लोग क्यों मर जाते हैं?...


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Karan Janwa

Automobile Engineer

0:56
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी जब किसी शरीर के अंदर प्राण होते हैं उसी को हम जीवित करते हैं वह जब शरीर से प्राण निकल जाते हैं उस अवस्था को मृत अवस्था कहते हैं तो चांडिकन के बहुत से कारण होते हैं जब हमारी क्वेश्चन पूरी हो जाती है शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्राण ऊर्जा नहीं मिलती है उसे प्राण निकल जाता है और कभी कभी हकीकत नहीं होती तो उसे बंद हो जाती है और बहुत तेजी से एक्सीडेंट होने की वजह से शरीर से बचा ब्लड निकल जाता है खून निकल जाता है इस वजह से भी शरीर के लिए हो जाती तो जाने का प्रमुख कारण शरीर से प्राण निकलना है निकलने के कारण हो सकते हैं धन्यवाद

dekhi jab kisi sharir ke andar praan hote hain usi ko hum jeevit karte hain vaah jab sharir se praan nikal jaate hain us avastha ko mrit avastha kehte hain toh chandikan ke bahut se karan hote hain jab hamari question puri ho jaati hai sharir ko paryapt matra mein praan urja nahi milti hai use praan nikal jata hai aur kabhi kabhi haqiqat nahi hoti toh use band ho jaati hai aur bahut teji se accident hone ki wajah se sharir se bacha blood nikal jata hai khoon nikal jata hai is wajah se bhi sharir ke liye ho jaati toh jaane ka pramukh karan sharir se praan nikalna hai nikalne ke karan ho sakte hain dhanyavad

देखी जब किसी शरीर के अंदर प्राण होते हैं उसी को हम जीवित करते हैं वह जब शरीर से प्राण निकल

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न ही लोग क्यों मर जाते हैं लोग मर जाते हैं जो लोग सुसाइड करते हैं अगर उनके पास एक सच्चा इंसान हो और उनका कॉन्फिडेंस लेवल सही है अगर वह साहस और हिम्मत से भरपूर है तो वह कभी नहीं मरेंगे सुसाइड करके बाकी जो नॉर्मल मर जाते हैं वह नेचुरल डेथ होती है और उसमें किसी का भी बस नहीं होता जी हां जैसे जीवन में किसी का बस नहीं होता कभी भी जन्म हो सकता है वैसे मृत्यु में भी किसी का बस नहीं होता नेचुरल डेथ नेचुरल ही होती और वह नीचे होती रहेगी चाहे कितने भी प्रयत्न करो लेकिन जो सुसाइड करता है उनको हम बचा सकते हैं अगर हमें पता चलता है तो हम बचा सकते उनको बहुत अच्छे तरीके से इसलिए तो बोलते कि सुसाइड मत करो एक नई लाइफ होती है जिंदगी खूबसूरत होती आगे बढ़ी है बस यही चीज होती है बाकी लोग क्यों मर जाते हैं और मर ही जाता है शुभ हो धन्यवाद गुड लक फॉर लाइफ टेक केयर

aapka prashna hi log kyon mar jaate hain log mar jaate hain jo log suicide karte hain agar unke paas ek saccha insaan ho aur unka confidence level sahi hai agar vaah saahas aur himmat se bharpur hai toh vaah kabhi nahi marenge suicide karke baki jo normal mar jaate hain vaah natural death hoti hai aur usme kisi ka bhi bus nahi hota ji haan jaise jeevan mein kisi ka bus nahi hota kabhi bhi janam ho sakta hai waise mrityu mein bhi kisi ka bus nahi hota natural death natural hi hoti aur vaah niche hoti rahegi chahen kitne bhi prayatn karo lekin jo suicide karta hai unko hum bacha sakte hain agar hamein pata chalta hai toh hum bacha sakte unko bahut acche tarike se isliye toh bolte ki suicide mat karo ek nayi life hoti hai zindagi khoobsurat hoti aage badhi hai bus yahi cheez hoti hai baki log kyon mar jaate hain aur mar hi jata hai shubha ho dhanyavad good luck for life take care

आपका प्रश्न ही लोग क्यों मर जाते हैं लोग मर जाते हैं जो लोग सुसाइड करते हैं अगर उनके पास ए

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:40
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोग मर जाते हैं जिसका जन्म है वह उसका मृत्यु निश्चित है इस तरह से जो शरीर में हमारा जन्म हुआ और हमने अपने माता के उधर से जन्म लिया वह हमारी मृत्यु की भी एक ना एक दिन होनी है उसे कोई टाल नहीं सका है चाहे वह धनवान होता है राजा हो या गम को कोई भी इंसान मृत्यु तो होना जरूरी है क्योंकि जब मिट्टी हो जाती है जब यह शरीर आत्मा के रहने लायक नहीं रहता है वृद्ध हो जाता है या उसका शरीर हो जाता है तो शरीर का व्यवस्था अपना एक के बाद जो फंक्शन है वह काम करना बंद कर देती है इस तरह से फिर बाद में उसमें से आत्मा निकल जाती है और हम मर जाते हैं फुल पेड़ होता है पेड़ में जो हरे पत्ते होते हैं तो पीले पड़ जाते हैं और अपने हाथी नीचे गिर जाते हैं कल जाते हैं इस तरह से अपने आप उसमें से अपना पेट निकलने का प्रयास करती है आदमी की मृत्यु होती है क्योंकि कोई नंबर नहीं है हमेशा जीवन चक्र इसी तरह से चलता है पुराने जो लोग हैं बड़े बुजुर्ग हैं वह अपना समय आने पर वह अपने आप ही उनके शरीर से आत्मा निकलती होता रहता है

log mar jaate hain jiska janam hai vaah uska mrityu nishchit hai is tarah se jo sharir mein hamara janam hua aur humne apne mata ke udhar se janam liya vaah hamari mrityu ki bhi ek na ek din honi hai use koi tal nahi saka hai chahen vaah dhanwan hota hai raja ho ya gum ko koi bhi insaan mrityu toh hona zaroori hai kyonki jab mitti ho jaati hai jab yah sharir aatma ke rehne layak nahi rehta hai vriddh ho jata hai ya uska sharir ho jata hai toh sharir ka vyavastha apna ek ke baad jo function hai vaah kaam karna band kar deti hai is tarah se phir baad mein usme se aatma nikal jaati hai aur hum mar jaate hain full ped hota hai ped mein jo hare patte hote hain toh peele pad jaate hain aur apne haathi niche gir jaate hain kal jaate hain is tarah se apne aap usme se apna pet nikalne ka prayas karti hai aadmi ki mrityu hoti hai kyonki koi number nahi hai hamesha jeevan chakra isi tarah se chalta hai purane jo log hain bade bujurg hain vaah apna samay aane par vaah apne aap hi unke sharir se aatma nikalti hota rehta hai

लोग मर जाते हैं जिसका जन्म है वह उसका मृत्यु निश्चित है इस तरह से जो शरीर में हमारा जन्म ह

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

3:04
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न हेलो क्यों मर जाते हैं लोग मरते नहीं है यह भाषा का भ्रम है यह भाषा का भ्रम है मरते नहीं है अपने घर चले जाते हैं जैसे कोई नौकरी में गया यानी उसकी नौकरी पैदा हुई और जब उसके रिटायरमेंट हुआ तो अपने घर चला गया तो यह कहा जाता है कि नौकरी में वह व्यक्ति मर गया क्या नौकरी मर गया अरे जब तक उसने नौकरी की तब तक अपने कार्यालय में रहा जब रिटायरमेंट हो गया 7 साल पूरे हो गए हो तो अपने घर चला गया अब इसको यह कहिए वह मर गया नौकरी से या कहिए घर चला गया केवल भाषा का भेद है मात्र इसी प्रकार आत्मा इस जगत में जब आती है अपनी लीला करने के लिए आनंद के लिए लीला करने के लिए तो पृथ्वी अग्नि जल पृथ्वी आकाश वायु पांचों तत्वों से हूं उधार लेती है उधार लेकर के पांच तत्व का शरीर निर्मित करती है निर्मित करने के बाद आत्मा उसमें प्रवेश करती है और जीवन भर लीला करती है लीला करने के पश्चात जब अग्नि जल वायु पृथ्वी आकाश की जो शक्तियां हैं धीरे-धीरे शरीर के अंदर जो सकती है यह चूर होने लगती है तो आत्मा दूसरे घर के अंदर प्रवेश करने के लिए धीरे-धीरे इसको छोड़ने की तैयारी करती है और जैसे-जैसे छोड़ने की तैयारी करती रहती है धीरे-धीरे इनकी जो शक्तियां है पृथ्वी जल अग्नि व अग्नि वायु आकाश पांच तत्वों को वापस करने का प्रयास करती है और धीरे-धीरे पांचों तत्व अपने-अपने स्थान पर वापस चले जाते हैं आत्मा निकल कर के दूसरे शरीर में या दूसरी योनि में प्रवेश के लिए फिर अगला मार्ग प्रशस्त कर लेती है यह केवल समाज का अंतर है जब तक शरीर तक महसूस करते हैं जब तक शरीर पर जी रहे हैं तब तो कहेंगे आदमी मर गया और जब आत्मा के तल पर कोई जीना शुरु करेगा तो कहेगी इस शरीर की यात्रा पूरी हुई अपने घर चला गया अब दूसरे शरीर में प्रवेश करेगा दूसरे घर में जाएगा शरीर मरता है आत्मा नहीं मानती अब आप किसी स्तर पर ही रहे हैं शरीर पर स्तर पर जी रहे हैं तो कहेंगे शरीर मर जाता है आदमी की स्तर पर ही रहे बुखार है अनुभव हो चुका है तो कहेंगे अब हम अपने असली घर जा रहे हैं इतना फर्क है समझ समझ का फर्क है मत

prashna hello kyon mar jaate hain log marte nahi hai yah bhasha ka bharam hai yah bhasha ka bharam hai marte nahi hai apne ghar chale jaate hain jaise koi naukri mein gaya yani uski naukri paida hui aur jab uske retirement hua toh apne ghar chala gaya toh yah kaha jata hai ki naukri mein vaah vyakti mar gaya kya naukri mar gaya are jab tak usne naukri ki tab tak apne karyalay mein raha jab retirement ho gaya 7 saal poore ho gaye ho toh apne ghar chala gaya ab isko yah kahiye vaah mar gaya naukri se ya kahiye ghar chala gaya keval bhasha ka bhed hai matra isi prakar aatma is jagat mein jab aati hai apni leela karne ke liye anand ke liye leela karne ke liye toh prithvi agni jal prithvi akash vayu panchon tatvon se hoon udhaar leti hai udhaar lekar ke paanch tatva ka sharir nirmit karti hai nirmit karne ke baad aatma usme pravesh karti hai aur jeevan bhar leela karti hai leela karne ke pashchat jab agni jal vayu prithvi akash ki jo shaktiyan hain dhire dhire sharir ke andar jo sakti hai yah chur hone lagti hai toh aatma dusre ghar ke andar pravesh karne ke liye dhire dhire isko chodne ki taiyari karti hai aur jaise jaise chodne ki taiyari karti rehti hai dhire dhire inki jo shaktiyan hai prithvi jal agni va agni vayu akash paanch tatvon ko wapas karne ka prayas karti hai aur dhire dhire panchon tatva apne apne sthan par wapas chale jaate hain aatma nikal kar ke dusre sharir mein ya dusri yoni mein pravesh ke liye phir agla marg prashast kar leti hai yah keval samaj ka antar hai jab tak sharir tak mehsus karte hain jab tak sharir par ji rahe hain tab toh kahenge aadmi mar gaya aur jab aatma ke tal par koi jeena shuru karega toh kahegi is sharir ki yatra puri hui apne ghar chala gaya ab dusre sharir mein pravesh karega dusre ghar mein jaega sharir marta hai aatma nahi maanati ab aap kisi sthar par hi rahe hain sharir par sthar par ji rahe hain toh kahenge sharir mar jata hai aadmi ki sthar par hi rahe bukhar hai anubhav ho chuka hai toh kahenge ab hum apne asli ghar ja rahe hain itna fark hai samajh samajh ka fark hai mat

प्रश्न हेलो क्यों मर जाते हैं लोग मरते नहीं है यह भाषा का भ्रम है यह भाषा का भ्रम है मरते

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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

0:23
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोग क्यों मर जाते हैं इसका जवाब है क्योंकि लोग जन्म लेते हैं जो जन्म लेगा उसका मरना निश्चित है जैसे आप सवाल पूछो कि रात क्यों होती है तो दिन होता है तो रात होती है यह चक्र है हर समय चलते रहता है जैसे दिन-रात चलते रहते हैं वैसे ही लोगों का मरना हो जी का भी चलते रहता है

log kyon mar jaate hain iska jawab hai kyonki log janam lete hain jo janam lega uska marna nishchit hai jaise aap sawaal pucho ki raat kyon hoti hai toh din hota hai toh raat hoti hai yah chakra hai har samay chalte rehta hai jaise din raat chalte rehte hain waise hi logo ka marna ho ji ka bhi chalte rehta hai

लोग क्यों मर जाते हैं इसका जवाब है क्योंकि लोग जन्म लेते हैं जो जन्म लेगा उसका मरना निश्चि

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

1:13
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सृष्टि का नियम जिससे यह प्रमाणित होता है कि इस संसार में कोई ऐसे व्यक्ति हैं जो समय के अनुसार कर्म के अनुसार चिकित्सक हर चीज के हालात के अनुसार निर्धारित करती है कि कौन सा व्यक्ति का व्यक्तित्व को प्राप्त करेगा तो कौन से जीव को सीजन में आना है उलझन है यह कभी बंद नहीं होने वाला कभी भी बंदा हजारों साल गुजर गए लेकिन कुछ नहीं डेवलपमेंट आ रही है ऑटोमेटिक ही ऑटो मोड पर है जो यह होना स्वाभाविक है वह होने देना चाहिए दिन है तो रात होना चाहिए सुख दुख होना चाहिए पिक्चर नहीं कर सकते हम चले जितना हो सके मानवता की सेवा यही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य कर्तव्य करते हुए

yah shrishti ka niyam jisse yah pramanit hota hai ki is sansar mein koi aise vyakti hain jo samay ke anusaar karm ke anusaar chikitsak har cheez ke haalaat ke anusaar nirdharit karti hai ki kaun sa vyakti ka vyaktitva ko prapt karega toh kaun se jeev ko season mein aana hai uljhan hai yah kabhi band nahi hone vala kabhi bhi banda hazaro saal gujar gaye lekin kuch nahi development aa rahi hai Automatic hi auto mode par hai jo yah hona swabhavik hai vaah hone dena chahiye din hai toh raat hona chahiye sukh dukh hona chahiye picture nahi kar sakte hum chale jitna ho sake manavta ki seva yahi hamara sabse bada kartavya kartavya karte hue

यह सृष्टि का नियम जिससे यह प्रमाणित होता है कि इस संसार में कोई ऐसे व्यक्ति हैं जो समय के

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

0:47
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखें वस्तु भी एक जीवनी है इंसान को अपना चोला बदलना पड़ता है इसलिए शरीर बदलते रहते हैं आत्मा की गति और समय आने पर सब को यह शरीर छोड़ता है जैसे किसान फसल उगाते हैं और समय आने पर से काट लेते हैं ऐसे ही जीवन बच्चों की फसल है जीवन मिलता है और समय आने पर मृत्यु जून को समेट लेती है और दूसरे जीवन में दोषी होली में डाल देती है यानी के हाथ मा चोला बदलती रहती है जिसे हम भक्त कहते हैं

dekhen vastu bhi ek jeevni hai insaan ko apna chola badalna padta hai isliye sharir badalte rehte hain aatma ki gati aur samay aane par sab ko yah sharir chodta hai jaise kisan fasal ugaate hain aur samay aane par se kaat lete hain aise hi jeevan baccho ki fasal hai jeevan milta hai aur samay aane par mrityu june ko samet leti hai aur dusre jeevan mein doshi holi mein daal deti hai yani ke hath ma chola badalti rehti hai jise hum bhakt kehte hain

देखें वस्तु भी एक जीवनी है इंसान को अपना चोला बदलना पड़ता है इसलिए शरीर बदलते रहते हैं आत्

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोग क्यों मर जाते हैं भाई यदि लोगों को मरना बंद हो जाए ओके जन्म का जन्म ही होते रहे एक में इतने अधिक शांत हो जाएगी कि हमारे लिए चलना खड़े रहना भी दुर्बल हो जाएगा शास्त्री नाम से खोला जाएगा अतः इस जेल में भगवान ने हमारे जीवन को जन्मदिवस मरण से भी जोड़ रखा है जो व्यक्ति इस पृथ्वी पर जन्म लेता है वह निश्चित है कि समृद्धि प्राप्त होती है और मृत्यु के प्राप्ति के दौरान हमें अनुभूति होती है कि हम सब कर्मों के साथ मर रहे हैं अध्ययन के मर रहे हैं यदि हम अपना फुर्सत कर्मों के साथ मृत्यु को प्राप्त करते हैं दे अनुभूति करते हैं तो निश्चित ही हमारे लिए भगवान पुनर्जन्म यह स्वर्ग का दरवाजा खोल लेता है धार्मिक ग्रुप में हमारे मृत्यु होती है या अधर में पर्वतीय कह रहे हैं हमने जीवन पर अधर में ही किए हैं तो निश्चित ही कि जब हम मरते हैं तो हमारे लिए भगवान उसके सजा पहले निर्मित कर लेते हैं और हमें अगले जन्म में मनुष्य दूसरे जन्म में नहीं भेजते हैं या मनीष ग्रुप में भेजते भेजते भेजते हैं जिससे हम जीना पसंद नहीं कर सकते हैं इससे लोगों का मरना और जीना ऊपर वाले का हाथ में रहता है अच्छे कर्मों के साथ दीजिए जो कर्मों के साथ रहे मृत्यु आसानी से और सही मिलेगी अन्यथा इस जन्म में भी ही हमें मृत्यु एक मूर्ति के समान अनुभूति गरबा के जाएगी और उसमें लगेगा कि हमने अपनी जेल में जो बुरे कथ्य के हैं उसके सजा आज हमें मिल रही है और उसे कोई नहीं बचा कुछ लोगों को मरना और जीना अति आवश्यक है तभी यह पृथ्वी पर संतुलन बना रहेगा अन्यथा प्रसिद्ध असंतुलन हो जाएगी धन्यवाद

log kyon mar jaate hain bhai yadi logo ko marna band ho jaaye ok janam ka janam hi hote rahe ek mein itne adhik shaant ho jayegi ki hamare liye chalna khade rehna bhi durbal ho jaega shastri naam se khola jaega atah is jail mein bhagwan ne hamare jeevan ko janmadivas maran se bhi jod rakha hai jo vyakti is prithvi par janam leta hai vaah nishchit hai ki samridhi prapt hoti hai aur mrityu ke prapti ke dauran hamein anubhuti hoti hai ki hum sab karmon ke saath mar rahe hain adhyayan ke mar rahe hain yadi hum apna phursat karmon ke saath mrityu ko prapt karte hain de anubhuti karte hain toh nishchit hi hamare liye bhagwan punarjanm yah swarg ka darwaja khol leta hai dharmik group mein hamare mrityu hoti hai ya aadhar mein parvatiya keh rahe hain humne jeevan par aadhar mein hi kiye hain toh nishchit hi ki jab hum marte hain toh hamare liye bhagwan uske saza pehle nirmit kar lete hain aur hamein agle janam mein manushya dusre janam mein nahi bhejate hain ya manish group mein bhejate bhejate bhejate hain jisse hum jeena pasand nahi kar sakte hain isse logo ka marna aur jeena upar waale ka hath mein rehta hai acche karmon ke saath dijiye jo karmon ke saath rahe mrityu aasani se aur sahi milegi anyatha is janam mein bhi hi hamein mrityu ek murti ke saman anubhuti garba ke jayegi aur usme lagega ki humne apni jail mein jo bure kathya ke hain uske saza aaj hamein mil rahi hai aur use koi nahi bacha kuch logo ko marna aur jeena ati aavashyak hai tabhi yah prithvi par santulan bana rahega anyatha prasiddh asantulan ho jayegi dhanyavad

लोग क्यों मर जाते हैं भाई यदि लोगों को मरना बंद हो जाए ओके जन्म का जन्म ही होते रहे एक में

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मनुष्य बचपन से लेकर जब तक दर्द होता है तब तक उसके क्वेश्चन पर कार्य करती रहती है और जीवन पर्यंत कोशिया का भजन होता है जब परंतु बुढ़ापे के साथ-साथ मनुष्य किन कोशिकाओं के विभाजन में गड़बड़ी आने लगती है और मनुष्य में 30 से 40 वर्ष के 30 से 80 वर्ष के बीच में मनुष्य की 40 परसेंट मांसपेशियां खराब हो जाती है और जो मांस होती है बहुत कमजोर होती है इसके साथ-साथ वृद्धावस्था में मनुष्य की कोशिका का विभाजन गड़बड़ा जाता है इसके अंदर मनुष्य के शरीर में और आज कल का जो खानपान है इसके अतिरिक्त वसा वाला भोजन इससे में सभी को लगता है दिमाग को लगता है कि हमारी भी पर्याप्त मात्रा में उड़ जाए इसलिए बीमारी शरीर में होने वाले के हार्मोन में गड़बड़ी पैदा करता है और इसका एक और मनुष्य बुड्ढे के साथ साथ जब होता है तो उसे अनेक कार्य करना बंद कर देते हैं इसका मुख्य से पड़ता है मनुष्य के साथ लेने पर सांस लेने से कमलेश से कुछ समय के लिए दिल की धड़कन बढ़ जाती है जिसके कारण मस्तिष्क तक नहीं पहुंच पाता और सी कोशिकाएं मर जाती है और दर्द के कारण इंसान की मृत्यु हो जाती है मृत्यु पश्चात लगभग मनुष्य का शरीर का तापमान 8 डिग्री सेल्सियस हो जाता है इससे उसका शरीर में खून जमने लगे और उसके शरीर में पाए जाने वाले बैक्टीरिया उसे धीरे-धीरे विलीन कर देता उसका अपघटन कर देते हैं सॉन्ग मृत्यु का प्रमुख कारण है कुछ करो वरना मांसपेशियों का कमजोर होना उड़ीसा चलते हमारी दिमाग पर असर हमें बेकार पास जाना चाहिए आई बादशाह

manushya bachpan se lekar jab tak dard hota hai tab tak uske question par karya karti rehti hai aur jeevan paryant koshiya ka bhajan hota hai jab parantu budhape ke saath saath manushya kin koshikaaon ke vibhajan mein gadbadi aane lagti hai aur manushya mein 30 se 40 varsh ke 30 se 80 varsh ke beech mein manushya ki 40 percent manspeshiya kharab ho jaati hai aur jo maas hoti hai bahut kamjor hoti hai iske saath saath vriddhavastha mein manushya ki koshika ka vibhajan gadbada jata hai iske andar manushya ke sharir mein aur aaj kal ka jo khanpan hai iske atirikt vasa vala bhojan isse mein sabhi ko lagta hai dimag ko lagta hai ki hamari bhi paryapt matra mein ud jaaye isliye bimari sharir mein hone waale ke hormone mein gadbadi paida karta hai aur iska ek aur manushya buddhe ke saath saath jab hota hai toh use anek karya karna band kar dete hai iska mukhya se padta hai manushya ke saath lene par saans lene se kamlesh se kuch samay ke liye dil ki dhadkan badh jaati hai jiske karan mastishk tak nahi pohch pata aur si koshikayen mar jaati hai aur dard ke karan insaan ki mrityu ho jaati hai mrityu pashchat lagbhag manushya ka sharir ka taapman 8 degree celsius ho jata hai isse uska sharir mein khoon jamne lage aur uske sharir mein paye jaane waale bacteria use dhire dhire vileen kar deta uska apghatan kar dete hai song mrityu ka pramukh karan hai kuch karo varna mansapeshiyon ka kamjor hona odisha chalte hamari dimag par asar hamein bekar paas jana chahiye I badshah

मनुष्य बचपन से लेकर जब तक दर्द होता है तब तक उसके क्वेश्चन पर कार्य करती रहती है और जीवन प

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