जहां तक हम जानते हैं कि ज़िंदगी एक इन्जॉय है ज़िंदगी में इंजॉय सब कुछ है तो हमारे समाज में किसी के साथ चाहे वह बहन हो चाहे कोई भी रिश्तेदार हो चाहे कोई भी आस पड़ोस क्यों उसके साथ सेक्स करना क्यों गुनाह है क्यों हमारा समाज सेक्स करने वाले को गन्दी नजर से देखते हैं?...


user

Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

4:08
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भाई समय से हैं पहली बात तो आपने जहां से भी इंफॉर्मेशन लिया है ना वह बिल्कुल गलत है जिंदगी है जो हमें नहीं है किसने आपको बोल दिया हां जिंदगी आप एंजॉय कीजिए लेकिन एंजॉय करने के लिए भी एक तरीका होता है एंजॉय करने के लिए भी कुछ शिष्टाचार होते हैं प्रकृति के कुछ नियम होते हैं समाज के कुछ नियम होते हैं कुछ सस्ता का अचार होते कुछ संस्कार होते हैं कुछ लिखित में होते हैं कहे सुने होते हैं कोई नहीं जाने हुए भी प्रकृति हमको बताती है कि यह सही है या गलत है तो हमारा चरण उसी तरीके का होना चाहिए जो आप बोल रहे हैं कि हम किसी के साथ भी सेक्स करने इंजॉय करने यह कर ले वह कर ले तो यह तो एनिमल जानवर वाली प्रवृत्ति हो गई ना तो मतलब आप क्या अपने आप को जानवर से या उससे भी बदतर समझते हैं क्या आप इंसान रूप में अपने आप को इस तरीके से देखते हैं क्या क्या हर इंसान को इसी तरीके से देखना चाहिए क्या तो सोचिए वह घर या वह जॉइंट फैमिली है और सब इसी तरीके से सोचने लगे और रहने लगे तो उस परिवार का क्या होगा वह परिवार एक एक जंगल में रहने वाले जानवरों के समूह से बदतर भी नहीं होगा सोच कर देखिए आप क्या बोल रहे हैं अगर आप एक इंसान ऐसा सोच रहा है तो चलिए कोई फर्क नहीं पड़ता अगर पूरी सृष्टि के लिए तो हमारा पूरा प्लेनेट 7 बिलियन लोग अगर यही सोचकर आप ही की तरह और ऐसी रहने लगे तो क्या होगा इससे पृथ्वी का जब हम देखते हैं कि जब सिग्नल रेड होता है ट्रैफिक लाइट रेड होता है हम खड़े होते हैं और एक इंसान चले जाते तो चलो कोई बात नहीं उसको पार करके चला गया कोई बात नहीं लेकिन अगर रेड है और सब चारों दिशा से गिर क्रॉस करके जाने लगे उस सिग्नल को तो क्या होगा गाड़ी रुकेगी क्यों फंसेगी की टक्कर होगी गुस्सा आएगा क्या होगा सब कुछ होगा तो आप किसकी बात कर रहे हैं आप कहां से इंफॉर्मेशन लेकर आते हैं हाथ बहन को भी उसी नजर से देखना चाहते हैं आप माता को भी उसी नजर से देखेंगे मतलब आप अपनी मां बहन माता लड़की किसी को भी किसी नजर से देखेंगे कुछ भी करेंगे अपने कॉमेंट के लिए यह तो एनिमलिस्टिक भी रहोगे ना जानवर ऐसा सोचे तो समझ आता है या करे तो समझ आता है यह यह जंगल में हो तो चलो समझ आता है लेकिन हम इंसान जिसको इतनी इतनी मुश्किलों के बाद आदमी अच्छे कर्म करने के बाद जब भी मानव जीवन मिला है तो हमें इस तरीके की प्रवृत्ति सोच आचरण कभी नहीं रखना चाहिए नियत नहीं होनी चाहिए बल्कि सोचते हुए भी हमें एक का हिस्सा लेना शुरू किए तो ख्यालों में भी नहीं आना चाहिए तो आप देखिए एक बार दूध दोबारा से अपने आप को खाया था खाना लीजिए सोच लीजिए कि आप क्या सोच रहे हैं क्या बात कर रहे हैं कौन यह बात करते हैं आप 10 लोगों से इसी सवाल का जवाब जान लीजिए फिर आपको पता चल जाएगा कि भैया सच्चाई क्या है और आप किस दुनिया में रहते हैं आप कहां से आते हैं आपके दिमाग में क्या चल रहा है इसको साफ करना बहुत जरूरी है क्योंकि इसको नहीं करेंगे तो फिर यह बीमारी के रूप में धारण हो जाएगी जो कि सही नहीं रहेगी अगर यह अगर आप सोच रहे हैं तो चलो कोई बात नहीं एक इंसान सोचा चलो वह उसका निजी मत है लेकिन अगर इसी तरीके से सोचने लगे हो रहने लगे तो कितना मुश्किल हो जाएगा जीवन इस पृथ्वी पर हम जानवर से कम ही रहेंगे हमें तो यह जीवन भगवान ने इतने अच्छे कर्म करने के बाद दिया है हमें तो यह देखना है कि ऐसा शरीर रूप में रहने के साथ-साथ मैं अपने हायर को टेंशन को कैसे यूज करूं मैं वह कैसे पाऊं जो कि संभव है ऐसा मानव शरीर में रहने पर जब मेरे पास सोच है बुद्धि विवेक है मेरी नियत है सब कुछ मेरे हाथ में है मेरी भावनाएं हैं और सबसे बड़ा मेरा कर्म जब यह सारी है मेरे पास तो मैं उसका सदुपयोग करूंगा ना ना कि मैं दुरुपयोग करूं सोच कर देखेगा

bhai samay se hain pehli baat toh aapne jaha se bhi information liya hai na vaah bilkul galat hai zindagi hai jo hamein nahi hai kisne aapko bol diya haan zindagi aap enjoy kijiye lekin enjoy karne ke liye bhi ek tarika hota hai enjoy karne ke liye bhi kuch shishtachar hote hain prakriti ke kuch niyam hote hain samaj ke kuch niyam hote hain kuch sasta ka achaar hote kuch sanskar hote hain kuch likhit mein hote hain kahe sune hote hain koi nahi jaane hue bhi prakriti hamko batati hai ki yah sahi hai ya galat hai toh hamara charan usi tarike ka hona chahiye jo aap bol rahe hain ki hum kisi ke saath bhi sex karne enjoy karne yah kar le vaah kar le toh yah toh animal janwar wali pravritti ho gayi na toh matlab aap kya apne aap ko janwar se ya usse bhi badataar samajhte kya aap insaan roop mein apne aap ko is tarike se dekhte kya kya har insaan ko isi tarike se dekhna chahiye kya toh sochiye vaah ghar ya vaah joint family hai aur sab isi tarike se sochne lage aur rehne lage toh us parivar ka kya hoga vaah parivar ek ek jungle mein rehne waale jaanvaro ke samuh se badataar bhi nahi hoga soch kar dekhiye aap kya bol rahe hain agar aap ek insaan aisa soch raha hai toh chaliye koi fark nahi padta agar puri shrishti ke liye toh hamara pura planet 7 billion log agar yahi sochkar aap hi ki tarah aur aisi rehne lage toh kya hoga isse prithvi ka jab hum dekhte hain ki jab signal red hota hai traffic light red hota hai hum khade hote hain aur ek insaan chale jaate toh chalo koi baat nahi usko par karke chala gaya koi baat nahi lekin agar red hai aur sab charo disha se gir cross karke jaane lage us signal ko toh kya hoga gaadi rukegi kyon fansegi ki takkar hogi gussa aayega kya hoga sab kuch hoga toh aap kiski baat kar rahe hain aap kahaan se information lekar aate hain hath behen ko bhi usi nazar se dekhna chahte hain aap mata ko bhi usi nazar se dekhenge matlab aap apni maa behen mata ladki kisi ko bhi kisi nazar se dekhenge kuch bhi karenge apne comment ke liye yah toh enimlistik bhi rahoge na janwar aisa soche toh samajh aata hai ya kare toh samajh aata hai yah yah jungle mein ho toh chalo samajh aata hai lekin hum insaan jisko itni itni mushkilon ke baad aadmi acche karm karne ke baad jab bhi manav jeevan mila hai toh hamein is tarike ki pravritti soch aacharan kabhi nahi rakhna chahiye niyat nahi honi chahiye balki sochte hue bhi hamein ek ka hissa lena shuru kiye toh khyalon mein bhi nahi aana chahiye toh aap dekhiye ek baar doodh dobara se apne aap ko khaya tha khana lijiye soch lijiye ki aap kya soch rahe kya baat kar rahe hain kaun yah baat karte hain aap 10 logo se isi sawaal ka jawab jaan lijiye phir aapko pata chal jaega ki bhaiya sacchai kya hai aur aap kis duniya mein rehte hain aap kahaan se aate hain aapke dimag mein kya chal raha hai isko saaf karna bahut zaroori hai kyonki isko nahi karenge toh phir yah bimari ke roop mein dharan ho jayegi jo ki sahi nahi rahegi agar yah agar aap soch rahe hain toh chalo koi baat nahi ek insaan socha chalo vaah uska niji mat hai lekin agar isi tarike se sochne lage ho rehne lage toh kitna mushkil ho jaega jeevan is prithvi par hum janwar se kam hi rahenge hamein toh yah jeevan bhagwan ne itne acche karm karne ke baad diya hai hamein toh yah dekhna hai ki aisa sharir roop mein rehne ke saath saath main apne hire ko tension ko kaise use karu main vaah kaise paun jo ki sambhav hai aisa manav sharir mein rehne par jab mere paas soch hai buddhi vivek hai meri niyat hai sab kuch mere hath mein hai meri bhaavnaye hain aur sabse bada mera karm jab yah saree hai mere paas toh main uska sadupyog karunga na na ki main durupyog karu soch kar dekhega

भाई समय से हैं पहली बात तो आपने जहां से भी इंफॉर्मेशन लिया है ना वह बिल्कुल गलत है जिंदगी

Romanized Version
Likes  564  Dislikes    views  8032
KooApp_icon
WhatsApp_icon
3 जवाब
no img
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!