सिंघम जैसी फिल्मों में एक IPS अधिकारी के जीवन को चित्रित करने में कितनी सच्चाई है?...


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नमस्कार आज हमारे सामाजिक जीवन में कुछ क्षेत्रों में लोग अपने जुनून की वजह से उस कार्य क्षेत्र में आ रहे हैं मेरे स्वयं के अनुभव में यह आया है कि व्यक्ति के पास बहुत अधिक पैसा है परिवार का अपना व्यापार है उसके बावजूद वह सोशल सर्विस या किसी ऐसी नौकरी के साथ जुड़ता है जहां काफी ज्यादा रिस्क रहता है और वह ऐसी रिस्क को उठाकर समाज की सेवा करता है आईपीएस अधिकारी तो सच में बहुत ही मेहनत करते हैं और इस समाज को हर तरह के बुराई से दूर करने का प्रयास करते हैं आज करो ना बीमारी के बाद यह सिद्ध हो रहा है कि पुलिस और खासकर जो सीनियर लेवल पर लोग बैठे हैं उनमें बहुत ही सेवा भाव है वह बहुत ही अच्छे तरीके से समाज को अपनी सेवाएं दे रहे हैं आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि दिल्ली में आज कोरोनावायरस के पहले के बाद में जितना भी खाना बांटा जा रहा है उसमें से 50% से ज्यादा खाना पुलिस अपने हाथों से या अपने द्वारा बांट रही है लोग बनाने के लिए तो तैयार है दान देने के लिए तो तैयार है लेकिन बांटने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि कहीं ना कहीं उन्हें इस वायरस का डर है जो ठीक भी है लेकिन दिन-रात पुलिस अपने प्रयासों से हर्ब तक खाना हर बीमार तक दवाई हर बुजुर्ग तक अपनी सेवाएं पहुंचा रही है मैं उनको सलाम करता हूं और उनका सम्मान करता हूं धन्यवाद

namaskar aaj hamare samajik jeevan me kuch kshetro me log apne junun ki wajah se us karya kshetra me aa rahe hain mere swayam ke anubhav me yah aaya hai ki vyakti ke paas bahut adhik paisa hai parivar ka apna vyapar hai uske bawajud vaah social service ya kisi aisi naukri ke saath judta hai jaha kaafi zyada risk rehta hai aur vaah aisi risk ko uthaakar samaj ki seva karta hai ips adhikari toh sach me bahut hi mehnat karte hain aur is samaj ko har tarah ke burayi se dur karne ka prayas karte hain aaj karo na bimari ke baad yah siddh ho raha hai ki police aur khaskar jo senior level par log baithe hain unmen bahut hi seva bhav hai vaah bahut hi acche tarike se samaj ko apni sevayen de rahe hain aapko sunkar aashcharya hoga ki delhi me aaj coronavirus ke pehle ke baad me jitna bhi khana baata ja raha hai usme se 50 se zyada khana police apne hathon se ya apne dwara baant rahi hai log banane ke liye toh taiyar hai daan dene ke liye toh taiyar hai lekin baantne ke liye taiyar nahi hai kyonki kahin na kahin unhe is virus ka dar hai jo theek bhi hai lekin din raat police apne prayaso se herb tak khana har bimar tak dawai har bujurg tak apni sevayen pohcha rahi hai main unko salaam karta hoon aur unka sammaan karta hoon dhanyavad

नमस्कार आज हमारे सामाजिक जीवन में कुछ क्षेत्रों में लोग अपने जुनून की वजह से उस कार्य क्षे

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

5:26

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सिंघम जैसी फिल्मों में एक आईपीएस अधिकारी के जीवन को शिक्षित करने में कितनी सच्चाई है पीके सिंघम जैसी फिल्में जो है वह फिल्मों में ही अच्छी लगती क्योंकि सिंघम 2 अजय देवगन ने जो रो किरदार निभाया था वह पुलिस इंस्पेक्टर का था वह आईपीएस ऑफिसर नहीं आईपीएस ऑफिसर इन केसरी फिल्म की जो कहानी है जो हमने देखिए सिंघम पिक्चर उसमें वह पुलिस स्पेक्टर से और पुलिस चौकी के इंचार्ज हुआ करते हैं आईपीएस ऑफिसर की सबसे ऊपरी होकर वह राजनेताओं से प्रभावित होते इसके विरुद्ध में आईपीएस ऑफिसर सिंघम मूवी और राजनेताओं से मिलकर और दोगुना बच्चे लोग का नाश करने का बीड़ा उठाया है वर्तमान में होना बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि जिस तरह से उसमें जो विलेन राजनेताओं के साथ मिलकर जो बुरे कार्यकर्ता की वर्तमान रियल लाइफ में की वास्तविकता में ऐसा होता है लेकिन कोई पुलिस ऑफिसर अगर कोई इस तरह से मूविंग छेड़ता है पिक्चर में जितना सपोर्ट मिला था उनको इतना सपोर्ट वास्तव में मिलना बहुत ही मुश्किल होता है वर्तमान में जो हालत है उस हालत में एक पुलिस ऑफिसर की ड्यूटी है वह बहुत ही कठिन होती है उसके आम जनता का भी ध्यान रखना है गुंडे मवाली ओं का भी ध्यान रखना है उससे झगड़ा मोल लेना है अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखना है और राजनेताओं का भी ध्यान रखना है और सबसे ज्यादा अपने जो ऊपरी अधिकारी है उनका भी ध्यान रखना है जिस तरह से ऊपरी अधिकारी कहते हैं उसी के अनुरूप इंपोर्टर्स फॉलो करने पड़ते हैं यह पुलिस एकेडमी का जो नियम है वह एकेडमी के नियम के अनुसार ही उसको फॉलो करना पड़ता है अगर वह राजनेताओं से अभी प्रेरित होकर अगर कोई निर्णय ऊपरी अधिकारी देते हैं तब भी नीचे के पुलिस ऑफिसर को वोट अमान्य पढ़ते हैं वहीं को सस्पेंड कर दिया जाते हैं और उनके काम के घंटे जो हैं वह भी निर्धारित नहीं होते लोग त्यौहार मना रहे होते हैं लेकिन वह अपनी ड्यूटी कर रहे हो बहुत ही कठिन होता है पुलिस के जूते करना लोग बहुत ही इल्जाम लगाते हैं करप्शन कभी एग्जाम एग्जाम लगाते हैं हो सकता है उसमें कुछ सच्चाई हो लेकिन ऐसे पुलिस ऑफिसर ऐसे डीसीपी डीएसपी एसपी कार्य करना बहुत मुश्किल है और उसमें अंदर लगाने वाले जो लोग हैं वह समाज के बहुत से लोग या राजनीतिक नेताओं से और इन सब को संतोष देना बहुत ही कठिन होता है क्योंकि कहीं न कहीं उसको पुलिस ऑफिसर को इन ऑफिसर रोको कहीं न कहीं दुश्मन आया दूसरी बातों का भी सामना करना पड़ सकता है क्या तो वह समझौता करें अपनी फॉल्ट के साथ अपने देश के साथ और अपने पैसे के साथ और क्या तो सिद्धांत पार्टी बनकर एक तरफ अलग-थलग रह जाते हैं और उनकी ट्रांसफर ऐसी जगह हो जाती है कि जहां उनको कुछ भी साजन जसूजा पूरी तरह से मुहैया नहीं होती पुलिस प्रशासन हु इस बारे में जरूर ध्यान देना चाहिए कि अपने ऑफिसर रोको चाहे वो हवलदार हो आशीष एसपी हो कि आई हो या जो भी ऊपरी अधिकारी सबको उनके काम किसी भी तरह की दखल अंदाजी ना करें तभी जाकर पुलिस प्रशासन अच्छे से अपनी ड्यूटी निभा पाएगा क्योंकि पुलिस की डर की वजह से असामाजिक तत्व या कोई भी हो

singham jaisi filmo mein ek ips adhikari ke jeevan ko shikshit karne mein kitni sacchai hai pk singham jaisi filme jo hai vaah filmo mein hi achi lagti kyonki singham 2 ajay devgan ne jo ro kirdaar nibhaaya tha vaah police inspector ka tha vaah ips officer nahi ips officer in kesari film ki jo kahani hai jo humne dekhiye singham picture usmein vaah police spector se aur police chowki ke incharge hua karte hain ips officer ki sabse upari hokar vaah rajnetao se prabhavit hote iske viruddh mein ips officer singham movie aur rajnetao se milkar aur doguna bacche log ka nash karne ka bida uthaya hai vartmaan mein hona bahut hi mushkil hota hai kyonki jis tarah se usmein jo villain rajnetao ke saath milkar jo bure karyakarta ki vartmaan real life mein ki vastavikta mein aisa hota hai lekin koi police officer agar koi is tarah se moving chedta hai picture mein jitna support mila tha unko itna support vaastav mein milna bahut hi mushkil hota hai vartmaan mein jo halat hai us halat mein ek police officer ki duty hai vaah bahut hi kathin hoti hai uske aam janta ka bhi dhyan rakhna hai gunde mavali on ka bhi dhyan rakhna hai usse jhagda mole lena hai apni fitness ka bhi dhyan rakhna hai aur rajnetao ka bhi dhyan rakhna hai aur sabse zyada apne jo upari adhikari hai unka bhi dhyan rakhna hai jis tarah se upari adhikari kehte hain usi ke anurup importars follow karne padate hain yah police academy ka jo niyam hai vaah academy ke niyam ke anusaar hi usko follow karna padta hai agar vaah rajnetao se abhi prerit hokar agar koi nirnay upari adhikari dete hain tab bhi neeche ke police officer ko vote amanya padhte hain wahin ko Suspend kar diya jaate hain aur unke kaam ke ghante jo hain vaah bhi nirdharit nahi hote log tyohar mana rahe hote hain lekin vaah apni duty kar rahe ho bahut hi kathin hota hai police ke joote karna log bahut hi illajam lagate hain corruption kabhi exam exam lagate hain ho sakta hai usmein kuch sacchai ho lekin aise police officer aise DCP DSP SP karya karna bahut mushkil hai aur usmein andar lagane waale jo log hain vaah samaaj ke bahut se log ya raajnitik netaon se aur in sab ko santosh dena bahut hi kathin hota hai kyonki kahin na kahin usko police officer ko in officer roko kahin na kahin dushman aaya dusri baaton ka bhi samana karna pad sakta hai kya toh vaah samjhauta karen apni fault ke saath apne desh ke saath aur apne paise ke saath aur kya toh siddhant party bankar ek taraf alag thalag reh jaate hain aur unki transfer aisi jagah ho jaati hai ki jahan unko kuch bhi sajan jasuja puri tarah se muhaiya nahi hoti police prashasan hoon is bare mein zaroor dhyan dena chahiye ki apne officer roko chahen vo havaldar ho aashish SP ho ki I ho ya jo bhi upari adhikari sabko unke kaam kisi bhi tarah ki dakhal andaji na karen tabhi jaakar police prashasan acche se apni duty nibha payega kyonki police ki dar ki wajah se asamajik tatva ya koi bhi ho

सिंघम जैसी फिल्मों में एक आईपीएस अधिकारी के जीवन को शिक्षित करने में कितनी सच्चाई है पीके

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Harssh A Poddar

Indian Police Service | Dy. Commissioner of Police, Nagpur

3:29
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मुझे लगता है कि बहुत कम सच्चाई होती है सच्चाई बस एक हद तक क्यों रहती है वही रहता है कि अगर आपको पुलिस ने एक आला अफसर के दौरान या पद पर काम करना है तो आपकी मॉडल फाइबर जो है वह बहुत सॉन्ग लेनी चाहिए और जाती है तब की बात है कि कांबली फिल्मों में किस प्रकार किया जाता है सुनना पसंद नहीं होता है उसे हर समय पता रहता है कि क्या सही है और क्या गलत है नॉर्मल ही जाते हैं लेकिन इन रियालिटी बंद करके काम करते हैं सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए अपनी लाइफ में जो पुलिस के सामने जो सिचुएशन जाते हैं उसमें बहुत रैली वह सिचुएशन सुनना पड़ता है समझना पड़ता है तभी आप ही कर सकते हैं जिस पर आप हमें भूल कर के आप उसे पता कर ले काम पर अगर आपको नोट खोल करना है सीखने के लिए तैयार रहना पड़ेगा सुनने के लिए तैयार रहना पड़ेगा और अक्सर यह चली जो मिथुन का चाहूंगा कि फिल्मों में जो पुलिस को जिस प्रकार से चितराई जाती है उनके पास एक ही ऑप्शन अवेलेबल रिमोट कंट्रोल सोसाइटी में पुलिस फोर्स बिल्कुल करती है और सुनना पड़ता है किसी काम करने के लिए स्क्रीन पर कहीं बाबा रिलेटेड है राजन आपकी बातों से और मुझे नहीं लगता है कि यह फिल्म देखी जाती हैं कुछ एक्शन है क्योंकि आपको बहुत अच्छी करती है मेरे दिमाग में एक जुआ है पाकिस्तानी है उसका प्रिंट आउट हुए तकरीबन 30 साल हो गए हैं उसके लिए भी रहेगी क्या पूजा करके देख

mujhe lagta hai ki bahut kam sacchai hoti hai sacchai bus ek had tak kyon rehti hai wahi rehta hai ki agar aapko police ne ek aala afsar ke dauran ya pad par kaam karna hai toh aapki model fiber jo hai vaah bahut song leni chahiye aur jaati hai tab ki baat hai ki kambali filmo mein kis prakar kiya jata hai sunana pasand nahi hota hai use har samay pata rehta hai ki kya sahi hai aur kya galat hai normal hi jaate hain lekin in reality band karke kaam karte hain sunane ke liye taiyar rehna chahiye apni life mein jo police ke saamne jo situation jaate hain usmein bahut rally vaah situation sunana padta hai samajhna padta hai tabhi aap hi kar sakte hain jis par aap hamein bhool kar ke aap use pata kar le kaam par agar aapko note khol karna hai seekhne ke liye taiyar rehna padega sunane ke liye taiyar rehna padega aur aksar yah chali jo mithun ka chahunga ki filmo mein jo police ko jis prakar se chitrai jaati hai unke paas ek hi option available remote control society mein police force bilkul karti hai aur sunana padta hai kisi kaam karne ke liye screen par kahin baba related hai rajan aapki baaton se aur mujhe nahi lagta hai ki yah film dekhi jaati hain kuch action hai kyonki aapko bahut achi karti hai mere dimag mein ek jua hai pakistani hai uska print out hue takareeban 30 saal ho gaye hain uske liye bhi rahegi kya puja karke dekh

मुझे लगता है कि बहुत कम सच्चाई होती है सच्चाई बस एक हद तक क्यों रहती है वही रहता है कि अगर

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Norang sharma

Social Worker

2:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों भोपाल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज का सवाल काफी रोचक लेते हैं सिंघम जैसी फिल्मों में एक आईपीएस अधिकारी के जीवन को चित्रित करने में कितनी सच्चाई है तो आज से कुछ दशक पहले मैं आपको बताना चाहूंगा कि साहित्य को समाज का दर्पण समझा जाता था आज भी काफी हद तक किए सही है लेकिन आज चुकी लोगों की किताबें पढ़ने की जो हैबिट है वह छूट चुकी है पहले लोग एक अच्छे लीडर थे कच्छे पाठक लेकिन आज किताबों से एक दूरी आ गई है क्योंकि आज तमाम तरीके के उपकरण आ गए हैं मोबाइल आ गया है तो आज मुझे लगता है कि समाज को अगर कोई दिशा देने का काम समाज को दर्शाने का काम कोई अच्छे से और प्रभावी तरीके से कर रहा है तो वह हिंदी सिनेमा कर रहा है मूवी जगत कर रहा है फिल्मों के जरिए लोक समाज के उन तमाम हकीकत से रूबरू हो रहे हैं तो कभी समाज का वह हिस्सा थी जिसमें समाज जीता था जिस विचारधारा में समाज का दम घुटता था या ऐसी ऐसी कुरीतियां ऐसे विश्वास तो कभी समाज का शोषण कर रहे थे वह आज फिल्मों के जरिए हम देख रहे हैं जहां तक बात करूं मैं सिंघम की तो उसमें ब्यूरोक्रेसी और अफसरशाही को इतना अच्छे से चित्रित किया है कि पॉलिटिकल दबाव के चलते कैसे कोई पुलिस अधिकारी को दबाए जाने के तमाम वह प्रयास किए जाते हैं जिससे वह समाज में व्यवस्था कायम करने में भी कई बार नाकाम रहता है लेकिन फिर भी कई लोग बड़ी ईमानदारी से पूरी निष्ठा से कैसे अपनी ड्यूटी कर सकते हैं तमाम उन दबावों के बावजूद वह इस फिल्म के जरिए हम लोग देख सकते हैं तो एक पॉजिटिव मैसेज मिलता है कि अगर आपने समाज सेवा का जज्बा है तो आप किसी भी प्रलोभन के आगे झुकते नहीं है किसी डर से डरते नहीं हैं और लगातार अपना कर्म करते हुए समाज की सेवा करने में अपना भरोसा और यकीन बनाए रखते हैं और दूसरों को भी वैसा ही करने की सलाह देते हैं मैसेज देते हैं और मोटिवेट करते हैं तो काफी हद तक मुझे यह बात सही लगती है और मैं सहमत हूं कि फिल्में समाज को और समाज की उन तमाम विचारधाराओं को चित्रित करने में पूरी तरह से सक्षम है और वह कहीं भूमिका निभा भी रहा है धन्यवाद

namaskar doston bhopal par sun rahe mere sabhi buddhijeevi shrotaon ko mera pyar bhara namaskar aaj ka sawaal kaafi rochak lete hain singham jaisi filmo me ek ips adhikari ke jeevan ko chitrit karne me kitni sacchai hai toh aaj se kuch dashak pehle main aapko batana chahunga ki sahitya ko samaj ka darpan samjha jata tha aaj bhi kaafi had tak kiye sahi hai lekin aaj chuki logo ki kitaben padhne ki jo habit hai vaah chhut chuki hai pehle log ek acche leader the kacche pathak lekin aaj kitabon se ek doori aa gayi hai kyonki aaj tamaam tarike ke upkaran aa gaye hain mobile aa gaya hai toh aaj mujhe lagta hai ki samaj ko agar koi disha dene ka kaam samaj ko darshane ka kaam koi acche se aur prabhavi tarike se kar raha hai toh vaah hindi cinema kar raha hai movie jagat kar raha hai filmo ke jariye lok samaj ke un tamaam haqiqat se rubaru ho rahe hain toh kabhi samaj ka vaah hissa thi jisme samaj jita tha jis vichardhara me samaj ka dum ghutta tha ya aisi aisi kuritiyan aise vishwas toh kabhi samaj ka shoshan kar rahe the vaah aaj filmo ke jariye hum dekh rahe hain jaha tak baat karu main singham ki toh usme byurokresi aur afasarashahi ko itna acche se chitrit kiya hai ki political dabaav ke chalte kaise koi police adhikari ko dabaye jaane ke tamaam vaah prayas kiye jaate hain jisse vaah samaj me vyavastha kayam karne me bhi kai baar nakam rehta hai lekin phir bhi kai log badi imaandaari se puri nishtha se kaise apni duty kar sakte hain tamaam un dabavon ke bawajud vaah is film ke jariye hum log dekh sakte hain toh ek positive massage milta hai ki agar aapne samaj seva ka jajba hai toh aap kisi bhi pralobhan ke aage jhukate nahi hai kisi dar se darte nahi hain aur lagatar apna karm karte hue samaj ki seva karne me apna bharosa aur yakin banaye rakhte hain aur dusro ko bhi waisa hi karne ki salah dete hain massage dete hain aur motivate karte hain toh kaafi had tak mujhe yah baat sahi lagti hai aur main sahmat hoon ki filme samaj ko aur samaj ki un tamaam vichardharaon ko chitrit karne me puri tarah se saksham hai aur vaah kahin bhumika nibha bhi raha hai dhanyavad

नमस्कार दोस्तों भोपाल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज

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