IIT के 20 साल के छात्र ने डिप्रेशन में आकर किया सुसाइड, क्या हमारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डाल रहा है?...


user

Dr. Ashutosh

Motivator, Counselor

4:03
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कभी-कभी मुझे शेर होता है कि शिक्षा साधन है या साथ दे हम में से अधिकतर लोगों ने पेरेंट्स ने स्टूडेंट्स ने समाज ने शिक्षा को मानो साध्य बना लिया है जीवन का और शिक्षा भी पूरी नहीं किताबी शिक्षा को नंबर लाने को सबसे बड़ा उद्देश्य बना लिया जीवन का वो कहते हैं ना कि जिंदगी जिंदगी भर देखा कि मरने की राह मर के भी अब देखिए दिखलाएं क्या अरे भैया अल्टीमेटली यह केवल एक साधन है शिक्षा जो बेहतर नागरिक बनाने का जरिया है अल्टीमेटली साधे है क्या बेहतर तरीके से अपना जीवन यापन कर सकते हैं क्या समाज को कुछ दे सकते हैं क्या देश को कुछ भेज सकते हैं क्या अपने साथ-साथ अपने परिवार को खड़ा कर सकते हैं क्या स्वाबलंबी बना सकते हैं क्या बेहतर तरीके से लोगों से संवाद कर सकते हैं क्या और बेहतर तरीके से जिंदगी की विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला कर सकते हैं क्या केवल इस चीज के लिए शिक्षा है 65 परसेंट मार्क्स आ गए तो बर्बाद हो गए हम सुसाइड कर लेंगे जैसे मेरे पास कहीं कैसे जाते हैं 95% मार्क्स लाना क्या हंड्रेड परसेंट हमारा टारगेट होना चाहिए जीवन का कुछ समय के लिए यह चीजें होती हैं उसके बाद आपके किसी काम नहीं आते यह नंबर लेकिन उसके बावजूद भी लोग शिक्षा को सबसे बड़ा उद्देश्य मान लेते और शिक्षा भी हमारे पास जो शिक्षा है वह भी आधी अधूरी गिरती पड़ती शिक्षा है जिसमें आईआईटी के छात्र ने प्रैक्टिकल पर ध्यान दिया होता या इनोवेशन पर ध्यान दिया होता क्रिएटिविटी पर ध्यान देता कोई ड्रोन बना रहा होता कोई रोबोट बना रहा होता वह तो कभी सोचा ही नहीं करता क्योंकि उसको नशा होता कि मैं कैसे-कैसे उस ड्रोन के अंदर रोबोट के अंदर नई चीजें नई इजाद कर सकूं लेकिन हमने आधी पड़ती जो अपनी शिक्षा है उसको नंबरों तक सीमित कर दिया और वही दबाव आगे ट्रांसफर कर दिया पैरंट्स ने भी किया 97% आए तो मेरा बहुत अब बहुत अच्छा है और फेसबुक में मार्कशीट लोगों के बाद सामने दिखाते कि देखो मेरे गर्व है कि मेरे बच्चे ने कितने प्रतिशत मार्क्स लिए पत्र पत्रिकाएं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल मेरिट होल्डर की गुणगान करते तपते आश्रम कौन से जीवन में जी रहे हैं कौन से भारत में जी रहे हैं जहां पर 65% मार्क्स आने के बाद भी उनकी उपयोगिता होनी चाहिए जिन्होंने कुछ क्रिएटिविटी की है कोई वॉशिंग मशीन बना दी कुछ समाज के लिए मशीन बना दी कोई चीज बना दिया कोई उपकरण बना दिया जिससे कि लोगों की जीवन और आसान हो सके मेरे माय नेम ऑफ शिक्षा जिसको बेचा जा सके तो इकोनॉमिक्स में योगदान दे भारत की वह शिक्षा और वह शिक्षा हासिल करने के लिए जो पढ़ना पड़े उसमें पैसे खाते हैं 70 आते हैं 80 आते हैं उससे कोई फर्क नहीं आपको वह बात समझ में आ गई या नहीं आ गई उसका उपयोग आप जीवन यापन में कर सकते हैं कि नहीं कर सकते यह ज्यादा महत्वपूर्ण जब यह बातें समझ में आ जाएगी तो फिर समाज को और विशिष्ट रूप से पेरेंट्स कोई बात जब ध्यान में आएगी तो उसके बाद यह सब समस्या धीरे-धीरे सॉल्व होगी व्यक्तियों का आदर सम्मान करना पड़ेगा जिनके पास हुनर है क्वेश्चन है ना कि केवल उनका जिनके पास कलम के साथ-साथ 97% मार्क्स लाने की क्षमता है यह हमको अपनी मानसिकता माइंडसेट बदलना होगा तब स्थिति या सुधरेंगे

kabhi kabhi mujhe sher hota hai ki shiksha sadhan hai ya saath de hum me se adhiktar logo ne parents ne students ne samaj ne shiksha ko maano saadhy bana liya hai jeevan ka aur shiksha bhi puri nahi kitabi shiksha ko number lane ko sabse bada uddeshya bana liya jeevan ka vo kehte hain na ki zindagi zindagi bhar dekha ki marne ki raah mar ke bhi ab dekhiye dikhlaen kya are bhaiya altimetli yah keval ek sadhan hai shiksha jo behtar nagarik banane ka zariya hai altimetli saadhe hai kya behtar tarike se apna jeevan yaapan kar sakte hain kya samaj ko kuch de sakte hain kya desh ko kuch bhej sakte hain kya apne saath saath apne parivar ko khada kar sakte hain kya swabalambi bana sakte hain kya behtar tarike se logo se samvaad kar sakte hain kya aur behtar tarike se zindagi ki viprit paristhitiyon ka muqabla kar sakte hain kya keval is cheez ke liye shiksha hai 65 percent marks aa gaye toh barbad ho gaye hum suicide kar lenge jaise mere paas kahin kaise jaate hain 95 marks lana kya hundred percent hamara target hona chahiye jeevan ka kuch samay ke liye yah cheezen hoti hain uske baad aapke kisi kaam nahi aate yah number lekin uske bawajud bhi log shiksha ko sabse bada uddeshya maan lete aur shiksha bhi hamare paas jo shiksha hai vaah bhi aadhi adhuri girti padti shiksha hai jisme IIT ke chatra ne practical par dhyan diya hota ya innovation par dhyan diya hota creativity par dhyan deta koi drone bana raha hota koi robot bana raha hota vaah toh kabhi socha hi nahi karta kyonki usko nasha hota ki main kaise kaise us drone ke andar robot ke andar nayi cheezen nayi ijad kar sakun lekin humne aadhi padti jo apni shiksha hai usko numberon tak simit kar diya aur wahi dabaav aage transfer kar diya Parents ne bhi kiya 97 aaye toh mera bahut ab bahut accha hai aur facebook me marksheet logo ke baad saamne dikhate ki dekho mere garv hai ki mere bacche ne kitne pratishat marks liye patra patrikayen electronic media channel merit holder ki gunagan karte tapte ashram kaun se jeevan me ji rahe hain kaun se bharat me ji rahe hain jaha par 65 marks aane ke baad bhi unki upayogita honi chahiye jinhone kuch creativity ki hai koi washing machine bana di kuch samaj ke liye machine bana di koi cheez bana diya koi upkaran bana diya jisse ki logo ki jeevan aur aasaan ho sake mere my name of shiksha jisko becha ja sake toh economics me yogdan de bharat ki vaah shiksha aur vaah shiksha hasil karne ke liye jo padhna pade usme paise khate hain 70 aate hain 80 aate hain usse koi fark nahi aapko vaah baat samajh me aa gayi ya nahi aa gayi uska upyog aap jeevan yaapan me kar sakte hain ki nahi kar sakte yah zyada mahatvapurna jab yah batein samajh me aa jayegi toh phir samaj ko aur vishisht roop se parents koi baat jab dhyan me aayegi toh uske baad yah sab samasya dhire dhire solve hogi vyaktiyon ka aadar sammaan karna padega jinke paas hunar hai question hai na ki keval unka jinke paas kalam ke saath saath 97 marks lane ki kshamta hai yah hamko apni mansikta mindset badalna hoga tab sthiti ya sudhrenge

कभी-कभी मुझे शेर होता है कि शिक्षा साधन है या साथ दे हम में से अधिकतर लोगों ने पेरेंट्स न

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  85
KooApp_icon
WhatsApp_icon
18 जवाब
no img
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!