यूपी: दलित महिलाओं को मंदिर में घुसने से रोकने का VIDEO हुआ वायरल - हमारे देश में जाति को लेकर ऐसा भेदभाव कब ख़त्म होगा?...


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Dr. Ashwani Kumar Singh

Chairman & Director at VEMS

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए यह मंदिर में घुसने रोकने का वीडियो यह सब देखकर स्टंट टाइप का भी खेल चल रहा है अब तो जो भी हमारे सवाल पूछ रहे हैं आप तो अमृतसर मंडी चले जाइए आप वैष्णो देवी चले जाइए मैं नादान चले जाइए आप तिरुपति चले कहीं आपने देखा है कुछ पूछ रहा है क्या दलित है क्या यह एक खास एंगिल और खास लोग एक्सट्रैक्शन ऑफ़ किसी किसी चीज को पाना चाहते हैं जो उनको राजनीति का पोलिटिकल लेवल पर नहीं मिलता है उनके लिए यह एक पागल है वह वह यह लिखकर नहीं तो हम लोग भी पूरे इंडिया में भूमि बहुत सारे जब हम पर जा रहे हैं अपने काम के सिलसिले में बहुत सारे सिंगार खोजे दिखाएगा कोई पूछ रहा हूं कि अब दलित है खास हो सकता है कि किसी लेवल पर कोई बात हुआ से परोसा जाता है रजिस्ट्रार हाई बनाया जाता है वह सब बना बनाया कि इस गलती को यही सजा है उसको देना चाहिए शुक्रिया

dekhiye yah mandir mein ghusne rokne ka video yah sab dekhkar stunt type ka bhi khel chal raha hai ab toh jo bhi hamare sawaal puch rahe hain aap toh amritsar mandi chale jaiye aap vaishno devi chale jaiye main nadan chale jaiye aap tirupati chale kahin aapne dekha hai kuch puch raha hai kya dalit hai kya yah ek khaas engil aur khaas log extraction of kisi kisi cheez ko paana chahte hain jo unko raajneeti ka political level par nahi milta hai unke liye yah ek Pagal hai vaah vaah yah likhkar nahi toh hum log bhi poore india mein bhoomi bahut saare jab hum par ja rahe hain apne kaam ke silsile mein bahut saare shingar khoje dikhaega koi puch raha hoon ki ab dalit hai khaas ho sakta hai ki kisi level par koi baat hua se parosa jata hai registrar high banaya jata hai vaah sab bana banaya ki is galti ko yahi saza hai usko dena chahiye shukriya

देखिए यह मंदिर में घुसने रोकने का वीडियो यह सब देखकर स्टंट टाइप का भी खेल चल रहा है अब तो

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Suraj Shaw

Entrepreneur, Career Counsellor

0:51

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो फ्रेंड्स देखिए भारत को जैसे एक शराब से मिला हुआ है जातिवाद का सरकार काफी कोशिश सरकार की काफी कोशिशों के बाद भी जो जातिवाद है वह खत्म होने का नाम हमें आजाद हुए 70 साल हो गए फिर भी हम जातिवाद की भावना से बाहर नहीं निकल पाए और क्योंकि यह इलीगल भी है हमारे कॉन्स्टिट्यूशन में भेज कोई लीगल बताया गया फिर भी लोग इसको मानने को तैयार पिकअप एक शर्मनाक बात है भारत के लिए भारत को सोसाइटी जिले को जल्दी से जल्दी खत्म हो जाना चाहिए और जिन लोगों ने ऐसी हरकत की है दलित महिलाओं को मंदिर में जाने से रोका तो तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए

hello friends dekhiye bharat ko jaise ek sharab se mila hua hai jaatiwad ka sarkar kaafi koshish sarkar ki kaafi koshishon ke baad bhi jo jaatiwad hai vaah khatam hone ka naam hamein azad hue 70 saal ho gaye phir bhi hum jaatiwad ki bhavna se bahar nahi nikal paye aur kyonki yah illegal bhi hai hamare Constitution mein bhej koi legal bataya gaya phir bhi log isko manne ko taiyar pickup ek sharmnaak baat hai bharat ke liye bharat ko society jile ko jaldi se jaldi khatam ho jana chahiye aur jin logo ne aisi harkat ki hai dalit mahilaon ko mandir mein jaane se roka toh turant karyavahi honi chahiye

हेलो फ्रेंड्स देखिए भारत को जैसे एक शराब से मिला हुआ है जातिवाद का सरकार काफी कोशिश सरकार

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Mohammad Bilal

Accountant

1:29
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देसी जैसा कि आप का सवाल है दलित महिलाओं को मंदिर में घुसने से रोकने का वीडियो ऑफिसर बता रहे हैं और उसके बाद आप कह रहे हैं कि हमारे देश में जाति को लेकर ऐसा भेदभाव कब खत्म होगा तो जैसे कि हम कह सकते हैं कि इस तरह की सोच और ख्याल हमें अपने दिलो दिमाग से निकालना ही होगा ऐसा नहीं है देखिए सब पूजा करने की आदत इबादत करने की जगह है तो यहां तो कोई दलित नहीं कोई बड़ी जात का नहीं यहां मंदिर में सब बराबर और उसमें ही तो हमारे राजनीतिक लोगों ने हमारी मानसिकता ऐसी बना दी है कुछ अच्छे नेताओं ने हमारी मानसिकता ऐसी बना दी है कि जिससे हम निकल नहीं पा रहे हैं अच्छा नहीं सोच पा रहे हैं आगे नहीं सोच पा रहे हैं अच्छे ख्याल नहीं रख पा रहे हैं ऐसा नहीं करना चाहिए और यह बिल्कुल सरासर गलत है हमें जिसको भी हम देखें ऐसा करते हो उसे हम उस पर हम तत्काल कार्रवाई करवाएं या कार्यवाही करें उसे रोके कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं क्यों जाने नहीं दे रहे हैं धन्यवाद

desi jaisa ki aap ka sawaal hai dalit mahilaon ko mandir mein ghusne se rokne ka video officer bata rahe hain aur uske baad aap keh rahe hain ki hamare desh mein jati ko lekar aisa bhedbhav kab khatam hoga toh jaise ki hum keh sakte hain ki is tarah ki soch aur khayal hamein apne dilo dimag se nikalna hi hoga aisa nahi hai dekhiye sab puja karne ki aadat ibadat karne ki jagah hai toh yahan toh koi dalit nahi koi badi jaat ka nahi yahan mandir mein sab barabar aur usme hi toh hamare raajnitik logo ne hamari mansikta aisi bana di hai kuch acche netaon ne hamari mansikta aisi bana di hai ki jisse hum nikal nahi paa rahe hain accha nahi soch paa rahe hain aage nahi soch paa rahe hain acche khayal nahi rakh paa rahe hain aisa nahi karna chahiye aur yah bilkul sarasar galat hai hamein jisko bhi hum dekhen aisa karte ho use hum us par hum tatkal karyawahi karvaaein ya karyavahi kare use roke ki aap aisa kyon kar rahe hain kyon jaane nahi de rahe hain dhanyavad

देसी जैसा कि आप का सवाल है दलित महिलाओं को मंदिर में घुसने से रोकने का वीडियो ऑफिसर बता रह

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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

4:09
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हो सकता है मेरी उत्तर से अधिकतर लोग सहमत ना हो बल्कि कुछ लोग नाखुश और नाराज हो सकते हैं पर जीवन पर किए गए अपने अनुसंधान और प्राचीन भारतीय जीवन में जो आनंद और सुख का स्तर था उसका क्या कारण था और आज तनाव का स्तर क्यों बढ़ गया है इस का तुलनात्मक अध्ययन करने पर मैंने पाया कि जीवन में ऊंच-नीच का भाव भगवान से आता है भगवान और भक्त भगवान ऊंचा है और भक्त नीचा है इसको अधिकांश भक्त पसंद नहीं करेंगे क्योंकि उनको भगवान को ऊंचा देखने में ही आनंद आता है वो आनंद लेते हैं भगवान ऊंचा है इसमें कोई शक ही नहीं है और भगवान हमेशा ही ऊंचा रहेंगे इसमें भी कोई शक नहीं है लेकिन भगवान और भक्त में इस हिसाब से कोई फर्क नहीं है कि भगवान तो अपनी भक्ति से भगवान बन गए हैं आप भक्तों को भक्ति करके भगवान बनना है यह कहना कि एक व्यक्ति कभी भगवान नहीं बन सकता या हम से भगवान के अंश हैं हम पूर्ण भगवान कभी नहीं बन सकते यह मिले इससे हंड्रेड परसेंट सहमत नहीं हूं ऊंच-नीच का भाव इस संसार में भगवान और भक्त के भाव से ही पैदा हुआ है और इसीलिए पुराने समय में राक्षस भी पाए जाते थे जो भगवान को भगवान नहीं मानते थे और उनकी प्रवृत्तियां गलत होती थी तो भगवान और राक्षस में युद्ध होता था नो डाउट भगवान राक्षसों की प्रवृत्ति अच्छी नहीं होती थी तो अंत में भगवान की ही जीत होती थी परंतु क्योंकि उनमें गलत भाव आ जाने से भगवान का सामना करते थे आज की तारीख में तो लोग बिल्कुल आलसी हो चुके हैं भगवान बनने की तो बात दूर आदमी एक इंसान भी नहीं है और इस स्थिति में वह भगवान के सेंडर करने में ही उसको पूरी तरह से मतलब जो कुछ भी गलत गलत बात आ जाए उसमें ही सरेंडर करने में उसको मजा आता है तो ऊंच-नीच का भाव भगवान से आया हुआ है जब तक हम अपने समाज को यह नहीं बताएंगे कि भगवान और इंसान में एक ही फर्क है कि भगवान जब जब जब जब इंसान सारे नियम धर्मों का कड़ाई से पालन करता है और ऐसा पालनपुर जन्म जन्मांतर तक करता रहता है तो एक एक समय ऐसा आता है जब कि वह पूर्ण सिद्धि को प्राप्त होता हो जाता है और वह स्वयं भगवान बन जाता है अर्थात मोक्ष का मुख्य मार्ग मुक्त को प्राप्त हो जाता है अर्थात जितना भगवान को आनंद मिलता है उतना ही उस व्यक्ति को आनंद मिलता है जो कि मोक्ष को प्राप्त हो चुका है जहां तक सवाल है कि ब्रह्मा विष्णु महेश कोई स्पेसिफिक भगवान है ऐसा नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश एक व्यक्ति में बैठी हुई तीन शक्तियां हैं जो व्यक्ति भगवान बन जाता है तो उनकी शक्तियों का अनुभव करता है तो वह अपने आप को ब्रह्मा विष्णु महेश से अलग ही नहीं मानता है तो हमें अपने समाज को शिक्षा देने हैं कि भगवान और भक्त ने सिर्फ कर्म का फल है कर्म फल का अंतर है अगर व्यक्ति बहुत शुभ कर्म करता जाए और शुभ कर्म कई जन्मो तक करता जाए तो वह भगवता को प्राप्त हो सकता है जब तक हम इस विसंगति को दूर नहीं करेंगे ऊंच-नीच का भाव बना रहेगा अब आज की ऊंची का भाव देखा जाए तो यह पूछने का भाव व्यक्ति दूसरे को नीचा दिखा कर अपने आप को ऊंचा सिद्ध करना चाहता है इसका मुख्य कारण अशिक्षा है जिसको जिसे जीवन मिल गया वह वैसा ही बन गया एक निजी जाति में पैदा हुए बच्चे को यदि एक बड़ी जाति में बचपन नहीं पहुंचा दिया जाए एक बड़ी ऊंची जाति में पैदा हुए बच्चों को दिल नीची जाति में पहुंचा दिया जाए तो वह वैसा ही बन जाएगा इसमें जन का कोई संबंध नहीं है इसका संबंध जीवन चर्या से है यह हमें समझना होगा वह जितने भी समझ लेंगे तो उसका भाव निकल जाएगा

ho sakta hai meri uttar se adhiktar log sahmat na ho balki kuch log nakhush aur naaraj ho sakte hain par jeevan par kiye gaye apne anusandhan aur prachin bharatiya jeevan mein jo anand aur sukh ka sthar tha uska kya karan tha aur aaj tanaav ka sthar kyon badh gaya hai is ka tulnaatmak adhyayan karne par maine paya ki jeevan mein unch neech ka bhav bhagwan se aata hai bhagwan aur bhakt bhagwan uncha hai aur bhakt nicha hai isko adhikaansh bhakt pasand nahi karenge kyonki unko bhagwan ko uncha dekhne mein hi anand aata hai vo anand lete hain bhagwan uncha hai isme koi shak hi nahi hai aur bhagwan hamesha hi uncha rahenge isme bhi koi shak nahi hai lekin bhagwan aur bhakt mein is hisab se koi fark nahi hai ki bhagwan toh apni bhakti se bhagwan ban gaye hain aap bhakton ko bhakti karke bhagwan bana hai yah kehna ki ek vyakti kabhi bhagwan nahi ban sakta ya hum se bhagwan ke ansh hain hum purn bhagwan kabhi nahi ban sakte yah mile isse hundred percent sahmat nahi hoon unch neech ka bhav is sansar mein bhagwan aur bhakt ke bhav se hi paida hua hai aur isliye purane samay mein rakshas bhi paye jaate the jo bhagwan ko bhagwan nahi maante the aur unki pravrittiyan galat hoti thi toh bhagwan aur rakshas mein yudh hota tha no doubt bhagwan rakshason ki pravritti achi nahi hoti thi toh ant mein bhagwan ki hi jeet hoti thi parantu kyonki unmen galat bhav aa jaane se bhagwan ka samana karte the aaj ki tarikh mein toh log bilkul aalsi ho chuke hain bhagwan banne ki toh baat dur aadmi ek insaan bhi nahi hai aur is sthiti mein vaah bhagwan ke sender karne mein hi usko puri tarah se matlab jo kuch bhi galat galat baat aa jaaye usme hi surrender karne mein usko maza aata hai toh unch neech ka bhav bhagwan se aaya hua hai jab tak hum apne samaj ko yah nahi batayenge ki bhagwan aur insaan mein ek hi fark hai ki bhagwan jab jab jab jab insaan saare niyam dharmon ka kadai se palan karta hai aur aisa palanpur janam janmantar tak karta rehta hai toh ek ek samay aisa aata hai jab ki vaah purn siddhi ko prapt hota ho jata hai aur vaah swayam bhagwan ban jata hai arthat moksha ka mukhya marg mukt ko prapt ho jata hai arthat jitna bhagwan ko anand milta hai utana hi us vyakti ko anand milta hai jo ki moksha ko prapt ho chuka hai jaha tak sawaal hai ki brahma vishnu mahesh koi specific bhagwan hai aisa nahi hai brahma vishnu mahesh ek vyakti mein baithi hui teen shaktiyan hain jo vyakti bhagwan ban jata hai toh unki shaktiyon ka anubhav karta hai toh vaah apne aap ko brahma vishnu mahesh se alag hi nahi manata hai toh hamein apne samaj ko shiksha dene hain ki bhagwan aur bhakt ne sirf karm ka fal hai karm fal ka antar hai agar vyakti bahut shubha karm karta jaaye aur shubha karm kai janmo tak karta jaaye toh vaah bhagvata ko prapt ho sakta hai jab tak hum is visangati ko dur nahi karenge unch neech ka bhav bana rahega ab aaj ki uchi ka bhav dekha jaaye toh yah poochne ka bhav vyakti dusre ko nicha dikha kar apne aap ko uncha siddh karna chahta hai iska mukhya karan asiksha hai jisko jise jeevan mil gaya vaah waisa hi ban gaya ek niji jati mein paida hue bacche ko yadi ek badi jati mein bachpan nahi pohcha diya jaaye ek badi uchi jati mein paida hue baccho ko dil nichi jati mein pohcha diya jaaye toh vaah waisa hi ban jaega isme jan ka koi sambandh nahi hai iska sambandh jeevan charya se hai yah hamein samajhna hoga vaah jitne bhi samajh lenge toh uska bhav nikal jaega

हो सकता है मेरी उत्तर से अधिकतर लोग सहमत ना हो बल्कि कुछ लोग नाखुश और नाराज हो सकते हैं पर

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:24
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यूपी दलित महिलाओं को मंदिर में घुसने से रोकने का वीडियो हुआ वायरल ऐसा भेदभाव जो है वह गणित से इंसानियत के विरुद्ध और उसकी कठोर निंदा करनी चाहिए ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य को एक होकर अगर शुद्ध को इस तरह से उनके अधिकारों से वंचित रेंज तो हम कौन सी सदी में जी रहे हैं इस काम को परिचय देना होगा अगर खाली और 19वीं शताब्दी में जो होता था तो वह हम अभी वही करेंगे दुनिया आगे जा रही है लोग आगे जा रहे हैं ना नई तरह की सब खुश हो रही हैं इतने हो रहे हैं और हमारी सोच वही अच्छा भी होगी सी शताब्दी के कर सकते हैं तो यूपी हो चाय दिया होता है गुजरात हो चाहे कोई भी प्रदेश को हमारे बात का लेकिन जब तक हम हमारी सोच नहीं बदलेंगे तब तक उसको हम नहीं रोक पाएंगे सोच को बदलने के लिए हमारी एजुकेशन सिस्टम और जो दूर कष्टों से जुड़ जाए हम उनको एक पहचान दे देते हैं कि बेहद शेड्यूल कास्ट देहाती दूरदर्शन तो उसे उनको एक तरह की अलग तरह की पहचान लो वह लोग चाहते हैं कि इस तरफ से मतलब है और यह गलत है चाहे सरकार के द्वारा उनको पहचान दी जाती है और दर्शन के द्वारा लोगों के द्वारा काम कोई भी छोटा नहीं होता काम काम होता है चारु हैंडसम मेरे शरीर में होते हैं छतरी कहो ब्राह्मण कहो हम पूजा करते हैं तो ब्राह्मण होते हैं हमारे घर की और हमारी मां बहनों की रक्षा करता हूं छत्रिय व्यापार करते हैं नौकरी करते हैं तो हम रहते हैं और हम अपने घर की सफाई करते हैं तो हम सुधारो हमारे शरीर में इसलिए किसी का प्रोफेशन अगर सफाई करने का है तो अपन के कारण हम किसी को इस तरह से मंदिर में जाने से नहीं रोक सकता क्योंकि वह भी हमारी तरह इंसान है वही हमारे भाई बहन है वही हमारे समाज के विशेष से हमारा अंग है वह उनको हम ज्यादा सलमान देना चाहिए उसकी जगह हम उनका हक छीन रहे हैं बिल्कुल गलत है और बिल्कुल भी नहीं बात है और इस तरह के वीडियो आने से भावनाएं लोगों की बढ़ती इसलिए ऐसे वीडियो दिखाकर और यह दूरियां बढ़ाने का काम हमें नहीं करना चाहिए और सामाजिक विषमता उत्पन्न होती है ऐसे वीडियो सहित वह गलत है और हमें यह सब बातों को बहुत मायने में नहीं मिलना चाहिए और बहुत इंपोर्टेंट नहीं देना चाहिए और जो भी हमारे साथ हैं जो भी काम करते हैं हमारे वह सब हमारे पार्ट ऑफ लाइफ है और उनको उचित सम्मान हम कम से कम हम अपने आप से सेव करें जब सब लोग यह सोचेंगे तो ऐसी घटनाएं दुर्घटनाएं ऐसी होंगी और आशा करता हूं कि आप सब लोग मेरी बात से सहमत हूं धन्यवाद

up dalit mahilaon ko mandir mein ghusne se rokne ka video hua viral aisa bhedbhav jo hai vaah ganit se insaniyat ke viruddh aur uski kathor ninda karni chahiye brahman kshatriya aur vaiishay ko ek hokar agar shudh ko is tarah se unke adhikaaro se vanchit range toh hum kaun si sadi mein ji rahe hain is kaam ko parichay dena hoga agar khaali aur vi shatabdi mein jo hota tha toh vaah hum abhi wahi karenge duniya aage ja rahi hai log aage ja rahe hain na nayi tarah ki sab khush ho rahi hain itne ho rahe hain aur hamari soch wahi accha bhi hogi si shatabdi ke kar sakte hain toh up ho chai diya hota hai gujarat ho chahen koi bhi pradesh ko hamare baat ka lekin jab tak hum hamari soch nahi badalenge tab tak usko hum nahi rok payenge soch ko badalne ke liye hamari education system aur jo dur kaston se jud jaaye hum unko ek pehchaan de dete hain ki behad schedule caste dehati doordarshan toh use unko ek tarah ki alag tarah ki pehchaan lo vaah log chahte hain ki is taraf se matlab hai aur yah galat hai chahen sarkar ke dwara unko pehchaan di jaati hai aur darshan ke dwara logo ke dwara kaam koi bhi chota nahi hota kaam kaam hota hai charu handsome mere sharir mein hote hain chatri kaho brahman kaho hum puja karte hain toh brahman hote hain hamare ghar ki aur hamari maa bahnon ki raksha karta hoon Kshatriya vyapar karte hain naukri karte hain toh hum rehte hain aur hum apne ghar ki safaai karte hain toh hum sudharo hamare sharir mein isliye kisi ka profession agar safaai karne ka hai toh apan ke karan hum kisi ko is tarah se mandir mein jaane se nahi rok sakta kyonki vaah bhi hamari tarah insaan hai wahi hamare bhai behen hai wahi hamare samaj ke vishesh se hamara ang hai vaah unko hum zyada salman dena chahiye uski jagah hum unka haq cheen rahe hain bilkul galat hai aur bilkul bhi nahi baat hai aur is tarah ke video aane se bhaavnaye logo ki badhti isliye aise video dikhakar aur yah duriyan badhane ka kaam hamein nahi karna chahiye aur samajik vishamata utpann hoti hai aise video sahit vaah galat hai aur hamein yah sab baaton ko bahut maayne mein nahi milna chahiye aur bahut important nahi dena chahiye aur jo bhi hamare saath hain jo bhi kaam karte hain hamare vaah sab hamare part of life hai aur unko uchit sammaan hum kam se kam hum apne aap se save kare jab sab log yah sochenge toh aisi ghatnaye durghatanaen aisi hongi aur asha karta hoon ki aap sab log meri baat se sahmat hoon dhanyavad

यूपी दलित महिलाओं को मंदिर में घुसने से रोकने का वीडियो हुआ वायरल ऐसा भेदभाव जो है वह गणि

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Pawan Kumar

Student Study

2:20
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है हमारे देश में जाति को लेकर ऐसा बेत्रों कब खत्म होगा तो आपने बताया कि यूपी दलित दलित महिलाओं के भेदभाव हो रही है खत्म तोड़ना होगा देश के अंदर जो भेदभाव है उन्हें खत्म करने का एक ही तरीका है गांधीजी का रास्ता अपनाओ और जाऊं कि मेरे साथ भेदभाव हुआ क्यों अपनी बात को इतना फैलाओ इतनी भीड़ इकट्ठा कर लो कि तुम्हारी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाए प्रधानमंत्री विवाह के पूछे के बाद क्या है और जिस दिन जिस दिन कोई व्यक्ति 8 गया सामने खड़ा हो गया क्या मुझे अन्याय चाहिए उसे दिनों से नहीं मिलता है ऐसे हम एक दूसरे को बोलते रहे या एक दूसरे के सारे खड़े रहे तो कभी नहीं मिलेगा और कभी जाति को लेकर ऐसा भेजो खत्म नहीं होगा इस भेदभाव को खत्म करने के लिए सर्वप्रथम अपने बातों पर पढ़ना आना चाहिए आत्म विश्वास होना चाहिए आदमी के यह भेदभाव हुआ क्यों मेरे साथ मेरे साथ ही क्यों हुआ जबकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है इसमें सभी धर्मों सभी जातियों को समान अधिकार प्राप्त है तो यह भी तय हुआ कि तू ऐसा करने के लिए एक नॉलेज नॉलेज बहुत बड़ी चीज होती है कुछ भी करने के लिए नॉलेजी हमारा देश होता है तुम नॉलेज होना चाहिए भक्ति में अगर नॉलेज है तो वह कुछ भी कर सकता है लेकिन नॉलेज नहीं है तो भी अगर कोई व्यक्ति सामने खड़ा हो जाता है कि मेरे साथ हुआ क्यों तू भी लगभग चांस है कि यह खत्म हो जाए तो किस चीज को भी खत्म या शुरुआत करने के लिए हमें पहले करनी पड़ती है तो हमारे देश में पहल की आवश्यकता है जिस दिन पहले भी उसी दिन खत्म हो जाएगा धन्यवाद

aapka prashna hai hamare desh mein jati ko lekar aisa betron kab khatam hoga toh aapne bataya ki up dalit dalit mahilaon ke bhedbhav ho rahi hai khatam todna hoga desh ke andar jo bhedbhav hai unhe khatam karne ka ek hi tarika hai gandhiji ka rasta apnao aur jaaun ki mere saath bhedbhav hua kyon apni baat ko itna failao itni bheed ikattha kar lo ki tumhari baat pradhanmantri tak pahunchaye pradhanmantri vivah ke pooche ke baad kya hai aur jis din jis din koi vyakti 8 gaya saamne khada ho gaya kya mujhe anyay chahiye use dino se nahi milta hai aise hum ek dusre ko bolte rahe ya ek dusre ke saare khade rahe toh kabhi nahi milega aur kabhi jati ko lekar aisa bhejo khatam nahi hoga is bhedbhav ko khatam karne ke liye sarvapratham apne baaton par padhna aana chahiye aatm vishwas hona chahiye aadmi ke yah bhedbhav hua kyon mere saath mere saath hi kyon hua jabki bharat ek dharmanirapeksh desh hai isme sabhi dharmon sabhi jaatiyo ko saman adhikaar prapt hai toh yah bhi tay hua ki tu aisa karne ke liye ek knowledge knowledge bahut badi cheez hoti hai kuch bhi karne ke liye naleji hamara desh hota hai tum knowledge hona chahiye bhakti mein agar knowledge hai toh vaah kuch bhi kar sakta hai lekin knowledge nahi hai toh bhi agar koi vyakti saamne khada ho jata hai ki mere saath hua kyon tu bhi lagbhag chance hai ki yah khatam ho jaaye toh kis cheez ko bhi khatam ya shuruat karne ke liye hamein pehle karni padti hai toh hamare desh mein pahal ki avashyakta hai jis din pehle bhi usi din khatam ho jaega dhanyavad

आपका प्रश्न है हमारे देश में जाति को लेकर ऐसा बेत्रों कब खत्म होगा तो आपने बताया कि यूपी द

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