaron ke is salana aay 144000 se bhi kam hai toh kya ulta virodh karna galat hai ek virodh karna kabhi bhi galat nahi raha shantipurvak virodh kare aur toh galat kabhi nahi raha aur shishi kitni hai virodh is baat se lekar hai ki un 40 parivaron ke liye dusre log kya kar rahe hain wahan ke baki ke jo chatra hain vaah kya karte hain pata hai pratishat chatra unki bhi fees maaf ho rahi hai jo apne maa baap se paisa lekar kyon udate hain sharab gutkha idhar udhar ki chijon me paisa barbad karte hain aur un 40 chhatro ko nuksan pahunchate hain isliye jo government ne fees vriddhi ki hai vaah jo satish chandra bacche hain unke liye hona chahiye aur jo 40 bacche hain sabke liye special chhut honi chahiye sarkar ko dekhna chahiye ki jo chatra garib parivar se hain unki fees bilkul maaf kar de lekin jo chatra garib parivar se nahi hai paisa hai unke paas aur uske bawajud bhi chhut ka le rahe hain vaah galat hai virodh nahi hona chahiye lekin jnu me roj ke liye virodh hota hai sarkar accha kaam karegi uska virodh hota hai kyonki unki vichardhara vampanthi vichardhara hai unka kaam hi virodh karna ki jnu main aapko bata doon jeevni ke bare me jeevni bahut accha institute hai world famous institute hai aur wahan ke chatra bahut aage nikalte hain nirmala sitaraman arun jaitley ke judgon ke chatra hain aur bahut accha acche se acche chatra bhi nikle hain aur wahan ka average chatra bahut accha hota hai padhai me lekin sirf virodh aur idhar udhar ki batein karna desh virodhi nare lagana yah galat dhanyavad

नमस्कार मैं प्रोफेसर गोविंद त्रिपाठी आपका प्रश्न है कि करीब 40% परिवारों के इस सालाना आय 1

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

2:24
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किसी भी तरीके से जो शक संवत नहीं रखता है ना ही मैं किसी भीतर को लेकर जो भरोसा करता हूं कुछ अलग मुझे ऐसा लगता है कि जेएनयू के छात्रों ने जैनियों की मिलेगी संसाधन सुविधाओं का गलत उपयोग किया है और यह सिर्फ स्वार्थ के लिए सरकारी नौकरी करने के लिए खाने के लिए सभी चीजें रखी लाखों रुपए खर्च होते हैं उनके स्टडी खेल लेकिन वहां से कितनी है स्टूडेंट के लिए कुछ काम किया हो या तरक्की के लिए आगे आए बल्कि सभी लोग सिर्फ राजनीति करने में लाइट को चमकाने के लिए कोई पाकिस्तान के नारे लगा रहे तो फिर किसी का नाम देश की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है हम छात्रों से हमारी जवाबदारी है कि हम अपने छात्र जीवन का सफर संपूर्ण रूप से सकारात्मक रूप से उपयोग कर उचित खुद के लिए कुछ करें परिवार के लिए करें समाज के लिए करें और देश की लेकर जबकि जेएनयू के छात्र है क्या गिने चुने लोग बाहर आते हैं बाकी सब के सब गायब हो जाते कहां देर बाद में जाते थे ग्रेट पिक्चर डांस करते हैं दारू पीते हैं मुझे न्यू के छात्रों के साथ रहा हूं मुझे उसका अनुभव है तो आम जनता यह चीजें को नहीं देखते हैं कि आप वहां पर कैसे भेजे क्या किया किसी शख्स इंतजाम किए जाने के बाद पूरा कल्चर बदल जाता है मैं तो बोलता हूं कि पूरे हिंदुस्तान में होना चाहिए एजुकेशन से संबंधित कोई भी किसी भी एक्टिविटी में नहीं जाएगा शिवाय अपने अपने जीवन में जो उससे मिला जा रहे थे मगर उसको छोड़ दी है छोटी-छोटी गलतियां कर देश का नुकसान होगा तो हम सभी लोगों को जागरूक होना होगा

kisi bhi tarike se jo shak sanvat nahi rakhta hai na hi main kisi bheetar ko lekar jo bharosa karta hoon kuch alag mujhe aisa lagta hai ki jnu ke chhatro ne jainiyon ki milegi sansadhan suvidhaon ka galat upyog kiya hai aur yah sirf swarth ke liye sarkari naukri karne ke liye khane ke liye sabhi cheezen rakhi laakhon rupaye kharch hote hain unke study khel lekin wahan se kitni hai student ke liye kuch kaam kiya ho ya tarakki ke liye aage aaye balki sabhi log sirf raajneeti karne mein light ko chamkane ke liye koi pakistan ke nare laga rahe toh phir kisi ka naam desh ki sabse durbhagyapurn sthiti hai hum chhatro se hamari javabdari hai ki hum apne chatra jeevan ka safar sampurna roop se sakaratmak roop se upyog kar uchit khud ke liye kuch kare parivar ke liye kare samaj ke liye kare aur desh ki lekar jabki jnu ke chatra hai kya gine chune log bahar aate hain baki sab ke sab gayab ho jaate kahaan der baad mein jaate the great picture dance karte hain daaru peete hain mujhe new ke chhatro ke saath raha hoon mujhe uska anubhav hai toh aam janta yah cheezen ko nahi dekhte hain ki aap wahan par kaise bheje kya kiya kisi sakhs intajam kiye jaane ke baad pura culture badal jata hai toh bolta hoon ki poore Hindustan mein hona chahiye education se sambandhit koi bhi kisi bhi activity mein nahi jaega shivay apne apne jeevan mein jo usse mila ja rahe the magar usko chod di hai choti choti galtiya kar desh ka nuksan hoga toh hum sabhi logo ko jagruk hona hoga

किसी भी तरीके से जो शक संवत नहीं रखता है ना ही मैं किसी भीतर को लेकर जो भरोसा करता हूं कुछ

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कांति नेगी

अध्यापिका,ज्योतिष,वास्तुशास्त्री,अडवाइजर

1:34
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यह आपका प्रश्न है कि जेएनयू के करीब 40% छात्र और उनके परिवार के सालाना आय 144000 से भी कम है तो क्या होगा विरोध करना गलत है लेकिन के दो पर्सपेक्टिव हो सकते हैं पहला तो यह कि सिर्फ हम जेएनयू के 40 प्रश्न छात्रों की बात कर रहे हैं उसके अलावा पूरे भारत में और भी कॉलेजेस है जिनमें कि जेएनयू से 4 गुना 5 गुना फीस है मैं सरकारी कॉलेज की बात कर रही हूं मैं प्राइवेट कॉलेजेस की बात नहीं कर रहे क्या उनमें गरीब छात्र नहीं पढ़ते क्या वह फिर नहीं देते और अब तो सुविधा इतनी ज्यादा हो गई है कि अगर आपको भी भरना मुश्किल पड़ता है तो आप लोन ले सकते हैं और जब आपकी नौकरी लगे हुए 1 साल हो जाए उसके बाद में आप धीरे-धीरे लूंगी फिर आ चुका सकते हैं इसके लिए इतना बवाल मचाने की जरूरत नहीं है आप ही देखिए ₹10 में आज के जमाने में क्या मिलता है आपको सारी सुविधाएं मिल रही है जेएनयू जैसे कैंपस में जो कि दुनिया का आप लगा लीजिए टॉप टेन विश्वविद्यालयों में आता है तो क्या वहां के लिए अगर ₹300 फीस बढ़ा दी गई है तो क्या बहुत ज्यादा है और वह भी कितने दशकों के बाद में यह फीस बढ़ाई गई है अगर लगातार वह बढ़ती रहती तो आज ₹300 नहीं होती कम से कम ₹30000 होती तब यह छात्र किस तरीके से उस पीस को भरते क्या हो तब भी उसके लिए आंदोलन करते हैं

yah aapka prashna hai ki jnu ke kareeb 40 chatra aur unke parivar ke salana aay 144000 se bhi kam hai toh kya hoga virodh karna galat hai lekin ke do parsapektiv ho sakte hain pehla toh yah ki sirf hum jnu ke 40 prashna chhatro ki baat kar rahe hain uske alava poore bharat mein aur bhi colleges hai jinmein ki jnu se 4 guna 5 guna fees hai sarkari college ki baat kar rahi hoon main private colleges ki baat nahi kar rahe kya unmen garib chatra nahi padhte kya vaah phir nahi dete aur ab toh suvidha itni zyada ho gayi hai ki agar aapko bhi bharna mushkil padta hai toh aap loan le sakte hain aur jab aapki naukri lage hue 1 saal ho jaaye uske baad mein aap dhire dhire lungi phir aa chuka sakte hain iske liye itna bawaal machane ki zarurat nahi hai aap hi dekhiye Rs mein aaj ke jamane mein kya milta hai aapko saree suvidhaen mil rahi hai jnu jaise campus mein jo ki duniya ka aap laga lijiye top ten vishvavidyalayon mein aata hai toh kya wahan ke liye agar Rs fees badha di gayi hai toh kya bahut zyada hai aur vaah bhi kitne dashakon ke baad mein yah fees badhai gayi hai agar lagatar vaah badhti rehti toh aaj Rs nahi hoti kam se kam Rs hoti tab yah chatra kis tarike se us peace ko bharte kya ho tab bhi uske liye andolan karte hain

यह आपका प्रश्न है कि जेएनयू के करीब 40% छात्र और उनके परिवार के सालाना आय 144000 से भी कम

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:49

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जेएनयू विवाद करीब 40 परसेंट छात्रों के परिवार की सालाना आय 144003 कम है तो क्या उनका विरोध करना गलत है ही नहीं उनका विरोध करना भी गलत नहीं है और ठीक बढ़ाना का जो फैसला गवर्नमेंट नदिया है वह भी अपनी जगह एक तरफ से तर्क बंद लेकिन जिस तरह से विद्यार्थियों ने जेएनयू के छात्रों ने जो मार्च निकाला और संसद की तरफ कूच की और जहां पर 144 की कलम लगी हुई थी और वेरी टचिंग को छोड़कर और जो अंतिम विकेट था उसके ऊपर भी उन्होंने ट्राई करके और फिर बाद में पुलिस में थोड़ी सख्ती दिखाई और पांच छह बसों में भरकर विद्यार्थी और विद्यार्थियों को ले गए तो पुलिस ने भी इतना बल नहीं दिखाया ना गोली चली उन्होंने इतनी ज्यादा बर्बरता दिखाई लेकिन अगर 144000 जिसकी 40% विद्यार्थियों की अगर कम है तो उनको अपने इनकम का जोर-शोर से और इनकम कीजिए लिमिटेड है वह कॉलेज में देनी चाहिए कि हमारी इतनी ही इनकम है हमारे अभिभावक उन्हीं लोगों को विशेष छूट का प्रावधान कर सकते हैं इस तरह की जो डिमांड करनी चाहिए नहीं कि इस तरह के दिमाग करनी चाहिए कि जेएनयू में जो पड़ रहा है उसको सब तरह पुरानी हितेश का जो स्टैंडर्ड अपनाया जाए इसलिए जिस विद्यार्थी कि अभिभावकों की अगर कमाई कम है 144000 तो उनको सूट में विशेष छूट का प्रावधान होना चाहिए और ऐसी डिमांड उनको करनी चाहिए ताकि सरकार भी इसके बारे में सोच सके और को दे सकता है 5:00 बजे सके तो ऐसा हो सकता है और जो हमारे रमेश पोखरियाल जी है जो शिक्षा मंत्री है वह इस पर गंभीरता से विचार करेंगे डाकू को रखने का सही तरीका अगर हो तो उसमें जरूर कुछ ना कुछ आगे हल निकलता है लेकिन खली तोड़फोड़ करना हो और रैली निकालनी हो मत निकालना हो पुलिस के साथ लड़ना भेजना हो और अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करना हो तो बहुत ही उसके परिणाम अच्छे नहीं आते इसलिए संयम बरतना बहुत ही जरूरी जरूरी है धन्यवाद

jnu vivaad kareeb 40 percent chhatro ke parivar ki salana aay 144003 kam hai toh kya unka virodh karna galat hai hi nahi unka virodh karna bhi galat nahi hai aur theek badhana ka jo faisla government nadiya hai vaah bhi apni jagah ek taraf se tark band lekin jis tarah se vidyarthiyon ne jnu ke chhatro ne jo march nikaala aur sansad ki taraf kuch ki aur jaha par 144 ki kalam lagi hui thi aur very touching ko chhodkar aur jo antim wicket tha uske upar bhi unhone try karke aur phir baad mein police mein thodi sakhti dikhai aur paanch cheh bason mein bharkar vidyarthi aur vidyarthiyon ko le gaye toh police ne bhi itna bal nahi dikhaya na goli chali unhone itni zyada barbarta dikhai lekin agar 144000 jiski 40 vidyarthiyon ki agar kam hai toh unko apne income ka jor shor se aur income kijiye limited hai vaah college mein deni chahiye ki hamari itni hi income hai hamare abhibhavak unhi logo ko vishesh chhut ka pravadhan kar sakte hain is tarah ki jo demand karni chahiye nahi ki is tarah ke dimag karni chahiye ki jnu mein jo pad raha hai usko sab tarah purani hitesh ka jo standard apnaya jaaye isliye jis vidyarthi ki abhibhavakon ki agar kamai kam hai 144000 toh unko suit mein vishesh chhut ka pravadhan hona chahiye aur aisi demand unko karni chahiye taki sarkar bhi iske bare mein soch sake aur ko de sakta hai 5 00 baje sake toh aisa ho sakta hai aur jo hamare ramesh pokhriyal ji hai jo shiksha mantri hai vaah is par gambhirta se vichar karenge daku ko rakhne ka sahi tarika agar ho toh usme zaroor kuch na kuch aage hal nikalta hai lekin khali thorphor karna ho aur rally nikaalanee ho mat nikalna ho police ke saath ladna bhejna ho aur apni takat ka galat istemal karna ho toh bahut hi uske parinam acche nahi aate isliye sanyam bartana bahut hi zaroori zaroori hai dhanyavad

जेएनयू विवाद करीब 40 परसेंट छात्रों के परिवार की सालाना आय 144003 कम है तो क्या उनका विरोध

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Ajay Kumar Sinha

IT Advocate

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

करीब 40% छात्रों के परिवारों के सालाना आय 144000 से भी कम है तो इस परिस्थिति में छात्रों का विरोध करना किसी भी तरह से गलत नहीं है क्योंकि यदि विरोध नहीं करेंगे तो इसके अस्तित्व कर भी क्या पाएंगे यदि फीस भरी हुई थी उनके अभिभावक अदा नहीं कर पाएंगे तो उनका पढ़ाई बीच में ही रुक जाएगा और टाउन का विरोध करना किसी भी रूप से गलत नहीं है

kareeb 40 chhatro ke parivaron ke salana aay 144000 se bhi kam hai toh is paristithi mein chhatro ka virodh karna kisi bhi tarah se galat nahi hai kyonki yadi virodh nahi karenge toh iske astitva kar bhi kya payenge yadi fees bhari hui thi unke abhibhavak ada nahi kar payenge toh unka padhai beech mein hi ruk jaega aur town ka virodh karna kisi bhi roop se galat nahi hai

करीब 40% छात्रों के परिवारों के सालाना आय 144000 से भी कम है तो इस परिस्थिति में छात्रों क

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Pradeep

computer Hardware Networking Engineer

2:16
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखें जेएनयू में जो फीस वृद्धि या वहां पर जो नियम कानून चेंज हुआ है उसके ऊपर तो मैं यही बोलूंगा कि कीजिए न्यू को तो ना कायदे से जो किया है सही किया है ₹300 गरीब से गरीब तबके के लिए भी कोई बड़ी बड़ी राशि नहीं है आज की समय पर अगर बंदा वहां वहां तक पहुंचा है पढ़ने के लिए और जेएनयू में पढ़ रहा है तो यह मान लीजिए अगर आपको बोलेंगे पिछड़ा है गरीब है तो भी उधर ही नहीं है क्या उसका इंट्रेंस फॉर्म भरे हैं ऑनलाइन फॉर्म भरे हैं पैसे जुगाड़ के वहां दिल्ली तकवा है तो क्या महीने का ₹300 नहीं दे पाएगा वह और नहीं दे पाता है तो इतने बच्चे पढ़ रहे हैं जेएनयू उनसे कुछ ऐसा आप वहां पर काम करवाइए जिससे उसके मंथली वह पैसे खुद पेट कर सके अपना पार्ट टाइम काम कर सके और रही बात एक बोलते हैं कि एक ऐसा भी पढ़ते रहते प्रत्यय तथा से सब्जेक्ट हो तो बंद करा देना चाहिए जिनसे कुछ यहां की इकोनॉमी को कुछ फायदा हो सब्जेक्ट वहीं पड़ा है जेएनयू में सारे बाकी कॉलेज इसमें जिनसे इकोनामी में या आगे चलकर सिलचर में क्या बोलते हैं ना वह सब पढ़ रहे हैं उससे कोई मतलब नहीं है फिर भी वहां पर सिर्फ टाइमपास के लिए अब क्या होता है किसी को एक बार राजकुमार दिल जिंदगी की लत लग जाती है ना फ्री में खाना फ्री में रहना दोस्ती यारी कैंपस में दारु शराब शिर्डी लड़कियां तो इंसान बाहर की दुनिया में जाना नहीं चाहता वह तो सोचता भाई में नौकरी भी करके यही लाइफ जीना है मुझे यह लगता मुझे पड़े पढ़ते मिल रहा है इंसान 40 45 मुझे जिंदगी जी रहे जी लेता है उसके बाहर निकल गया तो नेतागिरी में घुस जाएगा या तो साधु बन जाएगा जिंदगी के सारे मजे तो उसने उस जवानी में ले लिया ना जेएनयू के अंदर तो फीस वृद्धि बहुत अच्छा काम है मैं तो बोलता हूं 300 की जगह 3000 करना चाहिए आज परिवार में इतना भी कोई गरीब नहीं है कि ₹300 देना बाय कहने की बात है कि पैसे जुगाड़ नहीं हो पाते खाने के लिए नहीं यह कहने की बात है आज की डेट में सब कुछ हर कोई इंसान दे सकता है अभी उनको छोटे बच्चे नहीं नाबालिक बच्चे नहीं है खुद अपने घर से उठा सकते हैं उनसे कुछ काम भी कर आना उनको सुबह से लेकर शाम तक नहीं पढ़ते होंगे

dekhen jnu mein jo fees vriddhi ya wahan par jo niyam kanoon change hua hai uske upar toh main yahi boloonga ki kijiye new ko toh na kayade se jo kiya hai sahi kiya hai Rs garib se garib tabke ke liye bhi koi baadi badi rashi nahi hai aaj ki samay par agar banda wahan wahan tak pohcha hai padhne ke liye aur jnu mein padh raha hai toh yah maan lijiye agar aapko bolenge pichda hai garib hai toh bhi udhar hi nahi hai kya uska interest form bhare hai online form bhare hai paise jugaad ke wahan delhi thakeva hai toh kya mahine ka Rs nahi de payega vaah aur nahi de pata hai toh itne bacche padh rahe hai jnu unse kuch aisa aap wahan par kaam karavaiye jisse uske monthly vaah paise khud pet kar sake apna part time kaam kar sake aur rahi baat ek bolte hai ki ek aisa bhi padhte rehte pratyay tatha se subject ho toh band kara dena chahiye jinse kuch yahan ki economy ko kuch fayda ho subject wahi pada hai jnu mein saare baki college isme jinse economy mein ya aage chalkar silchar mein kya bolte hai na vaah sab padh rahe hai usse koi matlab nahi hai phir bhi wahan par sirf timepass ke liye ab kya hota hai kisi ko ek baar rajkumar dil zindagi ki lat lag jaati hai na free mein khana free mein rehna dosti yaari campus mein daaru sharab shirdi ladkiyan toh insaan bahar ki duniya mein jana nahi chahta vaah toh sochta bhai mein naukri bhi karke yahi life jeena hai mujhe yah lagta mujhe pade padhte mil raha hai insaan 40 45 mujhe zindagi ji rahe ji leta hai uske bahar nikal gaya toh netagiri mein ghus jaega ya toh sadhu ban jaega zindagi ke saare maje toh usne us jawaani mein le liya na jnu ke andar toh fees vriddhi bahut accha kaam hai toh bolta hoon 300 ki jagah 3000 karna chahiye aaj parivar mein itna bhi koi garib nahi hai ki Rs dena bye kehne ki baat hai ki paise jugaad nahi ho paate khane ke liye nahi yah kehne ki baat hai aaj ki date mein sab kuch har koi insaan de sakta hai abhi unko chote bacche nahi nabalik bacche nahi hai khud apne ghar se utha sakte hai unse kuch kaam bhi kar aana unko subah se lekar shaam tak nahi padhte honge

देखें जेएनयू में जो फीस वृद्धि या वहां पर जो नियम कानून चेंज हुआ है उसके ऊपर तो मैं यही बो

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