IIT-IIM सिविल सेवा पृष्ठभूमि होने के बाद भी आचार्य प्रशांत ने आध्यात्मिकता को क्यों चुना?...


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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

1:24
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आचार्य प्रशांत

IIT-IIM Alumnus, Ex Civil Services Officer, Mystic

9:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कुछ लोग भाग भाग के कैरियर बनाते हैं मैं शायद रुक रुक के बना रहा हूं गा कितना तुमने पक्का ही माना है कि कैरियर तो बनाना ही बनाना है यह धारणा बिल्कुल पक्की है कि कोई कुछ करता है कैरियर बनाने को कोई कुछ करता है आचार्य जीबीसीबी चमकारे ऊपर कहीं कोई बड़ा पद होगा फिर वहां पर आवेदन भेजेंगे बेटा रुकने का मतलब निष्क्रिय हो जाना नहीं होता अगर तुम कह रहे हो कि सब भाग रहे हैं मैं रुक गया और पूछ रहे हो कि तुम कैसे रखोगे तो तुम भी बिल्कुल वैसे ही रुकोगे जैसे मैं रुक गया रुक ना सबका एक जैसा होता है जैसे अलग-अलग श्रेणियों में कोई भेद नहीं होता कुछ और कुछ में भेद हो सकता है ना कुछ और ना कुछ में कैसे भेद होगा रुकना सबका एक जैसा होता है लेकिन मैंने कहा रुकने का मतलब निष्क्रियता नहीं होता मैं रुकने के बाद जो कर रहा हूं इसलिए कर रहा हूं क्योंकि तुम नहीं रुके अभी मैं तो रुक गया हूं पर आसपास की स्थितियां अभी निशान थे नानंद युक्त आसपास की स्थितियां बदल तुम्हें वह करना बड़े मजे से छोड़ दूं जो मैं कर रहा हूं मैं जो कर रहा हूं कर नहीं है मजबूरी है खतियां बदल जाएंगी तो भी निष्क्रिय नहीं हो जाऊंगा जाएंगे एक बात पक्की अभी भी रुक कर के कर रहा हूं और स्थितियां बदल गई तो भी रुके रुके ही करूंगा पर जो कर रहा हूं वह है तो स्थिति सापेक्ष थी वह निर्भर तो इसी पर करता है कि दुनिया की हालत क्या है तुम भी जब रुक जाओगे तो कोई आवश्यक नहीं है कि वही करने लग जाओ जो मैं कर रहा हूं रुकना हमारा और तुम्हारा एक जैसा होगा प्रियाए हमारी तुम्हारी एक जैसी हो जरूरी नहीं है तुम वह भी कर सकते हो जो मैं कर रहा हूं तुम मेरे पास भी आ सकते हो तो मुझसे दूर भी रह सकते हो तुम किसी दूसरे तरीके से भी अपने दायित्व को अपनी अच्छा लगता को अभिव्यक्ति दे सकते हो एक बात पक्की होगी कि तुम्हारी अभिव्यक्ति तुम्हारे किसी सुंदर लाभ के लिए नहीं होगी तुम्हारी अभिव्यक्ति पूर्णतया स्थापित होगी जो कुछ कर रहे होगे आसपास के मौसम को देखकर कर रहे होगे आसपास के हाल को देखकर कर रहे हो मुझे गुरु या चिकित्सक बने रहने में कोई व्यक्तिगत रुचि नहीं है बल्कि कई दफे तो यह बात दोस्ती हो जाती है दुनिया में ही कोई विषाणु फैल गया उसने महामारी जैसी स्थिति लादी हो और चारा क्या है मेरे पास चिकित्सक का किरदार अदा करने के अलावा अब तो सो जाओ खेलना कूदना शुरू कर दो फिर चिकित्सा कौन करना चाहता है मैं भी दवाखाना बंद कर लूंगा शटर गिरा लूंगा और तुम्हारे साथ खेलने पहुंच जाऊंगा दवाओं में कौन उलझा रहे अगर तुम्हारे साथ कुश्ती लड़ी जा सकती है क्रिकेट खेला जा सकता है कौन खेला जा सकता है खेलें पर अभी तो तुम्हारी हालत की है कि तुम्हारे पास खेलने के लिए फुर्सत ही नहीं अभी तो उस महामारी ने तुम्हें ऐसे गिरफ्त में ले रखा है एकदम पूरी तरह व्यस्त हो माया है उस महामारी का नाम और तुम व्यस्त हो उस महामारी उस महारानी के हुक्म का पालन करने में अभी मैं तुम से बोलूं आपके लो मेरे साथ तुम कहोगे नहीं मुझे तो देदी के हुक्म का पालन करना है मेरे पास समय नहीं है तुम देवी के शिकंजे से छूट जाओ भगवान करे मेरा कैरियर तबाह हो जाए भला हुआ मोरी मटकी फूट पनिया भरन से छुट्टी पर तुमने तो कुछ भेजी पाल रखी है तुम मेरा कैरियर चमका ही मानोगे तुमने पक्का कर रखा है टीम को बिल्कुल गौरवान्वित ही कर देंगे बड़े चिकित्सक हजारों लाखों मरीज देखते देखते हैं यही हजारों लाखों मोदी क्यों है क्यों है क्या जरूरत है रुक जाओ प्रगति और डरो मत बिल्कुल कि रुकने के बाद क्या करेंगे मैं भी सोच विचार करके नहीं रुका था रुक गया था बस उसके बाद जो होना था सो में हुआ मैंने कहा ना रुकने का मतलब निष्क्रियता नहीं होता तुम रुक तो जाओ फिर क्या करोगे यह वह बताएगा वह इतनी सी शर्त रखता है वह कहता है कि श्रद्धा दिखाओ अपनी तुम पहले रुको फिर हम तुम्हें बताएंगे कि करना क्या चाहिए जीने के लिए एक से एक सार्थक उद्देश्य मिलेंगे और आवश्यक नहीं है फिर कह रहा हूं कि तुम वैसे ही जीने लगा जैसे मैं जी रहा हूं यह मत समझना कि जो रुक जाते हैं वह सब प्रवचन कर्ता ही बन जाते हैं प्रवचन भी दे सकते हो अगर दिखाई दे कि प्रवचन देना ही सर्वोत्तम विधि है बीमारी के इलाज की समुचित इलाज सिर्फ तुम इलाज वैसे ही हो सकता है जैसे कर रहा हूं पर हो सकता है कि अन्य विधियां भी हो तुम दूसरी भी विधियां आजमा सकते हो रुको तो सही कौन सी लगानी है कि वह बताएगा मेरे तुम्हारे संदर्भ अलग है मेरा तुम्हारा समाज अलग है मैं भारत में हूं तुम कैनेडा में हो कनाडा में आवश्यक नहीं कि वही तरीके कारगर हो जो भारत में होते हैं हो सकता है कोई और चीज ज्यादा सफल हो जाए कुछ और कर लेना जो कुछ भी करोगे वह होगा तभी जब पहले तुम रुके रुके बिना यह सारी बात पूछें

kuch log bhag bhag ke carrier banate hain main shayad ruk ruk ke bana raha hoon ga kitna tumne pakka hi mana hai ki carrier toh banana hi banana hai yah dharana bilkul pakki hai ki koi kuch karta hai carrier banane ko koi kuch karta hai aacharya GBCB chamkare upar kahin koi bada pad hoga phir wahan par avedan bhejenge beta rukne ka matlab nishkriya ho jana nahi hota agar tum keh rahe ho ki sab bhag rahe hain main ruk gaya aur puch rahe ho ki tum kaise rakhoge toh tum bhi bilkul waise hi rukoge jaise main ruk gaya ruk na sabka ek jaisa hota hai jaise alag alag shreniyon mein koi bhed nahi hota kuch aur kuch mein bhed ho sakta hai na kuch aur na kuch mein kaise bhed hoga rukna sabka ek jaisa hota hai lekin maine kaha rukne ka matlab nishkriyata nahi hota main rukne ke baad jo kar raha hoon isliye kar raha hoon kyonki tum nahi ruke abhi main toh ruk gaya hoon par aaspass ki sthitiyan abhi nishaan the nanand yukt aaspass ki sthitiyan badal tumhe vaah karna bade maje se chod doon jo main kar raha hoon main jo kar raha hoon kar nahi hai majburi hai khatiyan badal jayegi toh bhi nishkriya nahi ho jaunga jaenge ek baat pakki abhi bhi ruk kar ke kar raha hoon aur sthitiyan badal gayi toh bhi ruke ruke hi karunga par jo kar raha hoon vaah hai toh sthiti sapeksh thi vaah nirbhar toh isi par karta hai ki duniya ki halat kya hai tum bhi jab ruk jaoge toh koi aavashyak nahi hai ki wahi karne lag jao jo main kar raha hoon rukna hamara aur tumhara ek jaisa hoga priyaye hamari tumhari ek jaisi ho zaroori nahi hai tum vaah bhi kar sakte ho jo main kar raha hoon tum mere paas bhi aa sakte ho toh mujhse dur bhi reh sakte ho tum kisi dusre tarike se bhi apne dayitva ko apni accha lagta ko abhivyakti de sakte ho ek baat pakki hogi ki tumhari abhivyakti tumhare kisi sundar labh ke liye nahi hogi tumhari abhivyakti purnataya sthapit hogi jo kuch kar rahe hoge aaspass ke mausam ko dekhkar kar rahe hoge aaspass ke haal ko dekhkar kar rahe ho mujhe guru ya chikitsak bane rehne mein koi vyaktigat ruchi nahi hai balki kai dafe toh yah baat dosti ho jaati hai duniya mein hi koi vishnu fail gaya usne mahamari jaisi sthiti laadi ho aur chara kya hai mere paas chikitsak ka kirdaar ada karne ke alava ab toh so jao khelna kudana shuru kar do phir chikitsa kaun karna chahta hai bhi dawakhana band kar lunga shutter gira lunga aur tumhare saath khelne pohch jaunga dawaon mein kaun uljha rahe agar tumhare saath kushti ladi ja sakti hai cricket khela ja sakta hai kaun khela ja sakta hai khele par abhi toh tumhari halat ki hai ki tumhare paas khelne ke liye phursat hi nahi abhi toh us mahamari ne tumhe aise giraft mein le rakha hai ekdam puri tarah vyast ho maya hai us mahamari ka naam aur tum vyast ho us mahamari us maharani ke hukm ka palan karne mein abhi main tum se bolu aapke lo mere saath tum kahoge nahi mujhe toh dedi ke hukm ka palan karna hai mere paas samay nahi hai tum devi ke shikanje se chhut jao bhagwan kare mera carrier tabah ho jaaye bhala hua mori mataki feet paniya bharan se chhutti par tumne toh kuch bheji pal rakhi hai tum mera carrier chamaka hi manoge tumne pakka kar rakha hai team ko bilkul gaurvanvit hi kar denge bade chikitsak hazaro laakhon marij dekhte dekhte hain yahi hazaro laakhon modi kyon hai kyon hai kya zarurat hai ruk jao pragati aur daro mat bilkul ki rukne ke baad kya karenge main bhi soch vichar karke nahi ruka tha ruk gaya tha bus uske baad jo hona tha so mein hua maine kaha na rukne ka matlab nishkriyata nahi hota tum ruk toh jao phir kya karoge yah vaah batayega vaah itni si sart rakhta hai vaah kahata hai ki shraddha dikhaao apni tum pehle ruko phir hum tumhe batayenge ki karna kya chahiye jeene ke liye ek se ek sarthak uddeshya milenge aur aavashyak nahi hai phir keh raha hoon ki tum waise hi jeene laga jaise main ji raha hoon yah mat samajhna ki jo ruk jaate hain vaah sab pravachan karta hi ban jaate hain pravachan bhi de sakte ho agar dikhai de ki pravachan dena hi sarvottam vidhi hai bimari ke ilaj ki samuchit ilaj sirf tum ilaj waise hi ho sakta hai jaise kar raha hoon par ho sakta hai ki anya vidhiyan bhi ho tum dusri bhi vidhiyan ajama sakte ho ruko toh sahi kaun si lagani hai ki vaah batayega mere tumhare sandarbh alag hai mera tumhara samaj alag hai bharat mein hoon tum canada mein ho canada mein aavashyak nahi ki wahi tarike kargar ho jo bharat mein hote hain ho sakta hai koi aur cheez zyada safal ho jaaye kuch aur kar lena jo kuch bhi karoge vaah hoga tabhi jab pehle tum ruke ruke bina yah saree baat puchen

कुछ लोग भाग भाग के कैरियर बनाते हैं मैं शायद रुक रुक के बना रहा हूं गा कितना तुमने पक्का

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Awanish Kumar

Yoga Instructor

3:27

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इस प्रश्न के उत्तर के पहले 110 दृष्टांत आप को सुनना चाहूंगा एक व्यक्ति जा रहा था गांव से और देखा कि गांव का एक आदमी बैलगाड़ी से कहीं जा रहा है तू भाई बिजी जा रहा था वह 3:00 उसने बैलगाड़ी वाले को पूछा कि भाई तुम में आजकल इतनी बड़ी बेटे तक नहीं किए हैं तो यह बैलगाड़ी पर क्यों चलते हो तो उसने पढ़ाई क्या करूं तो बोला कि तुम मैं बाइक से चलो बोलो से क्या होगा तो तुम जल्दी शहर पहुंच चुके बुलाओ से क्या होगा बोलो जल्दी काम करोगे फिर बोला उसे क्या होगा जरा काम करोगे तो अधिक पैसे कमाओ गया उसे क्या होगा बोले पैसे अधिक होगा तो तुम चैन की नींद सो गए तुम्हारे पास से ठाट काफी ज्यादा होगा फिर बोला उससे क्या होगा तो वह गांव में किसान एक सिंपल सा जवाब दिया कि वह अनंत मुझे भी प्राप्त हो रही है क्या मस्त में बैलगाड़ी पर हूं बैल की घंटी की टिनटिन सुनता हूं इन बैलेंस में बातें करते रहता हूं गति का धीमी है बैलों की तुझे अगल-बगल मेरे गांव वाले गुजर रहे हो तो उनसे राम सलाम ले लेता हो कर लेता हूं उनका हाल-चाल पूछ लेता हूं और बस आनंद में चले जा रहा हूं और शाम तक मुझे एक पर आप मेरे लिए धनराशि भी कटी हो जाती है ताकि मेरे और मेरे परिवार के लिए कोई दिक्कत न हो अर्थात हम जितने भी भागदौड़ करते हैं जितना भी हम उठापटक करते हैं उसका अल्टीमेट गोल क्या है हम इसे पाना क्या चाहते हैं सिर्फ एक चीज है वह आनंद आनंद सुख हम जितना भी काम करते जो भी जितना भी काम करता उसके पिकनिक चोर चोरी भी करता है उसके पीछे में एक खोज ही रहती कि हमारा हमें आनंद मिले वह गलत जगह जगह पर आनंद ढूंढ रहा है उसका फल मिलता है कि उसे जेल होती है लेकिन हर किसी के कार्य के क्रियाकलापों का अल्टीमेट गोल क्या होता है अंतरिम उद्देश्य क्या होता है आनंद की प्राप्ति होना और ऐसा इतिहासकारों ने कथाकार ओने संतों ने ऋषि यों ने ग्रंथों ने ऐसा बताया है कि जो न टूटने वाला आनंद है न टूटने वाला आनंद है वह आध्यात्मिक भौतिक जगत में आनंद है नो डाउट आनंद है लेकिन वह ब्रेकेबल है कि भगत जगत भौतिक जगत खुद ब्रेकिंग बंद है नश्वर है जो खुद नश्वर है वह हमेशा सतानंद कैसे दे सकता है हर चीज का हर चीज का आप मोबाइल लेकर के बैठते हैं तो तेरे साथ कितना बढ़िया है खूब मजा आ रहा है आपको ऐसा चीज देखते हैं लेकिन कितना देर आधा घंटा एक घंटा दो घंटा 3 घंटा 10 घंटा फिर मोबाइल को साइट करते छोड़ो हटाओ यार स्वादिष्ट करते हैं क्योंकि रहा था जो आनंद दे रहा था वह फिर आपको डिस्टर्ब कैसे करा कब और कैसे करता है लड़की लड़कियां हैं युवावस्था में लगता है कि शहर प्रेमिका के साथ में सारा कुछ हमारा है उसका पूरा जीवन बिताते हैं लेकिन फिर एक समय ऐसा आता है बता कि नहीं सकता मुझे काम चाहिए वाला गाना चाहिए उठ जाते हैं बोर होते हैं कैसा आता है क्योंकि बाहर का जो आनंद है वह नश्वर आनंद है तो आचार्य प्रशांत जी को देखने प्लीज वह आनंद के आरती हुई होगी जो शाश्वत है जिसमें कभी भी ब्रेक नहीं लग सकती है और यही वजह है कि उन्हें सांसारिक उन्नति के पराकाष्ठा पर अपने आप को ले गया और वहां के बाद में बुंदेला के साहब आनंद की पराकाष्ठा के जाना है तो मैं अध्यात्म क्यों रहना होगा और उन्हें आध्यात्मिकता के मार्ग को चुना ऐसा मेरा निजी मत है विनम्र निवेदन देता है धन्यवाद

is prashna ke uttar ke pehle 110 drishtant aap ko sunana chahunga ek vyakti ja raha tha gaon se aur dekha ki gaon ka ek aadmi belgadi se kahin ja raha hai tu bhai busy ja raha tha vaah 3 00 usne belgadi waale ko poocha ki bhai tum mein aajkal itni badi bete tak nahi kiye hain toh yah belgadi par kyon chalte ho toh usne padhai kya karu toh bola ki tum main bike se chalo bolo se kya hoga toh tum jaldi shehar pohch chuke bulao se kya hoga bolo jaldi kaam karoge phir bola use kya hoga zara kaam karoge toh adhik paise kamao gaya use kya hoga bole paise adhik hoga toh tum chain ki neend so gaye tumhare paas se thaat kaafi zyada hoga phir bola usse kya hoga toh vaah gaon mein kisan ek simple sa jawab diya ki vaah anant mujhe bhi prapt ho rahi hai kya mast mein belgadi par hoon bail ki ghanti ki tintin sunta hoon in balance mein batein karte rehta hoon gati ka dheemi hai bailon ki tujhe agal bagal mere gaon waale gujar rahe ho toh unse ram salaam le leta ho kar leta hoon unka haal chaal puch leta hoon aur bus anand mein chale ja raha hoon aur shaam tak mujhe ek par aap mere liye dhanrashi bhi katee ho jaati hai taki mere aur mere parivar ke liye koi dikkat na ho arthat hum jitne bhi bhagdaud karte hain jitna bhi hum uthapatak karte hain uska ultimate gol kya hai hum ise paana kya chahte hain sirf ek cheez hai vaah anand anand sukh hum jitna bhi kaam karte jo bhi jitna bhi kaam karta uske picnic chor chori bhi karta hai uske peeche mein ek khoj hi rehti ki hamara hamein anand mile vaah galat jagah jagah par anand dhundh raha hai uska fal milta hai ki use jail hoti hai lekin har kisi ke karya ke kriyaklapon ka ultimate gol kya hota hai antarim uddeshya kya hota hai anand ki prapti hona aur aisa itihasakaron ne kathakar one santo ne rishi yo ne granthon ne aisa bataya hai ki jo na tutne vala anand hai na tutne vala anand hai vaah aadhyatmik bhautik jagat mein anand hai no doubt anand hai lekin vaah brekebal hai ki bhagat jagat bhautik jagat khud breaking band hai nashwar hai jo khud nashwar hai vaah hamesha satanand kaise de sakta hai har cheez ka har cheez ka aap mobile lekar ke baithate hain toh tere saath kitna badhiya hai khoob maza aa raha hai aapko aisa cheez dekhte hain lekin kitna der aadha ghanta ek ghanta do ghanta 3 ghanta 10 ghanta phir mobile ko site karte chodo hatao yaar swaadisht karte hain kyonki raha tha jo anand de raha tha vaah phir aapko disturb kaise kara kab aur kaise karta hai ladki ladkiyan hain yuvavastha mein lagta hai ki shehar premika ke saath mein saara kuch hamara hai uska pura jeevan Bitate hain lekin phir ek samay aisa aata hai bata ki nahi sakta mujhe kaam chahiye vala gaana chahiye uth jaate hain bore hote hain kaisa aata hai kyonki bahar ka jo anand hai vaah nashwar anand hai toh aacharya prashant ji ko dekhne please vaah anand ke aarti hui hogi jo shashvat hai jisme kabhi bhi break nahi lag sakti hai aur yahi wajah hai ki unhe sansarik unnati ke parakashtha par apne aap ko le gaya aur wahan ke baad mein bundela ke saheb anand ki parakashtha ke jana hai toh main adhyaatm kyon rehna hoga aur unhe aadhyatmikta ke marg ko chuna aisa mera niji mat hai vinamra nivedan deta hai dhanyavad

इस प्रश्न के उत्तर के पहले 110 दृष्टांत आप को सुनना चाहूंगा एक व्यक्ति जा रहा था गांव से औ

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