क्यों भारत में शिक्षित होने का अधिक प्रभाव है, क्या इसलिए भारत एक जाति बाधक है?...


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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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दी कि सिर्फ भारत में ही में शिक्षित व्यक्ति का प्रभाव हर किसी देश में ज्यादा ही होता है शिक्षा आपको वह कॉन्फिडेंस आत्मविश्वास देती है जो एक और शिक्षित व्यक्ति के पास नहीं होता और भारत में जो शिक्षा रेट है जो लिटरेसी रेट है वह बहुत तेजी से तो नहीं पर धीरे-धीरे कम पड़ रहा है और यह किसी पर्टिकुलर जाति के लिए नहीं है क्या हर भारतीय के लिए हर व्यक्ति के लिए हर बच्चे के लिए एक समान है और रही बात की वीडियो शिक्षा एक या अधिक शिक्षित व्यक्ति जाति को लेकर ज्यादा कोशिश रहता तो मुझे लगता है कि ऐसे नहीं देखी भारत में जो शिक्षा है वह मदरसों में भी है स्कूलों में भी है और वह एक जैसी ही है और बच्चों को शिक्षित करने के लिए सरकार मैंने बहुत सारी नई नई स्कीम की कोशिश की जाए जैसे कि पांचवी तक शिक्षा अफ्रीकी है लड़कियों के लिए पढ़ाई आसान की है मिड डे मील प्रोवाइड करवाई है यह सब चीजें तो यह किसी पार्टी के लिए जाती कोई नहीं है यह हर किसी को रेंट के लिए अवेलेबल है हां यह बात सही है कि कुछ चाहती है भारत में ऐसे जो इतनी शिक्षित नहीं है जितनी मां की जातियां है उसके पीछे फिर ऐसे रीज़न नहीं है कि जो शिक्षित व्यक्ति है वह भी ऐसा कुछ कर रहे हैं बल्कि उसके पीछे बहुत सारी चीजें जैसे कि बहुत टाइम से अगर यह पढ़ कर जाती इतना अच्छा इतना फाइनेंस इस टेबल नहीं है तो वह शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं पर उनके लिए भी सरकार कुछ ना कुछ टैक्स लिए ही रही है

di ki sirf bharat mein hi mein shikshit vyakti ka prabhav har kisi desh mein zyada hi hota hai shiksha aapko vaah confidence aatmvishvaas deti hai jo ek aur shikshit vyakti ke paas nahi hota aur bharat mein jo shiksha rate hai jo literacy rate hai vaah bahut teji se toh nahi par dhire dhire kam pad raha hai aur yah kisi particular jati ke liye nahi hai kya har bharatiya ke liye har vyakti ke liye har bacche ke liye ek saman hai aur rahi baat ki video shiksha ek ya adhik shikshit vyakti jati ko lekar zyada koshish rehta toh mujhe lagta hai ki aise nahi dekhi bharat mein jo shiksha hai vaah madarson mein bhi hai schoolon mein bhi hai aur vaah ek jaisi hi hai aur baccho ko shikshit karne ke liye sarkar maine bahut saree nayi nayi scheme ki koshish ki jaaye jaise ki paanchvi tak shiksha afriki hai ladkiyon ke liye padhai aasaan ki hai mid day meal provide karwai hai yah sab cheezen toh yah kisi party ke liye jaati koi nahi hai yah har kisi ko rent ke liye available hai haan yah baat sahi hai ki kuch chahti hai bharat mein aise jo itni shikshit nahi hai jitni maa ki jatiya hai uske peeche phir aise region nahi hai ki jo shikshit vyakti hai vaah bhi aisa kuch kar rahe hain balki uske peeche bahut saree cheezen jaise ki bahut time se agar yah padh kar jaati itna accha itna finance is table nahi hai toh vaah shikshit nahi ho paa rahe hain par unke liye bhi sarkar kuch na kuch tax liye hi rahi hai

दी कि सिर्फ भारत में ही में शिक्षित व्यक्ति का प्रभाव हर किसी देश में ज्यादा ही होता है शि

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NotInterested

NotInterested

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दिन प्रतिदिन भारत का लिटरेसी रेट जो है वह बढ़ते जा रहा है और हिंदू मुस्लिम ऐसा धर्म और जात के प्रति कंट्रोलर से चली आ रही है और शिक्षित हो वह भी एक बात है ना हो तभी भी एक बात है और फिर से कि अब धर्म में विवाद चल ना यह इंसान के अंदर काफी लंबी है अब क्योंकि अब सब कोई अपना धर्म से प्यार करता है कोई किसी और का धर्म नहीं लेना चाहता लेकिन बात यह है कि एक दूसरे के धर्म को रिस्पेक्ट भी करना चाहिए तो वह बात नहीं है जैसे कि विदेश में हम लोग देखते हैं वहां पर कभी ऐसा नहीं होता लेकिन बस कि अब इंडिया में ऐसा हो रहा है और होते रहा है हमेशा से ऑफिस के लिए हिस्टोरिकल रिजल्ट भी है और काफी सारे वजह है जिसके वजह से धर्म के ऊपर भी बात चले आ रहा है

din pratidin bharat ka literacy rate jo hai vaah badhte ja raha hai aur hindu muslim aisa dharm aur jaat ke prati controller se chali aa rahi hai aur shikshit ho vaah bhi ek baat hai na ho tabhi bhi ek baat hai aur phir se ki ab dharm mein vivaad chal na yah insaan ke andar kaafi lambi hai ab kyonki ab sab koi apna dharm se pyar karta hai koi kisi aur ka dharm nahi lena chahta lekin baat yah hai ki ek dusre ke dharm ko respect bhi karna chahiye toh vaah baat nahi hai jaise ki videsh mein hum log dekhte hain wahan par kabhi aisa nahi hota lekin bus ki ab india mein aisa ho raha hai aur hote raha hai hamesha se office ke liye historical result bhi hai aur kaafi saare wajah hai jiske wajah se dharm ke upar bhi baat chale aa raha hai

दिन प्रतिदिन भारत का लिटरेसी रेट जो है वह बढ़ते जा रहा है और हिंदू मुस्लिम ऐसा धर्म और जात

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Amber Rai

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज के भारत यह जरूर है किसी एक शिक्षित जो है बहुत लोग हैं उसमें और जातिवाचक जहां तक मैं कहूंगा CG आज के डेट में भी जो है कई लोगों का जाति को जो है ज्यादा इंपोर्टेंस देते हैं लेकिन कई लोग जो है आजकल शहरों वगैरह में यह सब चीजें को नहीं मानते हैं आराम से हंस हंस के खुशी-खुशी एक साथ जॉय कंधे से कंधा मिलाकर रहते हैं लेकिन कई जगह जाते हैं जैसे गांव शहर में अभी भी कोई कोई पार्क है जहां पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है आगे बढ़ जाना चाहिए यह सब चीजों से ऊपर उठना चाहिए तभी वह हमारे देश के प्रगति के लिए काम कर पाएंगे और यह सब छोटी-छोटी चीजों पर मुझे लगता है लोगों को ध्यान देना चाहिए वह बीता हुआ टाइम था जब लोग इंपॉर्टेंट देते थे कहां जाती को अभी मैं समझता हूं कि उसको इतना इंपोर्टेंट नहीं देना चाहिए

aaj ke bharat yah zaroor hai kisi ek shikshit jo hai bahut log hai usme aur jaativaachak jaha tak main kahunga CG aaj ke date mein bhi jo hai kai logo ka jati ko jo hai zyada importance dete hai lekin kai log jo hai aajkal shaharon vagera mein yah sab cheezen ko nahi maante hai aaram se hans hans ke khushi khushi ek saath joy kandhe se kandha milakar rehte hai lekin kai jagah jaate hai jaise gaon shehar mein abhi bhi koi koi park hai jaha par zyada dhyan diya jata hai aage badh jana chahiye yah sab chijon se upar uthna chahiye tabhi vaah hamare desh ke pragati ke liye kaam kar payenge aur yah sab choti choti chijon par mujhe lagta hai logo ko dhyan dena chahiye vaah bita hua time tha jab log important dete the kahaan jaati ko abhi main samajhata hoon ki usko itna important nahi dena chahiye

आज के भारत यह जरूर है किसी एक शिक्षित जो है बहुत लोग हैं उसमें और जातिवाचक जहां तक मैं कहू

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Ekta

Researcher and Writer

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जी किसी भी देश में शिक्षित होने का प्रभाव वह चाहे लोगों पर हो चाहे चाहे आपके काम में हो या आपके समाज में हो को अधिक होता है ऐसा नहीं है कि इसलिए हमें देश है पर हमारी लिट्रेसी हमारी शिक्षा एक बहुत बड़ा प्रभाव डालती है हमारा दूसरे लोगों पर समाज पर हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था पर पर भारत जोगी उतना लिटरेसी दीक्षा भी नहीं है भारत के कई राज्य जैसे कि यूपी बिहार में लिटरेसी को 80% भी नहीं पहुंची है तो हम कुछ कुछ कारण है इसकी वजह से हमारा भारत एक गरीब देश है इसका कारण ज्यादा शिक्षित होना या फिर कम शिक्षित होने से नहीं है

ji kisi bhi desh mein shikshit hone ka prabhav vaah chahen logo par ho chahen chahen aapke kaam mein ho ya aapke samaj mein ho ko adhik hota hai aisa nahi hai ki isliye hamein desh hai par hamari litresi hamari shiksha ek bahut bada prabhav daalti hai hamara dusre logo par samaj par hamare desh ki aarthik vyavastha par par bharat jogi utana literacy diksha bhi nahi hai bharat ke kai rajya jaise ki up bihar mein literacy ko 80 bhi nahi pahuchi hai toh hum kuch kuch karan hai iski wajah se hamara bharat ek garib desh hai iska karan zyada shikshit hona ya phir kam shikshit hone se nahi hai

जी किसी भी देश में शिक्षित होने का प्रभाव वह चाहे लोगों पर हो चाहे चाहे आपके काम में हो या

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