लड़ कौन के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियां टॉप क्यों करती हैं?...


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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

0:58

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह बड़े इंट्रस्टिंग का सवाल है क्योंकि अगर आप बोर्ड की परीक्षा में देखेंगे तो अक्सर उसमें लड़कियां जो है उनकी परफॉर्मेंस अच्छी रहती है l ना केवल वह अक्सर टॉप करती हुई पाई जाती है बल्कि यह भी देखा गया है उनकी जो पासिंग परसेंटेज लड़कियों के हमेशा बेहतर रहती है l लेकिन उसके अलावा अगर आपकॉम्पेटेतिव एग्जाम जैसे कि अगर आप आयआयटी के अंदर जाते हैं या कैट जो आई एम के लिए होता उसके में जाएंगे तो वहां पर आपको करीब करीब लड़कों का ही बोलबाला लगता है l तो इसका मुझे जो कारण समज जाता है कि एक तो लड़कियां सिंसियर बहुत होती हैं, वह पढ़ने में बहुत ध्यान देती हैं और लड़कों के अंदर डायवर्सन होता है अक्सर और इस वजह से जो लड़कियों के पास परसेंटेज है वह ज्यादा रहती है l दूसरा लड़कियों की जो मेमोरी होती है वह ज्यादा शार्प रहती है और अगर वह कोई चीज रटने वाली चीज है और लिखकर प्रोड्यूस करने वाली चीजें हूबहू तो लड़कियां हमेशा बेहतर परफॉर्म करती हैं और इसीलिए मैं समझता हूं कि बोर्ड में क्योंकि वह क्वेश्चन होते है, स्टैंडर्ड क्वेश्चन आते हैं और उसमें जो लोग रट सकते हैं, जो लोग याद कर सकता हूं के नंबर अच्छे आते हैं l इसी वजह से लड़कियों से ज्यादा अच्छा परफॉर्म करते हैं l

yeh bade interesting ka sawal hai kyonki agar aap board ki pariksha mein dekhenge to aksar usamen chahiye ladkiyan jo hai unki performance acchi rehti hai l na kewal wah aksar top karti hui payi jati hai balki yeh bhi dekha gaya hai unki jo passing percentage ladkiyon ke hamesha behtar rehti hai l lekin uske alava agar apakampetetiv exam jaise ki agar aap ayaayati ke andar jaate hain ya cat jo eye em ke liye hota uske mein jaenge to wahan par aapko karib karib ladko ka hi bolabaala lagta hai l to iska mujhe jo kaaran samaj jata hai ki ek to ladkiyan sinsiyar bahut hoti hain wah padhne mein bahut dhyan deti hain aur ladko ke andar diversion hota hai aksar aur is wajah se jo ladkiyon ke paas percentage hai wah jyada rehti hai l doosra ladkiyon ki jo memory hoti hai wah jyada sharp rehti hai aur agar wah koi cheez ratane wali cheez hai aur likhkar produce karne wali cheezen hubahu to ladkiyan hamesha behtar perform karti hain aur isliye main samajhata hoon ki board mein kyonki wah question hote hai chahiye standard question aate hain aur usamen chahiye jo log rat sakte hain jo log yaad kar sakta hoon ke number acche aate hain l isi wajah se ladkiyon se jyada accha perform karte hain l

यह बड़े इंट्रस्टिंग का सवाल है क्योंकि अगर आप बोर्ड की परीक्षा में देखेंगे तो अक्सर उसमें

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Chandraprakash Joshi

Ex-AGM RBI & CEO@ixamBee.com

1:08
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे लगता है इसका मुख्य कारण यह है कि लड़कियां जो है आपने पढ़ाई में बहुत कंसंट्रेटएड रहती है, बहुत फोकस रहती हैं और वह बहुत सारी बाहर के एक्टिविटीज में कम इन्वोल्व रहती हैं l लड़के क्योंकि घर से बाहर ज्यादा निकलते हैं क्योंकि हमारे समाज में उनको ज्यादा फ्रीडम है, वह घर से बाहर रहता रात में लेट तक में निकल सकते हैं और दिन में भी वो इधर-उधर घूम सकते हैं, अपने दोस्तों के साथ यहां वहां जा सकते हैं तो जिसमें उनका टाइम चला जाता है l क्योंकि लड़कियों के पास उतनी फ्रीडम नहीं है, बाहर घूमने की, देर तक बाहर रहने की, जीवन अपने दोस्तों के साथ घूमने फिरने जाने मे बहुत ज्यादा समय की फ्रीडम कम है l तो वह अपने समय को पढ़ाई पर ज्यादा लगाती हैं क्योंकि अगर वह घर के अंदर है चाहे वो अपने घर में हो या दोस्त के घर में या वह कॉलेज में है लाइब्रेरी में है l तो उस टाइम को बेस्ट यूटिलाइजेशन यह रहता है कि वह अपनी पढ़ाई पर उसको दें क्योंकि वह पढ़ाई पर ज्यादा टाइम देती है इसलिए वह ज्यादा स्कोर कर रही है और बोर्ड में भी और बहुत सारे अधर एग्जाम में भी इसलिए लड़कियां टॉप कर पा रही है l

mujhe lagta hai iska mukhya kaaran yeh hai ki ladkiyan jo hai aapne padhai mein bahut kansantretaed rehti hai bahut focus rehti hain aur wah bahut saree bahar ke ektivitij mein kum inwolwa rehti hain l ladke kyonki ghar se bahar jyada nikalte hain kyonki hamare samaj mein unko jyada freedom hai wah ghar se bahar rehta raat mein late tak mein nikal sakte hain aur din mein bhi vo idhar udhar ghum sakte hain apne doston ke saath yahan wahan ja sakte hain to jisme unka time chala jata hai l kyonki ladkiyon ke paas utani chahiye freedom nahi hai bahar ghoomne ki der tak bahar rehne ki jeevan apne doston ke saath ghoomne phirne jaane me bahut jyada samay ki freedom kum hai l to wah apne samay ko padhai par jyada lagati hain kyonki agar wah ghar ke andar hai chahe vo apne ghar mein ho ya dost ke ghar mein ya wah college mein hai library mein hai l to us time ko best yutilaijeshan yeh rehta hai ki wah apni padhai par usko de kyonki wah padhai par jyada time deti hai isliye wah jyada score kar rahi hai aur board mein bhi aur bahut sare adhar exam mein bhi isliye ladkiyan top kar pa rahi hai l

मुझे लगता है इसका मुख्य कारण यह है कि लड़कियां जो है आपने पढ़ाई में बहुत कंसंट्रेटएड रहती

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

1:43
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एक साधारण फटने की लड़कों के मुकाबले बोर्ड में की परीक्षा में लड़कियां अधिक टॉपर की लड़कियां परिवार में नियंत्रित रहती हैं उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियां होती हैं पानी में कागज की सूची उनको भाई-बहन माता-पिता की तरफ उनका ध्यान होता है जबकि लड़के निश्चिंत होते हैं लड़के अपनी मित्र मंडली में सब कुछ भूल जाते ना मां की याद आती ना पिता की रचना अपनी पढ़ाई किया लड़कियां भी सीमित दायरे में लड़की जैसी हमारी बहन बेटियां थी वह चीज बनती है तो उसे बाहर नहीं जा पाती और वह दायरे में रहकर पूरा फोकस होता है इतनी लड़कियां लड़कों की तुलना में टॉपर चिंता की 23 और दो लड़कियां चौपाटी पर जाना और अपने आपको इधर उधर से बचा के रखना सफलता पाने का एक सबसे आसान माध्यम टॉप आने के लिए कोई डरने की जरूरत नहीं है किसी के पास भागदौड़ करने की जरूरत नहीं है जो चले उसको एक बार दो बार तीन बार डिवाइस की चौकी मिर्ची भावना निकल जाएगी लड़के ही टोपा टोपा जाएंगे आपने और लड़कियों की क्रिया प्रणाली में आपने क्या छोड़ा कि आप लड़कियों के समान टॉपर

ek sadhaaran fatne ki ladko ke muqable board mein ki pariksha mein ladkiyan adhik topper ki ladkiyan parivar mein niyantrit rehti hain unke upar parivar ki zimmedariyan hoti hain paani mein kagaz ki suchi unko bhai behen mata pita ki taraf unka dhyan hota hai jabki ladke nishchint hote hain ladke apni mitra mandali mein sab kuch bhool jaate na maa ki yaad aati na pita ki rachna apni padhai kiya ladkiyan bhi simit daayre mein ladki jaisi hamari behen betiyan thi vaah cheez banti hai toh use bahar nahi ja pati aur vaah daayre mein rahkar pura focus hota hai itni ladkiyan ladko ki tulna mein topper chinta ki 23 aur do ladkiyan chaupati par jana aur apne aapko idhar udhar se bacha ke rakhna safalta paane ka ek sabse aasaan madhyam top aane ke liye koi darane ki zarurat nahi hai kisi ke paas bhagdaud karne ki zarurat nahi hai jo chale usko ek baar do baar teen baar device ki chowki mirchi bhavna nikal jayegi ladke hi topa topa jaenge aapne aur ladkiyon ki kriya pranali mein aapne kya choda ki aap ladkiyon ke saman topper

एक साधारण फटने की लड़कों के मुकाबले बोर्ड में की परीक्षा में लड़कियां अधिक टॉपर की लड़किया

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

1:28
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लड़कों के मुकाबले 40% अधिक संख्या में लड़कियों को देखिए लड़कियां अपनी शक्ति को पहचान गई है अपने नर जी को एक बटे प्ले दिशा में दे रही है जिसका नतीजा है कि वह - कर रही है लड़की कहीं न कहीं दिग्भ्रमित हो रहे हैं एक तो घर में से उनको इस तरह का माहौल देवी आया कि तुम्हें हमारे खानदान के सर्वे सर्वा हो गैरा वगैरह उनके अंदर आत्मा से ज्यादा हो गया और नतीजा होगा कि वह अपने 21 एमएसजी पढ़ाई की होती है पार्टी कूलर डायरेक्शन में होने के बजाय कई दिशा भटक जाते हैं बाहर छूट मिलती है बाहर घूमने का दोस्त बनाने का और भी बहुत सारी है जिसका नतीजा किए जा रहे हैं और लड़कियां भी अपने आप को केंद्रित कर रही हैं हर साल बोर्ड की परीक्षा हो रही है कि हर स्टेट में इस तरह का हो रहा है लड़कियां हाथ में आ गया है निश्चित तौर पर ही अच्छी जो अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल करके अपने पति और कौशल का इस्तेमाल करेगा वही जाएगा निश्चित और लड़कियां अपने कौशल का इस्तेमाल कर रही है नतीजा आपके सामने आ रहा है

ladko ke muqable 40 adhik sankhya mein ladkiyon ko dekhiye ladkiyan apni shakti ko pehchaan gayi hai apne nar ji ko ek bate play disha mein de rahi hai jiska natija hai ki vaah kar rahi hai ladki kahin na kahin digbhramit ho rahe hai ek toh ghar mein se unko is tarah ka maahaul devi aaya ki tumhe hamare khandan ke survey sarva ho gaira vagera unke andar aatma se zyada ho gaya aur natija hoga ki vaah apne 21 MSG padhai ki hoti hai party cooler direction mein hone ke bajay kai disha bhatak jaate hai bahar chhut milti hai bahar ghoomne ka dost banane ka aur bhi bahut saree hai jiska natija kiye ja rahe hai aur ladkiyan bhi apne aap ko kendrit kar rahi hai har saal board ki pariksha ho rahi hai ki har state mein is tarah ka ho raha hai ladkiyan hath mein aa gaya hai nishchit taur par hi achi jo apne sansadhano ka sahi istemal karke apne pati aur kaushal ka istemal karega wahi jaega nishchit aur ladkiyan apne kaushal ka istemal kar rahi hai natija aapke saamne aa raha hai

लड़कों के मुकाबले 40% अधिक संख्या में लड़कियों को देखिए लड़कियां अपनी शक्ति को पहचान गई है

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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

1:43
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे लगता है लड़कियां थोड़ी ज्यादा मेच्योर होती है लड़कों के मुकाबले अगर वह पढ़ाई की बात की जाए तो लड़कियां किसी भी काम को जब करती है तो डेडिकेशन से करती है l इसका एग्जांपल आप चाहे स्पोर्ट्स में ले ले चाहे पढ़ाई में ले ले l लड़कों के पास दिस्त्राक्षन्स के लिए बहुत सारे रीजन्स से होते हैं , उनके पास डिस्ट्रक्शन ज्यादा होते हैं l मैं खुद बहुत दिस्क्त्रक्टेद रहता हूं चीजो से जब मैं अपने आप को केम्पर करता हूं किसी लड़की से तो मुझे लगता है कि दिस्त्राक्षन्स से मेरी लाइफ में काफी ज्यादा है l ऐसा नहीं कि लड़की की लाइफ में डिस्ट्रक्शन नहीं है लेकिन उनकी एकाग्रता है लड़कियों की जिनकी कंसंट्रेशन पावर है, जो उनकी क्षमताएं हैं तथा उनके साथ जो भी इंसिडेंट होते हैं तो उसको वह पीछे छोड़ कर आगे निकलने की जो उनकी उनकी क्षमता होती है, मुश्किल जीवन चलता ही रहता है l तो मुझे लगता है यह सारी की सारी चीजें काम आती है एक प्रतियोगिता-प्रतियोगी परीक्षा में या बोर्ड परीक्षा में जब परफॉर्म करते हैं तो l क्योंकि आपका कॉन्संट्रेशन अगर आप पढ़ाई में या खेलने में या किसी भी चीज़ में आप जाना चाहते उसमें नहीं है l तो मुझे लगता है फिर आप इस परीक्षा में अच्छा नहीं कर पाएंगे l कॉन्संट्रेशन होना बहुत जरूरी है l आप कितने घंटे तक पढ़ सकते हैं, कितने घंटे खेल सकते हैं सब कुछ जरूरी है l अगर आपके पास मोबाइल फोन का डिस्ट्रक्शन है, इस लड़कियों को मैंने दिखाकर मोबाइल फोन कर डिस्ट्रक्शन उनके पास बहुत कम रहता है और शायद होता है तो बस वही होता है क्योंकि ज्यादा हमारी समाज में फ्रीडम भी नहीं लड़कियों को इतना हमने उन्हें आजादी दी नहीं है l तो उनके पास डिस्ट्रक्शन के दो-तीन रिजेन ही होते हैं वह जब खत्म हो जाती है, वह कम हो जाते हैं तो बस रहती है पढ़ाई और उसमे टॉप कर देती हैं l लड़कों के पास 50 तरह की चीजें होती, 50 तरीके काम होते हैं और उनके पास थे डिस्ट्रक्शन बहुत ज्यादा होते हैं इसलिए वह थोड़ा पीछे रह जाते हैं l और इसके अलावा मेहनत तो है ही लड़की काफी मेहनती होती है इसमें कोई डाउट नहीं है, थैंक यू l

mujhe lagta hai ladkiyan thodi jyada mechyor hoti hai ladko ke muqable agar wah padhai ki baat ki jaye to ladkiyan kisi bhi kaam ko jab karti hai to dedication se karti hai l iska example aap chahe sports mein le le chahe padhai mein le le l ladko ke paas distrakshans ke liye bahut sare reasons se hote hain , unke paas destruction jyada hote hain l main khud bahut disktrakted rehta hoon cheejo se jab main apne aap ko kempar karta hoon kisi ladki se to mujhe lagta hai ki distrakshans se meri life mein kaafi jyada hai l aisa nahi ki ladki ki life mein destruction nahi hai lekin unki ekagrata hai ladkiyon ki jinaki kansantreshan power hai jo unki kshamataen hain tatha unke saath jo bhi incident hote hain to usko wah piche chod kar aage nikalne ki jo unki unki kshamta hoti hai mushkil jeevan chalta hi rehta hai l to mujhe lagta hai yeh saree ki saree cheezen kaam aati hai ek pratiyogita pratiyogi pariksha mein ya board pariksha mein jab perform karte hain to l kyonki aapka kansantreshan agar aap padhai mein ya khelne mein ya kisi bhi cheese mein aap jana chahte usamen chahiye nahi hai l to mujhe lagta hai phir aap is pariksha mein accha nahi kar paenge l kansantreshan hona bahut zaroori hai l aap kitne ghante tak padh sakte hain kitne ghante khel sakte hain sab kuch zaroori hai l agar aapke paas mobile phone ka destruction hai is ladkiyon ko maine dikhakar mobile phone kar destruction unke paas bahut kum rehta hai aur shayad hota hai to bus wahi hota hai kyonki jyada hamari samaj mein freedom bhi nahi ladkiyon ko itna humne unhen chahiye azadi di nahi hai l to unke paas destruction ke do teen rijen hi hote hain wah jab khatam ho jati hai wah kum ho jaate hain to bus rehti hai padhai aur usme top kar deti hain l ladko ke paas 50 tarah ki cheezen hoti 50 tarike kaam hote hain aur unke paas the destruction bahut jyada hote hain isliye wah thoda piche rah jaate hain l aur iske alava mehnat to hai hi ladki kaafi mehanati hoti hai isme koi doubt nahi hai thank you l

मुझे लगता है लड़कियां थोड़ी ज्यादा मेच्योर होती है लड़कों के मुकाबले अगर वह पढ़ाई की बात क

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RC DAN

Teacher

1:30
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लड़कों की तुलना में लड़कियां परीक्षा में अधिक संख्या में टॉप करती है इसका एक बहुत बड़ा कारण है लड़कियों की कंसंट्रेशन का अधिक होना हमारी सामाजिक संरचना इस तरह की है कि लड़कियों का एक दायरा सीमित है वह घर से बाहर कम निकलती है और उनके संपर्क कम होते हैं जितने कम संपर्क होंगे उनकी कंसंट्रेशन उतनी ही अधिक होने की संभावना है सामान्यतया बच्चों का संपर्क घर से बाहर अधिक होता है जितना अधिक संपर्क होता है उतना ही अधिक अधिक उनका डायवर्जन होता है तुला का वह पलड़ा अधिक भारी होता है जिसमें वजन अधिक होता है तो जो जितना अपने घर से अपने कंडेंट से बाहर रहता है अपने एक निश्चित दायरे से बाहर रहता है उसको उतने ही अधिक इंटरेक्शन के मौके मिलते हैं और जितना अधिक इंफेक्शन होता है उसका उतना ही डायवर्जन अधिक होता है अपनी सामाजिक संरचना लड़कियों का बहार घर से बाहर संपर्क कम होने के कारण उनके माइंड और कंसंट्रेशन का डायवर्जन कम हो पाता है और वह बच्चे हैं जिनमें अपने लक्ष्य को पाने की अधिक झील होती है अधिक प्रयास करती है उनकी कंसंट्रेशन अधिक होती है और वह बोर्ड परीक्षा में या किसी भी अन्य परीक्षाओं में बहुत अच्छे अंकल आती है इसी कारण उनकी टॉप करने वाली लड़कियों की संख्या अधिक होती

ladko ki tulna mein ladkiyan pariksha mein adhik sankhya mein top karti hai iska ek bahut bada karan hai ladkiyon ki kansantreshan ka adhik hona hamari samajik sanrachna is tarah ki hai ki ladkiyon ka ek dayara simit hai vaah ghar se bahar kam nikalti hai aur unke sampark kam hote hain jitne kam sampark honge unki kansantreshan utani hi adhik hone ki sambhavna hai samanyataya baccho ka sampark ghar se bahar adhik hota hai jitna adhik sampark hota hai utana hi adhik adhik unka dayavarjan hota hai tula ka vaah palada adhik bhari hota hai jisme wajan adhik hota hai toh jo jitna apne ghar se apne kandent se bahar rehta hai apne ek nishchit daayre se bahar rehta hai usko utne hi adhik interaction ke mauke milte hain aur jitna adhik infection hota hai uska utana hi dayavarjan adhik hota hai apni samajik sanrachna ladkiyon ka bahar ghar se bahar sampark kam hone ke karan unke mind aur kansantreshan ka dayavarjan kam ho pata hai aur vaah bacche hain jinmein apne lakshya ko paane ki adhik jheel hoti hai adhik prayas karti hai unki kansantreshan adhik hoti hai aur vaah board pariksha mein ya kisi bhi anya parikshao mein bahut acche uncle aati hai isi karan unki top karne wali ladkiyon ki sankhya adhik hoti

लड़कों की तुलना में लड़कियां परीक्षा में अधिक संख्या में टॉप करती है इसका एक बहुत बड़ा कार

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Grt2100

Youtb Par S T Motivation

0:34
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लड़कों की अपेक्षा लड़कियां क्यों बोर्ड की परीक्षा में टॉप करते हैं मैं आपको बताना चाहूंगा या नहीं है जो लड़के अगर सही पढ़ते हैं ना वह भी टॉप करते हैं जो लड़कियां अच्छी पड़ती है वह भी टॉप करते रहिए नहीं होता जो पटिया वही टॉप करते हैं जरूरी नहीं है कि लड़कियां ही तो अब करती है एक्चुली ऐसा हो तब लड़के टॉप होते लड़कियां बहुत पीछे हो जाती है और कभी-कभी लड़कियां होती है एक्चुली ऐसा होता पढ़ाई की रिकॉर्डिंग होता है

ladko ki apeksha ladkiya kyon board ki pariksha me top karte hain main aapko batana chahunga ya nahi hai jo ladke agar sahi padhte hain na vaah bhi top karte hain jo ladkiya achi padti hai vaah bhi top karte rahiye nahi hota jo partiyan wahi top karte hain zaroori nahi hai ki ladkiya hi toh ab karti hai ekchuli aisa ho tab ladke top hote ladkiya bahut peeche ho jaati hai aur kabhi kabhi ladkiya hoti hai ekchuli aisa hota padhai ki recording hota hai

लड़कों की अपेक्षा लड़कियां क्यों बोर्ड की परीक्षा में टॉप करते हैं मैं आपको बताना चाहूंगा

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satyaveer singh

Satya Traders

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लड़कों के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियां क्यों आती है उसका प्रमुख कारण है क्योंकि लड़के कहीं न कहीं बहुत ज्यादा घुमक्कड़ होते हैं वह घूमते रहते हैं घूमने की वैसे वह नशीले पदार्थों के भी आती हो जाते हैं तथा आधिव्याधि बहुत सारी हो जाती है उनके नाम और कई लड़कियों का काम करना ही उनको सर्वो पर बना देता है इसलिए लड़कियां टॉप आती है दूसरे मायने में यह है कि कोई भी कोई भी अकाबर ओके अगर पड़ेगा ना वह तो हो पाएगा चाहे वह लड़का हो या लड़की हो लड़की का टॉप आना प्रमुख कारण है कि वह छात्रों के पढ़ लेते हैं

ladko ke muqable board ki pariksha me adhik sankhya me ladkiya kyon aati hai uska pramukh karan hai kyonki ladke kahin na kahin bahut zyada ghumakkar hote hain vaah ghumte rehte hain ghoomne ki waise vaah nashile padarthon ke bhi aati ho jaate hain tatha adhivyadhi bahut saari ho jaati hai unke naam aur kai ladkiyon ka kaam karna hi unko savo par bana deta hai isliye ladkiya top aati hai dusre maayne me yah hai ki koi bhi koi bhi akabar ok agar padega na vaah toh ho payega chahen vaah ladka ho ya ladki ho ladki ka top aana pramukh karan hai ki vaah chhatro ke padh lete hain

लड़कों के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियां क्यों आती है उसका प्रमुख क

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लड़कियों को घर पर ज्यादा काम रहते हैं और अगर पढ़ाई नहीं करेगी तो उनको यह लगेगा कि हम घर का काम करते हुए हम अपने पढ़ाई करें ताकि हमें कोई चाहने वाला ना हो कि हम अपना घर का काम कर रहे हैं और पढ़ाई में कैसा रहे हैं

ladkiyon ko ghar par zyada kaam rehte hain aur agar padhai nahi karegi toh unko yah lagega ki hum ghar ka kaam karte hue hum apne padhai kare taki hamein koi chahne vala na ho ki hum apna ghar ka kaam kar rahe hain aur padhai mein kaisa rahe hain

लड़कियों को घर पर ज्यादा काम रहते हैं और अगर पढ़ाई नहीं करेगी तो उनको यह लगेगा कि हम घर का

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Prabhat Kumar

Teacher at Oxford English High School 7 year experience

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन मुझे लगता है कि लड़कियां लड़कों से ज्यादा मेहनत करती है क्योंकि वह लोग अपने भविष्य के बारे में बहुत सचेत होती है साथ ही साथ सभी लोग अपने माता-पिता के आदेशों का पालन करती है साथ ही साथ वह सोचती है कि अगर मैं फेल हो गई तो फिर मेरे समाज में मेरी इज्जत नहीं रहेगी यही सब सोच कर भी हमेशा अपनी पढ़ाई को ध्यान में रखकर चलती है जिस कारण वह लोग हमेशा बोर्ड में टॉप करती है

lekin mujhe lagta hai ki ladkiyan ladko se jyada mehnat karti hai kyonki wah log apne bhavishya ke baare mein bahut sachet hoti hai saath hi saath sabhi log apne mata pita ke adeshon ka palan karti hai saath hi saath wah sochti hai ki agar main fail ho gayi to phir mere samaj mein meri izzat nahi rahegi yahi sab soch kar bhi hamesha apni padhai ko dhyan mein rakhakar chalti hai jis kaaran wah log hamesha board mein top karti hai

लेकिन मुझे लगता है कि लड़कियां लड़कों से ज्यादा मेहनत करती है क्योंकि वह लोग अपने भविष्य क

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Apurva D

Optimistic Coder

1:31
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखे अकेले बोर्ड एग्जाम होती है ना वह एक सिलेबस पर डिपेंड करती है हालांकि मतलब वह इतनी टर्न पार्ट वन में आ गई है कि लड़को को कैसे होता है कि मोदी का लड़की स्पर्श करती लड़कियों को नहीं बोलना अच्छे मार्क्स लाने ही है उनका एक दो तीन लड़कों को कैसे क्या हर बार वही करते रहे उनका यह सोच अलग होती है तो मुझे ऐसा लगता है लड़कियां है उनका नहीं करना इतना दिया है तो इतना करना है ऐसा मन कर रहा था इसलिए वर्क करती है और WhatsApp भी करती है फिर मतलब ऑलमोस्ट मुझे यही लगता है कि वह सोच के ऊपर करने के लिए लड़के भी हैं ऐसे बात नहीं उनको करना है इसलिए मतलब टाइप करना ऐसे हिसाब से बहुत लड़के भी आते हैं बट नंबर ऑफ लड़कियां और सब वैसा सोचती है कि नहीं ना को पढ़ाई करनी है तो करो ऐसे करना है इसलिए वह बोर्ड के एग्जाम में लड़कियां टॉप कर दिया क्या मैंने कहा है तो वह सब सब लोगों से कर सकते हैं अगर किसी को आलस आता है कि नहीं समझ कर लेने पड़ते हैं मतलब और उसे पूरे साल उसकी पढ़ाई करनी पड़ती तो कभी कभी किसी को कंटाला आ सकता है तो मैं भी लड़कियां इस मामले में मतलब जो है तो उसमें अच्छी रहती है कि ब्रिटिश पढ़ाई करने में इसलिए वह करके समझाता है

dekhe akele board exam hoti hai na wah ek syllabus par depend karti hai halaki matlab wah itni turn part van mein aa gayi hai ki ladko ko kaise hota hai ki modi ka ladki sparsh karti ladkiyon ko nahi bolna acche marks lane hi hai unka ek do teen ladko ko kaise kya har baar wahi karte rahe unka yeh soch alag hoti hai to mujhe aisa lagta hai ladkiyan hai unka nahi karna itna diya hai to itna karna hai aisa man kar raha tha isliye work karti hai aur WhatsApp bhi karti hai phir matlab alamost mujhe yahi lagta hai ki wah soch ke upar karne ke liye ladke bhi hain aise baat nahi unko karna hai isliye matlab type karna aise hisab se bahut ladke bhi aate hain but number of ladkiyan aur sab waisa sochti hai ki nahi na ko padhai karni hai to karo aise karna hai isliye wah board ke exam mein ladkiyan top kar diya kya maine kaha hai to wah sab sab logo chahiye se kar sakte hain agar kisi ko aalas aata hai ki nahi samajh kar lene padte hain matlab aur use poore saal uski padhai karni padhti to kabhi kabhi kisi ko kantala aa sakta hai to main bhi ladkiyan is mamle mein matlab jo hai to usamen chahiye acchi rehti hai ki british padhai karne mein isliye wah karke samajhata hai

देखे अकेले बोर्ड एग्जाम होती है ना वह एक सिलेबस पर डिपेंड करती है हालांकि मतलब वह इतनी टर्

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Ishita Seth

Obstinate Programmer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जिंदगी ऐसा बहुत बार देखा चाहता है और ऐसा बहुत बार नोटिस और अब ब्लॉक किया जाता है कि हमेशा ऑलमोस्ट हर एग्जाम में लड़कों के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियां टॉप करते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि लड़कियां नीचे थोड़ी ज्यादा सुंदर होती है वह अपने फ्यूचर को लेकर को लेकर पढ़ाई को लेकर होती है तो सिर्फ एक ही रीजन है कि उनका तो यह संसार नेचर है अब तू चीज को लेकर बढ़िया से पढ़ाई को लेकर काम तो करती है वह है कि लड़कियां जो भी काम करती हैं वह सारे काम के रिलेटेड ज्यादा सुंदर होती है उस काम को ज्यादा लगन से गलती है तो उसने पढ़ाई में भी लागू होती है यही कारण है कि जो लड़कियों का तो एक्शन सनीचर है जिसके कारण है जो लड़कों के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियां हिट ऑफ करती है

zindagi aisa bahut baar dekha chahta hai aur aisa bahut baar notice aur ab block kiya jata hai ki hamesha alamost har exam mein ladko ke muqable board ki pariksha mein adhik sankhya mein ladkiyan top karte hain aisa isliye kyonki ladkiyan niche thodi jyada sundar hoti hai wah apne future ko lekar ko lekar padhai ko lekar hoti hai to sirf ek hi reason hai ki unka to yeh sansar nature hai ab tu cheez ko lekar badhiya se padhai ko lekar kaam to karti hai wah hai ki ladkiyan jo bhi kaam karti hain wah sare kaam ke related jyada sundar hoti hai us kaam ko jyada lagan se galti hai to usne padhai mein bhi laagu hoti hai yahi kaaran hai ki jo ladkiyon ka to action shanichar hai jiske kaaran hai jo ladko ke muqable board ki pariksha mein adhik sankhya mein ladkiyan hit of karti hai

जिंदगी ऐसा बहुत बार देखा चाहता है और ऐसा बहुत बार नोटिस और अब ब्लॉक किया जाता है कि हमेशा

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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन मुझे लगता है इसका सबसे बड़ा कारण यह हो सकता है कि वॉइस के अंदर जो कंप्यूटर ऑपरेटर को कम होती जा रही है इसके पीछे जो सबसे बड़ा कारण यह है कि वॉइस के माइंड में डिस्ट्रक्शन बहुत होता है क्योंकि वह एक चीज पर फोकस नहीं कर पाते उनके मायने बहुत सारी चीजें चलती रहती है और जिस चीज को उनको फोकस करना होता है उस चीज पर वह अपना फोकस नहीं कर पाते हैं जबकि अगर गलत की बात की जाए तो उनको लगता है कि अगर उनकी लाइफ का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि कंपटीशन में परफॉर्म करना है एग्जाम्स में अच्छे मार्क्स लेकर आना है तो उसी चीज पर फोकस रहती है उस चीज को फोकस जाती है उसके हिसाब से उनका पूरा सिस्टम रहता है का टाइम टेबल रहता है स्टडी रहती है और यही रीजन है कि जब एग्जाम का रिजल्ट आता है तुम गलत ज्यादा टॉप का दिन रात दिन बॉय तो मुझे लगता है क्योंकि वॉइस कंसंट्रेट नहीं कर पाते माइंड में बहुत ज्यादा डिस्ट्रक्शन होता है एक चीज पर फोकस नहीं होती इस वजह से जो बॉय शंकर रिजल्ट जो है ग्रेजुअली धीरे-धीरे कम होता जाता है

lekin mujhe lagta hai iska sabse bada kaaran yeh ho sakta hai ki voice ke andar jo computer operator ko kum hoti ja rahi hai iske piche jo sabse bada kaaran yeh hai ki voice ke mind mein destruction bahut hota hai kyonki wah ek cheez par focus nahi kar paate unke maayne bahut saree cheezen chalti rehti hai aur jis cheez ko unko focus karna hota hai us cheez par wah apna focus nahi kar paate hain jabki agar galat ki baat ki jaye to unko lagta hai ki agar unki life ka sabse bada uddeshya hai ki competition mein perform karna hai exams mein acche marks lekar aana hai to ussi cheez par focus rehti hai us cheez ko focus jati hai uske hisab se unka pura system rehta hai ka time table rehta hai study rehti hai aur yahi reason hai ki jab exam ka result aata hai tum galat jyada top ka din raat din boy to mujhe lagta hai kyonki voice concentrate nahi kar paate mind mein bahut jyada destruction hota hai ek cheez par focus nahi hoti is wajah se jo boy chahiye shankar result jo hai gradually dhire chahiye dhire chahiye kum hota jata hai

लेकिन मुझे लगता है इसका सबसे बड़ा कारण यह हो सकता है कि वॉइस के अंदर जो कंप्यूटर ऑपरेटर को

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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

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अगर हम 2000 से 2010 के बीच के सोशियोलॉजी स्ट की रिपोर्ट देखकर तो सिरपुर के मुताबिक लड़कों के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियों ने टॉप किया है वह अधिक संख्या में जो है लड़की और लड़कों से ज्यादा पास होती है इसके तीन मुख्य कारण सबसे पहला कारण यह है कि लड़कियां जो है वह ज्यादा पड़ती है लड़कों से अगर हम यूनेस्को की एक रिपोर्ट देख दोष रिपोर्ट के मुताबिक लड़कियां जो है बहुत ज्यादा पड़ती है लड़कों से 15 से 18 वर्ष के बीच में सिर्फ यही नहीं उन्होंने यह भी बताया कि 56 प्रतिशत तक किसी लड़के हैं वह सिर्फ पढ़ते एक इंफॉर्मेशन लेने के लिए जबकि 33% लड़कियां सिर्फ इंफॉर्मेशन लेने के लिए नहीं बल्कि अच्छे से पढ़ने के लिए रखती है और सीबीआई नहीं यह भी रिपोर्ट आई है कि लड़के जो है उतना फ्लिबनसेरिन नहीं कर पाता जितना होना चाहिए क्योंकि इतना लाइक ऑफ इंगेजमेंट हो तुमको ज्यादा रस नहीं होता है इंटरेस्ट नहीं होता है पढ़ाई में और सीबीआई ने यह कृषि रिपोर्ट अभी आई है कि हा शब्द कसा 50% तक की लड़कियों जाए वह कम से कम 30 मिनट तो पड़ती है और लड़के जो है वह 30 मिनट भी नहीं पड़ते हैं वह छोड़ो जो रहेंगे टोटल पापुलेशन कि आधा घंटा पढ़ते रहेंगे दिन में सब यही नहीं लड़कियों का टेंशन स्पंज याद आ रहा था स्टेट कर पाती है क्लासेस में और सामान स्लिप आती है एग्जाम में सीबीआई ने लड़कियों को इतना ऑनलाइन एक्टिविटी कम कैसे जैसे गेमिंग हो या ऑफिस सपोर्ट खेलना उसमें ज्यादा मन नहीं होता है तो कान्हा को पढ़िए कारण हो सकता है उसे भी यही नहीं इस तरह का कापी ऑपरेशन लड़कों को मिलता है और जिस प्रकार से लड़के जो भी छोटी उम्र से यह अल्कोहल से या फिर सिगरेट से डिलीट हो जाते हैं वैसी चीज लड़कियों में नहीं देखी गई है तो यही कारण है कि लड़कों के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियां जो टॉप करती है

agar hum 2000 se 2010 ke beech ke sociology stau ki report chahiye dekhkar to sirpur ke mutabik ladko ke muqable board ki pariksha mein adhik sankhya mein ladkiyon ne top kiya hai wah adhik sankhya mein jo hai ladki aur ladko se jyada paas hoti hai iske teen mukhya kaaran sabse pehla kaaran yeh hai ki ladkiyan jo hai wah jyada padhti hai ladko se agar hum UNESCO ki ek report chahiye dekh dosh report chahiye ke mutabik ladkiyan jo hai bahut jyada padhti hai ladko se 15 se 18 varsh ke beech mein sirf yahi nahi unhone yeh bhi bataya ki 56 pratishat tak kisi ladke hain wah sirf padhte ek information lene ke liye jabki 33% ladkiyan sirf information lene ke liye nahi balki acche se padhne ke liye rakhti hai aur cbi nahi yeh bhi report chahiye eye hai ki ladke jo hai utana chahiye flibanaserin nahi kar pata jitna hona chahiye kyonki itna like of engagement ho tumko jyada ras nahi hota hai interest nahi hota hai padhai mein aur cbi ne yeh krishi report chahiye abhi eye hai ki ha shabdh kasa 50% tak ki ladkiyon jaye wah kum se kum 30 minute to padhti hai aur ladke jo hai wah 30 minute bhi nahi padte hain wah chodo jo rahenge total population ki aadha ghanta padhte rahenge din mein sab yahi nahi ladkiyon ka tension spanj yaad aa raha tha state kar pati hai classes mein aur saamaan slip aati hai exam mein cbi ne ladkiyon ko itna online activity kum kaise jaise gaming ho ya office support khelna usamen chahiye jyada man nahi hota hai to kanha ko padhiye kaaran ho sakta hai use bhi yahi nahi is tarah ka kapi operation ladko ko milta hai aur jis prakar se ladke jo bhi choti umar se yeh alcohol se ya phir cigarette se delete ho jaate hain waisi cheez ladkiyon mein nahi dekhi gayi hai to yahi kaaran hai ki ladko ke muqable board ki pariksha mein adhik sankhya mein ladkiyan jo top karti hai

अगर हम 2000 से 2010 के बीच के सोशियोलॉजी स्ट की रिपोर्ट देखकर तो सिरपुर के मुताबिक लड़कों

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Sefali

Media-Ad Sales

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लड़कों के मुकाबले बोर्ड परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियों टॉप क्यों करें क्योंकि मुझे जो इसका कारण लगता है एक तो फीमेल, जो लड़की छात्रा होती है ऐसे बहुत कम होती हैं छात्रा जो कि स्टडीज, स्पोर्ट्स, एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी में दोनों तरह से इन्वोल्व हो l जहां पर देखा जाए लड़के मोस्टली एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में ज्यादा रहते हैं चाहे वह स्पोर्ट्स हो और स्कूल के बाद खेलना हो या फिर ट्युशंस बाद खेलना हो वह उन सब में बहुत ज्यादा रहते हैं l लड़कियां उनका ऐसा बहुत कम है कि जो स्पोर्ट्स या फिर बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी में आते बहुत एक्टिव हो उस चीजों में l तो मेरे को लगता है यह जो सबसे बड़ा कारण है क्योंकि एक अगर लड़कियां हर एक करीकुलर एक्टिव में ज्यादा इन्वॉल्व नहीं है, बस पढ़ाई कर रही है इसलिए फोकस एक ही डायमेंशन में रहता है जिसकी वजह से जो लड़कियां और छात्राएं ज्यादा टॉप कर रहे हैं बोर्ड परीक्षा में लड़कों के मुकाबले l

ladko ke muqable board pariksha mein adhik sankhya mein ladkiyon top kyu kare chahiye kyonki mujhe jo iska kaaran lagta hai ek to female jo ladki chatra hoti hai aise bahut kum hoti hain chatra jo ki studies sports extra karikulam activity mein dono tarah se inwolwa ho l chahiye jaha par dekha jaye ladke mostly extra karikular ektivitij mein jyada rehte hain chahe wah sports ho aur school ke baad khelna ho ya phir tyushans baad khelna ho wah un sab mein bahut jyada rehte hain l ladkiyan unka aisa bahut kum hai ki jo sports ya phir bahut jyada extra karikulam activity mein aate bahut active ho us chijon mein l to mere ko lagta hai yeh jo sabse bada kaaran hai kyonki ek agar ladkiyan har ek karikular active mein jyada involve nahi hai bus padhai kar rahi hai isliye focus ek hi dimension mein rehta hai jiski wajah se jo ladkiyan aur chatrae jyada top kar rahe hain board pariksha mein ladko ke muqable l

लड़कों के मुकाबले बोर्ड परीक्षा में अधिक संख्या में लड़कियों टॉप क्यों करें क्योंकि मुझे ज

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Pragati

Aspiring Lawyer

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लड़कों के मुकाबले बोर्ड परीक्षा में लड़कियां अधिक संख्या में क्यों टाइप करती है उसके बहुत सारे कारण है l जिसका पहला कारण यह भी के जो 12थ क्लास तक की परीक्षाएं होती है और उस पर जो एज होती है बच्चों की उस एज तक जो लड़कियां होती हैं वह ज्यादा जल्दी मच्यौर हो जाती है और उनका इंटेलिजेंस लेवल थोड़ा हाई होता है l वही लड़कों का जो इंटेलिजेंस लेवल होता है जो मच्यौरिटी लेवल होता बोर्ड ट्वेल्थ क्लास यानि बोर्ड परीक्षा के बाद थोड़ा सा हाई होता है और उससे पहले तक वह बहुत ही केयरलेस और बहुत ही लाइटली लेते हैं पढ़ाई को l और दूसरे इसका कारण यह भी है कि जो 12 तक है जो मां बाप है अपनी बच्चियों को पूरा ध्यान देते हैं, पूरा उनको पढ़ाई करने का, पूरा समाज के द्वारा भी उनको पूरा पढ़ने लिखने का पूरा हक मिलता है लेकिन जैसे ही वह बोर्ड सारी परीक्षा के बाद तो उनको हक छीन लिए जाते हैं और उनको घरों की चीजों में इन्वॉल्व कर लिया जाता है राधेर धेन पढ़ाई करना l तो वह यही वजह है कि यह लड़कियां जब तक पड़ती है तब तक वह अपना पूरा पूरा देती है और उसके बाद उनको हटा दिया जाता है उस पर पढाई के मोड़ से, रास्ते से इस वजह से उनका थोड़ा ध्यान हट जाता है l और लड़कों का रीजन यह है कि उनका और जो ट्वेल्थ तक बहुत ही केयरलेस रहते हैं वह और ट्वेल्थ के बाद उनका हाल थोड़ा अलग होता है l वह थोड़ा सा अपनी लाइफ के लिए, अपने कैरियर के लिए थोड़ा चिंतित हो जाते हैं l इसी वजह से और मेरे हिसाब से लड़कियां टॉप करती है और लड़के रह जाते हैं l

ladko ke muqable board pariksha mein ladkiyan adhik sankhya mein kyu type karti hai uske bahut sare kaaran hai l jiska pehla kaaran yeh bhi ke jo th class tak ki parikshaen hoti hai aur us par jo age hoti hai baccho ki us age tak jo ladkiyan hoti hain wah jyada jaldi machyaur ho jati hai aur unka intelligence level thoda hi hota hai l wahi ladko ka jo intelligence level hota hai jo machyauriti level hota board twelfth class chahiye yani board pariksha ke baad thoda sa hi hota hai aur usse pehle tak wah bahut hi careless chahiye aur bahut hi laitali lete hain padhai ko l aur dusre chahiye iska kaaran yeh bhi hai ki jo 12 tak hai jo maa baap hai apni bacchiyo ko pura dhyan dete hain pura unko padhai karne ka pura samaj ke dwara bhi unko pura padhne likhne ka pura haq milta hai lekin jaise hi wah board saree pariksha ke baad to unko haq chin chahiye liye jaate hain aur unko gharon ki chijon mein involve kar liya jata hai radher dhen padhai karna l to wah yahi wajah hai ki yeh ladkiyan jab tak padhti hai tab tak wah apna pura pura deti hai aur uske baad unko hata diya jata hai us par padhai ke mod se raste se is wajah se unka thoda dhyan hut jata hai l aur ladko ka reason yeh hai ki unka aur jo twelfth tak bahut hi careless chahiye rehte hain wah aur twelfth ke baad unka haal thoda alag hota hai l wah thoda sa apni life ke liye apne carrier ke liye thoda chintit ho jaate hain l isi wajah se aur mere hisab se ladkiyan top karti hai aur ladke rah jaate hain l

लड़कों के मुकाबले बोर्ड परीक्षा में लड़कियां अधिक संख्या में क्यों टाइप करती है उसके बहुत

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लड़की जो होता है वह बहुत इमोशनल होता है और साइक्लोजिकल ईस्ट्रो मत है तो लड़की लोगों का जो माइंड होता है बहुत अच्छी चलती है तो उल्लू पढ़ाई में बहुत आगे निकल जाता है क्योंकि वह लोग साइकोलॉजी के लिए बहुत आगे निकल गया तो जो लड़की पढ़ाई में बहुत ही स्ट्रांग होता है आजकल तो उसके कारण से होता है थैंक यू

ladki jo hota hai vaah bahut emotional hota hai aur saiklojikal istro mat hai toh ladki logo ka jo mind hota hai bahut achi chalti hai toh ullu padhai mein bahut aage nikal jata hai kyonki vaah log psychology ke liye bahut aage nikal gaya toh jo ladki padhai mein bahut hi strong hota hai aajkal toh uske karan se hota hai thank you

लड़की जो होता है वह बहुत इमोशनल होता है और साइक्लोजिकल ईस्ट्रो मत है तो लड़की लोगों का जो

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