योग और ध्यान कैसे संबंधित हैं?...


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Jayshree Gupta

Yoga Trainer

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SK Shastri

Yoga Trainer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग और ध्यान कैसे संबंधित है आपका जो क्वेश्चन है कि मैं स्पष्ट करता हूं कि ध्यान जो है वह युग का ही एक पाठ अष्टांग योग के अनुसार योग के आठ अंग बताए गए हैं यम नियम आसन प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि तो मतलब व्यक्ति वियोग में होता है तभी ध्यान कर पाता है एक के सिस्टम से चले चलोगे तो आपका ध्यान लगेगा गहरा ध्यान ग्राम समाधि की ओर जाओ उसके उससे पहले आपको धारणा बनानी पड़ेगी उसके लिए बैठना पड़ेगा आपको

yog aur dhyan kaise sambandhit hai aapka jo question hai ki main spasht karta hoon ki dhyan jo hai vaah yug ka hi ek path ashtanga yog ke anusaar yog ke aath ang bataye gaye hain yum niyam aasan pratyahar dharana dhyan aur samadhi toh matlab vyakti viyog me hota hai tabhi dhyan kar pata hai ek ke system se chale chaloge toh aapka dhyan lagega gehra dhyan gram samadhi ki aur jao uske usse pehle aapko dharana banani padegi uske liye baithana padega aapko

योग और ध्यान कैसे संबंधित है आपका जो क्वेश्चन है कि मैं स्पष्ट करता हूं कि ध्यान जो है वह

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Limbadri swamy Vaidya

Fitness Expert, Yoga-Meditation Trainer, Spiritual Guide, Writer.

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Mrityunjay Bishwakarma

Yoga Trainer | Life Coach | Relationship Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग और ध्यान कैसे संबंधित है देखिए इसे हम ऐसे समझते हैं मैं बिल्कुल आपको सिंपल लैंग्वेज में बताने की कोशिश करूंगा इससे हर एक व्यक्ति जो भी इसे सुनेगा चाहे वह बच्चा हो वृद्ध हो या वयस्क हो सभी लोग इसे आसानी से समझ पाएंगे आपने देखा होगा या अपने खुद भी किया होगा जब आप ध्यान लगाने के लिए बैठते हैं एक जगह में तो आप को स्थिर होना पड़ता है परंतु आप नोटिस करेंगे अगर जिनको प्रैक्टिस नहीं है वह अगर ध्यान में बैठने की कोशिश करते हैं तो सबसे पहले चीज अगर कोई उनको अड़चन करती है तो वह उनका खुद का शरीर ही है 10 मिनट कोई अगर एक मुद्रा में 1 आसन में बैठ जाएं तो 10 मिनट के अंदर अंदर ही उनके बॉडी में हलचल होने लग जाती है कहीं किसी का कमर दर्द होने लग जाता है किसी को हाथ रखने में प्रॉब्लम हो जाती है कोई धरोहर हिलना डुलना शुरू कर देते हैं तो ऐसा क्यों होता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी बॉडी को हम खुद ही संभालने नहीं सक रहे हैं या जान रहे हैं योगासन का महत्व यह है कि आसन सिद्धि से आपकी बॉडी में इतनी स्ट्रेंज इतनी कैपेसिटी बिल्ड हो जाती है कि आप एक बहुत ज्यादा फुर्ती ले व्यक्ति भी हो सकते हैं एक समय पर और वही दूसरे समय पर बहुत ज्यादा स्थिर व्यक्ति भी हो सकते हैं और दोनों में ही आपको परेशानी नहीं होगी योगेश योगी के लिए सब कुछ बराबर है ना दुख सुख दोनों एक ही है तो उसी प्रकार की हर एक चीज में एक योगी के लिए हर एक स्थिति को हैंडल करना उसको आना चाहिए यह एक सच्चे योग्य की निशानी होती है तुम भले ही आप मूवमेंट में हो या भले ही आप मोमेंट कर रहे हो या फिर आप फिर हो बैलेंस हो दोनों ही स्थिति में आप अपने उच्चतम लेवल पर पहुंच पाएंगे यही इसका कांसेप्ट है योगासन का स्कोर करने के पीछे वजह यही है कि जब आप अगर मोमेंट करेंगे तो आप मोमेंट बहुत ही सफाई से और बिना अपनी बॉडी को बहुत ज्यादा प्रेशराइज कि आप कर सकते हैं और जब आप फिर बैठेंगे तो आप इतनी आराम से स्थिर बैठेंगे इतने स्पष्टता के साथ स्थिर बैठेंगे यार रहेंगे कि उस वक्त आपकी बॉडी में सब कुछ बिल्कुल अंदर नॉर्मल चल रहा होगा और आपको किस तरह की कोई परेशानी नहीं होगी तो योग आसन किसी एक आसन में भी अगर कोई व्यक्ति सिद्धि प्राप्त कर लेता है उसे बार-बार प्रैक्टिस कर के और एक गुरु के गार्डन से तो वह व्यक्ति घंटों ध्यान में बैठ सकता है इसीलिए ही योगासन का महत्व है परंतु आजकल हम योगासन को सिर्फ एक एक्सरसाइज फॉर्म में देख रहे हैं कि हाथ पैर हिला लेना है जैसे और आदर्श एक्स इस अकाउंट में होता है बॉडिवेट वकआउट में होता है तो इसमें भी हाथ पैर ही लाना है यह कनक ठीक है मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह गलत है यह सोचना ठीक है 1 महीने पर एक एंगल से देखकर यह सोचना ठीक है कि यह भी एक फॉर्म ऑफ एक्सरसाइज है जो कि बॉडी को इतना स्टैंड प्रदान करता है कि वह आगे की जर्नी कर सके स्पिरिचुअल जर्नी में शामिल हो सके खुद की बॉडी खुद को अड़चन ना लगे खुद को मुसीबत ना लगे बल्कि खुद की बॉडी खुद का साथ दें तो मैं आशा करता हूं आप समझ गए होंगे कुछ और पूछना हो तो कमेंट करके पूछ सकते हैं अच्छा लगा हो तो लाइक और शेयर जरूर कीजिएगा मुझे फटाफट से सोशल मीडिया में और वह कल मैं फॉलो कर लीजिए फिर मिलते हैं धन्यवाद

yog aur dhyan kaise sambandhit hai dekhiye ise hum aise samajhte hain main bilkul aapko simple language me batane ki koshish karunga isse har ek vyakti jo bhi ise sunegaa chahen vaah baccha ho vriddh ho ya vayask ho sabhi log ise aasani se samajh payenge aapne dekha hoga ya apne khud bhi kiya hoga jab aap dhyan lagane ke liye baithate hain ek jagah me toh aap ko sthir hona padta hai parantu aap notice karenge agar jinako practice nahi hai vaah agar dhyan me baithne ki koshish karte hain toh sabse pehle cheez agar koi unko adachan karti hai toh vaah unka khud ka sharir hi hai 10 minute koi agar ek mudra me 1 aasan me baith jayen toh 10 minute ke andar andar hi unke body me hulchul hone lag jaati hai kahin kisi ka kamar dard hone lag jata hai kisi ko hath rakhne me problem ho jaati hai koi dharohar hilana dulana shuru kar dete hain toh aisa kyon hota hai aisa isliye hota hai kyonki hamari body ko hum khud hi sambhalne nahi suck rahe hain ya jaan rahe hain yogasan ka mahatva yah hai ki aasan siddhi se aapki body me itni strange itni capacity build ho jaati hai ki aap ek bahut zyada phurti le vyakti bhi ho sakte hain ek samay par aur wahi dusre samay par bahut zyada sthir vyakti bhi ho sakte hain aur dono me hi aapko pareshani nahi hogi Yogesh yogi ke liye sab kuch barabar hai na dukh sukh dono ek hi hai toh usi prakar ki har ek cheez me ek yogi ke liye har ek sthiti ko handle karna usko aana chahiye yah ek sacche yogya ki nishani hoti hai tum bhale hi aap movement me ho ya bhale hi aap moment kar rahe ho ya phir aap phir ho balance ho dono hi sthiti me aap apne ucchatam level par pohch payenge yahi iska concept hai yogasan ka score karne ke peeche wajah yahi hai ki jab aap agar moment karenge toh aap moment bahut hi safaai se aur bina apni body ko bahut zyada presharaij ki aap kar sakte hain aur jab aap phir baitheange toh aap itni aaram se sthir baitheange itne spashtata ke saath sthir baitheange yaar rahenge ki us waqt aapki body me sab kuch bilkul andar normal chal raha hoga aur aapko kis tarah ki koi pareshani nahi hogi toh yog aasan kisi ek aasan me bhi agar koi vyakti siddhi prapt kar leta hai use baar baar practice kar ke aur ek guru ke garden se toh vaah vyakti ghanto dhyan me baith sakta hai isliye hi yogasan ka mahatva hai parantu aajkal hum yogasan ko sirf ek exercise form me dekh rahe hain ki hath pair hila lena hai jaise aur adarsh x is account me hota hai badivet vakaaut me hota hai toh isme bhi hath pair hi lana hai yah kanak theek hai main yah nahi keh raha hoon ki yah galat hai yah sochna theek hai 1 mahine par ek Angle se dekhkar yah sochna theek hai ki yah bhi ek form of exercise hai jo ki body ko itna stand pradan karta hai ki vaah aage ki journey kar sake Spiritual journey me shaamil ho sake khud ki body khud ko adachan na lage khud ko musibat na lage balki khud ki body khud ka saath de toh main asha karta hoon aap samajh gaye honge kuch aur poochna ho toh comment karke puch sakte hain accha laga ho toh like aur share zaroor kijiega mujhe phataphat se social media me aur vaah kal main follow kar lijiye phir milte hain dhanyavad

योग और ध्यान कैसे संबंधित है देखिए इसे हम ऐसे समझते हैं मैं बिल्कुल आपको सिंपल लैंग्वेज म

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vivek sharma

BANK PO| Astrologer | Mutual Fund Advisor। Career Counselor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग जब हम रेगुलर करते हैं योग से जब हमारा तन अच्छा होता है तो मन भी अच्छा होता है और यह दोनों एक दूसरे की ध्यान अभी अच्छा होता जो बच्चा शरीर होता है सर्जरी के लिए आवश्यक है इसलिए यह दोनों एक दूसरे संबंधित है यह एक दूसरे के दूसरे के पूरक हैं एक दूसरे का यह योग के बाद में ध्यान जो है उतरना वह दूसरी प्रक्रिया योग करने वाला आदमी आसानी से ध्यान में जा सकता है

yog jab hum regular karte hain yog se jab hamara tan accha hota hai toh man bhi accha hota hai aur yah dono ek dusre ki dhyan abhi accha hota jo baccha sharir hota hai surgery ke liye aavashyak hai isliye yah dono ek dusre sambandhit hai yah ek dusre ke dusre ke purak hain ek dusre ka yah yog ke baad me dhyan jo hai utarna vaah dusri prakriya yog karne vala aadmi aasani se dhyan me ja sakta hai

योग जब हम रेगुलर करते हैं योग से जब हमारा तन अच्छा होता है तो मन भी अच्छा होता है और यह दो

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Vijay Sharma

Yoga Trainer (P.G.D.Y.)

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ध्यान रहे अष्टांग योग केंद्र खाता है यम नियम आसन प्राणायाम शुभेच्छा भाई चेक करने के बाद आत्मा का क्या होता है तो किस तरीके से ये योग का हिस्सा है

dhyan rahe ashtanga yog kendra khaata hai yum niyam aasan pranayaam shubheccha bhai check karne ke baad aatma ka kya hota hai toh kis tarike se ye yog ka hissa hai

ध्यान रहे अष्टांग योग केंद्र खाता है यम नियम आसन प्राणायाम शुभेच्छा भाई चेक करने के बाद आत

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नमस्कार योग जो है वह अष्टांग योग होता है अष्टांग योग में आता है यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि योग जो है वह बेसिक कोर्स में आता है जैसे आप 10th करेंगे टेंथ का एग्जाम देंगे और ग्रेजुएशन करेंगे वह हायर कोर्स है तो लोग जो है योग और प्राणायाम योग में आसन और प्राणायाम जो है वह आपका बेसिक कोर्स है और जब धीरे-धीरे आप इसके साधक बन जाएंगे बहुत अच्छी तरह से आप योग करने लगेंगे तो आपका अपने ब्रेन पर अपने दिमाग पर और अपनी बॉडी पर कंट्रोल आने लगेगा तो आप ध्यान के लिए रेडी हो जाएंगे आप ध्यान करने के लिए तैयार हो जाएंगे तो ध्यान में जाने के लिए अगर थोड़ा योगा बहुत बड़ी सहायता करता है अरे आसन और प्राणायाम बहुत सहायता करता है यह शुरुआत की जो आपको छत तक ले जाएगी तो इस तरह से युग में योग और ध्यान इसी तरह से संबंधित है कि ध्यान जो है वह युग में ही आता है धन्यवाद

namaskar yog jo hai vaah ashtanga yog hota hai ashtanga yog me aata hai yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi yog jo hai vaah basic course me aata hai jaise aap 10th karenge tenth ka exam denge aur graduation karenge vaah hire course hai toh log jo hai yog aur pranayaam yog me aasan aur pranayaam jo hai vaah aapka basic course hai aur jab dhire dhire aap iske sadhak ban jaenge bahut achi tarah se aap yog karne lagenge toh aapka apne brain par apne dimag par aur apni body par control aane lagega toh aap dhyan ke liye ready ho jaenge aap dhyan karne ke liye taiyar ho jaenge toh dhyan me jaane ke liye agar thoda yoga bahut badi sahayta karta hai are aasan aur pranayaam bahut sahayta karta hai yah shuruat ki jo aapko chhat tak le jayegi toh is tarah se yug me yog aur dhyan isi tarah se sambandhit hai ki dhyan jo hai vaah yug me hi aata hai dhanyavad

नमस्कार योग जो है वह अष्टांग योग होता है अष्टांग योग में आता है यम नियम आसन प्राणायाम प्रत

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योग अष्टांग नियमों से बना हुआ है इसका पालन करते हैं योग में ही योग के ही यह रिश्ते हैं योग का है मतलब जुड़ना जोड़ने से पहले आप किस-किस कड़ी को जोड़ सकते हैं योग के पास हुए हैं तो इसमें ध्यान आप का सातवां शिर्डी आती है उसके बाद समाधि के साथ तो शिर्डी को भी युग के लिए बहुत ही लाभकारी है

yog ashtanga niyamon se bana hua hai iska palan karte hain yog me hi yog ke hi yah rishte hain yog ka hai matlab judna jodne se pehle aap kis kis kadi ko jod sakte hain yog ke paas hue hain toh isme dhyan aap ka satvaan shirdi aati hai uske baad samadhi ke saath toh shirdi ko bhi yug ke liye bahut hi labhakari hai

योग अष्टांग नियमों से बना हुआ है इसका पालन करते हैं योग में ही योग के ही यह रिश्ते हैं योग

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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

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Sadhana

Psychologist & Yoga Expert

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Gyanchand Soni

Yoga Instructor.

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ध्यान करना योग का योग ध्यान करने से मन की प्रदर्शन हमारे कार्यों में मन लगता कार्य सुचारू रूप से होने लग गया

dhyan karna yog ka yog dhyan karne se man ki pradarshan hamare karyo me man lagta karya sucharu roop se hone lag gaya

ध्यान करना योग का योग ध्यान करने से मन की प्रदर्शन हमारे कार्यों में मन लगता कार्य सुचारू

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Rony

Psychologist

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योग और ध्यान दोनों एक दूसरे के संबंधित है यह सच बात है कि योग और ध्यान एक दूसरे के संबंधित है कि जो भी हम वियोग में भी हमें ध्यान लगाना पड़ता है और ध्यान में योग करना पड़ता है तू इसलिए दोनों एक दूसरे के संबंधित है जिसे योग में जो हमें अनुभव होता है योग में जो मिल लाभ होता है वह भी ध्यान में होता और ध्यान में जो में लाभ होता है वह भी योग में होते हैं तो दोनों एक दूसरे से संबंधित है कुछ हद तक संबंधित है ले अगर आपन ध्यान के अपनी बात करें तो मैं 11 की बात करता हूं इसमें कुछ अलग अलग ही ही ही चेहरा जाते हैं अलग ही चीज याद आती है यह एक ध्यान मेडिटेशन कुछ अलग बातें होती है इसमें अपने बारे में जाना मैं कौन हूं आत्मा का परमात्मा के अपने बारे में जानना यह सब ध्यान नहीं देता है और योग में क्या होता है कि योग में अपनी एक्सरसाइज करते हैं अनुलोम विलोम करते और कपालभाति करते हैं शीर्षासन करते हैं इससे क्या योग से हमारा शरीर बनता है योग से हमारी मांसपेशियां मजबूत होती है योग से हमारे शरीर में जो जो हमारे शरीर में जो बॉडी है वह स्ट्रांग होती है और ध्यान में क्या होता है ध्यान में हमारा शरीर माइंड माइंड शांत होता है और योग ध्यान से हमें हमें एक पॉजिटिव एनर्जी मिलती है शांति मिलती है इसलिए दोनों एक दूसरे से संबंधित भी है तो अलग भी है

yog aur dhyan dono ek dusre ke sambandhit hai yah sach baat hai ki yog aur dhyan ek dusre ke sambandhit hai ki jo bhi hum viyog me bhi hamein dhyan lagana padta hai aur dhyan me yog karna padta hai tu isliye dono ek dusre ke sambandhit hai jise yog me jo hamein anubhav hota hai yog me jo mil labh hota hai vaah bhi dhyan me hota aur dhyan me jo me labh hota hai vaah bhi yog me hote hain toh dono ek dusre se sambandhit hai kuch had tak sambandhit hai le agar apan dhyan ke apni baat kare toh main 11 ki baat karta hoon isme kuch alag alag hi hi hi chehra jaate hain alag hi cheez yaad aati hai yah ek dhyan meditation kuch alag batein hoti hai isme apne bare me jana main kaun hoon aatma ka paramatma ke apne bare me janana yah sab dhyan nahi deta hai aur yog me kya hota hai ki yog me apni exercise karte hain anulom vilom karte aur kapalbhati karte hain Shirshasan karte hain isse kya yog se hamara sharir banta hai yog se hamari manspeshiya majboot hoti hai yog se hamare sharir me jo jo hamare sharir me jo body hai vaah strong hoti hai aur dhyan me kya hota hai dhyan me hamara sharir mind mind shaant hota hai aur yog dhyan se hamein hamein ek positive energy milti hai shanti milti hai isliye dono ek dusre se sambandhit bhi hai toh alag bhi hai

योग और ध्यान दोनों एक दूसरे के संबंधित है यह सच बात है कि योग और ध्यान एक दूसरे के संबंधित

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योग और ध्यान कैसे संबंध है जी योग और ध्यान दोनों में बहुत ही आंतरिक संबंध है क्योंकि फिर सूखा स्थिर सुखमा सनम इन सब से हमें पता चलता है कि योग जब भी हम करते हैं तो उसमें भी बहकर शांत लेकर मन को एकाग्र करके योग प्रैक्टिस करना पड़ता है तो इससे हम लोग को पता चल जाता है योग और ध्यान दोनों एक साथ है आप योग के बिना ध्यान नहीं कर सकते हो ध्यान के बिना अभियोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि जब भी अब ध्यान ध्यान में बैठना चाहिए अगर आप अच्छी तरह से योगा प्रेक्टिस करके आप अपना व्हाट्सएप मेंटेन करने की क्या व्यापार भी नहीं रखते हैं तब तक आप किसी भी तरह से ध्यान में नहीं बैठ सकते हैं क्योंकि इतना देर बैठ नहीं पाएंगे तो जिसकी वजह से योग और ध्यान दोनों में बहुत ही आंतरिक संबंध है और दोनों एक दूसरे से जो हुआ है धन्यवाद

yog aur dhyan kaise sambandh hai ji yog aur dhyan dono me bahut hi aantarik sambandh hai kyonki phir sukha sthir sukhma sanam in sab se hamein pata chalta hai ki yog jab bhi hum karte hain toh usme bhi bahkar shaant lekar man ko ekagra karke yog practice karna padta hai toh isse hum log ko pata chal jata hai yog aur dhyan dono ek saath hai aap yog ke bina dhyan nahi kar sakte ho dhyan ke bina abhiyog nahi kar sakte hain kyonki jab bhi ab dhyan dhyan me baithana chahiye agar aap achi tarah se yoga practice karke aap apna whatsapp maintain karne ki kya vyapar bhi nahi rakhte hain tab tak aap kisi bhi tarah se dhyan me nahi baith sakte hain kyonki itna der baith nahi payenge toh jiski wajah se yog aur dhyan dono me bahut hi aantarik sambandh hai aur dono ek dusre se jo hua hai dhanyavad

योग और ध्यान कैसे संबंध है जी योग और ध्यान दोनों में बहुत ही आंतरिक संबंध है क्योंकि फिर स

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Dr.Babita Singh

Yoga Master Trainer & Healer, Founder Director, Kaivalyam:The Yoga Academy

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

1:07
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प्रश्न है योग और ध्यान कैसे संबंधित है इसका उत्तर है योग करने से ध्यान करने में व्यक्ति को सुविधा हो जाती है पूरे योग की जो प्रक्रिया है उसका चरमोत्कर्ष है ध्यान बिना योग जिए आपका ध्यान पूर्ण रूप से केंद्रित नहीं हो पाएगा तो योग जब करेंगे आप प्रतिदिन एक घंटा का प्रयोग कीजिए ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाइए नित्य क्रिया से निवृत्त होकर के 1 घंटा योग कीजिए जब आप योग करेंगे तो धीरे-धीरे ध्यान लगना है आपका बढ़ने लगेगा योग का चरमोत्कर्ष ध्यान है इसीलिए योग और ध्यान एक दूसरे से संबंधित है

prashna hai yog aur dhyan kaise sambandhit hai iska uttar hai yog karne se dhyan karne me vyakti ko suvidha ho jaati hai poore yog ki jo prakriya hai uska charamotkarsh hai dhyan bina yog jiye aapka dhyan purn roop se kendrit nahi ho payega toh yog jab karenge aap pratidin ek ghanta ka prayog kijiye Brahma muhurt me uth jaiye nitya kriya se sevanervit hokar ke 1 ghanta yog kijiye jab aap yog karenge toh dhire dhire dhyan lagna hai aapka badhne lagega yog ka charamotkarsh dhyan hai isliye yog aur dhyan ek dusre se sambandhit hai

प्रश्न है योग और ध्यान कैसे संबंधित है इसका उत्तर है योग करने से ध्यान करने में व्यक्ति

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Hemraj Gurjar

Yoga Trainer

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योग और ध्यान कैसे संबंधित है ध्यान योग का सातवा सोपान है और ध्यान जो पद्धति है वही यूपी साथी सीबीएसई लिए योग और ध्यान अलग नहीं है योग का एक रूप है जिसको सातवां स्थान यो क्षेत्र में दिया गया है व्यक्ति जैसे-जैसे योग करता है मानसिक रूप से वह सकारात्मक तक प्रभावित होता है और व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति करने के लिए ज्ञान के सोपान को अपनाता है और अपने चरम लक्ष्य आत्मा का परमात्मा से मिलन इस उद्देश्य की पूर्ति उद्यान के माध्यम से ही कर सकता है धन्यवाद

yog aur dhyan kaise sambandhit hai dhyan yog ka satva sopan hai aur dhyan jo paddhatee hai wahi up sathi cbse liye yog aur dhyan alag nahi hai yog ka ek roop hai jisko satvaan sthan yo kshetra me diya gaya hai vyakti jaise jaise yog karta hai mansik roop se vaah sakaratmak tak prabhavit hota hai aur vyakti aadhyatmik unnati karne ke liye gyaan ke sopan ko apnaata hai aur apne charam lakshya aatma ka paramatma se milan is uddeshya ki purti udyan ke madhyam se hi kar sakta hai dhanyavad

योग और ध्यान कैसे संबंधित है ध्यान योग का सातवा सोपान है और ध्यान जो पद्धति है वही यूपी सा

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योगाचार्य S.S.Rawat🕉🔱🚩🙏

Lecturer Of Yog And Alternative Therapy

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Giriraj Singh Tomar

Yoga Teacher, Motivator & Counselor

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आपका प्रश्न का योग और ध्यान कैसे संबंधित है तो मित्र योग का अंग योग योग पूरा एक बहुत बड़ा विषय है उसमें ध्यान केवल एक अंग के रूप में है योग में और जो इसको बांटा गया है वह अष्टांग योग में बांटा गया हुआ है जिसमें यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि 8 अंश में आते हैं और सातवां आयोजन रखा गया है वह ध्यान रखा है और ध्यान समाधि से पहले रखा हुआ इसका अपने आप में बहुत महत्व को जाता है और इसी प्रकार से संबंध स्थापित होता है धन्यवाद

aapka prashna ka yog aur dhyan kaise sambandhit hai toh mitra yog ka ang yog yog pura ek bahut bada vishay hai usme dhyan keval ek ang ke roop me hai yog me aur jo isko baata gaya hai vaah ashtanga yog me baata gaya hua hai jisme yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan samadhi 8 ansh me aate hain aur satvaan aayojan rakha gaya hai vaah dhyan rakha hai aur dhyan samadhi se pehle rakha hua iska apne aap me bahut mahatva ko jata hai aur isi prakar se sambandh sthapit hota hai dhanyavad

आपका प्रश्न का योग और ध्यान कैसे संबंधित है तो मित्र योग का अंग योग योग पूरा एक बहुत बड़ा

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Swami Umesh Yogi

Peace-Guru (Global Peace Education)

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बहुत लोग ऐसे कंफ्यूज हो जाते हैं कि योग और ध्यान अलग-अलग चीजें योगा को लोगिक्स तक सीमित रखते हैं और जान को लोग साधु बाबा को आंख बंद करके बैठने का चिंतन बताते हैं तो ऐसे नहीं है देखिए योग एक सब्जेक्ट है एक के एक के पूरा विषय है और विषय में जगह अगर आप देखेंगे महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग का विवरण क्या m.d.m. आसन प्राणायाम धारणा और ध्यान समाधि अष्टांग योग में उसी का एक पार्ट है उसी में समाहित है उसे कह के जैसे योगा एंड मेडिटेशन योग का अभ्यास में एक उसका अंग है

bahut log aise confuse ho jaate hain ki yog aur dhyan alag alag cheezen yoga ko logiks tak simit rakhte hain aur jaan ko log sadhu baba ko aankh band karke baithne ka chintan batatey hain toh aise nahi hai dekhiye yog ek subject hai ek ke ek ke pura vishay hai aur vishay me jagah agar aap dekhenge maharshi patanjali ne ashtanga yog ka vivran kya m d m aasan pranayaam dharana aur dhyan samadhi ashtanga yog me usi ka ek part hai usi me samahit hai use keh ke jaise yoga and meditation yog ka abhyas me ek uska ang hai

बहुत लोग ऐसे कंफ्यूज हो जाते हैं कि योग और ध्यान अलग-अलग चीजें योगा को लोगिक्स तक सीमित रख

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ध्यान योग का एक अंग था क्योंकि हम बात करते हैं तो हम यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि की बात करते तो यूनियन विद द ऑब्जेक्ट ऑफ कंसंट्रेशन हुआ समाधि उसके पहले का जो भाग है वह ध्यान लेकिन हम 9 जनवरी जो करते हैं वह ध्यान नहीं की ओर बढ़ने की एक और था होती है धारणा और किसी भी कार्यक्रम सफलतापूर्वक करना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें उस कार्य के लिए एकाग्र होना पड़ता है अगर हम एक हमारे मस्तिष्क में कई सारे विचार चल रहे हैं तो किसी एक कार्यक्रम पूरी तरह से फोकस नहीं कर सकते इसके लिए ध्यान बहुत ही आवश्यक है

dhyan yog ka ek ang tha kyonki hum baat karte hain toh hum yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan samadhi ki baat karte toh union with the object of kansantreshan hua samadhi uske pehle ka jo bhag hai vaah dhyan lekin hum 9 january jo karte hain vaah dhyan nahi ki aur badhne ki ek aur tha hoti hai dharana aur kisi bhi karyakram safaltaapurvak karna chahte hain toh sabse pehle hamein us karya ke liye ekagra hona padta hai agar hum ek hamare mastishk mein kai saare vichar chal rahe hain toh kisi ek karyakram puri tarah se focus nahi kar sakte iske liye dhyan bahut hi aavashyak hai

ध्यान योग का एक अंग था क्योंकि हम बात करते हैं तो हम यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारण

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मार्शल घाट योगा से रिलेटेड आपने हमसे और ध्यान यानी मेडिटेशन उसका एडवांस है हम लोग जब कभी भी पोस्टर करते हैं कोई भी टीचर इंस्ट्रक्शन पूरे मन से यानी कंसंट्रेशन से योगा करना जरूरी होता है यानी योगा खाली फिजिकल एक्सरसाइज मैंने आपके पहला सवाल नहीं बताया कि मेंटल स्ट्रेस प्लेलिस्ट उपाय है तो योग मेडिटेशन

marshall ghat yoga se related aapne humse aur dhyan yani meditation uska advance hai hum log jab kabhi bhi poster karte hain koi bhi teacher instruction poore man se yani kansantreshan se yoga karna zaroori hota hai yani yoga khaali physical exercise maine aapke pehla sawaal nahi bataya ki mental stress playlist upay hai toh yog meditation

मार्शल घाट योगा से रिलेटेड आपने हमसे और ध्यान यानी मेडिटेशन उसका एडवांस है हम लोग जब कभी भ

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Dr. C K Vithani

Yoga Expert

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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योग ध्यान एक दूसरे के पूरक हैं जैसे कि मैं कहूं कि अगर योग सूरज है तो ध्यान चांद मेरा कहने का मतलब है कि दोनों एक-दूसरे का सामंजस्य युग में ध्यान एक विधि होती है या नहीं जब ध्यान है कोई योग का ही एक भाग है योग के द्वारा हम शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक जो सुख होता उसकी प्राप्ति कर सकते हैं और जो ध्यान है यहान का जो लेवल है हमारा वह थर्ड लेवल पर गाता है इसलिए मैंने बात की आप अपनी शालिनी हमारे शरीर के विभिन्न भागों को स्वस्थ रखने के लिए हम योग में बहुत से आसन और प्राणायाम करते हैं जिससे क्यों बिल्कुल स्वस्थ है दूसरा तो सुनी हमारे नगर संतोष शर्मा नगर स्थित है तो हमारे जो स्वास्थ्य का लेवल है और भी अच्छा होता हो तो थोड़ा सा हमारा ध्यान और आधा जो हम यह दो चीज अच्छी कर लेते हैं शादी कर मानसिक आध्यात्मिक को अचीव करते हैं तो हम ध्यान की ओर अग्रसर होते हैं ध्यान का अर्थ होता है कि किसी भी कार्य में जो हम कर रहे हैं उसमें पूर्णता समर्पित हो जाना तो इस तरह से आग्रह में ध्यान में परिपूर्ण होना है तो युवक एक माध्यम है उस ध्यान को अचीव करने का और उस कार्य को पूरी तरीके से परिपूर्ण करने और दोनों एक दूसरे का सामान जैसे

yog dhyan ek dusre ke purak hain jaise ki main kahun ki agar yog suraj hai toh dhyan chand mera kehne ka matlab hai ki dono ek dusre ka samanjasya yug mein dhyan ek vidhi hoti hai ya nahi jab dhyan hai koi yog ka hi ek bhag hai yog ke dwara hum sharirik mansik aur aadhyatmik jo sukh hota uski prapti kar sakte hain aur jo dhyan hai yahan ka jo level hai hamara vaah third level par gaata hai isliye maine baat ki aap apni shalini hamare sharir ke vibhinn bhaagon ko swasthya rakhne ke liye hum yog mein bahut se aasan aur pranayaam karte hain jisse kyon bilkul swasthya hai doosra toh suni hamare nagar santosh sharma nagar sthit hai toh hamare jo swasthya ka level hai aur bhi accha hota ho toh thoda sa hamara dhyan aur aadha jo hum yah do cheez achi kar lete hain shadi kar mansik aadhyatmik ko achieve karte hain toh hum dhyan ki aur agrasar hote hain dhyan ka arth hota hai ki kisi bhi karya mein jo hum kar rahe hain usme purnata samarpit ho jana toh is tarah se agrah mein dhyan mein paripurna hona hai toh yuvak ek madhyam hai us dhyan ko achieve karne ka aur us karya ko puri tarike se paripurna karne aur dono ek dusre ka saamaan jaise

योग ध्यान एक दूसरे के पूरक हैं जैसे कि मैं कहूं कि अगर योग सूरज है तो ध्यान चांद मेरा कहने

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Hani jaiswal

Yoga Instructor and Reiki master

1:15
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग और ध्यान कैसे संबंधित हैं तो कहे तो योग और ध्यान में कोई खास अंतर नहीं है कि ध्यान योग कहीं एक अभिन्न अंग है जहां औरतों के लिए देता हूं जो हमारा योग योग को हिंदू धर्म के छह दर्शनों में से लिया गया है कुछ अव्यवस्था फैला है न्याय दर्शन दूसरा वैश्विक दर्शन तीसरा चौथा पांचवा वेदांत और छठा योग योग में योग के प्रकार होते हैं पहला प्रकार राजीव उतराहटिया नहीं हूं यहां न्यू कर्म योग एवं भक्ति हो जो हमारा राजयोग है इसके भी आठ अंग होते हैं जिससे पतंजलि का अष्टांग योग भी कहा जाता है इसके अंतर्गत यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि आती तो ध्यान अष्टांग योग का ही सातवां भाग्य या योग से अलग नहीं है तो अगर आप हमारे उत्तर से संतुष्ट हैं तो इसे लाइक करें और अगर नहीं संतोष ने तो इस लाइक करें और ऐसे ही अन्य जानकारियों के लिए हमें फॉलो करें

yog aur dhyan kaise sambandhit hain toh kahe toh yog aur dhyan mein koi khaas antar nahi hai ki dhyan yog kahin ek abhinn ang hai jaha auraton ke liye deta hoon jo hamara yog yog ko hindu dharm ke cheh darshanon mein se liya gaya hai kuch avyayvastha faila hai nyay darshan doosra vaishvik darshan teesra chautha panchava vedant aur chhata yog yog mein yog ke prakar hote hain pehla prakar rajeev utarahtiya nahi hoon yahan new karm yog evam bhakti ho jo hamara rajyog hai iske bhi aath ang hote hain jisse patanjali ka ashtanga yog bhi kaha jata hai iske antargat yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi aati toh dhyan ashtanga yog ka hi satvaan bhagya ya yog se alag nahi hai toh agar aap hamare uttar se santusht hain toh ise like kare aur agar nahi santosh ne toh is like kare aur aise hi anya jankariyon ke liye hamein follow karen

योग और ध्यान कैसे संबंधित हैं तो कहे तो योग और ध्यान में कोई खास अंतर नहीं है कि ध्यान योग

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Deepa Negi Mira

Yoga Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्वेश्चन थोड़ा सा लेकिन अगर आप योग योग में 8 लेंस होते हैं जो 8 मिनट में 8 अंग होते हैं यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि pa800 वास्तुशास्त्र जो है वह काम के लिए होता है मतलब आश्रम जारी होती है प्राण के प्राण प्यारी होती है कटिहार के लिए धारणा और ध्यान ना दें ध्यान प्रतिहार धारणा और ध्यान मेडिटेशन किस प्रतिहार और धारणा एचडी देखनी होती है जब आप यह किस करती हैं तो फिर ध्यान रखें ध्यान मतलब घटे तो आसान है जिसको हम योगा बोल रहे हैं एक आसान होता है जो कि बेसिक चैट होता है मेडिटेशन में जाने के लिए राशन करती है तो नेक्स्ट लेवल आपका मेडिटेशन ही होगा

question thoda sa lekin agar aap yog yog mein 8 lens hote hain jo 8 minute mein 8 ang hote hain yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi pa800 vastushastra jo hai vaah kaam ke liye hota hai matlab ashram jaari hoti hai praan ke praan pyaari hoti hai katihar ke liye dharana aur dhyan na de dhyan pratihar dharana aur dhyan meditation kis pratihar aur dharana hd dekhni hoti hai jab aap yah kis karti hain toh phir dhyan rakhen dhyan matlab ghate toh aasaan hai jisko hum yoga bol rahe hain ek aasaan hota hai jo ki basic chat hota hai meditation mein jaane ke liye raashan karti hai toh next level aapka meditation hi hoga

क्वेश्चन थोड़ा सा लेकिन अगर आप योग योग में 8 लेंस होते हैं जो 8 मिनट में 8 अंग होते हैं यम

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Dr Hemant Yogi

Yoga and Naturopathy

1:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग और ध्यान कैसे का क्या संबंध है आपने यह प्रश्न किया देखी जो और धान सबसे पहले योग करेंगे उसमें स्टेचिंग पर ध्यान लगाएंगे आसनों की जांच में आंसू का प्रभाव पड़ रहा है उस पर आप ध्यान लगाएंगे तो आपका ध्यान तो कैसी लगने लगेगा ऑफ कर पाता अंजलि ऋषि ने तो अष्टांग योग बनाया यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि सातवें पायदान का तू यह ध्यान करते करते हमारा ध्यान लगने लगेगा ध्यान का मतलब है कि मन की निरंतर एकता एकांता बनी रहे एक जगह मन को केंद्रित करना ही ध्यान है इसमें हम जो है ध्यान से मन को शांत करते हैं तनाव से मुक्त होते हैं और हमारी सकारात्मक सोच ता भर्ती है धन्यवाद

yog aur dhyan kaise ka kya sambandh hai aapne yah prashna kiya dekhi jo aur dhaan sabse pehle yog karenge usme steching par dhyan lagayenge aasanon ki jaanch mein aasu ka prabhav pad raha hai us par aap dhyan lagayenge toh aapka dhyan toh kaisi lagne lagega of kar pata anjali rishi ne toh ashtanga yog banaya yum niyam aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan aur samadhi satve payadan ka tu yah dhyan karte karte hamara dhyan lagne lagega dhyan ka matlab hai ki man ki nirantar ekta ekanta bani rahe ek jagah man ko kendrit karna hi dhyan hai isme hum jo hai dhyan se man ko shaant karte hain tanaav se mukt hote hain aur hamari sakaratmak soch ta bharti hai dhanyavad

योग और ध्यान कैसे का क्या संबंध है आपने यह प्रश्न किया देखी जो और धान सबसे पहले योग करेंगे

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Yog Guru Amit Agrawal Rishiyog

Yoga Acupressure Expert

0:22
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कब उसने योग और ध्यान कैसे संबंधित है देखिए महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग और आप पढ़ेंगे तो योग के अंतर्गत ध्यान आता है जो अष्टांग योग का सातवां अंग है वह ध्यान है उसके बाद समाधि आती है तो ध्यान कुछ अलग नहीं है युवक का ही अंग है

kab usne yog aur dhyan kaise sambandhit hai dekhiye maharshi patanjali ka ashtanga yog aur aap padhenge toh yog ke antargat dhyan aata hai jo ashtanga yog ka satvaan ang hai vaah dhyan hai uske baad samadhi aati hai toh dhyan kuch alag nahi hai yuvak ka hi ang hai

कब उसने योग और ध्यान कैसे संबंधित है देखिए महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग और आप पढ़ेंगे तो य

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Sam Yoga

Health and Fitness Expert

5:19

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Archana Sharma

Yoga Instructor - Art Of Living Gwalior

0:50
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आपका प्रश्न है योग और ध्यान कैसे संबंधित है योग और ध्यान दोनों एक दूसरे से कनेक्ट है तब दोनों एक साथ ही होते हैं जैसे कि जब हम योग करते हैं तो हमारा शरीर मन और स्वास्थ तीनो एक साथ होते हैं एक लाइन में होते हैं यदि हमने से आधा घंटा योग किया एक घंटा योग्य उसके बाद जो हम विश्राम करते हैं चाहे अंबेडकर विश्राम करें चाहे हम लेट का विश्राम करें तो वह ध्यान की ही अवस्था होती यानी हमारा मन शांत होता है हम विचार शून्य होते हैं वही ध्यान की अवस्थाएं तो ध्यान और योग दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं

aapka prashna hai yog aur dhyan kaise sambandhit hai yog aur dhyan dono ek dusre se connect hai tab dono ek saath hi hote hain jaise ki jab hum yog karte hain toh hamara sharir man aur swaasth teeno ek saath hote hain ek line mein hote hain yadi humne se aadha ghanta yog kiya ek ghanta yogya uske baad jo hum vishram karte hain chahen ambedkar vishram kare chahen hum late ka vishram kare toh vaah dhyan ki hi avastha hoti yani hamara man shaant hota hai hum vichar shunya hote hain wahi dhyan ki avasthae toh dhyan aur yog dono ek dusre se jude hue hain

आपका प्रश्न है योग और ध्यान कैसे संबंधित है योग और ध्यान दोनों एक दूसरे से कनेक्ट है तब दो

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Ashok Kumar Vidhwani

Yoga Instructor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

योग और ध्यान अपने आप में इसलिए संबंधित है जब युवक गिरफ्तार से जुड़ेंगे कोई कारण कोई कार्य करेंगे कोई कर्म करेंगे कोई हरकत करेंगे तो वह योग की खोज में ना जाने के बाद उसकी प्रक्रिया को हम समझते हैं अंदर से जब महसूस करते हैं तो ध्यान में ध्यान में प्रवेश हो जाता है तो योग और योग ही अपने ध्यान में कंवर्ट हो जाता है

yog aur dhyan apne aap mein isliye sambandhit hai jab yuvak giraftar se judenge koi karan koi karya karenge koi karm karenge koi harkat karenge toh vaah yog ki khoj mein na jaane ke baad uski prakriya ko hum samajhte hain andar se jab mehsus karte hain toh dhyan mein dhyan mein pravesh ho jata hai toh yog aur yog hi apne dhyan mein kanvart ho jata hai

योग और ध्यान अपने आप में इसलिए संबंधित है जब युवक गिरफ्तार से जुड़ेंगे कोई कारण कोई कार्य

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