जस्टिस एसए बोबडे ने सुप्रीम कोर्ट के 47वें मुख्‍य न्‍यायाधीश के तौर पर शपथ ले ली है। क्या बदलाव आएँगे अब सुप्रीम कोर्ट के तंत्र में?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

3:53

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जस्टिस एसके मुंबई सरल मोदी का जन्म 1956 में हुआ और हमने 18 नवंबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट की शपथ रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति जी ने दिलवाई है यह 47a सुप्रीम कोर्ट के जज बने उन्होंने ba.llb नागपुर यूनिवर्सिटी से किया उनके दो-दो कार्य है मोंटी रोल ऑफ बार काउंसिल महाराष्ट्र में सीनियर एडवोकेट काम करते 2000 में हाई कोर्ट के सिविल जज बने 2012 में चीफ जस्टिस ऑफ एमपी के रूप में शपथ ली थी 2013 में एलिवेशन हुए थे सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में 2017 में सुप्रीम कोर्ट में 292 की जॉब पैनल होती है उसमें शामिल हुए थे अब 2019 में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट के जज के अप्रैल 2023 में रिटायर होंगे सीबीआई रिपोर्ट सारे देशों ने जजमेंट अपना समय आधार कार्ड से लगता था आपको भी इसमें सम्मिलित केस केस जजमेंट अयोध्या के केस में भी डिपार्टमेंट के पैनल में शामिल थे निकालो जजमेंट को अयोध्या के राम मंदिर स्टेटस ट्रेन की बहुत लंबा के लिए कहा है कविता लिखें तो रोटी ज्यादा वक्तव्य देते हैं जो भी अपना जजमेंट देते हैं बहुत ही सच्चे सच्चे हटा देते थे जजमेंट होते हैं इसलिए जब यह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ले लिया हम सुप्रीम कोर्ट से रंजन यह भी अपना कार्य कर अच्छी तरह से पूरा करेंगे क्योंकि कल अंकित एकदम इनका जीवन है और बजट में सच्चे रहें और ऐसे ही जजों की वजह से हमारी सुप्रीम कोर्ट एकदम प्रभावी ढंग से और सफाई शब्दों के आधार पर अपना फैसला सुना की बधाई देते सिंचाई के रूप में ऑटो की आशा के नेता से पूरा भारत की ओर देख रहा है थैंक यू

justice iske mumbai saral modi ka janam 1956 mein hua aur humne 18 november ko chief justice of india supreme court ki shapath ramnath kovind rashtrapati ji ne dilvai hai yah 47a supreme court ke judge bane unhone ba llb nagpur university se kiya unke do do karya hai monti roll of baar council maharashtra mein senior advocate kaam karte 2000 mein high court ke civil judge bane 2012 mein chief justice of mp ke roop mein shapath li thi 2013 mein elevation hue the supreme court ke judge ke roop mein 2017 mein supreme court mein 292 ki job panel hoti hai usme shaamil hue the ab 2019 mein chief justice of india supreme court ke judge ke april 2023 mein retire honge cbi report saare deshon ne judgement apna samay aadhaar card se lagta tha aapko bhi isme sammilit case case judgement ayodhya ke case mein bhi department ke panel mein shaamil the nikalo judgement ko ayodhya ke ram mandir status train ki bahut lamba ke liye kaha hai kavita likhen toh roti zyada vaktavya dete hain jo bhi apna judgement dete hain bahut hi sacche sacche hata dete the judgement hote hain isliye jab yah supreme court ke chief justice ke roop mein shapath le liya hum supreme court se ranjan yah bhi apna karya kar achi tarah se pura karenge kyonki kal ankit ekdam inka jeevan hai aur budget mein sacche rahein aur aise hi judgon ki wajah se hamari supreme court ekdam prabhavi dhang se aur safaai shabdon ke aadhaar par apna faisla suna ki badhai dete sinchai ke roop mein auto ki asha ke neta se pura bharat ki aur dekh raha hai thank you

जस्टिस एसके मुंबई सरल मोदी का जन्म 1956 में हुआ और हमने 18 नवंबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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हाथी का जस्टिस के एस ई बोर्ड सुप्रीम 45 वे मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली है क्या मतलब सुप्रीम कोर्ट आरक्षण जाएं इस संस्था का बिल्कुल न्यायिक निर्णय किसी के दबाव में ऑपरेशन में नहीं होना चाहिए लेकिन अभी देखा गया है कि कुछ नहीं जो है बहुत ज्यादा दबाव में दिए गए और उन निर्णयों को जो काफी वर्षों सेट किए हुए थे इंटरनेट से अप्रत्यक्ष रूप से दमाम में दिए गए जबकि 90 जने गलत नहीं थी और उनको हटाना भी ठीक नहीं था लेकिन एचएचएमएम जाए जिसका फायदा सरकारी संस्थाओं में उठाने का भरपूर प्रयास किया लेकिन न्यायालय को इस बात को स्पष्ट कर देना चाहिए कि न्यायालय द्वारा दिए गए कोई भी फैसले कोई भी चेक आ गया संख्या इसे अपनी सफलता का आधार ना बनाएं अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले के स्टार्ट निर्देश दिए जाएं जनमानस के लिए तो सिर्फ बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जाएगा और बहुत से लोग भटकने गिरा से बच जाएंगे तो निश्चित रूप से कोर्ट में काफी बदलाव आए परिवर्तन है अन्यथा के दिन कुछ अच्छे परिवर्तन देखने को मिलेंगे

haathi ka justice ke s ee board supreme 45 ve mukhya nyayadhish ke taur par shapath li hai kya matlab supreme court aarakshan jaye is sanstha ka bilkul nyayik nirnay kisi ke dabaav mein operation mein nahi hona chahiye lekin abhi dekha gaya hai ki kuch nahi jo hai bahut zyada dabaav mein diye gaye aur un nirnayon ko jo kaafi varshon set kiye hue the internet se apratyaksh roop se damam mein diye gaye jabki 90 jane galat nahi thi aur unko hatana bhi theek nahi tha lekin HHMM jaaye jiska fayda sarkari sasthaon mein uthane ka bharpur prayas kiya lekin nyayalaya ko is baat ko spasht kar dena chahiye ki nyayalaya dwara diye gaye koi bhi faisle koi bhi check aa gaya sankhya ise apni safalta ka aadhar na banaye agar supreme court highcourt ke faisle ke start nirdesh diye jaye janmanas ke liye toh sirf bahut si samasyaon ka samadhan ho jaega aur bahut se log bhatakne gira se bach jaenge toh nishchit roop se court mein kaafi badlav aaye parivartan hai anyatha ke din kuch acche parivartan dekhne ko milenge

हाथी का जस्टिस के एस ई बोर्ड सुप्रीम 45 वे मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली है क्या मतलब स

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भाई मुझे नहीं लगता कि कोई विशेष बदलाव आएगा क्योंकि वह बिस्तर भी उन्हीं न्यायाधीशों में थे जिन्होंने अभी हाल फिलाल फैसले दिए हैं शामिल थे तो ऐसा नहीं लगता कि कुछ विशेष बदलाव आएगा फिलहाल जो साल 2 साल से हो रहा था तकरीबन उसी प्रकार के निर्णय दिए जाएंगे उसी प्रकार से फैसले लिए जाएंगे

bhai mujhe nahi lagta ki koi vishesh badlav aayega kyonki vaah bistar bhi unhi nyaydhisho mein the jinhone abhi haal filal faisle diye hain shaamil the toh aisa nahi lagta ki kuch vishesh badlav aayega filhal jo saal 2 saal se ho raha tha takareeban usi prakar ke nirnay diye jaenge usi prakar se faisle liye jaenge

भाई मुझे नहीं लगता कि कोई विशेष बदलाव आएगा क्योंकि वह बिस्तर भी उन्हीं न्यायाधीशों में थे

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