श्री अवधेश सिंह ने इंजीनियरिंग सेवाओं को छोड़ कर सिविल सेवाओं का चयन क्यों किया?...


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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हाय फ्रेंड भी देखिए कोई भी इंसान किसी चीज का चैन अपनी लाइफ में तभी करता है जब उसको पाना चाहता है या उसका ड्रीम होता है तो उसे अवधेश सिंह जी हां या कोई भी क्वालिफाइड यूपीएससी कैंडिडेट हो उसने यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम को तभी सिलेक्ट किया जब वह अपनी लाइफ में खुद को वैसा देखना चाहता था खुद को वैसा बनाना चाहता था तो जाहिर सी बात है तभी कोई भी इंसान इंजीनियर छोड़ कर आया हो या मैनेजमेंट की लाइन को छोड़ कर आया हो या प्राइवेट नौकरी संख्या बहुत से ऐसे उदाहरण हैं जो यूपीएससी की तैयारी करने के लिए अपनी बेहतरीन नौकरी को छोड़ कर इस में आए और कामयाब हुए

hi friend bhi dekhiye koi bhi insaan kisi cheez ka chain apni life me tabhi karta hai jab usko paana chahta hai ya uska dream hota hai toh use awdhesh Singh ji haan ya koi bhi qualified upsc candidate ho usne upsc civil services exam ko tabhi select kiya jab vaah apni life me khud ko waisa dekhna chahta tha khud ko waisa banana chahta tha toh jaahir si baat hai tabhi koi bhi insaan engineer chhod kar aaya ho ya management ki line ko chhod kar aaya ho ya private naukri sankhya bahut se aise udaharan hain jo upsc ki taiyari karne ke liye apni behtareen naukri ko chhod kar is me aaye aur kamyab hue

हाय फ्रेंड भी देखिए कोई भी इंसान किसी चीज का चैन अपनी लाइफ में तभी करता है जब उसको पाना चा

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

10:00

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने कहा श्री अवधेश को इंजीनियरिंग सेवाओं को छोड़कर सिविल सेवाओं पर चेंज क्यों किया उन्हें संतुष्टि नहीं मिली या वह इससे आगे कुछ करना चाहते थे उनका अपना मौलिक विचारों मौलिक निर्णय और उनको जहां भी संतुष्टि और कुछ कर गुजरने की उनको नजर आया वह उन्होंने निर्णय लिया सेवा कोई भी बुरी नहीं है टेक्निकल सेवा में चरम सीमा तक कुछ नया करके चमत्कार कर सकते और सिविल सर्विस में भी अपनी सेवाएं देखकर बहुत कुछ कर सकते हैं सिर्फ सीमित दायरे में जहां आपको कोई नहीं जानता ईद न्यू की ईद के रूप में काम करेंगे और आपकी उस काम की प्रशंसा ऊपर वाले ले लेंगे मेहनत कर आपका होगा और नामकरण किसी और का होगा रिलायंस कंपनी अदानी कंपनी इन कंपनियों के संचालक कौन है कर्मचारी और अधिकारी नाम किस काटा अंबानी और अडानी का सिविल सर्विस में नोमानी नोएडा की सीमाएं आपका निर्णय आपके लिए गए फैसले तंबो ता सही भी हो सकते हैं गलत भी हो सकते हैं और लोक कल्याण की भावना राज्य के विकास की भावना देश में समर्पण की भावना यह आपके कदम कदम पर आपके चरित्र का आपकी सेवा का यह मकान कंकट्टी है इसलिए इनको उन्होंने स्वीकार किया क्या सूचित किया यह मैं नहीं जानता उनका अपना व्यक्तिगत निर्णय और देखिए हर एक व्यक्ति कोई भी निर्णय लेते समय कुछ ना कुछ विचार तो मन में रखते हैं उनकी कुछ भावनाएं होती कुछ इच्छाएं होती कहानी हम तक को सम्मान करना चाहिए हमने भी आज से 40 साल पहले सिविल सर्विस के होने के उपरांत cse.in एलएलबी होने के बावजूद भी हमने शिक्षक जीवन अपना चेहरा अपने जीवन में बहुत कष्ट उठाने पड़े उसके बावजूद भी हमें शिक्षक जीवन अच्छा लगा क्योंकि हमें बहुत लोगों का भविष्य बनाने में और उनके द्वारा अपने आदर्शों को अपने विचारों को अपने लक्ष्य को क्योंकि जिस तरह मां-बाप बच्चों से लक्ष्य प्राप्त करते हैं इसी तरह गुरुजन भी अपने शिष्यों से अपने आदर्शों को पूरा करते हैं अपने सिद्धांतों की वह एक रूपरेखा अपने शिष्यों में देखते हैं तो हरियाणा पहुंचे हमारे संपर्क सूत्र से गुजरे और वह देश-विदेश में अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो इस विषय में मैं नहीं समझता हूं कि मुझे से अच्छा कोई पद लगेगा मैं आपको एक पिक घटना बताना चाहता हूं मेरा एक शिष्य था बहुत प्यारा सिस्टर था मैं कॉलेज लाइफ के बाद कॉलेज जाने के बाद कुछ व्यक्तिगत बच्चों को शिक्षा देता था ग्रुप में टूटने एक बच्चा मेरा प्रिय नेता क्यों पढ़ने में होशियार था और बहुत कड़ी मेहनत करता था उसके पिता जो है वह ऑटो चलाते थे माता हाउसवाइफ घर में सिलाई कढ़ाई का काम करती थी और पिता को एक सिर्फ ड्रिंक लेने की आदत थी बच्चे अपने पिता से इतने भयभीत रहते थे उनके 3 पुत्र थे बड़ा बेटा भी मेरे पास पड़ा था छोटा बेटा भी मेरे पास पड़ा था बड़ा बेटा लापरवाही के कारण अच्छे मार्क्स नहीं ला पाया टेंस में लेकिन छोटे बेटे ने बड़े बेटे की उस कमी को दूर करते हुए चमत्कार कर दिखाया चन्ना मेरे पास था और हर मां-बाप हर ग्रुप में अच्छे बच्चों को प्यार करता है पिता की तरफ से जरूरत पूरी होती थी लेकिन क्लेश और गरीबी यह दो कारणों से थे जिन जिन बच्चों को निखरने में मूल पूर्ण सहयोग नहीं मिल पा रहा था जहां में 10 बच्चों को महसूस होती होगी आती क्योंकि आर्थिक तंगी अकेली मां क्या करें उनका कमाई के अधिकांश स्टारडेंट पर चला जाता था हमारी चमक के बाकी बोले सर पापा से मत मिलना क्योंकि पापा दूसरे नेचर के हैं वह आपको कुछ कह दे तो मैं अच्छा नहीं लगेगा एक लेटर आप प्लीज पापा के सामने कभी कोई बात नहीं हमारे पास वक्त नहीं था तथा अपने माता की को बहुत चाहता था उनके आदेश का पालन करता था वह करना भी चाहिए क्योंकि उन बच्चों के लिए मां भी और पिता भी और गार्डन भी और एक तरह से अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षक भी माही भूमिका के रूप में निर्धारित हम चाहते थे हमारा बेटा एक होनार विद्वान बने तो हम और इंडिया प्रोजेक्ट अपने बच्चों के समूह को 57 बच्चों 10 बच्चों के चमकू पूरे भारत के भ्रमण के लिए सरकारी मदद से कुछ बच्चों के कलेक्शन से हम टूर पर प्रोजेक्ट ले जाते और इन बच्चों को टक्कर डीजे ज्ञान देने की कोशिश करते कन्याकुमारी रामेश्वरम दार्जिलिंग गोवा महाराष्ट्र मुंबई चेन्नई रामेश्वरम लेकिन आर्थिक तंगी इंसान को मजबूर कर देती है मैंने उसे टीचर का बेटा आप हमारे साथ चलना है उसे माता के सामने रखी मम्मी ने आर्थिक समस्या के कारण मना कर दिया तो मैंने उससे कहा बेटा कोई बात नहीं है आप चलिए मैं आपको जितना सहयोग दे सकता हूं चाहे वह करूंगा और जब आपके पास साधन हो जाए धीरे-धीरे साधनों को झुका दे मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप मुझे सहयोग करें मम्मी की बात को मानते हुए इस बात का स्टाफ हम बहुत शांति किस्म के हमें गुस्सा आ गया और हमने बच्चों को पीट दिया और पेट भी दिया और साथ में क्रिश्चियन ने यह भी कह दिया आप यहां से जा सकते हैं आपका मेरे से कोई संबंध नहीं जब आपको गुरु आज्ञा का मतलब ही नहीं मालूम कि आपका क्या नाम है और बच्चे को गुस्सा कितना बेटे की तरह प्यार करते हैं फिर आपने ऐसा क्यों किया उसके गाने की मां हमारी उम्र को थोड़ी सी पीड़ा हुई और हमें चल आत्मग्लानि हुई कि हमें इस बच्चे के साथ ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए वह भी मजबूरी का मारा है एक होनहार है हमारी बात को सीने में ना उसके अंदर हिम्मत कैसे हो गई कि वह घर वापस चला गया कुछ मिनट बाद हम उसके घर गए व्यक्तिगत उसे गए छोटापन में समझिए यह हमारा फर्ज है हमने उनके घर पर जाकर दरवाजा खटखटाया तू उनके बच्चे ने ऊपर से देखा पिताजी घर पर छुट्टी का दिन था उनके घर पर गया पिताजी ने बड़ा स्वागत

aapne kaha shri awdhesh ko Engineering sewaon ko chhodkar civil sewaon par change kyon kiya unhe santushti nahi mili ya vaah isse aage kuch karna chahte the unka apna maulik vicharon maulik nirnay aur unko jaha bhi santushti aur kuch kar guzarne ki unko nazar aaya vaah unhone nirnay liya seva koi bhi buri nahi hai technical seva mein charam seema tak kuch naya karke chamatkar kar sakte aur civil service mein bhi apni sevayen dekhkar bahut kuch kar sakte hai sirf simit daayre mein jaha aapko koi nahi jaanta eid new ki eid ke roop mein kaam karenge aur aapki us kaam ki prashansa upar waale le lenge mehnat kar aapka hoga aur namakaran kisi aur ka hoga reliance company adani company in companion ke sanchalak kaun hai karmchari aur adhikari naam kis kaata ambani aur adani ka civil service mein nomani noida ki simaye aapka nirnay aapke liye gaye faisle tambo ta sahi bhi ho sakte hai galat bhi ho sakte hai aur lok kalyan ki bhavna rajya ke vikas ki bhavna desh mein samarpan ki bhavna yah aapke kadam kadam par aapke charitra ka aapki seva ka yah makan kankatti hai isliye inko unhone sweekar kiya kya suchit kiya yah main nahi jaanta unka apna vyaktigat nirnay aur dekhiye har ek vyakti koi bhi nirnay lete samay kuch na kuch vichar toh man mein rakhte hai unki kuch bhaavnaye hoti kuch ichhaen hoti kahani hum tak ko sammaan karna chahiye humne bhi aaj se 40 saal pehle civil service ke hone ke uprant cse in llb hone ke bawajud bhi humne shikshak jeevan apna chehra apne jeevan mein bahut kasht uthane pade uske bawajud bhi hamein shikshak jeevan accha laga kyonki hamein bahut logo ka bhavishya banane mein aur unke dwara apne aadarshon ko apne vicharon ko apne lakshya ko kyonki jis tarah maa baap baccho se lakshya prapt karte hai isi tarah gurujan bhi apne shishyon se apne aadarshon ko pura karte hai apne siddhanto ki vaah ek rooprekha apne shishyon mein dekhte hai toh haryana pahuche hamare sampark sutra se gujare aur vaah desh videsh mein apni sevayen de rahe hai toh is 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आपने कहा श्री अवधेश को इंजीनियरिंग सेवाओं को छोड़कर सिविल सेवाओं पर चेंज क्यों किया उन्हें

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

श्री अवधेश सिंह ने अमेरिका को छोड़कर तेरी संगठन के रूप में काम करना वहां से लोगों की सेवा करना हमारा हो जाए लेकिन आपको सेंड नहीं कर पा रहा है आप उसके कोडिंग नहीं अपने आप को तैयार कर पा रहे हैं क्योंकि कलम से रहेगी और आपको लगता है कि आप पढ़ में स्थिति में सर्विस में ज्यादा अच्छा है और वहां बेहतर कर सकते हो तो निश्चित भरोसा करना खैरियत है आप किसी भी रूप में कैसे लिख सकते हैं इसमें कोई किसी को चला नहीं रही आप देखे आपका नहीं करता करता से भाव क्या कहते हैं अब उसी के कुलदेवी की पूजा दा मैच

shri awdhesh Singh ne america ko chhodkar teri sangathan ke roop mein kaam karna wahan se logo ki seva karna hamara ho jaaye lekin aapko send nahi kar paa raha hai aap uske coding nahi apne aap ko taiyar kar paa rahe hain kyonki kalam se rahegi aur aapko lagta hai ki aap padh mein sthiti mein service mein zyada accha hai aur wahan behtar kar sakte ho toh nishchit bharosa karna khairiyat hai aap kisi bhi roop mein kaise likh sakte hain isme koi kisi ko chala nahi rahi aap dekhe aapka nahi karta karta se bhav kya kehte hain ab usi ke kuldevi ki puja the match

श्री अवधेश सिंह ने अमेरिका को छोड़कर तेरी संगठन के रूप में काम करना वहां से लोगों की सेवा

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