एक सशस्त्र अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आपको उन लोगों की कमान संभालनी होगी जो आपसे उम्र में बढ़े हैं?...


user

Deepak Kumar

Business Owner

3:16
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक सशस्त्र अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आपको उन लोगों के कमान संभालने होंगे जो आप से बड़े हैं तो हां हम यह कह सकते हैं कि जब हम किसी पद पर ऊंचे पद पर या अधिकारी पद पर कार्यरत रहते हैं तो जो हमसे बड़े लोग हैं उनकी इज्जत करते हैं उनके सम्मान करते हैं उनकी आज्ञा का पालन करते हैं जिसके लिंग पर ध्यान देते हैं उनकी उनकी बातों को किया नहीं करते हैं उनकी जी जो आदेश होती है उनको समय के अनुसार कर देते हैं तो हमें ऐसा ही महसूस होता है कि उनकी आज्ञा का जो हम पालन सही समय पर करता है और जो भी चीज हो गेहूं का पालन करेंगे और हमारे अंदर क्या महसूस होता है कि हम भी हम भी यह ग्रह अधिकारी हैं लेकिन अधिकारी तो है ही लेकिन हम से जो बड़े अधिकारी हैं उनके सम्मान से करना हमें उचित लगता है और यह महसूस होता है कि वह पूज्य हैं हमसे बड़े हैं जिस प्रकार से घर के सदस्य को हम इज्जत करते हैं अपने से बड़े लोग याद करते हैं घर का माहौल जिस तरह से होता है बनाए रखे हैं रखते हैं उसी के अनुसार हमने अगले बड़े अधिकारी के सामने भी हम उसी तरह का यह करते हैं हम उसी तरह से अपना स्वभाव दिखाऊं करते हैं जैसा कि करना चाहिए क्योंकि जब हम घर में अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करते हैं बड़े भाई बहनों का पालन करते हैं तो उसी प्रकार जो हमसे बड़े हैं विभाग के अधिकारी हैं उनका भी सम्मान करते हैं यह कहने की बात नहीं है क्योंकि हम खुद महसूस करते हैं जिस माहौल में हम जीते हैं जिस माहौल में जीते हैं और जिस जिस वातावरण में रहते हैं जिस समाज में रहते हैं वह सब सारी चीजें को अग्रेषित करता है जिससे हमारे लिए प्रेरणा बनी रहती है दूसरों के प्रति कैसे रहना चाहिए क्या होना चाहिए सारी चीजें महसूस होती हैं हम उसी प्रकार से बीजेपी और करते हैं जिस प्रकार से हमें करना चाहिए जैसे घर पर हम अपनी बेटी बोलचाल पहचान और आज्ञा का पालन करते हैं ठीक उसी प्रकार से हम उनकी की आज्ञा का पालन करते हैं ऐसा मसूदा लगता है किसी की बात का बुरा नहीं मानते हैं अपने से बड़े लोगों की इज्जत करते हैं ऐसा हमको महसूस होता है और हम उसी प्रकार करते हैं उसी तरह से उनका सम्मान करते हैं

ek sashastra adhikari ke roop me aapko kaisa mehsus hota hai jab aapko un logo ke kamaan sambhalne honge jo aap se bade hain toh haan hum yah keh sakte hain ki jab hum kisi pad par unche pad par ya adhikari pad par karyarat rehte hain toh jo humse bade log hain unki izzat karte hain unke sammaan karte hain unki aagya ka palan karte hain jiske ling par dhyan dete hain unki unki baaton ko kiya nahi karte hain unki ji jo aadesh hoti hai unko samay ke anusaar kar dete hain toh hamein aisa hi mehsus hota hai ki unki aagya ka jo hum palan sahi samay par karta hai aur jo bhi cheez ho gehun ka palan karenge aur hamare andar kya mehsus hota hai ki hum bhi hum bhi yah grah adhikari hain lekin adhikari toh hai hi lekin hum se jo bade adhikari hain unke sammaan se karna hamein uchit lagta hai aur yah mehsus hota hai ki vaah PUJYA hain humse bade hain jis prakar se ghar ke sadasya ko hum izzat karte hain apne se bade log yaad karte hain ghar ka maahaul jis tarah se hota hai banaye rakhe hain rakhte hain usi ke anusaar humne agle bade adhikari ke saamne bhi hum usi tarah ka yah karte hain hum usi tarah se apna swabhav dikhaun karte hain jaisa ki karna chahiye kyonki jab hum ghar me apne mata pita ki aagya ka palan karte hain bade bhai bahnon ka palan karte hain toh usi prakar jo humse bade hain vibhag ke adhikari hain unka bhi sammaan karte hain yah kehne ki baat nahi hai kyonki hum khud mehsus karte hain jis maahaul me hum jeete hain jis maahaul me jeete hain aur jis jis vatavaran me rehte hain jis samaj me rehte hain vaah sab saari cheezen ko agreshit karta hai jisse hamare liye prerna bani rehti hai dusro ke prati kaise rehna chahiye kya hona chahiye saari cheezen mehsus hoti hain hum usi prakar se bjp aur karte hain jis prakar se hamein karna chahiye jaise ghar par hum apni beti bolchal pehchaan aur aagya ka palan karte hain theek usi prakar se hum unki ki aagya ka palan karte hain aisa masuda lagta hai kisi ki baat ka bura nahi maante hain apne se bade logo ki izzat karte hain aisa hamko mehsus hota hai aur hum usi prakar karte hain usi tarah se unka sammaan karte hain

एक सशस्त्र अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आपको उन लोगों के कमान संभालने हों

Romanized Version
Likes  6  Dislikes    views  101
KooApp_icon
WhatsApp_icon
5 जवाब
no img
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!