जब आप कठिन कहानियाँ कवर करते हैं, तब एक पत्रकार के रूप में अपने आप को उनसे डिटैच या अलग कैसे कर पाते हैं?...


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Asad Ashraf

One of India's leading journalists on minority issues

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे लगता है कि यह तो मुझे लगता है कि परेशान तो होते हैं और ऐसी चीजों को रिपोर्ट करने की

mujhe lagta hai ki yah toh mujhe lagta hai ki pareshan toh hote hain aur aisi chijon ko report karne ki

मुझे लगता है कि यह तो मुझे लगता है कि परेशान तो होते हैं और ऐसी चीजों को रिपोर्ट करने की

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब हम कोई बड़ी खबर है या कटनी वाला काम करते हैं तो उसमें परेशानी का सामना करना पड़ता है लेकिन उसके लिए हम बाती है अपने आपको धैर्य फूल बनाए रखना और ऐसे में सबसे अहम बात कि है कि हम अपने आप को पैशन फूल बनाए रखें और जब पैशन प्रो खुद को बनाएंगे तो कहीं जानकारी वह आपको सामना हो जाएगा ऐसे में आपका मिशन सक्सेसफुल रहेगा

jab hum koi badi khabar hai ya katni vala kaam karte hain toh usme pareshani ka samana karna padta hai lekin uske liye hum bati hai apne aapko dhairya fool banaye rakhna aur aise mein sabse aham baat ki hai ki hum apne aap ko passion fool banaye rakhen aur jab passion pro khud ko banayenge toh kahin jaankari vaah aapko samana ho jaega aise mein aapka mission successful rahega

जब हम कोई बड़ी खबर है या कटनी वाला काम करते हैं तो उसमें परेशानी का सामना करना पड़ता है ले

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

स्टोरी का वध करते सब हमें उसके ऊपर पूरा ध्यान देना होता है छोटी से छोटी बात को हमें खबर करना पड़ता है सारी जानकारियां जुटाना पड़ती है सच्चाई हकीकत को सामने निकालता है कई बार इस दो जो हम को लाने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ती है अपने शॉट्स बढ़ाना होते हैं और बारीक से बारीक बात को भी जानने के लिए करना चाहिए और उसकी एक कला होती है क्विक होती है कि किसी से भी कोई बात कैसे हो बुलाई जाए या किसी भी बात की जानकारी कैसे ली जाए हर व्यक्ति की सफलता पाताल पनीर की आवश्यकता होती है जो हर एक पत्रकार में अच्छे पत्रकार के अंदर होती है उसका गुण होता है

story ka vadh karte sab hamein uske upar pura dhyan dena hota hai choti se choti baat ko hamein khabar karna padta hai saree jankariyan jutana padti hai sacchai haqiqat ko saamne nikalata hai kai baar is do jo hum ko lane ke liye kadi mehnat karna padti hai apne shots badhana hote hain aur baarik se baarik baat ko bhi jaanne ke liye karna chahiye aur uski ek kala hoti hai quick hoti hai ki kisi se bhi koi baat kaise ho bulaai jaaye ya kisi bhi baat ki jaankari kaise li jaaye har vyakti ki safalta paatal paneer ki avashyakta hoti hai jo har ek patrakar mein acche patrakar ke andar hoti hai uska gun hota hai

स्टोरी का वध करते सब हमें उसके ऊपर पूरा ध्यान देना होता है छोटी से छोटी बात को हमें खबर कर

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डिटैच करने की जरूरत नहीं मानवीय संवेदनाओं के साथ अटैच करने की जरूरत है ऐसा करो आप बेहतर और ज्यादा शक्ति स्टोरी कर सकते हैं

ditaich karne ki zarurat nahi manviya sanvednaon ke saath attach karne ki zarurat hai aisa karo aap behtar aur zyada shakti story kar sakte hain

डिटैच करने की जरूरत नहीं मानवीय संवेदनाओं के साथ अटैच करने की जरूरत है ऐसा करो आप बेहतर और

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आपका सवाल बहुत गजब का है निश्चित तौर पर कई बार कुछ ऐसी खबरें या कहानियां हम कवर करते हैं जिनसे हम खुद को अलग नहीं कर पाते वह हमारे दिलों दिमाग पर ऐसी गहरी छाप छोड़ देती है कि कहीं ना कहीं उसका असर लंबे समय तक हमारे जीवन पर रहता है ऐसी बहुत सारी कहानियां मैंने कवर की है जिन्हें आज तक मैं याद करता हूं कई बार ऐसी घटनाएं भी कवर करने का मौका मिला कि वह मैं सोच और सुनकर सिर उठते हैं लेकिन क्योंकि पैसा है रोजमर्रा का कामकाज है इसलिए संतुलन बना कर रखना जरूरी है और ऐसा कहा जाता है जैसे कवि के बारे में कहा गया है कि वियोगी होगा पहला कवि उसी तरह पत्रकार के अंदर अगर भावनाएं नहीं है संवेदना ही नहीं है तो पत्रकार हो ही नहीं सकता क्योंकि पता नहीं आपको किस किस परिस्थिति में किस किस हालत में काम करना पड़ता लेकिन इसका तात्पर्य यह कतई नहीं है कि आप भावनाओं में बहकर कुछ भी लिखे कुछ भी करें भावना एक तरफ है और स्टोरी कवरेज एक तरफ है लेकिन आपको बाबू करना चाहिए आपको संवेदना ही होनी चाहिए ताकि आप जब कहानी लिखे तो वह संवेदनाएं आप की कलम से चलकने चाहिए आपके व्यवहार से नहीं

aapka sawaal bahut gajab ka hai nishchit taur par kai baar kuch aisi khabren ya kahaniya hum cover karte hain jinse hum khud ko alag nahi kar paate vaah hamare dilon dimag par aisi gehri chhaap chod deti hai ki kahin na kahin uska asar lambe samay tak hamare jeevan par rehta hai aisi bahut saree kahaniya maine cover ki hai jinhen aaj tak main yaad karta hoon kai baar aisi ghatnaye bhi cover karne ka mauka mila ki vaah main soch aur sunkar sir uthte hain lekin kyonki paisa hai rozmarra ka kaamkaaj hai isliye santulan bana kar rakhna zaroori hai aur aisa kaha jata hai jaise kavi ke bare mein kaha gaya hai ki viyogi hoga pehla kavi usi tarah patrakar ke andar agar bhaavnaye nahi hai samvedana hi nahi hai toh patrakar ho hi nahi sakta kyonki pata nahi aapko kis kis paristithi mein kis kis halat mein kaam karna padta lekin iska tatparya yah katai nahi hai ki aap bhavnao mein bahkar kuch bhi likhe kuch bhi kare bhavna ek taraf hai aur story coverage ek taraf hai lekin aapko babu karna chahiye aapko samvedana hi honi chahiye taki aap jab kahani likhe toh vaah sanvednaen aap ki kalam se chalkane chahiye aapke vyavhar se nahi

आपका सवाल बहुत गजब का है निश्चित तौर पर कई बार कुछ ऐसी खबरें या कहानियां हम कवर करते हैं ज

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं झारखंड राज्य के अधिग्रहीत गिरीडीह जिला के पीटर प्रखंड जगदीशपुर क्षेत्र हर हफ्ते यहां स्टोरी करना कितनी कठिन हो सकती है आप समझ सकते हैं हमारे ब्लॉक में सपना ग्राम पंचायत 17 ग्राम पंचायत में एक भी ऐसा पंचायत नहीं है या नक्सल क्षेत्र नहीं था कभी कम हुए ऐसे क्षेत्रों में जाकर आम लोगों से बात करना सबके बस की बात नहीं है मैं एक बात पत्रकार हूं जो एकदम नक्सल एरिया में जाकर के लोगों से बात करता हूं लोगों की समस्याएं जानता उसे प्रकाशित कर रहा हूं इसलिए हमें कई प्रकार की परेशानियां झेलनी पड़ी है एक बार तो जंगल की सरकार ने हमें रोका भी था लेकिन हम रुके नहीं वहां के लोगों की समस्याएं प्रकाशित किया हालांकि उस पर भी हुआ कुछ ऐसे काम भी हमने टच किया इस गांव में नक्सलवाद रहते थे उस गांव को स्टोरी बनाया उसका और के लोगों की समस्याएं छाती हमें देख रहा हूं कुछ गांव का छोरा मैं आम लोगों के प्रयास से आम लोगों के सहयोग से आगे बढ़ने में सफलता पाई

main jharkhand rajya ke adhigrahit giridih jila ke peter prakhand jagdishpur kshetra har hafte yahan story karna kitni kathin ho sakti hai aap samajh sakte hai hamare block mein sapna gram panchayat 17 gram panchayat mein ek bhi aisa panchayat nahi hai ya naxal kshetra nahi tha kabhi kam hue aise kshetro mein jaakar aam logo se baat karna sabke bus ki baat nahi hai ek baat patrakar hoon jo ekdam naxal area mein jaakar ke logo se baat karta hoon logo ki samasyaen jaanta use prakashit kar raha hoon isliye hamein kai prakar ki pareshaniya jhelani padi hai ek baar toh jungle ki sarkar ne hamein roka bhi tha lekin hum ruke nahi wahan ke logo ki samasyaen prakashit kiya halaki us par bhi hua kuch aise kaam bhi humne touch kiya is gaon mein naksalvad rehte the us gaon ko story banaya uska aur ke logo ki samasyaen chhati hamein dekh raha hoon kuch gaon ka chhora main aam logo ke prayas se aam logo ke sahyog se aage badhne mein safalta payi

मैं झारखंड राज्य के अधिग्रहीत गिरीडीह जिला के पीटर प्रखंड जगदीशपुर क्षेत्र हर हफ्ते यहां स

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Nirjesh Mishra

पत्रकारिता

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सब संभव है एक पत्रकार के लिए कठिन से कठिन स्टोरी हम लोग कवर करते हैं और उनको कॉल करने में कोई दिक्कत नहीं होती है दिमाग और संयम से काम लेना पड़ता है अगर जो कहीं दुख की घड़ी है तो उनको उनके दुख की घड़ी में उनके साथ शामिल हो उनके दुख की घड़ी में उनके साथ शामिल हो गया वह सारी बातें आपको बता देंगे आपको सारे कुल्लू मिल जाएंगे सारी जानकारियां मिल जाएंगे अगर जो कोई उत्साह का माहौल है वहां पर कोई ऐसा आपको प्रतीत हो रहा है कि इस तरीके से कोई मान लिया कि कोई संदिग्ध व्यक्ति वहां पर मौजूद है जो वहां पर कोई मतलब जो है कि अनहोनी घटना को अंजाम दे सकता है तो आप उस पर नजर रख कर के अपना काम पूरा कर सकता है

yah sab sambhav hai ek patrakar ke liye kathin se kathin story hum log cover karte hain aur unko call karne mein koi dikkat nahi hoti hai dimag aur sanyam se kaam lena padta hai agar jo kahin dukh ki ghadi hai toh unko unke dukh ki ghadi mein unke saath shaamil ho unke dukh ki ghadi mein unke saath shaamil ho gaya vaah saree batein aapko bata denge aapko saare kullu mil jaenge saree jankariyan mil jaenge agar jo koi utsaah ka maahaul hai wahan par koi aisa aapko pratit ho raha hai ki is tarike se koi maan liya ki koi sandigdh vyakti wahan par maujud hai jo wahan par koi matlab jo hai ki anahoni ghatna ko anjaam de sakta hai toh aap us par nazar rakh kar ke apna kaam pura kar sakta hai

यह सब संभव है एक पत्रकार के लिए कठिन से कठिन स्टोरी हम लोग कवर करते हैं और उनको कॉल करने म

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Sachin Sinha

Journalist

1:23
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल यह इस पर एक बात और करना चाहूंगा और कठिन कहानियां कवर करते हैं तो फिर गर्मियों का क्योंकि आपको हर चीज आपको मालूम रहता है और यह भी मालूम होता है आपको कि क्या हो सके तो आप भी अपने आप से अलग रूप में आना पड़ता है हॉस्पिटल काम करना पड़ता है जैसे मैंने कहा कि अन्य लोगों को भी जवाब के साथ गए हैं उन्हें भी इसकी पूरी जानकारी नहीं होनी चाहिए कि अगले को करिए जानकारी जिससे हर सकता है इसलिए जानकारी कभी नदी और खुद को भी एकदम अलग रखें कुछ मालूम नहीं है जगह पर जाते हैं जहां पर आप कठिन कहानियां

bilkul yah is par ek baat aur karna chahunga aur kathin kahaniya cover karte hain toh phir garmiyo ka kyonki aapko har cheez aapko maloom rehta hai aur yah bhi maloom hota hai aapko ki kya ho sake toh aap bhi apne aap se alag roop mein aana padta hai hospital kaam karna padta hai jaise maine kaha ki anya logo ko bhi jawab ke saath gaye hain unhe bhi iski puri jaankari nahi honi chahiye ki agle ko kariye jaankari jisse har sakta hai isliye jaankari kabhi nadi aur khud ko bhi ekdam alag rakhen kuch maloom nahi hai jagah par jaate hain jaha par aap kathin kahaniyan

बिल्कुल यह इस पर एक बात और करना चाहूंगा और कठिन कहानियां कवर करते हैं तो फिर गर्मियों का क

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Mayank Saxena

Journalist-Writer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह दरअसल एक अच्छा सवाल है और एक पत्रकार के तौर पर मेरे पास लगभग डेढ़ दशक का जो अनुभव है उसमें यह सवाल मुझे लगता है इतना मुश्किल है कि हर पत्रकार जो पेड़ में काम करता रहा है और यह केवल पत्रकार के लिए नहीं है 10 साल अगर आप पर सरकारी अधिकारी यह एक्टिविस्ट के तौर पर भी अगर फील्ड में काम कर रहे हैं तो भी आप इस सवाल से बार बार पूछेंगे तो कठिन कहानियां कवर करते समय एक पत्रकार के रूप में आप उससे अपने आप को कैसे डिटैच करते हैं पहली चीज तो यह मुझे लगता है निजी तौर पर मेरी राय है अच्छी पत्रकारिता करने के लिए कठिन कहानियां कवर करते समय उससे अपने आपको डिटेल नहीं करना चाहिए इसका मतलब यह है कि आपका जितना उस कहानी से जुड़ाव होगा आप उतना बेहतर तरीके से उसको कवर कर पाएंगे हां उस कहानी को कवर करने के बाद उसे डिटैचमेंट प्रोसेस ऑफ से बात करते हैं एक उदाहरण उदाहरण आपको देता हूं मान लीजिए कि आप दरदिया मराठवाड़ा के किसी गांव में महाराष्ट्र में गए हैं किसानों की जो दिक्कत है उसको कवर करके पूछ कर देखिए अगर आप उस कहानी से अपने आपको डिटेल्स कर लेंगे तो आप बेहतर तरीके से कभी भी उस खबर को नहीं कर पाएंगे यानी कि उस खबर को दिखाने का मकसद क्या है उस खबर को दिखाने का मकसद है कि किसानों की दिक्कतें बाकी दुनिया के सामने आए सरकार पर दबाव बने उनके लिए कुछ किया जाए अगर आप अपने आप को निशुल्क डिटैच कर लेंगे उस समय तो आपके साथ की तकलीफ कैसे समझेंगे अगर एक पत्रकार के तौर पर उसके दुख से आप दुखी नहीं हो सकते उसकी वेदना को आप महसूस नहीं कर सकते उसके आंसुओं को देखकर आपकी आंख में पानी नहीं आ रहा है तो आखिर कैसे आप एक बेहतर रिपोर्ट तैयार कर पाएंगे जो इतनी भावुक हो कि लोगों के अंदर जो उसको देख रहे हैं रिपोर्ट को या सुन रहे हैं या पढ़ रहे उनके अंदर वही भाव पैदा हो पाए जो आपके अंदर हुआ यह जो किसान तकलीफ महसूस करता है क्योंकि पत्रकार के तौर पर ऐसी किसी खबर के दौरान आपका काम किसान के प्रति सहानुभूति से ज्यादा लोगों में आत्मानुभूति पैदा करना है दूसरा उधार लेते हैं और रिपोर्टिंग कर रहे हैं आप यह नहीं महसूस करना चाहेंगे कि युद्ध जो है दर्शन दोनों ही पक्षों के लिए या मानवता के लिए कितनी खतरनाक चीज है क्या आप युद्ध में मरते हुए जो एक कॉलेटरल डैमेज होता है जिसमें बेगुनाह और गरीब लोग मरते हैं युद्ध में जो उस युद्ध का शिकार बनते हैं गोलीबारी का शिकार बनते हैं जो फौजी नहीं होते जो फौजी जो शहीद हो रहे हैं उनका परिवार नहीं है आपको वहां खड़े होकर अपने आपको उन सब की जगह रखकर ही सोचना होगा तभी आप बेहतर पत्रकारिता कर सकते हैं तो पहली कहानी कवर करते समय उसके अपने आपको डिटेल्स करना अच्छी पत्रकारिता के बुनियादी उसूल के खिलाफ जाने के बाद एक आभूषण चोरी कर निकल जाते हो आपको अगली सपने आपको अटैच कर लेना लौट के आपको अपने आपको डिटेल्स करना होता है आप किताब पढ़ सकते हैं आप दिन बाद देख सकते आप लोगों से मिल सकते हैं या आप किताब लिख सकते हैं अपने अनुभवों के आधार पर उसके मजाक को चोरी करने के बाद डाटा चला जरूरी है लेकिन करते समय नहीं होना चाहिए

yah darasal ek accha sawaal hai aur ek patrakar ke taur par mere paas lagbhag dedh dashak ka jo anubhav hai usme yah sawaal mujhe lagta hai itna mushkil hai ki har patrakar jo ped mein kaam karta raha hai aur yah keval patrakar ke liye nahi hai 10 saal agar aap par sarkari adhikari yah activist ke taur par bhi agar field mein kaam kar rahe hai toh bhi aap is sawaal se baar baar puchenge toh kathin kahaniya cover karte samay ek patrakar ke roop mein aap usse apne aap ko kaise ditaich karte hai pehli cheez toh yah mujhe lagta hai niji taur par meri rai hai achi patrakarita karne ke liye kathin kahaniya cover karte samay usse apne aapko detail nahi karna chahiye iska matlab yah hai ki aapka jitna us kahani se judav hoga aap utana behtar tarike se usko cover kar payenge haan us kahani ko cover karne ke baad use ditaichment process of se baat karte hai ek udaharan udaharan aapko deta hoon maan lijiye ki aap dardiya marathwada ke kisi gaon mein maharashtra mein gaye hai kisano ki jo dikkat hai usko cover karke puch kar dekhiye agar aap us kahani se apne aapko details kar lenge toh aap behtar tarike se kabhi bhi us khabar ko nahi kar payenge yani ki us khabar ko dikhane ka maksad kya hai us khabar ko dikhane ka maksad hai ki kisano ki dikkaten baki duniya ke saamne aaye sarkar par dabaav bane unke liye kuch kiya jaaye agar aap apne aap ko nishulk ditaich kar lenge us samay toh aapke saath ki takleef kaise samjhenge agar ek patrakar ke taur par uske dukh se aap dukhi nahi ho sakte uski vedana ko aap mehsus nahi kar sakte uske ansuon ko dekhkar aapki aankh mein paani nahi aa raha hai toh aakhir kaise aap ek behtar report taiyar kar payenge jo itni bhavuk ho ki logo ke andar jo usko dekh rahe hai report ko ya sun rahe hai ya padh rahe unke andar wahi bhav paida ho paye jo aapke andar hua yah jo kisan takleef mehsus karta hai kyonki patrakar ke taur par aisi kisi khabar ke dauran aapka kaam kisan ke prati sahanubhuti se zyada logo mein atmanubhuti paida karna hai doosra udhaar lete hai aur reporting kar rahe hai aap yah nahi mehsus karna chahenge ki yudh jo hai darshan dono hi pakshon ke liye ya manavta ke liye kitni khataranaak cheez hai kya aap yudh mein marte hue jo ek kaletaral damage hota hai jisme begunah aur garib log marte hai yudh mein jo us yudh ka shikaar bante hai golibari ka shikaar bante hai jo fauji nahi hote jo fauji jo shaheed ho rahe hai unka parivar nahi hai aapko wahan khade hokar apne aapko un sab ki jagah rakhakar hi sochna hoga tabhi aap behtar patrakarita kar sakte hai toh pehli kahani cover karte samay uske apne aapko details karna achi patrakarita ke buniyadi usul ke khilaf jaane ke baad ek aabhusan chori kar nikal jaate ho aapko agli sapne aapko attach kar lena lot ke aapko apne aapko details karna hota hai aap kitab padh sakte hai aap din baad dekh sakte aap logo se mil sakte hai ya aap kitab likh sakte hai apne anubhavon ke aadhaar par uske mazak ko chori karne ke baad data chala zaroori hai lekin karte samay nahi hona chahiye

यह दरअसल एक अच्छा सवाल है और एक पत्रकार के तौर पर मेरे पास लगभग डेढ़ दशक का जो अनुभव है उ

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ब्यूटीफुल समझा है आपने जो बताया कि इस टेंडर में लिखे जब भी आप कटने आता है दिया लाइफ में तो आपको सिर्फ एक ही ध्यान रखना ही में काम कर सकता हूं ठीक है चाहे कुछ भी हो जाए जितना भी परेशानी है कि पिकल ना होला जो आपका दिल में ही रखा है कि मुझे स्ट्रेटफारवर्ड जाना है चाहे कुछ भी हो जाए मुझे लगता है कि जितना भी कोचिंग आएगा वह बहुत बिजी हो जाएगा

beautiful samjha hai aapne jo bataya ki is tender mein likhe jab bhi aap katane aata hai diya life mein toh aapko sirf ek hi dhyan rakhna hi mein kaam kar sakta hoon theek hai chahen kuch bhi ho jaaye jitna bhi pareshani hai ki pickle na hola jo aapka dil mein hi rakha hai ki mujhe stretafaravard jana hai chahen kuch bhi ho jaaye mujhe lagta hai ki jitna bhi coaching aayega vaah bahut busy ho jaega

ब्यूटीफुल समझा है आपने जो बताया कि इस टेंडर में लिखे जब भी आप कटने आता है दिया लाइफ में तो

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