मनोविज्ञान के आधार पर किसी मनुष्य को कैसे पकड़े कि वह झूठ बोल रहा है?...


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Nita Nayyar

Writer ,Motivational Speaker, Social Worker n Counseller.

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मनोविज्ञान के आधार पर हम कैसे पता करें कि सामने वाला व्यक्ति झूठ बोल रहा है या सच बोल रहा है इसको बहुत ही अलग ढंग से अगर लें तो हम पकड़ सकते हैं उसके झूठ को बहुत आसानी से लेकिन उसके लिए हमें थोड़ी सी ट्रिक लगानी पड़ती हैं एक बार क्या हुआ मैं अपनी क्लास में होम साइंस पढ़ा रही थी तो एग्जीबिशन लगनी थी स्कूल में एग्जीबिशन में बहुत सुंदर-सुंदर चीजें लगी थी एक किसी बच्चे ने बेस्ट आउट ऑफ बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट भी बनाया था और वह वॉल हैंगिंग बहुत ही खूबसूरत बनी थी और जितने भी लोग देखने आ रहे थे प्रदर्शनी को हो सके तो एक लड़की बड़ी अजीब सी निगाहों से बाहर बार मेरी ही स्टूडेंट्स को देख रही थी तो बाद में जब एग्जिबिशन उतर गई हम आपका सामान बांटने लगे तो वह पेंटिंग गायब थी अब वो पेंटिंग गायब थी तू कौन ले गया सब अपना-अपना सामान ले गए जिस लड़की की वह पेंटिंग कि वह रो-रोकर बेहाल हो गई और समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे पता करें कि यह कैसे हो गया उसके बाद यह हुआ कि हम लोग कुछ जो गेस्ट आ रहे थे उनको हम खाना-पीना और कुछ नाश्ता कर कर रहे थे तो हमारी दो प्लेट भी गायब हो गए तो यह सब चीजें हम नोट कर रहे थे कि क्या-क्या चीजें गायब हैं अब एक लड़की 1 हफ्ते के लिए स्कूल से गायब हो गई स्कूल ही नहीं आई तो हमें कुछ शक उसके ऊपर हुआ और जब वह आई तो हमने उसे पूछा तो वह बिलकुल मुकर गई दुनिया भर में उसका झूठ पकड़ना था वो कहने लगी नहीं मैंने तो कभी ऐसा काम किया ही नहीं आप मेरे घर चलिए आप सब देख सकती हैं बहुत जद्दोजहद के बाद क्या हुआ मैंने ऐसे ही छुट्टी कह दिया कि दो प्लेट को तो चलो जाने दो और हमारी पेंटिंग भी है गायब है अब उसका क्या करें कैसे करेंगे कैसे भरेंगे उस लड़की को कैसे देंगे तो वह छूटते ही बोली कि प्लेटलेट तो मैं नहीं लगे लेकिन पेंटिंग का तो मैं बता सकती हूं और उसने पेंटिंग का जूता उसका पकड़ा गया और उसने झट से बोला कि मैंने कोई प्लेटेड लेटर नहीं चढ़ाएं मुझे तो बस पेंटिंग का बताएं तो मैंने का पेंटिंग का क्या पता है कि वह मेरे सामान के साथ बंद कर गलती से मेरे घर चली गई है इस तरीके से हमने दो बातों को जब लिंक किया तो एकजुट उसका पकड़ा गया और इस तरीके से हमने चोर को पकड़ लिया तो मनोवैज्ञानिक ढंग से किसी पर दबाव डालें तो हम झूठे को बिल्कुल पहचान सकते हैं

manovigyan ke aadhar par hum kaise pata kare ki saamne vala vyakti jhuth bol raha hai ya sach bol raha hai isko bahut hi alag dhang se agar le toh hum pakad sakte hain uske jhuth ko bahut aasani se lekin uske liye hamein thodi si trick lagani padti hain ek baar kya hua main apni class me home science padha rahi thi toh egjibishan lagani thi school me egjibishan me bahut sundar sundar cheezen lagi thi ek kisi bacche ne best out of best out of west bhi banaya tha aur vaah wall hanging bahut hi khoobsurat bani thi aur jitne bhi log dekhne aa rahe the pradarshani ko ho sake toh ek ladki badi ajib si nigaahon se bahar baar meri hi students ko dekh rahi thi toh baad me jab exhibition utar gayi hum aapka saamaan baantne lage toh vaah painting gayab thi ab vo painting gayab thi tu kaun le gaya sab apna apna saamaan le gaye jis ladki ki vaah painting ki vaah ro rokar behal ho gayi aur samajh me nahi aa raha tha ki kaise pata kare ki yah kaise ho gaya uske baad yah hua ki hum log kuch jo guest aa rahe the unko hum khana peena aur kuch nashta kar kar rahe the toh hamari do plate bhi gayab ho gaye toh yah sab cheezen hum note kar rahe the ki kya kya cheezen gayab hain ab ek ladki 1 hafte ke liye school se gayab ho gayi school hi nahi I toh hamein kuch shak uske upar hua aur jab vaah I toh humne use poocha toh vaah bilkul mukar gayi duniya bhar me uska jhuth pakadna tha vo kehne lagi nahi maine toh kabhi aisa kaam kiya hi nahi aap mere ghar chaliye aap sab dekh sakti hain bahut jaddojahad ke baad kya hua maine aise hi chhutti keh diya ki do plate ko toh chalo jaane do aur hamari painting bhi hai gayab hai ab uska kya kare kaise karenge kaise bharenge us ladki ko kaise denge toh vaah chutte hi boli ki platelet toh main nahi lage lekin painting ka toh main bata sakti hoon aur usne painting ka juta uska pakada gaya aur usne jhat se bola ki maine koi plated letter nahi chadhaen mujhe toh bus painting ka bataye toh maine ka painting ka kya pata hai ki vaah mere saamaan ke saath band kar galti se mere ghar chali gayi hai is tarike se humne do baaton ko jab link kiya toh ekjut uska pakada gaya aur is tarike se humne chor ko pakad liya toh manovaigyanik dhang se kisi par dabaav Daalein toh hum jhuthe ko bilkul pehchaan sakte hain

मनोविज्ञान के आधार पर हम कैसे पता करें कि सामने वाला व्यक्ति झूठ बोल रहा है या सच बोल रहा

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