आपके हिसाब से क्या चीज़ ़ सामाजिक रूप से स्वीकार्य होना चाहिए?...


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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

1:33
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन मेरे हिसाब से तो कोई सा भी चीज है जो कि सामाजिक रुप में स्वीकार होना चाहिए लेकिन एक ऐसी चीज़ नहीं लगता है अब समय आ चुका है कि वह सामाजिक रुप से स्वीकार हो 22182 रहीम की सेक्सी ट्रांसपोर्ट करने वाले भी स्वीकार करने अन्य चीज है जो कि भारत में प्रतिबंधित आर्टिकल 360 सिक्योरिटी सिंह द्वारा समय आ चुका है कि कल जो है हमारे ब्लॉग से हटा देसी की वीडियो कमेंट्री लोगे वह भी इंसान होने के उपाय मान सम्मान मिलना है जितना हमें मिल रहा है उनका प्यार करने का तरीका अलग होता है या फिर हम कह सकते हैं वह एक ही चैनल पर लोगों को प्रेम करते कल अब यह नहीं है क्या 19 और सामाजिक रुप से स्वीकार ना करें या फिर उन्हें खफा प्यार करने वाले गंदी चीज खाए कि कि वो लोग भी इंसान है और उन्हें भी प्रिंट करने का हक है प्रियंका कोई डेफिनेशन नहीं होता है और प्रेम का कोई मूल्य नहीं होता अगर कोई पुरुष को पुरुष से प्रिंट कर रहा है तो वह भी नहीं होता है और उसे सामाजिक रूप से हमें स्वीकारना चाहिए तब जाकर हमारा देश आगे बढ़ेगा तब जाकर हमारा देश जो है मॉडल हो पाएगा या हमारे देश की जो सोच विचार जो है वह बदल पाएगी तो मेरे हिसाब से एलजीबीटी क्यूट एक ऐसी चीज़ होगी जो कि सामाजिक रुप से स्वीकार होनी चाहिए

lekin mere hisab se toh koi sa bhi cheez hai jo ki samajik roop mein sweekar hona chahiye lekin ek aisi cheez nahi lagta hai ab samay aa chuka hai ki vaah samajik roop se sweekar ho 22182 rahim ki sexy transport karne waale bhi sweekar karne anya cheez hai jo ki bharat mein pratibandhit article 360 Security Singh dwara samay aa chuka hai ki kal jo hai hamare blog se hata desi ki video commentary loge vaah bhi insaan hone ke upay maan sammaan milna hai jitna hamein mil raha hai unka pyar karne ka tarika alag hota hai ya phir hum keh sakte hain vaah ek hi channel par logo ko prem karte kal ab yah nahi hai kya 19 aur samajik roop se sweekar na kare ya phir unhe khafa pyar karne waale gandi cheez khaye ki ki vo log bhi insaan hai aur unhe bhi print karne ka haq hai priyanka koi definition nahi hota hai aur prem ka koi mulya nahi hota agar koi purush ko purush se print kar raha hai toh vaah bhi nahi hota hai aur use samajik roop se hamein swikarana chahiye tab jaakar hamara desh aage badhega tab jaakar hamara desh jo hai model ho payega ya hamare desh ki jo soch vichar jo hai vaah badal payegi toh mere hisab se LGBT cute ek aisi cheez hogi jo ki samajik roop se sweekar honi chahiye

लेकिन मेरे हिसाब से तो कोई सा भी चीज है जो कि सामाजिक रुप में स्वीकार होना चाहिए लेकिन एक

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Sameer Tripathy

Political Critic

1:59
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दिखी मेरे हिसाब से अगर कोई किसी चीज को सामाजिक रुप से स्वीकार कर होना चाहिए तो बहुत सारी चीजें जब भी अभी हमारे भारत में अभी देखिए एक छोटी छोटी चीज को इशू बनाते हैं अगर देखिए मेरी एक बात बोलना भूल जाऊंगा जो कास्ट भेजो मैरिज होते शादी होते जो इंटर कास्ट मैरिज को हमारे जो समाज स्वीकार नहीं करता है बहुत सारे अगर आज भी देखेंगे आप हरियाणा हो गया या बिहार हो गया बहुत सारे जोर से राज्य में ऑनर किलिंग करते हैं अपने मां बाप की अपने बेटे बेटी को मार देते अगर वह इंटर कास्ट मैरिज करते हैं या कोई और मुस्लिम लोग से मुस्लिम बेलो आदमी लोग से शादी करते हैं तो यह सब चीज को तो पहले हम लोग को हटाना चाहिए क्योंकि एंड ऑफ द डे वह भी एक ह्यूमन बीइंग है तो हम लोगों को यह सब चीज को भूलकर और अगर किसी को खोजो अगर किसी को कोई पसंद आया तो उसके साथ वह विवाह क्यों नहीं कर सकता है हम लोग जो यह सब चीज जो आफ्टर कॉल करके और वह पढ़ती बंधक बनाकर हम लोग खड़े हो जाते हैं जो फैमिली जिस जिस को पसंद नहीं आता है जो कोई प्रेम विवाह करना चाहता है मगर इंटरकास्ट की वजह से वह वह दोनों कभी शादी नहीं कर पाते उसके बाद वह कभी भी खुशी दे नहीं रह पाएंगे तो यह हम लोगों को सामाजिक रुप से स्वीकार करना चाहिए जो हिंदू हो या मुस्लिम हो या क्रिश्चन हो अगर कोई किसी को पसंद करें तो उनको शादी करना चाहिए जो जो फैमिली का जो प्रेशर रहता है जो फैमिली फैमिली जो रितेश पेरेंट्स को सामाजिक रुप से स्वीकार नहीं करते हैं वह सब चीज को तो यह जो मेंटलिटी है हम लोगों को पहले हटाना चाहिए बहुत सारे ऐसे छोटे-मोटे चीज है जो फैमिली स्कोर देखना चाहिए और उनको भी यह गोरमेंट होना चाहिए कि एंड ऑफ द डे सब लोग अपना मिलकर रहेंगे तो सब अच्छा ही होगा जो या अभी अभी देखिए रिसेंटली अभी दिल्ली में हुआ था उसकी को एक आदमी को मुस्लिम लड़की से प्रेम विवाह प्रेम हो गया था मगर उसके मुस्लिम लड़की के जो फैमिली थे उसको मार दिया दिल्ली में सब और दिनदहाड़े तो यह जो चीजें बहुत ही भारत को पीछे ले कर जाएगा

dikhi mere hisab se agar koi kisi cheez ko samajik roop se sweekar kar hona chahiye toh bahut saree cheezen jab bhi abhi hamare bharat mein abhi dekhiye ek choti choti cheez ko issue banate hain agar dekhiye meri ek baat bolna bhool jaunga jo caste bhejo marriage hote shadi hote jo inter caste marriage ko hamare jo samaj sweekar nahi karta hai bahut saare agar aaj bhi dekhenge aap haryana ho gaya ya bihar ho gaya bahut saare jor se rajya mein honour killing karte hain apne maa baap ki apne bete beti ko maar dete agar vaah inter caste marriage karte hain ya koi aur muslim log se muslim below aadmi log se shadi karte hain toh yah sab cheez ko toh pehle hum log ko hatana chahiye kyonki and of the day vaah bhi ek human being hai toh hum logo ko yah sab cheez ko bhulkar aur agar kisi ko khojo agar kisi ko koi pasand aaya toh uske saath vaah vivah kyon nahi kar sakta hai hum log jo yah sab cheez jo after call karke aur vaah padhati bandhak banakar hum log khade ho jaate hain jo family jis jis ko pasand nahi aata hai jo koi prem vivah karna chahta hai magar intercaste ki wajah se vaah vaah dono kabhi shadi nahi kar paate uske baad vaah kabhi bhi khushi de nahi reh payenge toh yah hum logo ko samajik roop se sweekar karna chahiye jo hindu ho ya muslim ho ya christian ho agar koi kisi ko pasand kare toh unko shadi karna chahiye jo jo family ka jo pressure rehta hai jo family family jo ritesh parents ko samajik roop se sweekar nahi karte hain vaah sab cheez ko toh yah jo mentaliti hai hum logo ko pehle hatana chahiye bahut saare aise chhote mote cheez hai jo family score dekhna chahiye aur unko bhi yah garment hona chahiye ki and of the day sab log apna milkar rahenge toh sab accha hi hoga jo ya abhi abhi dekhiye recently abhi delhi mein hua tha uski ko ek aadmi ko muslim ladki se prem vivah prem ho gaya tha magar uske muslim ladki ke jo family the usko maar diya delhi mein sab aur dinadahade toh yah jo cheezen bahut hi bharat ko peeche le kar jaega

दिखी मेरे हिसाब से अगर कोई किसी चीज को सामाजिक रुप से स्वीकार कर होना चाहिए तो बहुत सारी च

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Simranpreet Singh

B.Tech in CE from SRM

1:05

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन मेरे हिसाब से तो अगर देखा जाए तो सबसे जो एक चीज मैं चाहूंगा कि वह सामाजिक रुप से स्वीकार हो जानी चाहिए वह है प्रेम विवाह प्रेम विवाह एक ऐसा व्यवहार है जिसको जिसको लेकर काफी लोग उसके खिलाफ रहते हैं तो मेरे हिसाब से जिस हिसाब से आजकल की जनरेशन चेंज हो रही है और लोग ज्यादातर लोग बढ़ते जा रहे हैं जो प्रेम विवाह करना चाहते हैं अपने मनपसंद पार्टनर के साथ तो इस चीज को स्वीकार करना चाहिए आप लोगों को अपनी सोच को थोड़ा बदलना चाहिए और अपने बच्चों को प्रेम विवाह करने का मौका देना चाहिए क्योंकि प्रेम प्रेम विवाह ज्यादातर यह फायदा देकर जाता है कि लोग जो कि किसी से प्यार करते हैं वह उनको समझते हैं इसीलिए उनसे वह प्रेम विवाह करना चाहते हैं तो मैं यह एक चीज है जो करूंगा कि आप सामाजिक रुप से स्वीकार हो जानी चाहिए

lekin mere hisab se toh agar dekha jaaye toh sabse jo ek cheez main chahunga ki vaah samajik roop se sweekar ho jani chahiye vaah hai prem vivah prem vivah ek aisa vyavhar hai jisko jisko lekar kaafi log uske khilaf rehte hain toh mere hisab se jis hisab se aajkal ki generation change ho rahi hai aur log jyadatar log badhte ja rahe hain jo prem vivah karna chahte hain apne manpasand partner ke saath toh is cheez ko sweekar karna chahiye aap logo ko apni soch ko thoda badalna chahiye aur apne baccho ko prem vivah karne ka mauka dena chahiye kyonki prem prem vivah jyadatar yah fayda dekar jata hai ki log jo ki kisi se pyar karte hain vaah unko samajhte hain isliye unse vaah prem vivah karna chahte hain toh main yah ek cheez hai jo karunga ki aap samajik roop se sweekar ho jani chahiye

लेकिन मेरे हिसाब से तो अगर देखा जाए तो सबसे जो एक चीज मैं चाहूंगा कि वह सामाजिक रुप से स्व

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

1:51
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे लगता है इस आधुनिक युग में हमारे समाज में युवा सोच में जो बदलाव आ रहे हैं उसके अनुसार प्रेम विवाह को समाज और परिवार की ओर से खुशी से स्वीकार कर लेना चाहिए l वक्त के साथ समाज को भी और लोगों को भी बदलना चाहिए तभी समाज में शांति और खुशहाली रह सकती है l आज कल अरेंज मैरिज में जो बच्चों के विचार आपस में नहीं मिलते हैं तो शादियां टूटने की कगार पर आ जाती है और परिवार टूटने लगते हैं l लेकिन प्रेम विवाह में यह कारण नहीं होता है क्योंकि बच्चे आपस में एक दूसरे को जान कर, समझ कर और सोच कर शादी करने का फैसला लेते हैं और यह फैसला उनका अपना होता है l इसलिए वह इस रिश्ते को निभाने की पूरी कोशिश भी करते हैं l जो हमारे समाज में आज शादियाँ ज्यादा टूट रही है, परिवारों में आपस में स्नेह व समझ की कमी आ रही है, मुझे लगता है प्रेम विवाह की स्वीकार्यता से हमें टूटने से लाभ जरूर होगा l हम अपने बच्चों को भी खुश रख पाएंगे और परिवारों को भी टूटने से बचा लेंगे और समाज को एक नई दिशा, एक नई सोच की जरूरत है l समाज को चाहिए कि वह बदलाव के साथ बदले और इन चीजों को स्वीकार करें पूरे मन से, खुले दिल से l ताकि उनके बच्चे खुश रह सके और अच्छी तरह से अपना जीवन यापन कर सके, परिवारों के साथ रह सके l परिवारों के प्यार में, बड़ों के साए में जी सके l अगर उन्हें अलग-थलग कर दिया जाता है तो अशांति रहती है, मां-बाप से बच्चे अलग हो जाते हैं और वह प्रेम और वह स्नेह नहीं रह पाता है जो रहना चाहिए l इसलिए मुझे लगता है कि प्रेम विवाह को स्वीकार्यता मिलनी चाहिए l

mujhe lagta hai is aadhunik yug mein hamare samaj mein yuva soch mein jo badlav aa rahe hain uske anusaar prem vivah ko samaj aur parivar ki aur se khushi se sweekar kar lena chahiye l waqt ke saath samaj ko bhi aur logo ko bhi badalna chahiye tabhi samaj mein shanti aur khushahali reh sakti hai l aaj kal arrange marriage mein jo baccho ke vichar aapas mein nahi milte hain toh shadiyan tutne ki kagar par aa jaati hai aur parivar tutne lagte hain l lekin prem vivah mein yah karan nahi hota hai kyonki bacche aapas mein ek dusre ko jaan kar samajh kar aur soch kar shadi karne ka faisla lete hain aur yah faisla unka apna hota hai l isliye vaah is rishte ko nibhane ki puri koshish bhi karte hain l jo hamare samaj mein aaj shadiyaa zyada toot rahi hai parivaron mein aapas mein sneh va samajh ki kami aa rahi hai mujhe lagta hai prem vivah ki swikaryata se hamein tutne se labh zaroor hoga l hum apne baccho ko bhi khush rakh payenge aur parivaron ko bhi tutne se bacha lenge aur samaj ko ek nayi disha ek nayi soch ki zarurat hai l samaj ko chahiye ki vaah badlav ke saath badle aur in chijon ko sweekar kare poore man se khule dil se l taki unke bacche khush reh sake aur achi tarah se apna jeevan yaapan kar sake parivaron ke saath reh sake l parivaron ke pyar mein badon ke saye mein ji sake l agar unhe alag thalag kar diya jata hai toh ashanti rehti hai maa baap se bacche alag ho jaate hain aur vaah prem aur vaah sneh nahi reh pata hai jo rehna chahiye l isliye mujhe lagta hai ki prem vivah ko swikaryata milani chahiye l

मुझे लगता है इस आधुनिक युग में हमारे समाज में युवा सोच में जो बदलाव आ रहे हैं उसके अनुसार

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Apurva D

Optimistic Coder

1:21
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए माना कि हर एक को अपनी अलग अलग होता है और जब कोचिंग सिकार करने के लिए कुछ लोगों के लिए कठिन दो कुछ लोगों के लिए आसान होती है बट फिर भी सबके लिए सामाजिक रूप से उचित कार्य होना बहुत बड़ी बात होती है और मुझे लगता है कि आज से हम कभी देखता देखे का स्टेशन का एक बहुत बड़ी दूर जा रहा है मतलब लोगों को अपना गू ज्यादा बढ़ा दे रहे लोग तो वह कम करके एकता भारत में देनी चाहिए ऐसे लोगों ने करना चाहे तो उनकी जो एकता का इसका स्वीकार है वह सब लोगों ने करना चाहिए तो फिर सोचा किसी की कैसी भी क्यों ना हो बट इस बात पर सब लोगों ने समान विचार रखना चाहिए दूसरी बात यह कि लोग मतलब काले हो या गोरे हो इस पर भी बहुत अलग-अलग विचार होते हैं लोगों के तो मतलब लोगों ने छोटी सोच ना रखते हुए इससे सामाजिक रुप से स्वीकार करना चाहिए कि लोग कैसे भी हो नवीन जाती के हो या मतलब रंग रूप से अलग हो बट फिर भी लोगों के मन अच्छे होने चाहिए उसका नाम बुरे काम करने वाले नहीं चाहिए फिर भी लोगों में एक अच्छे से एकता बनी रहे तो यही चीज है जो सामाजिक रुप से सिकाई होनी चाहिए सबके लिए

dekhiye mana ki har ek ko apni alag alag hota hai aur jab coaching shikar karne ke liye kuch logo ke liye kathin do kuch logo ke liye aasaan hoti hai but phir bhi sabke liye samajik roop se uchit karya hona bahut badi baat hoti hai aur mujhe lagta hai ki aaj se hum kabhi dekhta dekhe ka station ka ek bahut badi dur ja raha hai matlab logo ko apna goo zyada badha de rahe log toh vaah kam karke ekta bharat mein deni chahiye aise logo ne karna chahen toh unki jo ekta ka iska sweekar hai vaah sab logo ne karna chahiye toh phir socha kisi ki kaisi bhi kyon na ho but is baat par sab logo ne saman vichar rakhna chahiye dusri baat yah ki log matlab kaale ho ya gore ho is par bhi bahut alag alag vichar hote hain logo ke toh matlab logo ne choti soch na rakhte hue isse samajik roop se sweekar karna chahiye ki log kaise bhi ho naveen jaati ke ho ya matlab rang roop se alag ho but phir bhi logo ke man acche hone chahiye uska naam bure kaam karne waale nahi chahiye phir bhi logo mein ek acche se ekta bani rahe toh yahi cheez hai jo samajik roop se sikai honi chahiye sabke liye

देखिए माना कि हर एक को अपनी अलग अलग होता है और जब कोचिंग सिकार करने के लिए कुछ लोगों के लि

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Pragati

Aspiring Lawyer

1:41
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे हिसाब से आप जो चीज सामाजिक रूप से लोगों को स्वीकार होनी चाहिए समाज में वह है और किसी दूसरे का कुछ भी करना है l क्योंकि हमारे देश में अब अगर इंसान खुद कुछ कर रहा है तो उसको इतना डर अपने आप से या उसका हमसे नहीं लगता जितना इस बात से लगता है कि बाकी लोग क्या कहेंगे और पूरा समाज क्या कहेगा और वह उस इंसान को कैसा जजमेंट देगा, क्या आप कैसे समझ जाएगा, क्या जज करेगा ? तो अब मेरे हिसाब से पूरे समाज में यह चीज बहुत जल्दी और बहुत अच्छे से स्वीकार लेनी चाहिए लोगों को अगर कोई इंसान कुछ भी कर रहा है तो आप अगर उस की भलाई नहीं कर सकते, उसको अच्छा नहीं बोल सकते तो आप प्लीज उसको जाकर बुरा भी ना बोलें और इससे दूसरे इंसान का दीमोरालिसशन होता है और कहीं ना कहीं वह बहुत देमोरालिसेद लाइफ हो जाता है l कुछ भी आगे करने के लिए या बढ़ने के लिए l और कुछ और चीजें हैं उसमें है एक तो थर्ड जेंडर आनी चाहिए जो किन्नर होते हैं उनको सामाजिक रुप से स्वीकार कर लेना चाहिए अब समाज को और एक अलग नजरों से, गलत नजरों से नहीं देखना चाहिए और उनको ऐसा नहीं मानता दिखाना चाहिए कि वह इस समाज की हिस्सा नहीं है और उनको समाज में रहने का हक नहीं है l तो मेरे साथ से यही दोनों चीजें बहुत जरूरी है जो हमारे देश को पद समझ नहीं चाहिए, वह बदल नहीं चाहिए अपने अंदर तभी जाकर समाज में कुछ बदलाव आ पाएगा l और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे देश में हर कोई जज बहुत जल्दी कर लेता है और लोग क्या कहेंगे इस वजह से कई लोग बहुत पीछे रह जाते हैं और कुछ नहीं कर पाते हैं l तो हम लोगों को इस बात को बहुत अच्छे से समझ लेना चाहिए कि अगर दूसरा इंसान कुछ कर रहा है तो उस पर जजमेंट ना बनाएं और जितना हो सके उस को प्रोत्साहन दे l

mere hisab se aap jo cheez samajik roop se logo ko sweekar honi chahiye samaj mein vaah hai aur kisi dusre ka kuch bhi karna hai l kyonki hamare desh mein ab agar insaan khud kuch kar raha hai toh usko itna dar apne aap se ya uska humse nahi lagta jitna is baat se lagta hai ki baki log kya kahenge aur pura samaj kya kahega aur vaah us insaan ko kaisa judgement dega kya aap kaise samajh jaega kya judge karega toh ab mere hisab se poore samaj mein yah cheez bahut jaldi aur bahut acche se sweekar leni chahiye logo ko agar koi insaan kuch bhi kar raha hai toh aap agar us ki bhalai nahi kar sakte usko accha nahi bol sakte toh aap please usko jaakar bura bhi na bolen aur isse dusre insaan ka dimoralisashan hota hai aur kahin na kahin vaah bahut demoralised life ho jata hai l kuch bhi aage karne ke liye ya badhne ke liye l aur kuch aur cheezen hain usme hai ek toh third gender aani chahiye jo kinnar hote hain unko samajik roop se sweekar kar lena chahiye ab samaj ko aur ek alag nazro se galat nazro se nahi dekhna chahiye aur unko aisa nahi manata dikhana chahiye ki vaah is samaj ki hissa nahi hai aur unko samaj mein rehne ka haq nahi hai l toh mere saath se yahi dono cheezen bahut zaroori hai jo hamare desh ko pad samajh nahi chahiye vaah badal nahi chahiye apne andar tabhi jaakar samaj mein kuch badlav aa payega l aur jaisa ki hum sabhi jante hain ki hamare desh mein har koi judge bahut jaldi kar leta hai aur log kya kahenge is wajah se kai log bahut peeche reh jaate hain aur kuch nahi kar paate hain l toh hum logo ko is baat ko bahut acche se samajh lena chahiye ki agar doosra insaan kuch kar raha hai toh us par judgement na banaye aur jitna ho sake us ko protsahan de l

मेरे हिसाब से आप जो चीज सामाजिक रूप से लोगों को स्वीकार होनी चाहिए समाज में वह है और किसी

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