जल्दी जीनियस बनने का सबसे श्रेष्ठ और सबसे आसान तरीका बताएँ?...


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J.P. Y👌g i

Psychologist

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प्रश्न आया है कि जल्दी जीनस बनने का सबसे श्रेष्ठ और आसान तरीका बताएं जिनेश का मतलब एक बहुत ही उत्तम किस्म का बुद्धिजीवी वर्ग बुद्धि जीविता बुद्धिमत्ता तो जीनियस बनने का सबसे बड़ा है एक ही चीज है कि अपने आपको पहले शांति अतीत और सुन न करें क्योंकि योग से चित्त वृत्ति निरोध से कहा गया है क्योंकि योग करने से चित्त वृत्तियों का निरोध हो जाता है अर्थात वह चित्र विज्ञान जो हमारे को महसूस कराती है और भावनाओं में अरुण कर आते हैं और हमारे को प्रतिपादन करती हमारे अवधारणाओं के कि ऐसा ही है ऐसा मान बैठते हैं चाई हो सकता नहीं यह सब तो तुझे बुद्धि की जो प्रतीक्षा पत्तियां होती है यह हमें किसी न किसी रूप से गठित कर दे और हम ऐसे अपने आपको स्वरूप में मान करके दुकान डालते हैं कि हमारी इतनी ही वृद्धि और इतना ही हमारे अंदर से तो यह सब विकल्प संभावना जिनके पास नहीं उत्पन्न हो रहा है तो वह ऐसा महसूस करते हैं और अपने स्टोरी करण अमरुद मुड़ता के ऊपर अपने आप को स्थापित करते हैं विश्वास करते हैं लेकिन योगश्चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ यही है ताकि आप जमीन विरोधियों को रोक देंगे मतलब जो आपके अंदर नकारात्मक वृत्तियों आ रही हैं तो सूरत के अंदर स्वता ही हमारे अंतरण के अंदर संपूर्ण ज्ञान विधि की व्यवस्था है और जिस विधि में हम आगे निकलते हैं तो हमारा पुरस्कृत दिमाग होता चला जाता है तो आप अपने अंदर कॉन्फिडेंस लगा याद में विश्वास क्योंकि आत्मा का लक्षण सर्वगुण संपन्न है और वही उसी दशा में मस्ती प्रफुल्लित हो जाता है तो मस्ती के अंदर हो सक्रियता से हमारे सिद्धहस्त में काम करने लगता है और यह हमारे कुछ सुविधा मिलती है क्योंकि इतनी शार्प में सोचने की अवतार लक्षण जब मस्ती कसूर है वह बड़ी दिव्य है और वह इसी कारण होता है कि जब हम उस में बिल्कुल शांति से एकाग्रता चित्र से उसमें अपने आप को डालते हैं तो हमारे को ऐसी उपलब्धि मिलती और इतना विलक्षण काम होता है कि सेकंड की की काल की परिभाषा को विखंडित कर आ जाए तो इतनी सूक्ष्म दशा में कार्य हमारा संचारित दिमाग करता रहता है तो जब हम उसके अधिपति हो सकते हैं तो यानी उसको नियंत्रण में आपने वशीभूत कर के वहां पहुंच कर के अगर हम कोई रिलायंस करते हैं किसी भावनाओं करते हैं तो उस सत्ता ही प्रकट होने ओरिजिन एस बनने का दूसरी बात देव तक तो है देव मंडल है सरस्वती माता है शारदा जिसे बोलते हैं विद्या की बहुत ही दिव्य विभूति माता है जो हमारे अंदर मेगा प्रज्ञा समिति ध्यान धारणा और तैयारी जो हमारे अंदर व्यतिकरण की शक्ति है वह उसको आंदोलित करती है और सहज रूप से आगे प्रकट करती है तो हमारे को भी दिमाग की खुल जाते हैं और इसमें सबसे बड़ी बातें की जा ब्रह्मचारी रूप से अगर नियंत्रित रखें तो हमारा उद्धृत वीर्य जी बहुत ही उत्तम कार्य करता है क्योंकि जो मांगता जब हम बाहर मुखी में संश्लिष्ट कर देते हैं तो हमारा व्यवहार जो कर्म है वह उसी मंडल में है उसी क्षेत्र में होने लगता है तो जगह हम और उसी दशा में जाएंगे इतनी हमारे दर्शक क्षमता दशा आएगी उतने हमारे अंदर एडवांस आएगी दूसरी बात की सूझबूझ और जो समझ की शक्ति है वह मेघा बहुत ही त्रिविता से काम करने लगेगी तो सब से यही है कि भावनाओं में कि अपने आपको यह सब छोड़ दे मानना कि मैं किसी तरह से पीछे हाथ में कॉन्फिडेंस पड़ा कि मेरे अंदर सब कुछ ईश्वर ने दे रखा है और उसके माध्यम से मैं आगे सुचारु रुप से करूंगा आधारभूत कल्याण की पृष्ठभूमि होती है अगर हम सोचते हैं कि हमारे द्वारा कुछ कल्याण हो सकता है और उसमें हमारा दिमाग को वर्कर रखा सब्जेक्ट इन के अंदर तो परिष्कृत होता चला जाएगा तो वह अपना क्षेत्र मंडल अपने आप ही विधि निर्माण कर लेगा तो उसमें ही वह अनुरक्त रहेगा तो वह उसकी पोजीशन बन जाएगी वह उसकी यूनिफार्म बनेगी तो उसी में ही अपने आप को जितना विकसित कर सकता है इंसान कर सकता है उसमें कोई रुकावट नहीं होगी बशर्ते यही है कि अपने आप को मानव ठान के आगे बढ़ते रहना चाहिए और हरगुन आपके अंदर है और आप स्वयं से अपने अंदर से ही जागृति जब डालने की प्रक्रिया को समझ पाए स्कूल संचालित करने लगेंगे तो स्वता ही आपको महसूस होने लग जाता है कि वाक्य में मेरे अंदर एक प्रेस की और उत्कर्ष की भावना आंदोलित हो रही सारी चीजें हैं कि अपने आप एक इच्छा मात्र के पॉइंट पर एक क्लिक होता है जैसे अपने आप सारा वर्क करने लगता है इसी तरह होता है तो यह सब सारी चीजें हैं बहुत सारी चीजें आशीर्वाद के रूप में मंत्र के रूप में स्थित देवता के दिव्य गुणों के स्वरूप में अगर हम आपको अपने आप को नियोजित करते चले जाते हैं तो हमारा दिव्य मंडल प्रकट होने पड़ता है और वह मस्तिक संचालित होने लगता है उस कार्य के लिए तो उसमें आनंद और कल्याण युक्ति और अपने आप को किसी न किसी आदर्श में किसी को लाना चाहिए अपनी लाइफ के अंदर और उस उसको जोड़ करके रखना चाहिए तो वही कन्वर्ट होता चला जाएगा तो विकास के लिए ही मनुष्य का जीवन मिला है और यह वृद्धि बुद्धि हमेशा अनुकरण करती रहती है तो हम जैसा अपने आप को समझना और बनाना चाहेंगे उसकी स्मृति में हमेशा रहेंगे चिंतन मन में तो वह सत्य ही एडवांस होती चली जाएगी और वहां फूड्स करेगी तो वह मंडल वह केंद्र चक ऊर्जा से जागृत होगी और जैसे ही जागृत होती जाएगी और अभ्यास जितना बढ़ता जाएगा उतना ही कुशलता आती चली जाएगी तो यही मेरा कहने का तात्पर्य है शायद अगर इन बातों से आपको कुछ नया विकल्प संभावना है जागे और आप में विश्वास बढ़े मेरी यही अपेक्षा है धन्यवाद आपको शुभकामनाएं कल्याण दायक हो

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