#AYODHYAVERDICT: क्या आप सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से सहमत हैं?...


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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे जैसे कि आज के चर्चा का विषय है कि क्या आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत हैं तो यहां बताना चाहेंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद अपने जजमेंट में कहा है कि यह जो फैसला को सुना रहे हैं वह किसी धर्म जाति संप्रदाय या किसी की भावनाओं को लेकर नहीं है यह फैसला तथ्यों के आधार पर कानून की दृष्टि से जो तथ्य एएसआई ने प्रोवाइड कराए हैं उसके बेसिस पर उन्होंने यह फैसला सुनाया है उन्होंने खुद अपने वडिक में बोला भी है तो जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाई दिया है और एक पक्ष को उन्होंने रामलला का पैसे के लिए उन्होंने वहां पर समर्थन किया है कि हम उनका मंदिर बनना चाहिए वह जमीन राम जन्मभूमि न्यास को मिलनी चाहिए तो अब यहां पर और कोई संशय नहीं रह जाता है धन्यवाद

mere jaise ki aaj ke charcha ka vishay hai ki kya aap supreme court ke faisle se sahmat hain toh yahan bataana chahenge ki supreme court ne khud apne judgement mein kaha hai ki yah jo faisla ko suna rahe hain vaah kisi dharam jati sampraday ya kisi ki bhavnao ko lekar nahi hai yah faisla tathyon ke aadhaar par kanoon ki drishti se jo tathya ASI ne provide karae hain uske basis par unhone yah faisla sunaya hai unhone khud apne vadik mein bola bhi hai toh jab supreme court ne faisla sunayi diya hai aur ek paksh ko unhone ramalala ka paise ke liye unhone wahan par samarthan kiya hai ki hum unka mandir banna chahiye vaah jameen ram janmbhoomi nyas ko milani chahiye toh ab yahan par aur koi sanshay nahi reh jata hai dhanyavad

मेरे जैसे कि आज के चर्चा का विषय है कि क्या आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत हैं तो यहां

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अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मैं सहमत हूं कोरिया का टेस्ट मैच भारत में भगवान श्री रामचंद्र का मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त पक्षों ने मुस्लिम पक्ष ने 20 कमा लिया है और भारत में किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं रहा है

ayodhya masle par supreme court ke faisle se main sahmat hoon korea ka test match bharat mein bhagwan shri ramachandra ka mandir banne ka marg prashast pakshon ne muslim paksh ne 20 kama liya hai aur bharat mein kisi prakar ka koi vivaad nahi raha hai

अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मैं सहमत हूं कोरिया का टेस्ट मैच भारत में भगवान

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N. K. SINGH 'Nitesh'

Educator, Life Coach, Writer and Expert in British English Language, Author of Book/Fiction Lucky Girl (Love vs Marriage)

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लेकिन निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने आप में एक व्यापक नजीर पेश करने वाला है फैसले में कहीं न कहीं इस बात का ध्यान रखा गया है कि देश में सांप्रदायिक सौहार्द है किसी भी परिस्थिति में नहीं बिगड़ ना चाहिए दूसरी बातें ना सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से है सर्वसम्मति से फैसला दिया है उससे लगता है इस पर व्यापक पर एक ही है तथ्यों की विवेचना तक फैसला लिया गया है इसलिए होता है क्योंकि दोनों ही पक्षों की भावनाओं का हर व्यक्ति को मेरे हिसाब से इससे सहमत भी होना चाहिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सर आंखों के रखना चाहिए और कोशिश होनी चाहिए कि देश में आपसी सौहार्द बिगाड़ने वाले जो लोग हैं किसी भी तरह से कहीं पर नहीं क्योंकि उन्हें तो मौके की तलाश है कि लोगों के बीच इस तरह से टूटता स्थापित की जाए तो वैसे लोगों को न पनपने दें और यह हिंदू मुस्लिम देश के सभी वर्गों का प्रमुख दृष्टिकोण होना चाहिए कि उनके बीच आपसी सौहार्द कायम रहे धन्यवाद

lekin nishchit roop se supreme court ka faisla apne aap mein ek vyapak nazeer pesh karne vala hai faisle mein kahin na kahin is baat ka dhyan rakha gaya hai ki desh mein sampradayik sauhaard hai kisi bhi paristhiti mein nahi bigad na chahiye dusri batein na supreme court ne jis tarah se hai sarwasammati se faisla diya hai usse lagta hai is par vyapak par ek hi hai tathyon ki vivechna tak faisla liya gaya hai isliye hota hai kyonki dono hi pakshon ki bhavnao ka har vyakti ko mere hisab se isse sahmat bhi hona chahiye supreme court ka yah faisla sir aakhon ke rakhna chahiye aur koshish honi chahiye ki desh mein aapasi sauhaard bigadne waale jo log hain kisi bhi tarah se kahin par nahi kyonki unhe toh mauke ki talash hai ki logon ke beech is tarah se tootata sthapit ki jaaye toh waise logon ko na panapne dein aur yah hindu muslim desh ke sabhi vargon ka pramukh drishtikon hona chahiye ki unke beech aapasi sauhaard kayam rahe dhanyavad

लेकिन निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने आप में एक व्यापक नजीर पेश करने वाला है फै

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपने कहा कि क्या आप सुप्रीम कोर्ट से के फैसले से सहमत हैं हां सहमत है मजबूरी में सहमत नहीं है खुले दिमाग से सहमत हैं और हम तो हर फैसले से चाहे वह हाईकोर्ट करें या सुप्रीम कोर्ट करें जिससे विवादों का अंत होता हो सुखचैन अमन कायम होता हो धर्मनिरपेक्षता होती हो और देश के अंदर सबको समान रूप से जीने का अधिकार मिलता हूं कुछ फैसले से सहमत हैं लेकिन जिस देश के अंदर अगर संप्रदायवाद धन्यवाद की आड़ में लोग अपनी जीत का डंका पीटते हो और अपनी जीत को आधार बना क्यों हमारे न्यायालय को न्यायाधीश महोदय को इसके विषय में भी कुछ ना कुछ निर्णय लेना चाहिए और वह निर्णय ऐसा होना चाहिए कि जन जागरण तक देश के हर प्राणी टर्की भाग जाए यह फैसला केवल न्यायालय का फैसला है यह फैसला की चित्रकार का फैसला नहीं है यह फैसला किसी धर्म जाति का फैसला नहीं है और यह सवाल तो उसने ही नहीं चाहिए कि किसको कितना ज्ञान और किसको कितना ज्ञान नहीं है क्योंकि जब न्याय पर भरोसा करते हैं तो फिर हमें उस पर ही भरोसा करना चाहिए और जवान शास्त्रों पर भरोसा करते हैं धन पर भरोसा करते हैं तो फिर हम न्याय की दुआ क्यों करते हैं यारों 400000 साल पहले बहुत कुछ हुआ और बहुत कुछ चमे चमे पर बदलाव हुआ उन बदलावों को स्वीकार करते हुए आज हमें आधुनिकता का बदलाव करना चाहिए मैं इस फैसले से सहमत हूं लेकिन इसमें किसी भी तरह से या किसी अन्य किसी पार्टी या किसी सरकार का इसमें कोई योगदान नहीं है इस सरकार के समय में यह फैसला आया यह फैसला बताया कि 20 साल पहले आता या 50 साल बाद आता फैसला केवल न्यायालय का उच्च न्यायालय पर ही फैसला है और हम इतना ले के फैसले से सहमत हैं इसीलिए एक बुद्धिजीवी होने के नाते हम हर नागरिक को देश के हर व्यक्ति को यह संदेश देना चाहते हैं कि धर्म से जाति से ऊपर उठकर पहले एक मनुष्य बनो पहले एक इंसान बनो हमारा जन्म इस संस्थान में एक मनुष्य और एक इंसान के रूप में हुआ है किस जन्म किस जाति में हुआ इसमें मरा कोई योगदान नहीं है किस देश में हुआ हमारा कोई योगदान नहीं है लेकिन अपनी आदतों से अपने आचरण से अपने व्यक्तित्व से अपने कर्मों से हम इस देश को महान बना सकते हैं और मैं समझता हूं कि बहुत विचार के साथ इसका जो फैसला आया है वह सर्व परी शिकार होना चाहिए

aapne kaha ki kya aap supreme court se ke faisle se sahmat hain haan sahmat hai majburi mein sahmat nahi hai khule dimag se sahmat hain aur hum toh har faisle se chahen vaah highcourt karen ya supreme court karen jisse vivadon ka ant hota ho sukhchain aman kayam hota ho dharmanirapekshata hoti ho aur desh ke andar sabko saman roop se jeene ka adhikaar milta hoon kuch faisle se sahmat hain lekin jis desh ke andar agar sampradayvad dhanyavad ki aad mein log apni jeet ka danka pitate ho aur apni jeet ko aadhaar bana kyon hamare nyayalaya ko nyayadhish mahoday ko iske vishay mein bhi kuch na kuch nirnay lena chahiye aur vaah nirnay aisa hona chahiye ki jan jagran tak desh ke har prani turkey bhag jaaye yah faisla keval nyayalaya ka faisla hai yah faisla ki chitrakar ka faisla nahi hai yah faisla kisi dharam jati ka faisla nahi hai aur yah sawaal toh usne hi nahi chahiye ki kisko kitna gyaan aur kisko kitna gyaan nahi hai kyonki jab nyay par bharosa karte hain toh phir hamein us par hi bharosa karna chahiye aur jawaan shastron par bharosa karte hain dhan par bharosa karte hain toh phir hum nyay ki dua kyon karte hain yaaron 400000 saal pehle bahut kuch hua aur bahut kuch chame chame par badlav hua un badlaon ko sweekar karte hue aaj hamein adhunikata ka badlav karna chahiye main is faisle se sahmat hoon lekin isme kisi bhi tarah se ya kisi anya kisi party ya kisi sarkar ka isme koi yogdan nahi hai is sarkar ke samay mein yah faisla aaya yah faisla bataya ki 20 saal pehle aata ya 50 saal baad aata faisla keval nyayalaya ka ucch nyayalaya par hi faisla hai aur hum itna le ke faisle se sahmat hain isliye ek buddhijeevi hone ke naate hum har nagarik ko desh ke har vyakti ko yah sandesh dena chahte hain ki dharam se jati se upar uthakar pehle ek manushya bano pehle ek insaan bano hamara janam is sansthan mein ek manushya aur ek insaan ke roop mein hua hai kis janam kis jati mein hua isme mara koi yogdan nahi hai kis desh mein hua hamara koi yogdan nahi hai lekin apni aadaton se apne aacharan se apne vyaktitva se apne karmon se hum is desh ko mahaan bana sakte hain aur main samajhata hoon ki bahut vichar ke saath iska jo faisla aaya hai vaah surv pari shikaar hona chahiye

आपने कहा कि क्या आप सुप्रीम कोर्ट से के फैसले से सहमत हैं हां सहमत है मजबूरी में सहमत नही

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:27

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अयोध्या वर्डिक्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत का फैसला नहीं हो सकता सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से फैसला किया है इससे पहले उसने जिस तरह से जो सब के दावे जो सब तीनों पत्र लिखिए उसके ऊपर और जो गिरी हुई और उसके बाद बहुत ही बकवास रूपए की कोई भी पक्ष है यह कहने के कोई शक नहीं है कि हमको अन्याय 11 मुद्दे का चुनाव वोट किसको कहते हैं कि उन्होंने किया है एक एक मुद्दे का और पुराना कि आज भी खंगाला और वह एविडेंस के साथ उन्होंने इसलिए नहीं करता हूं कि मैं हिंदू नहीं करता हूं कि जो हमारा है इसका सम्मान करना चाहिए

ayodhya verdict supreme court ke faisle se sahmat ka faisla nahi ho sakta supreme court ne jis tarah se faisla kiya hai isse pehle usne jis tarah se jo sab ke daave jo sab teenon patra likhiye uske upar aur jo giri hui aur uske baad bahut hi bakwas rupee ki koi bhi paksh hai yah kehne ke koi shak nahi hai ki hamko anyay 11 mudde ka chunav vote kisko kehte hain ki unhone kiya hai ek ek mudde ka aur purana ki aaj bhi khangala aur vaah evidence ke saath unhone isliye nahi karta hoon ki main hindu nahi karta hoon ki jo hamara hai iska sammaan karna chahiye

अयोध्या वर्डिक्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत का फैसला नहीं हो सकता सुप्रीम कोर्ट ने जिस

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हां मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत हूं

haan main supreme court ke faisle se sahmat hoon

हां मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत हूं

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