RCEP पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फ़ैसला लिया है, क्या वो निर्णय सही है? आपकी राय क्या है?...


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बीआरसी P1 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता है जो कि इंडिया ने से साइन करने से मना कर दिया और इंक्रीमेंट 16 देशों के बीच होने वाला था 16 दिन की 10 आसियान की कंट्री और 6 अदर कंट्री आसियान में ऐसे कि आपका म्यामार वियतनाम सिंगापुर इंडोनेशिया मलेशिया और यूएसए कंट्री जो एसएन के 10 घंटे और इसके अलावा 6 घंटे आपका जापान जापान साउथ कोरिया ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड चाइना और अपना इंडिया तू ही 16 घंटे के बीच में एक ऐसा फैसला था जो कि वर्ल्ड का लार्जेस्ट जो है व्यापार समझौता था सबसे बड़ा जो है ट्रेड एग्रीमेंट होने वाला था अगर हो जाता लेकिन यह नहीं हो पाया और और यह 50 परसेंट पूरे विश्व की 50% आबादी के बीच व्यापार होने वाला क्रीम आता तो जो कि हमारे यह प्रशांत महासागर में जितना भी व्यापार होता है एशिया का उसको पूरा कवर करता है 16 दे सैनिक तेरे से बहुत बड़े एजीडीपी वाले देश हैं एशिया के मुकाबल हो जाते हैं तो इसमें मुक्त व्यापार समझौता इस तरह का होता है कि इसमें जिन देशों के बीच जिन मेंबर देशों के बीच में यह फैसला होता है साइन होता है उन वह मेंबर्स के के बीच में जो घूस और सर्विस इसे वस्तुएं और सेवाएं हैं वह आने जाने की स्वतंत्र हो जाती बिना रोक-टोक के सभी देशों की वस्तुएं और सेवाएं दूसरे देशों में इंपोर्ट की जा सकती है अब अर्थपोर्ट की जा सकती तो इसमें कोई भी प्रतिबंध फिर नहीं रहते हैं और इस एग्रीमेंट का यही उद्देश्य था तो इसे इंडिया ने साइन नहीं किया सभी दबाव बनाए थे देश एस्पेशली चाइना चाह रहा था चाइना का इसमें इंटरेस्ट ज्यादा था चाइना क्योंकि चाइना को एक बड़ा मार्केट मिल जाता तो इंडिया की बहुत बड़ा मार्केट है वह ऐनक लिए तो इसमें हमारे लिए यह नुकसान था कि इसमें सबसे बड़ा कि जब भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो जाता तो बहुत सारा क्योंकि चाइना मैच मैन्युफैक्चरिंग हब है तो वहां से मैन्युफैक्चरिंग चीज है यहां पर वह अपना जितना भी इंडस्ट्रियल गुड्स है और जो मैन्युफैक्चरिंग गुड्स है वह हमारे यहां डम कर देता इससे हमारे यहां जो है गुड्स की भरमार हो जाती उनके यहां के उत्पादों की प्रोडक्ट की जिसकी हमारे यहां की जो डॉमेस्टिक इंडस्ट्री है जो घरेलू उद्योग है वह लास्ट में जाने की चांस हो जाते हैं हमारे यहां का जो मैन्युफैक्चरिंग जो है चीजें हैं वह उन्हें असर पड़ता क्योंकि उसकी बहुत ज्यादा सस्ती चीजे होती तो हमारे यहां के जो व्यापारी हैं हम को बहुत नुकसान होता जो उद्योगकर्मी है जो एमएसएमई सेक्टर है हमारा लघु उद्योग है उसको बहुत बड़ी मार पड़ती थी चाइना अपना सारा माल यहां पर दम कर सकता था इसके अलावा हमारे यहां के किसानों के लिए भी यह नुकसानदायक हो सकता क्योंकि यह दूध भी हमारे यहां के दूध जो है यही कि लोग का मिल्क प्रोडक्ट वगैरह होता है और दूध का उत्पादन जो तो आस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड भी इसी सारे यहां पर आ जाते हैं और उनके मिल्क प्रोडक्ट कि न्यूजीलैंड में मिल्क प्रोडक्शन बहुत होता है तो वह अपने मिल्क प्रोडक्ट हमारे यहां इस समझौते की वजह से बहुत ज्यादा ज्यादा ला पाते हैं तो इससे हमारे आगे जो किसान हैं और जो मिल्क प्रोडक्शन की कंपनी है उनको भी नुकसान होने के चांसेस थे और इसके अलावा हमारा सबसे बड़ी चीज जो है यह साइन करने का यीशु था कि हमारी जो है कुछ बातें पॉइंट थे जिन पर सहमति नहीं बन पाई सहमति ना बने हुए शामिल नहीं किया जाए हमारे हमारा इन 16 देशों के साथ जो आसियान देश और यह सब सूरज 107 105 बिलियन डॉलर का एजुकेटेड एक्सीडेंट की व्यापार घाटा चल रहा है तो यह व्यापार घाटा बहुत बड़ा रे व्यापार घाटा है तो यही बात उठ रही थी इस पर विरोध हो रहा था और कि हमारा बताओ हम इतना ज्यादा व्यापार घाटा झेल रहे इन एनी मेंबर देशों के साथ उन्हीं मेंबर देशों के साथ हमें एग्रीमेंट करेंगे तो उनका फायदा मतलब हमारा फायदा होगा और उनका फायदा ज्यादा होगा तो यह बात उठ रही थी कि व्यापार घाटा मेरा बहुत 105 अरब अरब डॉलर तो इस इसमें से 55 अरब डॉलर केवल चाइना के साथ व्यापार घाटा तो इसका व्यापार घाटे का मतलब है कि कि चाइना हमारे यहां अपनी वस्तुएं और सेवाएं गुड्स ओर सर्विसेज बहुत ज्यादा हमारे यहां एक्सपोर्ट करता है बहुत ज्यादा हमारा और उनका सामान हमारे अड्डम होता है लेकिन हमारा बहुत कम उनके एयरपोर्ट हो पाता है जिस वजह से मतलब हमारी जीडीपी में गड़बड़ी होती है क्या अगर किसी भी इस जीडीपी में अर्थव्यवस्था में अगर निर्यात कम हुआ या ज्यादा हो तो वह अर्थव्यवस्था घाटे में रहती है उसे व्यापार घाटा कहते हैं तो यही व्यापार घटा हमारे चाइना के साथ सबसे बड़ा है इसके अलावा आसियान देशों के साथ बनी टोटल मिलाकर जो 16 देशों के साथ 105 अरब डालर का व्यापार घाटा जो कि बहुत होता है जोकि 2018 19 के दौरान रहा है तो इस पर हमारी सहमति नहीं बन पाएगी यह व्यापार घाटा किस तरह से कम हो और हम जा कम से कम एक्सपोर्ट कर पाते हैं अपनी चीज है वह ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट करते हमारे यहां और हमारे घरेलू उद्योग को हमारे मार्केट का यूज कर रहे हैं और वहां पर अपनी जीडीपी बढ़ा रहे हैं यह 16 मेंबर देश तो यह सारे हमारी कंसर्न थे और भी कंसर्न थे रूल ऑफ ओरिजिन का भी अकाउंट संस्था की किसी बाया किसी दूसरे देश से होते हुए कोई प्रोडक्ट या सर्विस जो है ना भेजें जो गुट हैं और ना भेज सके तो रूल और और और और जेंट्स की बात भी भारत बनवाना चाहता था जो कि वह लोग नहीं माने और इसके अलावा भारत कुछ ड्यूटीज भी कम कराना चाहता था अब भारत चाहता है कि जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है यह इसका इंडिया के साथ बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है तू और देश है जिनके साथ व्यापार घाटा भारत का चल रहा है वह लोग इस बात को कंसीडर करें और अब आ भारत को अपनी मार्केट साझा करें भारत को ज्यादा sta-1 चीजें और जो है दूसरे देश जो 16 मेंबर देश है जिसमें चाइना और अलग आसियान कंट्री है और जापान वगैरह उनमें हमारी उनके यहां की मार्केट में हम जो हम जो प्रोडक्ट भेजते हैं कुछ भेजते हैं उन लोगों उसमें जॉब टेरिफ्स के है और ड्यूटी है उसमें 53 परसेंट का वह दिया है लेकिन हमने उनको 72% से 75% उनको छूट दे रखी है लेकिन उन्होंने हमें 53 परसेंट ही इस मामले में छूट दे रखी है जो कि भारत के साथ ठीक नहीं है तो यह सारे मुद्दे रहे हैं जिसकी वजह से भारत नहीं कि किसान इसमें किसानों का और इंडस्ट्री अष्टका और बहुत ज्यादा जो हमारे यहां के कंजूमर से उनके लिए भी नुकसानदेह हो सकता था क्योंकि यह जो देश है अपना अपना माल यहां पर डम कर देते इस किसकी चाइना चाइना के का जो है इसमें ज्यादा कंचन रहा चाइना का चाइना अपना सारा माल चाइना का धमारा घाटा बढ़ रहा है व्यापार घाटा अभी भी चाह रहा है कि वह ज्यादा ज्यादा अब मैं अपने भारत की मार्केट को एक्सेस करें और यहां पर अपना माल टाइप करें उनकी माल डम होने से यहां के लोग हेलो कब में खलबली है यहां के उद्योगों में गड़बड़ी हो सकती है लौट भी जा सकते हैं और यहां पर भारत में मंदी भी चल रही तो एक मंदी का एक बहुत बड़ा कारण कारण भी है कि और यहां पर भी रोजगार जाने की भी चांस है जब जब लघु उद्योग रहेगा तो फिर बहुत लोगों के रोजगार ए लार्ज स्केल में लोग अपने बुलेट कार हो जाएंगे तो यह भारत के हित में नहीं था भारत के इंडिया के टेस्ट के खिलाफ था लेकिन अभी भी विकल्प खुले हुए हैं भारत ने यह कहा है पहले भारत में शक्ति से इसका जवाब दिया कि हम इसमें से नहीं करेंगे लेकिन अभी भी कहा जा रहा है कि भारत भी कह रहा कि एक यज्ञ की चाइना वगैरह मनाने का दौर जारी है सभी देश चाहते हैं कि भारत भी इसमें शामिल हो अभी न्यूजीलैंड के दौरे पर जनरेटर मिनिस्टर है यहां पर आए हुए हैं हमारे इंडिया में और वह भी मिल्क प्रोडक्शन वालों से उन्होंने बात की है और वह भी विचार है कि सभी विचार है कि इंडिया शामिल हो जाएगी इंडिया एक बहुत बड़ा मार्केट चित्र सभी देश इंडिया को मनाने की कोशिश में लगे हुए हैं और यह फैसला जो एग्रीमेंट है जो 2012 से इसकी चर्चा चल रही है और 7 साल हो गए हैं तो इसमें इंडिया भी 1:00 बजे रहा है किंतु यही बात नहीं मानता तारा है तो इसलिए हमने हमने साइन करने से मना करते रहे इसलिए अभी तक साइन नहीं हो पाया इसकी कई बैठकें जारी रही तो इंडिया के इंटरेस्ट में नहीं था इसलिए इंडिया मना करता रहा तो तो अभी भी जो हमारे फॉरेन मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कमर्शियल मिनिस्टर ने कहा है कि अगर भारत के इन आयतों के इंटरेस्ट के अनुकूल जीवन में अगर फैसला हुआ भारत के फेवर में अगर बात हुई तो इस पर विचार किया जाएगा भारत में जोगी पॉइंट समझाएं हैं जो लिस्ट किए हैं रिकमेंड किए हैं कि माय

BRC P1 free trade Agreement yani mukt vyapar samjhauta hai jo ki india ne se sign karne se mana kar diya aur increment 16 deshon ke beech hone vala tha 16 din ki 10 aasiyan ki country aur 6 other country aasiyan mein aise ki aapka myamar vietnam singapore indonesia malaysia aur usa country jo SN ke 10 ghante aur iske alava 6 ghante aapka japan japan south korea austrailia new zealand china aur apna india tu hi 16 ghante ke beech mein ek aisa faisla tha jo ki world ka largest jo hai vyapar samjhauta tha sabse bada jo hai trade Agreement hone vala tha agar ho jata lekin yah nahi ho paya aur aur yah 50 percent poore vishwa ki 50 aabadi ke beech vyapar hone vala cream aata toh jo ki hamare yah prashant mahasagar mein jitna bhi vyapar hota hai asia ka usko pura cover karta hai 16 de sainik tere se bahut bade AGDP waale desh hain asia ke mukabal ho jaate hain toh isme mukt vyapar samjhauta is tarah ka hota hai ki isme jin deshon ke beech jin member deshon ke beech mein yah faisla hota hai 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jo gharelu udyog hai vaah last mein jaane ki chance ho jaate hain hamare yahan ka jo manufacturing jo hai cheezen hain vaah unhe asar padta kyonki uski bahut zyada sasti chije hoti toh hamare yahan ke jo vyapaari hain hum ko bahut nuksan hota jo udyogakarmi hai jo msme sector hai hamara laghu udyog hai usko bahut badi maar padti thi china apna saara maal yahan par dum kar sakta tha iske alava hamare yahan ke kisano ke liye bhi yah nukasanadayak ho sakta kyonki yah doodh bhi hamare yahan ke doodh jo hai yahi ki log ka milk product vagairah hota hai aur doodh ka utpadan jo toh Australia new zealand bhi isi saare yahan par aa jaate hain aur unke milk product ki new zealand mein milk production bahut hota hai toh vaah apne milk product hamare yahan is samjhaute ki wajah se bahut zyada zyada la paate hain toh isse hamare aage jo kisan hain aur jo milk production ki company hai unko bhi nuksan hone ke chances the aur iske alava hamara sabse badi cheez jo hai yah sign karne ka yeshu tha ki hamari jo hai kuch batein point the jin par sahmati nahi ban payi sahmati na bane hue shaamil nahi kiya jaaye hamare hamara in 16 deshon ke saath jo aasiyan desh aur yah sab suraj 107 105 billion dollar ka educated accident ki vyapar ghata chal raha hai toh yah vyapar ghata bahut bada ray vyapar ghata hai toh yahi baat uth rahi thi is par virodh ho raha tha aur ki hamara batao hum itna zyada vyapar ghata jhel rahe in any member deshon ke saath unhin member deshon ke saath hamein Agreement karenge toh unka fayda matlab hamara fayda hoga aur unka fayda zyada hoga toh yah baat uth rahi thi ki vyapar ghata mera bahut 105 arab arab dollar toh is isme se 55 arab dollar keval china ke saath vyapar ghata toh iska vyapar ghate ka matlab hai ki ki china hamare yahan apni vastuyen aur sevayen goods aur services bahut zyada hamare yahan export karta hai bahut zyada hamara aur unka saamaan hamare addam hota hai lekin hamara bahut kam unke airport ho pata hai jis wajah se matlab hamari gdp mein 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बीआरसी P1 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता है जो कि इंडिया ने से साइन करने स

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:13

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आरसीपी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया क्या वही आपकी राय क्या है जिया आईसीटी पर जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो फैसला लिया है वह फैसले का स्वागत पूरे देश को करना चाहिए क्योंकि जो यह देश हैं करीबन 25 से और वह लोग आपस में एक दूसरे के यहां माल सप्लाई करने पर उत्पादों को इधर से दूसरे देश में जाने पर विशेष छूट देने का प्रावधान था उसने चीन का भी समझता और चीन का माल वैसे भी यहां पर ज्यादा आता है और यहां से जो निर्यात है जिनको हुकम इस वजह से पूरे सभी जगह पर इसमें आईसीटी में चीन ही छा जाने वाला है इसलिए हमारे देश के लिए व्यापक है उनको काफी नुकसान पहुंचा और प्रदेश को इस तरह से काफी इराक में कमी आने की संभावना थी इसलिए मोदी जी ने जो निर्णय किया है कि हरसिद्धि का सम्मान करते हुए भावनाओं को उसकी सही बताया लेकिन उसमें सिग्नेचर करने से इंकार कर दिया सब भारतवासी इसमें है हमारी इंडस्ट्रीज है जो भी इंडिया तक हैं उसको रिश्ता से उन्होंने जरूर सुनना है और आईसीसी से साइना करके बहुत ही अच्छा किया है और हम इसका स्वागत करना चाहिए निर्णय का धन्यवाद

RCP par pradhanmantri narendra modi ne jo faisla liya kya wahi aapki rai kya hai jiya ICT par jab pradhanmantri modi ji ne jo faisla liya hai vaah faisle ka swaagat poore desh ko karna chahiye kyonki jo yah desh hain kariban 25 se aur vaah log aapas mein ek dusre ke yahan maal supply karne par utpadon ko idhar se dusre desh mein jaane par vishesh chhut dene ka pravadhan tha usne china ka bhi samajhata aur china ka maal waise bhi yahan par zyada aata hai aur yahan se jo niryat hai jinako huqam is wajah se poore sabhi jagah par isme ICT mein china hi cha jaane vala hai isliye hamare desh ke liye vyapak hai unko kafi nuksan pahuncha aur pradesh ko is tarah se kafi iraq mein kami aane ki sambhavna thi isliye modi ji ne jo nirnay kiya hai ki harsidhi ka sammaan karte hue bhavnao ko uski sahi bataya lekin usmein signature karne se inkar kar diya sab bharatvasi isme hai hamari industries hai jo bhi india tak hain usko rishta se unhone zaroor sunana hai aur icc se saina karke bahut hi accha kiya hai aur hum iska swaagat karna chahiye nirnay ka dhanyavad

आरसीपी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया क्या वही आपकी राय क्या है जिया आईसीट

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vandana bisht

UPSC Aspirant

2:09
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हेलो माय डियर फ्रेंड देखिए आरसीएपी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो भी फैसला लिया है मुझे यह लगता है कि वह काफी हद तक ठीक है क्योंकि अगर आरएसीपी में अगर हम साइन कर देते हैं तो हमारे जो व्यापार जो हमारे टैक्स लगता है तो वह टेक्स्ट में या तो बिल्कुल ही मैं उनको या टैक्स नहीं देना पड़ता हमारी अभी इकोनामी जो है बहुत डाउन चल रही है तो उसके हिसाब से जहां तक का मुझे लगता है कि यह डिसीजन लिया हुआ कत्ल राइट जैसी हमारी गुणों में लेबल ठीक हो जाता है तो हम कर सकते हैं प्रधानमंत्री आरएसीपी में आरसीबी में दर्शन करके जो है भारतीयों के हित जहां तक है मुझे नहीं दिखते हैं तो मैं यह सजेशन देना चाहूंगी कि व्यापारिक सबसे बड़ा व्यापार क्षेत्र व्यापार समझौता है जो मैं इसमें ट्रैक लेवल को कम करता है और इसमें जो आयात करने वाले देशों से आयात निर्यात करने वाले जो देश होते हैं वह या तो टैक्स पर करते हैं या कम कर करता है या पे करते ही नहीं है तो मेरा जो मानना है तो मैं यह समझ सकती हूं कि जिस कंडीशन अभी-अभी है अभी हाल ही में हमारे हमारे देश में मंदी आई थी इंफ्रास्ट्रक्चर पर तो मैं जहां तक का मेरा यह मानना है कि इस मंदिर से बचने के लिए और आगे कोई मैं किसी भी प्रकार की मंदिर एसेशन ना हो तो इसलिए अभी फिलहाल इस पर सेंड करना सही नहीं है कुछ टाइम बता दे इंडिया की हाल है सुधर सकती है तो हम इस पर उस टाइम पर हम सेंड करें तो बेहतर रहेगा

hello my dear friend dekhiye RCAP par pradhanmantri narendra modi ne jo bhi faisla liya hai mujhe yah lagta hai ki vaah kafi had tak theek hai kyonki agar RACP mein agar hum sign kar dete hain toh hamare jo vyapar jo hamare tax lagta hai toh vaah text mein ya toh bilkul hi main unko ya tax nahi dena padta hamari abhi economy jo hai bahut down chal rahi hai toh uske hisab se jahan tak ka mujhe lagta hai ki yah decision liya hua katl right jaisi hamari gunon mein lebal theek ho jata hai toh hum kar sakte hain pradhanmantri RACP mein RCB mein darshan karke jo hai bharatiyon ke hit jahan tak hai mujhe nahi dikhte hain toh main yah suggestion dena chahungi ki vyaparik sabse bada vyapar kshetra vyapar samjhauta hai jo main isme track level ko kam karta hai aur isme jo aayaat karne waale deshon se aayaat niryat karne waale jo desh hote hain vaah ya toh tax par karte hain ya kam kar karta hai ya pe karte hi nahi hai toh mera jo manana hai toh main yah samajh sakti hoon ki jis condition abhi abhi hai abhi haal hi mein hamare hamare desh mein mandi I thi infrastructure par toh main jahan tak ka mera yah manana hai ki is mandir se bachne ke liye aur aage koi main kisi bhi prakar ki mandir eseshan na ho toh isliye abhi filhal is par send karna sahi nahi hai kuch time bata de india ki haal hai sudhar sakti hai toh hum is par us time par hum send karen toh behtar rahega

हेलो माय डियर फ्रेंड देखिए आरसीएपी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो भी फैसला लिया है मुझ

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Sanjeev

Teacher

6:07
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आसिफ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है क्या वह निर्णय सही है आपकी राय क्या है तो इस सवाल का जवाब तो सीधा नहीं हो सकता है क्योंकि कोई फैसला लिया गया है तो क्यों लिया गया है किस आधार पर लिया गया है यह नहीं कह सकता है कि एकदम सही है एकदम गलत है यह अन गोइंग प्रोसेस है इसमें अभी के लिए सही हो सकता है या अभी के लिए गलत हो सकता है बात के लिए सही हो सकता है क्या अभी के लिए गलत सही हो सही हो सकता है बात के लिए गलत हो सकता है तो यह नहीं कह सकता कि सही है कि गलत है यह डीलिंग हो रही है डीलिंग प्रोसेस है इसमें नेगोशिएशन हो रहा है तो फिलहाल यह किस टाइम है इस प्रोसेस में अपनी बात मनवाने का कोशिश है जहां फैसला लेने की प्रक्रिया में होता है कि आपको देखना होता है टोटल केन वर्सेस टोटल तो हो सकता है कि मोदी जी ने जो की टीम ने देख रहा हो कि यहां फायदा कम नुकसान ज्यादा हो रहा है तो फिलहाल कदम रोकने जरूरत है ऐसा कर कर देखा जाए तो फिलहाल के लिए सही उत्तर सही काम किया है उन्होंने इतने बड़े इन्वेस्टर हुए हैं वारेन बफे अधिकतर चीजों को नाहक कहता है मतलब अधिकतर चीजों के लिए ना कह देता है कोई कहता है कि अरे साहब यह बिजनेस कर लो आपके पास ₹1000000 आए अभी अभी मत करो कोई पता ही नहीं है बिजनेस कर लो कोई कथा वह बिजनेस कर लो यह 12 फीट का कहना है कि अगर आप सफल की श्रेणी में देखना चाहते हैं या सामान्य से बातें जो भी सफल कैसे दिखता है उसमें देखा जाता है कि ज्यादातर चीजों को ना कह देता है और क्या करता है अच्छा ही करना है हां यह भी कर लेते हैं वह भी करना है कहीं सामान्य परिचय जो एक्स्ट्राऑर्डिनरी लोग होते हैं उनका एप्रोच क्या होता है कि वह दिखाने के लिए नहीं करते हैं कि देखो हम तो करने कर रहे हैं बहुत कुछ कर रहे हैं मेरे आस पास काफी एक्टिविटी हो रही है मैं खुद एक्टिविटी मैनुअल वह खुद को एक्टिविटी में दिखाने का शौक नहीं रखते हैं वह डीजल पर फोकस करते हैं ज्यादातर चीजों को बोलना कह देते हैं बहुत ही कम चीजों को एक्सेप्ट करते हैं जिसमें वह जब तक सफल रहते हैं जाहिर सी बात है अगर सालों से मिलेंगे तो सब लोग तो सही हो नहीं सकते उसमें से कुछ 1 लोग ही बहुत अच्छे होंगे तो ज्यादातर लोगों को ना कर देना कहीं ज्यादा अच्छा फैसला होता है जब से मोदी जी ने खुद को एकदम में दिखाने की जगह जातियों को ना कर करके फैसला किया है जैसे बात है जो भी कोई एक-दो फैसले आएंगे काफी काफी सारे मीटिंग हो रही है काफी सारे मीटिंग में नाका करके मोदी जी ने यह दिखाने कोशिश किया कि हम इतने उतावले नहीं हैं हम हमारा फ्रेंड होना चाहिए हमारे पास नहीं है हम पहचान नहीं है हम आराम से करेंगे अपने शब्दों करेंगे यह नहीं कि आपको हम जवान दूसरे देशों को दबाना है लेकिन हां अपनी खासियत को आगे रखना है कि भाई हमें ऐसे इसमें प्रावधान है व्हाट्सएप में कि आपको हमारे जूस किल्ले व हमारे यहां इंडस्ट्रीज इंडस्ट्रीज ज्यादा नहीं है तो यहां पर सर्विस सेक्टर है इसके लेबर से काफी हद तक यह काम जो है वहीं पर हो सकता है उनको मिल सकती है और यह जो देश है इनको केवल भारत में बेचना है भारत भारत और ज्यादा माल तैयार नहीं कर पाता है तू जब भारत के पास ज्यादा माल नहीं तैयार होगा तो बेचेगा क्या उनके पास ज्यादा माल भेजेंगे तो उधर से व्हाट्सएप वाले जा रहे फायदे में रहेंगे लेकिन मोदी चाहते हैं कि कम से कम इतना वो कि हमारे पास इतने कैप्सिटी नहीं है अभी डिवेलप कि हम अपना वह बना सकें माल बना कर दे सके उतनी क्वालिटी का उसने लेवल पर स्केल पर तो कम से कम हमारे उसकी लेबर है उनको काम मिले ऐसी बात है अगर हमारे देश में लोगों को काम ही नहीं मिलेगा तो आप की चीजें भी कई सारी चीजें लेवल करने के लिए उनको समझ में नहीं आ रहा आशिक वालों को फायदा की बातें कर रहे हैं अगर नौकरियां हमको मिले उनके काम करेंगे और यहां के पैसे भेजेंगे तो यहां के लोग खरीदने की क्षमता की परचेसिंग पावर बढ़ेगी तभी तक के देशों को मिलेगा मार्केट मिलेगी तो उस दिन में समझ जाएंगे समय लगता है मेरे ख्याल से हो सकता है जाकर चांस है कि यह फैसला सही है यह कोई बंधन नहीं है अब इसमें काफी कुछ डाला जा रहा है काफी कुछ निकाला जा रहा है

asif par pradhanmantri narendra modi ne jo faisla liya hai kya vaah nirnay sahi hai aapki rai kya hai toh is sawaal ka jawab toh seedha nahi ho sakta hai kyonki koi faisla liya gaya hai toh kyon liya gaya hai kis aadhaar par liya gaya hai yah nahi keh sakta hai ki ekdam sahi hai ekdam galat hai yah an going process hai isme abhi ke liye sahi ho sakta hai ya abhi ke liye galat ho sakta hai baat ke liye sahi ho sakta hai kya abhi ke liye galat sahi ho sahi ho sakta hai baat ke liye galat ho sakta hai toh yah nahi keh sakta ki sahi hai ki galat hai yah dealing ho rahi hai dealing process hai isme negotiation ho raha hai toh filhal yah kis time hai is process mein apni baat manvane ka koshish hai jahan faisla lene ki prakriya mein hota hai ki aapko dekhna hota hai total cane versus total toh ho sakta hai ki modi ji ne jo ki team ne dekh raha ho ki yahan fayda kam nuksan zyada ho raha hai toh filhal kadam rokne zaroorat hai aisa kar kar dekha jaaye toh filhal ke liye sahi uttar sahi kaam kiya hai unhone itne bade investor hue hain Warren bafe adhiktar chijon ko nahak kahata hai matlab adhiktar chijon ke liye na keh deta hai koi kahata hai ki arre saheb yah business kar lo aapke paas Rs aaye abhi abhi mat karo koi pata hi nahi hai business kar lo koi katha vaah business kar lo yah 12 feet ka kehna hai ki agar aap safal ki shreni mein dekhna chahte hain ya samanya se batein jo bhi safal kaise dikhta hai usmein dekha jata hai ki jyadatar chijon ko na keh deta hai aur kya karta hai accha hi karna hai haan yah bhi kar lete hain vaah bhi karna hai kahin samanya parichay jo extraordinary log hote hain unka approach kya hota hai ki vaah dikhane ke liye nahi karte hain ki dekho hum toh karne kar rahe hain bahut kuch kar rahe hain mere aas paas kafi activity ho rahi hai main khud activity manual vaah khud ko activity mein dikhane ka shauk nahi rakhte hain vaah diesel par focus karte hain jyadatar chijon ko bolna keh dete hain bahut hi kam chijon ko except karte hain jisme vaah jab tak safal rehte hain jaahir si baat hai agar salon se milenge toh sab log toh sahi ho nahi sakte usmein se kuch 1 log hi bahut acche honge toh jyadatar logon ko na kar dena kahin zyada accha faisla hota hai jab se modi ji ne khud ko ekdam mein dikhane ki jagah jaatiyo ko na kar karke faisla kiya hai jaise baat hai jo bhi koi ek do faisle aayenge kafi kafi saare meeting ho rahi hai kafi saare meeting mein naka karke modi ji ne yah dikhane koshish kiya ki hum itne utavale nahi hain hum hamara friend hona chahiye hamare paas nahi hai hum pehchaan nahi hai hum aaram se karenge apne shabdon karenge yah nahi ki aapko hum jawaan dusre deshon ko dabana hai lekin haan apni khasiyat ko aage rakhna hai ki bhai hamein aise isme pravadhan hai whatsapp mein ki aapko hamare juice kille v hamare yahan industries industries zyada nahi hai toh yahan par service sector hai iske labour se kafi had tak yah kaam jo hai wahin par ho sakta hai unko mil sakti hai aur yah jo desh hai inko keval bharat mein bechna hai bharat bharat aur zyada maal taiyar nahi kar pata hai tu jab bharat ke paas zyada maal nahi taiyar hoga toh bechega kya unke paas zyada maal bhejenge toh udhar se whatsapp waale ja rahe fayde mein rahenge lekin modi chahte hain ki kam se kam itna vo ki hamare paas itne kaipsiti nahi hai abhi develop ki hum apna vaah bana sakein maal bana kar de sake utani quality ka usne level par scale par toh kam se kam hamare uski labour hai unko kaam mile aisi baat hai agar hamare desh mein logon ko kaam hi nahi milega toh aap ki cheezen bhi kai saree cheezen level karne ke liye unko samajh mein nahi aa raha aashik walon ko fayda ki batein kar rahe hain agar naukriyan hamko mile unke kaam karenge aur yahan ke paise bhejenge toh yahan ke log kharidne ki kshamta ki parachesingh power badhegi tabhi tak ke deshon ko milega market milegi toh us din mein samajh jaenge samay lagta hai mere khayal se ho sakta hai jaakar chance hai ki yah faisla sahi hai yah koi bandhan nahi hai ab isme kafi kuch dala ja raha hai kafi kuch nikaala ja raha hai

आसिफ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है क्या वह निर्णय सही है आपकी राय क्या

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