जावेद अख्तर सोचते हैं कि मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इस पर आपकी क्या राय है?...


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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

1:18

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिये, जावेद अख्तर ने जो कहा है कि मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए उन्होंने इस तरह से कहा है कि चाहे मस्जिद हो चाहे मस्जिद मंदिर हो जहां पर भी साउंड पोलूशन होता है वहां पर नहीं होना चाहिए l तो उल्टा अर्थ या मतलब नहीं निकालना चाहिए और वह सोचते हैं इतने इंटेलेक्चुअल आदमी है तो मुझे लगता है सही सोचते होंगे क्योंकि कुछ जगह परेशानी सच में होती है l देखिए, अजान पढ़ने या धर्म की काम करना कॉन्स्टिट्यूशनल गलत नहीं है लेकिन उसकी वजह से किसी को परेशानी होती है, यह अच्छी बात नहीं है l परेशानी सबसे बड़ी यह है कि हमारे देश में जितने का कई तरह के लोग रहते हैं, धर्म के लोग रहते हैं उन में समन्वय नहीं है l समन्वय मतलब एक दूसरे के साथ कंपेटिबिलिटी नहीं है l हम हर आदमी फ्रीडम चाहता है, फ्रीडम चाहता है तो क्यों नहीं मिली फ्रीडम उसको l तो इस फ्रीडम को कंट्रोल करने के लिए कुछ लोग इस तरह की चीजें जान बूझकर करते हैं l मैं किसी धर्म का नाम नहीं ले रहा लेकिन उन्होंने सभी के लिए बोला है, उनके मुंह से जरूर मस्जिद निकला हुआ है l वैसे मुझे लगता है उनका इंटेंशन जो था वह कहने का वह केवल मस्जिद नहीं और भी सभी जितने भी धर्म है, हिंदू, गुरुद्वारे इन सब पर भी स्पीकरस लगे होते, कोई यूज ना करें साउंड पोलूशन कम करने के लिए बोलते हैं l क्योंकि आदमी को भी परेशान हो जाता है कभी-कभी l तो उसका अन्य अर्थ मतलब निकालना चाहिए और जावेद ने जो कहा उसको सही कहा है, धन्यवाद l

dekhiye javed akhtar ne jo kaha hai ki masjidon mein speaker ka istemal nahi hona chahiye unhone is tarah se kaha hai ki chahen masjid ho chahen masjid mandir ho jaha par bhi sound pollution hota hai wahan par nahi hona chahiye l toh ulta arth ya matlab nahi nikalna chahiye aur vaah sochte hain itne intellectual aadmi hai toh mujhe lagta hai sahi sochte honge kyonki kuch jagah pareshani sach mein hoti hai l dekhiye ajaan padhne ya dharm ki kaam karna kanstityushanal galat nahi hai lekin uski wajah se kisi ko pareshani hoti hai yah achi baat nahi hai l pareshani sabse badi yah hai ki hamare desh mein jitne ka kai tarah ke log rehte hain dharm ke log rehte hain un mein samanvay nahi hai l samanvay matlab ek dusre ke saath kampetibiliti nahi hai l hum har aadmi freedom chahta hai freedom chahta hai toh kyon nahi mili freedom usko l toh is freedom ko control karne ke liye kuch log is tarah ki cheezen jaan bujhkar karte hain l main kisi dharm ka naam nahi le raha lekin unhone sabhi ke liye bola hai unke mooh se zaroor masjid nikala hua hai l waise mujhe lagta hai unka intention jo tha vaah kehne ka vaah keval masjid nahi aur bhi sabhi jitne bhi dharm hai hindu gurudware in sab par bhi spikaras lage hote koi use na kare sound pollution kam karne ke liye bolte hain l kyonki aadmi ko bhi pareshan ho jata hai kabhi kabhi l toh uska anya arth matlab nikalna chahiye aur javed ne jo kaha usko sahi kaha hai dhanyavad l

देखिये, जावेद अख्तर ने जो कहा है कि मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए उन्हों

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हेलो माय डियर फ्रेंड आप का सवाल है कि जावेद अख्तर सोचते हैं कि मैं सीधा में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए जावेद अख्तर साहब की बात से सहमत हैं और वह सेकुलरिज्म का एक व्यक्ति ने उनको एक और भी मिला है सेकुलरिज्म के लिए तो वह धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति की तरह बात करते हैं ठीक लेकिन मुझसे मस्जिदों में मंदिरों में बंद होना चाहिए जहां वहां 5:00 बजे से सुबह 4:00 बजे से ही भजन चालू हो जाते हैं और वह करीब 8:09 बजे तक चलते हैं सुबह तक मंदिरों में लगाम लगनी चाहिए मस्जिदों में है क्या हम उसके फेवर में सपोर्ट करेगा बिल्कुल कीजिएगा

hello my dear friend aap ka sawaal hai ki javed akhtar sochte hain ki main seedha me speaker ka istemal nahi hona chahiye javed akhtar saheb ki baat se sahmat hain aur vaah secularism ka ek vyakti ne unko ek aur bhi mila hai secularism ke liye toh vaah dharmanirapeksh vyakti ki tarah baat karte hain theek lekin mujhse masjidon me mandiro me band hona chahiye jaha wahan 5 00 baje se subah 4 00 baje se hi bhajan chaalu ho jaate hain aur vaah kareeb 8 09 baje tak chalte hain subah tak mandiro me lagaam lagani chahiye masjidon me hai kya hum uske favour me support karega bilkul kijiega

हेलो माय डियर फ्रेंड आप का सवाल है कि जावेद अख्तर सोचते हैं कि मैं सीधा में स्पीकर का इस्त

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जैसे कि जावेद अख्तर जी ने कहा है कि मस्जिदों में अब लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होना चाहिए तो इस पर जो है उन्होंने यह इस बात के लिए इस बात को देख कर कहा है कि लाउडस्पीकर जैसी जो चीज है वह मुख्य तौर पर ध्वनि प्रदूषण फैलाने का काम इस तरह से करती हैं और प्रकृति को जिस बात से जो है हानि पहुंचती हानि पहुंचती है और हमें भी जो है इस बात से सहमत होना चाहिए क्योंकि जब मंदिरों में मस्जिदों में लाउडस्पीकर जैसी चीजें मिलती हैं तो ध्वनि प्रदूषण का फैलता ही है लेकिन साथ ही साथ हमें एक फैक्ट्री से जब रोड में सड़कों के बगल में जब कोई इस प्रकार की जानवर की जगह पर जो है जब कहीं पर कहीं पर सरकार और हो तो लोगों को सुनने भी तकलीफ आती है और वह एक्सीडेंट कभी हमारे लिए कार्य कर सकता है मैं जाऊंगा तब तक जी की इस बात से एक बार एक और बात पर कि जो है एक बार बार फिर से सहमत हूं क्योंकि उन्होंने उन्होंने जो है लोगों को उनकी उन्होंने जो इस बात को क्या कर लोगों को जो है ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जागरूक और उनकी जगह तक को जो है हमें अपनाना चाहिए तो इसीलिए मेरा मानना है कि उन्होंने बिल्कुल सही कहा है और हमें जो है मस्जिदों या मंदिरों में कहीं भी जो है लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं करना चाहिए धन्यवाद

jaise ki javed akhtar ji ne kaha hai ki masjidon mein ab loudspeaker ka prayog nahi hona chahiye toh is par jo hai unhone yah is baat ke liye is baat ko dekh kar kaha hai ki loudspeaker jaisi jo cheez hai vaah mukhya taur par dhwani pradushan felane ka kaam is tarah se karti hain aur prakriti ko jis baat se jo hai hani pohchti hani pohchti hai aur hamein bhi jo hai is baat se sahmat hona chahiye kyonki jab mandiro mein masjidon mein loudspeaker jaisi cheezen milti hain toh dhwani pradushan ka failata hi hai lekin saath hi saath hamein ek factory se jab road mein sadkon ke bagal mein jab koi is prakar ki janwar ki jagah par jo hai jab kahin par kahin par sarkar aur ho toh logo ko sunne bhi takleef aati hai aur vaah accident kabhi hamare liye karya kar sakta hai jaunga tab tak ji ki is baat se ek baar ek aur baat par ki jo hai ek baar baar phir se sahmat hoon kyonki unhone unhone jo hai logo ko unki unhone jo is baat ko kya kar logo ko jo hai dhwani pradushan ke khilaf jagruk aur unki jagah tak ko jo hai hamein apnana chahiye toh isliye mera manana hai ki unhone bilkul sahi kaha hai aur hamein jo hai masjidon ya mandiro mein kahin bhi jo hai loudspeaker ka prayog nahi karna chahiye dhanyavad

जैसे कि जावेद अख्तर जी ने कहा है कि मस्जिदों में अब लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होना चाहिए त

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Imran Ansari

Electrician at Treasure Xpart

1:53
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दिखी मेरी नजर में तो लाउडस्पीकर बंद होने चाहिए मस्जिद में बंद होने चाहिए लाउडस्पीकर क्योंकि मजहब इस्लाम किसी को भी तकलीफ पहुंचाने की इजाजत नहीं देता दूसरी बात यह है कि आज से 14 साल पहले जब माइक नहीं थे तब भी अजान होती थी और अजान सुनकर नमाज में आने वालों की तादाद भी ज्यादा होती थी आज वक्त बदला है टेक्नोलॉजी नहीं नहीं है फिर भी अजान होने के बाद सूची मस्जिदों में लोगों की भीड़ कम है यह कोई देखी भी खिला पर शराब बात नहीं कर रहा हूं और ना ही मैं किसी मजहब को बुरा ऐसा नहीं कह रहा हूं मेरी सोच यह है कि अपनी वजह से कोई मदद नहीं सिखाता है कि आप किसी को तकलीफ पहुंचा है वे किस में छोटे-छोटे बच्चे होते हैं स्कूल जाने वाले ड्यूटी से कोई आया है कोई बीमार है अभी स्पीकर बसता है जो सुबह स्कूल की नींद में खलल पड़ता है तो बेहतर यह है कि इसको बंद होनी चाहिए जिस तरह में अपनी ड्यूटी का ख्याल रहता है कि वह हमें 8:00 बजे ड्यूटी जाना है तो यह ख्याल क्यों नहीं होता कि आप मस्जिद में कोई टाइम तक तो पहुंच जाओ नमाज को जा कर आप का ऐलान करके बुलाया जाता है ड्यूटी के वक्त में आपका इलाज तो नहीं होता कि भैया आप ड्यूटी का टाइम हो गया आप चाहिए तो कोशिश कीजिए कि अपनी वजह से किसी को तकलीफ ना हो जो कि मजहब इस्लाम जो है यह सिखाता है कि आपका पड़ोसी भी आपकी वजह से परेशान ना हो तो मेरी सोच तो यही कि स्पीकर लाउडस्पीकर बंद होने चाहिए बस्सी टू में और अगर जगहों पर भी एक वक्त मुकर्रर होना चाहिए

dikhi meri nazar mein toh loudspeaker band hone chahiye masjid mein band hone chahiye loudspeaker kyonki majhab islam kisi ko bhi takleef pahunchane ki ijajat nahi deta dusri baat yah hai ki aaj se 14 saal pehle jab mike nahi the tab bhi ajaan hoti thi aur ajaan sunkar namaz mein aane walon ki tadad bhi zyada hoti thi aaj waqt badla hai technology nahi nahi hai phir bhi ajaan hone ke baad suchi masjidon mein logo ki bheed kam hai yah koi dekhi bhi khila par sharab baat nahi kar raha hoon aur na hi main kisi majhab ko bura aisa nahi keh raha hoon meri soch yah hai ki apni wajah se koi madad nahi sikhata hai ki aap kisi ko takleef pohcha hai ve kis mein chote chhote bacche hote hain school jaane waale duty se koi aaya hai koi bimar hai abhi speaker basta hai jo subah school ki neend mein khalal padta hai toh behtar yah hai ki isko band honi chahiye jis tarah mein apni duty ka khayal rehta hai ki vaah hamein 8 00 baje duty jana hai toh yah khayal kyon nahi hota ki aap masjid mein koi time tak toh pohch jao namaz ko ja kar aap ka elaan karke bulaya jata hai duty ke waqt mein aapka ilaj toh nahi hota ki bhaiya aap duty ka time ho gaya aap chahiye toh koshish kijiye ki apni wajah se kisi ko takleef na ho jo ki majhab islam jo hai yah sikhata hai ki aapka padosi bhi aapki wajah se pareshan na ho toh meri soch toh yahi ki speaker loudspeaker band hone chahiye bassi to mein aur agar jagaho par bhi ek waqt mukarrar hona chahiye

दिखी मेरी नजर में तो लाउडस्पीकर बंद होने चाहिए मस्जिद में बंद होने चाहिए लाउडस्पीकर क्योंक

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Rajsi

Sports Commentator & Reporter

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इस तरह के मुद्दे अक्सर धर्म से जोड़ लिया जाते हैं लेकिन ना मुझे ऐसा लगता है यह हर किसी की अपनी कॉपी नियन होती है मतलब जरूरी नहीं है कि आप उसे मारने या फिर आप उसको इतनी तारीफ थे कि वह एक देश का मुद्दा बन जाए अब हम सब जानते हैं कि टाइम जब सोनू निगम ने कहा था मस्जिदों में स्पीकर लगने की बात है जब वह परेशान हो जाते थे तो उनकी अपनी एक व्यक्ति जिन्होंने शेयर की थी या आप ही के लिए उन्होंने अपनी कंप्लेंट की थी उसको इतना बड़ा बड़ा मुद्दा नहीं बनना चाहता भाई जावेद अख्तर भी यह बात कह रहा है तू भी एक मुद्दा बन रही है पर इतना बड़ा मुद्दा नहीं बन रही है कारण जो भी हो हम सब जानते हैं लेकिन मुद्दा बना नहीं चाहिए रही बात राय की मस्जिदों में स्पीकर होना चाहिए या नहीं होना चाहिए यह एक अपने आप में बहुत बड़ा मुद्दा है मुझे लगता है कि डिपेंड करता है अगर आपको चाहिए तो आप रखिए नहीं तो मत रखिए कानून कहां से आते हैं जब धर्म का पालन की बारी आती है तो कानून कहां से आते हैं और अगर पीकर हटने के बाद भी आती तो भी धर्म क्यों खतरे में पड़ेगा भाई स्पीकर हटा देना या लगा देना आपकी जो अच्छाई है जो आपके बढ़ाइए तब तक धर्म है उसको कहीं से भी कम है पता नहीं करेगी तो ऐसे में इतना ज्यादा उस चीज को बढ़ाना यह मुद्दा ही नहीं हुआ यह नेशनल डिबेट कब टॉपिक बने कि जावेद अख्तर क्या सोचते हैं कि स्पीकर लगना चाहिए कि नहीं लगना चाहिए और यह बहुत ही सीधा सादा समुद्र आपको लगता है रीत मस्जिद जो मौलाना है उनके अपनी सोच है अगर वह चाहे तो वहां टाइम होता है तो ना हटाए इसका मुद्दा लेकर नहीं बनाती मेरे ख्याल से

is tarah ke mudde aksar dharm se jod liya jaate hain lekin na mujhe aisa lagta hai yah har kisi ki apni copy niyan hoti hai matlab zaroori nahi hai ki aap use maarne ya phir aap usko itni tareef the ki vaah ek desh ka mudda ban jaaye ab hum sab jante hain ki time jab sonu nigam ne kaha tha masjidon mein speaker lagne ki baat hai jab vaah pareshan ho jaate the toh unki apni ek vyakti jinhone share ki thi ya aap hi ke liye unhone apni complaint ki thi usko itna bada bada mudda nahi banna chahta bhai javed akhtar bhi yah baat keh raha hai tu bhi ek mudda ban rahi hai par itna bada mudda nahi ban rahi hai karan jo bhi ho hum sab jante hain lekin mudda bana nahi chahiye rahi baat rai ki masjidon mein speaker hona chahiye ya nahi hona chahiye yah ek apne aap mein bahut bada mudda hai mujhe lagta hai ki depend karta hai agar aapko chahiye toh aap rakhiye nahi toh mat rakhiye kanoon kahaan se aate hain jab dharm ka palan ki baari aati hai toh kanoon kahaan se aate hain aur agar peekar hatane ke baad bhi aati toh bhi dharm kyon khatre mein padega bhai speaker hata dena ya laga dena aapki jo acchai hai jo aapke badhaiye tab tak dharm hai usko kahin se bhi kam hai pata nahi karegi toh aise mein itna zyada us cheez ko badhana yah mudda hi nahi hua yah national debate kab topic bane ki javed akhtar kya sochte hain ki speaker lagna chahiye ki nahi lagna chahiye aur yah bahut hi seedha saada samudra aapko lagta hai reet masjid jo maulana hai unke apni soch hai agar vaah chahen toh wahan time hota hai toh na hataye iska mudda lekar nahi banati mere khayal se

इस तरह के मुद्दे अक्सर धर्म से जोड़ लिया जाते हैं लेकिन ना मुझे ऐसा लगता है यह हर किसी की

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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

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शादी के जावेद अख्तर ने कहा है कि जितने भी धार्मिक जगह वहां पर लाउडस्पीकर जो है वहां पर आ नहीं लगाना चाहिए जिस प्रकार से पिछले वर्ष सोनू निगम ने यह कहा था कि लाउडस्पीकर जो है लगाने का अच्छी बात नहीं है तो उसके उनके खिलाफ फतवा भी लगाएगा तो तो वैसे ही हां जावेद अख्तर साहब ने भी कहा है कि लाउडस्पीकर जो है वह उसमे नहीं अन्य धार्मिक जगहों पर भी उसको यूज नहीं करने चाहिए उन्होंने एक ट्वीट में कहा था कि जो सुनाने आया मैं उनकी बात से बिल्कुल सहमत हूं और ऊंचाई मस्जित हो या फिर कोई भी जगह धार्मिक जगह वापस नहीं इस्तेमाल करनी चाहिए मेरे हिसाब से जावेद अख्तर जी बिल्कुल सही है क्योंकि अगर हम जितना धार्मिक जगह पर स्पीकर इस्तेमाल करते हैं वह चाहे कोई त्यौहार हो या आपसे कोई भी कारण हो अगर हम स्पीकर का इस्तेमाल करते हैं तो उसकी कल जो है कभी-कभी इंसानों को भी आ जाओ है दर्द पहुंचाते इंसानों के कान को भी दर्द पहुंचा देगी स्पीकर बहुत ही ज्यादा ऑफिस वाले होते हैं उनका डिसेबल जो होता है डीसीबी वह भी बहुत ज्यादा होता है और सिर्फ इंसान ही नहीं है जानवरों की बहुत हद तक जो है उनके भी कान खराब कर सकते हो नबी हर हियरिंग एंप्लॉयमेंट ला सकते हैं उनमें जो एक दरिया खौफ लगा सकते है और फिर वही ने जिस प्रकार से जितने घंटो तक जो है सारे धार्मिक जगह पर स्पीकर बजते हैं जब कोई त्यौहार हो तो बिल्कुल सही नहीं अगर त्योहार और धार्मिक त्योहारों को को बनाना है तो जरूरी नहीं है कि आपको स्पीकर लेकर आने से आप जो है अच्छे काम करके भी आप जो है वह त्यौहार बना सकते हो लेकिन जिस प्रकार से पिछले कई सालों से स्पीकर से धार धार्मिक द्वारा जो है सेलिब्रेट किया जा रहे हो बिल्कुल सही नहीं है और जावेद अख्तर ने जो कहा है कि उसकी करो का इस्तेमाल नहीं होना से कोई भी धार्मिक जगह पर वह बिल्कुल सही है

shadi ke javed akhtar ne kaha hai ki jitne bhi dharmik jagah wahan par loudspeaker jo hai wahan par aa nahi lagana chahiye jis prakar se pichle varsh sonu nigam ne yah kaha tha ki loudspeaker jo hai lagane ka achi baat nahi hai toh uske unke khilaf fatwa bhi lagaega toh toh waise hi haan javed akhtar saheb ne bhi kaha hai ki loudspeaker jo hai vaah usme nahi anya dharmik jagaho par bhi usko use nahi karne chahiye unhone ek tweet mein kaha tha ki jo sunaane aaya main unki baat se bilkul sahmat hoon aur uchai masjit ho ya phir koi bhi jagah dharmik jagah wapas nahi istemal karni chahiye mere hisab se javed akhtar ji bilkul sahi hai kyonki agar hum jitna dharmik jagah par speaker istemal karte hain vaah chahen koi tyohar ho ya aapse koi bhi karan ho agar hum speaker ka istemal karte hain toh uski kal jo hai kabhi kabhi insano ko bhi aa jao hai dard pahunchate insano ke kaan ko bhi dard pohcha degi speaker bahut hi zyada office waale hote hain unka disable jo hota hai dcb vaah bhi bahut zyada hota hai aur sirf insaan hi nahi hai jaanvaro ki bahut had tak jo hai unke bhi kaan kharab kar sakte ho nabi har Hearing employment la sakte hain unmen jo ek dariya khauf laga sakte hai aur phir wahi ne jis prakar se jitne ghanton tak jo hai saare dharmik jagah par speaker bajate hain jab koi tyohar ho toh bilkul sahi nahi agar tyohar aur dharmik tyoharon ko ko banana hai toh zaroori nahi hai ki aapko speaker lekar aane se aap jo hai acche kaam karke bhi aap jo hai vaah tyohar bana sakte ho lekin jis prakar se pichle kai salon se speaker se dhar dharmik dwara jo hai celebrate kiya ja rahe ho bilkul sahi nahi hai aur javed akhtar ne jo kaha hai ki uski karo ka istemal nahi hona se koi bhi dharmik jagah par vaah bilkul sahi hai

शादी के जावेद अख्तर ने कहा है कि जितने भी धार्मिक जगह वहां पर लाउडस्पीकर जो है वहां पर आ न

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Sefali

Media-Ad Sales

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जावेद अख्तर जी ने जो है वह अपनी सोच आगे रखें अपना जो 1 पॉइंट ऑफ व्यू रखा है और सबके सामने इसका मतलब यह नहीं कि वह अगेंस्ट में है सबका यह देश एक अपनी कंट्री इंडिपेंडेंट करती है सबको अपनी अपनी राय अपने सबके सामने एक्सप्रेस करने की पूरी लिबर्टी है तो उन्होंने जो कहा कुछ गलत नहीं किया उन्होंने बस एक्सप्रेस किया है और जो कि सब को हक है उन्हें लगता है उन्हें लगता है कि स्पीकर के समान नहीं होने से किसी और को लगता है कि स्पीकर का इस्तेमाल होना चाहिए तो इसमें कोई गलत नहीं है अपनी अपना जो है फॉर इंटरव्यू किसी के सामने ही रखना

javed akhtar ji ne jo hai vaah apni soch aage rakhen apna jo 1 point of view rakha hai aur sabke saamne iska matlab yah nahi ki vaah against mein hai sabka yah desh ek apni country independent karti hai sabko apni apni rai apne sabke saamne express karne ki puri liberty hai toh unhone jo kaha kuch galat nahi kiya unhone bus express kiya hai aur jo ki sab ko haq hai unhe lagta hai unhe lagta hai ki speaker ke saman nahi hone se kisi aur ko lagta hai ki speaker ka istemal hona chahiye toh isme koi galat nahi hai apni apna jo hai for interview kisi ke saamne hi rakhna

जावेद अख्तर जी ने जो है वह अपनी सोच आगे रखें अपना जो 1 पॉइंट ऑफ व्यू रखा है और सबके सामने

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं जावेद अख्तर जी की बात से बिल्कुल सहमत हूं कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकर बंद होने चाहिए क्योंकि इससे बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होता है और आसपास रह रहे लोगों को काफी परेशानी होती है l और मेरे मुताबिक सिर्फ मस्जिदों पर ही नहीं अन्य धार्मिक स्थलों पर भी जैसे मंदिरों में, गिरजाघरों में या फिर गुरुद्वारों में, किसी भी धार्मिक स्थल पर तेज लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल बंद होना चाहिए l क्योंकि जिन धार्मिक स्थलों के पास आम लोगों के घर होते हैं वहां पर उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है l क्योंकि इन लाउडस्पीकर उसे जोर जोर जोर से आवाज निकलती है या वह भजन की हो या फिर अजान की हो या फिर किसी अन्य धार्मिक स्थल में जो भी कार्य हो रहे हैं उनकी हो l लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है l उनके घरों में तेज आवाज आती है और हो सकता है किसी भी घर में अगर कोई बीमार व्यक्ति है उसे सोने में या फिर बच्चों को पढ़ाई करने में काफी तकलीफ होती है l तो इसी वजह से मुझे लगता है कि हर एक स्टेट में या पूरे भारत में इन लाउडस्पीकरों पर बैन लगा देना चाहिए क्योंकि लाउड स्पीकर का प्रयोग करके आप भगवान को अल्लाह को ईसा मसीह या फिर किसी को भी खुश नहीं कर सकते हैं l अगर आपको पूजा करनी है या फिर नमाज पढ़ना है तो आप पर्सनली उसे कर सकते हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है l जो भी मंदिर मस्जिद या फिर अन्य धार्मिक स्थल के लोग हैं उन्हें इस बारे में गंभीर होने की आवश्यकता है कि लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल बंद किया जाए और जो भी जहां पर या फिर अन्य जगहों पर भी जैसे दीजे बगैरा बजाए जाते हैं शादी-पार्टी में यह सारी चीजें भी बंद होनी चाहिए जिससे ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके l और लोगों को राहत पहुंचाने का एक कार्य किया जाए l

main javed akhtar ji ki baat se bilkul sahmat hoon ki masjidon par loudspeaker band hone chahiye kyonki isse bahut zyada dhwani pradushan hota hai aur aaspass reh rahe logo ko kaafi pareshani hoti hai l aur mere mutabik sirf masjidon par hi nahi anya dharmik sthalon par bhi jaise mandiro mein girjagharon mein ya phir gurudwaron mein kisi bhi dharmik sthal par tez loudspeakar ka istemal band hona chahiye l kyonki jin dharmik sthalon ke paas aam logo ke ghar hote hai wahan par unko kaafi dikkaton ka samana karna padta hai l kyonki in loudspeaker use jor jor jor se awaaz nikalti hai ya vaah bhajan ki ho ya phir ajaan ki ho ya phir kisi anya dharmik sthal mein jo bhi karya ho rahe hai unki ho l logo ko kaafi pareshaniyo ka samana karna padta hai l unke gharon mein tez awaaz aati hai aur ho sakta hai kisi bhi ghar mein agar koi bimar vyakti hai use sone mein ya phir baccho ko padhai karne mein kaafi takleef hoti hai l toh isi wajah se mujhe lagta hai ki har ek state mein ya poore bharat mein in loudspeakar par ban laga dena chahiye kyonki loud speaker ka prayog karke aap bhagwan ko allah ko isa masih ya phir kisi ko bhi khush nahi kar sakte hai l agar aapko puja karni hai ya phir namaz padhna hai toh aap personally use kar sakte hai aur isme koi burayi nahi hai l jo bhi mandir masjid ya phir anya dharmik sthal ke log hai unhe is bare mein gambhir hone ki avashyakta hai ki loudspeakar ka istemal band kiya jaaye aur jo bhi jaha par ya phir anya jagaho par bhi jaise dije bagaira bajaye jaate hai shadi party mein yah saree cheezen bhi band honi chahiye jisse dhwani pradushan par lagaam lagayi ja sake l aur logo ko rahat pahunchane ka ek karya kiya jaaye l

मैं जावेद अख्तर जी की बात से बिल्कुल सहमत हूं कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकर बंद होने चाहिए क्य

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Ridhima

Mass Communications Student

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लिखे जो जावेद अख्तर जी ने कहा है कि यह मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए मेरे हिसाब से यह 2 पॉइंट करें थे क्योंकि देखें मस्जिदो में लोग क्यों जाते हैं मन्नत मांगने जाते हैं और थोड़ा प्रेयर करने जाते हैं मेडिटेट करने जाते हैं थोड़ा ध्यान लगाने जाते हैं और अगर स्पीकर से जो लाउड मैसेज आते हैं वह भी डिस्ट्रक्शन बन जाती है जिसके कारण जो लोग मन की शांति प्राप्त करना चाहते हैं वह नहीं हो पाते बहुत लोगों का स्थिति किसी कारण से स्पीकर्स हट जाना चाहिए

likhe jo javed akhtar ji ne kaha hai ki yah masjidon mein speaker ka istemal nahi hona chahiye mere hisab se yah 2 point kare the kyonki dekhen masjido mein log kyon jaate hain mannat mangne jaate hain aur thoda prayer karne jaate hain meditate karne jaate hain thoda dhyan lagane jaate hain aur agar speaker se jo loud massage aate hain vaah bhi destruction ban jaati hai jiske karan jo log man ki shanti prapt karna chahte hain vaah nahi ho paate bahut logo ka sthiti kisi karan se speakers hut jana chahiye

लिखे जो जावेद अख्तर जी ने कहा है कि यह मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए मेर

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Sameer Tripathy

Political Critic

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लेकिन मुझे लगता है कि जावेद अख्तर जो सोचते मस्जिदों और जो मस्जिद में स्पीकर था इसमें नहीं होना चाहिए अभी रिसीव मुझे मैं भी उनके बात में सहमत हूं अभी रिसेंटली रुलाया था जो यूपी का जो यूपी कॉमेडी पूरी जो जो जो लोग दिल के मंदिर में बिना लाइसेंस में लाउडस्पीकर लगाए थे और जिसमें नॉइस पोलूशन होता था उसके लिए वह लोग बहन कर दी है और यह जो रुलाया था पहले ओल्ड हाई कोर्ट का ऑर्डर दे दिया था अभी वह जब एवं को वार्निंग में लता BP कॉमेंट को कॉपी करने पर जो लाउडस्पीकर बंद कर दिया सिर्फ मुस्लिम मस्जिदों में नहीं भाई बहन मंदिर हिंदू मस्जिदों में यात्रियों 46 में सब में बंद कर या बंद कर दिया तो आजकल क्या होता है यह सब इसको भी राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है तो क्या होता है जो मुस्लिम मस्जिद है या हिंदू मंदिर है यह जुग जुग जुग जुग बिना लाइसेंस में जो गाना चलाते हैं वह जो एरिया जो रजनी तैयार होते हैं उनको इफ़ेक्ट होता है तो लोग बहुत सारे लोग देखे ऑफिस में काम ऑफिस से रात भर काम करके आते हैं सुबह थोड़ा आराम वह थोड़ा रात भर सुबह तक सुबह तक रहेंगे मगर यह लोग सुबह 4:00 से 5:00 बजे लोग जो लोग को जल्दी सो के 9:00 बजे सोकर 4:00 बजे उठकर लाउडस्पीकर लगा देते लोगों को डिस्टर्ब होता लोगों का लाइव इफ़ेक्ट होता है तो और डिप्रेशन आ जाता है अगर आपको नींद से नहीं होगा तो डिप्रेशन आ जाएगा तो रेजिडेंशियल एरिया में अब आपको परमिशन लेना पड़ता है अगर बिना परमिशन मैं आपको चलाएंगे तो बैन होना ही चाहिए और अगर वह सरकार भी बोल रहा है कि अगर आपके पास लाइसेंस है अगर वह आपके आसपास कोई रजिस्ट्रेशन एरिया नहीं है अगर लोगों को डिस्टर्ब नहीं हो रहा तो कोई टेंशन नहीं है आप लाउड स्पीकर ऑन करके मगर आप जो भी 10 दिन चले देवी मंदिर खोल कर या मस्जिद खोल के अग्रज और लाउड स्पीकर ऑन कर दोगे तो आपको किसी को भी नींद नहीं नींद टूट जाएगा लोगों लोगों को भी खराब लगेगा यह हिंदू हो या मुस्लिम हो या क्रिश्चन ओवैसी को ऐसा कुछ भी नहीं है हर किसी को धार्मिक संस्था है अगर लाइसेंस नहीं है तो बैंक करना चाहिए लौटकर

lekin mujhe lagta hai ki javed akhtar jo sochte masjidon aur jo masjid mein speaker tha isme nahi hona chahiye abhi receive mujhe main bhi unke baat mein sahmat hoon abhi recently rulaya tha jo up ka jo up comedy puri jo jo jo log dil ke mandir mein bina license mein loudspeaker lagaye the aur jisme noise pollution hota tha uske liye vaah log behen kar di hai aur yah jo rulaya tha pehle old high court ka order de diya tha abhi vaah jab evam ko warning mein lata BP comment ko copy karne par jo loudspeaker band kar diya sirf muslim masjidon mein nahi bhai behen mandir hindu masjidon mein yatriyon 46 mein sab mein band kar ya band kar diya toh aajkal kya hota hai yah sab isko bhi raajnitik mudda banaya ja raha hai toh kya hota hai jo muslim masjid hai ya hindu mandir hai yah jug jug jug jug bina license mein jo gaana chalte hain vaah jo area jo rajni taiyar hote hain unko effect hota hai toh log bahut saare log dekhe office mein kaam office se raat bhar kaam karke aate hain subah thoda aaram vaah thoda raat bhar subah tak subah tak rahenge magar yah log subah 4 00 se 5 00 baje log jo log ko jaldi so ke 9 00 baje sokar 4 00 baje uthakar loudspeaker laga dete logo ko disturb hota logo ka live effect hota hai toh aur depression aa jata hai agar aapko neend se nahi hoga toh depression aa jaega toh residential area mein ab aapko permission lena padta hai agar bina permission main aapko chalayenge toh ban hona hi chahiye aur agar vaah sarkar bhi bol raha hai ki agar aapke paas license hai agar vaah aapke aaspass koi registration area nahi hai agar logo ko disturb nahi ho raha toh koi tension nahi hai aap loud speaker on karke magar aap jo bhi 10 din chale devi mandir khol kar ya masjid khol ke agraj aur loud speaker on kar doge toh aapko kisi ko bhi neend nahi neend toot jaega logo logon ko bhi kharab lagega yah hindu ho ya muslim ho ya christian owaisi ko aisa kuch bhi nahi hai har kisi ko dharmik sanstha hai agar license nahi hai toh bank karna chahiye lautkar

लेकिन मुझे लगता है कि जावेद अख्तर जो सोचते मस्जिदों और जो मस्जिद में स्पीकर था इसमें नहीं

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सुनो ..सुनाओ..सीखो!

0:50
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अब से निकले थे इनका जावेद अख्तर साहब ने जो बात कही की मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि बाकी जो पूजा-पाठ के स्थल है वहां भी उनका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए क्योंकि आप बहुत पर्सनल चीज़ है आप खुद प्रैक्टिस करें लेकिन जबरदस्ती थोपना किसी के ऊपर उसको लाउडस्पीकर केसरिया थैंक यू बेटू गुटर आप खुद करें प्रेक्टिस मंदिर जाएं आप तो दिल में रखे भगवान को आप को जो करना है करें लेकिन चाहे जिस धर्म के अनुयाई हैं जरूरी नहीं कि मतलब हर कोई आप का भजन यह जान समय के लिए बेताब हो तो वैसे में आप करो बट दूसरों में थोपो मत

ab se nikle the inka javed akhtar saheb ne jo baat kahi ki masjidon mein speaker ka istemal nahi hona chahiye unhone yah bhi kaha ki baki jo puja path ke sthal hai wahan bhi unka istemal nahi hona chahiye kyonki aap bahut personal cheez hai aap khud practice kare lekin jabardasti thopna kisi ke upar usko loudspeaker kesariya thank you betu gutar aap khud kare practice mandir jayen aap toh dil mein rakhe bhagwan ko aap ko jo karna hai kare lekin chahen jis dharm ke anuyayi hain zaroori nahi ki matlab har koi aap ka bhajan yah jaan samay ke liye betaab ho toh waise mein aap karo but dusro mein thopo mat

अब से निकले थे इनका जावेद अख्तर साहब ने जो बात कही की मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं

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Vatsal

Engineering Student

1:25
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जावेद अख्तर साहब जो हैं उन्होंने उनका यह बयान देना की मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए बाकी काबिले तारीफ इसलिए नहीं क्योंकि उन्होंने एक ऐसा इसलिए क्योंकि मुसलमान होने के बावजूद इन सब चीजों को परे हटकर उन्होंने यह बात आगे रखी है जो कि आमतौर पर नहीं देखी जाती है क्योंकि जो भी धर्म होता है उसके दूसरे धर्म की बात करता है और दूसरे धर्म के आलोचना करता है लेकिन रहने की बात कही की मस्जिद में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए बिल्कुल सही बात है लेकिन जींस केवल मस्जिद क्यों रहे मंदिरों में भी देखें सर हमारा धर्म हिंदू है स्टीकर लगा होता है वह बहुत ही ज्यादा दूर तक आवाज पहुंचाता है पचोर करता है इन ग्रामों के दिन है बच्चों के बोर्ड के एग्जाम है तो उसमें दिक्कतें होती हैं उन्हें पढ़ने में आमतौर पर यह कई बार कोई फंक्शन होता है कीर्तन होता है या मस्जिद में अजान हो इन सब चीजों से कोई डिस्टरबेंस होता है तू कहीं पर भी नहीं होना चाहिए आज तक की न्यूज़ होना चाहिए अन्यथा इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए पर वह मस्जिद को मंदिर

javed akhtar saheb jo hain unhone unka yah bayan dena ki masjidon mein speaker ka istemal nahi hona chahiye baki kabile tareef isliye nahi kyonki unhone ek aisa isliye kyonki musalman hone ke bawajud in sab chijon ko pare hatakar unhone yah baat aage rakhi hai jo ki aamtaur par nahi dekhi jaati hai kyonki jo bhi dharm hota hai uske dusre dharm ki baat karta hai aur dusre dharm ke aalochana karta hai lekin rehne ki baat kahi ki masjid mein speaker ka istemal nahi hona chahiye bilkul sahi baat hai lekin jeans keval masjid kyon rahe mandiro mein bhi dekhen sir hamara dharm hindu hai sticker laga hota hai vaah bahut hi zyada dur tak awaaz pohchta hai pachour karta hai in gramo ke din hai baccho ke board ke exam hai toh usme dikkaten hoti hain unhe padhne mein aamtaur par yah kai baar koi function hota hai kirtan hota hai ya masjid mein ajaan ho in sab chijon se koi distarabens hota hai tu kahin par bhi nahi hona chahiye aaj tak ki news hona chahiye anyatha iska istemal nahi hona chahiye par vaah masjid ko mandir

जावेद अख्तर साहब जो हैं उन्होंने उनका यह बयान देना की मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नितारा अगर जावेद अख्तर साहब यह सोचते हैं कि मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए तो थोड़ा सा माने कलेक्ट कलेक्ट करना चाहूंगी कि मस्जिदें मस्जिदों में ही क्यों किसी भी धार्मिक स्थल पर कहीं पर भी आखिरी धार्मिक स्थल क्यों कहीं पर भी और लाउडस्पीकर का यूज़ नहीं होना चाहिए सिर्फ मस्जिदों को यहां पर सेंट्रलाइज कर ना सिर्फ मस्जिदों के ऊपर उंगली उठाना मेरे सबसे गलत है किसी एक धर्म की भावनाओं को आहत नहीं पहुंचाने चाहिए जब किसी से बाकी जगह पर भी होती है जावेद के सामने सिर्फ मस्जिद क्यों कहा यह तो मैं नहीं जानती पर जिससे अभी यूपी में शुरू हुआ कि हर धार्मिक स्थल पर कहीं पर व्यस्त लाउडस्पीकर यूज़ नहीं किए जाएंगे जो कि काफी वेलकम इंग्लिश शुरुआत है तो अब से कई बार ऐसा होता कि कई लोग लाइन पर रहने के सिर से बोल जाते हैं उन्हें नहीं बोलनी चाहिए मैं भी ज्यादा के साथ कैसे कोई मोटे बना होगा उन्होंने किस धर्म के बारे में बोला वह जिसने थोड़ी सी गलत लगी किस धर्म को सेंट्रलाइज ना करें बल्कि बोले कि किसी भी जगह पर कोई भी धार्मिक स्थल पर नहीं घुस करें लाउडस्पीकर क्योंकि इससे बहुत ज्यादा प्रॉब्लम क्रिएट हो जाती है यू जूली तोहार एक ऐसे धार्मिक स्थलों पर ही चीजें अवार्ड करनी चाहिए सिर्फ मस्जिद नहीं बोलना चाहिए

nitara agar javed akhtar saheb yah sochte hain ki masjidon mein speaker ka istemal nahi hona chahiye toh thoda sa maane collect collect karna chahungi ki masjido masjidon mein hi kyon kisi bhi dharmik sthal par kahin par bhi aakhiri dharmik sthal kyon kahin par bhi aur loudspeaker ka use nahi hona chahiye sirf masjidon ko yahan par sentralaij kar na sirf masjidon ke upar ungli uthana mere sabse galat hai kisi ek dharm ki bhavnao ko aahat nahi pahunchane chahiye jab kisi se baki jagah par bhi hoti hai javed ke saamne sirf masjid kyon kaha yah toh main nahi jaanti par jisse abhi up mein shuru hua ki har dharmik sthal par kahin par vyast loudspeaker use nahi kiye jaenge jo ki kaafi welcome english shuruat hai toh ab se kai baar aisa hota ki kai log line par rehne ke sir se bol jaate hain unhe nahi bolani chahiye main bhi zyada ke saath kaise koi mote bana hoga unhone kis dharm ke bare mein bola vaah jisne thodi si galat lagi kis dharm ko sentralaij na kare balki bole ki kisi bhi jagah par koi bhi dharmik sthal par nahi ghus kare loudspeaker kyonki isse bahut zyada problem create ho jaati hai you julie tohar ek aise dharmik sthalon par hi cheezen award karni chahiye sirf masjid nahi bolna chahiye

नितारा अगर जावेद अख्तर साहब यह सोचते हैं कि मस्जिदों में स्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहि

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