IIT के 20 साल के छात्र ने डिप्रेशन में आकर किया सुसाइड, क्या हमारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डाल रहा है?...


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Dr. Ashutosh

Motivator, Counselor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कभी-कभी मुझे शेर होता है कि शिक्षा साधन है या साथ दे हम में से अधिकतर लोगों ने पेरेंट्स ने स्टूडेंट्स ने समाज ने शिक्षा को मानो साध्य बना लिया है जीवन का और शिक्षा भी पूरी नहीं किताबी शिक्षा को नंबर लाने को सबसे बड़ा उद्देश्य बना लिया जीवन का वो कहते हैं ना कि जिंदगी जिंदगी भर देखा कि मरने की राह मर के भी अब देखिए दिखलाएं क्या अरे भैया अल्टीमेटली यह केवल एक साधन है शिक्षा जो बेहतर नागरिक बनाने का जरिया है अल्टीमेटली साधे है क्या बेहतर तरीके से अपना जीवन यापन कर सकते हैं क्या समाज को कुछ दे सकते हैं क्या देश को कुछ भेज सकते हैं क्या अपने साथ-साथ अपने परिवार को खड़ा कर सकते हैं क्या स्वाबलंबी बना सकते हैं क्या बेहतर तरीके से लोगों से संवाद कर सकते हैं क्या और बेहतर तरीके से जिंदगी की विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला कर सकते हैं क्या केवल इस चीज के लिए शिक्षा है 65 परसेंट मार्क्स आ गए तो बर्बाद हो गए हम सुसाइड कर लेंगे जैसे मेरे पास कहीं कैसे जाते हैं 95% मार्क्स लाना क्या हंड्रेड परसेंट हमारा टारगेट होना चाहिए जीवन का कुछ समय के लिए यह चीजें होती हैं उसके बाद आपके किसी काम नहीं आते यह नंबर लेकिन उसके बावजूद भी लोग शिक्षा को सबसे बड़ा उद्देश्य मान लेते और शिक्षा भी हमारे पास जो शिक्षा है वह भी आधी अधूरी गिरती पड़ती शिक्षा है जिसमें आईआईटी के छात्र ने प्रैक्टिकल पर ध्यान दिया होता या इनोवेशन पर ध्यान दिया होता क्रिएटिविटी पर ध्यान देता कोई ड्रोन बना रहा होता कोई रोबोट बना रहा होता वह तो कभी सोचा ही नहीं करता क्योंकि उसको नशा होता कि मैं कैसे-कैसे उस ड्रोन के अंदर रोबोट के अंदर नई चीजें नई इजाद कर सकूं लेकिन हमने आधी पड़ती जो अपनी शिक्षा है उसको नंबरों तक सीमित कर दिया और वही दबाव आगे ट्रांसफर कर दिया पैरंट्स ने भी किया 97% आए तो मेरा बहुत अब बहुत अच्छा है और फेसबुक में मार्कशीट लोगों के बाद सामने दिखाते कि देखो मेरे गर्व है कि मेरे बच्चे ने कितने प्रतिशत मार्क्स लिए पत्र पत्रिकाएं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल मेरिट होल्डर की गुणगान करते तपते आश्रम कौन से जीवन में जी रहे हैं कौन से भारत में जी रहे हैं जहां पर 65% मार्क्स आने के बाद भी उनकी उपयोगिता होनी चाहिए जिन्होंने कुछ क्रिएटिविटी की है कोई वॉशिंग मशीन बना दी कुछ समाज के लिए मशीन बना दी कोई चीज बना दिया कोई उपकरण बना दिया जिससे कि लोगों की जीवन और आसान हो सके मेरे माय नेम ऑफ शिक्षा जिसको बेचा जा सके तो इकोनॉमिक्स में योगदान दे भारत की वह शिक्षा और वह शिक्षा हासिल करने के लिए जो पढ़ना पड़े उसमें पैसे खाते हैं 70 आते हैं 80 आते हैं उससे कोई फर्क नहीं आपको वह बात समझ में आ गई या नहीं आ गई उसका उपयोग आप जीवन यापन में कर सकते हैं कि नहीं कर सकते यह ज्यादा महत्वपूर्ण जब यह बातें समझ में आ जाएगी तो फिर समाज को और विशिष्ट रूप से पेरेंट्स कोई बात जब ध्यान में आएगी तो उसके बाद यह सब समस्या धीरे-धीरे सॉल्व होगी व्यक्तियों का आदर सम्मान करना पड़ेगा जिनके पास हुनर है क्वेश्चन है ना कि केवल उनका जिनके पास कलम के साथ-साथ 97% मार्क्स लाने की क्षमता है यह हमको अपनी मानसिकता माइंडसेट बदलना होगा तब स्थिति या सुधरेंगे

kabhi kabhi mujhe sher hota hai ki shiksha sadhan hai ya saath de hum me se adhiktar logo ne parents ne students ne samaj ne shiksha ko maano saadhy bana liya hai jeevan ka aur shiksha bhi puri nahi kitabi shiksha ko number lane ko sabse bada uddeshya bana liya jeevan ka vo kehte hain na ki zindagi zindagi bhar dekha ki marne ki raah mar ke bhi ab dekhiye dikhlaen kya are bhaiya altimetli yah keval ek sadhan hai shiksha jo behtar nagarik banane ka zariya hai altimetli saadhe hai kya behtar tarike se apna jeevan yaapan kar sakte hain kya samaj ko kuch de sakte hain kya desh ko kuch bhej sakte hain kya apne saath saath apne parivar ko khada kar sakte hain kya swabalambi bana sakte hain kya behtar tarike se logo se samvaad kar sakte hain kya aur behtar tarike se zindagi ki viprit paristhitiyon ka muqabla kar sakte hain kya keval is cheez ke liye shiksha hai 65 percent marks aa gaye toh barbad ho gaye hum suicide kar lenge jaise mere paas kahin kaise jaate hain 95 marks lana kya hundred percent hamara target hona chahiye jeevan ka kuch samay ke liye yah cheezen hoti hain uske baad aapke kisi kaam nahi aate yah number lekin uske bawajud bhi log shiksha ko sabse bada uddeshya maan lete aur shiksha bhi hamare paas jo shiksha hai vaah bhi aadhi adhuri girti padti shiksha hai jisme IIT ke chatra ne practical par dhyan diya hota ya innovation par dhyan diya hota creativity par dhyan deta koi drone bana raha hota koi robot bana raha hota vaah toh kabhi socha hi nahi karta kyonki usko nasha hota ki main kaise kaise us drone ke andar robot ke andar nayi cheezen nayi ijad kar sakun lekin humne aadhi padti jo apni shiksha hai usko numberon tak simit kar diya aur wahi dabaav aage transfer kar diya Parents ne bhi kiya 97 aaye toh mera bahut ab bahut accha hai aur facebook me marksheet logo ke baad saamne dikhate ki dekho mere garv hai ki mere bacche ne kitne pratishat marks liye patra patrikayen electronic media channel merit holder ki gunagan karte tapte ashram kaun se jeevan me ji rahe hain kaun se bharat me ji rahe hain jaha par 65 marks aane ke baad bhi unki upayogita honi chahiye jinhone kuch creativity ki hai koi washing machine bana di kuch samaj ke liye machine bana di koi cheez bana diya koi upkaran bana diya jisse ki logo ki jeevan aur aasaan ho sake mere my name of shiksha jisko becha ja sake toh economics me yogdan de bharat ki vaah shiksha aur vaah shiksha hasil karne ke liye jo padhna pade usme paise khate hain 70 aate hain 80 aate hain usse koi fark nahi aapko vaah baat samajh me aa gayi ya nahi aa gayi uska upyog aap jeevan yaapan me kar sakte hain ki nahi kar sakte yah zyada mahatvapurna jab yah batein samajh me aa jayegi toh phir samaj ko aur vishisht roop se parents koi baat jab dhyan me aayegi toh uske baad yah sab samasya dhire dhire solve hogi vyaktiyon ka aadar sammaan karna padega jinke paas hunar hai question hai na ki keval unka jinke paas kalam ke saath saath 97 marks lane ki kshamta hai yah hamko apni mansikta mindset badalna hoga tab sthiti ya sudhrenge

कभी-कभी मुझे शेर होता है कि शिक्षा साधन है या साथ दे हम में से अधिकतर लोगों ने पेरेंट्स न

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि आईआईटी के 20 साल के छात्र ने डिप्रेशन में आकर आकर सुसाइड क्या हमारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव बना रहा है ऐसा नहीं है इसके बहुत सारे कारण हो सकते हैं एक आधुनिक समय में जो बच्चे नशे के नशे के आदी हो रहे हैं बहुत सारे हुए लोग भी डिप्रेशन के शिकार होकर आत्महत्या जैसे अपराध कर रहे हैं और दूसरे अर्थों में कहे कि एकजोरा पेरेंट्स का होता है या टीचर्स का होता यह समाज का यह दबाव भी उनके ऊपर कुछ बच्चे महसूस करते हैं कि अगर हमारे अच्छे नंबर नहीं आएंगे अगर हम इसमें आप पास नहीं होंगे तो लोग हमारे लिए क्या कहेंगे यह भी एक विचारधारा सामान्यता जुड़ी होती है दूसरे ही होता है कि जब हम बार-बार कोशिश करते हम किसी से आगे जाना चाहते हैं और इतनी मेहनत नहीं कर पाते यह भी उसका डिप्रेशन में आने का कारण है और तब हमारा हमारे भीतर एक आने की थी विचारधारा आती है कि हमारा ज्यादा जिंदा रहना ठीक नहीं है और हम आत्महत्या जैसे अपराध को करते हैं और इसमें बहुत सारी बातें अकाउंट करते हो सबसे मुख्य जो बात होती है अभी जो वर्तमान समय में चल रहा है इसमें जो नशे नशे के आदी जो बच्चे वह ज्यादा इस तरीके का काम करते हैं

aapka prashna hai ki IIT ke 20 saal ke chatra ne depression me aakar aakar suicide kya hamara samaj baccho par bahut dabaav bana raha hai aisa nahi hai iske bahut saare karan ho sakte hain ek aadhunik samay me jo bacche nashe ke nashe ke adi ho rahe hain bahut saare hue log bhi depression ke shikaar hokar atmahatya jaise apradh kar rahe hain aur dusre arthon me kahe ki ekajora parents ka hota hai ya teachers ka hota yah samaj ka yah dabaav bhi unke upar kuch bacche mehsus karte hain ki agar hamare acche number nahi aayenge agar hum isme aap paas nahi honge toh log hamare liye kya kahenge yah bhi ek vichardhara samanyata judi hoti hai dusre hi hota hai ki jab hum baar baar koshish karte hum kisi se aage jana chahte hain aur itni mehnat nahi kar paate yah bhi uska depression me aane ka karan hai aur tab hamara hamare bheetar ek aane ki thi vichardhara aati hai ki hamara zyada zinda rehna theek nahi hai aur hum atmahatya jaise apradh ko karte hain aur isme bahut saari batein account karte ho sabse mukhya jo baat hoti hai abhi jo vartaman samay me chal raha hai isme jo nashe nashe ke adi jo bacche vaah zyada is tarike ka kaam karte hain

आपका प्रश्न है कि आईआईटी के 20 साल के छात्र ने डिप्रेशन में आकर आकर सुसाइड क्या हमारा समाज

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Dr ARVIND BARAD

Psychiatrist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बदलते सामाजिक परिपेक्ष में पेरेंट्स का बढ़ता हुआ पैरेंटल प्रेशर पीयर प्रेशर पीयर प्लेजर कॉन्पिटिटिव होस्टिलिटी यह सब ऐसे कारक है जिसकी वजह से बच्चा ड्रेस में आकर आत्महत्या की प्रवृत्ति की तरफ अग्रसर हो रहा है और यह बिल्कुल सही है कि हमारा समाज को हमारे पेरेंट्स को इस काउंसलिंग का पैरंटरल काउंसलिंग कैरियर काउंसलिंग इसकी गाइडेंस जरूर लेनी चाहिए जिससे कि एक हर्मनी बनी रहे पेरेंट्स और बच्चे के बीच में और बच्चे की वेल्डिंग अच्छी है उसकी क्वालिटी बढ़िया हो उसमें हैप्पीनेस का इंडेक्स हो और उसकी सेटिस्फेक्ट्री लाइफ इन सब पैरामीटर में जरूरी है कि कैरियर काउंसलिंग और पैरेंटल काउंसलिंग का बहुत बड़ा रोल है

badalte samajik paripeksh me parents ka badhta hua pairental pressure piyar pressure piyar pleasure competetive hostility yah sab aise kaarak hai jiski wajah se baccha dress me aakar atmahatya ki pravritti ki taraf agrasar ho raha hai aur yah bilkul sahi hai ki hamara samaj ko hamare parents ko is kaunsaling ka pairantaral kaunsaling carrier kaunsaling iski guidance zaroor leni chahiye jisse ki ek harmani bani rahe parents aur bacche ke beech me aur bacche ki Welding achi hai uski quality badhiya ho usme Happiness ka index ho aur uski setisfektri life in sab parameter me zaroori hai ki carrier kaunsaling aur pairental kaunsaling ka bahut bada roll hai

बदलते सामाजिक परिपेक्ष में पेरेंट्स का बढ़ता हुआ पैरेंटल प्रेशर पीयर प्रेशर पीयर प्लेजर

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Monika Sharma

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इतना ज्यादा जो क्रिएट हो रहा है इसकी वजह से बच्चों को दिल करनी चाहिए कि हमें एजुकेशन के लिए नहीं करना चाहिए प्रेशर और उनके खर्च को भी वेलकम करना चाहिए और उनकी बातों को सुनना चाहिए और जानने की कोशिश करना चाहिए कि कौन-कौन से वह किस तरीके से उनको मिल सकती है और डिफरेंट ऑप्शन कर सकते हैं

itna zyada jo create ho raha hai iski wajah se baccho ko dil karni chahiye ki hamein education ke liye nahi karna chahiye pressure aur unke kharch ko bhi welcome karna chahiye aur unki baaton ko sunana chahiye aur jaanne ki koshish karna chahiye ki kaun kaun se vaah kis tarike se unko mil sakti hai aur different option kar sakte hain

इतना ज्यादा जो क्रिएट हो रहा है इसकी वजह से बच्चों को दिल करनी चाहिए कि हमें एजुकेशन के लि

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ankit mehta

speaker/social activitie

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Sumit Roy

Consultant Clinical Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां हमारा समाज बच्चों पर या यूं कहें दूसरों पर बेहद दबाव डाल रहा है सोशल प्रेशर जबरदस्त हैं और यह जबरदस्त सोशल प्रेशर का कारण एकदम इलॉजिकल है बेतुकी है हमारे हमारे समाज में दिखाया जाता है कि यदि आप फेल हो गए यदि आप असफल हुए तो आप किसी काम के नहीं लेकिन जरा सोच कर देखिए तो क्या ऐसा कोई व्यक्ति है दुनिया में जो बिना 24 * लड़खड़ाए दो-चार बार गिरे चलना सीख गया क्या वह साइकिल चलाना सीख गया क्या वह ब्रश करना सीख गया क्या वह नहाना सीख गया कपड़े पहनना सीख गया खाना सीख गया बोलना सीख गया क्या वह लिखना सीख गया क्या वह हर चीज में बिना कभी गलती किए बिना कभी असफलता के कोई भी काम कोई व्यक्ति इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति सीख सकता है क्या लेकिन नहीं हम तो उन सब चीजों को भूल जाते हैं हम तो चलिए लेकर बैठ जाते हैं कि सफल तुझे होना ही है हम दूसरों को उपदेश देते हैं समाज दूसरों को कहता रहता है कि सफल तो होना ही है असफल तो हो ही नहीं सकता तू यह एक बहुत बड़ा बड़ा बड़ा विसंगति है हमारे समाज में जिसके कारण से बहुत बहुत बहुत बहुत ज्यादा लोगों को सामाजिक दबाव के कारण से उदासी उदासी हो जा उदास हो जाते हैं डिप्रेशन आता है और उसके कारण से सूइसाइड भी होता है दूसरी एक और बहुत बड़ी समस्या है कि मुझ जैसा इस दुनिया में दूसरा कोई नहीं आप जैसा इस दुनिया में दूसरा कोई नहीं हम सब अनोखे हैं हम जब सब अनोखे हैं तुम मेरा आपसे तुलना कैसे हो सकता है आपका मुझ से तुलना कैसे हो सकता है अगर हम तुलना कर ही नहीं सकते हैं तो रोज क्यों हम तुलना करते रहते हैं क्यों पिताजी अपने बेटे को डांटता है कि वह तेरा दोस्त है इतना बढ़िया उसके रिजल्ट आए हैं वह गणित में इतने नंबर ले आया और तू नालायक मूर्ख तू नहीं ला सकता कैसे संभव है हर व्यक्ति को 99% 98% गणित में क्यों आए जिसको जो 99 लाया है दूसरा बच्चा जो गाने में इतना अच्छा है जो खेल में इतना तेज है उसको गणित में बहुत अच्छा नहीं है जो गणित में अच्छा है वह खेल में इतना अच्छा नहीं है लेकिन हम हमेशा एक दूसरे से कंपेयर करते हैं यह कंपैरिजन हमें मार रहे हैं कंपैरिजन एक मेजर कारण है सुसाइड का कंपैरिजन असंभव है मैं अपने आप को किसी से कंपेयर नहीं कर सकता हूं आप किसी से अपने आप को कंपेयर नहीं कर सकते क्योंकि आप में जो गुण हैं आप में जो खूबियां हैं आपकी जो कमियां है वह खूबी और कमीनी का कमियां कमियों का कॉन्बिनेशन इस दुनिया में किसी में नहीं हो सकता इसीलिए आप अनोखे हैं मैं अनोखा अगर कंपेयर करना ही है तो मैं करूं अपने आप से आप करें अपने आप से कम पर अरे पिछले बार में इतना तेज दौड़ पाया मैं हंड्रेड मीटर्स को मैं तेरा मैं तेरा मैं तेरा सेकंड में दौड़ पाया इस बार में 12 सेकंड में हंड्रेड मीटर दौड़ लिया मैं मैं अपने आपको अपने पुराने रिकॉर्ड से कंपेयर करूं और अपने आप को इंप्रूव करता चला जाऊंगा कंपैरिजन कंपैरिजन केवल अपने आप से संभव है मैं पिछले बार इतने नंबर पाया था इस सब्जेक्ट में इस बार में कितने नंबर लाया हूं यह संभव है लेकिन मैं किसी और के साथ कंप्लीट करूं यह संभव ही नहीं है यह कंपैरिजन अगर छूट जाए खत्म हो जाए और फेलियर मतलब तू कोई काम का नहीं यह अगर यह दो चीज अगर खत्म हो जाए तो सूइसाइड खत्म हो जाए

ji haan hamara samaj baccho par ya yun kahein dusro par behad dabaav daal raha hai social pressure jabardast hain aur yah jabardast social pressure ka karan ekdam ilajikal hai betuki hai hamare hamare samaj me dikhaya jata hai ki yadi aap fail ho gaye yadi aap asafal hue toh aap kisi kaam ke nahi lekin zara soch kar dekhiye toh kya aisa koi vyakti hai duniya me jo bina 24 ladakhadaye do char baar gire chalna seekh gaya kya vaah cycle chalana seekh gaya kya vaah brush karna seekh gaya kya vaah nahaana seekh gaya kapde pahanna seekh gaya khana seekh gaya bolna seekh gaya kya vaah likhna seekh gaya kya vaah har cheez me bina kabhi galti kiye bina kabhi asafaltaa ke koi bhi kaam koi vyakti is duniya me koi bhi vyakti seekh sakta hai kya lekin nahi hum toh un sab chijon ko bhool jaate hain hum toh chaliye lekar baith jaate hain ki safal tujhe hona hi hai hum dusro ko updesh dete hain samaj dusro ko kahata rehta hai ki safal toh hona hi hai asafal toh ho hi nahi sakta tu yah ek bahut bada bada bada visangati hai hamare samaj me jiske karan se bahut bahut bahut bahut zyada logo ko samajik dabaav ke karan se udasi udasi ho ja udaas ho jaate hain depression aata hai aur uske karan se suisaid bhi hota hai dusri ek aur bahut badi samasya hai ki mujhse jaisa is duniya me doosra koi nahi aap jaisa is duniya me doosra koi nahi hum sab anokhe hain hum jab sab anokhe hain tum mera aapse tulna kaise ho sakta hai aapka mujhse se tulna kaise ho sakta hai agar hum tulna kar hi nahi sakte hain toh roj kyon hum tulna karte rehte hain kyon pitaji apne bete ko daantata hai ki vaah tera dost hai itna badhiya uske result aaye hain vaah ganit me itne number le aaya aur tu nalayak murkh tu nahi la sakta kaise sambhav hai har vyakti ko 99 98 ganit me kyon aaye jisko jo 99 laya hai doosra baccha jo gaane me itna accha hai jo khel me itna tez hai usko ganit me bahut accha nahi hai jo ganit me accha hai vaah khel me itna accha nahi hai lekin hum hamesha ek dusre se compare karte hain yah kampairijan hamein maar rahe hain kampairijan ek major karan hai suicide ka kampairijan asambhav hai main apne aap ko kisi se compare nahi kar sakta hoon aap kisi se apne aap ko compare nahi kar sakte kyonki aap me jo gun hain aap me jo khubiya hain aapki jo kamiyan hai vaah khoobi aur kamini ka kamiyan kamiyon ka kanbineshan is duniya me kisi me nahi ho sakta isliye aap anokhe hain main anokha agar compare karna hi hai toh main karu apne aap se aap kare apne aap se kam par are pichle baar me itna tez daudh paya main hundred metres ko main tera main tera main tera second me daudh paya is baar me 12 second me hundred meter daudh liya main main apne aapko apne purane record se compare karu aur apne aap ko improve karta chala jaunga kampairijan kampairijan keval apne aap se sambhav hai main pichle baar itne number paya tha is subject me is baar me kitne number laya hoon yah sambhav hai lekin main kisi aur ke saath complete karu yah sambhav hi nahi hai yah kampairijan agar chhut jaaye khatam ho jaaye aur failure matlab tu koi kaam ka nahi yah agar yah do cheez agar khatam ho jaaye toh suisaid khatam ho jaaye

जी हां हमारा समाज बच्चों पर या यूं कहें दूसरों पर बेहद दबाव डाल रहा है सोशल प्रेशर जबरदस्

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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत अच्छा सवाल पूछा है आपने कि 20 साल के साथ में डिप्रेशन में आकर सुसाइड कर लिया तो क्या समाज जिम्मेवार है इसका तो मैं कहूंगी कि समाज से पहले यहां पर एक बहुत बड़ा माता-पिता का जो है रुलाता है आज हम देखते हैं कि हमारे बच्चे ने आईआईटी में एडमिशन लिया है वह बहुत इंटेलिजेंट है तो अब वह आगे जाकर बहुत कंप्लीट करके बहुत अच्छी जॉब करेगा हमारी सारी हमारा नाम रोशन करेगा हमारी सारी उम्मीदों पर खरा उतरेगा तो बहुत बच्चे अपनी परेशानियां अपने मां-बाप से शेयर नहीं कर पाते होशियार हो ना सब कुछ नहीं होता इंटेलिजेंट क्वेश्चन के अलावा इमोशनल क्वेश्चन भी होता है कि आप अपने आसपास के 9 मिनट में कैसे एडजस्ट कर पाते हो और बहुत बार जब बच्चे नहीं कॉलेज में जाते हैं क्योंकि चाहे वह कितना भी इंटेलिजेंट हो लेकिन है तो वह भी बच्चा ही नए गाने नए लोगों से मिलेगा बहुत बड़े होते कि अगर आप घर से दूर रह रहे हैं या फिर से भी जाते हैं तो आपके दोस्त नहीं बन पा रहे हैं आप कॉलेज में अच्छे से एडजस्ट नहीं कर पा रहे हो या फिर अभी तक बारहवीं तक आप जो थे 100 या 200 बच्चों से ज्यादा इंटेलिजेंट थी लेकिन वहीं आईटी में पहुंचने के बाद सारे ही बच्चे आप आप जितने आपसे ज्यादा इंटेलिजेंट है तू खूप अप करना मुश्किल हो जाता है इसलिए भी बच्चे बहुत दबाव महसूस करते हैं जरूरत है यह है कि माता-पिता को कि वह कह पाए अपने बच्चों से और वह बच्चे संपर्क कर पाए मां बाप से अपनी दिल की बात कह पाए कि मुझे यह दिक्कत हो रही है कि मैं पढ़ाई में अब खूब नहीं कर पा रहा हूं या फिर मुझे ऐसा रियल आइज हुआ है कि चाहे मेरा आईडी में एडमिशन हुआ है मेरा इंटरेस्ट नहीं है और फिर हम कुछ साला कुछ हम इसका वह निकालते हैं इसका कुछ सलूशन निकालते हैं या फिर आपकी मेरे दोस्त नहीं बन रहे हैं मुझे कोई परेशान कर रहा है कोई भी रीजन हो सकता है तो सबसे पहले बात तो एक डायलॉग बहुत अच्छा होना चाहिए मां-बाप और बच्चों के बीच में ताकि जो भी बच्चों को परेशानी हो वह बच्चा है सके अपने मां-बाप को यह नहीं कि वह उनकी उम्मीदों में ही दबकर रह जाए दूसरी चीज है कि अगर मां-बाप को ऐसा लगता है कि बच्चा किसी परेशानी से गुजर रहा है उसका भी भीड़ में बहुत बदलाव है उसे कोई भी दिक्कत है तो किसी काउंसलर या साइकॉलजिस्ट के पास ले जाने से डराना जाए कि तो यूं ही है बच्चे का भी वह अभी पढ़ाई में कोई परेशानी होगी हो जाएगा ठीक हो जाएगा अपने आप ऐसा ना सोचे जब बुखार होता है और घर के सारे नुस्खे काम नहीं करते तब भी आप भक्तों के पास जाते ही हैं तो कानपुर के पास जरूर बच्चे को जो है साइकॉलजिस्ट के पास लेकर जाएं और अगर आपका बच्चा दूर भी पड़ रहा है तू उसे रोज फोन करें और उससे पूछे क्या चल रहा है कैसा चल रहा है अगर आपको ऐसा लगता है कि वह तो अपने दोस्तों के साथ तो बहुत मजे कर रहा है और उसे अब तुम्हारी जरूरत नहीं है या खुद बहुत पड़ रहा है उसे क्या वह हमसे परेशान करें ऐसा नहीं है रूस उससे बात करिए आराम से बात करिए उसे पूछे आज का दिन कैसा गया क्या परेशानी हुई हम बार-बार यह बात जरूर बोले कि हम हमारे साथ हैं अगर कुछ भी होता है हमसे जरूर शेयर करें हम तुम्हारे साथ खड़े हो जाएंगे जरूरी नहीं कि आपका अब वहां भागते में आए हैं आपका बोलना ही उसके लिए बहुत कुछ कर जाएगा बहुत हिम्मत दे जाएगा उसके गुड लक

bahut accha sawaal poocha hai aapne ki 20 saal ke saath mein depression mein aakar suicide kar liya toh kya samaj jimmewar hai iska toh main kahungi ki samaj se pehle yahan par ek bahut bada mata pita ka jo hai rulaata hai aaj hum dekhte hai ki hamare bacche ne IIT mein admission liya hai vaah bahut Intelligent hai toh ab vaah aage jaakar bahut complete karke bahut achi job karega hamari saree hamara naam roshan karega hamari saree ummidon par Khara utrega toh bahut bacche apni pareshaniya apne maa baap se share nahi kar paate hoshiyar ho na sab kuch nahi hota Intelligent question ke alava emotional question bhi hota hai ki aap apne aaspass ke 9 minute mein kaise adjust kar paate ho aur bahut baar jab bacche nahi college mein jaate hai kyonki chahen vaah kitna bhi Intelligent ho lekin hai toh vaah bhi baccha hi naye gaane naye logo se milega bahut bade hote ki agar aap ghar se dur reh rahe hai ya phir se bhi jaate hai toh aapke dost nahi ban paa rahe hai aap college mein acche se adjust nahi kar paa rahe ho ya phir abhi tak baarvi tak aap jo the 100 ya 200 baccho se zyada Intelligent thi lekin wahi it mein pahuchne ke baad saare hi bacche aap aap jitne aapse zyada Intelligent hai tu khup up karna mushkil ho jata hai isliye bhi bacche bahut dabaav mehsus karte hai zarurat hai yah hai ki mata pita ko ki vaah keh paye apne baccho se aur vaah bacche sampark kar paye maa baap se apni dil ki baat keh paye ki mujhe yah dikkat ho rahi hai ki main padhai mein ab khoob nahi kar paa raha hoon ya phir mujhe aisa real eyez hua hai ki chahen mera id mein admission hua hai mera interest nahi hai aur phir hum kuch sala kuch hum iska vaah nikalate hai iska kuch salution nikalate hai ya phir aapki mere dost nahi ban rahe hai mujhe koi pareshan kar raha hai koi bhi reason ho sakta hai toh sabse pehle baat toh ek dialogue bahut accha hona chahiye maa baap aur baccho ke beech mein taki jo bhi baccho ko pareshani ho vaah baccha hai sake apne maa baap ko yah nahi ki vaah unki ummidon mein hi dabkar reh jaaye dusri cheez hai ki agar maa baap ko aisa lagta hai ki baccha kisi pareshani se gujar raha hai uska bhi bheed mein bahut badlav hai use koi bhi dikkat hai toh kisi counselor ya psychologist ke paas le jaane se darana jaaye ki toh yun hi hai bacche ka bhi vaah abhi padhai mein koi pareshani hogi ho jaega theek ho jaega apne aap aisa na soche jab bukhar hota hai aur ghar ke saare nuskhe kaam nahi karte tab bhi aap bhakton ke paas jaate hi hai toh kanpur ke paas zaroor bacche ko jo hai psychologist ke paas lekar jayen aur agar aapka baccha dur bhi pad raha hai tu use roj phone kare aur usse pooche kya chal raha hai kaisa chal raha hai agar aapko aisa lagta hai ki vaah toh apne doston ke saath toh bahut maje kar raha hai aur use ab tumhari zarurat nahi hai ya khud bahut pad raha hai use kya vaah humse pareshan kare aisa nahi hai rus usse baat kariye aaram se baat kariye use pooche aaj ka din kaisa gaya kya pareshani hui hum baar baar yah baat zaroor bole ki hum hamare saath hai agar kuch bhi hota hai humse zaroor share kare hum tumhare saath khade ho jaenge zaroori nahi ki aapka ab wahan bhagte mein aaye hai aapka bolna hi uske liye bahut kuch kar jaega bahut himmat de jaega uske good luck

बहुत अच्छा सवाल पूछा है आपने कि 20 साल के साथ में डिप्रेशन में आकर सुसाइड कर लिया तो क्या

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Tabinda Arif

Psychologist, Trainer and Clinical Hypnotherapist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हाय आपको खुशी नहीं आई थी कि 20 साल के छात्र डिप्रेशन में आकर किया सुसाइड क्या हमारे समाज बच्चों पर बहुत दबाव डाल रहा है शायद हां अगर आप इसका जवाब सच में एक पिसाई जवाब चाहते हैं तो हां आजकल बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है लेकिन आप उसमें डिफेंसिव कर सकते हैं आप भी फैसला सकते हैं अपनी सांबीज मेरा सकते हैं बच्चों को दबाव में डालने के बजाय उनके साथ अच्छे से उनको बताएं कि मां क्वाटर होते हैं पर इतने नहीं आपकी जिंदगी से ज्यादा नहीं उनका साथ भी उनको समझाएं उनकी रुचि जानने की कोशिश करें

hi aapko khushi nahi I thi ki 20 saal ke chatra depression mein aakar kiya suicide kya hamare samaj baccho par bahut dabaav daal raha hai shayad haan agar aap iska jawab sach mein ek pisai jawab chahte hain toh haan aajkal bahut zyada dabaav pad raha hai lekin aap usme defensive kar sakte hain aap bhi faisla sakte hain apni sambij mera sakte hain baccho ko dabaav mein dalne ke bajay unke saath acche se unko bataye ki maa Quarter hote hain par itne nahi aapki zindagi se zyada nahi unka saath bhi unko samjhayen unki ruchi jaanne ki koshish karen

हाय आपको खुशी नहीं आई थी कि 20 साल के छात्र डिप्रेशन में आकर किया सुसाइड क्या हमारे समाज ब

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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

1:34

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैसे की चर्चा का विषय है कि आई डी के 20 साल के छात्र ने अधिवेशन में आकर किया सुसाइड क्या हमारा समाज बच्चों पर दबाव डाल रहा है तक बता देंगे बिल्कुल यह कटु सच्चाई है उससे हम भाग नहीं सकते हैं कि आजकल बच्चों के ऊपर बहुत ज्यादा प्रेशर हो गया है पीयर प्रेशर तो होता ही है फैमिली प्रेशर बहुत ज्यादा है कि उनको परफॉर्म करके दिखाना है दरवाजे पर कहते हैं कि समाज में उनकी इज्जत नहीं होगी उनके बारे में लोग क्या बातें करेंगे कैसे रहूंगा यह सब तो अपनी अपेक्षाएं अपनी आकांक्षाओं को बच्चों के ऊपर लाद देते हैं और कई बार बच्चे उन अपेक्षाओं और आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाते हैं जिसके कारण वह डिप्रेशन में चले आते हो कई बार यही नतीजा होता है कि वह सुसाइड भी अटेंड कर लेते हैं तो यहां पर पेरेंट्स को भी थोड़ा सोचना चाहिए कि बच्चे पर अपनी आकांक्षाएं और अपनी महत्वाकांक्षाओं का पोस्ट नहीं डालना है दूसरा अगर बच्चा बहुत ज्यादा महत्व कौन सी है तो उसके से बच्चे को भी थोड़ा सा इसे शर्ट इतना है कि उसको फिलियल से डील करना आना चाहिए उसको सोने वाला चाहिए कि अगर कहीं पर क्लियर हो रहा है तो उसको ऐसा नहीं कि लाइफ में चूक गई है तो लाइफ आगे बढ़ती रहती है तो आप उसको फीलियम हैंडल करना आना चाहिए ऐसा नहीं कि कोई फेल हो गया तो आप डिप्रेशन में चला जाए उसके बाद कुछ ऐसे गलत हरकत कर ले या कोई स्टाफ उठा ले तो वहां पर पेरेंट्स को भी चाहिए कि वह टीवी में सपने में अपने बच्चे को डील करना शुरू करें मि शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद

jaise ki charcha ka vishay hai ki I d ke 20 saal ke chatra ne adhiveshan mein aakar kiya suicide kya hamara samaj baccho par dabaav daal raha hai tak bata denge bilkul yah katu sacchai hai usse hum bhag nahi sakte hain ki aajkal baccho ke upar bahut zyada pressure ho gaya hai piyar pressure toh hota hi hai family pressure bahut zyada hai ki unko perform karke dikhana hai darwaze par kehte hain ki samaj mein unki izzat nahi hogi unke bare mein log kya batein karenge kaise rahunga yah sab toh apni apekshayen apni akankshaon ko baccho ke upar laad dete hain aur kai baar bacche un apekshaon aur akankshaon par Khara nahi utar paate hain jiske karan vaah depression mein chale aate ho kai baar yahi natija hota hai ki vaah suicide bhi attend kar lete hain toh yahan par parents ko bhi thoda sochna chahiye ki bacche par apni akanchaye aur apni mahatwakankshaon ka post nahi dalna hai doosra agar baccha bahut zyada mahatva kaun si hai toh uske se bacche ko bhi thoda sa ise shirt itna hai ki usko filiyal se deal karna aana chahiye usko sone vala chahiye ki agar kahin par clear ho raha hai toh usko aisa nahi ki life mein chuk gayi hai toh life aage badhti rehti hai toh aap usko filiyam handle karna aana chahiye aisa nahi ki koi fail ho gaya toh aap depression mein chala jaaye uske baad kuch aise galat harkat kar le ya koi staff utha le toh wahan par parents ko bhi chahiye ki vaah TV mein sapne mein apne bacche ko deal karna shuru kare me subhkamnaayain aapke saath hain dhanyavad

जैसे की चर्चा का विषय है कि आई डी के 20 साल के छात्र ने अधिवेशन में आकर किया सुसाइड क्या ह

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

10:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

काम किया है कि के एक छात्र ने सुसाइड कर लिया क्या मारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डालना है इसमें कोई संदेह नहीं है एक विद्यार्थी अपना जीवन क्यों कोएगा वह तो इस जीवन को जीने के लिए तो संसार में आए हैं और संसार में जीवन बिताने से पहले जीवन की समाप्ति यह किस बात का संकेत है यह इस बात का संकेत है कि समाज भावनाओं से खेलना समाज केवल दवाब से हर चीज हासिल करना चाहता है वह दवा चाहे लड़का हो तो जवाब कैसे कहूं या वह दबाव काबिलियत कहूं या नहीं आपको ही करना है तो करना है एक छोटा सा प्रश्न करता हूं समाज के जिम्मेदार ठेकेदारों से चैनल पर जो चाहे वह करो आप के ऊपर अगर मैं एक कुंटल का वजन रख दूं तो क्या उस भोजन को अपनी पीठ पर लादकर आप कितनी देर तक खड़े रह सकते हैं या कितनी देर तक उस भजन को छोड़ सकते हैं यह भौतिकी का क्वेश्चन है 1 टन का वजन 1 क्विंटल का वजन 40 किलो का वजन 20 किलो का वजन इनमें कोई डिफरेंस नहीं है इसी तरह से किसी बच्चे पर जब मानसिक दबाब उम्मीदों का दबाव सपनों का दवा दवा और ख्यालों तो जज्बातों का जवाब कुछ कर गुजरने का जवाब अरे कम से कम उस बच्चे का स्टैमिना उस बच्चे की क्षमता बच्ची की काबिलियत और उस बच्ची की कितना इसलिए बल्कि तो जांच कर लो अरे आप पेरेंट्स हो आप अभिभावकों और आप 1 शिक्षकों जो आप पाना चाहते थे जो आप सपने देख रहे थे क्या वहां चलोगे आप को लड़की आपके बीच में से एक सुंदर एक जीवन आपके बीच में चला गया उसके लिए कौन दोषी है शिक्षा प्रणाली हमारी सोच हमारे समाज यह हमारा जो मनु प्रवृत्ति हैं बच्चों से बढ़कर जीवन में कुछ नहीं है उन बच्चों की काबिलियत को समझने की कोशिश कीजिए कि उन बच्चों की क्षमता क्या है कि मैं डॉक्टर हूं तो जरूरी नहीं है कि मेरी संतान भी डॉक्टर हो मुझे अपनी डॉन को भरपूर स्वतंत्रता देनी चाहिए कि बेटे आपका रुझान किस तरफ है और किस तरफ जाना चाहती है आप उसे जान को स्पष्ट करो और हम पेरेंट्स कोशिश सपोर्ट करना चाहिए सभी लोग अपने बच्चों को इंजीनियर बनाना चाहते हैं सभी बच्चों को डॉक्टर बनाना चाहते हैं और बच्चों को कोटा में भेज देते अपनी जिंदगी का कोटा धान में जी के चरणों में क्या मिलता है एक मायूस बच्चा एक विक्षिप्त बच्चा एक असफल बच्चा और एक जीवन को क्या चुका होता तो क्या मिला आपको इसलिए मैं भी भावों से समाज के ठेकेदारों से यह स्पष्ट करना चाहूंगा हम भी शिक्षक हैं अब यकीन मानिए मैं अपने बच्चों की भावनाओं की बड़ी कद्र करता हूं बच्चों की कमजोरियों को समझता हूं वह चार बार गलत करते में छह बार समझा मैं गुस्सा भी करता हूं उन्हें अनुशासित करने के लिए उन्हें मोटिवेट करता हूं उन्हें सफल बनाने के लिए आखिरी समय तक साथ देता हूं उन्हें भटकने से रोकने के लिए और एविन पेरेंट्स हमारी इस प्रवृत्ति हमारी इस विचारधारा की विरोधी हैं हजारों पेरेंट्स ने हमारे इस विचारधारा को स्वीकार नहीं किया अगर बच्चा एकेडमिक में सामान्य संतुलन बहुत विशिष्टता नहीं ला पा रहा तो हम उसको वो कृष्ण से या प्रोफेशनल से यह दर टाइप की स्ट्रैटेजी से विभिन्न प्रोजेक्ट से उस बच्चे के अंदर यह भाव पैदा करते हैं कि उस बच्चे के अंदर लगन झांकी और वह बच्चा पूरी मेहनत के साथ सफल और तरक्की करें आखिरकार एक शिक्षक एक विद्यार्थी का शिक्षक में उड़ता है अभिभावक भी होता है डॉक्टर भी होता है मनोचिकित्सक भी होता है और उस बच्चे को आवाज में कृष्ण से जोड़कर उचित किसका मात्रक होता है लेकिन इस जन्म देने वाले पेरेंट्स ना जाने क्यों हमार ऐसा सलूक करते क्यों अपने ज्ञान का परिचय देते क्यों अपनी आंखें के चूची का रोना रोते क्यों बच्चों की जिंदगी से खेलते अरे कहां इतना सब कुछ आपके पास होता तो हम शिक्षकों की जरूरत ही नहीं होती हम डॉक्टरों की जरूरत नहीं होती सब कुछ आप ही कर लेते मैं यह नहीं कह रहा हूं कि एक बच्ची ने सुसाइड करके अच्छा किया मुझे यह भी नहीं कहूंगा किसने कायरता का परिचय दिया कोई इंसान अपने प्राण क्यों चाहेगा वह कितने दिन इस संघर्ष से जूस तारा उससे बाहर निकलने के लिए तड़पता रहा लेकिन क्या किसी ने भी उसकी तड़पन को जानने की कोशिश की उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश की उसकी कमजोरी उसकी उदासी पन को जानने की कोशिश की कि सिर्फ पैसा लगा रहे हैं सिर्फ हम तुम्हें कुछ बनाना चाहते हैं हम सिर्फ तुम्हें कुछ सफल होना देखना चाहते हैं यह बच्चे हैं यह मिट्टी के पुतले नहीं जिन्हें आप जैसे चाहे वैसे अपने अनुसार चलाने चाबी का खिलौना नहीं है सॉरी अभिभावकों और गार्डन और पेरेंट्स सब को एक संदेश देना चाहता हूं अपनी बुद्धि और विवेक का परिचय इतना मत दीजिए कि आप जिन खुशियों को पाना चाहते हैं तो आप सचिन जाए मैं अपने बच्चों से जीने में शिक्षा देता हूं मैं जानता हूं उनके लिए मैं कितना संघर्ष करता हूं उन को सफल बनाने के लिए मैं अपने खर्चों से भी उनको सहयोग देता हूं अपने आगे बढ़ाने की कोशिश करता हूं लेकिन हर तरफ सिर्फ अनियमितता मनमानी गलत फैसले एक नहीं हजार मैं आपको बताता हूं एक नहीं आपको एग्जांपल दे सकता हूं प्रमाण सहित दे सकता हूं मेरी जिंदगी में अभी पिछले पांच-छह सालों में कुछ ऐसे बच्चे आए जिन जिन की योग्यता को मैं समझता हूं उनमें से यश जयसूर्या और मुकुल नाम का एक बालक है यादव मुकुल यादों के लिए उसका क्रीम बनाने और रिपीट कर चुका बालक जो अब शायद उनके माता-पिता नेट का विवाद भी कर और मनोहर कुमार मिश्रा कुछ ऐसी मेरी जिंदगी के उदाहरण हैं जिनको बैलेंस नहीं शेर अपनी सोच समझ का एक आईना बना रखा है कि हम जोत

kaam kiya hai ki ke ek chatra ne suicide kar liya kya mara samaj baccho par bahut dabaav dalna hai isme koi sandeh nahi hai ek vidyarthi apna jeevan kyon koega vaah toh is jeevan ko jeene ke liye toh sansar mein aaye hain aur sansar mein jeevan bitane se pehle jeevan ki samapti yah kis baat ka sanket hai yah is baat ka sanket hai ki samaj bhavnao se khelna samaj keval davab se har cheez hasil karna chahta hai vaah dawa chahen ladka ho toh jawab kaise kahun ya vaah dabaav kabiliyat kahun ya nahi aapko hi karna hai toh karna hai ek chota sa prashna karta hoon samaj ke zimmedar thekedaaron se channel par jo chahen vaah karo aap ke upar agar main ek quintal ka wajan rakh doon toh kya us bhojan ko apni peeth par ladakar aap kitni der tak khade reh sakte hain ya kitni der tak us bhajan ko chod sakte hain yah bhautiki ka question hai 1 ton ka wajan 1 quintal ka wajan 40 kilo ka wajan 20 kilo ka wajan inme koi difference nahi hai isi tarah se kisi bacche par jab mansik dabab ummidon ka dabaav 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cream banane aur repeat kar chuka balak jo ab shayad unke mata pita net ka vivaad bhi kar aur manohar kumar mishra kuch aisi meri zindagi ke udaharan hain jinako balance nahi sher apni soch samajh ka ek aaina bana rakha hai ki hum jot

काम किया है कि के एक छात्र ने सुसाइड कर लिया क्या मारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डालना है इ

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

1:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

10 साल के बच्चे सेट कर रहे हैं मुझे झांसी माता के उसे छेड़छाड़ की और कुछ बचा ही नहीं बनता है उसके बारे में समाचार कम करो इतना बच्चों को पढ़ाई

10 saal ke bacche set kar rahe hain mujhe jhansi mata ke use chedchad ki aur kuch bacha hi nahi banta hai uske bare mein samachar kam karo itna baccho ko padhai

10 साल के बच्चे सेट कर रहे हैं मुझे झांसी माता के उसे छेड़छाड़ की और कुछ बचा ही नहीं बनता

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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

4:47
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब मनुष्य परेशानियों से घिर जाता है और उसे उन परेशानियों का कोई हल नजर नहीं आता तब भाई सुसाइड करता है पर दुर्भाग्य की बात है कि जहां पर वह परेशानियों से मुक्त होने के लिए सुसाइड करता है पर होता इसका उल्टा ही है कि वह मृत्यु के बाद और ज्यादा परेशानियों में गिर जाता है क्योंकि मृत्यु जीवन का अंत नहीं है बल्कि आपकी बेटी जिस तरह से होती है उस हिसाब से आपका दूसरा जीवन निर्धारित होता है ज्यादातर सुसाइड करने वाले और बहुत बुरी कैसे एक्सीडेंट में मरने वाले लोग मुक्त नहीं होते बल्कि एक चक्कर में फंस जाते हैं और वह चक्र कई बार सैकड़ों सालों तक चलता है इस तरह से यदि हम अपने बच्चों को अपनी संस्कृति से परिचित करवा दें जहां पर हिंदुस्तान में हिंदुस्तान की सारी धर्मों में यह कहा गया है कि आत्मा अमर होती है ना इसका जन्म होता है ना उसकी मृत्यु होती है इस हिसाब से यदि आप सोचते हैं कि मरने के बाद आप परेशानियों से मुक्त हो जाएंगे तो ऐसा नहीं है परेशानियों से मुक्त होने का एक ही तरीका है कि आप उन परेशानियों से जुड़े उनसे लड़े और अपना सब कुछ लगा दें जब व्यक्ति मृत्यु जैसे एक बहुत ही ज्यादा जघन्य और बहुत ही ज्यादा कष्टदायक स्थिति का निर्णय ले सकता है तो उसकी तुलना में तो जीवन में कोई भी इतनी और कष्टदायक स्थिति नहीं है क्योंकि जब हमारे सभी धर्म में कहते हैं कि आत्मा अमर है तो निश्चित रूप से हम शरीर का त्याग करते हैं हम मरते नहीं और जॉन सुसाइड करते हैं तो हम सभी का क्या क्यों कर देते हैं पर इसमें टिकट याद नहीं होता इस कारण हम भूत योनि में घूमते हैं जहां पर हम देख और सुन तो सकते हैं लेकिन हम किसी प्रकार से एक्सप्रेस नहीं कर सकते और उस स्थिति में जो अपने घर वालों को रोता हुआ परेशान होता हुआ देखते हैं और हम भी देखते हैं कि मेरा शरीर टूट जाने से अब मैं और कुछ भी नहीं कर सकता हूं तो वह इसकी बड़ी भयानक होती है मैं एक एलोपैथी डॉक्टर हूं परंतु यह मेरा सौभाग्य है कि बचपन में मेरे सामने कुछ घटनाएं घटी और जब मैं मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा था कभी मेरे सामने एक घर मेरे साथ एक ऐसी घटना घटी जिससे मुझे किसी अशरीरी आत्मा के होने का अनुभव हुआ और जब मैं योगा थेरेपी में आया तो फिर मुझे इस बात का एहसास हो गया कि हमारी हमारे कर्म और हमारी मृत्यु का तरीका निर्धारित करता है कि हमारा अगला जन्म कैसा होगा और इससे मुझे समझ में आ गया कि आत्महत्या करने वाले सारे लोग मुक्त नहीं होते बल्कि एक बहुत ही भयानक टक्कर में फंस जाते हैं जहां पर सिर्फ उनको संवेदना तो होती है लेकिन वो एक्सप्रेस नहीं कर पाते तो जिसके कारण स्थिति और बहनों को जाती है और आज तो गूगल पर ऐसे हजारों वीडियोस पड़े हुए हैं जहां पर इन अशरीरी आत्माओं के विषय में बहुत विस्तार से आप देख सकते हैं और समझ सकते हैं इसलिए बनने भी सुसाइड का विचार हैं वह इन सब बातों को गौर से देखें इस बात को समझें कि वह सुसाइड करके परेशानियों से मुक्त नहीं होगा बल्कि उससे और हजार गुना परेशानियां बढ़ जाएंगी और इसके लिए विभिन्न धार्मिक संस्थाओं से मिले धार्मिक पुस्तकों को पढ़े और देखें कि इस तरह से मृत्यु का चयन करने से हम कितने परेशान हो जाएंगे अगर आपको इसमें किसी प्रकार की कोई परेशानी लगती है तो आप मुझसे प्रश्न कर सकते हैं और यदि कोई ऐसा कि जो सुसाइड करने के लिए बिल्कुल तक पर बैठा हुआ है उसको मैं फ्री ट्रीटमेंट देता हूं और वह मुझसे संपर्क कर सकता है

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जब मनुष्य परेशानियों से घिर जाता है और उसे उन परेशानियों का कोई हल नजर नहीं आता तब भाई सुस

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:55
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आईआईटी के 20 साल के छात्र डिप्रेशन में आकर किया क्या हमारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डाल रहा है समाज बच्चों के ऊपर दबाव डाल रहा है या नहीं डाल रहा है यह तो दूर की बात है लेकिन आजकल की जो एटीपीजी चोपड़ा और उसके बच्चों के ऊपर प्रभाव ऑपरेशन होता है दिमाग पर वह तो खैर पड़ता है और उसके साथी आज कल की जो व्यवस्था जेंडर जो इस समय लव लेटर होते हैं फिर पढ़ाई कब कैसा होता है आईटी की टीवी ज्यादा होती है और अपने माता-पिता की अपेक्षाएं भी होती है और परीक्षा में अच्छे मार्क्स लाने के लिए डिप्रेशन में चले जाते हैं टेंशन के अंतिम और उन्हें डिप्रेशन का शिकार हो गए हैं उन्हें खुद को मालूम नहीं होता कि उन्हें अभी काउंसलिंग की जरूरत है उन्हें अभी सलाहकार की जरूरत है उन्हें अपने माता-पिता के मुख्य वक्ता के रूप में भी जरूरत है यह सब तो अगर स्वीकार नहीं करता है कोई दूसरा थी तो परिसर में आकर एक कदम ले लेता है जो बहुत दुखद है और किसी भी रूप में इसको स्वीकार नहीं करना चाहिए और एक लाल बत्ती है यह रेड सिग्नल है आजकल की पढ़ाई के प्रेशर को उसके लिए और माता-पिता उपेक्षा के लिए इतनी ज्यादा अपेक्षा विद्यार्थी जो हैं उनसे शिक्षक गण और खुद ही दिया थी और उनके माता-पिता ना रखें कि वह बच्चे डिप्रेशन में चले जाएं और इस तरह के अंतिम तक ले ले कुछ हासिल नहीं होता है इससे जैसा भी बात सारे जितने दिमाग से कोई फर्क नहीं पड़ता 25 पर सेंट कमाए तो लेकिन अगर मर जाती है पति हमारा परिवार समाज और देश रहेगा धन्यवाद

IIT ke 20 saal ke chatra depression mein aakar kiya kya hamara samaj baccho par bahut dabaav daal raha hai samaj baccho ke upar dabaav daal raha hai ya nahi daal raha hai yah toh dur ki baat hai lekin aajkal ki jo ATPG chopra aur uske baccho ke upar prabhav operation hota hai dimag par vaah toh khair padta hai aur uske sathi aaj kal ki jo vyavastha gender jo is samay love letter hote hain phir padhai kab kaisa hota hai it ki TV zyada hoti hai aur apne mata pita ki apekshayen bhi hoti hai aur pariksha mein acche marks lane ke liye depression mein chale jaate hain tension ke antim aur unhe depression ka shikaar ho gaye hain unhe khud ko maloom nahi hota ki unhe abhi kaunsaling ki zarurat hai unhe abhi salahkar ki zarurat hai unhe apne mata pita ke mukhya vakta ke roop mein bhi zarurat hai yah sab toh agar sweekar nahi karta hai koi doosra thi toh parisar mein aakar ek kadam le leta hai jo bahut dukhad hai aur kisi bhi roop mein isko sweekar nahi karna chahiye aur ek laal batti hai yah red signal hai aajkal ki padhai ke pressure ko uske liye aur mata pita upeksha ke liye itni zyada apeksha vidyarthi jo hain unse shikshak gan aur khud hi diya thi aur unke mata pita na rakhen ki vaah bacche depression mein chale jayen aur is tarah ke antim tak le le kuch hasil nahi hota hai isse jaisa bhi baat saare jitne dimag se koi fark nahi padta 25 par sent kamaye toh lekin agar mar jaati hai pati hamara parivar samaj aur desh rahega dhanyavad

आईआईटी के 20 साल के छात्र डिप्रेशन में आकर किया क्या हमारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डाल रह

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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

1:35
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जी हां मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं कि यह जितने भी बच्चों के छात्रों के सुसाइड के को कैसे जाते हैं कि बच्चे आए थे के एग्जाम में फेल हो गए तो मैं सुसाइड कर लिया इसमें बच्चे की कोई गलती नहीं बच्चे को कभी यह सिखाया ही नहीं जाता कि बेटा एग्जाम का फेलियर जीवन का क्लियर नहीं है जीवन बहुत बड़ी चीज है और एग्जाम बहुत छोटे मायने रखते हैं उसके सामने एग्जाम में फेल हो गए तो कोई बात नहीं उसके लिए से लेसन सीखना है पहले से दोस्ती करनी है हमें समाज हमें कभी फेयर को एक्सेप्ट करना ही नहीं सिखाता ना सीखने देता है तो इसमें बच्चे का तो कोई दोस्त नहीं होता और मैं आपकी इस बात से बहुत ज्यादा डिलीट कर पाती हूं क्योंकि मुझे भी यह चीज देखकर बहुत तकलीफ होती है मैं चाहती हूं मैं ऐसा कुछ करूं कि इस दुनिया में एक बच्चा भी कभी भी पढ़ाई को लेकर सुसाइड ना करें उसके दिमाग में यह ख्याल भी ना आए मैं इतनी अवेयरनेस लोगों में फैलाना चाहती हूं और उसी के लिए मैंने इतने तरह की कोशिश किए हैं मेरे पास इतनी तरह की स्टडी टेक्निक्स है कि कोई भी बच्चा जितने चाहे उतने नंबर तरीके से पढ़ना चाहती हूं मैं समाज को इस समस्या का पूर्ण रूप से समाधान दे सकूं और जिसके लिए मैं अपनी तरफ से कोशिश कर रही हूं आप सब अगर मेरा सपोर्ट करोगे तो मैं जरूर बहुत जल्दी अपने इस मिशन में कामयाब हो जाऊं कि दुनिया में कोई भी बचा पढ़ाई को लेकर सुसाइड ना करें चाहे वह फिर कोई भी एग्जाम है

ji haan main aapki baat se puri tarah se sahmat hoon ki yah jitne bhi baccho ke chhatro ke suicide ke ko kaise jaate hain ki bacche aaye the ke exam mein fail ho gaye toh main suicide kar liya isme bacche ki koi galti nahi bacche ko kabhi yah sikhaya hi nahi jata ki beta exam ka failure jeevan ka clear nahi hai jeevan bahut badi cheez hai aur exam bahut chote maayne rakhte hain uske saamne exam mein fail ho gaye toh koi baat nahi uske liye se Lesson sikhna hai pehle se dosti karni hai hamein samaj hamein kabhi fair ko except karna hi nahi sikhata na sikhne deta hai toh isme bacche ka toh koi dost nahi hota aur main aapki is baat se bahut zyada delete kar pati hoon kyonki mujhe bhi yah cheez dekhkar bahut takleef hoti hai chahti hoon main aisa kuch karu ki is duniya mein ek baccha bhi kabhi bhi padhai ko lekar suicide na kare uske dimag mein yah khayal bhi na aaye main itni awareness logo mein faillana chahti hoon aur usi ke liye maine itne tarah ki koshish kiye hain mere paas itni tarah ki study techniques hai ki koi bhi baccha jitne chahen utne number tarike se padhna chahti hoon main samaj ko is samasya ka purn roop se samadhan de saku aur jiske liye main apni taraf se koshish kar rahi hoon aap sab agar mera support karoge toh main zaroor bahut jaldi apne is mission mein kamyab ho jaaun ki duniya mein koi bhi bacha padhai ko lekar suicide na kare chahen vaah phir koi bhi exam hai

जी हां मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं कि यह जितने भी बच्चों के छात्रों के सुसाइड के

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Poornima Katyal

Psychologist

5:01
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

डिप्रेशन और सुसाइड केसेस बहुत बढ़ते जा रहे हैं हमारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डाल रहा है यह बात सही है कुछ हद तक हम बचपन से ही ऐसी सिचुएशंस क्रिएट करते हैं एक चीज होती है अनकंडीशनल लव मीन प्यार के लिए कोई शर्त नहीं है लेकिन हम बचपन से ही अगर आप अच्छे नंबर लाए तो अच्छी बात है अगर नहीं लाए तो मैं आपसे बात नहीं करूंगा हमारा प्यार का एक्सप्रेशन भी उनके परफॉर्मेंस और अचीवमेंट के साथ असोसिएट होना शुरू हो जाता है तो बचपन से ही यह भावना पैदा होने शुरू हो जाती है कि अगर हम परफॉर्म करेंगे तो ही हमारे मां-बाप हमें प्यार करेंगे उसके अलावा हम खेले और को बर्दाश्त नहीं कर पाते ना हमें पहले और की आदत होती है तो हम हमेशा अच्छी करना चाहते हैं अच्छा अच्छी करना चाहते हैं और दूसरों से मुकाबला होता है कि उसका बेटा यह बन गया तो मेरा बेटा ही क्यों नहीं बना उसकी बेटी नहीं है कि या तो मेरी बेटी है क्यों नहीं करेगी हर समय मां-बाप कंपैरिजन करते रहते हैं भाई यह नहीं करी कि सभी मां-बाप करते हैं पर हां काफी मां-बाप होते हैं जो कंपैरिजन करते हैं दूसरे बच्चों से तो उसका दर्शन में बच्चे उसी रोड में चलते जाते हैं कई बार ऐसा भी होता है कि उनका उस एरिया में इंटरेस्ट नहीं होता और चीजें ट्राई करना चाहते हैं बट पेरेंट्स जो है वह उसी उसी फील्ड में ही भेजना चाहते हैं क्योंकि उन्हें यह लगता है कि एक्स वाई जेड उसमें सक्सेसफुल इसमें बहुत स्कोप है तू मेरे बच्चे को भी वही करना चाहिए इस तरह से मानसिक दबाव दबाव बढ़ता जाता है बच्चों के और जब वो अजीब नहीं कर पाते या अप टू द एक्सपेक्टेशन नहीं कर पाते या बड़े कॉलेज में एक बार एडमिशन हो जाता है या उससे उस पर जाकर आप इतना अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाते तो बहुत से बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं और कुछ बहुत सुसाइड जैसे एक्सट्रीमटेक ले लेते हैं तो हमें अपने समाज को देखना है और इसमें सुधार करने की जरूरत है कि जिंदगी कहीं पर भी खत्म नहीं होती आपका कैरियर कहीं पर भी खत्म नहीं होता आप ऐसे बहुत सारे फील है जहां पर सक्सेसफुल हो सकते हैं सिर्फ इंजीनियरिंग या मेडिकल ही आपको सफलता नहीं प्राप्त कर आएगा आप बहुत सारे फील्ड में अच्छा परफॉर्मेंस एक अच्छा करियर बना सकते तो हमें अल्टरनेटर हमेशा ओपन रखने चाहिए जब हम अपने आप को क्लोज कर लेते हैं तब इस तरह की घटनाएं होती है कि अगर हम एक बार फेल भी हो गए या किसी ने हमें सफलता प्राप्त नहीं हुई तो इसका मतलब यह नहीं है कि अपनी जिंदगी को खत्म करें क्योंकि हिंदी में बहुत रास्ते हैं और हम उन रास्तों से चलकर पूरा जीवन सुखी और सफल बना सकते हैं मां-बाप को देखना चाहिए कि उनके बच्चों का इंटरेस्ट किस चीज में है उनकी कैपेबिलिटी किस चीज में है हर बच्चा हर चीज में कैपेबल नहीं हो सकता यहां हर बच्चे का इंटरेस्ट उनके हिसाब से नहीं हो सकता तो बच्चे का इंट्रेंस देखना और एप्टिट्यूड देखना एबिलिटी देखना बहुत जरूरी है कोई भी कैरियर डिसाइड करने से पहले और अगर कोई चीज चुनाव के बाद सक्सेसफुल नहीं होती या उसमें उतना शख्स नहीं मिलता तो दूसरे का ऑप्शन चुने जा सकते हैं हो सकता है कि कुछ समय के लिए जान आप उतरा अच्छा परफॉर्म ना करें तो आगे जाकर आप उसमें सफल हो सकते हैं तो पेरेंट्स को भी अपनी सोच बदलनी चाहिए और बच्चों को डिसीजन मेकिंग में डिसीजन मेकिंग का देना चाहिए

depression aur suicide cases bahut badhte ja rahe hain hamara samaj baccho par bahut dabaav daal raha hai yah baat sahi hai kuch had tak hum bachpan se hi aisi sichueshans create karte hain ek cheez hoti hai unconditional love meen pyar ke liye koi sart nahi hai lekin hum bachpan se hi agar aap acche number laye toh achi baat hai agar nahi laye toh main aapse baat nahi karunga hamara pyar ka expression bhi unke performance aur achievement ke saath associate hona shuru ho jata hai toh bachpan se hi yah bhavna paida hone shuru ho jaati hai ki agar hum perform karenge toh hi hamare maa baap hamein pyar karenge uske alava hum khele aur ko bardaasht nahi kar paate na hamein pehle aur ki aadat hoti hai toh hum hamesha achi karna chahte hain accha achi karna chahte hain aur dusro se muqabla hota hai ki uska beta yah ban gaya toh mera beta hi kyon nahi bana uski beti nahi hai ki ya toh meri beti hai kyon nahi karegi har samay maa baap kampairijan karte rehte hain bhai yah nahi kari ki sabhi maa baap karte hain par haan kaafi maa baap hote hain jo kampairijan karte hain dusre baccho se toh uska darshan mein bacche usi road mein chalte jaate hain kai baar aisa bhi hota hai ki unka us area mein interest nahi hota aur cheezen try karna chahte hain but parents jo hai vaah usi usi field mein hi bhejna chahte hain kyonki unhe yah lagta hai ki x why z usme successful isme bahut scope hai tu mere bacche ko bhi wahi karna chahiye is tarah se mansik dabaav dabaav badhta jata hai baccho ke aur jab vo ajib nahi kar paate ya up to the expectation nahi kar paate ya bade college mein ek baar admission ho jata hai ya usse us par jaakar aap itna accha perform nahi kar paate toh bahut se bacche depression mein chale jaate hain aur kuch bahut suicide jaise eksatrimatek le lete hain toh hamein apne samaj ko dekhna hai aur isme sudhaar karne ki zarurat hai ki zindagi kahin par bhi khatam nahi hoti aapka carrier kahin par bhi khatam nahi hota aap aise bahut saare feel hai jaha par successful ho sakte hain sirf Engineering ya medical hi aapko safalta nahi prapt kar aayega aap bahut saare field mein accha performance ek accha career bana sakte toh hamein alternator hamesha open rakhne chahiye jab hum apne aap ko close kar lete hain tab is tarah ki ghatnaye hoti hai ki agar hum ek baar fail bhi ho gaye ya kisi ne hamein safalta prapt nahi hui toh iska matlab yah nahi hai ki apni zindagi ko khatam kare kyonki hindi mein bahut raste hain aur hum un raston se chalkar pura jeevan sukhi aur safal bana sakte hain maa baap ko dekhna chahiye ki unke baccho ka interest kis cheez mein hai unki capability kis cheez mein hai har baccha har cheez mein capable nahi ho sakta yahan har bacche ka interest unke hisab se nahi ho sakta toh bacche ka interest dekhna aur eptityud dekhna ability dekhna bahut zaroori hai koi bhi carrier decide karne se pehle aur agar koi cheez chunav ke baad successful nahi hoti ya usme utana sakhs nahi milta toh dusre ka option chune ja sakte hain ho sakta hai ki kuch samay ke liye jaan aap utara accha perform na kare toh aage jaakar aap usme safal ho sakte hain toh parents ko bhi apni soch badalni chahiye aur baccho ko decision making mein decision making ka dena chahiye

डिप्रेशन और सुसाइड केसेस बहुत बढ़ते जा रहे हैं हमारा समाज बच्चों पर बहुत दबाव डाल रहा है य

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Upasana Shownkeen

Psychologist

1:28
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां हमारा समाज बच्चों पर दबाव जरूर डाल रहा है पर यह खास करके आया है कि जैसे बड़े इंस्टिट्यूट में होता है जहां पर एंट्री मिलना बहुत मुश्किल होता है अगर वहां पर एंट्री मिली तो वहां का कोर्स खत्म करना यह एक बहुत बड़ा प्रश्न होता है बच्चे के ऊपर तो ऐसे ऐसे केस में जब बच्चे उसको नहीं कर पाते हैं कहीं पर अटक जाते हैं तो वह डिप्रेशन का शिकार होते हैं वह सुसाइड की तरफ बढ़ जाते हैं तो हमारे समाज को जो है इसमें थोड़ा बदलाव लाना चाहिए समाज ऐसा होना चाहिए जो सबको अपनाए चाहे कोई आया टीका हो या ना हो पर यह समाज जो है वह सब को प्यार दे क्योंकि कोई भी इंस्टिट्यूट से बचा पड़े बट हर एक बच्चा हमारे देश में अपना एक भाग निभा रहा है और देश की इकोनॉमी में अपना एक रोल प्ले करें यह समाज में यह बदलाव आएगा तब यह सुसाइड जो है यह प्रेशर जो है पटना कम हो जाएगा और यह मां बाप के भी ऊपर होता है मां-बाप भी यह चीज समझे कि उनके बच्चे जो है वह मेहनत कर रहे हैं वह कोशिश कर रहे हैं पर उनके ऊपर ज्यादा दबाव डालना यह उचित नहीं है क्योंकि हमेशा वह ठीक कर पाएंगे ऐसा सच में पॉसिबल नहीं है कभी-कभी वह फेल भी होंगे तो उनके फैलियर्स को स्वीकारना भी जरूरी है

haan hamara samaj baccho par dabaav zaroor daal raha hai par yah khaas karke aaya hai ki jaise bade institute mein hota hai jaha par entry milna bahut mushkil hota hai agar wahan par entry mili toh wahan ka course khatam karna yah ek bahut bada prashna hota hai bacche ke upar toh aise aise case mein jab bacche usko nahi kar paate hain kahin par atak jaate hain toh vaah depression ka shikaar hote hain vaah suicide ki taraf badh jaate hain toh hamare samaj ko jo hai isme thoda badlav lana chahiye samaj aisa hona chahiye jo sabko apnaye chahen koi aaya tika ho ya na ho par yah samaj jo hai vaah sab ko pyar de kyonki koi bhi institute se bacha pade but har ek baccha hamare desh mein apna ek bhag nibha raha hai aur desh ki economy mein apna ek roll play kare yah samaj mein yah badlav aayega tab yah suicide jo hai yah pressure jo hai patna kam ho jaega aur yah maa baap ke bhi upar hota hai maa baap bhi yah cheez samjhe ki unke bacche jo hai vaah mehnat kar rahe hain vaah koshish kar rahe hain par unke upar zyada dabaav dalna yah uchit nahi hai kyonki hamesha vaah theek kar payenge aisa sach mein possible nahi hai kabhi kabhi vaah fail bhi honge toh unke failiyars ko swikarana bhi zaroori hai

हां हमारा समाज बच्चों पर दबाव जरूर डाल रहा है पर यह खास करके आया है कि जैसे बड़े इंस्टिट्य

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Dr. Hemlata Gupta

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने बहुत अच्छा सवाल किया शायद आप पहले व्यक्ति हैं जितने इस बात को शायद समझा और पूछने का प्रयास किया हम सच्चाई में ही अपने बच्चों पर बहुत दबाव डाल रहे हैं क्योंकि हम खुद इतने इन सिक्योर हैं कि हमारा फ्यूचर क्या होगा जब भी आप फ्यूचर की सोचते हैं या बच्चों की सोचते हैं तो आप प्रेजेंट में नहीं रहते और आप उसका प्रेशर अपने बच्चों पर देते हैं जो हमें नहीं करना चाहिए हम अपनी मर्जी से पेरेंट्स बनते हैं हमें कोई जबरदस्ती इनवाइट नहीं करता कि यू हाउ टू बिकम अ पा रहे थे इसलिए अपनी इच्छाओं और अपनी इमोशन का हमें अपने बच्चों पर नहीं डालना चाहिए अगर हम यह सीख जाएंगे तो शायद हम अपनी फ्यूचर जनरेशन को बहुत कुछ अच्छा दे पाएंगे कौन थी

aapne bahut accha sawaal kiya shayad aap pehle vyakti hain jitne is baat ko shayad samjha aur poochne ka prayas kiya hum sacchai mein hi apne baccho par bahut dabaav daal rahe hain kyonki hum khud itne in secure hain ki hamara future kya hoga jab bhi aap future ki sochte hain ya baccho ki sochte hain toh aap present mein nahi rehte aur aap uska pressure apne baccho par dete hain jo hamein nahi karna chahiye hum apni marji se parents bante hain hamein koi jabardasti invite nahi karta ki you how to become a paa rahe the isliye apni ikchao aur apni emotion ka hamein apne baccho par nahi dalna chahiye agar hum yah seekh jaenge toh shayad hum apni future generation ko bahut kuch accha de payenge kaun thi

आपने बहुत अच्छा सवाल किया शायद आप पहले व्यक्ति हैं जितने इस बात को शायद समझा और पूछने का प

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नवादा डाल रहे हैं तो दवा डालें तो कोई गलत गलत चीज के लिए दबाव डाल रहे हैं अच्छाई के लिए लड़कों को भी सोचना चाहिए कि हमारे मां-बाप अच्छे के लिए हमको कुछ जोर दे रहे हैं कि डिप्रेशन में जाने की जरूरत है दिल लगाकर मन लगाकर पढ़ाई करो कोशिश करो

nawada daal rahe hain toh dawa Daalein toh koi galat galat cheez ke liye dabaav daal rahe hain acchai ke liye ladko ko bhi sochna chahiye ki hamare maa baap acche ke liye hamko kuch jor de rahe hain ki depression me jaane ki zarurat hai dil lagakar man lagakar padhai karo koshish karo

नवादा डाल रहे हैं तो दवा डालें तो कोई गलत गलत चीज के लिए दबाव डाल रहे हैं अच्छाई के लिए लड

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