विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे भारत जैसा प्रदूषित नहीं होता उनका देश। क्यूँ?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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Amit vishwakarma

Psychologist

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Dr. Swatantra Jain

Psychotherapist, Family & Career Counsellor and Parenting & Life Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे भारत जैसा प्रदर्शन नहीं होता तो पहली बार विदेशों में इस तरीके के पटाखे नहीं जलाए जाते हैं दिवाली तो विदेशों में नहीं मिलती हमारे देश में बनती है दिवाली के आसपास हम लोग पागल हो जाते हैं दूसरे देश में पटाखे जलाना इस तरीके से अलाउड नहीं है उनका जैसे इंडिपेंडेंस डे 4 जुलाई को मनाया जाता है स्टेट लेवल फंक्शन होता है और रेट में एक जगह और डिस्ट्रिक्ट में एक जगह नागरिक इकट्ठे होते हैं वहां पर आतिशबाजी होती है सब घर ने अपने-अपने जलाएं इससे ज्यादा अच्छे एक लेवल पर एक जगह बहुत खुले नहीं चलाते हैं उतना प्रदूषण नहीं होता और जहां हिंदुस्तान में एक अपने अपने घर में अपने घर इकट्ठे करते हैं गलियों में मोहल्ले में एक बच्चा सरसों पटाखे जला लेता है तुम प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ जाता है इसलिए हम लोग भी यह सोचें कि हमें दिवाली की खुशियां बनानी है तो पटाखे पहली बार जिससे ज्यादा प्रदर्शन होता है बेटा कम से कम पूरे जिले में नहीं अपने शहर में अपने मोहल्ले में सब बच्चे क्यों केवल चुरा लेंगे इस बारे में और यह हमारे देश के प्रति प्रदेश अपने-अपने पर्यावरण के प्रति हमारी सब की कुल एक्टिव जिम्मेवारी है जो हम नहीं समझते इस देश के लोग खासकर ने समस्त नागरिक के फल क्या होनी चाहिए नागरिक का उत्तरदायित्व होना चाहिए वह हम नहीं समझ पाए अपने नागरिक का कर्तव्य निभाओ पर आसपास के लोगों को प्रेरित करने को इतना भी काफी होगा

aapka prashna hai ki videshi bhi patakhon ka istemal karte hain par hamare bharat jaisa pradarshan nahi hota toh pehli baar videshon me is tarike ke patakhe nahi jalae jaate hain diwali toh videshon me nahi milti hamare desh me banti hai diwali ke aaspass hum log Pagal ho jaate hain dusre desh me patakhe jalaana is tarike se allowed nahi hai unka jaise Independence day 4 july ko manaya jata hai state level function hota hai aur rate me ek jagah aur district me ek jagah nagarik ikatthe hote hain wahan par aatishabaji hoti hai sab ghar ne apne apne jalaen isse zyada acche ek level par ek jagah bahut khule nahi chalte hain utana pradushan nahi hota aur jaha Hindustan me ek apne apne ghar me apne ghar ikatthe karte hain galiyon me mohalle me ek baccha sarso patakhe jala leta hai tum pradushan bahut zyada badh jata hai isliye hum log bhi yah sochen ki hamein diwali ki khushiya banani hai toh patakhe pehli baar jisse zyada pradarshan hota hai beta kam se kam poore jile me nahi apne shehar me apne mohalle me sab bacche kyon keval chura lenge is bare me aur yah hamare desh ke prati pradesh apne apne paryavaran ke prati hamari sab ki kul active jimmewari hai jo hum nahi samajhte is desh ke log khaskar ne samast nagarik ke fal kya honi chahiye nagarik ka uttardayitva hona chahiye vaah hum nahi samajh paye apne nagarik ka kartavya nibhao par aaspass ke logo ko prerit karne ko itna bhi kaafi hoga

आपका प्रश्न है कि विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे भारत जैसा प्रदर्शन नहीं ह

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विदेशी में पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे जैसा प्रदूषित नहीं होता मगर देश को कैसे मालूम कि उनका देश अपने आप लेकिन वहां के जो प्रदूषण का आराम से उनके अपने लाडू लगने से हमारे यहां प्रदूषण समस्या को लेकर के कोई मिला नहीं है हमारे घर पर ही कंपोजीशन करने के लिए जयपुर आकर कट गया उसका कोई इलाज नहीं है जिसका पालन किया जा सके यही दुर्भाग्य है और विदेशों में पैरेट के लोग चिंतित हैं और वहां पर भी एक कानून व्यवस्था के अंतर्गत काम करना होता है निर्धारित समय पर निर्धारित आयोजनों में ही किया जाता है अन्य सुश्री नहीं किया जाता और फिर भी उनकी गाइडलाइन को खाली कर दिया जाता है और उनका जो पटाखों का डेसिबल होता है डेसिबल होता और भी चीजें होती वक्त को ध्यान में रखकर की जाती है और यहां तो कोई भी मैन्यूफैक्चर करना घर में बैठे-बैठे लोग बैठते हैं

videshi me patakhon ka istemal karte hain par hamare jaisa pradushit nahi hota magar desh ko kaise maloom ki unka desh apne aap lekin wahan ke jo pradushan ka aaram se unke apne ladu lagne se hamare yahan pradushan samasya ko lekar ke koi mila nahi hai hamare ghar par hi composition karne ke liye jaipur aakar cut gaya uska koi ilaj nahi hai jiska palan kiya ja sake yahi durbhagya hai aur videshon me Parrot ke log chintit hain aur wahan par bhi ek kanoon vyavastha ke antargat kaam karna hota hai nirdharit samay par nirdharit ayojanon me hi kiya jata hai anya sushree nahi kiya jata aur phir bhi unki guideline ko khaali kar diya jata hai aur unka jo patakhon ka desibal hota hai desibal hota aur bhi cheezen hoti waqt ko dhyan me rakhakar ki jaati hai aur yahan toh koi bhi mainyufaikchar karna ghar me baithe baithe log baithate hain

विदेशी में पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे जैसा प्रदूषित नहीं होता मगर देश को कैसे मा

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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पिकी हमारा विदेशी भी पटाखे इस्तेमाल करते हैं लेकिन भारत जैसा प्रदूषित नहीं होता क्योंकि पहली चीज तो यह कि वहां पर आबादी बहुत कम है भारत के मुकाबले तो उसी से ही गाड़ियों का पोल्यूशन जो है वह भी कम हो जाता है इसके अलावा जो है वहां पर आबादी कम है तो गाड़ियां भी कम है लोग ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करते हैं इससे भी बहुत फर्क पड़ता है और वह पटाखे जलाते भी हैं तो उनके यहां ऐसे दिवाली नहीं होती है सब अलग-अलग मौकों पर आयुर्वेद लाते हैं और ऐसा नहीं होता कि एक ही दिन सारे जला रहे हो इसके अलावा क्योंकि वहां पर आबादी कम है फिर से तो क्षेत्रफल ज्यादा है पेड़-पौधे बहुत ज्यादा है वहां की हवा दादा साफ है तो यही सब कारण है जिसकी वजह से वह आप इतने प्रदूषण नहीं कुत्ते समय नहीं होता कुछ देशों में होता है दादा प्रदूषण

peekei hamara videshi bhi patakhe istemal karte hain lekin bharat jaisa pradushit nahi hota kyonki pehli cheez toh yah ki wahan par aabadi bahut kam hai bharat ke muqable toh usi se hi gadiyon ka pollution jo hai vaah bhi kam ho jata hai iske alava jo hai wahan par aabadi kam hai toh gadiyan bhi kam hai log zyada public transport use karte hain isse bhi bahut fark padta hai aur vaah patakhe jalate bhi hain toh unke yahan aise diwali nahi hoti hai sab alag alag maukon par ayurveda laate hain aur aisa nahi hota ki ek hi din saare jala rahe ho iske alava kyonki wahan par aabadi kam hai phir se toh kshetrafal zyada hai ped paudhe bahut zyada hai wahan ki hawa dada saaf hai toh yahi sab karan hai jiski wajah se vaah aap itne pradushan nahi kutte samay nahi hota kuch deshon mein hota hai dada pradushan

पिकी हमारा विदेशी भी पटाखे इस्तेमाल करते हैं लेकिन भारत जैसा प्रदूषित नहीं होता क्योंकि पह

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते तो हमारे भारत देश का प्रदूषण विश्लेषकों के द्वारा ज्यादातर किया जाता है जो पटाखे होते हैं और वह पूरे सदस्य नहीं निकलता

videshi bhi patakhon ka istemal karte toh hamare bharat desh ka pradushan vishleshakon ke dwara jyadatar kiya jata hai jo patakhe hote hain aur vaah poore sadasya nahi nikalta

विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते तो हमारे भारत देश का प्रदूषण विश्लेषकों के द्वारा ज्यादा

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Nitish Kumar

RRB Railway JE

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका करना है विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे भारत के 17 - 4 मिनट मात्रा में प्रयोग किया जाता है दूसरे देशों के अलावा

aapka karna hai videshi bhi patakhon ka istemal karte hain par hamare bharat ke 17 4 minute matra mein prayog kiya jata hai dusre deshon ke alava

आपका करना है विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे भारत के 17 - 4 मिनट मात्रा में

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Yousuf

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह बहुत गंभीर विषय है इस पर हमारी एजेंसी इसको भी चिंता करनी चाहिए क्योंकि जो पड़ोसी मुल्क से पटाखे आ रहे हैं उनके जरिए हम अपने एटमॉस्फेयर में क्या फैला रहे हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि हम इन पटाखों के जरिए स्लो पॉइजन कस्टमर जाने अनजाने लिख कर रहे हैं क्योंकि जिस तरीके से प्रदूषण की जो तादात है जो माता है वह ज्यादा बड़ी है और पिछले 5 सालों में जितनी गंभीर बीमारियां पैदा हो गई है ना पहले नहीं थी कैंसर के पेशेंट लंग कैंसर ब्रोंकाइटिस और तमाम तरीके की जो जो सांसो को ईमेल करने वाली बीमारियां को ज्यादा बढ़ गई है अच्छे या बुरे हैं हमारे पड़ोसी मुल्क से वह एक अलग बात है लेकिन जिस तरह की बीमारियों का आंकड़ा बढ़ है उसमें कहीं न कहीं प्रदूषण बहुत प्रभावी रहा है इसलिए इसमें वैज्ञानिकों सोशलिस्ट और एजेंसीज को एक बॉल हो करके सही दिशा में यह चेक करना चाहिए कि यह हमारे लिए क्या वाकई खतरनाक तो नहीं है

yah bahut gambhir vishay hai is par hamari agency isko bhi chinta karni chahiye kyonki jo padosi mulk se patakhe aa rahe hai unke jariye hum apne etamasfeyar mein kya faila rahe hai kahin aisa toh nahi ki hum in patakhon ke jariye slow paijan customer jaane anjaane likh kar rahe hai kyonki jis tarike se pradushan ki jo tadat hai jo mata hai vaah zyada baadi hai aur pichle 5 salon mein jitni gambhir bimariyan paida ho gayi hai na pehle nahi thi cancer ke patient lung cancer broncaitis aur tamaam tarike ki jo jo saanso ko email karne wali bimariyan ko zyada badh gayi hai acche ya bure hai hamare padosi mulk se vaah ek alag baat hai lekin jis tarah ki bimariyon ka akanda badh hai usme kahin na kahin pradushan bahut prabhavi raha hai isliye isme vaigyaniko socialist aur agencies ko ek ball ho karke sahi disha mein yah check karna chahiye ki yah hamare liye kya vaakai khataranaak toh nahi hai

यह बहुत गंभीर विषय है इस पर हमारी एजेंसी इसको भी चिंता करनी चाहिए क्योंकि जो पड़ोसी मुल्क

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Dr. Ashwani Kumar Singh

Chairman & Director at VEMS

3:40

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विदेशी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे जैसे आपको बताएंगे अमेरिका से अपनी तुलना करें तो अमेरिका की आबादी थी और आप के क्षेत्रफल से 10 गुना ज्यादा अमेरिका इतने सुनसान जगह है इतना तटीय क्षेत्र है इतना नदी का किनारा समुद्र किनारा है वह अपने आबादी को दूषित होने से बचा लेते और वहां के पहले जिस तरह का पर्यावरण प्रदूषण को देसी अरावली को खतरा है और अपने आप प्रदूषण की मात्रा ज्यादा केवल पटाखों से नहीं होती है या दशहरा में दिवाली मैया छठ शादी में इस्तेमाल होता है शादियां तो हिंदू का मुसलमान का चाय का समय पटाखे जलाने के तरीके वो क्या बोला गया कि यहां के सहारे हम बहुत सारी चीजें हैं ऐसा कर रहे हैं कि हमारा महाम अपने जो नेचुरल स्टैंड पर हमारा जो एक सांस्कृतिक विरासत ताकि हम पर्यावरण प्रेमी है स्वाभाविक उसमें कहीं से अलग चंदौसी क्योंकि हम हमारे सारे जो त्यौहार थे संभवत यह तो पास 4 देशों का सारा वीरा छतिया टेक्नोलॉजी हमारी समस्या बढ़ गई या मिट्टी का बर्तन मिट्टी का गिलास मिट्टी का खुला मुक्ति का पानी पीने का मटका हो जाता था मिट्टी का मिट्टी में क्या काम आता लेकिन जब से हम लोगों ने बिना समझे जाने मुझे शादी कर रही है और मैं यह स्वाभिमान और यह जागरूकता नहीं आ पा रही है कि हम किसी से ज्यादा दुखी थे हमने अपने को बैकअप देने पीछे की चीजों को अपनाया है जो हमारे फ्रेंडली हमारे वातावरण हमारे सांस्कृतिक धरोहर कंसाना कुछ पेड़ की पूजा पौधे की पूजा चिड़िया की पूजा पर्यावरण के तरफ से क्योंकि हम जानते हैं कि पर्यावरण सही होगा वह आदमी सही होगा आदमी सही होगा तो सही होगा स्वास्थ्य विभाग बनेगा और अच्छी तरह से सब चीजों को करें शुक्रिया शुभकामनाएं

videshi patakhon ka istemal karte hai par hamare jaise aapko batayenge america se apni tulna kare toh america ki aabadi thi aur aap ke kshetrafal se 10 guna zyada america itne sunsaan jagah hai itna tatiy kshetra hai itna nadi ka kinara samudra kinara hai vaah apne aabadi ko dushit hone se bacha lete aur wahan ke pehle jis tarah ka paryavaran pradushan ko desi aravalli ko khatra hai aur apne aap pradushan ki matra zyada keval patakhon se nahi hoti hai ya dussehra mein diwali maiya chhath shadi mein istemal hota hai shadiyan toh hindu ka muslim ka chai ka samay patakhe jalane ke tarike vo kya bola gaya ki yahan ke sahare hum bahut saree cheezen hai aisa kar rahe hai ki hamara maham apne jo natural stand par hamara jo ek sanskritik virasat taki hum paryavaran premi hai swabhavik usme kahin se alag chandausi kyonki hum hamare saare jo tyohar the sambhavat yah toh paas 4 deshon ka saara veera chhatiya technology hamari samasya badh gayi ya mitti ka bartan mitti ka gilas mitti ka khula mukti ka paani peene ka matka ho jata tha mitti ka mitti mein kya kaam aata lekin jab se hum logo ne bina samjhe jaane mujhe shadi kar rahi hai aur main yah swabhiman aur yah jagrukta nahi aa paa rahi hai ki hum kisi se zyada dukhi the humne apne ko backup dene peeche ki chijon ko apnaya hai jo hamare friendly hamare vatavaran hamare sanskritik dharohar kansana kuch ped ki puja paudhe ki puja chidiya ki puja paryavaran ke taraf se kyonki hum jante hai ki paryavaran sahi hoga vaah aadmi sahi hoga aadmi sahi hoga toh sahi hoga swasthya vibhag banega aur achi tarah se sab chijon ko kare shukriya subhkamnaayain

विदेशी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे जैसे आपको बताएंगे अमेरिका से अपनी तुलना करें त

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे भारत जैसा प्रदूषित नहीं होता उनका देश क्यों इसका जवाब एक ही है कि वह जो पटाखे बनाते हैं उसमें केमिकल वगैरह सब यूज कम होता है दुआ भी कम रहता है ठीक है वैसे उनके पटाखे होते हैं और अपने में दारू जो होता है दारू फटाका का जो दारू था केमिकल में प्रदूषित दादा होता है भारत देश में और आउट ऑफ कंट्री में प्रदूषित नहीं जाता है ठीक है तो उसके लिए भारत देश में ज्यादा प्रदूषित नहीं होता है पटाखों का मुझे डायरेक्ट पूछेगा ठीक है तो आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

aapka prashna hai videshi bhi patakhon ka istemal karte hai par hamare bharat jaisa pradushit nahi hota unka desh kyon iska jawab ek hi hai ki vaah jo patakhe banate hai usme chemical vagera sab use kam hota hai dua bhi kam rehta hai theek hai waise unke patakhe hote hai aur apne mein daaru jo hota hai daaru fataka ka jo daaru tha chemical mein pradushit dada hota hai bharat desh mein aur out of country mein pradushit nahi jata hai theek hai toh uske liye bharat desh mein zyada pradushit nahi hota hai patakhon ka mujhe direct puchhega theek hai toh aapka din shubha ho dhanyavad

आपका प्रश्न है विदेशी भी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं पर हमारे भारत जैसा प्रदूषित नहीं होता

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विदेशों में जगह पहुंच जाता है लोग बहुत कम हैं प्राकृतिक संसाधन वहां अधिक होते हैं हमारे यहां पर आबादी बहुत अधिक है इस कारण आबादी का घनत्व अधिक होता है और कम जगह में ज्यादा लोग रहते हैं इसीलिए सफोकेशन बहुत होने लगता है

videshon mein jagah pohch jata hai log bahut kam hain prakirtik sansadhan wahan adhik hote hain hamare yahan par aabadi bahut adhik hai is karan aabadi ka ghanatva adhik hota hai aur kam jagah mein zyada log rehte hain isliye suffocation bahut hone lagta hai

विदेशों में जगह पहुंच जाता है लोग बहुत कम हैं प्राकृतिक संसाधन वहां अधिक होते हैं हमारे यह

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में ओल्ड मार्केट विदेशों की दो पंक्तियां हैं हमारी बहुत ही टेंशन में चले जाते हो या किसी भी विदेश कंट्री में चलाए जाते हैं लेकिन कितना सोते हो इतनी अच्छी इतनी आगे हुई हुई है टेक्नोलॉजी में है कोई किसी चीज ना जो यह कोई चीज ना दोगे तो बहुत सी है और अजय संचेती को उसके यहां इंडियन

bharat me old market videshon ki do panktiyan hain hamari bahut hi tension me chale jaate ho ya kisi bhi videsh country me chalaye jaate hain lekin kitna sote ho itni achi itni aage hui hui hai technology me hai koi kisi cheez na jo yah koi cheez na doge toh bahut si hai aur ajay sancheti ko uske yahan indian

भारत में ओल्ड मार्केट विदेशों की दो पंक्तियां हैं हमारी बहुत ही टेंशन में चले जाते हो या क

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सबसे बड़ी बात यह है अपने देश के प्रति यदि कोई देश नहीं लगी कोई इस कम्युनिटी रहा का कोई कारण बनाया जाता है तो उस पर अमल किया जाता है चाहे वह किसी भी सरकार किसी भी लोगों के भले के लिए अपने देश के प्रति जागरूक बहुत ही जरूरी है हर एक नौकरी एक समझे तो कहां पर लोगे क्या कर रहे डाल दी थी कि यहां वहां है तू यह बात नहीं है हमारा सच्चा प्यार होगा का क्या मतलब है यह बातें नहीं होनी चाहिए और विदेशों में इस पर अमल की हमारे देश में एक नियम को कमल करवाने के लिए कोई चलो भरने पड़ते हैं तब जाकर उस समय वह भी पूरी आदमी एक कानून बनाने के लिए इस पते पर लोन देती है लोगों को आप ऐसा करेंगे तो आप ना देंगे तो आपके लिए इतना होगा तो भारत में यह बहुत बड़ी समस्या है कि लोग अपना कर्तव्य नहीं समझते लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते एक नागरिक के कर्तव्य नहीं सुना भारतीय संविधान में नागरिकों के बारे में बहुत अच्छी तरीके से बात करता हूं कि हमारे देश में फिर हम भी अपने देश को प्रदूषण मुक्त कर सकते हैं तो विदेशों से यह चीज अच्छी चीजें जो हमें चाहिए वह किस तरह से किया जाता है नागरिक अपना कर्तव्य किस तरह से करते हैं को समझना चाहिए

sabse badi baat yah hai apne desh ke prati yadi koi desh nahi lagi koi is community raha ka koi karan banaya jata hai toh us par amal kiya jata hai chahen vaah kisi bhi sarkar kisi bhi logo ke bhale ke liye apne desh ke prati jagruk bahut hi zaroori hai har ek naukri ek samjhe toh kaha par loge kya kar rahe daal di thi ki yahan wahan hai tu yah baat nahi hai hamara saccha pyar hoga ka kya matlab hai yah batein nahi honi chahiye aur videshon me is par amal ki hamare desh me ek niyam ko kamal karwane ke liye koi chalo bharne padate hain tab jaakar us samay vaah bhi puri aadmi ek kanoon banane ke liye is pate par loan deti hai logo ko aap aisa karenge toh aap na denge toh aapke liye itna hoga toh bharat me yah bahut badi samasya hai ki log apna kartavya nahi samajhte log apni jimmedari nahi samajhte ek nagarik ke kartavya nahi suna bharatiya samvidhan me nagriko ke bare me bahut achi tarike se baat karta hoon ki hamare desh me phir hum bhi apne desh ko pradushan mukt kar sakte hain toh videshon se yah cheez achi cheezen jo hamein chahiye vaah kis tarah se kiya jata hai nagarik apna kartavya kis tarah se karte hain ko samajhna chahiye

सबसे बड़ी बात यह है अपने देश के प्रति यदि कोई देश नहीं लगी कोई इस कम्युनिटी रहा का कोई का

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Kesharram

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विदेशी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन भारत में जैसे प्रदूषित होते हैं वह नहीं करते हैं दोस्तों उनमें और हमारे बारूद में भी काफी फर्क होता है और दोस्तों वह पटाखे जलाते हैं उनकी आवाज भी होती है हमारे से तेज लेकिन उनका इस्तेमाल करना वह प्रकार से करते हैं और हम गलत प्रकार से इनका प्रयोग करते हैं क्योंकि जिस बालू पर बना रहे हैं उसमें दुआ अधिक होता है और वहां और उसे बन रहा है उसमें दुआ कम होता है और इसलिए दोस्तों पर प्रदूषण कम होता है और हमारा हमारे देश में प्रदूषण बहुत ज्यादा होता है और हम इस वजह से दोस्तों इन पटाखों में आपको निर्माता होते हैं वह कैसे बनाते हैं और उसके दोस्तों कार्य करते हैं इसलिए दोस्त आशा करता हूं कि इस बार पटाखे ग्रीन वाले प्रदूषण कम होता है और इस गांव के द्वारा दी गई जानकारी

videshi patakhon ka istemal karte hain lekin bharat mein jaise pradushit hote hain vaah nahi karte hain doston unmen aur hamare barood mein bhi kaafi fark hota hai aur doston vaah patakhe jalate hain unki awaaz bhi hoti hai hamare se tez lekin unka istemal karna vaah prakar se karte hain aur hum galat prakar se inka prayog karte hain kyonki jis baalu par bana rahe hain usme dua adhik hota hai aur wahan aur use ban raha hai usme dua kam hota hai aur isliye doston par pradushan kam hota hai aur hamara hamare desh mein pradushan bahut zyada hota hai aur hum is wajah se doston in patakhon mein aapko nirmaata hote hain vaah kaise banate hain aur uske doston karya karte hain isliye dost asha karta hoon ki is baar patakhe green waale pradushan kam hota hai aur is gaon ke dwara di gayi jaankari

विदेशी पटाखों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन भारत में जैसे प्रदूषित होते हैं वह नहीं करते हैं

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