कुछ अलिखित सामाजिक नियम क्या हैं जिन्हें सभी को जानना चाहिए?...


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सामाजिक लिए क्या उपाय है यदि आप आएंगे आपको हमेशा उसकी ऐसा सहयोग करना है कोई आपसे पूछ रहा था कि मैंने कोई कानून नहीं आपका सहयोग करिए समाज के यहां तो आज जल्दी का मौसम में पाए जाने वाला तत्व के प्रयोग करें

samajik liye kya upay hai yadi aap aayenge aapko hamesha uski aisa sahyog karna hai koi aapse puch raha tha ki maine koi kanoon nahi aapka sahyog kariye samaj ke yahan toh aaj jaldi ka mausam me paye jaane vala tatva ke prayog kare

सामाजिक लिए क्या उपाय है यदि आप आएंगे आपको हमेशा उसकी ऐसा सहयोग करना है कोई आपसे पूछ रहा थ

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समाज का अर्थ है ऐसा एक ग्रुप जिसमें हम एक साथ प्रेम पूर्वक रहते और प्रेम के लिए एक दूसरे से गहरे जुड़ना आवश्यक जब तक आपके भीतर दूसरे जो विकसित विकास कर रहे हैं बढ़ रहे हैं उन्हें देखकर एकता दिवस होता रहेगा तब तक सामाजिक रूप से प्रेम की बात नहीं की जा सकती और विकास भी नहीं हो सकता सामान्य रूप से विकास तभी संभव है जब आप दूसरे के दुख में दुखी और दूसरे के सुख में सुखी होना सीख ले यह चीजें अलिखित होती है सब जगह नहीं होती लेकिन बहुत जगह की चर्चा होती है इससे बड़ा कोई अच्छा संदेश

samaj ka arth hai aisa ek group jisme hum ek saath prem purvak rehte aur prem ke liye ek dusre se gehre judna aavashyak jab tak aapke bheetar dusre jo viksit vikas kar rahe hain badh rahe hain unhe dekhkar ekta divas hota rahega tab tak samajik roop se prem ki baat nahi ki ja sakti aur vikas bhi nahi ho sakta samanya roop se vikas tabhi sambhav hai jab aap dusre ke dukh me dukhi aur dusre ke sukh me sukhi hona seekh le yah cheezen alikhit hoti hai sab jagah nahi hoti lekin bahut jagah ki charcha hoti hai isse bada koi accha sandesh

समाज का अर्थ है ऐसा एक ग्रुप जिसमें हम एक साथ प्रेम पूर्वक रहते और प्रेम के लिए एक दूसरे स

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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

1:02

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देखिए एक लिखित सामाजिक नियम यह होता है कि कर भला तो हो भला कहने का मतलब यह है कि आप के साथ अगर कोई भला करे तो आपको उसको भला करना चाहिए और उसी तरीके से आप अगर भला करेंगे तो आप देखेंगे कि लोग भी आपका भला करें हम लोग जो हैं अक्सर भूल जाते हैं उन सब चीजों को उन लोगों को भूल जाते हैं जो हमारे साथ अच्छा करते हैं और हम उनको उसको वापस देने की चेष्टा नहीं करते हैं हमें एक जिंदगी में नियम बना देना चाहिए कि अगर कोई भी आदमी हमारे साथ अच्छा करता है तो हम उसका जितना अच्छा कर सकते हैं हमें करने का प्रयत्न करना चाहिए अगर कोई हमारे साथ बुरा करता है तो बुराई को भले ही हम उसको वापस ना करें लेकिन अच्छाई जरूर वापस करें और अगर हम ऐसा करेंगे तो हम सोसाइटी में बहुत अच्छे तरीके से जुड़ पाएंगे और अच्छे नागरिक

dekhie chahiye ek chahiye likhit samajik niyam yeh hota hai ki kar bhala to ho bhala kehne ka chahiye matlab yeh hai ki aap ke saath agar koi bhala kare to aapko chahiye usko bhala karna chahiye aur ussi tarike se aap agar bhala karenge to aap dekhenge ki log bhi aapka bhala kare chahiye hum log jo hain aksar bhul jaate hain un sab chijon ko un logo chahiye ko bhul jaate hain jo hamare saath accha karte hain aur hum unko usko wapas dene ki cheshta nahi karte hain hume ek chahiye zindagi mein niyam bana dena chahiye ki agar koi bhi aadmi hamare saath accha karta hai to hum uska jitna accha kar sakte hain hume karne ka chahiye prayatn chahiye karna chahiye agar koi hamare saath bura karta hai to burayi ko bhale hi hum usko wapas na kare chahiye lekin acchai jarur wapas kare chahiye aur agar hum aisa karenge to hum society mein bahut acche tarike se jud payenge aur acche nagarik

देखिए एक लिखित सामाजिक नियम यह होता है कि कर भला तो हो भला कहने का मतलब यह है कि आप के साथ

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ganesh pazi

Motivator

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज के कोई भी नियम लिखा हुआ नहीं है सारे समझने की चीजें समाज के सबसे बड़ा नियम यह है कि आप सिक्का 4GB निभाई है दूसरा सहयोग के लिए तत्पर रहें क्योंकि समाज में संबंध रहते हैं शिष्टाचार के ऊपर डिपेंड करता रिश्ते डिपेंड करते सहयोग के ऊपर इन दो चीजों को कभी नहीं भूलना चाहिए और यथासंभव का हर हाल में प्रयोग किया जाना चाहिए

samaaj ke koi bhi niyam likha hua nahi hai sare samjhne ki cheezen samaj ke sabse bada niyam yeh hai ki aap sikka 4GB nibhaai hai doosra sahyog ke liye tatpar rahen kyonki samaj mein sambandh rehte hain shishtachar ke upar depend karta rishte depend karte sahyog ke upar in do chijon ko kabhi nahi bhoolna chahiye aur yathasambhav ka chahiye har haal mein prayog kiya chahiye jana chahiye

समाज के कोई भी नियम लिखा हुआ नहीं है सारे समझने की चीजें समाज के सबसे बड़ा नियम यह है कि आ

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Mahjabeen Ali

RJ | Cook | TV Anchor | VO Artist

1:44
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे तीन बहुत ही जरूरी नियम लगते हैं जो कि कहीं कहीं नहीं गए हैं कहीं लिखे नहीं गए हैं लेकिन फॉलो करने चाहिए पहला तो की अन्य एसेसरी किसी की जिंदगी में घुसकर और उसकी जिंदगी की पर्सनल लाइफ को खदेड़ना अच्छी चीज नहीं है यह सोसाइटी में नहीं होना चाहिए लोगों को यह करना बंद कर देना चाहिए वह जो लोगों की जिंदगी में घुसकर जाने की कोशिश करते रहते हैं सबकी क्या हो रहा है क्यों हो रहा है कैसे हो रहा है कहां हो रहा है पहली शादियों को लेकर कि जो सवाल खड़े होते हैं कि अब तो तुम्हारी शादी नहीं हुई क्यों नहीं हुई बहुत ही अच्छी लगती और यह पूछना नहीं तेरी मेरी दूसरी चीज लगती है लगती है कि लोग जो है वह अक्सर दूसरे लोगों की सैलरी जो है उनको जाने में बड़ा इंटरेस्ट रखते हैं एंड सैलरी ऐसी चीज है जो कि पर्सनल चीज लगती है मुझे कि यह कोई इंसान बताना चाहता है कोई नहीं बताना चाहता है पसंद को डिपेंड करता है और यह जरूरी नहीं है कि आप अपसेट हो कर यह सवाल किसी से भी कर ले कि आपको कितनी सैलरी मिलती है यह एक पर्सनल चीज़ है जो लोगों को पता होना चाहिए कि नहीं पूछनी चाहिए तीसरी चीज मुझे लगती है अब यह लगती है कि रिलीजन जो कि एक ऐसी चीज है भी चीज बड़ी पोस्ट है कोई अगर इंसान अपना रिलेशन नहीं फॉलो कर रहा है तो उसको रहने दे अगर वह फॉलो करना चाहता है तो वह जरूर करेगा अगर वह नास्तिक है तो वह नहीं करेगा अगर वह आशिक है तो वह करेगा और अगर वह आशिक है और यह सोचता है कि उसको अपना रिलीज नहीं फॉलो करना और कोई दूसरा रिलीज अनफॉलो करना है तो वह भी कर नहीं देना चाहिए इंसान को इन सारी चीजों में बहुत ज्यादा टांग नहीं हरा के रखनी चाहिए और लोगों को इंसाफ 571 सोसाइटी को

mujhe teen bahut hi zaroori niyam lagte hai jo ki kahin kahin nahi gaye hai kahin likhe nahi gaye hai lekin follow karne chahiye pehla to ki anya Accessory kisi ki zindagi mein ghusakar aur uski zindagi ki personal life ko khadedana acchi cheez nahi hai yeh society mein nahi hona chahiye logo chahiye ko yeh karna band kar dena chahiye wah jo logo chahiye ki zindagi mein ghusakar jaane ki koshish karte rehte hai sabaki kya ho raha hai kyon ho raha hai kaise ho raha hai kahaan ho raha hai pehli shadiyo ko lekar ki jo sawal khade hote hai ki ab to tumhari shadi nahi hui kyon nahi hui bahut hi acchi lagti aur yeh poochna nahi teri meri dusri cheez lagti hai lagti hai ki log jo hai wah aksar dusre chahiye logo chahiye ki salary jo hai unko jaane mein bada interest rakhate hai end salary aisi cheez hai jo ki personal cheez lagti hai mujhe ki yeh koi insaan batana chahta hai koi nahi batana chahta hai pasand ko depend karta hai aur yeh zaroori nahi hai ki aap upset ho kar yeh sawal kisi se bhi kar le ki aapko chahiye kitni salary milti hai yeh ek chahiye personal cheese hai jo logo chahiye ko pata hona chahiye ki nahi puchani chahiye teesri cheez mujhe lagti hai ab yeh lagti hai ki religion jo ki ek chahiye aisi cheez hai bhi cheez baadi post hai koi agar insaan apna relation nahi follow kar raha hai to usko rehne de agar wah follow karna chahta hai to wah jarur karega agar wah nastik hai to wah nahi karega agar wah aashik hai to wah karega aur agar wah aashik hai aur yeh sochta hai ki usko apna release nahi follow karna aur koi doosra release unfollw karna hai to wah bhi kar nahi dena chahiye insaan ko in saree chijon mein bahut zyada taang nahi hara ke rakhni chahiye aur logo chahiye ko insaaf 571 society ko

मुझे तीन बहुत ही जरूरी नियम लगते हैं जो कि कहीं कहीं नहीं गए हैं कहीं लिखे नहीं गए हैं लेक

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे नहीं लगता है कि नियमों में हमें अपनी जिंदगी को बांधना चाहिए समाज को हम भी लोग बनाते हैं छोटे-छोटे समुदायों से ही समाज बनता है और समाज में वही नियम चलते हैं जिन्हें हम लोग तवज्जो देते हैं जिन्हें हम लोग मानते हैं और मुझे लगता है कि हर इंसान की सोच अलग होती है इसलिए हर इंसान के नियम भी अलग हो सकते हैं क्योंकि जरूरी नहीं है कि जो समाज के गणमान्य लोगों ने नियम बनाए हैं उन्हें हर आदमी माने उनके हिसाब से वह नियम उनके अनुकूल हो या नहीं हो जरूरी नहीं है इसलिए मुझे लगता है कि जहां हमारे देश में इतनी स्वतंत्रता है वहां समाज को भी की स्वतंत्रता लोगों को देनी चाहिए अपने हिसाब से अपने नियमों के हिसाब से जी का एक और जी सके उन पर कोई प्रतिबंध नहीं हो आज समाज में इतनी कुरीतियां हैं जिनको हटाकर आज की पीढ़ी जीना चाहती है तो मुझे लगता है कि जो हमारे बड़े लोग हैं जो हमारे पूर्वज हैं हमारे बुजुर्ग हैं उन्हें उन बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए और अगर वह समाज की कुरीति को खत्म करना चाहते हैं तो उसमें उन्हें उनका साथ देना चाहिए उनका सहयोग करना चाहिए ताकि समाज से कुरीतियां खत्म हो सके ना कि उन पुरुषों को चलाने के लिए उन बच्चों पर दबाव डालना चाहिए इस तरह से बहुत से ऐसे नियम हैं जो इंसान मजबूरी में मानता है जो समाज ने बना रखे हैं और ज्यादातर ऐसा होता है कि एक एक बड़ा वर्ग जो हम प्रभुत्व रखता है जो धनी लोग हैं जो समाज में अपनी पैठ रखते हैं वह लोग कुछ नियम बना देते हैं और उसी पर सबको चलना पड़ता है तो मुझे लगता है यह चीज नहीं होनी चाहिए इंसान को अपने हिसाब से जीने की स्वतंत्रता होनी चाहिए उसके अपने नियम अपने कायदे अपने कानून होने चाहिए

mujhe nahi lagta hai ki niyamon chahiye mein hume apni zindagi ko bandhana chahiye samaj ko hum bhi log banate hain chote chote samudayo se hi samaj baata hai aur samaj mein wahi niyam chalte hain jinhen chahiye hum log tavajjo dete hain jinhen chahiye hum log manate hain aur mujhe lagta hai ki har insaan ki soch alag hoti hai isliye har insaan ke niyam bhi alag ho sakte hain kyonki zaroori nahi hai ki jo samaj ke ganmanya logo chahiye ne niyam banaye hain unhen chahiye har aadmi mane unke hisab se wah niyam unke anukul ho ya nahi ho zaroori nahi hai isliye mujhe lagta hai ki jaha hamare desh mein itni svatantrata hai wahan samaj ko bhi ki svatantrata logo chahiye ko deni chahiye apne hisab se apne niyamon chahiye ke hisab se G ka chahiye ek chahiye aur G sake un par koi pratibandh nahi ho aaj samaj mein itni kuritiyan hain jinako hatakar aaj ki pidhi jeena chahti hai to mujhe lagta hai ki jo hamare bade log hain jo hamare poorvaj hain hamare bujurg hain unhen chahiye un baccho ka chahiye hausala badhana chahiye aur agar wah samaj ki kuriti ko khatam karna chahte hain to usamen chahiye unhen chahiye unka saath dena chahiye unka sahyog karna chahiye taki samaj se kuritiyan khatam ho sake na ki un purushon ko chalane ke liye un baccho par dabaav dalna chahiye is tarah se bahut se aise niyam hain jo insaan majburi mein manata hai jo samaj ne bana rakhe hain aur jyadatar aisa hota hai ki ek chahiye ek chahiye bada varg jo hum parbhutwa rakhta hai jo dhani log hain jo samaj mein apni paith rakhate hain wah log kuch niyam bana dete hain aur ussi par sabko chalna padata hai to mujhe lagta hai yeh cheez nahi honi chahiye insaan ko apne hisab se jeene ki svatantrata honi chahiye uske apne niyam apne kayade apne kanoon hone chahiye

मुझे नहीं लगता है कि नियमों में हमें अपनी जिंदगी को बांधना चाहिए समाज को हम भी लोग बनाते ह

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Rajsi

Sports Commentator & Reporter

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दिखने में तो सब जायज है कि असामाजिक नियम क्या होने चाहिए बट पर्सनली मुझे ऐसा लगता है कि समय समय पर सामाजिक नियमों में बदलाव भी आता है जो कि लिखित में नहीं आ पाता है तो टाइम पर टाइम आपको अपने कल्चर के हिसाब से अपने सोसाइटी के सबसे ज्यादा मानसिक नियमों को बदलना चाहिए जो इंडिया में या वर्ड में भी हम निबंध लिख नहीं पाते हैं वह चैनल है जो खिलाने चाहिए जैसे कि हम पहले के टाइम पर औरतों का घूंघट करना बहुत जरूरी हुआ करता था सामाजिक नियमों में था उसके बाद में सर्दी में भी उचित हट गई फिर जींस पर आ गया फिर वह स्थान पर आ गया जोकि जोकि सब को बजने चाहिए यह सब औरतों के दिमाग में चेंज नहीं होंगे यह सब के सब के साथ चेंज होने की जो सोसाइटी में और लोग भी मूवीस एक्सेप्ट करें कि आप राशन ऐसा है आप सुनाइए कैसी है कि लड़कियां अपनी मर्जी से कपड़े पहन सकती हैं तो यह चीजें जरूरी है जो सब में बदलाव लाएं

dikhne mein to sab jayaj hai ki asamajik niyam kya hone chahiye but personally mujhe aisa lagta hai ki samay samay par samajik niyamon chahiye mein badlav bhi aata hai jo ki likhit mein nahi aa pata hai to time par time aapko chahiye apne culture ke hisab se apne society ke sabse zyada mansik niyamon chahiye ko badalna chahiye jo india mein ya word mein bhi hum nibandh likh nahi paate hain wah channel hai jo khilane chahiye jaise ki hum pehle ke time par auraton ka chahiye ghunghat karna bahut zaroori hua karta tha samajik niyamon chahiye mein tha uske baad mein sardi mein bhi uchit hut gayi phir jeans par aa gaya phir wah sthan par aa gaya joki joki sab ko bajane chahiye yeh sab auraton ke dimag mein change nahi honge yeh sab ke sab ke saath change hone ki jo society mein aur log bhi Movies except kare chahiye ki aap raashan aisa hai aap sunaiye kaisi hai ki ladkiyan apni marji se kapde pahan sakti hain to yeh cheezen zaroori hai jo sab mein badlav laen

दिखने में तो सब जायज है कि असामाजिक नियम क्या होने चाहिए बट पर्सनली मुझे ऐसा लगता है कि सम

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