क्या वेदों से ईश्वर प्राप्त हो सकता है?...


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वैदिक ज्ञान के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है उसकी आराधना की जा सकती है वेदों में यह सारी चीजें बताई गई है चार वेद है पड़ी है और उसके माध्यम से आप ईश्वर की आराधना करके ईश्वर को प्राप्त करने का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं

vaidik gyaan ke madhyam se ishwar ko prapt kiya ja sakta hai uski aradhana ki ja sakti hai vedo mein yah saree cheezen batai gayi hai char ved hai padi hai aur uske madhyam se aap ishwar ki aradhana karke ishwar ko prapt karne ka gyaan prapt kar sakte hain

वैदिक ज्ञान के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है उसकी आराधना की जा सकती है वेदों

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है क्या वेदों से ईश्वर प्राप्त हो सकता है मेरा उसका जो व्यक्तिगत मेरा उत्तर है वह यह है वेदों से ईश्वर नहीं प्राप्त हो सकता है बे तू तो एक सामाजिक संसार को चलाने का संचालन की व्यवस्था भी दी है कि जो संसार को एक जो मानो चाहे जो संपूर्ण जीवो को संचालन करने की एक व्यवस्था है पूरा का पूरा व्यवस्था उसका जिक्र आता है सारे मंत्रों में दो वाक्य जो है एक परिभाषित करते हैं कि किस तरह व्यवस्था होनी चाहिए पूर्ण रूप से अगर आप ब्रह्म परमात्मा का अनुभव जी स्वर्ग दुकान होती और नहीं करेंगे पहले बात तो लिखा है क्या बेटों से ईश्वर प्राप्त हो सकता है ईश्वर सत्य ही नहीं है ईश्वर जैसा जगत में कायनात में कुछ भी नहीं है जिसको देखकर इंगित किया जा सकता है इशारा किया जा सकता है इस वक्त ईश्वर एक भूल है एक व्यवस्था का नाम है एक गुण है इस औरत की सूरत टू का अनुभव दे दो से नहीं हो सकता है अगर ईश्वर तो का अनुभव करना है तो आपको वेद के ऊपर जहां वेदों का अंत होता है इससे वेदांत शुरू होता है जो वेदांत की परिभाषा है जो के दांत के अंदर उपनिषद आते हैं उपनिषदों से के माध्यम से सीधे-सीधे परमात्मा के ज्ञान को समझा जा सकता है कुल मिलाकर के दे दो उससे जावे तू के ऊपर यानी वेदांत जहां वेदों का अंत हो जाता है वहां से वहां से परमात्मा के अनुभव के विषय में कुछ चर्चा समझ में आ सकती है उनको कहते उपनिषद के नाम से ही अंतर्गत आते हैं उपनिषद वेदांत के अंतर्गत आते हैं तो कभी ईश्वर का अनुभव करना है उसकी बातों को उसके गुणों को उसके तत्वों को समझना एक तोहफे दांत में दांत में जो उपनिषद आते हैं उनसे कुबूल उपनिषदों का अध्ययन करके 108 प्रकार के उपलब्ध है और मुझसे अगर पूछ देंगे तो मैं आपको गीता प्रेस गोरखपुर से आपको कठोपनिषद मिल जाएगा कठोपनिषद वेदांत के अंतर्गत आता है और उसमें यम नचिकेता का व्याख्यान है उस व्याख्यान के अंतर्गत पूरे परमात्मा की के ईश्वर की व्याख्या की गई है कहीं से कठोपनिषद मंगाइए उसका अध्ययन करिए गीता प्रेस गोरखपुर की मिल जाएगी यदि न मिले आसपास आपके कोई धार्मिक मित्रों के उन क्या मिल जाएगी यदि वहां भी ना मिले तो मुझसे कमेंट पर अपना मोबाइल नंबर लिखिए या मेरे व्हाट्सएप नंबर 98 9772 7441 पर अपना डिटेल और कठोपनिषद लिखकर भेज दीजिए मैं आपको कठोपनिषद उपलब्ध करा दूंगा धन्यवाद नमस्कार

prashna hai kya vedo se ishwar prapt ho sakta hai mera uska jo vyaktigat mera uttar hai vaah yah hai vedo se ishwar nahi prapt ho sakta hai be tu toh ek samajik sansar ko chalane ka sanchalan ki vyavastha bhi di hai ki jo sansar ko ek jo maano chahen jo sampurna jeevo ko sanchalan karne ki ek vyavastha hai pura ka pura vyavastha uska jikarr aata hai saare mantron mein do vakya jo hai ek paribhashit karte hain ki kis tarah vyavastha honi chahiye purn roop se agar aap Brahma paramatma ka anubhav ji swarg dukaan hoti aur nahi karenge pehle baat toh likha hai kya beto se ishwar prapt ho sakta hai ishwar satya hi nahi hai ishwar jaisa jagat mein kayanat mein kuch bhi nahi hai jisko dekhkar ingit kiya ja sakta hai ishara kiya ja sakta hai is waqt ishwar ek bhool hai ek vyavastha ka naam hai ek gun hai is aurat ki surat to ka anubhav de do se nahi ho sakta hai agar ishwar toh ka anubhav karna hai toh aapko ved ke upar jaha vedo ka ant hota hai isse vedant shuru hota hai jo vedant ki paribhasha hai jo ke dant ke andar upanishad aate hain upnishadon se ke madhyam se sidhe seedhe paramatma ke gyaan ko samjha ja sakta hai kul milakar ke de do usse jaave tu ke upar yani vedant jaha vedo ka ant ho jata hai wahan se wahan se paramatma ke anubhav ke vishay mein kuch charcha samajh mein aa sakti hai unko kehte upanishad ke naam se hi antargat aate hain upanishad vedant ke antargat aate hain toh kabhi ishwar ka anubhav karna hai uski baaton ko uske gunon ko uske tatvon ko samajhna ek tohfe dant mein dant mein jo upanishad aate hain unse kubul upnishadon ka adhyayan karke 108 prakar ke uplabdh hai aur mujhse agar puch denge toh main aapko geeta press gorakhpur se aapko kathopnishad mil jaega kathopnishad vedant ke antargat aata hai aur usme yum nachiketa ka vyakhyan hai us vyakhyan ke antargat poore paramatma ki ke ishwar ki vyakhya ki gayi hai kahin se kathopnishad mangaiye uska adhyayan kariye geeta press gorakhpur ki mil jayegi yadi na mile aaspass aapke koi dharmik mitron ke un kya mil jayegi yadi wahan bhi na mile toh mujhse comment par apna mobile number likhiye ya mere whatsapp number 98 9772 7441 par apna detail aur kathopnishad likhkar bhej dijiye main aapko kathopnishad uplabdh kara dunga dhanyavad namaskar

प्रश्न है क्या वेदों से ईश्वर प्राप्त हो सकता है मेरा उसका जो व्यक्तिगत मेरा उत्तर है वह य

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हमारे भारत के पुरातन अध्यात्मिक ज्ञान दर्शन सब कुछ वेदों में यह और वेद ईश्वर प्रणीत है ईश्वर का वरदान है निश्चित रूप से स्थापित मन से वेदों का अध्ययन किया जाए वैदिक मार्ग पर चला जाए तो हम तोता हम ईश्वर को प्राप्त करेंगे ही

hamare bharat ke puratan adhyatmik gyaan darshan sab kuch vedo mein yah aur ved ishwar pranit hai ishwar ka vardaan hai nishchit roop se sthapit man se vedo ka adhyayan kiya jaaye vaidik marg par chala jaaye toh hum tota hum ishwar ko prapt karenge hi

हमारे भारत के पुरातन अध्यात्मिक ज्ञान दर्शन सब कुछ वेदों में यह और वेद ईश्वर प्रणीत है ईश्

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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कि सबसे पहले आपको यह समझना पड़ेगा कि वेद क्या है जिसे हम कोई भी नहीं गाड़ी खरीदते हैं उसके साथ में एक साइड होती है फिर कोई सर्विसमैन होती है उसको पढ़कर आप उसके बारे में जान सकते हैं प्रस्तावित इस जीवन को कैसे जीना है जीवन के नियमों को रखा गया है तो इंसान को कैसे जीवन जीना है यह सभी नियम वेदों के अंदर सबसे पहले जो न्यूनतम के लिए लिखे गए उनको वेट करते हैं और देश के अंदर जीवन को क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए या वेदों में लिखा गया तो दे दो केंद्र कौन से काम करना उचित है किसको मारना उचित है ऐसा कुछ जानकारी हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं लिंगेश्वर होता है हमारे अंदर ही मन होता है उसको पानी सकते हैं उसको सिर्फ जान सकते हैं सुबह 2 से 20 वर्ड को पानी सकता है लेकिन के माध्यम से सबको जाना आवश्यक जा सकता है धन्यवाद

ki sabse pehle aapko yah samajhna padega ki ved kya hai jise hum koi bhi nahi gaadi kharidte hain uske saath mein ek side hoti hai phir koi serviceman hoti hai usko padhakar aap uske bare mein jaan sakte hain prastavit is jeevan ko kaise jeena hai jeevan ke niyamon ko rakha gaya hai toh insaan ko kaise jeevan jeena hai yah sabhi niyam vedo ke andar sabse pehle jo ninuntam ke liye likhe gaye unko wait karte hain aur desh ke andar jeevan ko kya karna chahiye kya nahi karna chahiye ya vedo mein likha gaya toh de do kendra kaun se kaam karna uchit hai kisko marna uchit hai aisa kuch jaankari hum ishwar ko prapt kar sakte hain lingeshwar hota hai hamare andar hi man hota hai usko paani sakte hain usko sirf jaan sakte hain subah 2 se 20 word ko paani sakta hai lekin ke madhyam se sabko jana aavashyak ja sakta hai dhanyavad

कि सबसे पहले आपको यह समझना पड़ेगा कि वेद क्या है जिसे हम कोई भी नहीं गाड़ी खरीदते हैं उसके

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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क्या वे दूसरे पर प्राप्त हो सकता पीके भेजो है चार हैं अथर्व वेद यजुर्वेद सामवेद यह चारों वेद जो है वह अलग-अलग तरह के हम ही सीख देते हैं हमें अथर्ववेद में जो है उसके बारे में बताया गया है सामवेद में स्थापित है वह हमें जीवन जीने का मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं उनके अध्ययन जो जीवन में कैसे जिए और कैसे हमको आगे बढ़ना चाहिए वह मार्गदर्शक के रुप में वेदों का जो है अध्ययन हमें करना चाहिए बाकी ईश्वर प्राप्त करने के लिए हमें तो कर्म करने चाहिए अगर हम वेदों के प्याज के द्वारा ज्ञान अर्जित कर के और अपने कर्म परोपकार और सदाचार तो उसमें हम आत्म शुद्धि और आत्म मंथन करने के लायक वेदो हो जाती है इस तरह से हमें ईश्वर के नजदीक पहुंच सकते हैं लेकिन ईश्वर को प्राप्त करना तो अभी तक कोई ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता है लेकिन इसके बारे में ज्ञान की प्राप्ति जरूर भेजो से होती है और ऐसा जो इंसान करना पसंद करें तो यह दो का त्याग करके और ज्ञानी बनकर और उसे जीवन में उतारकर और अच्छे कर्म 709 सजा काटकर के परोपकार की भावना के साथ जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं धन्यवाद

kya ve dusre par prapt ho sakta pk bhejo hai char hain atharva ved yajurved samved yah charo ved jo hai vaah alag alag tarah ke hum hi seekh dete hain hamein atharvaved mein jo hai uske bare mein bataya gaya hai samved mein sthapit hai vaah hamein jeevan jeene ka margadarshak ki bhumika nibhate hain unke adhyayan jo jeevan mein kaise jiye aur kaise hamko aage badhana chahiye vaah margadarshak ke roop mein vedo ka jo hai adhyayan hamein karna chahiye baki ishwar prapt karne ke liye hamein toh karm karne chahiye agar hum vedo ke pyaaz ke dwara gyaan arjit kar ke aur apne karm paropkaar aur sadachar toh usme hum aatm shudhi aur aatm manthan karne ke layak vedo ho jaati hai is tarah se hamein ishwar ke nazdeek pohch sakte hain lekin ishwar ko prapt karna toh abhi tak koi ishwar ko prapt nahi kar sakta hai lekin iske bare mein gyaan ki prapti zaroor bhejo se hoti hai aur aisa jo insaan karna pasand kare toh yah do ka tyag karke aur gyani bankar aur use jeevan mein utarakar aur acche karm 709 saza katkar ke paropkaar ki bhavna ke saath zindagi mein aage badh sakte hain dhanyavad

क्या वे दूसरे पर प्राप्त हो सकता पीके भेजो है चार हैं अथर्व वेद यजुर्वेद सामवेद यह चारों

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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

महोदय आपने कहा कि अभी तो उसे ईश्वर प्राप्त हो सकता है वेद ईश्वर का मार्ग बताते हैं ईश्वर को प्राप्त करने के लिए तो आपको खुद ही इसका धन का सदुपयोग करना पड़ेगा तब करना पड़ेगा जब तक आप ईश्वर के वेद आपको ईश्वर प्राप्त करने का पूरा सामग्री दे देंगे पूरी तैयारी करा देंगे देंगे करना तो कम पड़ेगा क्योंकि अनुभव आपका अपना होगा क्योंकि वेद जो है हमारे मार्गदर्शक हैं और बाद में बताएंगे कि ईश्वर प्राप्ति के लिए हमें क्या अचरण चाहिए क्या क्या चाहिए क्या प्रार्थनाएं उत्तम क्रियाविधि सारी चीजें लेकिन करना तो आपको ही पड़ेगी उस मार्ग पर बैठकर बताए हुए मार्ग का अनुसरण तो हमें और आपको ही करना पड़ेगा तो यह बिल्कुल सच है कि वेद से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है लेकिन उनके मार्ग का अनुसरण तो हमें करना पड़ेगा सिर्फ पढ़ने पड़ते तो ईश्वर प्राप्त नहीं पढ़ने के बाद उसके अनुकूल आचरण करना हमारी जिम्मेदारी यदि वह आचरण हम अपना लेते हैं त्याग तब जब यह जो कुछ बताए गए हैं वह सब करने लगते हैं इसका सीधा सीधा गाड़ी से प्राप्त प्राप्त हो सकते हैं लेकिन वेद का आचरण भी करना पड़ेगा सिर्फ पढ़कर आचरण करते हैं तो 100% आपको भगवान प्राप्त हो सकते हैं धन्यवाद

mahoday aapne kaha ki abhi toh use ishwar prapt ho sakta hai ved ishwar ka marg batatey hain ishwar ko prapt karne ke liye toh aapko khud hi iska dhan ka sadupyog karna padega tab karna padega jab tak aap ishwar ke ved aapko ishwar prapt karne ka pura samagri de denge puri taiyari kara denge denge karna toh kam padega kyonki anubhav aapka apna hoga kyonki ved jo hai hamare margadarshak hain aur baad me batayenge ki ishwar prapti ke liye hamein kya acharan chahiye kya kya chahiye kya prarthanaen uttam kriyavidhi saari cheezen lekin karna toh aapko hi padegi us marg par baithkar bataye hue marg ka anusaran toh hamein aur aapko hi karna padega toh yah bilkul sach hai ki ved se ishwar ko prapt kiya ja sakta hai lekin unke marg ka anusaran toh hamein karna padega sirf padhne padate toh ishwar prapt nahi padhne ke baad uske anukul aacharan karna hamari jimmedari yadi vaah aacharan hum apna lete hain tyag tab jab yah jo kuch bataye gaye hain vaah sab karne lagte hain iska seedha seedha gaadi se prapt prapt ho sakte hain lekin ved ka aacharan bhi karna padega sirf padhakar aacharan karte hain toh 100 aapko bhagwan prapt ho sakte hain dhanyavad

महोदय आपने कहा कि अभी तो उसे ईश्वर प्राप्त हो सकता है वेद ईश्वर का मार्ग बताते हैं ईश्वर क

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656 Mangal Singh Thakur

Teacher/Operator

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आपने कहा है कि वेदों के अध्यक्ष सिर करके प्राप्त है उसे 23 अंक प्राप्त हुए तो किधर से नहीं होती है वेदों के अध्ययन से मानव का जो एक जीवन जीने की प्रक्रिया है कला है वह एक सामने आता है क्योंकि वह प्राचीन समय असली ग्रंथ लिखे गए हैं वह प्रथम यही बात का जिक्र होता है कि मानव को जीवन यापन कैसे करना चाहिए इसलिए आप इसके लिए आप अपने जीवन या घर में आप एक ब्रिटिश उसके साथ रहे आपको दर्शन होंगे धन्यवाद

aapne kaha hai ki vedo ke adhyaksh sir karke prapt hai use 23 ank prapt hue toh kidhar se nahi hoti hai vedo ke adhyayan se manav ka jo ek jeevan jeene ki prakriya hai kala hai vaah ek saamne aata hai kyonki vaah prachin samay asli granth likhe gaye hain vaah pratham yahi baat ka jikarr hota hai ki manav ko jeevan yaapan kaise karna chahiye isliye aap iske liye aap apne jeevan ya ghar mein aap ek british uske saath rahe aapko darshan honge dhanyavad

आपने कहा है कि वेदों के अध्यक्ष सिर करके प्राप्त है उसे 23 अंक प्राप्त हुए तो किधर से नहीं

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Mohitg

Student & Shopkeeper

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मनुष्य के द्वारा वेदों का रोज पढ़ना वेदों का ज्ञान रखना ईश्वर की प्राप्ति हो या ना हो लेकिन वह उसके दुख्तर इस जीवन के झंझट से मुक्ति पा सकता है ईश्वर की प्राप्ति का रास्ता तो मनुष्य के हृदय से निकलने वाली ध्वनि में ही और उसी की सोच में ही है क्या लगता है वही सोच सकता है तो उसका ज्ञान कोई काम का नहीं लेकिन नहीं रखता है वह अच्छी सोच सकता है तो अपने आप ही भगवान को प्राप्त कर लेगा

manushya ke dwara vedo ka roj padhna vedo ka gyaan rakhna ishwar ki prapti ho ya na ho lekin vaah uske dukhtar is jeevan ke jhanjhat se mukti paa sakta hai ishwar ki prapti ka rasta toh manushya ke hriday se nikalne wali dhwani mein hi aur usi ki soch mein hi hai kya lagta hai wahi soch sakta hai toh uska gyaan koi kaam ka nahi lekin nahi rakhta hai vaah achi soch sakta hai toh apne aap hi bhagwan ko prapt kar lega

मनुष्य के द्वारा वेदों का रोज पढ़ना वेदों का ज्ञान रखना ईश्वर की प्राप्ति हो या ना हो लेकि

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