क्या 120 वर्षीय कावेरी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय निष्पक्ष है?...


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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अरे क्या करेंगे पूरा मामला देखिए तो शुक्रवार के दिन सुप्रीम कोर्ट ने जो है वह आंख कावेरी नदी में कर्नाटक का हिस्सा जो है वह 14 पॉइंट 75 DM शेवटी तक बढ़ा दिया जा चुका है और तमिलनाडु का जो शेयरिंग जो है उसे कंडोम के हिसाब से कम कर दिया गया है तो खाना खा पर 120 वर्षों कावेरी मध्य पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय जो है निष्पक्षता कि कि जिस प्रकार से इन दोनों राज्यों के बीच में पिछले 120 वर्ष से जो है यह मुद्दा चल रहा था कि मध्य कारण दोनों ही राज्य में कहीं पर दंगे हो चुके हैं तो कई सारे जाने भी जा चुकी थी तो कान्हा कहां पर जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी एक राज्य जो है इसका आवश्यक नहीं ले सकता है क्योंकि यह इंटरसिटी भभुआ टरेकटर का नाका परिषद को यही करा जहिया पानी नहीं लेगा दोनों के दो राज्य जय वह पानी ले लेंगे और का नाका पर यह सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को जो है वह बैलेंस एक माना जा चुका है और सीबीआई नहीं अपोजीशन पार्टी जोगी डीएमके में जो कि तमिलनाडु में उन्होंने यह कहा है कि यह अच्छा अच्छी चीज नहीं हो कान्हा कहां पर तमिलनाडु कोई चीज का फायदा नहीं मिलेगा पानी को लेकर और कुछ ऊपरी और रजनीकांत ने भी कहा है कि एडिशनल था वह बहुत ही अच्छा नहीं था और कर्नाटका के चीफ मिनिस्टर श्री राम रमैया ने यह कहा है कि हम यह निर्णय से खुश है तो खाना खाओ पर जिस प्रकार का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय बिल्कुल सही है क्योंकि जब जब यह निर्णय आ चुके मुझे नहीं लगता आने वाले दिनों में आने वाले वर्षों में जो आए हम वापस ले यह मुद्दे के कारण दोनों ही राज्यों में हम दंगे दिखा प्रसाद देखेंगे और लोगों की जान जाते हुए देखेंगे तो का नाका पर 120 वर्षीय कावेरी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है वह निष्पक्ष

arre kya karenge pura maamla dekhiye toh sukravaar ke din supreme court ne jo hai vaah aankh kaveri nadi mein karnataka ka hissa jo hai vaah 14 point 75 DM shevati tak badha diya ja chuka hai aur tamil nadu ka jo sharing jo hai use condom ke hisab se kam kar diya gaya hai toh khana kha par 120 varshon kaveri madhya par supreme court ka nirnay jo hai nishpakshata ki ki jis prakar se in dono rajyo ke beech mein pichle 120 varsh se jo hai yah mudda chal raha tha ki madhya karan dono hi rajya mein kahin par dange ho chuke hain toh kai saare jaane bhi ja chuki thi toh kanha kahaan par jis prakar se supreme court ne kaha hai ki koi bhi ek rajya jo hai iska aavashyak nahi le sakta hai kyonki yah intercity bhabua tarekatar ka naka parishad ko yahi kara jahiya paani nahi lega dono ke do rajya jai vaah paani le lenge aur ka naka par yah supreme court ke is nirnay ko jo hai vaah balance ek mana ja chuka hai aur cbi nahi apojishan party jogi DMK mein jo ki tamil nadu mein unhone yah kaha hai ki yah accha achi cheez nahi ho kanha kahaan par tamil nadu koi cheez ka fayda nahi milega paani ko lekar aur kuch upari aur rajnikant ne bhi kaha hai ki additional tha vaah bahut hi accha nahi tha aur karnataka ke chief minister shri ram ramaiya ne yah kaha hai ki hum yah nirnay se khush hai toh khana khao par jis prakar ka supreme court ka nirnay bilkul sahi hai kyonki jab jab yah nirnay aa chuke mujhe nahi lagta aane waale dino mein aane waale varshon mein jo aaye hum wapas le yah mudde ke karan dono hi rajyo mein hum dange dikha prasad dekhenge aur logo ki jaan jaate hue dekhenge toh ka naka par 120 varshiye kaveri mudde par supreme court ka nirnay hai vaah nishpaksh

अरे क्या करेंगे पूरा मामला देखिए तो शुक्रवार के दिन सुप्रीम कोर्ट ने जो है वह आंख कावेरी न

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

1:53

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तमिलनाडु कर्नाटक और केरल के बीच लगभग 120 वर्ष पुराने कावेरी जल विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले यह स्पष्ट किया कि जल राष्ट्रीय संपत्ति है यानी कि कोई भी राज्य नदी के पानी पर अपना दावा नहीं कर सकता इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को मिलने वाली पानी की मात्रा को घटा दिया है सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि तमिलनाडु को 100 77.25 MS पानी दिया जाएगा जबकि कर्नाटक को 14.75 CMS ज्यादा पानी मिलेगा लेकिन केरल और पुदुचेरी के जल आवंटन मामले में कोई भी फेरबदल नहीं किया गया है और सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्नाटक को मिलने वाला पानी इसीलिए बढ़ाया जा रहा है क्योंकि बेंगलुरु में पीने के पानी की मांग और औद्योगिक आवश्यकता काफी बढ़ गई है और इसे देखते हुए वहां पर जल का जो आवंटन है वह बढ़ाया गया है और जो सुप्रीम कोर्ट है उसने इस फैसले को लेकर तमिलनाडु में तनाव बढ़ने की आशंका जताई है और लेकिन वहां पर सुरक्षा जो है वह खड़े कर दिए गए हैं और जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में यह फैसला लिया गया और यह फैसला इसलिए भी जरूर इंपॉर्टेंट है क्योंकि आने वाले कुछ समय में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं और इस फैसले से वहां की सरकार को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है कि उनके प्रयास से कर्नाटक की जो जनता है उसे अब ज्यादा पानी मिल पाएगा तो आने वाले चुनाव में इसे कांग्रेस का फायदा हो सकता है और हम सब को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सम्मान करना चाहिए और सभी जो राज्य हैं उन्हें इस फैसले का स्वागत करना चाहिए और इस पर उंगली नहीं उठाई जानी चाहिए

tamil nadu karnataka aur kerala ke beech lagbhag 120 varsh purane kaveri jal vivaad ke mamle mein supreme court ne ek bada faisla sunaya hai supreme court ne sabse pehle yah spasht kiya ki jal rashtriya sampatti hai yani ki koi bhi rajya nadi ke paani par apna daawa nahi kar sakta iske saath hi supreme court ne tamil nadu ko milne wali paani ki matra ko ghata diya hai supreme court ne apne faisle mein kaha ki tamil nadu ko 100 77 25 MS paani diya jaega jabki karnataka ko 14 75 CMS zyada paani milega lekin kerala aur puducheri ke jal aawantan mamle mein koi bhi ferabadal nahi kiya gaya hai aur supreme court ne yah bhi spasht kiya ki karnataka ko milne vala paani isliye badhaya ja raha hai kyonki bengaluru mein peene ke paani ki maang aur audyogik avashyakta kaafi badh gayi hai aur ise dekhte hue wahan par jal ka jo aawantan hai vaah badhaya gaya hai aur jo supreme court hai usne is faisle ko lekar tamil nadu mein tanaav badhne ki ashanka jatai hai aur lekin wahan par suraksha jo hai vaah khade kar diye gaye hain aur justice deepak mishra ki aguvaii mein yah faisla liya gaya aur yah faisla isliye bhi zaroor important hai kyonki aane waale kuch samay mein karnataka mein vidhan sabha chunav hone hain aur is faisle se wahan ki sarkar ko ek bada mudda mil gaya hai ki unke prayas se karnataka ki jo janta hai use ab zyada paani mil payega toh aane waale chunav mein ise congress ka fayda ho sakta hai aur hum sab ko supreme court ke is faisle ka sammaan karna chahiye aur sabhi jo rajya hain unhe is faisle ka swaagat karna chahiye aur is par ungli nahi uthayi jani chahiye

तमिलनाडु कर्नाटक और केरल के बीच लगभग 120 वर्ष पुराने कावेरी जल विवाद के मामले में सुप्रीम

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Ambuj Singh

Media Professional

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जो 120 वर्ष लगभग पुराना कावेरी विवाद है इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है कि कर्नाटक को ज्यादा चल दिया जाएगा तो इस चीज का मैं समर्थन इस महीने में करूंगा क्योंकि बेंगलुरु में का डेवलपमेंट ऑफ पॉपुलेशन ज्यादा है इसलिए यहां पानी का जरूरत ज्यादा है इसीलिए सुप्रीम कोर्ट में सभी कुछ देख कर ही इतने में पहुंचे होंगे और दूसरी बात तो सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि वाटर जो है वह सभी के लिए है तो इस पर कोई स्ट्रीट यह नहीं कह सकता है कि मैं इतना रखूंगा उसे इतना पानी देना है उसे इतना देना है इसलिए जिसकी जैसी जरूरत नहीं होंगी उसके अनुसार इस्तेमाल करेंगे और सुप्रीम कोर्ट में सब बस बैठे हैं तो उन्होंने सभी को देख कर ही कर्नाटक को कुछ ज्यादा पानी देने का फैसला किया होगा क्योंकि पापुलेशन ज्यादा है और यहां पानी की कमी भी है पीने के पानी की तो इसीलिए इस फैसले का सम्मान करना चाहिए सभी को क्योंकि जस्टिस लिए कोई मुद्दा नहीं बनाना चाहिए कितने दिनों का विवाद है तो अगर प्रैक्टिकल होकर सभी लोग सोचे हैं दोनों स्टेट के लोगों को तमिलनाडु और कर्नाटक के तो यह सभी के हित में होगा और दूसरी बात यहां इसको दूसरे तरीके से लोग बोल रहे हैं क्या चुनाव आने वाला है तो कांग्रेस इस चीज को थोड़ा सा बना सकती है क्योंकि वहां के लोगों को यह बोले कि हमारे प्रयास से सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आया है तो यह उनका चुनावी मुद्दा हो सकता है सुप्रीम कोर्ट अपने समय के अनुसार ही फैसला देती है तो फैसला सभी के हित में अच्छा है और यह मान्य होना चाहिए

tamil nadu aur karnataka ke beech jo 120 varsh lagbhag purana kaveri vivaad hai is par supreme court ka faisla aaya hai ki karnataka ko zyada chal diya jaega toh is cheez ka main samarthan is mahine mein karunga kyonki bengaluru mein ka development of population zyada hai isliye yahan paani ka zarurat zyada hai isliye supreme court mein sabhi kuch dekh kar hi itne mein pahuche honge aur dusri baat toh supreme court ne yah bhi kaha hai ki water jo hai vaah sabhi ke liye hai toh is par koi street yah nahi keh sakta hai ki main itna rakhunga use itna paani dena hai use itna dena hai isliye jiski jaisi zarurat nahi hongi uske anusaar istemal karenge aur supreme court mein sab bus baithe hain toh unhone sabhi ko dekh kar hi karnataka ko kuch zyada paani dene ka faisla kiya hoga kyonki population zyada hai aur yahan paani ki kami bhi hai peene ke paani ki toh isliye is faisle ka sammaan karna chahiye sabhi ko kyonki justice liye koi mudda nahi banana chahiye kitne dino ka vivaad hai toh agar practical hokar sabhi log soche hain dono state ke logo ko tamil nadu aur karnataka ke toh yah sabhi ke hit mein hoga aur dusri baat yahan isko dusre tarike se log bol rahe kya chunav aane vala hai toh congress is cheez ko thoda sa bana sakti hai kyonki wahan ke logo ko yah bole ki hamare prayas se supreme court ka faisla hamare paksh mein aaya hai toh yah unka chunavi mudda ho sakta hai supreme court apne samay ke anusaar hi faisla deti hai toh faisla sabhi ke hit mein accha hai aur yah manya hona chahiye

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जो 120 वर्ष लगभग पुराना कावेरी विवाद है इस पर सुप्रीम कोर्ट का

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