क्या होता है हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद?...


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हमारी आत्मा शरीर से आ जाती है और वह दूसरे लोग में चली जाती है दूसरा जन्म धारण कर लेती है वापस से पंजीबद्ध हो जाता है

hamari aatma sharir se aa jaati hai aur vaah dusre log mein chali jaati hai doosra janam dharan kar leti hai wapas se panjibddh ho jata hai

हमारी आत्मा शरीर से आ जाती है और वह दूसरे लोग में चली जाती है दूसरा जन्म धारण कर लेती है व

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Vedachary Pathak Singrauli

सनातन सुरक्षा परिषद् संस्थापक

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हर दोस्त नमस्कार आपने पूछा है क्या होता है हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद दिखे गीता के अनुसार अगर हम बताए तो गीता कहती है कि आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाती है सेट को छोड़ने का तात्पर्य कि वह जीव या वह शरीर मृतक हो जाती है और जैसे मृतक होती है मर जाती है शरीर वैसे ही आत्मा दूसरे शहर में प्रवेश कर जाती है

har dost namaskar aapne poocha hai kya hota hai hamari aatma ka mrityu ke baad dikhe geeta ke anusaar agar hum bataye toh geeta kehti hai ki aatma ek sharir ko chhodkar dusre sharir mein pravesh kar jaati hai set ko chodne ka tatparya ki vaah jeev ya vaah sharir mritak ho jaati hai aur jaise mritak hoti hai mar jaati hai sharir waise hi aatma dusre shehar mein pravesh kar jaati hai

हर दोस्त नमस्कार आपने पूछा है क्या होता है हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद दिखे गीता के अनुसा

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Megh Achaarya

vastu Expert,Motivational Speaker Meditation Studio.

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देखिए अगर आप शास्त्रों के हिसाब से चलेंगे तो आपकी आत्मा फिर से दोबारा ऊर्जा के रूप में कहीं ना कहीं दोबारा से कहीं फिर से किस जीव के अंदर जीवन लेती है अगर शास्त्र में चले लेकिन इस बात को बहुत कम लोग समझेंगे या मानेंगे तो हम उसको वैज्ञानिक दृष्टि से देखते हैं साइंटिफिक तरीके से देखते हैं हम हमारे अंदर एक उर्जा है जिसकी वजह से हमारा जीवन चल रहा है इस ऊर्जा को समझ लीजिए यह ऊर्जा जब आपका शरीर नष्ट हो जाएगा तो यह ऊर्जा आपके शरीर से बाहर निकल जाते हैं ठीक है और यह ऊर्जा फिर इस प्रकृति के अंदर कहीं ना कहीं किसी दूसरे जीव के अंदर जीवन लेती है उर्जा कभी नष्ट नहीं हो सकती तो हमारी मृत्यु के बाद हमारी उर्जा का यही होता है लेकिन कुछ योगी पुरुष जो उस ऊर्जा का सही इस्तेमाल करते हैं जो उसको सजते हैं साधना करते हैं उस ऊर्जा को अपने सातों चक्रों में प्रवाहित करते हैं उस ऊर्जा को और पॉजिटिविटी देते हैं और उसको खाना देते हैं अच्छा खाना देते हैं जो उसको अच्छी चीजें देते हैं उस ऊर्जा को ऊर्जा उसी स्थिति में रहते हुए उसके आगे का सफर तय करती है बहुत-बहुत धन्यवाद मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं

dekhiye agar aap shastron ke hisab se chalenge toh aapki aatma phir se dobara urja ke roop mein kahin na kahin dobara se kahin phir se kis jeev ke andar jeevan leti hai agar shastra mein chale lekin is baat ko bahut kam log samjhenge ya manenge toh hum usko vaigyanik drishti se dekhte hain scientific tarike se dekhte hain hum hamare andar ek urja hai jiski wajah se hamara jeevan chal raha hai is urja ko samajh lijiye yah urja jab aapka sharir nasht ho jaega toh yah urja aapke sharir se bahar nikal jaate hain theek hai aur yah urja phir is prakriti ke andar kahin na kahin kisi dusre jeev ke andar jeevan leti hai urja kabhi nasht nahi ho sakti toh hamari mrityu ke baad hamari urja ka yahi hota hai lekin kuch yogi purush jo us urja ka sahi istemal karte hain jo usko sajate hain sadhna karte hain us urja ko apne saton chakron mein pravahit karte hain us urja ko aur positivity dete hain aur usko khana dete hain accha khana dete hain jo usko achi cheezen dete hain us urja ko urja usi sthiti mein rehte hue uske aage ka safar tay karti hai bahut bahut dhanyavad meri subhkamnaayain aapke saath hain

देखिए अगर आप शास्त्रों के हिसाब से चलेंगे तो आपकी आत्मा फिर से दोबारा ऊर्जा के रूप में कही

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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देखिए आत्मा तो आप सो में यह शरीर तो मीठा है तो आत्मा जैसी अभी शरीर में रहती है ऐसे ही स्टाइल के बाद देती है आपका मुंह ही शरीर को अपना मानना है वास्तव में तो आप आत्मस्वरूप यह आपकी है पसंद कीजिए कि हमें मृत्यु के बाद कहां जाना है आप यह कैसे कह सकते हैं कि हमारी आत्मा मृत्यु के बाद कहां जाएगी क्या आप आत्मा से भिन्न शरीर है जो आप आत्मा के विषय में प्रश्न करें हैं हम आत्मा है खुद सोचिए की मृत्यु के बाद आपका आपका अस्तित्व आत्मा है ना कि यह सही है

dekhiye aatma toh aap so mein yah sharir toh meetha hai toh aatma jaisi abhi sharir mein rehti hai aise hi style ke baad deti hai aapka mooh hi sharir ko apna manana hai vaastav mein toh aap aatmyaswaroop yah aapki hai pasand kijiye ki hamein mrityu ke baad kahaan jana hai aap yah kaise keh sakte hain ki hamari aatma mrityu ke baad kahaan jayegi kya aap aatma se bhinn sharir hai jo aap aatma ke vishay mein prashna kare hain hum aatma hai khud sochiye ki mrityu ke baad aapka aapka astitva aatma hai na ki yah sahi hai

देखिए आत्मा तो आप सो में यह शरीर तो मीठा है तो आत्मा जैसी अभी शरीर में रहती है ऐसे ही स्टा

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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Dhananjay Singh

Social Worker

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आपने पूछा क्या होता है हमारी आत्मा का मिल्कीपुर आंखों जैसा वार्तालाप कर रहे तुम आत्मा का वजन होता है ना मन होता है अतः सनातन कालो सैनिक के पदार्थ है और परमात्मा का अंश है कौन कह दिया तुम्हें क्या तमा का जन्म होता है मन होता है यह शरीर का जन्म मरण होता है और आत्मा की व्यवस्थाएं होता है उसकी अवस्थाएं कारण आत्मा को दुख झेलना पड़ता है दुख सुख का आभास होता है शरीर में कोई चोट ला है सीधा दर्द आत्मा का होता है क्यों होता है क्योंकि वह अवस्थाएं में घिरा हुआ है जब अंतिम अवस्था महात्मा अपना स्वरूप में जो भी मोक्ष संभव है फिर उसे कोई दुख नहीं हो सकता कोई सीमा नहीं सकता चला नहीं सकता सत्य से अलग हो जाता है परमात्मा है मिल जाता है नानी जी घर पर चला जाता है आत्मा शरीर में उपस्थित चेतन पदार्थ है जो तुम हो हम हैं सर अजीब है सब हटा रहे हैं 8400000 से निकलना चाहते हो दिव्यंग आयोग का प्रणाली जीतेगी निकला जाता है नाचे मोर के शरीर का सारा सिस्टम है दोस्त आजा मेरी वेबसाइट पर देख

aapne poocha kya hota hai hamari aatma ka milkipur aankho jaisa vartalaap kar rahe tum aatma ka wajan hota hai na man hota hai atah sanatan kalo sainik ke padarth hai aur paramatma ka ansh hai kaun keh diya tumhe kya tama ka janam hota hai man hota hai yah sharir ka janam maran hota hai aur aatma ki vyavasthaen hota hai uski avasthae karan aatma ko dukh jhelna padta hai dukh sukh ka aabhas hota hai sharir mein koi chot la hai seedha dard aatma ka hota hai kyon hota hai kyonki vaah avasthae mein ghira hua hai jab antim avastha mahatma apna swaroop mein jo bhi moksha sambhav hai phir use koi dukh nahi ho sakta koi seema nahi sakta chala nahi sakta satya se alag ho jata hai paramatma hai mil jata hai naani ji ghar par chala jata hai aatma sharir mein upasthit chetan padarth hai jo tum ho hum hain sir ajib hai sab hata rahe hain 8400000 se nikalna chahte ho divyang aayog ka pranali jitegi nikala jata hai nache mor ke sharir ka saara system hai dost aajad meri website par dekh

आपने पूछा क्या होता है हमारी आत्मा का मिल्कीपुर आंखों जैसा वार्तालाप कर रहे तुम आत्मा का व

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Kesharram

Teacher

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क्या पता हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद दोस्तों हमारी आत्मा है वह परमात्मा में मिलन हो जाता है और मिलन होने के बाद में दोस्तों उसका शरीर वह दूसरा धारण कर लेती है और दोस्तों दूसरे वह किसी भी रुप में धारण कर सकते हैं यह जरूरी नहीं है कि वापिस मनुष्य जीवन में वह धारण कर सकते हैं किसी अन्य रूप में भी होता रन कर सकता है इसलिए दोस्तों आत्मा हमेशा यह है कि अपना स्वरूप बदलते रहते हैं और नए शरीर के रूप में विसर्जित होते रहते हैं आगे से आगे गमन करते रहते हैं आशा करता हूं यह सर जी द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होगी धन्यवाद दोस्तों से

kya pata hamari aatma ka mrityu ke baad doston hamari aatma hai vaah paramatma mein milan ho jata hai aur milan hone ke baad mein doston uska sharir vaah doosra dharan kar leti hai aur doston dusre vaah kisi bhi roop mein dharan kar sakte hain yah zaroori nahi hai ki vaapas manushya jeevan mein vaah dharan kar sakte hain kisi anya roop mein bhi hota run kar sakta hai isliye doston aatma hamesha yah hai ki apna swaroop badalte rehte hain aur naye sharir ke roop mein visarjit hote rehte hain aage se aage gaman karte rehte hain asha karta hoon yah sir ji dwara di gayi jaankari se aap santusht hogi dhanyavad doston se

क्या पता हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद दोस्तों हमारी आत्मा है वह परमात्मा में मिलन हो जाता

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Er Jaisingh

Mathematics Solution, 1:00PM TO 2:00PM

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क्या होता हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद यदि आत्मा ज्यादा सस्ता ली होती है तो है अंतरिक्ष में यानी ब्रह्मांड में सबसे ऊपर चली जाती है ताली नहीं होती है तो घूमती रहती है जिस तरह से यहां पर जितने मनुष्य प्राणी जगत में जो शादी होता है वह अंग नहीं बढ़ने देता हितैषी नहीं है तो व्यापार मंडल में घूमती रहती है कुछ दूरी तक उसके बाद और सच्चा लिए तो और ऊंची चली जाती और शक्तिशाली है तो और ऊंची चली जाती है नहीं तो भटकती रहती है ब्रह्मांड में यानी भाई मंडल और सो 1 साल तक भटकने के पहले जन्म ले लेती अब किसी भी प्राणी जगत में किसी भी और पशु पक्षी या मनुष्य जैसे उसके विचार होते हैं बस उसी विचारधाराओं के अधीनस्थ हो उसके शरीर में प्रविष्ट हो जाती है धन्यवाद

kya hota hamari aatma ka mrityu ke baad yadi aatma zyada sasta li hoti hai toh hai antariksh mein yani brahmaand mein sabse upar chali jaati hai tali nahi hoti hai toh ghoomti rehti hai jis tarah se yahan par jitne manushya prani jagat mein jo shadi hota hai vaah ang nahi badhne deta hitaishi nahi hai toh vyapar mandal mein ghoomti rehti hai kuch doori tak uske baad aur saccha liye toh aur uchi chali jaati aur shaktishali hai toh aur uchi chali jaati hai nahi toh bhatakti rehti hai brahmaand mein yani bhai mandal aur so 1 saal tak bhatakne ke pehle janam le leti ab kisi bhi prani jagat mein kisi bhi aur pashu pakshi ya manushya jaise uske vichar hote hain bus usi vichardharaon ke adhinasth ho uske sharir mein pravisht ho jaati hai dhanyavad

क्या होता हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद यदि आत्मा ज्यादा सस्ता ली होती है तो है अंतरिक्ष मे

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मृत्यु के पश्चात हमारी आत्मा का निर्माण करके जवाब हमारे कर्म के द्वारा जो हमारा स्वभाव बनना चाहता है उसी के प्रभाव के साथ हमारी आत्मा

mrityu ke pashchat hamari aatma ka nirmaan karke jawab hamare karm ke dwara jo hamara swabhav banna chahta hai usi ke prabhav ke saath hamari aatma

मृत्यु के पश्चात हमारी आत्मा का निर्माण करके जवाब हमारे कर्म के द्वारा जो हमारा स्वभाव बनन

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मृत्यु के बाद हमारी आत्मा को क्या होती है यह क्या मतलब है आपका गुस्सा नहीं है ना जब तक उस आत्मा आत्मा है अच्छे बुरे कर्मों की सजा नहीं मिल जाती तब तक वह किसी और शरीर में धारण नहीं करते हम ने जितने अच्छे बुरे कर्म किए हैं उसकी उसकी गिनती होती और उसकी भरपाई करनी पड़ती है इसके बाद ही आत्मा का आत्मा को दूसरी शरीर दूसरे शरीर में प्रवेश करने की आदेश मिलती हैं

mrityu ke baad hamari aatma ko kya hoti hai yah kya matlab hai aapka gussa nahi hai na jab tak us aatma aatma hai acche bure karmon ki saza nahi mil jaati tab tak vaah kisi aur sharir mein dharan nahi karte hum ne jitne acche bure karm kiye hain uski uski ginti hoti aur uski bharpai karni padti hai iske baad hi aatma ka aatma ko dusri sharir dusre sharir mein pravesh karne ki aadesh milti hain

मृत्यु के बाद हमारी आत्मा को क्या होती है यह क्या मतलब है आपका गुस्सा नहीं है ना जब तक उस

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Raghuveer Singh

👤Teacher & Advisor🙏

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क्या होता है हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद आत्मा एक स्थिर विद्युत आवेश होता है शास्त्रों के अनुसार भी आत्मा नहीं कहीं जाती है और न कहीं आती है हमारे जो तीन शरीर होते हैं स्कूल शरीर सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर जब व्यक्ति की मृत्यु अर्थात यह जो स्थूल शरीर है जो इस प्रकृति से बना है इस प्रकृति में मिल जाता है तब कारण और सूक्ष्म शरीर है वह जो भी यहां हिंगारा दीपा ले गई हैं उन सब को लेकर की दूसरी योनियों में जाता है आत्मा फिर है वह आत्मा दूसरे शरीर को पकड़ लेती है इस प्रकार से आत्मा में कोई भी परिवर्तन नहीं होता या आत्मा कहीं जाती आती नहीं है

kya hota hai hamari aatma ka mrityu ke baad aatma ek sthir vidyut aavesh hota hai shastron ke anusaar bhi aatma nahi kahin jaati hai aur na kahin aati hai hamare jo teen sharir hote hain school sharir sukshm sharir aur karan sharir jab vyakti ki mrityu arthat yah jo sthool sharir hai jo is prakriti se bana hai is prakriti mein mil jata hai tab karan aur sukshm sharir hai vaah jo bhi yahan hingara deepa le gayi hain un sab ko lekar ki dusri yoniyon mein jata hai aatma phir hai vaah aatma dusre sharir ko pakad leti hai is prakar se aatma mein koi bhi parivartan nahi hota ya aatma kahin jaati aati nahi hai

क्या होता है हमारी आत्मा का मृत्यु के बाद आत्मा एक स्थिर विद्युत आवेश होता है शास्त्रों के

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Aryan Mishra

KOI Nahi

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हिंदी पौराणिक धर्म के अनुसार भारत में मृत्यु के बाद अपने द्वारा किए गए कर्मों के अनुसार सुख और दुखों का अनुभव करता है

hindi pouranik dharm ke anusaar bharat mein mrityu ke baad apne dwara kiye gaye karmon ke anusaar sukh aur dukhon ka anubhav karta hai

हिंदी पौराणिक धर्म के अनुसार भारत में मृत्यु के बाद अपने द्वारा किए गए कर्मों के अनुसार सु

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आपका सवार है क्या होता है हमारी आत्मा के मृत्यु के बाद आत्मा की मृत्यु नहीं होती है यह आप लोग ध्यान में रखें आत्मा अमर है अजय सतना की मृत्यु नहीं होती है आत्मा अमर है

aapka savar hai kya hota hai hamari aatma ke mrityu ke baad aatma ki mrityu nahi hoti hai yah aap log dhyan mein rakhen aatma amar hai ajay satna ki mrityu nahi hoti hai aatma amar hai

आपका सवार है क्या होता है हमारी आत्मा के मृत्यु के बाद आत्मा की मृत्यु नहीं होती है यह आप

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