उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान, बोले- 'CM पद पर हमारा हक और हमारी जिद भी' - आपकी राय?...


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Dr. P. N. Jha

Sr.Facuty, IAS Coaching & Founder of 'TOPPERS IAS by P.N.JHA' app.

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उद्धव ठाकरे का यह बयान की सीएम पद पर हमारा हक है और हमारी जीत भी आप मेरे ख्याल से यह बहुत उचित नहीं है और दुर्भाग्यपूर्ण भी है महाराष्ट्र के विकास को लेकर इस वक्त में बहुत महत्वपूर्ण केंद्र और राज्य के बीच में संबंध में अगर आप राजस्थान को देखते हैं तो राजस्थान में राजस्थान एक ऐसा पिछड़ा प्रदेश था जहां पर रेत के अलावा और कुछ क्षेत्रों में डेयरी के अलावा आपके पास में कुछ भी नहीं था सिवाय गंगानगर जिले के जहां पर की कृषि कार्य इंदिरा गांधी कैनाल के कारण संभव था वहां पर चुनाव में लोगों ने बड़े अच्छे तरीके से जनादेश का इस प्रकार का जनादेश बनाया कि केंद्र के जनादेश के साथ-साथ राज्य का जनादेश को एक समान बनाया जब कांग्रेस की सरकार होती थी में कांग्रेस की सरकार बीजेपी की सरकार के दिन में हुई थी राज्य में बीजेपी की सरकार और बड़े पैमाने पर राजस्थान में विकास हुआ पर्यटन का विकास हुआ रोडवेज का विकास हुआ अगर आप देखे तो उनकी सरके बहुत अच्छी क्वालिटी के सड़क बने बहुत सारे बिजनेस सबका विकास हुआ और कुल मिलाकर राज्य ने अपनी विकास की गति को तेज कि महाराष्ट्र के पिछले 5 सालों का जलवा वरमहालक्ष्मी वह लगातार कोई भी ऐसी स्कीम नहीं है जो महाराष्ट्र में पूरी गति के साथ लागू ना हो केंद्र का की कोई योजना नहीं है जो महाराष्ट्र के ना पहुंची हो महाराष्ट्र लाभान्वित और दुख होता रहा है महाराज को भी और भी लाभान्वित होने की जरूरत है नागपुर का जो क्षेत्र है विदर्भ का जो चित्र है वहां पर जल की बड़ी समस्या है यवतमाल का इलाका वहां गरीबी बहुत कुछ चित्रों में लक्षण की समस्याएं उधारी की सब्जी की नकल की समस्याएं भी व्यापक है और जाति प्रथा और जाति से उत्पन्न जो समस्याएं वह भी काफी व्यापक है पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की चीजें आई है किसानों की स्थिति भी ठीक नहीं किसानों में कुछ क्षेत्रों में कैप्टन में पूंजीवादी व्यवस्था है कि क्षेत्रों में किसानों की परवाह नहीं बड़े पैमाने पर किसान खुदकुशी भी कर रहे हैं इन तमाम चीजों को देखकर अभी कुछ समय के लिए बीजेपी का वहां होना समाज के लिए राज्य के विकास के लिए अच्छा है अगर इस वक्त में हम खींचतान की राजनीति करें और इसका सीधा प्रभाव हमारे राज्य के विकास पर पड़ेगा शिवसेना को यह समझना चाहिए कि शिवसेना जैसे बातें शिवसेना का जरूर प्रसिद्ध देना की उत्पत्ति है शिवसेना काजू विकास है हिंदूवादी विचारधारा के आधार पर विकास है 1993 में जब बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था स्वर्गीय बाला साहब ठाकरे में सबसे पहले कहा था कि पीपल्स करने वालों में सबसे पहले हमारे शिवसैनिक थे 19 की जिम्मेवारी ली थी आज राजनीति में उन्हें यह नहीं समझना चाहिए कि अगर उनके पास में कुछ 50 से अधिक विधायक धर्म के पास में है तो यह वह हिंदूवादी विचारधारा के विरोध में जाकर एनसीपी और निर्दलीय से या फिर कांग्रेस के साथ सहयोग कर कर वह सिर्फ सरकार बनाने के लिए अपनी विचारधारा को उलट-पुलट कर रख दें सरकार एक अलग चीज है विचारधारा एक अलग चीज है सरकारें आती-जाती रहती हैं विचारधाराएं बनी रहती है आजकल की सरकारें किरण को छोड़कर और कहीं नहीं लेकिन अगर आप 2 बार से देखते हैं तो कम्युनिस्ट क्यों जो विचारधारा आवाज हर स्टेट में हर डिस्टिक में कहीं न कहीं अपने अपने लोगों के बीच में बिल्कुल कार्यरत है और वह बनी रहेंगी सरकार सरकार से विचारधारा का कोई भी लेना देना नहीं है इस बात को बस अच्छी तरीके से उधव ठाकरे जी को समझना चाहिए जन्म जनादेश का सम्मान करना चाहिए बीजेपी के साथ पिछली बार बीजेपी ने सोचा शिवसेना से हटकर चुनाव लड़ा था और धर्म का सम्मान किया था बीजेपी के पास में अच्छे नंबर आए थे इस बार जहर से बातें 5 साल सत्ता चलाने के बाद लोगों की अपेक्षाएं बढ़ जाती है उस अपेक्षा में आप सभी की अपेक्षाओं को फूल नहीं करेंगे तो इस तरह के सरकार के खिलाफ कुछ जनमत का निर्माण होता है वह भी ऐसी स्थिति में बीजेपी पुणे एक बार एक सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई है और अपने गठबंधन की जो पूरी की पूरी जिम्मेवारी को संभालते हुए जितने उसके सीट दिए गए थे उस सीट पर चला लड़की आई है अगर हम देखे तो उसमें जो उनका बाउंसबैक है वह भी अच्छा है उनका जोरदार के थे उन्हें जो रिजल्ट किए हैं हमें जो टारगेट सेट किया है उसके परसेंटेज से देखें तो बीजेपी को कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है जनता उसके साथ है कहीं ना कहीं साथ है अभी बीच की जो समस्याएं हैं जो चारों तरफ जी हुई समस्याएं हैं इसमें कुछ सच्चाई भी और कुछ अफवाह भी है कि रोजगार का निर्माण नहीं हो पा रहा है उद्योग धंधे बीमार पड़ गए हैं कृषि व्यवस्था ठीक नहीं है किसानों किसान मजबूर है आत्महत्या के लिए इन सब तरह की चीजों को अब इनके बादल को छोड़ने होंगे सरकार को अच्छे कार्य करने होंगे आरक्षण की राजनीति से ऊपर उठना पड़ेगा जाति और संप्रदाय की राजनीति से ऊपर उठकर विकास को देवेंद्र फडणवीस को विकास को एक बार फिर से गति में लाना होगा और महाराष्ट्र को एक रोल मॉडल बनाना पड़ेगा पहले भी महाराष्ट्र में सर्वाधिक औद्योगिक निवेश हुआ करता था और महाराष्ट्र के सफलतम विकास विकास की में अपनी चरम ऊंचाई को छू चुका था आज पुनः उस महाराष्ट्र की आवश्यकता है तो इस वक्त में उद्धव जी का यह कहना बिल्कुल सही नहीं हो तब जी को भाजपा का साथ को मजबूत करना चाहिए हां जहां तक प्रश्न है अपने नेताओं की अपेक्षाओं पूरा करने के लिए उनको मंत्री पद मीणा मंत्री पद के की संख्या गिरवाई है और आशा है कि बीजेपी सुने प्राप्त भी हो जाएगा लेकिन इस प्रकार से आपस में और जनता के बीच में दादागिरी करके अपनी बातों को बनवाने से जनादेश का जनादेश का अपमान है और जनता से भी देख रही इस तरह की राजनीति हम नहीं कर सकते और अगर यह चीफ मिनिस्टर की बात करनी होती तो उसको प्रमुखता के साथ पहले उठाए जाने थी और मंच पर लाया जाना था और निर्णय करके तब आगे बढ़ना था आपने हल्की-हल्की उठाई और आप ने जब देखा कि हमारे पास में अब हम इस तरह की बातों को बोल सकने के बारे पास में समय आप लोग जोधपुर की राजनीति से बरतनी चाहिए नहीं तो बिहार जैसी राजनीति का विकास होगा जहां कभी कोई पार्टी कभी कोई पार्टी किसी दल कभी जनता दल जी और राजद के साथ जाती है कभी जनता दल यू बीजेपी के साथ कार्य करती है तो इनसे बचने के लिए दुर्भाग्य से बचने के लिए भाजपा का साथ शिवसेना को देना चाहिए अपनी भागीदारी को निभाना चाहिए और जनता जनता का कल्याण कर अपने अधिक से अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति को विकास की इच्छाशक्ति के साथ जुड़कर कार्य करना चाहिए यही एक विकल्प दूसरा कोई विकल्प नहीं और अपने जॉब शाखाएं उसको अधिक से अधिक विस्तार करनी चाहिए भविष्य में अगर कभी इस तरह का अवसर प्राप्त हो तो राज्य की बागडोर संभाली चाहिए उसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन इस वक्त में सब्र करना बहुत आवश्यक है जोधपुर की राजनीति से किसी को कोई फायदा नहीं और महाराष्ट्र फिर से एक बार चुनावी दलदल में फंस जाएगा

uddhav thakare ka yah bayan ki cm pad par hamara haq hai aur hamari jeet bhi aap mere khayal se yah bahut uchit nahi hai aur durbhagyapurn bhi hai maharashtra ke vikas ko lekar is waqt mein bahut mahatvapurna kendra aur rajya ke beech mein sambandh mein agar aap rajasthan ko dekhte hai toh rajasthan mein rajasthan ek aisa pichda pradesh tha jaha par ret ke alava aur kuch kshetro mein dairy ke alava aapke paas mein kuch bhi nahi tha shivaay ganganagar jile ke jaha par ki krishi karya indira gandhi Canal ke karan sambhav tha wahan par chunav mein logo ne bade acche tarike se janaadesh ka is prakar ka janaadesh banaya ki kendra ke janaadesh ke saath saath rajya ka janaadesh ko ek saman banaya jab congress ki sarkar hoti thi mein congress ki sarkar bjp ki sarkar ke din mein hui thi rajya mein bjp ki sarkar aur bade paimane par rajasthan mein vikas hua paryatan ka vikas hua roadways ka vikas hua agar aap dekhe toh unki sarake bahut achi quality ke sadak bane bahut saare business sabka vikas 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