दिल्ली में कम पटाखे चलाने के बाद भी इतना प्रदूषण क्यों है?...


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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

1 दिन के पटाखे चलाने से किसी शहर का प्रदूषण नहीं बदल जाता है लोगों की मानसिकता प्रदूषित हो चुकी है वह विशेष तौर पर जहां पर प्रदूषण वातावरण में बहुत ज्यादा है वहां पर आप दिमाग के स्तर पर प्रदूषण का स्तर समझ सकते हैं क्योंकि मनुष्य जो कल्पना करता है उसका 5:10 पर्सेंट ही दिखा पाता है तो आप समझ लीजिए कि दिल्ली में लोगों के दिमाग में प्रदूषण का स्तर क्या होगा तो जो भी मन में हैं जो भी दिल में चल रहा है व्यक्ति वही दिखा सकता है और इसके बियोंड कुछ दिखाने की और किसी की कोई चिंता नहीं है तो जब तक दिल्लीवासी अपने अंदर का प्रदूषण नहीं निकालेंगे अपने अंदर की अज्ञान नासमझी और मतलबी पन को नहीं निकालेंगे तब तक दिल्ली के यही हाल रहेंगे और अगर फिर भी नहीं तो फिर हालत और बेकार होनी है और सारे के सारे लोग पशुओं की तरह रगड़ रगड़ कर अपनी जिंदगी जिएंगे और मृत्यु भी वैसे ही होगी

1 din ke patakhe chalane se kisi shehar ka pradushan nahi badal jata hai logo ki mansikta pradushit ho chuki hai vaah vishesh taur par jaha par pradushan vatavaran mein bahut zyada hai wahan par aap dimag ke sthar par pradushan ka sthar samajh sakte hain kyonki manushya jo kalpana karta hai uska 5 10 percent hi dikha pata hai toh aap samajh lijiye ki delhi mein logo ke dimag mein pradushan ka sthar kya hoga toh jo bhi man mein hain jo bhi dil mein chal raha hai vyakti wahi dikha sakta hai aur iske biyond kuch dikhane ki aur kisi ki koi chinta nahi hai toh jab tak dillivasi apne andar ka pradushan nahi nikalenge apne andar ki agyan nasamajhi aur matlabi pan ko nahi nikalenge tab tak delhi ke yahi haal rahenge aur agar phir bhi nahi toh phir halat aur bekar honi hai aur saare ke saare log pashuo ki tarah ragad ragad kar apni zindagi jeeenge aur mrityu bhi waise hi hogi

1 दिन के पटाखे चलाने से किसी शहर का प्रदूषण नहीं बदल जाता है लोगों की मानसिकता प्रदूषित हो

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दिल्ली भारत की राजधानी है लेकिन वहां पटाखे चला जाता है

delhi bharat ki rajdhani hai lekin wahan patakhe chala jata hai

दिल्ली भारत की राजधानी है लेकिन वहां पटाखे चला जाता है

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर हम बात करें दिल्ली की तो वहां का जो वातावरण है पहले से बहुत काफी ज्यादा प्रदूषित था फिर धीरे-धीरे उसका प्रदूषण लेवल कम पर आया था फिर अचानक से जब दिवाली आएंगे तो वहां पर जो है वह काफी ज्यादा हो चुकी है और जिस वजह से वहां का प्रदूषण लेवल काफी ऊपर पहुंच चुका है तो ऐसा नहीं कि कम पटाखे जलाया ज्यादा पटाखे जला ली क्या होता है पटाखे की नहीं होती इंडस्ट्री से निकलने वाले भी हो सकते हैं गाड़ियों से निकलने वाले विधु में हो सकते हैं मिलते रहते हैं और हाथ जोड़ते हैं या फिर लेते हैं तो से कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा रिलीज होता है जिससे वातावरण में जाते हैं

agar hum baat kare delhi ki toh wahan ka jo vatavaran hai pehle se bahut kaafi zyada pradushit tha phir dhire dhire uska pradushan level kam par aaya tha phir achanak se jab diwali aayenge toh wahan par jo hai vaah kaafi zyada ho chuki hai aur jis wajah se wahan ka pradushan level kaafi upar pohch chuka hai toh aisa nahi ki kam patakhe jalaya zyada patakhe jala li kya hota hai patakhe ki nahi hoti industry se nikalne waale bhi ho sakte hain gadiyon se nikalne waale vidhu mein ho sakte hain milte rehte hain aur hath jodte hain ya phir lete hain toh se carbon dioxide zyada release hota hai jisse vatavaran mein jaate hain

अगर हम बात करें दिल्ली की तो वहां का जो वातावरण है पहले से बहुत काफी ज्यादा प्रदूषित था फि

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