जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत बताएँ?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत जैन धर्म के 23 तीर्थंकर हो गए और सभी लोगों ने धर्म का ज्ञान दिया है और जैन धर्म के अनुसार सदाचार परोपकार त्याग और अहिंसा जी जैन धर्म के बेसिक सिद्धांत जैन धर्म एक धर्म न होकर एक में जीवन जीने का तरीका भी है जैन धर्म के अनुसार हमें बिल्कुल मांसाहार नहीं करना चाहिए और ताकत होने पर भी में बरसात किस काम आता आता है उसमें हरी सब्जियां भी नहीं खानी चाहिए क्योंकि उसमें भी जीव होते हैं और हम सिर्फ कठोर कठोर खाते हैं जैन धर्म के लोग उसको यह ग्रुप एडमिन बोलते हैं आई विल पप्पी करते हैं और सेट करो

jain dharm ke pramukh siddhant jain dharm ke 23 tirthankar ho gaye aur sabhi logo ne dharm ka gyaan diya hai aur jain dharm ke anusaar sadachar paropkaar tyag aur ahinsa ji jain dharm ke basic siddhant jain dharm ek dharm na hokar ek mein jeevan jeene ka tarika bhi hai jain dharm ke anusaar hamein bilkul mansahaari nahi karna chahiye aur takat hone par bhi mein barsat kis kaam aata aata hai usme hari sabjiyan bhi nahi khaani chahiye kyonki usme bhi jeev hote hain aur hum sirf kathor kathor khate hain jain dharm ke log usko yah group admin bolte hain I will Puppy karte hain aur set karo

जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत जैन धर्म के 23 तीर्थंकर हो गए और सभी लोगों ने धर्म का ज्ञान दि

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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

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इस संसार में सारी धर्म द्रोही सिद्धांतों पर मुख्य रूप से आधारित है एक है कर्म सिद्धांत और दूसरा है ईश्वर बाद कर्म सिद्धांत के अनुसार सारा संसार कर्म के कारण चलता है अर्थात मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे उसे वैसा ही फल मिलता है और इस नियम में किसी भी ईश्वर किसी भी खुदा या राम रहीम किसी का भी कोई इंटरफ्रेंस नहीं है यह नियम सारस्वत है और इस हिसाब से व्यक्ति अपने जीवन को अपने अनुसार ही बदल सकता है अधूरा है भगवत सिद्धांत जहां पर आप कुछ भी कर्म करें परंतु उसका फल आपको भगवान देता है तो जो धर्म पूरी तरह से कर्म पर आधारित है और जो भगवान ने इस रूप में विश्वास नहीं करता कि भगवान हमारे क्यों कर्मों में उलटफेर कर सकते हैं या उसमें उस उसके फल को कम ज्यादा कर सकते हैं वह जैन धर्म जैन धर्म में भगवान का एक ही रोल है कि वह आपको मोक्ष मार्ग दिखाते हैं और मुक्त को जाने का सीधा रास्ता भगवान बताते हैं जैन धर्म में भगवान का कोई रोल नहीं है परंतु दुर्भाग्यवश जैन धर्म के इस साइंटिफिक या वैज्ञानिक तथ्य को आजकल जैन धर्म वाले भी नहीं समझ रहे हैं और बेबी गलत गलत कर्म करके भगवान की पूजा पत्ती करके उन कर्मों से बचना चाह रहे हैं जो कि असंभव है और दूसरा जितने भी धर्म जैन धर्म के अलावा भी सारे भगवत सिद्धांत में विश्वास करते हैं बल्कि कुछ धर्म तो इस हद तक जाते हैं कि आप गलत से गलत काम भी कर दीजिए कि वह किसी को मार भी डालिए और भगवान के सामने तो आपको माफ कर देगा और इस तरह से भगवान की वैसी भगवान के कारण मेरे हिसाब से इस संसार में जितना अधर्म का प्रचार हुआ है उतना किसी और कारण से नहीं हुआ है क्योंकि जब व्यक्ति को है मालूम पड़ जाता है कि जैसे कर्म कर रहा है उसको वैसे ही फल मिलेंगे और उसमें किसी भी प्रकार की कोई शक्ति कहीं भी आपका कोई बचाव नहीं कर सकती है कोई सहायता नहीं कर सकती है तो व्यक्ति अपने कर्मों के लिए सावधान हो जाता है और इसलिए संसार में अनुशासन आता है जबकि भगवत सिद्धांत से कि आप कोई भी कम कर दीजिए बस भगवान से जाकर क्षमा मांग दीजिए उसको पूछा प्रसादी चढ़ा दीजिए उसके सामने किसी जानवर का जानवर को चढ़ा दीजिए उसका कत्ल कर दीजिए तो आपको उसे मुक्ति मिल जाएगी इस तरह की भ्रामक प्रचार से इस संसार में अनुशासनहीनता बड़ी है और अनुशासनहीनता महीने का संसार में यही मुख्य कारण है

is sansar mein saree dharm drohi siddhanto par mukhya roop se aadharit hai ek hai karm siddhant aur doosra hai ishwar baad karm siddhant ke anusaar saara sansar karm ke karan chalta hai arthat manushya jaisa karm karta hai use use waisa hi fal milta hai aur is niyam mein kisi bhi ishwar kisi bhi khuda ya ram rahim kisi ka bhi koi intarafrens nahi hai yah niyam saraswat hai aur is hisab se vyakti apne jeevan ko apne anusaar hi badal sakta hai adhura hai bhagwat siddhant jaha par aap kuch bhi karm kare parantu uska fal aapko bhagwan deta hai toh jo dharm puri tarah se karm par aadharit hai aur jo bhagwan ne is roop mein vishwas nahi karta ki bhagwan hamare kyon karmon mein ulatafer kar sakte hain ya usme us uske fal ko kam zyada kar sakte hain vaah jain dharm jain dharm mein bhagwan ka ek hi roll hai ki vaah aapko moksha marg dikhate hain aur mukt ko jaane ka seedha rasta bhagwan batatey hain jain dharm mein bhagwan ka koi roll nahi hai parantu durbhaagyavash jain dharm ke is scientific ya vaigyanik tathya ko aajkal jain dharm waale bhi nahi samajh rahe hain aur baby galat galat karm karke bhagwan ki puja patti karke un karmon se bachna chah rahe hain jo ki asambhav hai aur doosra jitne bhi dharm jain dharm ke alava bhi saare bhagwat siddhant mein vishwas karte hain balki kuch dharm toh is had tak jaate hain ki aap galat se galat kaam bhi kar dijiye ki vaah kisi ko maar bhi daaliye aur bhagwan ke saamne toh aapko maaf kar dega aur is tarah se bhagwan ki vaisi bhagwan ke karan mere hisab se is sansar mein jitna adharma ka prachar hua hai utana kisi aur karan se nahi hua hai kyonki jab vyakti ko hai maloom pad jata hai ki jaise karm kar raha hai usko waise hi fal milenge aur usme kisi bhi prakar ki koi shakti kahin bhi aapka koi bachav nahi kar sakti hai koi sahayta nahi kar sakti hai toh vyakti apne karmon ke liye savdhaan ho jata hai aur isliye sansar mein anushasan aata hai jabki bhagwat siddhant se ki aap koi bhi kam kar dijiye bus bhagwan se jaakar kshama maang dijiye usko poocha prasadi chadha dijiye uske saamne kisi janwar ka janwar ko chadha dijiye uska katl kar dijiye toh aapko use mukti mil jayegi is tarah ki bhramak prachar se is sansar mein anushasanahinta badi hai aur anushasanahinta mahine ka sansar mein yahi mukhya karan hai

इस संसार में सारी धर्म द्रोही सिद्धांतों पर मुख्य रूप से आधारित है एक है कर्म सिद्धांत और

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत अहिंसा सत्य अपरिग्रह अस्तेय ब्रह्मचर्य जन्म के बेटी कभी भी झूठ नहीं बोलते चाहे कितनी भी कठिनाइयां आ जाए

jain dharm ke pramukh siddhant ahinsa satya aparigrah astey brahmacharya janam ke beti kabhi bhi jhuth nahi bolte chahen kitni bhi kathinaiyaan aa jaaye

जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत अहिंसा सत्य अपरिग्रह अस्तेय ब्रह्मचर्य जन्म के बेटी कभी भी झूठ

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैन धर्म सनातन हिंदू धर्म से ही निकला हुआ 18 क्योंकि सनातन हिंदू धर्म में उत्तर वैदिक काल में हिंसा प्रधान हो गया था इसमें वेदों के अंत में यज्ञ के अंत में दी जाने वाली बली का विरोध जैन जैन धर्म वालों ने और बौद्ध धर्म पालन किया इसलिए यह लोग सनातन धर्म से अलग हो गए क्योंकि यज्ञ में पशु बलि जो दी जाती थी उसका यह विरोध करते थे जैन धर्म के प्रमुख 5 दांत हैं जिनमें हम कह सकते हैं सत्य अहिंसा अस्तेय अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य यदि इनको वर्तमान के यथार्थ के धरातल पर कसौटी पर कसा जाए तो निश्चित रूप से मैं कह सकता हूं कि जैन धर्म ही एक मात्र ऐसा धर्म है जो हिंसा को तीन भागों में बैठता है माल चिकित्सा चिकित्सा का एक मिलता है जब हम किसी का बुरा सोचते हैं कि बर्बाद हो जाए यह मुश्किल किसकी मृत्यु का बारे में सोचते हैं कि मर जाए यह सब मानसिकता है इंसा है और बाकी सब है जब हम शब्दों में कहते हैं कि तू मर जाए तो बर्बाद हो जाए या कुछ इस प्रकार और का एक इंसान है जो हाथ पैरों के द्वारा शस्त्र असरानी चला करके जब हम किसी को मारने का प्रयास करते हैं या खत्म करते हैं तो वह एक इंसान है तो 1 मार्च जैन धर्म ही ऐसा है तो तीन प्रकार की हिंसा पिंक तीनों प्रकार की हिंसा से दूर रहकर घूमता ऐसा का पालन करने के लिए कहता है कि अच्छा ही है लेकिन भारत के समस्त लोग का स्थित जैन धर्म की महत्ता को समझ पाते और धर्मों के नाम पर झगड़े नहीं होते धार्मिक नहीं होते मैंने आंचलिक तरुण सागर जी के बहुत कुछ सुना है मुझे सर्वाधिक आचार्य तरुण सागर जी के स्पीच सुने हैं मैंने उनसे मुझे जैन धर्म के बारे में थोड़ा बहुत ज्ञान हुआ है पर भी प्रवचन तो उनकी पुस्तक है बेमिसाल पुस्तक है और लाल में वर्तमान में इनके कचरी पुलक सागर जी जी बहुत अच्छे स्पीच दे रहे हैं बहुत अच्छा समझाते हैं उनकी शैली बहुत अच्छी है

jain dharm sanatan hindu dharm se hi nikala hua 18 kyonki sanatan hindu dharm me uttar vaidik kaal me hinsa pradhan ho gaya tha isme vedo ke ant me yagya ke ant me di jaane wali bali ka virodh jain jain dharm walon ne aur Baudh dharm palan kiya isliye yah log sanatan dharm se alag ho gaye kyonki yagya me pashu bali jo di jaati thi uska yah virodh karte the jain dharm ke pramukh 5 dant hain jinmein hum keh sakte hain satya ahinsa astey aparigrah aur brahmacharya yadi inko vartaman ke yatharth ke dharatal par kasouti par kaisa jaaye toh nishchit roop se main keh sakta hoon ki jain dharm hi ek matra aisa dharm hai jo hinsa ko teen bhaagon me baithta hai maal chikitsa chikitsa ka ek milta hai jab hum kisi ka bura sochte hain ki barbad ho jaaye yah mushkil kiski mrityu ka bare me sochte hain ki mar jaaye yah sab mansikta hai insa hai aur baki sab hai jab hum shabdon me kehte hain ki tu mar jaaye toh barbad ho jaaye ya kuch is prakar aur ka ek insaan hai jo hath pairon ke dwara shastra asrani chala karke jab hum kisi ko maarne ka prayas karte hain ya khatam karte hain toh vaah ek insaan hai toh 1 march jain dharm hi aisa hai toh teen prakar ki hinsa pink tatvo prakar ki hinsa se dur rahkar ghoomta aisa ka palan karne ke liye kahata hai ki accha hi hai lekin bharat ke samast log ka sthit jain dharm ki mahatta ko samajh paate aur dharmon ke naam par jhagde nahi hote dharmik nahi hote maine anchalik tarun sagar ji ke bahut kuch suna hai mujhe sarvadhik aacharya tarun sagar ji ke speech sune hain maine unse mujhe jain dharm ke bare me thoda bahut gyaan hua hai par bhi pravachan toh unki pustak hai BEMISAL pustak hai aur laal me vartaman me inke kachari pulak sagar ji ji bahut acche speech de rahe hain bahut accha smajhate hain unki shaili bahut achi hai

जैन धर्म सनातन हिंदू धर्म से ही निकला हुआ 18 क्योंकि सनातन हिंदू धर्म में उत्तर वैदिक काल

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Sharmistha

Ops Answerer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत है कि जैन धर्म विजय बौद्ध धर्म की भांति निर्मिती मार्ग धर्म है और जैन धर्म एक धर्म है और धर्म का मानना है कि मानव शरीर जो है क्षणभंगुर है और जैन धर्म कहता है कि मनुष्य को ध्यान परिवार संस्था आदि को त्याग कर शुभंकर भ्रमण करके जीवन यापन करना चाहिए

jain dharm ke pramukh siddhant hai ki jain dharm vijay Baudh dharm ki bhanti nirmiti marg dharm hai aur jain dharm ek dharm hai aur dharm ka manana hai ki manav sharir jo hai kshanabhangur hai aur jain dharm kahata hai ki manushya ko dhyan parivar sanstha aadi ko tyag kar shubhankar bhraman karke jeevan yaapan karna chahiye

जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत है कि जैन धर्म विजय बौद्ध धर्म की भांति निर्मिती मार्ग धर्म है

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