#चंद्रयानलॉन्च: चंद्रयान -1 भारत के इतिहास में कितनी बड़ी उपलब्धि साबित हुई थी?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:49

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

chandrayaan-1 भारत के इतिहास में कितनी बड़ी उपलब्धि साबित हुई थी chandrayaan-1 22 अक्टूबर 2008 को लांच किया था ईसुरू के द्वारा उसका 1380 किलो वजन था और पीएसएलवी के द्वारा हो छोड़ा गया और 2009 में अगस्त में पहुंच जाता चंद्र के ऊपर प्रतीक्षा कर रहा था लूणाद प्रोग्राम का और चंद्र की हाईवे की फोटो जो है उसमें गुलदस्ता 10 महीने के बाद वह पहुंचा था और उसी के चक्कर लगाकर और पिक्चर फेस बुरी बनाते बनाते कुछ राकेश चंद्र की अंतरिक्ष में पहुंच गया और चक्कर लगाने लगा दीजिए हुई की पहली बार जब chandrayaan-1 की जो सफलता मिली और उसके अवधि 1 साल का रखा गया था लेकिन वह अभी तक chandrayaan-1 काम कर रहा है और हमें फोटो भेज रहा है उसी के बाद हमें chandrayaan-2 का मिशन करने के लिए प्रेरणा मिली और उसने हमें अपना आ जाओ चंद्र पर उतरने का अभी जो प्रोग्राम बनाया था क्योंकि 2 घंटे किलोमीटर पहले ही कनेक्शन टूट गया था chandrayaan-2 और chandrayaan-1 जो था उसकी उपलब्धि बहुत ज्यादा अच्छी थी और वह भारत की पहली सफलता चंद्रयान मिशन में मिली थी और इसका श्रेय हमारे शुरू हो जाता है और एक भारत की बहुत बड़ी उपलब्धि थी यशोगाथा लिखी जा रही थी और एक पल भी नहीं एक मूर्ति और सिद्धि का उनको प्राप्त हुई धन्यवाद

chandrayaan 1 bharat ke itihas mein kitni badi upalabdhi saabit hui thi chandrayaan 1 22 october 2008 ko launch kiya tha isuru ke dwara uska 1380 kilo wajan tha aur PSLV ke dwara ho choda gaya aur 2009 mein august mein pohch jata chandra ke upar pratiksha kar raha tha lunad program ka aur chandra ki highway ki photo jo hai usme guldasta 10 mahine ke baad vaah pohcha tha aur usi ke chakkar lagakar aur picture face buri banate banate kuch rakesh chandra ki antariksh mein pohch gaya aur chakkar lagane laga dijiye hui ki pehli baar jab chandrayaan 1 ki jo safalta mili aur uske awadhi 1 saal ka rakha gaya tha lekin vaah abhi tak chandrayaan 1 kaam kar raha hai aur hamein photo bhej raha hai usi ke baad hamein chandrayaan 2 ka mission karne ke liye prerna mili aur usne hamein apna aa jao chandra par utarane ka abhi jo program banaya tha kyonki 2 ghante kilometre pehle hi connection toot gaya tha chandrayaan 2 aur chandrayaan 1 jo tha uski upalabdhi bahut zyada achi thi aur vaah bharat ki pehli safalta chandrayan mission mein mili thi aur iska shrey hamare shuru ho jata hai aur ek bharat ki bahut badi upalabdhi thi yashogatha likhi ja rahi thi aur ek pal bhi nahi ek murti aur siddhi ka unko prapt hui dhanyavad

chandrayaan-1 भारत के इतिहास में कितनी बड़ी उपलब्धि साबित हुई थी chandrayaan-1 22 अक्टूबर

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Akash Om

Educator at Unacademy

1:48
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

chandrayaan-1 2009 में अक्टूबर के महीने में लॉन्च हुआ था अभी सवाल बिल्कुल नहीं जाने दो मिलन कुछ दिन पहले लांच हुआ है जो कि आंशिक रूप से फैलता चंदन को ले जाने में जो लांच लेकर था वह तकरीबन 1 सैटेलाइट लॉन्च बाय द पर्पस था इस मिशन का वह यह था कि थ्री डाइमेंशनल मैप बनाने का पूरे जोश होता है चंद्रमा का उसका और कुछ मिल रोलिंस कल्याणी मिनरल्स वाइंडिंग करने का ऑप्शन क्या था लोक से चलाया गया है और बहुत ही ज्यादा मात्रा में चंद्रमा को फिर महंगा पर पता चला हुसैन हाइपोथेसिस देखी जो चंद्रमा था वह पहले लिक्विड अस्मिता मुल्ले चेतना था तीसरे चीज पता चली जो इस फाइनल होता है तो जो रॉक टाइप जो था ना वहां पर जो चट्टानों बजे प्रकार था स्पाइनल खरीद बहुत ज्यादा भरा हुआ था उसके बाद तो जो कि इंडिकेट करता है बताता है में कि यहां पर मैग्नीशियम एलमुनियम और सिलिकॉन जैसे और कैल्शियम भी वहां पर पाया गया

chandrayaan 1 2009 me october ke mahine me launch hua tha abhi sawaal bilkul nahi jaane do milan kuch din pehle launch hua hai jo ki aanshik roop se failata chandan ko le jaane me jo launch lekar tha vaah takareeban 1 satellite launch bye the purpose tha is mission ka vaah yah tha ki three daimenshanal map banane ka poore josh hota hai chandrama ka uska aur kuch mil rollins kalyani minerals winding karne ka option kya tha lok se chalaya gaya hai aur bahut hi zyada matra me chandrama ko phir mehnga par pata chala hussain hypothesis dekhi jo chandrama tha vaah pehle liquid asmita mulle chetna tha teesre cheez pata chali jo is final hota hai toh jo rock type jo tha na wahan par jo chattanon baje prakar tha spinal kharid bahut zyada bhara hua tha uske baad toh jo ki indicate karta hai batata hai me ki yahan par magnesium elamuniyam aur silicon jaise aur calcium bhi wahan par paya gaya

chandrayaan-1 2009 में अक्टूबर के महीने में लॉन्च हुआ था अभी सवाल बिल्कुल नहीं जाने दो मिल

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Anjali Upadhyay

I Want To Become An Ias Officer

2:17
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और भारतीय वैज्ञानिकों की मेधा का यह गौरवशाली अध्याय दिनांक 14 नवंबर सन 2000 को अक्षरों में लिखा गया जब रात 8:31 पर चंदन वन द्वारा छोड़े गए उपकरणों ने चंद्रमा की सतह को स्पर्श किया तब प्रॉपर बनी तिरंगा ध्वज और लिखी संस्कृत उद्घोष सत्यमेव जयते ने हमारी भारतीय संस्कृति को भूतों से उठाकर अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया chandrayaan-1 का प्रक्षेपण दिनांक 14 अक्टूबर सन 2000 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा आंध्र प्रदेश किया गया स्कूल ले जाने वाला राकेश टीएलबीसी 11 chandrayaan-1 को प्रारंभ में पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया जहां यह पृथ्वी की निश्चित कक्षा में उसकी चक्कर लगाता रहा इसके बाद अंतरिक्ष यान के रक्षा अंतर को धीरे-धीरे बढ़ाया गया और इसके 440 न्यूटन लिक्विड इंजन को निरंतर डालते हुए इसे चंद्रमा की कक्षा में घुमाया गया चंदन की सतह से 100 किलोमीटर की ऑपरेशन दूरी पर इसे स्थापित कर दिया चंदनवन को 29 अक्टूबर 2000 से ही पृथ्वी की सुंदर चित्र भेजना प्रारंभ कर दिए थे इस यान को लांच करने में कुल 11 करण लगे थे जो सभी स्वदेशी थे इस अभियान का दूसरा स्वर्णिम अध्याय 14 24 सितंबर 2009 को लिखा गया जब प्रॉब्लम चंद्रमा की सतह पर प्राणी के अस्तित्व को खोज निकाला इस खोज से भारत का विश्व में ऊंचा हो गए

bharatiya antariksh vigyan aur bharatiya vaigyaniko ki megha ka yah gauravshali adhyay dinank 14 november san 2000 ko aksharon mein likha gaya jab raat 8 31 par chandan van dwara chode gaye upkarnon ne chandrama ki satah ko sparsh kiya tab proper bani tiranga dhwaj aur likhi sanskrit udghosh satyamev jayate ne hamari bharatiya sanskriti ko bhooton se uthaakar antariksh mein sthapit kar diya chandrayaan 1 ka prakshepan dinank 14 october san 2000 ko satish dhawana antariksh kendra shree hari kota andhra pradesh kiya gaya school le jaane vala rakesh TLBC 11 chandrayaan 1 ko prarambh mein prithvi ki kaksha mein bheja gaya jaha yah prithvi ki nishchit kaksha mein uski chakkar lagaata raha iske baad antariksh yaan ke raksha antar ko dhire dhire badhaya gaya aur iske 440 newton liquid engine ko nirantar daalte hue ise chandrama ki kaksha mein ghumaya gaya chandan ki satah se 100 kilometre ki operation doori par ise sthapit kar diya chandanavana ko 29 october 2000 se hi prithvi ki sundar chitra bhejna prarambh kar diye the is yaan ko launch karne mein kul 11 karan lage the jo sabhi swadeshi the is abhiyan ka doosra swarnim adhyay 14 24 september 2009 ko likha gaya jab problem chandrama ki satah par prani ke astitva ko khoj nikaala is khoj se bharat ka vishwa mein uncha ho gaye

भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और भारतीय वैज्ञानिकों की मेधा का यह गौरवशाली अध्याय दिनांक 14 नवंब

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