आज के ही दिन गोडसे को हुई थी फांसी, फिर जेल में गुपचुप दाह संस्कार क्यूँ हुआ?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:33

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज के दिन गोट से कोई सिफासी फिर जेल में गुपचुप दाह संस्कार क्यों हुआ 15 नवंबर 1949 को गोडसे की जो फांसी हुई थी अंबाला की जेल में और वहीं पर ही उन्हें गुपचुप दाह संस्कार कर दिया गया यह सब समय की कानून व्यवस्था के हो सकता है ये विद्वानों और लोगों की भावनाएं जो थी उस को मद्देनजर रखकर किया गया हो सकता है लेकिन महात्मा गांधी जी की जो हत्या प्रार्थना सभा में जबकि थी गुस्से में तो गोडसे के पक्ष में और महात्मा गांधी जी के पक्ष में भी बहुत ही जनता उस समय बैठे हुए थे इसलिए गोडसे को गुपचुप दाह संस्कार जेल में कर दिया गया क्योंकि अगर उन्हें उनकी बॉडी अगर उनके जो रिलेटिव है उनको कर दी जाए तो उसकी वजह से वहां पर बहुत कुछ हो सकने की संभावना थी और आम जनता में कुछ गलत भी हो ना तो आप पढ़ सकते हैं इसलिए गोडसे का गुपचुप दाह संस्कार अंबाला की जेल में फांसी करने के बाद कर दिया गया आज तक यह सोचने और विचारणीय प्रश्न है क्योंकि कुछ लोग गांधीजी के पक्ष में हैं आज भी और कुछ लोग आज भी गोडसे के पक्ष में है कि गोडसे ने जो किया वह सही किया क्योंकि ना राजकोट से पाकिस्तान और हिंदुस्तान के बंटवारे के लिए और उसको महात्मा गांधी को ही जिम्मेदार मानते थे हो सकता है कि आम जनता ने ऐसा प्रश्न आना है और शांति से सब काली हो जाए इसलिए ऐसा किया जाना उस समय प्रशासन ने उचित माना था धन्यवाद

aaj ke din goat se koi sifasi phir jail mein gupchup daah sanskar kyon hua 15 november 1949 ko godse ki jo fansi hui thi ambala ki jail mein aur wahi par hi unhe gupchup daah sanskar kar diya gaya yah sab samay ki kanoon vyavastha ke ho sakta hai ye vidvaano aur logo ki bhaavnaye jo thi us ko maddenajar rakhakar kiya gaya ho sakta hai lekin mahatma gandhi ji ki jo hatya prarthna sabha mein jabki thi gusse mein toh godse ke paksh mein aur mahatma gandhi ji ke paksh mein bhi bahut hi janta us samay baithe hue the isliye godse ko gupchup daah sanskar jail mein kar diya gaya kyonki agar unhe unki body agar unke jo relative hai unko kar di jaaye toh uski wajah se wahan par bahut kuch ho sakne ki sambhavna thi aur aam janta mein kuch galat bhi ho na toh aap padh sakte hai isliye godse ka gupchup daah sanskar ambala ki jail mein fansi karne ke baad kar diya gaya aaj tak yah sochne aur vicharniya prashna hai kyonki kuch log gandhiji ke paksh mein hai aaj bhi aur kuch log aaj bhi godse ke paksh mein hai ki godse ne jo kiya vaah sahi kiya kyonki na rajkot se pakistan aur Hindustan ke batware ke liye aur usko mahatma gandhi ko hi zimmedar maante the ho sakta hai ki aam janta ne aisa prashna aana hai aur shanti se sab kali ho jaaye isliye aisa kiya jana us samay prashasan ne uchit mana tha dhanyavad

आज के दिन गोट से कोई सिफासी फिर जेल में गुपचुप दाह संस्कार क्यों हुआ 15 नवंबर 1949 को गोड

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656 Mangal Singh Thakur

Teacher/Operator

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आपने बहुत अच्छा क्वेश्चन किया है क्योंकि उन्होंने एक अच्छा काम किया था सामने वाले की उसने जिस को गोली मारा था उसके जानती हूं इसलिए बात को गोली मारा था क्योंकि उसके दिल दिमाग में वह गलत था आ गया था और रहेगा लेकिन उस विचारधारा को समाधि देने के लिए दुनिया चर्चा थी इसलिए उस दिन शांति व्यवस्था कायम रखी थी अभिलाष प्रचार के अंतिम संस्कार के गए थे यह मेरी विचारधारा के कि मैं भी वहीं से हूं

aapne bahut accha question kiya hai kyonki unhone ek accha kaam kiya tha saamne waale ki usne jis ko goli mara tha uske jaanti hoon isliye baat ko goli mara tha kyonki uske dil dimag mein vaah galat tha aa gaya tha aur rahega lekin us vichardhara ko samadhi dene ke liye duniya charcha thi isliye us din shanti vyavastha kayam rakhi thi abhilash prachar ke antim sanskar ke gaye the yah meri vichardhara ke ki main bhi wahi se hoon

आपने बहुत अच्छा क्वेश्चन किया है क्योंकि उन्होंने एक अच्छा काम किया था सामने वाले की उसने

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Laxman ram upadhyay

Social Service

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गोसाई क्रांतिकारी था और जब महात्मा गांधी घोष ने गोली मारी तो एक समझौता था जिस पर साइन करना चाहते को मना किया था और उन्होंने शायद इसी बात को नकारा में सोचा भी भारत का हित नहीं है इसलिए महात्मा गांधी और चुपचाप में इसलिए संस्कार किया गया था कि उसके भी समर्थक थे और कहीं ऑनलाइन ना उसके लिए धन्यवाद

gosai krantikari tha aur jab mahatma gandhi ghosh ne goli mari toh ek samjhauta tha jis par sign karna chahte ko mana kiya tha aur unhone shayad isi baat ko nakara mein socha bhi bharat ka hit nahi hai isliye mahatma gandhi aur chupchap mein isliye sanskar kiya gaya tha ki uske bhi samarthak the aur kahin online na uske liye dhanyavad

गोसाई क्रांतिकारी था और जब महात्मा गांधी घोष ने गोली मारी तो एक समझौता था जिस पर साइन करना

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anu dube

Student

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आपका सवाल है कि आज के ही दिन गोडसे को हुई थी फांसी फिर जेल में गुपचुप दाह संस्कार क्यों हुआ तो मैं बता देना चाहता हूं कि जिस समय व्हाट्सएप की फांसी हुई थी उस समय गोडसे की सपोर्टर वहां पर बहुत ज्यादा थे इसलिए उन्हें चुपचाप फांसी देकर गुमशुदा संस्कार जेल के अंदर ही कर दिया गया ताकि लोगों को पता ना चले जब लोगों के पता चलते तो यहां प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं और लोग हो जाते इसलिए प्रदर्शित को रोकने के लिए ऐसा किया गया तो क्यों

aapka sawaal hai ki aaj ke hi din godse ko hui thi fansi phir jail mein gupchup daah sanskar kyon hua toh main bata dena chahta hoon ki jis samay whatsapp ki fansi hui thi us samay godse ki supporter wahan par bahut zyada the isliye unhe chupchap fansi dekar gumshuda sanskar jail ke andar hi kar diya gaya taki logo ko pata na chale jab logo ke pata chalte toh yahan pradarshan shuru ho jaate hain aur log ho jaate isliye pradarshit ko rokne ke liye aisa kiya gaya toh kyon

आपका सवाल है कि आज के ही दिन गोडसे को हुई थी फांसी फिर जेल में गुपचुप दाह संस्कार क्यों हु

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