दुर्खीम ने धर्म के समाजशास्त्र के बारे में क्या कहा है?...


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Shreekant

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दुर्खीम जो थे एमिल दुर्खीम उनका पूरा नाम एक शाम श्री सालासर से और धर्म और सोसायटी के बारे में उन्हें बहुत दिलचस्पी थी और उसके बारे में मैसेज क्यों बहुत लिखा भी है तो उनके सबसे धर्म जो है धर्म के उनके हिसाब से कोई इमेज नरी चीज नहीं है बहुत ही रियल चीज है और वह क्या चीज है वह जिस समाज में हम रहते हैं जो 1 लोगों की कम्युनिटी है तो उस कम्युनिटी का एक कलेक्टिव कलेक्टिव थॉट जो है या कलेक्टिव कॉन्शियस में वह धर्म है उनके अकॉर्डिंग तो इस धर्म में लोग जो है लोगों की जो बहुत सारे जो समाज में एक कम्युनिटी की जो 1 तरीके की मान्यताएं हैं जो जुड़ी हुई है एक दूसरे को मान्यताओं को कलेक्शन है और जो एक सेट ऑफ बिलीफ हेलो कि उसको जो है वह धर्म कहते हैं उसको धर्म कहते हैं

durkhim jo the emil durkhim unka pura naam ek shaam shri salasar se aur dharm aur sociaty ke BA re mein unhe BA hut dilchaspi thi aur uske BA re mein massage kyon BA hut likha bhi hai toh unke sabse dharm jo hai dharm ke unke hisab se koi image nari cheez nahi hai BA hut hi real cheez hai aur vaah kya cheez hai vaah jis samaj mein hum rehte hai jo 1 logo ki community hai toh us community ka ek collective collective thought jo hai ya collective kanshiyas mein vaah dharm hai unke according toh is dharm mein log jo hai logo ki jo BA hut saare jo samaj mein ek community ki jo 1 tarike ki manyatae hai jo judi hui hai ek dusre ko manyataon ko collection hai aur jo ek set of belief hello ki usko jo hai vaah dharm kehte hai usko dharm kehte hain

दुर्खीम जो थे एमिल दुर्खीम उनका पूरा नाम एक शाम श्री सालासर से और धर्म और सोसायटी के बारे

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Sharmistha

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दुर्खीम ने धर्म के समाजशास्त्र के बारे में कहा है कि एक धर्म पर भी पवित्र चीजों के सापेक्ष मान्यताओं और प्रथाओं की एक एकीकृत प्रणाली है और चीजों को अलग करना और निश्चित मान्यता और प्रथाओं को जो एक एकल नैतिक समुदाय में एकजुट होते हैं जिन्हें चर्चा कहा जाता है सच कहा जाता है और उन सभी का पालन करते हैं जो उनका पालन करते हैं

durkhim ne dharm ke samajshastra ke BA re mein kaha hai ki ek dharm par bhi pavitra chijon ke sapeksh manyataon aur prathaon ki ek ekikrit pranali hai aur chijon ko alag karna aur nishchit manyata aur prathaon ko jo ek ekal naitik samuday mein ekjut hote hai jinhen charcha kaha jata hai sach kaha jata hai aur un sabhi ka palan karte hai jo unka palan karte hain

दुर्खीम ने धर्म के समाजशास्त्र के बारे में कहा है कि एक धर्म पर भी पवित्र चीजों के सापेक्ष

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