#tulsidas: क्या तुलसीदास और कबीरदास जैसे लोगों को आने वाली पीढ़ियाँ महत्व देंगी?...


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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तुलसीदास तुलसीदास सूरदास से दो लोगों को अपनी आने वाली पीढ़ियों को सारी मिलता है लेकिन उनके इर्द-गिर्द उन्होंने लिखा है राम के चरित्र का वर्णन क्या हिंदी में बहुत सारी है वाली है कव्वाली और किताब और आदर्श प्रस्तुत किया समाज के लिए जबरदस्त निरंकार को प्रोत्साहित किया और उन्होंने उनको बड़ा जबरदस्त कटाक्ष किया है वह समाज के अंदर को राय एवं कुरीतियों के धर्मों के अंदर जो कुर्तियां थी जो इस पर बहुत बड़ा कटाक्ष किया था लेकिन यह दोनों ही आज की युवा पीढ़ी के लिए बहुत ही प्रेरित है और एक प्रेरक तक इनकी रचनाएं हैं दोनों की रचनाएं जो है खासकर कबीर जी के दोहे हैं इतने मार्मिक और तार्किक समाज के अंदर घोड़ा वाले

tulsidas tulsidas surdas se do logo ko apni aane wali peedhiyon ko saari milta hai lekin unke ird gird unhone likha hai ram ke charitra ka varnan kya hindi me bahut saari hai wali hai qawwali aur kitab aur adarsh prastut kiya samaj ke liye jabardast nirankar ko protsahit kiya aur unhone unko bada jabardast kataksh kiya hai vaah samaj ke andar ko rai evam kuritiyon ke dharmon ke andar jo kurtiyan thi jo is par bahut bada kataksh kiya tha lekin yah dono hi aaj ki yuva peedhi ke liye bahut hi prerit hai aur ek prerak tak inki rachnaye hain dono ki rachnaye jo hai khaskar kabir ji ke dohe hain itne marmik aur tarkik samaj ke andar ghoda waale

तुलसीदास तुलसीदास सूरदास से दो लोगों को अपनी आने वाली पीढ़ियों को सारी मिलता है लेकिन उनके

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

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अवश्य देंगे और देना भी पड़ेगा सत्य है सत्य कभी झुकता नहीं ट्रांसफर हो जाता है दूसरे प्रॉपर्टी चेंज हो जाते हैं लेकिन हूं अपने महत्वपूर्ण ऐसे ही संभल के रखती है जो बताए शहंशाह के बारे में प्रेम के बारे में समर्पण की तो भी उसी से हुआ है छुट्टी रहेगी तब तक यह लोग सदस्य रहेंगे और हमेशा हर व्यक्ति को प्रेरित करते रहें

avashya denge aur dena bhi padega satya hai satya kabhi jhukta nahi transfer ho jata hai dusre property change ho jaate hain lekin hoon apne mahatvapurna aise hi sambhal ke rakhti hai jo bataye shahanshah ke bare mein prem ke bare mein samarpan ki toh bhi usi se hua hai chhutti rahegi tab tak yah log sadasya rahenge aur hamesha har vyakti ko prerit karte rahein

अवश्य देंगे और देना भी पड़ेगा सत्य है सत्य कभी झुकता नहीं ट्रांसफर हो जाता है दूसरे प्रॉपर

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

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कबीर दास और तुलसीदास ने इतना शाश्वत लेखन किया है और साहित्य में इतना बड़ा योगदान दिया है कि उनकी कही बातें और उनकी लिखी हुई चीज में कभी भी जनमानस के मस्तिष्क से नहीं हट पाएंगे और भी सदियों तक लोगों को प्रेरणा देने का काम करते रहेंगे

kabir das aur tulsidas ne itna shashvat lekhan kiya hai aur sahitya mein itna bada yogdan diya hai ki unki kahi batein aur unki likhi hui cheez mein kabhi bhi janmanas ke mastishk se nahi hut payenge aur bhi sadiyon tak logo ko prerna dene ka kaam karte rahenge

कबीर दास और तुलसीदास ने इतना शाश्वत लेखन किया है और साहित्य में इतना बड़ा योगदान दिया है क

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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क्या तुलसीदास कबीरदास जैसे लोगों को आने वाली पीढ़ियां मैसेज देंगी तो मेरा पहला प्रश्न है क्या आज की दुनिया में को महत्व दे रही हैं आज की पीढ़ी अब तो नाम भी नहीं जानते कि कबीर दास तुलसीदास सूरदास रहीम जी कौन थे लेकिन उनके बिना जीवन संभव नहीं है हर चीज सफलता में पानी के लिए उनका हमें जाने अनजाने उनका सहयोग लेना पड़ता यह निश्चित है कि यह जितने भी प्राचीन संस्कृति के हमारे महान कवि हैं जिन्होंने समय-समय पर संचार को बदला है टाइम उनका उद्देश्य जीवन में सुधार करना था और इस सुधार के आधार पर उन्होंने बहुत शिक्षा प्रदान किए ज्ञान ज्ञान से संबंधित शिक्षा प्रदान की अगर आप इसका अध्ययन करें कि कबीर ने क्या कहा काकर पाथर जोरि के मस्जिद लई बनाय तार चढ़ी मूला बांग दे क्या बहरा हुआ खुदाय उन्होंने लोगों की ढोंग को बहुत बुरी तरह पटका रहा है दूसरे संप्रदाय के लोगों के लिए भी कहा कि कबीर अनपढ़ थे पूजे हरि मिले तो मैं पूजू पहाड़ ताते यह चाकी भली पीस खाए संसार पत्थर के भगवान मिलते हैं पूरा पहाड़ पूजने को चालू अरे मूर्खों उन चक्की की पूजा करो जो तुम्हारे पेट की पूजा करती तुम्हारे पेट का भरण करती है तो कबीर जैसे ज्ञान की अंतिम सीमा प्रकाश सीमा पूरे विश्व में जीवन पर्यंत रहेगी यह पृथ्वी खत्म हो जाए उसके बावजूद भी वह रहेगी क्योंकि वह ज्ञान था और आज की पीढ़ी किस्में हमारे सोशल मीडिया के ज्ञान में इंटरनेट के ज्ञान में और सामाजिक और राजनीतिक ज्ञान में इतनी उलझ गई है कि वह क्या जाने कि कबीर कौन थे और तुलसीदास जी कौन थे हां हर कुछ समय बाद दुनिया में बदलाव आता है और निश्चित रूप से हमारी कबीर या रहीम या मारी तुलसी या मर रहे हैं सदैव अमर रहेगी और इनको मेहता मिलती रही है मेहता मिर्ची लगी उन लोगों का महत्व खत्म हो गया है जिन लोगों ने अपने आप को तानाशाह के रूप में प्रस्तुत किया या लोगों को उन्होंने ता यह प्रदर्शन करने की कोशिश की कि दुनिया में वही सब कुछ करता है इससे पहले दुनिया में कुछ नहीं हुआ ऐसे सैकड़ों लोग आए और चले गए ओके नाम बनाने की जरूरत नहीं है इतिहास में तो आपने भी हैप्पी लकी कहानी पढ़ी होगी तो हिटलर को किसने याद करते हैं उसकी बुराई के लिए सद्दाम हुसैन को किसने याद करते हैं उसकी बुराई के लिए इसी तरह से में किसी देश विशेष का नाम नहीं लेना चाहता जिन्होंने भी भारतीय संस्कृति और सभ्यता के साथ खिलवाड़ किया है उनका नामोनिशान मिट गया यह कभी भूलना नहीं चाहिए कभी तो महान व्यक्तित्व जिन्होंने कबीर तुलसी रहीम बिहारी लाल जी या इन कवियों का अनुसरण किया है वह देश में महानता का परिचायक है

kya tulsidas kabirdas jaise logo ko aane wali peedhiyaan massage dengi toh mera pehla prashna hai kya aaj ki duniya mein ko mahatva de rahi hain aaj ki peedhi ab toh naam bhi nahi jante ki kabir das tulsidas surdas rahim ji kaun the lekin unke bina jeevan sambhav nahi hai har cheez safalta mein paani ke liye unka hamein jaane anjaane unka sahyog lena padta yah nishchit hai ki yah jitne bhi prachin sanskriti ke hamare mahaan kabhi hain jinhone samay samay par sanchar ko badla hai time unka uddeshya jeevan mein sudhaar karna tha aur is sudhaar ke aadhaar par unhone bahut shiksha pradan kiye gyaan gyaan se sambandhit shiksha pradan ki agar aap iska adhyayan kare ki kabir ne kya kaha kakar pathar jori ke masjid lai banay taar chadhi moola bang de kya behra hua khuday unhone logo ki dhong ko bahut buri tarah patka raha hai dusre sampraday ke logo ke liye bhi kaha ki kabir anpad the puje hari mile toh main puju pahad tatte yah chaki bhali peace khaye sansar patthar ke bhagwan milte hain pura pahad pujne ko chaalu are murkhon un chakki ki puja karo jo tumhare pet ki puja karti tumhare pet ka bharan karti hai toh kabir jaise gyaan ki antim seema prakash seema poore vishwa mein jeevan paryant rahegi yah prithvi khatam ho jaaye uske bawajud bhi vaah rahegi kyonki vaah gyaan tha aur aaj ki peedhi kismen hamare social media ke gyaan mein internet ke gyaan mein aur samajik aur raajnitik gyaan mein itni ulajh gayi hai ki vaah kya jaane ki kabir kaun the aur tulsidas ji kaun the haan har kuch samay baad duniya mein badlav aata hai aur nishchit roop se hamari kabir ya rahim ya mari tulsi ya mar rahe hain sadaiv amar rahegi aur inko mehta milti rahi hai mehta mirchi lagi un logo ka mahatva khatam ho gaya hai jin logo ne apne aap ko tanashah ke roop mein prastut kiya ya logo ko unhone ta yah pradarshan karne ki koshish ki ki duniya mein wahi sab kuch karta hai isse pehle duniya mein kuch nahi hua aise saikadon log aaye aur chale gaye ok naam banane ki zarurat nahi hai itihas mein toh aapne bhi happy lucky kahani padhi hogi toh hitler ko kisne yaad karte hain uski burayi ke liye saddam hussain ko kisne yaad karte hain uski burayi ke liye isi tarah se mein kisi desh vishesh ka naam nahi lena chahta jinhone bhi bharatiya sanskriti aur sabhyata ke saath khilwad kiya hai unka namonishan mit gaya yah kabhi bhoolna nahi chahiye kabhi toh mahaan vyaktitva jinhone kabir tulsi rahim bihari laal ji ya in kaviyon ka anusaran kiya hai vaah desh mein mahanata ka parichayak hai

क्या तुलसीदास कबीरदास जैसे लोगों को आने वाली पीढ़ियां मैसेज देंगी तो मेरा पहला प्रश्न है

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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तुलसीदास और कबीर दास जैसे लोगों को आने वाली थी या मोदी जी हां तुलसीदास और कबीर दास जैसे लोगों को आने वाली थी ना जो रामचरितमानस में कबीर दास की जीवन कैसे जीना चाहिए और किस तरफ से हो इंसान के ऊपर कटाक्ष किए गए थे कि वह कपड़ा बुनने का मशीन होता है जो हाथ से चलता है करेगा वह करके को चलाते-चलाते और वह रच देते हो समाज के ऊपर बॉसी असर करता था और कबीरदास फिर बाद में संत पटेल आए और अच्छी-अच्छी आज के लोगों को धन्यवाद

tulsidas aur kabir das jaise logo ko aane wali thi ya modi ji haan tulsidas aur kabir das jaise logo ko aane wali thi na jo ramcharitmanas mein kabir das ki jeevan kaise jeena chahiye aur kis taraf se ho insaan ke upar kataksh kiye gaye the ki vaah kapda bunne ka machine hota hai jo hath se chalta hai karega vaah karke ko chalte chalte aur vaah rach dete ho samaj ke upar bossy asar karta tha aur kabirdas phir baad mein sant patel aaye aur achi achi aaj ke logo ko dhanyavad

तुलसीदास और कबीर दास जैसे लोगों को आने वाली थी या मोदी जी हां तुलसीदास और कबीर दास जैसे लो

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Nitish Kumar

RRB Railway JE

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आपका करना कि क्या तुलसीदास और कबीर दास ने तुलसीदास के सभी लोग सो जाएगा

aapka karna ki kya tulsidas aur kabir das ne tulsidas ke sabhi log so jaega

आपका करना कि क्या तुलसीदास और कबीर दास ने तुलसीदास के सभी लोग सो जाएगा

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आने वाली पीडीपी तुलसीदास और कबीर जी को महत्व देंगे नहीं देंगे इसका सवाल ने श्रद्धा और एक अंधश्रद्धा का एक महत्वपूर्ण पाठ होता है कबीर जी ने और तुलसीदास जी ने तो श्रद्धा रखना सिखाया पर आने वाले पीढ़ी में और बीच वाले 50 से 800 सालों में 200 सालों में जो हुआ वह कैसा हुआ कबीर जी खुद कहते थे पत्थर की तो मुराद बनाई देव कहलाए मोटे कबीर जी कहते थे और पत्थर की तो मुहूर्त बनाई देव कहलाए मोटे उसके आगे नारियल तोड़े गोले गोले आप ही खावे देव के आगे न रूठे चलता फिरता सजीव बकरा देव के आगे कांटे आलम मिलाकर खा गया बकरा देव के आगे छठे कबीर जी का ही कहना है तुलसीदास जी का कहना है कि ईश्वर को अपने स्वयं के अंदर मानना चाहिए ईश्वर स्वयं के अंदर होते भीतर होते हैं पर श्रद्धा और अंधश्रद्धा के पाठ का इतना बवाल उठा है क्या आने वाली पीढ़ी यह सोचने में मजबूर हो गए क्या मैं ईश्वर को कहां माने और कहां नहीं माने तो कोई ईश्वर अंतरात्मा यह हर चीज जो जगह पर होती है मतलब चराचर में ईश्वर समावेश होता है अपुन रात को सोते सवेरे अगर दिन नहीं निकला रात को ही अपने को आटे का कारक अपनी मौत हो गई यह तक अपने को मालूम नहीं है आज सैकड़ों साल पहले कबीर जी ने जो चीज बताई दो के अंदर बहुत मजेशिर हो बात है तुलसीदास जी की भी बात है उन्होंने भक्ति बताइए पत्थर की मूरत को पूजना नहीं तो इंसान के अंदर की इंसानियत को पूछना यह भक्ति कबीर जी ने बताई और तुलसीदास जी ने भी बताई और आने वाली पीढ़ी भलाई मूर्ति पुना पूजा ईश्वर को नहीं माने पन कबीर जी का जो कहना है कि वह इंसान से इंसान मोहब्बत करें एक दूसरे से प्रेम का बर्ताव करें एक दूसरे खुशहाली से रहें और कोई बड़ा इंसान होता है कि जो 3 साल से काम आए हर एक इंसान दूसरे इंसान से अगर काम आता है और यह प्रक्रिया तो आने वाली पीढ़ी में उत्साह से चलेंगी तेजी से चलेंगे तो कबीर जी को मानने और ना मानने का सवाल ही नहीं पैदा होता तो आज आने वाले हजार साल की पीडिया तक कबीर जी को मानेंगे

aane wali pdp tulsidas aur kabir ji ko mahatva denge nahi denge iska sawaal ne shraddha aur ek andhsradha ka ek mahatvapurna path hota hai kabir ji ne aur tulsidas ji ne toh shraddha rakhna sikhaya par aane waale peedhi mein aur beech waale 50 se 800 salon mein 200 salon mein jo hua vaah kaisa hua kabir ji khud kehte the patthar ki toh murad banai dev kahalae mote kabir ji kehte the aur patthar ki toh muhurt banai dev kahalae mote uske aage nariyal tode gole gole aap hi khave dev ke aage na roothe chalta phirta sajeev bakara dev ke aage kante aalam milakar kha gaya bakara dev ke aage chhathe kabir ji ka hi kehna hai tulsidas ji ka kehna hai ki ishwar ko apne swayam ke andar manana chahiye ishwar swayam ke andar hote bheetar hote hain par shraddha aur andhsradha ke path ka itna bawaal utha hai kya aane wali peedhi yah sochne mein majboor ho gaye kya main ishwar ko kahaan maane aur kahaan nahi maane toh koi ishwar antaraatma yah har cheez jo jagah par hoti hai matlab charachar mein ishwar samavesh hota hai apun raat ko sote savere agar din nahi nikala raat ko hi apne ko aate ka kaarak apni maut ho gayi yah tak apne ko maloom nahi hai aaj saikadon saal pehle kabir ji ne jo cheez batai do ke andar bahut majeshir ho baat hai tulsidas ji ki bhi baat hai unhone bhakti bataye patthar ki murat ko pujna nahi toh insaan ke andar ki insaniyat ko poochna yah bhakti kabir ji ne batai aur tulsidas ji ne bhi batai aur aane wali peedhi bhalai murti puna puja ishwar ko nahi maane pan kabir ji ka jo kehna hai ki vaah insaan se insaan mohabbat kare ek dusre se prem ka bartaav kare ek dusre khushahali se rahein aur koi bada insaan hota hai ki jo 3 saal se kaam aaye har ek insaan dusre insaan se agar kaam aata hai aur yah prakriya toh aane wali peedhi mein utsaah se chalengi teji se chalenge toh kabir ji ko manne aur na manne ka sawaal hi nahi paida hota toh aaj aane waale hazaar saal ki pidiya tak kabir ji ko manenge

आने वाली पीडीपी तुलसीदास और कबीर जी को महत्व देंगे नहीं देंगे इसका सवाल ने श्रद्धा और एक

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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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तुलसीदास भक्त मोमेंट और स्टील सिटी के लिए जल जाते हैं और कबीर दास अमृत आस्था के विरोध में और मानवता बाद आयुर्वेदिक जिनके के लिए अखिलेश के गिलास की पर अधिक ध्यान दिया है इसीलिए दोनों ही तब तो जो है भक्ति इस पर सहमति ले ली और मानवता आगे भी चलती रहेंगी और असला तो नहीं इसलिए इसका अस्तित्व किसी न किसी रूप में आने वाली पीढ़ी और कल भी रहेगा और उनको वह याद करते रहेंगे

tulsidas bhakt moment aur steel city ke liye jal jaate hain aur kabir das amrit astha ke virodh mein aur manavta baad ayurvedic jinke ke liye akhilesh ke gilas ki par adhik dhyan diya hai isliye dono hi tab toh jo hai bhakti is par sahmati le li aur manavta aage bhi chalti rahegi aur ASLA toh nahi isliye iska astitva kisi na kisi roop mein aane wali peedhi aur kal bhi rahega aur unko vaah yaad karte rahenge

तुलसीदास भक्त मोमेंट और स्टील सिटी के लिए जल जाते हैं और कबीर दास अमृत आस्था के विरोध मे

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Kesharram

Teacher

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यदि हिंदी का महत्व दिया जाएगा तू साथ दे सकती है कि हिंदी का विकास होगा तभी तुलसीदास और कबीर दास जैसे लोगों को आने वाली पीढ़ियां महत्व दे पाएंगे क्योंकि जब हिंदी का विकास करेगा ही नहीं तब तुलसीदास और कबीर दास जैसे लोगों को कोई जान भी नहीं पाएंगे तो इससे उनको दूर की बात है जानना ही संभव नहीं है तो महत्व

yadi hindi ka mahatva diya jaega tu saath de sakti hai ki hindi ka vikas hoga tabhi tulsidas aur kabir das jaise logo ko aane wali peedhiyaan mahatva de payenge kyonki jab hindi ka vikas karega hi nahi tab tulsidas aur kabir das jaise logo ko koi jaan bhi nahi payenge toh isse unko dur ki baat hai janana hi sambhav nahi hai toh mahatva

यदि हिंदी का महत्व दिया जाएगा तू साथ दे सकती है कि हिंदी का विकास होगा तभी तुलसीदास और कबी

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