RCEP पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फ़ैसला लिया है, क्या वो निर्णय सही है? आपकी राय क्या है?...


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बीआरसी P1 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता है जो कि इंडिया ने से साइन करने से मना कर दिया और इंक्रीमेंट 16 देशों के बीच होने वाला था 16 दिन की 10 आसियान की कंट्री और 6 अदर कंट्री आसियान में ऐसे कि आपका म्यामार वियतनाम सिंगापुर इंडोनेशिया मलेशिया और यूएसए कंट्री जो एसएन के 10 घंटे और इसके अलावा 6 घंटे आपका जापान जापान साउथ कोरिया ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड चाइना और अपना इंडिया तू ही 16 घंटे के बीच में एक ऐसा फैसला था जो कि वर्ल्ड का लार्जेस्ट जो है व्यापार समझौता था सबसे बड़ा जो है ट्रेड एग्रीमेंट होने वाला था अगर हो जाता लेकिन यह नहीं हो पाया और और यह 50 परसेंट पूरे विश्व की 50% आबादी के बीच व्यापार होने वाला क्रीम आता तो जो कि हमारे यह प्रशांत महासागर में जितना भी व्यापार होता है एशिया का उसको पूरा कवर करता है 16 दे सैनिक तेरे से बहुत बड़े एजीडीपी वाले देश हैं एशिया के मुकाबल हो जाते हैं तो इसमें मुक्त व्यापार समझौता इस तरह का होता है कि इसमें जिन देशों के बीच जिन मेंबर देशों के बीच में यह फैसला होता है साइन होता है उन वह मेंबर्स के के बीच में जो घूस और सर्विस इसे वस्तुएं और सेवाएं हैं वह आने जाने की स्वतंत्र हो जाती बिना रोक-टोक के सभी देशों की वस्तुएं और सेवाएं दूसरे देशों में इंपोर्ट की जा सकती है अब अर्थपोर्ट की जा सकती तो इसमें कोई भी प्रतिबंध फिर नहीं रहते हैं और इस एग्रीमेंट का यही उद्देश्य था तो इसे इंडिया ने साइन नहीं किया सभी दबाव बनाए थे देश एस्पेशली चाइना चाह रहा था चाइना का इसमें इंटरेस्ट ज्यादा था चाइना क्योंकि चाइना को एक बड़ा मार्केट मिल जाता तो इंडिया की बहुत बड़ा मार्केट है वह ऐनक लिए तो इसमें हमारे लिए यह नुकसान था कि इसमें सबसे बड़ा कि जब भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो जाता तो बहुत सारा क्योंकि चाइना मैच मैन्युफैक्चरिंग हब है तो वहां से मैन्युफैक्चरिंग चीज है यहां पर वह अपना जितना भी इंडस्ट्रियल गुड्स है और जो मैन्युफैक्चरिंग गुड्स है वह हमारे यहां डम कर देता इससे हमारे यहां जो है गुड्स की भरमार हो जाती उनके यहां के उत्पादों की प्रोडक्ट की जिसकी हमारे यहां की जो डॉमेस्टिक इंडस्ट्री है जो घरेलू उद्योग है वह लास्ट में जाने की चांस हो जाते हैं हमारे यहां का जो मैन्युफैक्चरिंग जो है चीजें हैं वह उन्हें असर पड़ता क्योंकि उसकी बहुत ज्यादा सस्ती चीजे होती तो हमारे यहां के जो व्यापारी हैं हम को बहुत नुकसान होता जो उद्योगकर्मी है जो एमएसएमई सेक्टर है हमारा लघु उद्योग है उसको बहुत बड़ी मार पड़ती थी चाइना अपना सारा माल यहां पर दम कर सकता था इसके अलावा हमारे यहां के किसानों के लिए भी यह नुकसानदायक हो सकता क्योंकि यह दूध भी हमारे यहां के दूध जो है यही कि लोग का मिल्क प्रोडक्ट वगैरह होता है और दूध का उत्पादन जो तो आस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड भी इसी सारे यहां पर आ जाते हैं और उनके मिल्क प्रोडक्ट कि न्यूजीलैंड में मिल्क प्रोडक्शन बहुत होता है तो वह अपने मिल्क प्रोडक्ट हमारे यहां इस समझौते की वजह से बहुत ज्यादा ज्यादा ला पाते हैं तो इससे हमारे आगे जो किसान हैं और जो मिल्क प्रोडक्शन की कंपनी है उनको भी नुकसान होने के चांसेस थे और इसके अलावा हमारा सबसे बड़ी चीज जो है यह साइन करने का यीशु था कि हमारी जो है कुछ बातें पॉइंट थे जिन पर सहमति नहीं बन पाई सहमति ना बने हुए शामिल नहीं किया जाए हमारे हमारा इन 16 देशों के साथ जो आसियान देश और यह सब सूरज 107 105 बिलियन डॉलर का एजुकेटेड एक्सीडेंट की व्यापार घाटा चल रहा है तो यह व्यापार घाटा बहुत बड़ा रे व्यापार घाटा है तो यही बात उठ रही थी इस पर विरोध हो रहा था और कि हमारा बताओ हम इतना ज्यादा व्यापार घाटा झेल रहे इन एनी मेंबर देशों के साथ उन्हीं मेंबर देशों के साथ हमें एग्रीमेंट करेंगे तो उनका फायदा मतलब हमारा फायदा होगा और उनका फायदा ज्यादा होगा तो यह बात उठ रही थी कि व्यापार घाटा मेरा बहुत 105 अरब अरब डॉलर तो इस इसमें से 55 अरब डॉलर केवल चाइना के साथ व्यापार घाटा तो इसका व्यापार घाटे का मतलब है कि कि चाइना हमारे यहां अपनी वस्तुएं और सेवाएं गुड्स ओर सर्विसेज बहुत ज्यादा हमारे यहां एक्सपोर्ट करता है बहुत ज्यादा हमारा और उनका सामान हमारे अड्डम होता है लेकिन हमारा बहुत कम उनके एयरपोर्ट हो पाता है जिस वजह से मतलब हमारी जीडीपी में गड़बड़ी होती है क्या अगर किसी भी इस जीडीपी में अर्थव्यवस्था में अगर निर्यात कम हुआ या ज्यादा हो तो वह अर्थव्यवस्था घाटे में रहती है उसे व्यापार घाटा कहते हैं तो यही व्यापार घटा हमारे चाइना के साथ सबसे बड़ा है इसके अलावा आसियान देशों के साथ बनी टोटल मिलाकर जो 16 देशों के साथ 105 अरब डालर का व्यापार घाटा जो कि बहुत होता है जोकि 2018 19 के दौरान रहा है तो इस पर हमारी सहमति नहीं बन पाएगी यह व्यापार घाटा किस तरह से कम हो और हम जा कम से कम एक्सपोर्ट कर पाते हैं अपनी चीज है वह ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट करते हमारे यहां और हमारे घरेलू उद्योग को हमारे मार्केट का यूज कर रहे हैं और वहां पर अपनी जीडीपी बढ़ा रहे हैं यह 16 मेंबर देश तो यह सारे हमारी कंसर्न थे और भी कंसर्न थे रूल ऑफ ओरिजिन का भी अकाउंट संस्था की किसी बाया किसी दूसरे देश से होते हुए कोई प्रोडक्ट या सर्विस जो है ना भेजें जो गुट हैं और ना भेज सके तो रूल और और और और जेंट्स की बात भी भारत बनवाना चाहता था जो कि वह लोग नहीं माने और इसके अलावा भारत कुछ ड्यूटीज भी कम कराना चाहता था अब भारत चाहता है कि जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है यह इसका इंडिया के साथ बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है तू और देश है जिनके साथ व्यापार घाटा भारत का चल रहा है वह लोग इस बात को कंसीडर करें और अब आ भारत को अपनी मार्केट साझा करें भारत को ज्यादा sta-1 चीजें और जो है दूसरे देश जो 16 मेंबर देश है जिसमें चाइना और अलग आसियान कंट्री है और जापान वगैरह उनमें हमारी उनके यहां की मार्केट में हम जो हम जो प्रोडक्ट भेजते हैं कुछ भेजते हैं उन लोगों उसमें जॉब टेरिफ्स के है और ड्यूटी है उसमें 53 परसेंट का वह दिया है लेकिन हमने उनको 72% से 75% उनको छूट दे रखी है लेकिन उन्होंने हमें 53 परसेंट ही इस मामले में छूट दे रखी है जो कि भारत के साथ ठीक नहीं है तो यह सारे मुद्दे रहे हैं जिसकी वजह से भारत नहीं कि किसान इसमें किसानों का और इंडस्ट्री अष्टका और बहुत ज्यादा जो हमारे यहां के कंजूमर से उनके लिए भी नुकसानदेह हो सकता था क्योंकि यह जो देश है अपना अपना माल यहां पर डम कर देते इस किसकी चाइना चाइना के का जो है इसमें ज्यादा कंचन रहा चाइना का चाइना अपना सारा माल चाइना का धमारा घाटा बढ़ रहा है व्यापार घाटा अभी भी चाह रहा है कि वह ज्यादा ज्यादा अब मैं अपने भारत की मार्केट को एक्सेस करें और यहां पर अपना माल टाइप करें उनकी माल डम होने से यहां के लोग हेलो कब में खलबली है यहां के उद्योगों में गड़बड़ी हो सकती है लौट भी जा सकते हैं और यहां पर भारत में मंदी भी चल रही तो एक मंदी का एक बहुत बड़ा कारण कारण भी है कि और यहां पर भी रोजगार जाने की भी चांस है जब जब लघु उद्योग रहेगा तो फिर बहुत लोगों के रोजगार ए लार्ज स्केल में लोग अपने बुलेट कार हो जाएंगे तो यह भारत के हित में नहीं था भारत के इंडिया के टेस्ट के खिलाफ था लेकिन अभी भी विकल्प खुले हुए हैं भारत ने यह कहा है पहले भारत में शक्ति से इसका जवाब दिया कि हम इसमें से नहीं करेंगे लेकिन अभी भी कहा जा रहा है कि भारत भी कह रहा कि एक यज्ञ की चाइना वगैरह मनाने का दौर जारी है सभी देश चाहते हैं कि भारत भी इसमें शामिल हो अभी न्यूजीलैंड के दौरे पर जनरेटर मिनिस्टर है यहां पर आए हुए हैं हमारे इंडिया में और वह भी मिल्क प्रोडक्शन वालों से उन्होंने बात की है और वह भी विचार है कि सभी विचार है कि इंडिया शामिल हो जाएगी इंडिया एक बहुत बड़ा मार्केट चित्र सभी देश इंडिया को मनाने की कोशिश में लगे हुए हैं और यह फैसला जो एग्रीमेंट है जो 2012 से इसकी चर्चा चल रही है और 7 साल हो गए हैं तो इसमें इंडिया भी 1:00 बजे रहा है किंतु यही बात नहीं मानता तारा है तो इसलिए हमने हमने साइन करने से मना करते रहे इसलिए अभी तक साइन नहीं हो पाया इसकी कई बैठकें जारी रही तो इंडिया के इंटरेस्ट में नहीं था इसलिए इंडिया मना करता रहा तो तो अभी भी जो हमारे फॉरेन मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कमर्शियल मिनिस्टर ने कहा है कि अगर भारत के इन आयतों के इंटरेस्ट के अनुकूल जीवन में अगर फैसला हुआ भारत के फेवर में अगर बात हुई तो इस पर विचार किया जाएगा भारत में जोगी पॉइंट समझाएं हैं जो लिस्ट किए हैं रिकमेंड किए हैं कि माय

BRC P1 free trade Agreement yani mukt vyapar samjhauta hai jo ki india ne se sign karne se mana kar diya aur increment 16 deshon ke beech hone vala tha 16 din ki 10 aasiyan ki country aur 6 other country aasiyan mein aise ki aapka myamar vietnam singapore indonesia malaysia aur usa country jo SN ke 10 ghante aur iske alava 6 ghante aapka japan japan south korea austrailia new zealand china aur apna india tu hi 16 ghante ke beech mein ek aisa faisla tha jo ki world ka largest jo hai vyapar samjhauta tha sabse bada jo hai trade Agreement hone vala tha agar ho jata lekin yah nahi ho paya aur aur yah 50 percent poore vishwa ki 50 aabadi ke beech vyapar hone vala cream aata toh jo ki hamare yah prashant mahasagar mein jitna bhi vyapar hota hai asia ka usko pura cover karta hai 16 de sainik tere se bahut bade AGDP waale desh hain asia ke mukabal ho jaate hain toh isme mukt vyapar samjhauta is tarah ka hota hai ki isme jin deshon ke beech jin member deshon ke beech mein yah faisla hota hai 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