#ChildrensDay2019: क्या आपको ऐसा लगता है की सिस्टम, सियासत, सत्ता, परिवार से लेकर सब बचपन के खिलाफ खड़े हो गए हैं? अपनी राय दीजिए।...


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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि सिस्टम सियासत सत्ता परिवार वगैरह बचपन के खिलाफ खड़े हो गए हैं आजकल के जोरू हैं जयबू स्कूल के रूल्स वह पारिवारिक रुकुंदो वह बच्चों के साथ हैं बच्चों के फेवर में है कि पहले जिस तरह उन्हें बहुत ज्यादा मारा जाता खा जाता जाता था वह अब जो है गवर्नमेंट स्कूल्स पर भी बैन लगा दिया है कि कोई भी टीचर बच्चों को मारेगी नहीं पनिशमेंट जो है वह ज्यादा स्पीक नहीं होनी चाहिए इसके अलावा जो है आजकल बच्चों की पढ़ाई पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाता है और उन्हें कहा जाता है क्यों नहीं खेलने को भी दिया जाए गवर्नमेंट भी इसके लिए बहुत सारे प्रोविजंस कर रही है तो बच्चों के साथ खड़े हैं आजकल आप के रूल्स और रेगुलेशन सुना कि उनके खिलाफ

mujhe aisa bilkul nahi lagta ki system siyasat satta parivar vagera bachpan ke khilaf khade ho gaye hai aajkal ke joru hai jayabu school ke rules vaah parivarik rukundo vaah baccho ke saath hai baccho ke favour mein hai ki pehle jis tarah unhe bahut zyada mara jata kha jata jata tha vaah ab jo hai government schools par bhi ban laga diya hai ki koi bhi teacher baccho ko maregi nahi punishment jo hai vaah zyada speak nahi honi chahiye iske alava jo hai aajkal baccho ki padhai par bahut zyada jor diya jata hai aur unhe kaha jata hai kyon nahi khelne ko bhi diya jaaye government bhi iske liye bahut saare provijans kar rahi hai toh baccho ke saath khade hai aajkal aap ke rules aur regulation suna ki unke khilaf

मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि सिस्टम सियासत सत्ता परिवार वगैरह बचपन के खिलाफ खड़े हो गए है

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Jeet Dholakia

Anchor and Media Professional

3:34
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज चिल्ड्रंस डे है और इसमें पूछा गया है कि क्या आपको ऐसा लगता है कि सिस्टम सियासत सत्ता परिवार से लेकर सब बचपन के खिलाफ है मैं बताना चाहता हूं कि अभी का जो माहौल है देश और दुनिया में दुनिया का तो मैं अभी नहीं बता सकता देश में देश में भेजो माहौल है और यहां पर छोटे बच्चों के लिए मैं बताना चाहता हूं छोटे बच्चे जिस दौर से गुजर रहे हैं उनके पास काफी सारी ऑबसीनिटीज है उनके पास काफी सारी क्यूल से पर फिर भी कहीं ना कहीं वह किसी न किसी एक को दबाव में आकर क्योंकि उनको हम टेंशन नहीं बोल सकते पर स्कूल की तरफ से जो प्रेशर दिया जाता है स्कूल वालों की ओर से जो प्रेशर दिया जाता है होमवर्क ऑपरेशन होता है एग्जामिनेशन का प्रेशर होता है आपेश्वर का प्रेशर होता है स्कूल अटेंड करने का प्रेशर होता है और परिवार के अगर मैं बात को तो सुबह जल्दी उठने का ऑपरेशन होता है तो यह सारे प्रेशर के बीच के आज के बच्चे गिरे हुए होते हैं उनमें से बाहर आने के लिए ही उनको काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है और वो लोगो रूल इस पर यह सारे चक्र में से घूमते घूमते घूमते आते हैं एंड मैं बताना चाहता हूं कि जो बच्चे हैं वह तो छोटे-छोटे बच्चे हैं मुझे नहीं लगता कि के ऊपर किसी भी तरह का दबाव बनाना चाहिए किसी भी तरह का उनको सपोर्ट करना चाहिए कि तुझे यह करना है तुझे करना ही पड़ेगा या तो फिर होमवर्क करना ही पड़ गया तो फिर एग्जामिनेशन में कितने मार्क्स लाने ही पड़ेंगे या तो फिर ऐसे पूछा गया कि सिस्टम भी हमारे यहां ऐसी ना नहीं है चरण प्रणाली सिस्टम नहीं है हमारे यहां की बच्चे खुद से आगे आकर का कुछ अपना हुनर दिखा सकते कुछ खेल दिखा सकते हैं आप मेरे ख्याल से अगर हम फ्रीडम की बात करते हैं तो सच्ची फ्रीडम क्या हो सकती है सही हो सकती है कि आपको जहां भी जाना हो जो वहां पर जाकर जो भी करना हो आप कर सकते हो आज बच्चों के बारे में अगर मैं बताऊं तो बच्चे भी अगर जहां जाना चाहते हैं वह जो भी कुछ करना चाहते हैं जिस तरह से रहना चाहते जिस तरह का खाना खाना चाहते हैं उनके ऊपर कोई रोक-टोक नहीं होनी चाहिए और कोई किसी भी तरह का दबाव नहीं बनना चाहिए और अगर यह हो सकता है तो मेरे ख्याल से कहीं ना कहीं आने वाले दिनों में यही जो बच्चे हैं उस देश के लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं खुद के लिए अच्छा कुछ कर सकते हैं सोसाइटी के लिए कुछ अच्छा अच्छा कर सकते हैं उनको किसी भी तरह के दबाव में रखना बड़ी ही गलत चीज है और यह जो सवाल पूछा गया कि सिस्टम सत्ता तब उनके खिलाफ 5050 वाला मामला है कि थोड़ा बहुत तो उनको ऐसा लगता है कि हम लोग कर पाते हैं करते हैं थोड़ा बहुत उनको ज्यादा दबाव भी बनता है उनके ऊपर यह सारा सिस्टम कार परिवार का ऑपरेशन होता है वही उनके ऊपर हावी हो जाता है जिसके कारण वह खुल के आगे नहीं आ सकते तो आज के दिन में मैं मैं यही बताना चाहूंगा कि आप बच्चों को खुलकर जीने दो और फ्रीडम की सही डेफिनेशन क्या है वह हमको बताओ और उनको वह टोटली फिल्म देखकर आप निश्चिंत हो जाओ

aaj childrans day hai aur isme poocha gaya hai ki kya aapko aisa lagta hai ki system siyasat satta parivar se lekar sab bachpan ke khilaf hai bataana chahta hoon ki abhi ka jo maahaul hai desh aur duniya mein duniya ka toh main abhi nahi bata sakta desh mein desh mein bhejo maahaul hai aur yahan par chote baccho ke liye main bataana chahta hoon chote bacche jis daur se gujar rahe hain unke paas kaafi saree abasinitij hai unke paas kaafi saree kyul se par phir bhi kahin na kahin vaah kisi na kisi ek ko dabaav mein aakar kyonki unko hum tension nahi bol sakte par school ki taraf se jo pressure diya jata hai school walon ki aur se jo pressure diya jata hai homework operation hota hai examination ka pressure hota hai apeshwar ka pressure hota hai school attend karne ka pressure hota hai aur parivar ke agar main baat ko toh subah jaldi uthane ka operation hota hai toh yah saare pressure ke beech ke aaj ke bacche gire hue hote hain unmen se bahar aane ke liye hi unko kaafi jaddojahad karni padti hai aur vo logo rule is par yah saare chakra mein se ghumte ghumte ghumte aate hain and main bataana chahta hoon ki jo bacche hain vaah toh chote chhote bacche hain mujhe nahi lagta ki ke upar kisi bhi tarah ka dabaav banana chahiye kisi bhi tarah ka unko support karna chahiye ki tujhe yah karna hai tujhe karna hi padega ya toh phir homework karna hi pad gaya toh phir examination mein kitne marks lane hi padenge ya toh phir aise poocha gaya ki system bhi hamare yahan aisi na nahi hai charan pranali system nahi hai hamare yahan ki bacche khud se aage aakar ka kuch apna hunar dikha sakte kuch khel dikha sakte hain aap mere khayal se agar hum freedom ki baat karte hain toh sachi freedom kya ho sakti hai sahi ho sakti hai ki aapko jaha bhi jana ho jo wahan par jaakar jo bhi karna ho aap kar sakte ho aaj baccho ke bare mein agar main bataun toh bacche bhi agar jaha jana chahte hain vaah jo bhi kuch karna chahte hain jis tarah se rehna chahte jis tarah ka khana khana chahte hain unke upar koi rok tok nahi honi chahiye aur koi kisi bhi tarah ka dabaav nahi banna chahiye aur agar yah ho sakta hai toh mere khayal se kahin na kahin aane waale dino mein yahi jo bacche hain us desh ke liye kuch accha kar sakte hain khud ke liye accha kuch kar sakte hain society ke liye kuch accha accha kar sakte hain unko kisi bhi tarah ke dabaav mein rakhna badi hi galat cheez hai aur yah jo sawaal poocha gaya ki system satta tab unke khilaf 5050 vala maamla hai ki thoda bahut toh unko aisa lagta hai ki hum log kar paate hain karte hain thoda bahut unko zyada dabaav bhi baata hai unke upar yah saara system car parivar ka operation hota hai wahi unke upar haavi ho jata hai jiske karan vaah khul ke aage nahi aa sakte toh aaj ke din mein main main yahi bataana chahunga ki aap baccho ko khulkar jeene do aur freedom ki sahi definition kya hai vaah hamko batao aur unko vaah totally film dekhkar aap nishchint ho jao

आज चिल्ड्रंस डे है और इसमें पूछा गया है कि क्या आपको ऐसा लगता है कि सिस्टम सियासत सत्ता पर

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

7:04

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चिल्ड्रंस डे 2019 क्या आपको ऐसा लगता है कि सिस्टम सियासत सत्ता परिवार से लेकर सब बचपन के खिलाफ खड़े हो कि अब यह जरूर यह भाव पैदा होता है कि हम चिल्ड्रंस डे मनाते हैं लेकिन चिल्ड्रंस की सुंदरता है चिल्ड्रंस के जो बचपन है उसे हम कहीं न कहीं हर्ट करते हैं हम अपने ही बच्चे हो आपने जहां भी हम देखें तो बच्चों को हम सही शिक्षा देने के लिए या उनका बचपन खेलकूद में जितना अच्छा जाए और वह सुनहरी यादें बचपन की बच्चे लेकर बड़े हो तो हम उसी में कहीं न कहीं लौड़ा डालते हैं सिस्टम जो है वह भी एक तरह का उसमें अरोड़ा डालता है बच्चों के बचपना उनका छीना जा रहा है पहले शिक्षा व्यवस्था में 5 साल के बच्चों को बाल मंदिर में एडमिशन लेते थे अब प्रीस्कूल के नाम पर 3 साल के बच्चों को शिक्षा में धकेल दिया जाता है 3 साल का बच्चा जो है वह घर से अपनी माता से अपने पिता से दूर रहना नहीं चाहता है वह अपने माता-पिता का सानिध्य खासकर माता का स्थान जी बहुत ही चाहता है क्योंकि उसका जो बचपन होता है उसके जो विचार होते हैं कोमल शिक्षा लेने के लिए जाना पड़ता है तो वह इतनी कम उम्र में जाने में उसको बहुत ही बुरा लगता है और वह बहुत रोता है इसके अलावा जो सत्ता है फुल प्रशिक्षण की जो प्रणाली है जो सत्ता समय-समय पर तय करती है हमारे जो मानव संसाधन मंत्री है वह भी इसमें सहयोग नहीं करते हैं और बच्चों को दूसरी स्कूल की जो है इस टाइम वह हमें ना बुक करनी चाहिए ऐसा वह कर सकते हैं लेकिन सत्ता ऐसा नहीं खेल के मैदान पहले बहुत से हुआ करते थे बच्चों को खेल के प्रति रुचि पैदा करना और एक मां-बाप पहले सिखाते थे और उनके साथ खेल लेकिन आजकल समय ऐसा आ गया है कि लोग बाहरी खेल जो होते हैं वह खेल से परहेज करते हैं और मोबाइल के गेम और वीडियो गेम नहीं अपना समय बिताते हैं और मां-बाप को को बढ़ावा भी देखते हैं कि चलो उसने बच्चा बिजी रहेगा लेकिन इस तरह से उसका जो बचपना जो बाहर अपने दोस्तों के साथ तो खेल कर जो सीखता था और जो उसकी शारीरिक कसरत होती थी वह फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम हो गई और तीनों खानपान है बच्चों का वह आजकल बहुत ही जंक फूड की तरफ मुड़ गया है और कहीं ना कहीं अरे पेरेंट्स में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट सहयोग करते हैं बच्चों की जो टीवी देखने की आदत है वह भी उस पर कंट्रोल लगाने से एवरेज करते हैं इस तरह से आज के युग में जो बचपना है वह सिर्फ टीवी मोबाइल गेम मोबाइल वीडियो गेम और जंक फूड इस सबसे बच्चे के ऊपर मानसिक असर खराब पड़ती है और वह किसी का भी बचपन से ही वह शिकार हो जाता है उसका बीएमआई बड़े जंक फूड की वजह से उसके जो प्रोटींस विटामिंस और कैलोरी जो है जो मिलने चाहिए वह नहीं मिलते हैं और कार्बोहाइड्रेट जाता मिलने से वह भी सिटी की ओर बढ़ता है कई बच्चे हम देखेंगे कि बचपन में उनको अगर छोटे बच्चों को कर दिया जाए कि आपको 200 या 400 मीटर दौड़ ना है तो को दौड़ना पसंद नहीं करेंगे जबकि पहले लोग पकड़ जाओ और दिल्ली डंडा और ऐसे जो आंगन की खेल खेलते थे मैदान के खेल खेलते थे और आनंद लेते जो किया उसका धीमे-धीमे प्रचलन कम होता जा रहा है क्योंकि खेल के मैदानी कम बचे सड़क पर अभी क्रिकेट कोई बच्चे खेल लेते हैं लेकिन उसमें भी इतनी फिजिकल एक्सरसाइज नहीं होती हालांकि बच्चों को हमें प्रेरित करना पड़ता है कि वह ऐसा खेल खेलने जिससे उनको भूख लगे लेकिन भूख नहीं लगती है बैठकर गेम खेलने से और फिर हम को खिला देते हैं बच्चे अपना सच बोल कर लेते इसलिए चिल्ड्रंस डे मनाने हम को सही तरीके से बनाना है तो हम अपने अपने सब लोग बच्चों को कम से कम वीडियो और यह जो तेरी इससे जितना हो सके मर्यादा में रखे जंक फूड मर्यादा में चलाएं और स्कूल जाने की परंपरा है 3 साल में उसके जगह उनको चार से पांच साल बाद ही भेजें कोई बच्चा पीछे नहीं रहेगा सीमन भावना से हमें ग्रसित नहीं होना चाहिए क्योंकि बचपन में बच्चे विरोध नहीं करेंगे जाहर कुछ बच्चे विरोध करते हैं लेकिन हम उनके ऊपर कुछ सोच नहीं सकते क्योंकि बचपन उसी को कहते हैं कि बचपना उसी को करते हैं क्योंकि वह निर्दोष होता है और वह अपने निर्दोष था की वजह से सबसे सब इंसानों से प्रेम प्यार और सम्मान के लिए असर रखता है जो हम सिर्फ डे मना कर नहीं दे सकते उसको रियल में जरूर का बचपन हमें देना चाहिए धन्यवाद

childrans day 2019 kya aapko aisa lagta hai ki system siyasat satta parivar se lekar sab bachpan ke khilaf khade ho ki ab yah zaroor yah bhav paida hota hai ki hum childrans day manate hain lekin childrans ki sundarta hai childrans ke jo bachpan hai use hum kahin na kahin heart karte hain hum apne hi bacche ho aapne jaha bhi hum dekhen toh baccho ko hum sahi shiksha dene ke liye ya unka bachpan khelkud mein jitna accha jaaye aur vaah sunahari yaadain bachpan ki bacche lekar bade ho toh hum usi mein kahin na kahin laura daalte hain system jo hai vaah bhi ek tarah ka usme arora dalta hai baccho ke bachapana unka chinaa ja raha hai pehle shiksha vyavastha mein 5 saal ke baccho ko baal mandir mein admission lete the ab preschool ke naam par 3 saal ke baccho ko shiksha mein dhakel diya jata hai 3 saal ka baccha jo hai vaah ghar se apni mata se apne pita se dur rehna nahi chahta hai vaah apne mata pita ka sanidhya khaskar mata ka sthan ji bahut hi chahta hai kyonki uska jo bachpan hota hai uske jo vichar hote hain komal shiksha lene ke liye jana padta hai toh vaah itni kam umr mein jaane mein usko bahut hi bura lagta hai aur vaah bahut rota hai iske alava jo satta hai full prashikshan ki jo pranali hai jo satta samay samay par tay karti hai hamare jo manav sansadhan mantri hai vaah bhi isme sahyog nahi karte hain aur baccho ko dusri school ki jo hai is time vaah hamein na book karni chahiye aisa vaah kar sakte hain lekin satta aisa nahi khel ke maidan pehle bahut se hua karte the baccho ko khel ke prati ruchi paida karna aur ek maa baap pehle sikhaate the aur unke saath khel lekin aajkal samay aisa aa gaya hai ki log bahri khel jo hote hain vaah khel se parhej karte hain aur mobile ke game aur video game nahi apna samay Bitate hain aur maa baap ko ko badhawa bhi dekhte hain ki chalo usne baccha busy rahega lekin is tarah se uska jo bachapana jo bahar apne doston ke saath toh khel kar jo sikhata tha aur jo uski sharirik kasrat hoti thi vaah physical activity bahut kam ho gayi aur tatvo khanpan hai baccho ka vaah aajkal bahut hi junk food ki taraf mud gaya hai aur kahin na kahin are parents mein direct aur indirect sahyog karte hain baccho ki jo TV dekhne ki aadat hai vaah bhi us par control lagane se average karte hain is tarah se aaj ke yug mein jo bachapana hai vaah sirf TV mobile game mobile video game aur junk food is sabse bacche ke upar mansik asar kharab padti hai aur vaah kisi ka bhi bachpan se hi vaah shikaar ho jata hai uska BMI bade junk food ki wajah se uske jo protins vitamins aur calorie jo hai jo milne chahiye vaah nahi milte hain aur carbohydrate jata milne se vaah bhi city ki aur badhta hai kai bacche hum dekhenge ki bachpan mein unko agar chote baccho ko kar diya jaaye ki aapko 200 ya 400 meter daudh na hai toh ko daudana pasand nahi karenge jabki pehle log pakad jao aur delhi danda aur aise jo aangan ki khel khelte the maidan ke khel khelte the aur anand lete jo kiya uska dhime dhime prachalan kam hota ja raha hai kyonki khel ke maidaani kam bache sadak par abhi cricket koi bacche khel lete hain lekin usme bhi itni physical exercise nahi hoti halaki baccho ko hamein prerit karna padta hai ki vaah aisa khel khelne jisse unko bhukh lage lekin bhukh nahi lagti hai baithkar game khelne se aur phir hum ko khila dete hain bacche apna sach bol kar lete isliye childrans day manne hum ko sahi tarike se banana hai toh hum apne apne sab log baccho ko kam se kam video aur yah jo teri isse jitna ho sake maryada mein rakhe junk food maryada mein chalaye aur school jaane ki parampara hai 3 saal mein uske jagah unko char se paanch saal baad hi bheje koi baccha peeche nahi rahega simon bhavna se hamein grasit nahi hona chahiye kyonki bachpan mein bacche virodh nahi karenge jahar kuch bacche virodh karte hain lekin hum unke upar kuch soch nahi sakte kyonki bachpan usi ko kehte hain ki bachapana usi ko karte hain kyonki vaah nirdosh hota hai aur vaah apne nirdosh tha ki wajah se sabse sab insano se prem pyar aur sammaan ke liye asar rakhta hai jo hum sirf day mana kar nahi de sakte usko real mein zaroor ka bachpan hamein dena chahiye dhanyavad

चिल्ड्रंस डे 2019 क्या आपको ऐसा लगता है कि सिस्टम सियासत सत्ता परिवार से लेकर सब बचपन के ख

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

1:27
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी नहीं यह आपकी सोच बहुत गलत है पहले टाइम में बच्चों पर इतना ख्याल नहीं किया जाता था जिसका स्कूलों में घर पर बच्चों का ख्याल किया जाता है बच्चों को लुक्का क्या अच्छा किया जाता है आजकल बच्चों में जितनी ज्यादा टूरी तोर एक्टिविटी साल के अंदर होती है उस टाइम के पहले ऐसे 20 25 साल पहले यह बहुत कम थी धीरे-धीरे वह बच्चों को खुद ही अपने आप पर अपने आप को ढालने के लिए तैयार किया जाता है आज के लिए टाइम है क्योंकि प्रेक्टिस जो है हर चीज में बच्चों को जाने की जानकारी दी जाती है ऐसा नहीं है कि आज के समाज में या रसरासन जो है प्रशासन है परिवार जो है उनको बचपन से साथ खिलवाड़ कर रहा है कोई खिलवाड़ नहीं करना आज के टाइम में अब यह देखे पहले हमें 11वीं 12वीं करने के बाद अपना अपना कैरियर ढूंढना पड़ता था आज वह दसवीं के बाद ही अब खैरियत ढूंढने की जरूरत देते हैं डिफरेंट वर्ड की जो लैंग्वेज है वह सिखाते हैं दूसरा यह है आपका जो जान उत्सव दिखा जाता है अगर आप चाहें तो उसके इंजीनिइंग के एग्जाम के लिए मेडिकल आम के लिए अब 10वीं 11वीं 12वीं में तैयारी शुरू कर सकते हैं जिससे आपको 12वीं के बाद लोडी पड़ेगा और आप कहीं भी जाकर नहीं पकड़ सकते हैं ऐसा नहीं है कि सत्तापक्ष जो है इस समय बच्चों के खिलाफ है बल्कि बच्चों को शुरू से ही उतारिए में डालता है अब बच्चे अच्छे खैरियत बनाकर आगे जा रहे हैं

ji nahi yah aapki soch bahut galat hai pehle time mein baccho par itna khayal nahi kiya jata tha jiska schoolon mein ghar par baccho ka khayal kiya jata hai baccho ko luckka kya accha kiya jata hai aajkal baccho mein jitni zyada turi tor activity saal ke andar hoti hai us time ke pehle aise 20 25 saal pehle yah bahut kam thi dhire dhire vaah baccho ko khud hi apne aap par apne aap ko dhalne ke liye taiyar kiya jata hai aaj ke liye time hai kyonki practice jo hai har cheez mein baccho ko jaane ki jaankari di jaati hai aisa nahi hai ki aaj ke samaj mein ya rasarasan jo hai prashasan hai parivar jo hai unko bachpan se saath khilwad kar raha hai koi khilwad nahi karna aaj ke time mein ab yah dekhe pehle hamein vi vi karne ke baad apna apna carrier dhundhana padta tha aaj vaah dasavi ke baad hi ab khairiyat dhundhne ki zarurat dete hain different word ki jo language hai vaah sikhaate hain doosra yah hai aapka jo jaan utsav dikha jata hai agar aap chahain toh uske injiniing ke exam ke liye medical aam ke liye ab vi vi vi mein taiyari shuru kar sakte hain jisse aapko vi ke baad lodi padega aur aap kahin bhi jaakar nahi pakad sakte hain aisa nahi hai ki sattapaksh jo hai is samay baccho ke khilaf hai balki baccho ko shuru se hi utariye mein dalta hai ab bacche acche khairiyat banakar aage ja rahe hain

जी नहीं यह आपकी सोच बहुत गलत है पहले टाइम में बच्चों पर इतना ख्याल नहीं किया जाता था जिसका

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