क्या आपको लगता नहीं लोग धीरे-धीरे परमात्मा या भगवान को भूलते जा रहे हैं?...


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आपने जो पोस्ट किया है बिल्कुल सही किया है इस कलिकाल के प्रभाव से पाश्चात्य देशों की नकल करते हुए भारतीय समाज में इस हिंदुस्तान में सभी वर्ग के लोग सभी धर्म के लोग सभी संप्रदाय के लोग भगवान की परमेश्वर की आराधना करना भूल गए हैं इसका सबसे अधिक परिणाम मोबाइल क्रांति है इस मोबाइल को प्रवेश परीक्षा में लगाया जा सकता है कि इस्लाम के दर्शन करना उनके संबंधित लेख प्रणाली के मनुष्य इसका दुरुपयोग कर रहा है और सभी पाश्चात्य देशों के निकल कर रहे हैं उसी में अपनी संस्कृति को डालते जा रहे हैं इसलिए हमारी भारतीय संस्कृति का हाल हो रहा है इसके फलस्वरूप हमारे सनातन धर्म को मानने वाले चंद्रलोक है जिस पर यह पृथ्वी टिकी हुई है हर धर्म के हर संप्रदाय के लोग भगवान को याद नहीं कर रहे हैं भगवान का नाम नहीं ले रहे हैं कोई भी प्रार्थना नहीं कर रहा है कलयुग इतना अति भयानक ओरिजिनल है इस 2020 कोविड-19 के दौर में भी भविष्य को अपनी जान की परवाह नहीं है वह अपने मर्जी के हिसाब से काम कर रहा है यदि आगे इस प्रकार से ही लोग भगवान को बोलते जाएंगे तो इस संसार में गौर से बजाओ का प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप बढ़ता रहेगा इसे दैवीय प्राकृतिक आपदा कहते हैं इसलिए मेरा आप सभी से विनम्र विनम्र अनुरोध है कि इस महामारी के रूप में परमेश्वर को याद करें जिससे आपका भी भला हो और सब का भला हो सके भगवान को भूले नहीं उन्हें याद करते हुए अपने कार्य करें वरना इस प्रकोप भरे जीवन में उसने कोई आशा नहीं है आशा क्यों लिखी है परमेश्वर का इसलिए उनको याद करें उनका नाम है और कभी मत भूलें और दिन हम स्नान करना नहीं भूलते हम खाना खाना नहीं बोलते हम अपने काम पर जाने बोलते हैं उसी प्रकार से प्रतिदिन आपका आप कर्तव्य है इस परम पिता ने आप को उत्पन्न किया है उसके प्रति का चित्रण करें सुबह जाने से पूर्व में प्रणाम करें रात में सोने से पूर्व उन्हें हम करके सोए और भोजन करते करते समय उनका नाम लिखकर भोजन करें उन्हें धन्यवाद करें क्योंकि हम जब रात में सोते हैं सुबह हमें उठाने वाला भाई है यह पास अध्यक्ष के टेलीफोन ऐसे लोग इतने प्यार से नहीं है इसलिए भगवान को याद करें उनकी शरण में जाएं उनसे सच्चाई स्तिथि इस विपदा के समय में और हमारा कोई भी नहीं है

aapne jo post kiya hai bilkul sahi kiya hai is kalikal ke prabhav se pashchayat deshon ki nakal karte hue bharatiya samaj me is Hindustan me sabhi varg ke log sabhi dharm ke log sabhi sampraday ke log bhagwan ki parmeshwar ki aradhana karna bhool gaye hain iska sabse adhik parinam mobile kranti hai is mobile ko pravesh pariksha me lagaya ja sakta hai ki islam ke darshan karna unke sambandhit lekh pranali ke manushya iska durupyog kar raha hai aur sabhi pashchayat deshon ke nikal kar rahe hain usi me apni sanskriti ko daalte ja rahe hain isliye hamari bharatiya sanskriti ka haal ho raha hai iske phalswarup hamare sanatan dharm ko manne waale chandralok hai jis par yah prithvi tiki hui hai har dharm ke har sampraday ke log bhagwan ko yaad nahi kar rahe hain bhagwan ka naam nahi le rahe hain koi bhi prarthna nahi kar raha hai kalyug itna ati bhayanak original hai is 2020 kovid 19 ke daur me bhi bhavishya ko apni jaan ki parvaah nahi hai vaah apne marji ke hisab se kaam kar raha hai yadi aage is prakar se hi log bhagwan ko bolte jaenge toh is sansar me gaur se bajao ka prakirtik apadao ka prakop badhta rahega ise daiviye prakirtik aapda kehte hain isliye mera aap sabhi se vinamra vinamra anurodh hai ki is mahamari ke roop me parmeshwar ko yaad kare jisse aapka bhi bhala ho aur sab ka bhala ho sake bhagwan ko bhule nahi unhe yaad karte hue apne karya kare varna is prakop bhare jeevan me usne koi asha nahi hai asha kyon likhi hai parmeshwar ka isliye unko yaad kare unka naam hai aur kabhi mat bhoolein aur din hum snan karna nahi bhulte hum khana khana nahi bolte hum apne kaam par jaane bolte hain usi prakar se pratidin aapka aap kartavya hai is param pita ne aap ko utpann kiya hai uske prati ka chitran kare subah jaane se purv me pranam kare raat me sone se purv unhe hum karke soye aur bhojan karte karte samay unka naam likhkar bhojan kare unhe dhanyavad kare kyonki hum jab raat me sote hain subah hamein uthane vala bhai hai yah paas adhyaksh ke telephone aise log itne pyar se nahi hai isliye bhagwan ko yaad kare unki sharan me jayen unse sacchai stithi is vipada ke samay me aur hamara koi bhi nahi hai

आपने जो पोस्ट किया है बिल्कुल सही किया है इस कलिकाल के प्रभाव से पाश्चात्य देशों की नकल कर

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अनमोल मणी

योग शिक्षक

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लोग स्वयं को भी भूलते जा रहे हैं तो परमात्मा को तो भूलेंगे ही जैसे एक बच्चा अपने मां बाप से 1 साल की उम्र में ही बिछड़ गया 1 साल की उम्र में बिछड़ गया जो बच्चा है तो उसे ना तो अपना नाम पता रहेगा ना उसे अपनी जाति पता रहेगी ना उसे अपने पिता का पता रहेगा ना वह खुद को जाने का ना वह अपने बाप को जाने का उसी प्रकार मनुष्य आत्मा भी परमात्मा से बिछड़े 5000 साल हो गए ऊपर से जम्हाई मनुष्य आत्मा नीचे धरती पर उसके धरती पर आए हुए 5000 साल हो गए और उस 5000 साल में मनुष्य आत्मा ने बहुत सारे जन्म लिए एक शरीर छोड़ में जन्म लिया उसमें अच्छा हुआ फिर युवा बना फिर बुजुर्ग हुआ फिर शरीर छोड़ा शरीर छोड़ा फिर बच्चा बना फिर युवा हुआ फिर बुरा हुआ फिर शरीर छोड़ा फिर इस तरह से बदलते बदलते बदलते अब एक ऐसा समय आ गया जब अब मन सावधान हो गया तो आप जल्दी-जल्दी अब क्या हो रहा है अब वह स्पीड से शरीर में रहा है और छोड़ रहा है असावधानी की वजह से उसकी एक्सीडेंट में मिलती हो जा रही है अतः धानी की वजह से उसकी कोरोनावायरस में मिलती हो जा रही है असावधानी की वजह से उसको बीमारी से मृत्यु हो जाती है कई प्रकार की टेंशन की वजह से उसका हार्ट फेल हो जा रहा है इस प्रकार मनुष्य स्वयं को नहीं जानने के कारण वह जल्दी-जल्दी शरीर बदल रहा है तो जल्दी-जल्दी शरीर बदलने के कारण वह और ही ज्यादा परमात्मा से दूर होता चला गया है और भूलता जा रहा है परमात्मा का ज्ञान ही नहीं है कि परमात्मा कौन है कहां रहते हैं क्या करते हैं बहुत लोग तो यही कहते हैं कि भगवान है ही नहीं भूलने की तो बात दूर बहुत लोगों को तो विश्वास ही खत्म हो गया साइंस को ही सब कुछ समझते हैं जो हमने उसके लिए कहा है कि साइंस यदि सब कुछ है तो साइंस जो है एक छोटे से मच्छर को भी नहीं खत्म कर पाई है तो साइंस क्या है लेकिन लोग साइंस को सब कुछ समझते हैं थोड़े से अविष्कार क्या हो गया साइंस के एरोप्लेन बन गया इलेक्ट्रॉनिक आइटम बन गए कुछ हो गया कुछ चिकित्सा जगत में थोड़ा बहुत आविष्कार हो गया तो लोग साइंस कोई भगवान मानने लग गए इसलिए लोग भगवान को भूलते जा रहे हैं बिल्कुल लगता है लोग भगवान को बोलते जा रहे हैं

log swayam ko bhi bhulte ja rahe hain toh paramatma ko toh bhulenge hi jaise ek baccha apne maa baap se 1 saal ki umar me hi bichhad gaya 1 saal ki umar me bichhad gaya jo baccha hai toh use na toh apna naam pata rahega na use apni jati pata rahegi na use apne pita ka pata rahega na vaah khud ko jaane ka na vaah apne baap ko jaane ka usi prakar manushya aatma bhi paramatma se bichde 5000 saal ho gaye upar se jamhai manushya aatma niche dharti par uske dharti par aaye hue 5000 saal ho gaye aur us 5000 saal me manushya aatma ne bahut saare janam liye ek sharir chhod me janam liya usme accha hua phir yuva bana phir bujurg hua phir sharir choda sharir choda phir baccha bana phir yuva hua phir bura hua phir sharir choda phir is tarah se badalte badalte badalte ab ek aisa samay aa gaya jab ab man savdhaan ho gaya toh aap jaldi jaldi ab kya ho raha hai ab vaah speed se sharir me raha hai aur chhod raha hai asavadhani ki wajah se uski accident me milti ho ja rahi hai atah dhaani ki wajah se uski coronavirus me milti ho ja rahi hai asavadhani ki wajah se usko bimari se mrityu ho jaati hai kai prakar ki tension ki wajah se uska heart fail ho ja raha hai is prakar manushya swayam ko nahi jaanne ke karan vaah jaldi jaldi sharir badal raha hai toh jaldi jaldi sharir badalne ke karan vaah aur hi zyada paramatma se dur hota chala gaya hai aur bhulta ja raha hai paramatma ka gyaan hi nahi hai ki paramatma kaun hai kaha rehte hain kya karte hain bahut log toh yahi kehte hain ki bhagwan hai hi nahi bhulne ki toh baat dur bahut logo ko toh vishwas hi khatam ho gaya science ko hi sab kuch samajhte hain jo humne uske liye kaha hai ki science yadi sab kuch hai toh science jo hai ek chote se macchar ko bhi nahi khatam kar payi hai toh science kya hai lekin log science ko sab kuch samajhte hain thode se avishkar kya ho gaya science ke aeroplane ban gaya electronic item ban gaye kuch ho gaya kuch chikitsa jagat me thoda bahut avishkar ho gaya toh log science koi bhagwan manne lag gaye isliye log bhagwan ko bhulte ja rahe hain bilkul lagta hai log bhagwan ko bolte ja rahe hain

लोग स्वयं को भी भूलते जा रहे हैं तो परमात्मा को तो भूलेंगे ही जैसे एक बच्चा अपने मां बाप स

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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विवाह जमा दूसरा चलाएं लोग भगवान को परमात्मा को भूलते जा रहे हैं अपने स्वार्थ में अंधे को सजाने और लोग काम क्रोध अहंकार के बस में हैं लोगों को एक दूसरे के क्या करते रहते हैं एक दूसरे का बुरा चाहते रहते हैं और कमर पर विश्वास करता जाना है यह पतन का कारण है हमें इस पतन के कारण को रोकना होगा ईश्वर पर पूर्ण विश्वास करना बारिश कब तक होगी

vivah jama doosra chalaye log bhagwan ko paramatma ko bhulte ja rahe hain apne swarth mein andhe ko sajane aur log kaam krodh ahankar ke bus mein hain logo ko ek dusre ke kya karte rehte hain ek dusre ka bura chahte rehte hain aur kamar par vishwas karta jana hai yah patan ka karan hai hamein is patan ke karan ko rokna hoga ishwar par purn vishwas karna barish kab tak hogi

विवाह जमा दूसरा चलाएं लोग भगवान को परमात्मा को भूलते जा रहे हैं अपने स्वार्थ में अंधे को स

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अभी तो कलयुग का मध्यम ईश्वर भक्ति की पराकाष्ठा और 22 वी सदी का समापन होगा वैसे ही लोग धीरे-धीरे किशोर भक्ति से विमुख ईश्वर की भक्ति की शुरुआत के लक्षण दिखाई देने में ज्यादा आकार और ज्यादा परेशान

abhi toh kalyug ka madhyam ishwar bhakti ki parakashtha aur 22 v sadi ka samapan hoga waise hi log dhire dhire kishore bhakti se vimukh ishwar ki bhakti ki shuruat ke lakshan dikhai dene me zyada aakaar aur zyada pareshan

अभी तो कलयुग का मध्यम ईश्वर भक्ति की पराकाष्ठा और 22 वी सदी का समापन होगा वैसे ही लोग धीरे

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मनुष्य क्या है मनोज तिवारी है यह पूर्ति होती है वह सुख सुविधाओं और अपेक्षाओं की पूर्ति करना ही मनुष्य का दुख होता है और इससे मनुष्य है भगवान एसएसडी रहता है समीक्षा और अपनी गैस गोदाम को ही अधिकृत देता लेकिन समय के साथ का वास होता है किसी को बड़ी शक्ति और बृजेश का जीवन मरण के बंधन से मुक्त होकर मुझसे मुंह फुलाकर रहमान के पास हो सकता है और वो टीचर के साथ मजाक मत कर माया जाल से मुक्त होकर उनके है इसलिए मान के बंधन से मुक्त होकर एक कुमार गुप्ता 27% में जाता है तो कहते हैं कि राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट अंत काल पछतायेगा जब प्राण जाएंगे छूट काल में ईश्वर को याद दिलाना नवभारत अखबार के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास करता है तो यही है लेकिन जब तक बहुत देर हो जाती है और इसकी जो मनुष्य का दर्द को याद जाती हो इसलिए तक आ जाता है लेकिन काम है कि राम नाम सत्य सत्य बोलो करते इससे मनुष्य इस बात का एहसास हो कि इससे बड़ी कोई शक्ति है और उसके साथ में जाकर उससे जुड़े सबको और कांति सुकून है प्राप्त होगा थैंक यू धन्यवाद

manushya kya hai manoj tiwari hai yah purti hoti hai vaah sukh suvidhaon aur apekshaon ki purti karna hi manushya ka dukh hota hai aur isse manushya hai bhagwan SSD rehta hai samiksha aur apni gas godaam ko hi adhikrit deta lekin samay ke saath ka was hota hai kisi ko badi shakti aur brijesh ka jeevan maran ke bandhan se mukt hokar mujhse mooh fulakar rahman ke paas ho sakta hai aur vo teacher ke saath mazak mat kar maya jaal se mukt hokar unke hai isliye maan ke bandhan se mukt hokar ek kumar gupta 27 me jata hai toh kehte hain ki ram naam ki loot hai loot sake toh loot ant kaal pachatayega jab praan jaenge chhut kaal me ishwar ko yaad dilana navbharat akhbaar ke madhyam se prapt karne ka prayas karta hai toh yahi hai lekin jab tak bahut der ho jaati hai aur iski jo manushya ka dard ko yaad jaati ho isliye tak aa jata hai lekin kaam hai ki ram naam satya satya bolo karte isse manushya is baat ka ehsaas ho ki isse badi koi shakti hai aur uske saath me jaakar usse jude sabko aur kanti sukoon hai prapt hoga thank you dhanyavad

मनुष्य क्या है मनोज तिवारी है यह पूर्ति होती है वह सुख सुविधाओं और अपेक्षाओं की पूर्ति करन

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विकास सिंह

दिल से भारतीय

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अभी कि मैं आपकी बात से सहमत हूं क्योंकि हमारे समाज में आए दिन जो लोग हैं धीरे-धीरे परमात्मा यह भगवान से दूर होते जा रहे हैं इसकी मुख्य वजह यह है कि आजकल की जो प्राणी है वह अपने बच्चे को भगवान ने परमात्मा के संस्कार देने की वजह उनको उनकी ख्वाहिशें पूरी कर रहे हैं बिल्कुल हमारी मतलब हमें जैसा कि हमारी तो हमेशा भगवान के बारे में बताया आज हमारे भारत के भविष्य वह तो भगवान और परमात्मा से बिलकुल दूर होते जाएंगे तो मैं इस बात से बिल्कुल सहमत हूं इसमें जो ठोस कदम उठाना चाहिए हमें ही उठानी चाहिए युवाओं के बीच में अपने से छोटों के बीच में और लोगों के बीच में जहां पर लोगों जो है परिवार को भगवान के बारे में बोले वहां पर अपने से जागरूकता करनी चाहिए और हमें अपने बच्चों को भगवान परमात्मा के बारे में बताएं क्योंकि हमारा विश्वास बना रहेगा तभी हमारी जो विश्वास है कायम रहेगी तो फिर इस दुनिया का जो क्योंकि हमारे हिंदू धर्म संसद भगवान में विश्वास नहीं कर सकती

abhi ki main aapki baat se sahmat hoon kyonki hamare samaj mein aaye din jo log hain dhire dhire paramatma yah bhagwan se dur hote ja rahe hain iski mukhya wajah yah hai ki aajkal ki jo prani hai vaah apne bacche ko bhagwan ne paramatma ke sanskar dene ki wajah unko unki khwahishen puri kar rahe hain bilkul hamari matlab hamein jaisa ki hamari toh hamesha bhagwan ke bare mein bataya aaj hamare bharat ke bhavishya vaah toh bhagwan aur paramatma se bilkul dur hote jaenge toh main is baat se bilkul sahmat hoon isme jo thos kadam uthana chahiye hamein hi uthani chahiye yuvaon ke beech mein apne se choton ke beech mein aur logo ke beech mein jaha par logo jo hai parivar ko bhagwan ke bare mein bole wahan par apne se jagrukta karni chahiye aur hamein apne baccho ko bhagwan paramatma ke bare mein bataye kyonki hamara vishwas bana rahega tabhi hamari jo vishwas hai kayam rahegi toh phir is duniya ka jo kyonki hamare hindu dharm sansad bhagwan mein vishwas nahi kar sakti

अभी कि मैं आपकी बात से सहमत हूं क्योंकि हमारे समाज में आए दिन जो लोग हैं धीरे-धीरे परमात्म

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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

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BP मुझे लगता है कि लोग भूलते नहीं जा रहे हैं लेकिन हां उनके पास समय होता नहीं होता कि भगवान को याद करते हैं और यह सच बात है कि जब आदमी मुसीबत में होता तभी वह भगवान को याद करता है तू आजकल लोगों का शेड्यूल इतना ज्यादा बिजी हो क्या है कि सुबह सुबह ऑफिस के लिए निकल ना फिर लेट नाईट आना फिर ट्रैफिक कार गेम उसके बाद घर पर आए खाना वाना खाया उसने बोर्ड एग्जाम सो जाती फिर आदमी सो ही जाता है तो टाइम मिलता है भगवान को याद करने का दो ही समय में मिलता है या तो विकेट हो तो मैंने देखा है बहुत सारे लोग पिकनिक मंदिर घूमने जाते हैं या सुबह-सुबह संस्कार चैनल लगा कर छोड़ा स्पेशल पीछे-पीछे सुनते रहते हैं या कहीं बना लिया घूमने का वैष्णो देवी चले गए पूर्णागिरि चलेगा यह होता है लेकिन रेगुलर में वह नहीं हो पाता

BP mujhe lagta hai ki log bhulte nahi ja rahe hain lekin haan unke paas samay hota nahi hota ki bhagwan ko yaad karte hain aur yah sach baat hai ki jab aadmi musibat mein hota tabhi vaah bhagwan ko yaad karta hai tu aajkal logo ka schedule itna zyada busy ho kya hai ki subah subah office ke liye nikal na phir late night aana phir traffic car game uske baad ghar par aaye khana wanna khaya usne board exam so jaati phir aadmi so hi jata hai toh time milta hai bhagwan ko yaad karne ka do hi samay mein milta hai ya toh wicket ho toh maine dekha hai bahut saare log picnic mandir ghoomne jaate hain ya subah subah sanskar channel laga kar choda special peeche peeche sunte rehte hain ya kahin bana liya ghoomne ka vaishno devi chale gaye purnagiri chalega yah hota hai lekin regular mein vaah nahi ho pata

BP मुझे लगता है कि लोग भूलते नहीं जा रहे हैं लेकिन हां उनके पास समय होता नहीं होता कि भगवा

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Tilak Singh

Sch.Topper,Parnassian & Author

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देसी मैं आपको बता दूं पहले जो लोग भगवान पर यकीन करती थी वह यकीन नहीं करता विश्वास नहीं होता तो अंधविश्वास में क्या हो गया कि लोग अंधविश्वास के चक्कर में भगवान को बहुत कम महत्व देते देने से नहीं कह सकते कि धीरे-धीरे तू है भगवान तुझ से मैं ऑफिस लेट हो जाएगा क्योंकि वह लोग इतने बिजी हो गए हैं इतने व्यस्त हो गए हैं कि वह सिर्फ खुद के बारे में सोचते हैं खुद की आवश्यकता होगी पूरी जिंदगी में तो उन्हीं के लिए भगवान के लिए समय नहीं है

desi main aapko bata doon pehle jo log bhagwan par yakin karti thi vaah yakin nahi karta vishwas nahi hota toh andhavishvas mein kya ho gaya ki log andhavishvas ke chakkar mein bhagwan ko bahut kam mahatva dete dene se nahi keh sakte ki dhire dhire tu hai bhagwan tujhe se main office late ho jaega kyonki vaah log itne busy ho gaye hain itne vyast ho gaye hain ki vaah sirf khud ke bare mein sochte hain khud ki avashyakta hogi puri zindagi mein toh unhi ke liye bhagwan ke liye samay nahi hai

देसी मैं आपको बता दूं पहले जो लोग भगवान पर यकीन करती थी वह यकीन नहीं करता विश्वास नहीं होत

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मुझे लगता है लोग भगवान को बिल्कुल भी नहीं बोल रहे हैं यह लोग ही गलत सोच है लोग भगवान को बहुत प्यार करते हैं वह सभी के साथ होते हैं

mujhe lagta hai log bhagwan ko bilkul bhi nahi bol rahe hain yah log hi galat soch hai log bhagwan ko bahut pyar karte hain vaah sabhi ke saath hote hain

मुझे लगता है लोग भगवान को बिल्कुल भी नहीं बोल रहे हैं यह लोग ही गलत सोच है लोग भगवान को बह

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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शाम को ऐसी बात नहीं है लोग परमात्मा भगवान कभी नहीं भूलते हैं लेकिन जो लोग हम विश्वास करते हैं वह लोग विश्वास हमेशा करते रहेंगे करते हैं जरूर नहीं करते हैं वह लोग नहीं करते रहेंगे ऐसी बात नहीं है अब हर जगह देखेंगे तो भगवान की मंदिर कभी भी खाली नहीं देती आप देखेंगे क्या कभी ऐसा कुछ भी कहीं भी गंदा हो धंधा है लेकिन भगवान की जगह जो है हमेशा रहती है और दुख में हो सुख में हो हर वक्त लोग दुख में भी याद करते हैं कि भगवान को याद करते हैं ताकि जो दुख है जो समस्या है उसे पूरा किया जाए और सुख में भी भगवान को पहचान जाते हैं तो यह चीज कभी बंद नहीं होता यार ऐसा ही लगता है मुझे कि भगवान के परमात्मा को भूलते जा रहे हैं

shaam ko aisi baat nahi hai log paramatma bhagwan kabhi nahi bhulte hain lekin jo log hum vishwas karte hain vaah log vishwas hamesha karte rahenge karte hain zaroor nahi karte hain vaah log nahi karte rahenge aisi baat nahi hai ab har jagah dekhenge toh bhagwan ki mandir kabhi bhi khaali nahi deti aap dekhenge kya kabhi aisa kuch bhi kahin bhi ganda ho dhandha hai lekin bhagwan ki jagah jo hai hamesha rehti hai aur dukh mein ho sukh mein ho har waqt log dukh mein bhi yaad karte hain ki bhagwan ko yaad karte hain taki jo dukh hai jo samasya hai use pura kiya jaaye aur sukh mein bhi bhagwan ko pehchaan jaate hain toh yah cheez kabhi band nahi hota yaar aisa hi lagta hai mujhe ki bhagwan ke paramatma ko bhulte ja rahe hain

शाम को ऐसी बात नहीं है लोग परमात्मा भगवान कभी नहीं भूलते हैं लेकिन जो लोग हम विश्वास करते

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