एक सशस्त्र अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आपको उन लोगों की कमान संभालनी होगी जो आपसे उम्र में बढ़े हैं?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:07
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11070 अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आप उन लोगों की कमान संभाल ली होगी तो आपके मुंह में भर एसटीपीजीटी हमारी ड्यूटी जो मिली है वह हमें ड्यूटी बजाने चली अगर बड़े उम्र के लोगों को कमान करने की अगर हमें मौका मिला है उचित सम्मान के साथ उनको कमान ऑर्डर दे सकते हैं क्योंकि आपकी जो बैंक है आपको आपकी रंग के अनुसार जो प्रावधान और जो उपभोक्ता को दी गई है उसका को निर्वहन करना चाहिए बड़ी उम्र के लोगों का आप को जो जब तक बिल्कुल सम्मान पूर्वक ऐसा है और जी के प्रति आदर सम्मान के साथ पेश आएंगे तो आपको बहुत ही उम्दा और विवेकी अधिकारी के रूप में कमांडर के रूप में अपने आप को प्रस्तावित कर लेंगे धन्यवाद

11070 adhikari ke roop mein aapko kaisa mehsus hota hai jab aap un logo ki kamaan sambhaal li hogi toh aapke mooh mein bhar STPGT hamari duty jo mili hai vaah hamein duty bajane chali agar bade umr ke logo ko kamaan karne ki agar hamein mauka mila hai uchit sammaan ke saath unko kamaan order de sakte hain kyonki aapki jo bank hai aapko aapki rang ke anusaar jo pravadhan aur jo upbhokta ko di gayi hai uska ko nirvahan karna chahiye badi umr ke logo ka aap ko jo jab tak bilkul sammaan purvak aisa hai aur ji ke prati aadar sammaan ke saath pesh aayenge toh aapko bahut hi umda aur viveki adhikari ke roop mein commander ke roop mein apne aap ko prastavit kar lenge dhanyavad

11070 अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आप उन लोगों की कमान संभाल ली होगी तो आ

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Major Gen Ashim Kohli

Major General (Retd) of Indian Army with 36 years of experience

2:12
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अगर आप दिख जाए किस चैनल पर आते हैं आपको हमेशा लोगों को को कमान कमान कर रहे होते हैं शुरू से ही बताया जाता है और उनको चाय पी के बारे में चाय किसी का कंपनी ऑफिस इन जो होते हैं जो किसी दिए आप बोले जिनके लिए रोते हैं ज्यादा प्रॉमिस किए हुए जो एक कुछ अच्छे लगते हो वह तो ठीक लॉगइन करना अवसर का काम होता है मेरे आंसू आ जाते हैं कुछ लोग जो 20 साल 25 साल की सर्विस कर चुके थे दोनों आपस में संबंध रखते हुए काम को अंजाम देने की पत्ता गोभी MP3

agar aap dikh jaaye kis channel par aate hain aapko hamesha logo ko ko kamaan kamaan kar rahe hote hain shuru se hi bataya jata hai aur unko chai p ke bare mein chai kisi ka company office in jo hote hain jo kisi diye aap bole jinke liye rote hain zyada promise kiye hue jo ek kuch acche lagte ho vaah toh theek login karna avsar ka kaam hota hai mere aasu aa jaate hain kuch log jo 20 saal 25 saal ki service kar chuke the dono aapas mein sambandh rakhte hue kaam ko anjaam dene ki patta gobhi MP3

अगर आप दिख जाए किस चैनल पर आते हैं आपको हमेशा लोगों को को कमान कमान कर रहे होते हैं शुरू स

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यदि भारत की बात किया जाए तो एक्सेस अधिकारी के रूप में अपना एहसास वह भी जब उन लोगों की सम कमान संभालने हैं जो हमसे उम्र में बड़े हैं सबसे बड़ी चीज है भारत में बहुत चीजें समाज बहुत किस्म की अनगिनत कह रहे थे कि हम किस समाज से हमें बचपन से क्या परवरिश मिला है कि सबसे ज्यादा मायने रखता है यदि हम ऐसे समाज में पले बढ़े हैं जहां भाषा की कोई समस्या है जिससे कि दिल्ली हरियाणा दिल्ली के क्षेत्र को लिया जाए कोई समस्या नहीं क्योंकि अधिकारी की सबसे बड़ी समस्या भाषा की लेकिन यदि हम अपने बिहार झारखंड की बात करें बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि दिल्ली क्षेत्र का जो परवरिश है उसमें सम्मान का नाम जिन भाषा में कोई सम्मान नहीं जैसे बच्चे बड़ों को बोलते हैं वैसे ही बड़े बच्चों को बोलते हैं क्या फर्क पड़ता है उनको तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता लेकिन जो बिहार झारखंड बंगाल यह सब जो आसपास के क्षेत्र वहां जल्दी अच्छे समाज से हैं आप बहुत अनफिट महसूस करना पड़ता है क्योंकि आप यहां भाषा का बांड बच्चे बड़ों से बात करने का तरीका अलग है और बड़ों का बच्चे से बात करने का तरीका यहां के लोगों को समस्या होगी

yadi bharat ki baat kiya jaaye toh access adhikari ke roop mein apna ehsaas vaah bhi jab un logo ki some kamaan sambhalne hain jo humse umr mein bade hain sabse badi cheez hai bharat mein bahut cheezen samaj bahut kism ki anaginat keh rahe the ki hum kis samaj se hamein bachpan se kya parvarish mila hai ki sabse zyada maayne rakhta hai yadi hum aise samaj mein PALAY badhe hain jaha bhasha ki koi samasya hai jisse ki delhi haryana delhi ke kshetra ko liya jaaye koi samasya nahi kyonki adhikari ki sabse badi samasya bhasha ki lekin yadi hum apne bihar jharkhand ki baat kare bahut badi samasya hai kyonki delhi kshetra ka jo parvarish hai usme sammaan ka naam jin bhasha mein koi sammaan nahi jaise bacche badon ko bolte hain waise hi bade baccho ko bolte kya fark padta hai unko toh kuch bhi accha nahi lagta lekin jo bihar jharkhand bengal yah sab jo aaspass ke kshetra wahan jaldi acche samaj se hain aap bahut unfit mehsus karna padta hai kyonki aap yahan bhasha ka bond bacche badon se baat karne ka tarika alag hai aur badon ka bacche se baat karne ka tarika yahan ke logo ko samasya hogi

यदि भारत की बात किया जाए तो एक्सेस अधिकारी के रूप में अपना एहसास वह भी जब उन लोगों की स

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Deepak Kumar

Business Owner

3:16
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एक सशस्त्र अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आपको उन लोगों के कमान संभालने होंगे जो आप से बड़े हैं तो हां हम यह कह सकते हैं कि जब हम किसी पद पर ऊंचे पद पर या अधिकारी पद पर कार्यरत रहते हैं तो जो हमसे बड़े लोग हैं उनकी इज्जत करते हैं उनके सम्मान करते हैं उनकी आज्ञा का पालन करते हैं जिसके लिंग पर ध्यान देते हैं उनकी उनकी बातों को किया नहीं करते हैं उनकी जी जो आदेश होती है उनको समय के अनुसार कर देते हैं तो हमें ऐसा ही महसूस होता है कि उनकी आज्ञा का जो हम पालन सही समय पर करता है और जो भी चीज हो गेहूं का पालन करेंगे और हमारे अंदर क्या महसूस होता है कि हम भी हम भी यह ग्रह अधिकारी हैं लेकिन अधिकारी तो है ही लेकिन हम से जो बड़े अधिकारी हैं उनके सम्मान से करना हमें उचित लगता है और यह महसूस होता है कि वह पूज्य हैं हमसे बड़े हैं जिस प्रकार से घर के सदस्य को हम इज्जत करते हैं अपने से बड़े लोग याद करते हैं घर का माहौल जिस तरह से होता है बनाए रखे हैं रखते हैं उसी के अनुसार हमने अगले बड़े अधिकारी के सामने भी हम उसी तरह का यह करते हैं हम उसी तरह से अपना स्वभाव दिखाऊं करते हैं जैसा कि करना चाहिए क्योंकि जब हम घर में अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करते हैं बड़े भाई बहनों का पालन करते हैं तो उसी प्रकार जो हमसे बड़े हैं विभाग के अधिकारी हैं उनका भी सम्मान करते हैं यह कहने की बात नहीं है क्योंकि हम खुद महसूस करते हैं जिस माहौल में हम जीते हैं जिस माहौल में जीते हैं और जिस जिस वातावरण में रहते हैं जिस समाज में रहते हैं वह सब सारी चीजें को अग्रेषित करता है जिससे हमारे लिए प्रेरणा बनी रहती है दूसरों के प्रति कैसे रहना चाहिए क्या होना चाहिए सारी चीजें महसूस होती हैं हम उसी प्रकार से बीजेपी और करते हैं जिस प्रकार से हमें करना चाहिए जैसे घर पर हम अपनी बेटी बोलचाल पहचान और आज्ञा का पालन करते हैं ठीक उसी प्रकार से हम उनकी की आज्ञा का पालन करते हैं ऐसा मसूदा लगता है किसी की बात का बुरा नहीं मानते हैं अपने से बड़े लोगों की इज्जत करते हैं ऐसा हमको महसूस होता है और हम उसी प्रकार करते हैं उसी तरह से उनका सम्मान करते हैं

ek sashastra adhikari ke roop me aapko kaisa mehsus hota hai jab aapko un logo ke kamaan sambhalne honge jo aap se bade hain toh haan hum yah keh sakte hain ki jab hum kisi pad par unche pad par ya adhikari pad par karyarat rehte hain toh jo humse bade log hain unki izzat karte hain unke sammaan karte hain unki aagya ka palan karte hain jiske ling par dhyan dete hain unki unki baaton ko kiya nahi karte hain unki ji jo aadesh hoti hai unko samay ke anusaar kar dete hain toh hamein aisa hi mehsus hota hai ki unki aagya ka jo hum palan sahi samay par karta hai aur jo bhi cheez ho gehun ka palan karenge aur hamare andar kya mehsus hota hai ki hum bhi hum bhi yah grah adhikari hain lekin adhikari toh hai hi lekin hum se jo bade adhikari hain unke sammaan se karna hamein uchit lagta hai aur yah mehsus hota hai ki vaah PUJYA hain humse bade hain jis prakar se ghar ke sadasya ko hum izzat karte hain apne se bade log yaad karte hain ghar ka maahaul jis tarah se hota hai banaye rakhe hain rakhte hain usi ke anusaar humne agle bade adhikari ke saamne bhi hum usi tarah ka yah karte hain hum usi tarah se apna swabhav dikhaun karte hain jaisa ki karna chahiye kyonki jab hum ghar me apne mata pita ki aagya ka palan karte hain bade bhai bahnon ka palan karte hain toh usi prakar jo humse bade hain vibhag ke adhikari hain unka bhi sammaan karte hain yah kehne ki baat nahi hai kyonki hum khud mehsus karte hain jis maahaul me hum jeete hain jis maahaul me jeete hain aur jis jis vatavaran me rehte hain jis samaj me rehte hain vaah sab saari cheezen ko agreshit karta hai jisse hamare liye prerna bani rehti hai dusro ke prati kaise rehna chahiye kya hona chahiye saari cheezen mehsus hoti hain hum usi prakar se bjp aur karte hain jis prakar se hamein karna chahiye jaise ghar par hum apni beti bolchal pehchaan aur aagya ka palan karte hain theek usi prakar se hum unki ki aagya ka palan karte hain aisa masuda lagta hai kisi ki baat ka bura nahi maante hain apne se bade logo ki izzat karte hain aisa hamko mehsus hota hai aur hum usi prakar karte hain usi tarah se unka sammaan karte hain

एक सशस्त्र अधिकारी के रूप में आपको कैसा महसूस होता है जब आपको उन लोगों के कमान संभालने हों

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक सशक्त अधिकारी के रूप में अच्छा फील होता है मुझे अपने से बड़ी उम्र के लोगों के साथ काम करने में उनका तजुर्बा उनका अनुभव लेकर आगे के रास्ते के लिए एक अच्छा मार्गदर्शन मिलता है

ek sashakt adhikari ke roop mein accha feel hota hai mujhe apne se badi umr ke logo ke saath kaam karne mein unka tajurba unka anubhav lekar aage ke raste ke liye ek accha margdarshan milta hai

एक सशक्त अधिकारी के रूप में अच्छा फील होता है मुझे अपने से बड़ी उम्र के लोगों के साथ काम क

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