अपने छात्र ऐक्टिविज़म के द्वारा क्या आप कोई बदलाव ला पाए थे?...


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Shubham Mishra

Journalist

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आज जब भी कोई प्रोफेशन में होता है आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा कि आप छात्र एक्टिविज्म के द्वारा कोई बदलाव ला पाए थे बदलाव छात्र संगति की बात करें जब संत शंकर की होती है यानी जिस दौर में हम पढ़ाई कर रहे होते हम शिक्षक के द्वारा ज्ञान ले रहे होते हैं हम छात्र होते हैं उस समय हमारे संस्थान शिक्षा संस्थानों काम पर बहुत गहरा प्रभाव होता है क्योंकि आज के दौर में अगर आप देखें तो उस शिक्षण संस्थान मुकम्मल बदनाम होते जा रहे हैं ना केवल इसलिए क्योंकि शिक्षा को और संस्थानों का काम है बच्चों को एक बेहतर भविष्य की तरफ ले जाना आधुनिक शिक्षा और आधुनिक उपकरणों के साथ बच्चों को एक ऐसा शिक्षा प्रदान करना जो वास्तविक जीवन में जब वह चौक पर जाएं तो उतना ही उसे डिलीट कर पाए पर आज के दौर में जो शिक्षक हैं वह किसी ना किसी तरह से उसको कि पढ़ता हुआ देख लें क्योंकि शिक्षा और शिक्षा संगति एक सौ है कमाई का जरिया बन चुका है तो बेहतर है क्योंकि उस दौर में जब हम पढ़ाई कर रहे होते हैं तो हमारे साथ भी कुछ ना कुछ गलत होता है संस्थानों द्वारा कहीं ना कहीं दबाव बनाया जाता है और वहां पर एक छात्र खुद को असहाय महसूस करता है और उस को बदलने के लिए उसमें आवाज उठाने के लिए छात्र एक्टिविज्म होना बहुत जरूरी है छात्रों को पता होना चाहिए कि अपनी आवाज किस तरह से उठाएं क्योंकि जब शिक्षा संस्थान बच्चों के उज्जवल भविष्य में शिक्षा को ना देकर एक प्रोफेशन बना दे और लिंग का तो बच्चों का आवाज उठाना जरूरी है और हमने भी अपने कॉलेज के समय में बहुत ही आवाज उठाई वैश्विक स्तर की बात करूं या एक बड़े स्तर की बात करूं तो इतना तो नहीं हुआ पर हमारे होटल के मैच में जो खाना मिलता था हमारे लैब में जो काम हमें सिखाए जाते थे उस में जो है हमने छात्र एक्टिविज्म यानी कई छात्रों के संगठन समूह के द्वारा हम सब ने मिलकर आवाज उठाई और हमारी छात्रवृत्ति के दौरान संस्थान हमारी बात सुननी पड़ी थी तो एक बदलाव तो आया था उनका खाना बेहतर हुआ था हॉस्टल की फैसिलिटी बेहतर हुई थी हमारी लाइव सुविधाएं बेहतर यह होना जरूरी है और छात्रों को जिस दौर में वह पढ़ रहे होते हैं वह कहीं ना कहीं वह किसी ना किसी अच्छे संस्थान में पढ़ने जा भविष्य में उनको एक को चुनना होता कोई इंजीनियर बनता कोई डॉक्टर बनता कोई वकील कोई पत्रकार बनता तो आप अपने भविष्य में ऐसे प्रोफेशन में जाओगे जहां पर आप लोगों से जुड़ ओके और आप उनकी आवाज कहीं ना कहीं उठाओगे आप क्षेत्र में अपना योगदान दोगे जब तक आप छात्रवृत्ति के दौरान यानी पढ़ाई के दौरान शिक्षा व्यवस्था में रहने के दौरान अपनी आवाज नहीं उठा पाओगे तो उसका प्रभाव आपके नीचे पर बड़े होकर पड़ता है जब आप किसी प्रोफेशन में उतरते हो अपनी आवाज हमेशा उठानी चाहिए छात्रवृत्ति एक अच्छा बदलाव ला सकती है और वर्तमान में छात्रवृत्ति को आपने देखा कन्हैया कुमार और हजारों ऐसे छात्र हैं जो लगातार अपने अपने जरूरतों के लिए सरकार से मुंह तोड़ जवाब देते हैं और अपने संस्थान को भी लगातार फटकार ते हैं तो यह होना चाहिए

aaj jab bhi koi profession me hota hai aapne bahut accha sawaal poocha ki aap chatra ektivijm ke dwara koi badlav la paye the badlav chatra sangati ki baat kare jab sant shankar ki hoti hai yani jis daur me hum padhai kar rahe hote hum shikshak ke dwara gyaan le rahe hote hain hum chatra hote hain us samay hamare sansthan shiksha sansthano kaam par bahut gehra prabhav hota hai kyonki aaj ke daur me agar aap dekhen toh us shikshan sansthan mukammal badnaam hote ja rahe hain na keval isliye kyonki shiksha ko aur sansthano ka kaam hai baccho ko ek behtar bhavishya ki taraf le jana aadhunik shiksha aur aadhunik upkarnon ke saath baccho ko ek aisa shiksha pradan karna jo vastavik jeevan me jab vaah chauk par jayen toh utana hi use delete kar paye par aaj ke daur me jo shikshak hain vaah kisi na kisi tarah se usko ki padhata hua dekh le kyonki shiksha aur shiksha sangati ek sau hai kamai ka zariya ban chuka hai toh behtar hai kyonki us daur me jab hum padhai kar rahe hote hain toh hamare saath bhi kuch na kuch galat hota hai sansthano dwara kahin na kahin dabaav banaya jata hai aur wahan par ek chatra khud ko asahay mehsus karta hai aur us ko badalne ke liye usme awaaz uthane ke liye chatra ektivijm hona bahut zaroori hai chhatro ko pata hona chahiye ki apni awaaz kis tarah se uthaye kyonki jab shiksha sansthan baccho ke ujjawal bhavishya me shiksha ko na dekar ek profession bana de aur ling ka toh baccho ka awaaz uthana zaroori hai aur humne bhi apne college ke samay me bahut hi awaaz uthayi vaishvik sthar ki baat karu ya ek bade sthar ki baat karu toh itna toh nahi hua par hamare hotel ke match me jo khana milta tha hamare lab me jo kaam hamein sikhaye jaate the us me jo hai humne chatra ektivijm yani kai chhatro ke sangathan samuh ke dwara hum sab ne milkar awaaz uthayi aur hamari chhatravriti ke dauran sansthan hamari baat sunnani padi thi toh ek badlav toh aaya tha unka khana behtar hua tha hostel ki facility behtar hui thi hamari live suvidhaen behtar yah hona zaroori hai aur chhatro ko jis daur me vaah padh rahe hote hain vaah kahin na kahin vaah kisi na kisi acche sansthan me padhne ja bhavishya me unko ek ko chunana hota koi engineer banta koi doctor banta koi vakil koi patrakar banta toh aap apne bhavishya me aise profession me jaoge jaha par aap logo se jud ok aur aap unki awaaz kahin na kahin uthaoge aap kshetra me apna yogdan doge jab tak aap chhatravriti ke dauran yani padhai ke dauran shiksha vyavastha me rehne ke dauran apni awaaz nahi utha paoge toh uska prabhav aapke niche par bade hokar padta hai jab aap kisi profession me utarate ho apni awaaz hamesha uthani chahiye chhatravriti ek accha badlav la sakti hai aur vartaman me chhatravriti ko aapne dekha kanhaiya kumar aur hazaro aise chatra hain jo lagatar apne apne jaruraton ke liye sarkar se mooh tod jawab dete hain aur apne sansthan ko bhi lagatar fatkar te hain toh yah hona chahiye

आज जब भी कोई प्रोफेशन में होता है आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा कि आप छात्र एक्टिविज्म के द्वा

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