आपने आध्यात्मिक रूप से कैसे जागृत हुए? आध्यात्मिक ब्लॉगर बनने से पहले आपका जीवन कैसा था?...


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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

3:43
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक डॉक्टर होने के कारण जब मेरा सामने ऐसी ऐसी बीमारियों से हुआ जिनसे मरीज को बचा पाना मुश्किल था और चमेली सामने ही मेरी मरीजों की मृत्यु हो गई जिसमें कुछ यंग मरीज भी थे तो मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया और उस परेशानी के लिए मैं अपने डॉ अपने सीनियर डॉक्टर साक्षात टीचर से ही मिला वह मेरी कोई सहायता नहीं कर पाए इस भारी दिल से मैंने अपनी मेडिकल की प्रैक्टिस शुरू करें और बहुत ईमानदारी से शुरू करें जिससे कि उस मेडिकल प्रैक्टिस के प्रैक्टिस के दौरान ही मेरे साथ कुछ ऐसी घटनाएं घट गई जिससे मुझे पर आर्थिक शक्तियों का एहसास हुआ क्योंकि बचपन में ही में युवक की शक्ति का अनुभव कर चुका था तो फिर मैं बिहार स्कूल ऑफ योगा मुंगेर गया और वहां की जीवन चर्या से इतना प्रभावित हो गया और मैं यह भी समझ गया कि योग एक चिकित्सा का बहुत अच्छा साधन है तो फिर 9595 में योग में शिफ्ट हो गया इस तरह से मैं साडे 4 साल तक लगातार योग सेंटर में रहा परंतु फिर भी मेरे मन को शांति नहीं मिली क्योंकि मुझे धर्म का वैज्ञानिक रूप समझ में नहीं आया लेकिन मैं अपने प्रयास में लगातार लगा रहा और पूरी इमानदारी से लगा रहा वह मैंने संकल्प ले लिया कि मैं इसको समझ कर ही दम लूंगा मैं बचपन से ही भगवान का बहुत बड़ा भक्त रहा हूं परंतु भगवान से लाखों बार मेहनत करने के बाद उसे प्रार्थना करने के बाद भी जब मुझे मृत्यु जान का कोई कारण समझ में नहीं आया तो फिर मैं खोज में लग गया और विभिन्न मैंने धार्मिक पुस्तकों पुस्तकों का अपने गुरुओं की सहायता से समझा और अध्ययन किया इसी दौरान मेरे सामने एक पुस्तक मेरे गुरु जयंत बढ़ने की कर्म सिद्धांत हाई और जैसे ही मैंने उस पुस्तक को पढ़ा और लगातार उस पुस्तक का में अध्ययन करता रहा और अचानक एक दिन उस पुस्तक का भाव मुझे समझ में आ गया यह बातें सन 2000 की और उस दिन से मेरी जीवनी सच्ची आध्यात्मिकता का जन्म हुआ मैं जीवन में अपने स्वयं का और भगवान के महत्व को समझ पाया यह पाया कि जो कुछ करना है हमें ही करना है भगवान हमें सिर्फ मार्गदर्शन करता है वह भी कोई भगवान आकर मार्गदर्शन नहीं करता है गीता रामायण और आगम के रूप में उसने मार्गदर्शन दिया हुआ है उसे हमें पढ़ना है समझना है और उसके अनुसार आगे बढ़ना है कोई भी भगवान मेरे अनुसार जो मेरा अनुभव है कोई भगवान आपको स्वयं आकर कोई मार्गदर्शन नहीं करता है आपको अपने मार्ग के लिए खुद ही बहुत प्रयास करने पड़ते हैं अच्छे-अच्छे गुरु संतों शिक्षकों से अच्छे अच्छे लोगों से मिलना होता है फिर हम हमें जीवन समझ में आता है वह मैं सौभाग्यशाली हूं कि मेरी जीवन में बहुत अच्छे अच्छे लोग आए इसे में अध्यापकों को समझ पाया और उसका अप पूरा लाभ मुझे मिल रहा है और मैं बहुत शांत और आनंदित हूं

ek doctor hone ke karan jab mera saamne aisi aisi bimariyon se hua jinse marij ko bacha paana mushkil tha aur chameli saamne hi meri marizon ki mrityu ho gayi jisme kuch young marij bhi the toh main bahut zyada pareshan ho gaya aur us pareshani ke liye main apne Dr. apne senior doctor sakshat teacher se hi mila vaah meri koi sahayta nahi kar paye is bhari dil se maine apni medical ki practice shuru kare aur bahut imaandaari se shuru kare jisse ki us medical practice ke practice ke dauran hi mere saath kuch aisi ghatnaye ghat gayi jisse mujhe par aarthik shaktiyon ka ehsaas hua kyonki bachpan mein hi mein yuvak ki shakti ka anubhav kar chuka tha toh phir main bihar school of yoga munger gaya aur wahan ki jeevan charya se itna prabhavit ho gaya aur main yah bhi samajh gaya ki yog ek chikitsa ka bahut accha sadhan hai toh phir 9595 mein yog mein shift ho gaya is tarah se main saade 4 saal tak lagatar yog center mein raha parantu phir bhi mere man ko shanti nahi mili kyonki mujhe dharm ka vaigyanik roop samajh mein nahi aaya lekin main apne prayas mein lagatar laga raha aur puri imaandari se laga raha vaah maine sankalp le liya ki main isko samajh kar hi dum lunga main bachpan se hi bhagwan ka bahut bada bhakt raha hoon parantu bhagwan se laakhon baar mehnat karne ke baad use prarthna karne ke baad bhi jab mujhe mrityu jaan ka koi karan samajh mein nahi aaya toh phir main khoj mein lag gaya aur vibhinn maine dharmik pustakon pustakon ka apne guruon ki sahayta se samjha aur adhyayan kiya isi dauran mere saamne ek pustak mere guru jayant badhne ki karm siddhant high aur jaise hi maine us pustak ko padha aur lagatar us pustak ka mein adhyayan karta raha aur achanak ek din us pustak ka bhav mujhe samajh mein aa gaya yah batein san 2000 ki aur us din se meri jeevni sachi aadhyatmikta ka janam hua main jeevan mein apne swayam ka aur bhagwan ke mahatva ko samajh paya yah paya ki jo kuch karna hai hamein hi karna hai bhagwan hamein sirf margdarshan karta hai vaah bhi koi bhagwan aakar margdarshan nahi karta hai geeta ramayana aur aagam ke roop mein usne margdarshan diya hua hai use hamein padhna hai samajhna hai aur uske anusaar aage badhana hai koi bhi bhagwan mere anusaar jo mera anubhav hai koi bhagwan aapko swayam aakar koi margdarshan nahi karta hai aapko apne marg ke liye khud hi bahut prayas karne padte hain acche acche guru santo shikshakon se acche acche logo se milna hota hai phir hum hamein jeevan samajh mein aata hai vaah main saubhagyashali hoon ki meri jeevan mein bahut acche acche log aaye ise mein adhyapakon ko samajh paya aur uska up pura labh mujhe mil raha hai aur main bahut shaant aur anandit hoon

एक डॉक्टर होने के कारण जब मेरा सामने ऐसी ऐसी बीमारियों से हुआ जिनसे मरीज को बचा पाना मुश्क

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं अपने आप को आध्यात्मिक रूप से बहुत आगे नहीं मानता अध्यात्म से मेरा कोई बहुत ज्यादा सांप का नहीं पड़ता मैं केवल व्यावहारिक सोच रखता हूं और सकारात्मक बने रहने की कोशिश करता हूं

main apne aap ko aadhyatmik roop se bahut aage nahi manata adhyaatm se mera koi bahut zyada saap ka nahi padta main keval vyavaharik soch rakhta hoon aur sakaratmak bane rehne ki koshish karta hoon

मैं अपने आप को आध्यात्मिक रूप से बहुत आगे नहीं मानता अध्यात्म से मेरा कोई बहुत ज्यादा सांप

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

3:06
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने आधा-आधा क्लिक करूं से कैसे जागृत किए आधा तमिक ब्लॉगर बनने से पहले आपका जीवन कैसा प्रत्येक मनुष्य सामान अवस्था में रहता है किसकी पूर्व जन्म में जो यात्रा की थी वह व्यक्ति उस मार्गो को उतना अध्ययन के बाद में आगे बढ़ा करता है क्योंकि इस बार के लिए जागृत होना आवश्यक है इसलिए हाथ में आधार में ग्रुप से जागृत होने के लिए व्यक्ति प्रश्न करता है और जब वह प्रश्न करता है तो उसको कोई ना कोई सद्गुरु संग्रहण सन्मार्ग मिल जाया करता है जिससे कि वह व्यक्ति आज हम वही आत्मा आध्यात्मिक रूप से जाग्रत हो जाता है और ऐसा भी देखा गया है पूर्वजन्म में जो आध्यात्मिक जीव ने जिस जितनी यात्रा की थी उसके बाद की यात्रा उसके दूसरे जन्म में से में प्रारंभ हो जाती है इसलिए व्यक्ति को जब ईश्वर की कृपा की अद्भुत होती है तब उस वह व्यक्ति आधारित रूप के मार्ग पर चलता है और अपने को जागृत करता है इसमें यह प्रभु का नाम प्रभु का रूप और प्रभु का गुण और प्रभु के धाम मैं जब भी जब जब जीव विचरण करता है प्रभु का स्मरण करता है आध्यात्मिकता की उस समय धीरे-धीरे शनि गति से जागृति होती है उस उपरांत कोई सद्गुरु उसको रास्ता दिखाता है या कोई सदा ग्रंथ उसको रास्ता दिखाता है जिससे कि व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागृत हो जाता है और अपने जीवन को बेहतर बनाता है यह जन्म और मरण से लेकर कि यह जीव की आध्यात्मिक यात्रा है एक ना एक दिन जीव को आधारित रूप से जागृत होना पड़ेगा और जागृत उपरांत वह अपनी अंतिम यात्रा प्रभु के मिलन की यारी सर की समिति की या विषय के नजदीकी प्राप्त कर सकेगा ऐसा मेरा मानना है यह मेरे विचार हैं धन्यवाद

aapne aadha aadha click karu se kaise jagrit kiye aadha tamik balgar banne se pehle aapka jeevan kaisa pratyek manushya saamaan avastha mein rehta hai kiski purv janam mein jo yatra ki thi vaah vyakti us margo ko utana adhyayan ke baad mein aage badha karta hai kyonki is baar ke liye jagrit hona aavashyak hai isliye hath mein aadhar mein group se jagrit hone ke liye vyakti prashna karta hai aur jab vaah prashna karta hai toh usko koi na koi sadguru sangrahan sanmarg mil jaya karta hai jisse ki vaah vyakti aaj hum wahi aatma aadhyatmik roop se jagrat ho jata hai aur aisa bhi dekha gaya hai purvajanm mein jo aadhyatmik jeev ne jis jitni yatra ki thi uske baad ki yatra uske dusre janam mein se mein prarambh ho jaati hai isliye vyakti ko jab ishwar ki kripa ki adbhut hoti hai tab us vaah vyakti aadharit roop ke marg par chalta hai aur apne ko jagrit karta hai isme yah prabhu ka naam prabhu ka roop aur prabhu ka gun aur prabhu ke dhaam main jab bhi jab jab jeev vichran karta hai prabhu ka smaran karta hai aadhyatmikta ki us samay dhire dhire shani gati se jagriti hoti hai us uprant koi sadguru usko rasta dikhaata hai ya koi sada granth usko rasta dikhaata hai jisse ki vyakti aadhyatmik roop se jagrit ho jata hai aur apne jeevan ko behtar banata hai yah janam aur maran se lekar ki yah jeev ki aadhyatmik yatra hai ek na ek din jeev ko aadharit roop se jagrit hona padega aur jagrit uprant vaah apni antim yatra prabhu ke milan ki yaari sir ki samiti ki ya vishay ke najdiki prapt kar sakega aisa mera manana hai yah mere vichar hain dhanyavad

आपने आधा-आधा क्लिक करूं से कैसे जागृत किए आधा तमिक ब्लॉगर बनने से पहले आपका जीवन कैसा प्रत

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

1:39
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बात अच्छी सवाल है कि आध्यात्मिक से मैं कैसे जुड़ी आध्यात्मिक के पहले मेरा जीवन कैसा था आध्यात्मिक के बगैर पहले मेरा जीवन 10 की तरह था आज आध्यात्मिक के बिना में सैंया जीरो की तरह थी मैं अपने जीवन को सरल और सफल बनाने के लिए आध्यात्मिक से जुड़ी तो मुझे न्याय करने में फैसला करने में निर्णय लेने में चेहरा भी दिक्कत नहीं हुई परमात्मा की ऐसी शक्ति है जो हमें टचिंग करते रहते जिस तरह हम टेलीफोन से बात करते हैं एक दूसरे से बात करते हैं देश विदेश में रहते हुए इस तरह परमात्मा हमें आध्यात्मिक द्वारा एक शक्ति प्रदान करती है जो है मन की कनेक्शन मन की शक्ति और शक्ति से ही हमारे अंदर जागृत होती है तो अपने जीवन को हम सरल स्वभाव आ सकते हैं और आज आपने के बगैर हमारे जीवन शून्य का मतलब यह था कि कोई भी कार्य करने से हम हिचकी चाहते थे किसी ना किसी से राय लेते थे हमारे अपने ऊपर विश्वास नहीं होता कि यह काम जो कर रहे हैं वह सही है या गलत है पर इससे जुड़ने के बाद हमारा जीवन एकदम सरल हो क्या इससे आप भी जुड़िए तो आपकी जीवन भी सरल क्योंकि इसमें जुड़ने के लिए जानकारी लेने के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की जुड़ने के लिए आपको गूगल पर चाहिए डब्लू डब्लू apk.com आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी

baat achi sawaal hai ki aadhyatmik se main kaise judi aadhyatmik ke pehle mera jeevan kaisa tha aadhyatmik ke bagair pehle mera jeevan 10 ki tarah tha aaj aadhyatmik ke bina me sainya zero ki tarah thi main apne jeevan ko saral aur safal banane ke liye aadhyatmik se judi toh mujhe nyay karne me faisla karne me nirnay lene me chehra bhi dikkat nahi hui paramatma ki aisi shakti hai jo hamein touching karte rehte jis tarah hum telephone se baat karte hain ek dusre se baat karte hain desh videsh me rehte hue is tarah paramatma hamein aadhyatmik dwara ek shakti pradan karti hai jo hai man ki connection man ki shakti aur shakti se hi hamare andar jagrit hoti hai toh apne jeevan ko hum saral swabhav aa sakte hain aur aaj aapne ke bagair hamare jeevan shunya ka matlab yah tha ki koi bhi karya karne se hum hichki chahte the kisi na kisi se rai lete the hamare apne upar vishwas nahi hota ki yah kaam jo kar rahe hain vaah sahi hai ya galat hai par isse judne ke baad hamara jeevan ekdam saral ho kya isse aap bhi judiye toh aapki jeevan bhi saral kyonki isme judne ke liye jaankari lene ke liye prajapita brahmakumari ishwariya vishwavidyalaya ki judne ke liye aapko google par chahiye w w apk com aapko puri jaankari mil jayegi

बात अच्छी सवाल है कि आध्यात्मिक से मैं कैसे जुड़ी आध्यात्मिक के पहले मेरा जीवन कैसा था आध्

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