तीस हजारी कोर्ट हिंसा: क्यूँ डरते हैं पुलिसवाले वकीलों से? क्या कारण है इस डर के पीछे?...


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Dr. Parmindra Dadhich

Lawyer | Jurist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए तीस हजारी कोर्ट हिंसा एक बहुत ही काला अध्याय रहा है और मैं यह कहता हूं कि हम हम हैं तो क्या हम हैं तुम तुम हो तो क्या तुम हो पुलिस वाले और जो वकील होते हैं वह अपनी-अपनी स्पीयर के अंदर अपने अपने अपने अपने फील्ड के अंदर ताकतवर होते हैं और दोनों को ही अपनी फील्ड को शेर को एंक्रोच नहीं करना चाहिए एक दूसरे के सर को और डर किसी का नहीं होता है मैं नहीं समझता कि कोई एक दूसरे से कभी डरता है लेकिन वह मिशन मर्यादा में रहता है तो पुलिस वाले हमेशा मर्यादा में रहने की वजह से शायद कोई डरते हो मैं नहीं करता कि डरते होंगे

dekhiye tees hazari court hinsa ek bahut hi kaala adhyay raha hai aur main yah kahata hoon ki hum hum hain toh kya hum hain tum tum ho toh kya tum ho police waale aur jo vakil hote hain vaah apni apni spiyar ke andar apne apne apne apne field ke andar takatwar hote hain aur dono ko hi apni field ko sher ko encroach nahi karna chahiye ek dusre ke sir ko aur dar kisi ka nahi hota hai main nahi samajhata ki koi ek dusre se kabhi darta hai lekin vaah mission maryada me rehta hai toh police waale hamesha maryada me rehne ki wajah se shayad koi darte ho main nahi karta ki darte honge

देखिए तीस हजारी कोर्ट हिंसा एक बहुत ही काला अध्याय रहा है और मैं यह कहता हूं कि हम हम हैं

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अपने कहावत सुनी होगी और बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया यहां पर मैं यह कहना चाहूंगा कि कानून सबसे बड़ा है ठीक है ना वही पुलिस वाले रोजाना पृथ्वी पर भेजूं मुल्ले करके आते ठीक है ना वही वकील तुमसे मिलना जुलना होता है वही वकील और पुलिस वालों को जो घंटे कचहरी में खड़ा करके रखते हैं अपने फ्रेंडों के साथ और मिश्री उनको बे रहता है कि वकील साहब के कानून में लापता ले इसलिए मैं वकील और जज बिल्कुल समकक्ष आज वकील कहता है जजों से मानता है और जज के आदेश की कलम से पुलिस तो क्या बाहर भी डरते चाहिए

apne kahaavat suni hogi aur bada na bhaiya sabse bada rupaiya yahan par main yah kehna chahunga ki kanoon sabse bada hai theek hai na wahi police waale rojana prithvi par bheju mulle karke aate theek hai na wahi vakil tumse milna julana hota hai wahi vakil aur police walon ko jo ghante kachahari me khada karke rakhte hain apne frendon ke saath aur mishri unko be rehta hai ki vakil saheb ke kanoon me lapata le isliye main vakil aur judge bilkul samkaksh aaj vakil kahata hai judgon se maanta hai aur judge ke aadesh ki kalam se police toh kya bahar bhi darte chahiye

अपने कहावत सुनी होगी और बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया यहां पर मैं यह कहना चाहूंगा कि कानून

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वकील और पुलिस दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों ही कानून के रखवाले हैं दोनों का आपस में नहीं लड़ना चाहिए दिल्ली के अंदर यह जो इन दिनों पुलिस वालों का और वकील वालों का आपसी लड़ाई झगड़ा चल रहा है यह बेहद खतरनाक और गलत है इसमें सरकार को दिल्ली सरकार को पाकिस्तानी पुलिस प्रशासन और बार को सम्मिलित होकर संयुक्त प्रयास करना चाहिए और वकीलों की और पुलिस के बीच में आपसी सामंजस्य बिठाकर उनमें समझौता कर आना चाहिए अगले झगड़ा बड़ा तो यह विकराल रूप लेगा इससे जनता को काफी परेशानी होगी पुलिस और वकीलों का तो ज्यादा कुछ नहीं मिलेगा लेकिन जनता को बहुत तकलीफ उठाना पड़ेगी अतः सरकारों को और जनप्रतिनिधियों को यह प्रयास करना चाहिए कि इन दोनों का झगड़ा मित्र पुलिस और वकील दोनों का और दोनों एक दूसरे के पूरक के बीच में झगड़ा ज्यादा

vakil aur police dono ek dusre ke purak hain aur dono hi kanoon ke rakhwale hain dono ka aapas mein nahi ladna chahiye delhi ke andar yah jo in dino police walon ka aur vakil walon ka aapasi ladai jhagda chal raha hai yah behad khataranaak aur galat hai isme sarkar ko delhi sarkar ko pakistani police prashasan aur baar ko sammilit hokar sanyukt prayas karna chahiye aur vakilon ki aur police ke beech mein aapasi samanjasya bithakar unmen samjhauta kar aana chahiye agle jhagda bada toh yah vikrale roop lega isse janta ko kaafi pareshani hogi police aur vakilon ka toh zyada kuch nahi milega lekin janta ko bahut takleef uthana padegi atah sarkaro ko aur janapratinidhiyon ko yah prayas karna chahiye ki in dono ka jhagda mitra police aur vakil dono ka aur dono ek dusre ke purak ke beech mein jhagda zyada

वकील और पुलिस दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों ही कानून के रखवाले हैं दोनों का आपस में

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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

1:06
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान में हम भारतीयों के मन में विभिन्न स्तरों पर भय भरा हुआ है चाहे वह वकील हो चाहे वह पुलिस वाला व्यक्ति को जब तक अपनी शक्तियों का एहसास नहीं होता वह निर्भय नहीं हो सकता है और शक्तियां यह वाली नहीं स्टॉल बंदूक वाली शक्तियां नहीं हमारी वास्तविक शक्ति जो जो कि शिक्षा से ही मिलती है अशिक्षित लोग आपस में एक दूसरे की बेइज्जती करते हैं एक दूसरे को नीचा दिखाते हैं और यही दिल्ली में देखने को मिल रहा है हमारे देश की राजधानी दिल्ली और शिक्षा का एक बहुत बड़ा उदाहरण है मैं 10 साल राजधानी में रहा हूं और वहां के लोग जीवन चर्या सेल्फिश होती है गिने चुने लोग हैं जिनको समाज की देश की चिंता है वरना हर व्यक्ति अपने लिए ही जी रहा है उस स्थिति में पैदा होना स्वाभाविक है

vartmaan mein hum bharatiyon ke man mein vibhinn staron par bhay bhara hua hai chahen vaah vakil ho chahen vaah police vala vyakti ko jab tak apni shaktiyon ka ehsaas nahi hota vaah nirbhay nahi ho sakta hai aur shaktiyan yah wali nahi stall bandook wali shaktiyan nahi hamari vastavik shakti jo jo ki shiksha se hi milti hai ashikshit log aapas mein ek dusre ki beijjati karte hai ek dusre ko nicha dikhate hai aur yahi delhi mein dekhne ko mil raha hai hamare desh ki rajdhani delhi aur shiksha ka ek bahut bada udaharan hai 10 saal rajdhani mein raha hoon aur wahan ke log jeevan charya selfish hoti hai gine chune log hai jinako samaj ki desh ki chinta hai varna har vyakti apne liye hi ji raha hai us sthiti mein paida hona swabhavik hai

वर्तमान में हम भारतीयों के मन में विभिन्न स्तरों पर भय भरा हुआ है चाहे वह वकील हो चाहे वह

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:47
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तीस हजारी कोर्ट हिंसा करते हैं पुलिस वाले वकीलों से क्या कारण है इसके पीछे व्हिच इस पर जिस तरह से समाचार आ रहा है उस तरफ से जो वकीलों के सामने जो पुलिस ने एक्शन लिया था एक गोली चलाई थी वह उनको गोली नहीं चलानी चाहिए थी और जब सब वकील लोग इकट्ठे हो गए थे तब उन्होंने अपने आप को लॉकअप में बंद कर लिया था जो अपराधी अपराधी सदस्यों ने किया था और अपने आप को बचाने के लिए अपने आप को लॉकअप में बंद किया था क्योंकि वह जानते थे कि उन्होंने गुस्से में गलत काम किया हालांकि दो पुलिसवाले सस्पेंड हुए हैं और वकीलों का जो पूरा पता था सब लोग वह धरने पर बैठे हुए थे और उन्होंने कोर्ट में काम ना करने का फैसला भी किया था लेकिन मांगने वालों के बाद और पुलिस वालों ने अपना जो धरना प्रदर्शन पहले समाप्त किया और सस्पेंशन ऑर्डर होने के बाद पुलिस वाले के मन में डर डर हो गया है कि आपसी संबंध जो पुलिस वाले और वकीलों के बीच होता है उसने पुलिस वाले अब पूरे डरे हुए लग रहे हो इस समय के बाद भी सब परिस्थितियां सामान्य होती जाएंगी लेकिन पुलिस वाले आगे से ऐसा ना करें ऐसी अपेक्षा की जाती है धन्यवाद

tees hazari court hinsa karte hain police waale vakilon se kya karan hai iske peeche which is par jis tarah se samachar aa raha hai us taraf se jo vakilon ke saamne jo police ne action liya tha ek goli chalai thi vaah unko goli nahi chalani chahiye thi aur jab sab vakil log ikatthe ho gaye the tab unhone apne aap ko lockup mein band kar liya tha jo apradhi apradhi sadasyon ne kiya tha aur apne aap ko bachane ke liye apne aap ko lockup mein band kiya tha kyonki vaah jante the ki unhone gusse mein galat kaam kiya halaki do pulisvale Suspend hue hain aur vakilon ka jo pura pata tha sab log vaah dharne par baithe hue the aur unhone court mein kaam na karne ka faisla bhi kiya tha lekin mangne walon ke baad aur police walon ne apna jo dharna pradarshan pehle samapt kiya aur suspension order hone ke baad police waale ke man mein dar dar ho gaya hai ki aapasi sambandh jo police waale aur vakilon ke beech hota hai usne police waale ab poore dare hue lag rahe ho is samay ke baad bhi sab paristhiyaann samanya hoti jayegi lekin police waale aage se aisa na kare aisi apeksha ki jaati hai dhanyavad

तीस हजारी कोर्ट हिंसा करते हैं पुलिस वाले वकीलों से क्या कारण है इसके पीछे व्हिच इस पर जि

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तीस हजारी कोर्ट क्यों करते हैं पुलिस वाले वकील नियमों के सभी जनरल शिकायत करते हैं इसमें डरने की कोई बात नहीं

tees hazari court kyon karte hain police waale vakil niyamon ke sabhi general shikayat karte hain isme darane ki koi baat nahi

तीस हजारी कोर्ट क्यों करते हैं पुलिस वाले वकील नियमों के सभी जनरल शिकायत करते हैं इसमें डर

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Jagdish Saxena

Nagrik Adhikar Chetna Parishad (NGO)

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वकील अपनी काबिलियत के गलत उपयोग करती हैं इसलिए पुलिस डरती है

vakil apni kabiliyat ke galat upyog karti hain isliye police darti hai

वकील अपनी काबिलियत के गलत उपयोग करती हैं इसलिए पुलिस डरती है

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भारत में पुलिस का वकीलों से डरने के पीछे सिर्फ और मुख्य कारण एक ही है भारत में जितने भी कॉन्स्टेबल से होते हैं हेड कोस्टेबल होते हैं या उसके ऊपर की रिंग के जो पुलिस वाले होते हैं जिसमें नीचे नीचे से नीचे नीचे वाले क्रम से लेकर ऊपर वाले चार पांच कर्म तक कि पुलिसवाले जितने भी होते हैं उनको भारत के कानून की जानकारी नहीं होती है क्योंकि भारत की जो पुलिस है वह व्यवस्थापिका के अंदर आती है और न्यायपालिका के अंदर एडवोकेट्स को रखा गया है विधायक का कानून बनाती है तू तू और नेतागण संसद में कानून का निर्माण करते हैं उस कानून को लागू करने का काम पुलिस वालों का होता है लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि कानूनी प्रकिया के तहत कानून कैसे बनाए जाते हैं और इन कानून का जो अमेंडमेंट होता है वह किस प्रकार होता है जो पुलिस कहां कि वकीलों से डरने का मुख्य रीजन यही है कि जो वकील होते हैं उनको कानून की बारीक से बारीक जानकारी और डिटेल्स में रहती है जबकि पुलिस वालों को इतना मतलब नॉलेज नहीं होता तो कहीं ना कहीं मुझे ऐसा लगता है कि जो वकील होते हैं वह कानून की बारीकियों और तंत्रों को जानते हैं बस यही मुख्य वजह है क्योंकि जितने भी पुलिस वाले बंदे तो हमारे भारत में जो शिक्षा सिस्टम है उसके तहत 12वीं पास अगर कोई बंदा है पीके या अली उसने ग्रेजुएशन किया है तो उसके बाद होता है यह कि वह कंपटीशन की तैयारी करता है तो कंपटीशन में कहीं से भी बहुत कम चांस होते हैं कि कंपटीशन में जीके के रिलेटेड क्वेश्चन साथ जो कभी से रिलेटेड है या ऐसे क्वेश्चन आते हैं जिनका लो से कोई लेना देना नहीं होता है और जो कानून से रिलेटेड वकील होते हैं वह पूरा करियर रीलो में बिता देते हैं तो उनको यहां अपनी यह कह सकते हैं कि एक जो ओरिजिनल में जानकार होता है वह होता है एडवोकेट एडवोकेट चोर पुलिस वाला एडवोकेट काफी माइंड ली अपने कह सकते हैं कि कानून का जानकार होने से पुलिस वाले उसकी उसके सामने जाने की हिमाकत नहीं करते यह इट इज द मोस्ट फर्स्ट सीजन फॉर गेटिंग ऑफ एंड ओं एनी टाइप ऑफ पुलिस ऑफिसर

bharat mein police ka vakilon se darane ke peeche sirf aur mukhya karan ek hi hai bharat mein jitne bhi constable se hote hain head kostebal hote hain ya uske upar ki ring ke jo police waale hote hain jisme niche neeche se niche neeche waale kram se lekar upar waale char paanch karm tak ki pulisvale jitne bhi hote hain unko bharat ke kanoon ki jaankari nahi hoti hai kyonki bharat ki jo police hai vaah vyavasthapika ke andar aati hai aur nyaypalika ke andar edavokets ko rakha gaya hai vidhayak ka kanoon banati hai tu tu aur netagan sansad mein kanoon ka nirmaan karte hain us kanoon ko laagu karne ka kaam police walon ka hota hai lekin unhe yah nahi pata hota hai ki kanooni prakriya ke tahat kanoon kaise banaye jaate hain aur in kanoon ka jo Amendment hota hai vaah kis prakar hota hai jo police kahaan ki vakilon se darane ka mukhya reason yahi hai ki jo vakil hote hain unko kanoon ki baarik se baarik jaankari aur details mein rehti hai jabki police walon ko itna matlab knowledge nahi hota toh kahin na kahin mujhe aisa lagta hai ki jo vakil hote hain vaah kanoon ki barikiyon aur tantron ko jante hain bus yahi mukhya wajah hai kyonki jitne bhi police waale bande toh hamare bharat mein jo shiksha system hai uske tahat vi paas agar koi banda hai pk ya ali usne graduation kiya hai toh uske baad hota hai yah ki vaah competition ki taiyari karta hai toh competition mein kahin se bhi bahut kam chance hote hain ki competition mein gk ke related question saath jo kabhi se related hai ya aise question aate hain jinka lo se koi lena dena nahi hota hai aur jo kanoon se related vakil hote hain vaah pura career rilo mein bita dete hain toh unko yahan apni yah keh sakte hain ki ek jo original mein janakar hota hai vaah hota hai advocate advocate chor police vala advocate kaafi mind li apne keh sakte hain ki kanoon ka janakar hone se police waale uski uske saamne jaane ki himakat nahi karte yah it is the most first season for getting of and on any type of police officer

भारत में पुलिस का वकीलों से डरने के पीछे सिर्फ और मुख्य कारण एक ही है भारत में जितने भी कॉ

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जी पुलिस वाले वकीलों से डरते नहीं है वकीलों की इज्जत करते हैं यह कहना बड़ा आने वाले लगता है कि वकीलों से डाला जाता है देखिए वह कानून के रखवाले हैं हम वकील हैं हम कानून के अधिवक्ता हैं कानून कि उन्हें नॉलेज है लेकिन कानून पर हम लोग का कमांड राधा है हां कोई भी ऐसे मिसकनसेप्शन अगर उनके दिमाग में आता है कि भाई ठीक है कि वकील जो है वह दबके रहता है तो दबके तो नहीं रहते वकील लेकिन हां यह कहना बढ़ाने बार ऐसा है कि पुलिस वाले वकीलों से डरते हैं वह डरते नहीं हैं लेकिन हां एक तला का 1111 दायरा है जो बनाकर रखते हैं वकीलों से क्यों क्या व्यवस्था तो व्यवस्था है और कानून का रखवाला कानून का रखवाला है कानून के रखवाले को भी कचहरी के अंदर आना है कोर्ट के सामने आना है वह जज के सामने आना है और अपील करेगा तो कोर्ट भी अभी वक्त आपको ही जो है वह किसी भी केस कि दरजी के लिए खड़ा करेगा जा सकता क्यों ना हो अभी राधे-राधे अधिवक्ताओं से ही लड़ाई करेंगे तो मैं काम कैसे चलेगा तो इसके लिए यह उचित जवाब है कि पुलिस एक दायरा बनाकर रखती है वकीलों से उसको हम डर नहीं देंगे उसका मृतक कहेंगे

ji police waale vakilon se darte nahi hai vakilon ki izzat karte hain yah kehna bada aane waale lagta hai ki vakilon se dala jata hai dekhiye vaah kanoon ke rakhwale hain hum vakil hain hum kanoon ke adhivakta hain kanoon ki unhe knowledge hai lekin kanoon par hum log ka command radha hai haan koi bhi aise misakanasepshan agar unke dimag me aata hai ki bhai theek hai ki vakil jo hai vaah dabake rehta hai toh dabake toh nahi rehte vakil lekin haan yah kehna badhane baar aisa hai ki police waale vakilon se darte hain vaah darte nahi hain lekin haan ek tala ka 1111 dayara hai jo banakar rakhte hain vakilon se kyon kya vyavastha toh vyavastha hai aur kanoon ka rakhwala kanoon ka rakhwala hai kanoon ke rakhwale ko bhi kachahari ke andar aana hai court ke saamne aana hai vaah judge ke saamne aana hai aur appeal karega toh court bhi abhi waqt aapko hi jo hai vaah kisi bhi case ki darji ke liye khada karega ja sakta kyon na ho abhi radhe radhe adhivaktaon se hi ladai karenge toh main kaam kaise chalega toh iske liye yah uchit jawab hai ki police ek dayara banakar rakhti hai vakilon se usko hum dar nahi denge uska mritak kahenge

जी पुलिस वाले वकीलों से डरते नहीं है वकीलों की इज्जत करते हैं यह कहना बड़ा आने वाले लगता ह

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Yogender Dhillon

Law Educator , Advocate Motivational Coach

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यह बिना मतलब की बातें होती हैं जी ना तो पुलिस वाले वकील से डरते हैं ना वकील पुलिस वालों से डरते हैं वह तो आपस में उनका असल चलता रहता है तो ऐसी बातें प्लीज ना करें ऐसे मिनट पर्सन यह चीज अच्छी नहीं होती हैं

yah bina matlab ki batein hoti hain ji na toh police waale vakil se darte hain na vakil police walon se darte hain vaah toh aapas me unka asal chalta rehta hai toh aisi batein please na kare aise minute person yah cheez achi nahi hoti hain

यह बिना मतलब की बातें होती हैं जी ना तो पुलिस वाले वकील से डरते हैं ना वकील पुलिस वालों से

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ऐसा नहीं है पुलिस वाले डरते हैं यह गलत बात है वह तो कुछ नहीं है वकील तो होता है एक समाज को जागरूक अधिवक्ता होता है जो कि समाज के हित के लिए लड़ते वकील हमेशा कानूनी दांवपेच पर उसका कमांड होती है कि बस यह कारण है कि पुलिस वाले उनसे डरते हैं वह वाले डर नहीं है और कभी पुलिस अधिकतर बहुत सारे से झूठी है फिर लॉन्च कर रही थी किसी भी व्यक्ति के खिलाफ तो उनकी बड़े अधिकारी को शिकायत करवा देते सब कुछ कर लेते इसलिए थोड़ा डर रहता है बस

aisa nahi hai police waale darte hain yah galat baat hai vaah toh kuch nahi hai vakil toh hota hai ek samaj ko jagruk adhivakta hota hai jo ki samaj ke hit ke liye ladte vakil hamesha kanooni danvapech par uska command hoti hai ki bus yah karan hai ki police waale unse darte hain vaah waale dar nahi hai aur kabhi police adhiktar bahut saare se jhuthi hai phir launch kar rahi thi kisi bhi vyakti ke khilaf toh unki bade adhikari ko shikayat karva dete sab kuch kar lete isliye thoda dar rehta hai bus

ऐसा नहीं है पुलिस वाले डरते हैं यह गलत बात है वह तो कुछ नहीं है वकील तो होता है एक समाज को

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aryan

Health consultant(09717895167)

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देखिए जो भी तीस हजारी कोर्ट में जो घटना घटित हुई है पुलिस वालों और वकीलों के बीच में जो है एक कल है शुरू हुआ संघर्ष शुरू हुआ है झगड़ा शुरु हुआ है उसके पीछे मूलभूत क्या कारण है उस पर तो ज्यादा यहां पर में रोशनी नहीं डालना चाहूंगा जो भी गए हुआ है वह बहुत ही गलत हुआ है इससे समाज पर एक बहुत ही जोश का बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ने वाला है जो लोगों के अंदर जो पुलिस का जो एक एक भय होता है एक लाइन आर्डर का दायित्व होता है पुलिस के ऊपर और उस लाउडर को पूरी तरह से मेंटेन करके रखती है पुलिस लोगों के अंदर कहीं ना कहीं वह भेजो है वह डर जो है वह कम होगा और लोगों में जो है समाज में जो है वह अव्यवस्था फैलने का भी खतरा खतरा रहता है आप जहां तक देखिए बात है कि मैं तो यह कहूंगा कि जो पुलिस वाले हैं या वकील हैं और दोनों ही इतने पुलिसवालों तो सर मैं मानता हूं कि वह इतने पढ़े लिखे नहीं होता है जो कांस्टेबल लेवल के लोग होते हैं वह कई बार भी यह ग्रेजुएशन होते हैं लेकिन जो हायर वाले पदों पर बैठे हुए हैं और ओल्ड करते हैं उनको काफी समझदार लोग हैं वह तो पीसीएस एसीपी डीसीपी जो रंग के लोग होते हैं उनको तो समझदारी से काम लेना चाहिए था स्थिति को काबू करने के लिए उन्हें जरूरत के हिसाब से जो है कदम उठाने चाहिए थे वकील भी बहुत पढ़े-लिखे लोग होते हैं लेकिन उन्होंने भी यहां पर बहुत ही बचकाना हरकत की बहुत ही बच्चों की तरह से व्यवहार किया अच्छा प्रभाव नहीं पड़ने वाला है उनकी इन हरकतों से अब बात करते हैं आपके सवाल कि केवल पुलिस वाले वर्दी वालों से जो है वकीलों से जो है क्यों डरते हैं इतना भी की सीधी सी बात है कि जो वकील है वह कानून का काफी जानकार होता है कानून की पढ़ाई की होती है उनको उनको पता होता है कि किस अपराध के लिए कौन सी धारा लगेगी यह कौन सा प्राप्त करके उन पर कोई भी धारा नहीं लगेगी और वह भी आसानी से बचने के लिए कानून के हथकंडे उनको पता होता और पुलिस वाले चित्र से जानते हैं कि जब जो कानून के लोग हैं जानने वाले जो वकील है उनको किसी भी कानूनी बहुत बड़े पशुओं सजा सकते हैं जिससे उन में से निकालना उनके लिए मुश्किल हो सकता है तो डरने वाली यही बात है पुलिस वालों को पता है कि भैया यह कोई आम आदमी तो नहीं है आम आदमी को विचारों को उसने कानून की जानकारी नहीं होती है तो उनको किसी भी तरह से वह घेरने में सफल होते हैं लेकिन कानून के जानकार जो होते हैं वकील उनसे जो पंगा लेना उनको बहुत ही भारी पड़ सकता है इसलिए वहीं से डरते हैं धन्यवाद

dekhiye jo bhi tees hazari court mein jo ghatna ghatit hui hai police walon aur vakilon ke beech mein jo hai ek kal hai shuru hua sangharsh shuru hua hai jhadna shuru hua hai uske peeche mulbhut kya karan hai us par toh zyada yahan par mein roshni nahi dalna chahunga jo bhi gaye hua hai vaah bahut hi galat hua hai isse samaj par ek bahut hi josh ka bahut hi bura prabhav padane vala hai jo logo ke andar jo police ka jo ek ek bhay hota hai ek line order ka dayitva hota hai police ke upar aur us louder ko puri tarah se maintain karke rakhti hai police logo ke andar kahin na kahin vaah bhejo hai vaah dar jo hai vaah kam hoga aur logo mein jo hai samaj mein jo hai vaah avyayvastha failane ka bhi khatra khatra rehta hai aap jaha tak dekhiye baat hai ki main toh yah kahunga ki jo police waale hai ya vakil hai aur dono hi itne pulisvalon toh sir main manata hoon ki vaah itne padhe likhe nahi hota hai jo constable level ke log hote hai vaah kai baar bhi yah graduation hote hai lekin jo hire waale padon par baithe hue hai aur old karte hai unko kaafi samajhdar log hai vaah toh pcs ACP DCP jo rang ke log hote hai unko toh samajhdari se kaam lena chahiye tha sthiti ko kabu karne ke liye unhe zarurat ke hisab se jo hai kadam uthane chahiye the vakil bhi bahut padhe likhe log hote hai lekin unhone bhi yahan par bahut hi bachkana harkat ki bahut hi baccho ki tarah se vyavhar kiya accha prabhav nahi padane vala hai unki in harkaton se ab baat karte hai aapke sawaal ki keval police waale wardi walon se jo hai vakilon se jo hai kyon darte hai itna bhi ki seedhi si baat hai ki jo vakil hai vaah kanoon ka kaafi janakar hota hai kanoon ki padhai ki hoti hai unko unko pata hota hai ki kis apradh ke liye kaun si dhara lagegi yah kaun sa prapt karke un par koi bhi dhara nahi lagegi aur vaah bhi aasani se bachne ke liye kanoon ke hathkande unko pata hota aur police waale chitra se jante hai ki jab jo kanoon ke log hai jaanne waale jo vakil hai unko kisi bhi kanooni bahut bade pashuo saza sakte hai jisse un mein se nikalna unke liye mushkil ho sakta hai toh darane wali yahi baat hai police walon ko pata hai ki bhaiya yah koi aam aadmi toh nahi hai aam aadmi ko vicharon ko usne kanoon ki jaankari nahi hoti hai toh unko kisi bhi tarah se vaah gherne mein safal hote hai lekin kanoon ke janakar jo hote hai vakil unse jo panga lena unko bahut hi bhari pad sakta hai isliye wahi se darte hai dhanyavad

देखिए जो भी तीस हजारी कोर्ट में जो घटना घटित हुई है पुलिस वालों और वकीलों के बीच में जो है

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सवाल गलत है पुलिस वाले ने वकीलों से डरते हैं ना वकील पुलिस वालों से डरते हैं पुलिस और वकील दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं दोनों का काम न्याय दिलाना है दिलाना है कुछेक मामलों में दोनों अपने रास्ते से भटक जाते हैं आपका यह प्रश्न नहीं लगता

yah sawaal galat hai police waale ne vakilon se darte hain na vakil police walon se darte hain police aur vakil dono ek hi sikke ke do pahaloo hain dono ka kaam nyay dilana hai dilana hai kuchek mamlon mein dono apne raste se bhatak jaate hain aapka yah prashna nahi lagta

यह सवाल गलत है पुलिस वाले ने वकीलों से डरते हैं ना वकील पुलिस वालों से डरते हैं पुलिस और व

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