आज के समय में लोग इतने मतलबी क्यों होते जा र है हैं?...


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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकी आज के समय में लोग इतने मतलबी इसलिए होते जा रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि उनके पास समय कब है और जिंदगी छोटी है आपने सुना होगा कि लोग कहते हैं लाइफ इस शार्ट यानी कि जिंदगी छोटी है लेकिन मैं आपसे यह कहना चाहूंगी कि इस जिंदगी सिर्फ उनके लिए छोटी होती है जिन्होंने उसे अच्छी तरह से नहीं जिया होता है अगर आपने सब कुछ सही किया है सही पढ़ाई की सही नौकरी की सही बिजनेस किया सही रिश्ते बनाए और सही परवरिश दी अपने बच्चों को और सही तरह से अपनी जिंदगी बनाई होती है तो आप की जिंदगी कितनी भी छोटी रही हो अच्छी रही होगी और उसको आप कभी छोटी नहीं रहेंगे इसलिए वो लोग जो जल्दी चले जाते हैं इस दुनिया से अगर उनकी छोटी सी जिंदगी में उन्होंने सब कुछ जी लिया होता है तो क्या हम कह सकते हैं कि उनकी जिंदगी छोटी नहीं अगर अगर एक 100 साल का इंसान जिन्होंने कुछ भी नहीं रखा है अपने जिंदगी में ठीक है जिन्होंने कोई चीज नहीं किया है ना खुशी जिंदगी में लाए हैं ना किसी और को दिया है उनका जिंदगी एक जंगली झाड़ की तरह लंबा होता गया उसमें ने कोई फल है ना कोई छांव है कि हम काम का है वह पेड़ बताइए वैसे ही जिंदगी एक से नहीं होती है जिंदगी होती है आपके कर्मों से एक 100 साल का इंसान जिसने नहीं किया बेस्ट है तो आपको यह समझना चाहिए कि जिंदगी जो है उसे खुशहाल बनाएं लोगों को खुशी दे खुद खुश रहे और अपने जो अच्छी चीज है उनको पार्टी के संस्कार बांटे और जो आप अच्छी चीज जानते दूसरों को सिखाएं खुद भी खुश रहे दूसरों को भी खुशी दे जिंदगी कभी छोटी नहीं होती है जिंदगी में सब के लिए पैसा है सब के लिए मौके हैं सब अमीर बन सकते हैं सब खुश रह सकते हैं क्योंकि वहां पर कोई कमी नहीं है बस आप किस तरह से उसको हासिल कर सकते सही तरीके से वह आपको देखना है कि कौन सा रा और कैसे आपको वहां पहुंच जाएगा तो जिंदगी छोटी नहीं है यही कारण है कि लोग मतलबी हो गए क्योंकि वह समझते हैं कि जिंदगी छोटी है उनके पास टाइम बहुत कम है

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विकी आज के समय में लोग इतने मतलबी इसलिए होते जा रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि उनके पास स

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Vikas Singh

Political Analyst

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज के टाइम में लोग दिन पर दिन बोतल भी होते जा रहे हैं उनको सिर्फ अपने से मतलब है हां जब कोई दिक्कत होती है तो जब समाज उनके लिए खड़ा होता है तब जाकर उनको एहसास होता है कि नहीं हमें भी समाज में कुछ गलत चीजों का विरोध करना चाहिए था हमें कुछ अच्छा काम करना चाहिए था तब जाकर एहसास होता है देखे समाज में जो लोग टाइम देते हैं अपना महत्वपूर्ण समय देते हैं समाज के लिए सामाजिक मुद्दों के ऊपर बात करते हैं उन्हें हमारा समाज गलत बोलता है उनको आवारा बोलता है और बहुत सारी बातें बोलता है उनके खिलाफ लेकिन वही समाज कल अगर हम दुख में होते हैं तो कल वही समाज हमारे लिए खड़ा होता है यह तो हम लोगों के सौभाग्य की बात है कि हमारा कोई विरोध करता है बैठ कर अपना टाइम बर्बाद करके हमारी हमारी बुराई करता है अच्छा ही करता है तो उसने अपना समय वह अपना समय तो वेस्ट कर रहा है ना आपने आपकी चर्चा तो कर रहा है देखिए समाज को हमेशा एक दूसरे के लिए तैयार रहना पड़ेगा तभी देश आगे बढ़ेगा समाज को समाज के सभी वर्ग के लोगों को समाज के लिए टाइम देना होगा अगर किसी की बहन बेटी के साथ या किसी के साथ को किसी भी टाइप का अन्याय होता है तो आसपास के लोगों को खड़ा होना चाहिए बात करना चाहिए और उनका साथ देना चाहिए हो सकता है कल आपके साथ वह घटना घटित हो जाए इसलिए समाज में हर एक वर्ग के हर एक लोगों को टाइम देना चाहिए गलत चीज का विरोध करना चाहिए आप कहीं भी जाते हो किसी के साथ गलत हो रहा है तो यह मत सोचो कि वह मैं वह मेरे घर की लड़की नहीं है वह मेरे घर का लड़का नहीं है उस उसके साथ अन्याय हो रहा है तो आप गाड़ी से रुको और उसका विरोध करो तभी हमारा समाज आगे बढ़ेगा हमारा भारत आगे बढ़ेगा धन्यवाद

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आज के टाइम में लोग दिन पर दिन बोतल भी होते जा रहे हैं उनको सिर्फ अपने से मतलब है हां जब को

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज के समय में लोग मतलबी होते जा रहे हैं जो कि यह स्वार्थी लोगों का जमाना है मैं एक बात आपको बहुत साइकोलॉजी के बेस पर कह रहा हूं क्योंकि इतना क्वालिफाइड हो जाता कुछ सेल्फी सो जाता है जितना आदमी अनपढ़ है या शिक्षा से रहित है वह व्यक्ति पाप करने से प्राप्त करने से डरता है तो तू जानता नहीं मैं नहीं जानता है उसे डर है आप अनपढ़ व्यक्ति तो जरा भगवान से डरता है उसे डर लगता है कि कहीं कोई मेरे जैसा कर्मचारी न्यूज़ है जो लोगों की परेशानी कारण बने और लोग मुझे पार्टी कहे अपराधी के हैं लेकिन जो जितना अधिक क्वालिफाइड हो गया बहुत नाभिक सेल्फिश हो गया वह सारे लो समझता है इसलिए सारे लोग को अपने स्वार्थ के लिए उपयोग करता है इसलिए लोग आजकल दर्ज हुए हैं सेल्फिश हो गए हैं कि देखिए इससे बड़ी क्या विडंबना की बात होगी फिर लोग छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए हड़ताल कर देते हैं जाम लगा देते हैं रास्तों की तोड़फोड़ करते हैं सड़कों पर दे तोड़ देते हैं ट्रेन में आग लगाते पशु कुल्लू पशुओं को जला देते हैं इससे बड़ी क्या सेलफिशनेस बात होगी जो अपने देश के सगे नहीं हो गए तो देख तो नहीं जानते हैं कि इस प्रकार 10 वर्षों में कितनी गंदी बातों में सोचना चाहिए राष्ट्र समझते हुए देश के विकास में बाधक ना बने देश को प्रगति को होने दें देश की

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आज के समय में लोग मतलबी होते जा रहे हैं जो कि यह स्वार्थी लोगों का जमाना है मैं एक बात आपक

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S.R.PARDESHI

History spoken specialist | Motivational Speaker

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आज के समय में लोग इतने मतलबी क्यों होती है प्रश्न बहुत अच्छा है लेकिन इसके कारण वजह वजह बहुत ही अलग अलग हो जाए हर राजा की आप आप के लोग मतलबी क्यों है इसके लिए ना और आज की जो आने वाली पीढ़ियों वह बहुत मतलबी रहेंगे क्योंकि उनमें समाज में मतलब लोगों में मिलनसार ही नहीं है क्योंकि आजकल मोबाइल आ गया है लैपटॉप में टीवी है यह जब बहुत सी चीजें आ चुकी है आज सोशल मीडिया हो गया मतलब आप वह आदमी को पहचानते भी नहीं और हम उससे दिन रात बातें करते रहते हैं जिसे हमने देखा भी ना हो ऐसा समा गए आजकल दो दोस्त मिलते हैं लेकिन उनके हाथ में गैजेट होता है अब मोबाइल को उस महिला के होते हैं वह आस-पास खड़े हैं लेकिन बात भी नहीं करती आजू-बाजू होकर आस-पास हो करो दिल से नहीं मिलते हाय हेलो बस इसलिए आजकल के लोग मतलबी होते कि दिन के दूसरे के मैं सोचती नहीं है दूसरे के अंदर फीलिंग ही नहीं आती कि वह से गैजेट विद्न्यान मतलब आधुनिक करण के वजह से बहुत कुछ लोग मतलबी है अभी किसी को लगी नहीं पीछे भी सोचे वैसा नहीं है भैया जो है वह है आजकल लोग उसमें ज्यादा एंटरटेनमेंट टीवी हंसने के लिए मैंने जो लगते आजकल ऐसी बात हो गई जो मिलते नहीं हो चाय के कटे हो कटे आजकल गायब होती है जिसके लिए मतलबी होती जा रही है दूसरों से मिलेंगे उतना कम मिलनसार बढ़ता है ठीक है

aaj ke samay mein log itne matlabi kyon hoti hai prashna bahut accha hai lekin iske karan wajah wajah bahut hi alag alag ho jaaye har raja ki aap aap ke log matlabi kyon hai iske liye na aur aaj ki jo aane wali peedhiyon vaah bahut matlabi rahenge kyonki unmen samaj mein matlab logo mein milansaar hi nahi hai kyonki aajkal mobile aa gaya hai laptop mein TV hai yah jab bahut si cheezen aa chuki hai aaj social media ho gaya matlab aap vaah aadmi ko pehchante bhi nahi aur hum usse din raat batein karte rehte hain jise humne dekha bhi na ho aisa sama gaye aajkal do dost milte hain lekin unke hath mein gadget hota hai ab mobile ko us mahila ke hote hain vaah aas paas khade hain lekin baat bhi nahi karti aju baju hokar aas paas ho karo dil se nahi milte hi hello bus isliye aajkal ke log matlabi hote ki din ke dusre ke main sochti nahi hai dusre ke andar feeling hi nahi aati ki vaah se gadget vidnyan matlab aadhunik karan ke wajah se bahut kuch log matlabi hai abhi kisi ko lagi nahi peeche bhi soche waisa nahi hai bhaiya jo hai vaah hai aajkal log usme zyada Entertainment TV hasne ke liye maine jo lagte aajkal aisi baat ho gayi jo milte nahi ho chai ke kate ho kate aajkal gayab hoti hai jiske liye matlabi hoti ja rahi hai dusro se milenge utana kam milansaar badhta hai theek hai

आज के समय में लोग इतने मतलबी क्यों होती है प्रश्न बहुत अच्छा है लेकिन इसके कारण वजह वजह बह

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां यह बात तो सच है कि हर इंसान आज की दुनिया में मतलबी हो गया या नहीं सेल्फिश हो चुके हैं और सभी सबसे पहले अपने बारे में सोचते हैं उसके बाद दूसरों के बारे में और जो इंसानियत इंसान के अंदर होनी चाहिए जंगली जो हमेशा से देखी जाती थी और सब खत्म हो गई है एक दूसरे के लिए और सब लोग बहुत ज्यादा मतलबी होकर सिर्फ सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं तो आप जो पूछेंगे लोग मतलबी क्यों होते हैं तो अब हम आपसे खुद से पूछना चाहूंगी क्या आपके लिए अगर लाइफ में आपको कुछ करना होगा आपके कुछ ड्रीम्स होंगे जो आपको पूरे करने हैं क्या आप कुछ भी सोचते होंगे कि आपको कहीं भी कुछ ऐसे अपॉर्चुनिटी मिलेगी आपको जहां पर आप अपने लिए कुछ कर पाए तो क्या आप मतलबी नहीं होंगे क्योंकि यह एक ऐसा नहीं है कि लोग मतलबी हो गए बल्कि यह तो एक ह्यूमन नेचर होता है कि हर कोई इंसान अपने लिए अपने परिवार के लिए अपने लोगों के लिए क्या अपने करीबी लोगों के लिए भी और सबसे पहले सोचता है उसके बाद वह बाकी के लोगों तक जाता है और ऐसे बहुत ही कम लोग पाए जाते हैं हमारे देश में जो कि सबसे पहले दूसरों की सूची फिर अपनी सोच है और इसमें कोई बुराई भी नहीं है क्योंकि यह जब तक आप अपने बारे में नहीं सोचेंगे अपने आसपास के लोगों के बारे में नहीं सोचेंगे तब तक आप अपनी लाइफ में आगे नहीं बढ़ पाएंगे सक्सेसफुल नहीं बन पाएंगे तो मेरे हिसाब से आप मतलबी हो ना एक तरह से अच्छा ही है क्या आप अपने बारे में सोच कर अपने आसपास के लोगों के बारे में सोच रहे तभी आप अपना जो स्टैंडर्ड उसके ऊपर कर पाएंगे लेकिन हम मतलबी होने का मतलब यह नहीं होता है क्या आपको जो इंसानियत बेसिक वैल्यू से आपकी वह भी भूल जाए और जैसे कि अगर आपको कहीं भी जरूरी जाना है परंतु आपको कि रास्ते पर एक्सीडेंट दिख रहा है तो आप उसे छोड़कर चले जाएं क्योंकि यह चीज है मतलब ही नहीं बल्कि यह बहुत ही गलत तो नहीं सर की तरफ इशारा करती हैं मतलबी हो ना एक पॉजिटिव में कर लिया जाए तो बहुत अच्छा होता है लेकिन अगर वह इतना नेगेटिव हो जाए तब उसको बुरा कहा जा सकता है इसलिए मेरे हिसाब से मतलब होना पूरी तरह सही है हर किसी के लिए लेकिन एक पॉजिटिव में

ji haan yah baat toh sach hai ki har insaan aaj ki duniya mein matlabi ho gaya ya nahi selfish ho chuke hain aur sabhi sabse pehle apne bare mein sochte hain uske baad dusro ke bare mein aur jo insaniyat insaan ke andar honi chahiye jungli jo hamesha se dekhi jaati thi aur sab khatam ho gayi hai ek dusre ke liye aur sab log bahut zyada matlabi hokar sirf sirf apne bare mein sochte hain toh aap jo puchenge log matlabi kyon hote hain toh ab hum aapse khud se poochna chahungi kya aapke liye agar life mein aapko kuch karna hoga aapke kuch dreams honge jo aapko poore karne kya aap kuch bhi sochte honge ki aapko kahin bhi kuch aise opportunity milegi aapko jaha par aap apne liye kuch kar paye toh kya aap matlabi nahi honge kyonki yah ek aisa nahi hai ki log matlabi ho gaye balki yah toh ek human nature hota hai ki har koi insaan apne liye apne parivar ke liye apne logo ke liye kya apne karibi logo ke liye bhi aur sabse pehle sochta hai uske baad vaah baki ke logo tak jata hai aur aise bahut hi kam log paye jaate hain hamare desh mein jo ki sabse pehle dusro ki suchi phir apni soch hai aur isme koi burayi bhi nahi hai kyonki yah jab tak aap apne bare mein nahi sochenge apne aaspass ke logo ke bare mein nahi sochenge tab tak aap apni life mein aage nahi badh payenge successful nahi ban payenge toh mere hisab se aap matlabi ho na ek tarah se accha hi hai kya aap apne bare mein soch kar apne aaspass ke logo ke bare mein soch rahe tabhi aap apna jo standard uske upar kar payenge lekin hum matlabi hone ka matlab yah nahi hota hai kya aapko jo insaniyat basic value se aapki vaah bhi bhool jaaye aur jaise ki agar aapko kahin bhi zaroori jana hai parantu aapko ki raste par accident dikh raha hai toh aap use chhodkar chale jayen kyonki yah cheez hai matlab hi nahi balki yah bahut hi galat toh nahi sir ki taraf ishara karti hain matlabi ho na ek positive mein kar liya jaaye toh bahut accha hota hai lekin agar vaah itna Negative ho jaaye tab usko bura kaha ja sakta hai isliye mere hisab se matlab hona puri tarah sahi hai har kisi ke liye lekin ek positive mein

जी हां यह बात तो सच है कि हर इंसान आज की दुनिया में मतलबी हो गया या नहीं सेल्फिश हो चुके ह

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