मैं एक टीनेजर हूँ, मुझे समझ नहीं आ रहा की दिल से सोच कर प्यार करूँ या दिमाग़ से?...


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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

1:30

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब कोई लड़का या लड़की अपने टीनएज में होता है तो मुझे लगता है कि उनका जो प्यार होता है वह ज्यादातर दिल से ही होता है और दिमाग उसमें बिल्कुल नहीं होता क्योंकि उस समय हम लोग ऐसे भी प्यार में दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते हैं और दिल से जो चीज हमें अच्छी लग जाती है वह पसंद आ जाती है तो यही चीजें प्यार में भी लागू होती है अगर कोई लड़का है और उसे कोई लड़की अच्छी लग गई तो उसमें वह ज्यादा दिमाग नहीं लगाता है कि भविष्य में हमारा क्या होगा यह लड़की कैसी है लेकिन जब हम बड़े होते हैं तो काफी चीजें सोचने लगते हैं और दिमाग का सहारा लेते हैं कि यह लड़की या फिर यह लड़का हमारे फ्यूचर के लिए सही है या फिर नहीं है लेकिन जब हम टीनएज में अपने होते हैं तो ज्यादातर चीजे दिमाग से नहीं सोचते हैं और बस प्यार हो जाता है तो मुझे लगता है टीनएज में जो प्यार होता है वही ज्यादा बेहतर है क्योंकि इसमें बिल्कुल भी दिमाग का कोई रोल नहीं है और दिल से जो प्यार होता है वही बेहतर है ना कि दिमाग से

jab koi ladka ya ladki apne teenage mein hota hai toh mujhe lagta hai ki unka jo pyar hota hai vaah jyadatar dil se hi hota hai aur dimag usme bilkul nahi hota kyonki us samay hum log aise bhi pyar mein dimag ka zyada istemal nahi karte hain aur dil se jo cheez hamein achi lag jaati hai vaah pasand aa jaati hai toh yahi cheezen pyar mein bhi laagu hoti hai agar koi ladka hai aur use koi ladki achi lag gayi toh usme vaah zyada dimag nahi lagaata hai ki bhavishya mein hamara kya hoga yah ladki kaisi hai lekin jab hum bade hote hain toh kaafi cheezen sochne lagte hain aur dimag ka sahara lete hain ki yah ladki ya phir yah ladka hamare future ke liye sahi hai ya phir nahi hai lekin jab hum teenage mein apne hote hain toh jyadatar chije dimag se nahi sochte hain aur bus pyar ho jata hai toh mujhe lagta hai teenage mein jo pyar hota hai wahi zyada behtar hai kyonki isme bilkul bhi dimag ka koi roll nahi hai aur dil se jo pyar hota hai wahi behtar hai na ki dimag se

जब कोई लड़का या लड़की अपने टीनएज में होता है तो मुझे लगता है कि उनका जो प्यार होता है वह ज

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Ambuj Singh

Media Professional

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

टीनएज में प्यार दिल से ही होता है दिमाग से नहीं वैसे प्यार हमेशा दिल से ही होता है उसमे दिमाग अगर आ गया तो फिर वह प्यार नहीं आ पर जहां तक TVS का सवाल है जिसे हम प्यार बोलते हैं वह एक सरीफ प्यार नहीं बल्कि वह इन सेट क्वेश्चन होता है वह अट्रेक्शन होता है वह Crush होता है कहने का मतलब यह है कि उसे देश में लोग प्यार की सही भाषा सही पूछो तो सही मायने शांति नहीं है उन्हें जो भी कोई एक नजर में एक रुप में पसंद आ जाता है जैसे कि कृपया समझने लगता है लेकिन यह आंचल में प्यार नहीं है बस पीने से मैं जो लोग होते हैं वैसे उसको प्यार मान बैठते हैं और जैसे ही वह तीन अवस्था से बाहर आते हैं तो उन्हें लगता है कि वह प्यार नहीं था वह अट्रेक्शन था वह Crush था वह बस एक फर्स्ट लुक में जो किसी को कोई पसंद आ जाता है तो उसे वह प्यार समझ में

teenage mein pyar dil se hi hota hai dimag se nahi waise pyar hamesha dil se hi hota hai usme dimag agar aa gaya toh phir vaah pyar nahi aa par jaha tak TVS ka sawaal hai jise hum pyar bolte hain vaah ek sarif pyar nahi balki vaah in set question hota hai vaah attraction hota hai vaah Crush hota hai kehne ka matlab yah hai ki use desh mein log pyar ki sahi bhasha sahi pucho toh sahi maayne shanti nahi hai unhe jo bhi koi ek nazar mein ek roop mein pasand aa jata hai jaise ki kripya samjhne lagta hai lekin yah aanchal mein pyar nahi hai bus peene se main jo log hote hain waise usko pyar maan baithate hain aur jaise hi vaah teen avastha se bahar aate hain toh unhe lagta hai ki vaah pyar nahi tha vaah attraction tha vaah Crush tha vaah bus ek first look mein jo kisi ko koi pasand aa jata hai toh use vaah pyar samajh mein

टीनएज में प्यार दिल से ही होता है दिमाग से नहीं वैसे प्यार हमेशा दिल से ही होता है उसमे दि

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Ridhima

Mass Communications Student

0:27
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पीरियड्स में जातक जो डिसीजन सोते हैं वह ज्यादा दिल से ही लिए जाते MP3 एक पैसा एक एक हो गया है जहां पूरे बच्चे भी नहीं रहते एडल्ट भी नहीं देते वही दिल क्यों बन जाता है जिसमें हम खुद कंफ्यूज रहते कि हमें करना क्या है हमें जिंदगी ना असली करना क्या है तो इसलिए ज्यादातर सारे डिफरेंस होता है जैसे प्यार कभी वह भी ज्यादा दिल से ही लिया जाता है

periods mein jatak jo decision sote hain vaah zyada dil se hi liye jaate MP3 ek paisa ek ek ho gaya hai jaha poore bacche bhi nahi rehte adult bhi nahi dete wahi dil kyon ban jata hai jisme hum khud confuse rehte ki hamein karna kya hai hamein zindagi na asli karna kya hai toh isliye jyadatar saare difference hota hai jaise pyar kabhi vaah bhi zyada dil se hi liya jata hai

पीरियड्स में जातक जो डिसीजन सोते हैं वह ज्यादा दिल से ही लिए जाते MP3 एक पैसा एक एक हो गया

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