शिक्षकों के लिए क्या चुनौतियां हैं?...


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N. K. SINGH 'Nitesh'

Educator, Life Coach, Writer and Expert in British English Language, Author of Book/Fiction Lucky Girl (Love vs Marriage)

6:58

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21 शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है समाज को चारित्रिक पतन से बताना जिस तरह से समाज की नैतिकता दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही तू जो सबसे रिस्पॉन्स फूल कौन है प्रोफेशनल करते हैं वह शिक्षक की है जो इस दिशा में कुछ कर सकता है और एक अच्छा शिक्षक अपने आचरण से अपने चरित्र से समाज को बदलने की कोशिश करना है शिक्षक को यूं ही राष्ट्र का निर्माता नहीं कहा गया शिक्षक राष्ट्र निर्माण का कार्य करता है अपने बच्चों को अपने स्टूडेंट्स को अपने छात्रों को उस तरह से निर्मित प्राकृतिक तरीके से राष्ट्र के बारे में समाज के बारे में परिवार के बारे में अभी जिस तरह से समाज के सभी वर्गों में गिरावट दर्ज की जा रही है तो शिक्षकों में भी गिरावट आना लाजमी है कि शिक्षक भी समाज की उपज है और उनके स्तर में भी उसका प्रभाव देखने को मिलेगा ही मिलेगा लेकिन जो अच्छे शिक्षक हैं उन्हें चाहिए कि किसी भी तरीके से समाज को बचाएं इंडियन समाज इन बिल्कुल पूरी तरह गिर जाएगा उस समय से जो शिक्षक निकल कर के आएंगे वह भी काम होंगे और उनका चरित्र को कमजोर है के सामने सबसे बड़ी चुनौती है आज शिक्षक को महज एक कर्मचारी के रूप में देखा जाने एक समय था जब टीचर और टॉर्च के बीच का रिलेशन बहुत ही पवित्र होता था गुरु और से इन दोनों के रिश्तो में एक अलग ही केमिस्ट्री देखने को मिलता समर्पित उसे लगता है कि नहीं या मोटी पेमेंट मिलती है और इनका यह काम है यह करना है और मेरा काम है आ करके पढ़ाई अब नींद ऊंची जो है अब उस तरह की नहीं रह गई है स्टूडेंट की रुचि ज्ञान अर्जित करने से वैसा ज्ञान अर्जित करना हो गया है जिससे अच्छा पैसा कमाया जा सके इसलिए दूसरा जो अभिभावक शिक्षक को शक की नजर से नहीं लेता है मैं सब की बात नहीं कर रहा हूं अभी भी बड़ी संख्या है अभिभावकों की जो अपने बच्चों के शिक्षकों अपने गुरुओं तक को आदर देते रहें 6 और गुरु यह तीनों आपस में समन्वय नहीं बैठेगा तो कहीं न कहीं यह बड़ी चुनौती होगी शिक्षक के लिए छात्र शिक्षक भी करें और छात्र का चरित्र निर्माण करें आज विद्यालयों में नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं उस प्रयोगों में राजनीतिक दलों की सरकार की राजनीतिक मंशा और राजनीतिक आकांक्षाएं भी छुपी हुई रहती है उसे कहीं ना कहीं शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है अपने पठन-पाठन के अलावा भी बहुत सारे ऐसे कार्य करने पड़ रहे हैं जिसके दबाव के कारण उनके पठन-पाठन का कार्य निश्चित या उसका प्रभाव उसने देखने को मिलता है कहीं न कहीं उनकी क्वालिटी उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ता है इसका अंतिम परिणाम शिक्षा की क्वालिटी पर पड़ता है इस बैंक पर पड़ता है विद्यार्थी पर पड़ता है यह सभी चुनौतियां एक मुश्किल खड़ी करके ही नजर आती है इसलिए अब शिक्षक का पेशाब नहीं कहा गया है सबसे अंत में इसे आप करना जब कहीं और नौकरी नहीं मिलती है बहुत सारी नौकरी की तलाश करते हैं नहीं मिलती इसको लेकर चला कर लो या फिर कोई देख कर लो नेट की तैयारी कर लो साइड में यह जो रुचि समाप्त होती जा रही है इसके लिए सरकार और सरकारी नीतियां भी कहीं न कहीं जिम्मेदार बहुत सारे सुधार करना होगा और शिक्षक के लिए का रेप कैसे अपनी smh10 रहे रुचि के साथ क्योंकि रुचि जैसा शब्द निकल ही गया है यह ठहरा हुआ पानी हो गया है जिसमें किसी भी तरह के शिक्षक के पास चुनौती नहीं होती है पढ़ाने से संदर्भित जोश का मूल कार्य शिक्षा के संदर्भ में कोई नहीं उसके पास जो चुनौतियां हैं वह दूसरे दूसरे इसलिए मूल कार्य तो उसका बारिश हो चुका है अब दूसरी चुनौती हंसता हुआ नजर आ रहा है हम सबको धन्यवाद

21 shikshakon ke liye sabse badi chunauti hai samaj ko charittrik patan se bataana jis tarah se samaj ki naitikta din pratidin girti ja rahi tu jo sabse rispans fool kaun hai professional karte hain vaah shikshak ki hai jo is disha mein kuch kar sakta hai aur ek accha shikshak apne aacharan se apne charitra se samaj ko badalne ki koshish karna hai shikshak ko yun hi rashtra ka nirmaata nahi kaha gaya shikshak rashtra nirmaan ka karya karta hai apne baccho ko apne students ko apne chhatro ko us tarah se nirmit prakirtik tarike se rashtra ke bare mein samaj ke bare mein parivar ke bare mein abhi jis tarah se samaj ke sabhi vargon mein giraavat darj ki ja rahi hai toh shikshakon mein bhi giraavat aana lajmi hai ki shikshak bhi samaj ki upaj hai aur unke sthar mein bhi uska prabhav dekhne ko milega hi milega lekin jo acche shikshak hain unhe chahiye ki kisi bhi tarike se samaj ko bachaen indian samaj in bilkul puri tarah gir jaega us samay se jo shikshak nikal kar ke aayenge vaah bhi kaam honge aur unka charitra ko kamjor hai ke saamne sabse badi chunauti hai aaj shikshak ko mahaj ek karmchari ke roop mein dekha jaane ek samay tha jab teacher aur torch ke beech ka relation bahut hi pavitra hota tha guru aur se in dono ke rishto mein ek alag hi chemistry dekhne ko milta samarpit use lagta hai ki nahi ya moti payment milti hai aur inka yah kaam hai yah karna hai aur mera kaam hai aa karke padhai ab neend uchi jo hai ab us tarah ki nahi reh gayi hai student ki ruchi gyaan arjit karne se waisa gyaan arjit karna ho gaya hai jisse accha paisa kamaya ja sake isliye doosra jo abhibhavak shikshak ko shak ki nazar se nahi leta hai sab ki baat nahi kar raha hoon abhi bhi badi sankhya hai abhibhavakon ki jo apne baccho ke shikshakon apne guruon tak ko aadar dete rahein 6 aur guru yah tatvo aapas mein samanvay nahi baithega toh kahin na kahin yah badi chunauti hogi shikshak ke liye chatra shikshak bhi kare aur chatra ka charitra nirmaan kare aaj vidhayalayo mein naye naye prayog kiye ja rahe hain us prayogon mein raajnitik dalon ki sarkar ki raajnitik mansha aur raajnitik akanchaye bhi chhupee hui rehti hai use kahin na kahin shikshan karya prabhavit ho raha hai apne pathan pathan ke alava bhi bahut saare aise karya karne pad rahe hain jiske dabaav ke karan unke pathan pathan ka karya nishchit ya uska prabhav usne dekhne ko milta hai kahin na kahin unki quality unki gunavatta par asar padta hai iska antim parinam shiksha ki quality par padta hai is bank par padta hai vidyarthi par padta hai yah sabhi chunautiyaan ek mushkil khadi karke hi nazar aati hai isliye ab shikshak ka peshab nahi kaha gaya hai sabse ant mein ise aap karna jab kahin aur naukri nahi milti hai bahut saree naukri ki talash karte hain nahi milti isko lekar chala kar lo ya phir koi dekh kar lo net ki taiyari kar lo side mein yah jo ruchi samapt hoti ja rahi hai iske liye sarkar aur sarkari nitiyan bhi kahin na kahin zimmedar bahut saare sudhaar karna hoga aur shikshak ke liye ka rape kaise apni smh10 rahe ruchi ke saath kyonki ruchi jaisa shabd nikal hi gaya hai yah thahara hua paani ho gaya hai jisme kisi bhi tarah ke shikshak ke paas chunauti nahi hoti hai padhane se sandarbhit josh ka mul karya shiksha ke sandarbh mein koi nahi uske paas jo chunautiyaan hain vaah dusre dusre isliye mul karya toh uska barish ho chuka hai ab dusri chunauti hansata hua nazar aa raha hai hum sabko dhanyavad

21 शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है समाज को चारित्रिक पतन से बताना जिस तरह से समाज की न

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Dr. Geetanjali Bohare

Education Counsellor

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अभी कुछ नहीं बात करें किसी शिक्षक में मतलब हम लोगों को ही करना बच्चों को जन्म पढ़ा रहे हैं तो किसी प्रोफ़ेसर का बच्चा देख कर लेना नहीं चाह रहा है क्यों नहीं लेना चाह रहा क्या उसको देखने की क्लास वर्क नहीं किया या होमवर्क नहीं किया है तो उसको जानेंगे उसके पेरेंट्स जाता है कुछ किस सब्जेक्ट से डर लग रहा है या फिर उसके बाद से भाग राय पैरंट्स के लिए संबंधित है किससे डर लग रहा है तो उन चीजों को दूर है कमियों को दूर करेगी

abhi kuch nahi baat kare kisi shikshak mein matlab hum logo ko hi karna baccho ko janam padha rahe hain toh kisi professor ka baccha dekh kar lena nahi chah raha hai kyon nahi lena chah raha kya usko dekhne ki class work nahi kiya ya homework nahi kiya hai toh usko jaanege uske parents jata hai kuch kis subject se dar lag raha hai ya phir uske baad se bhag rai Parents ke liye sambandhit hai kisse dar lag raha hai toh un chijon ko dur hai kamiyon ko dur karegi

अभी कुछ नहीं बात करें किसी शिक्षक में मतलब हम लोगों को ही करना बच्चों को जन्म पढ़ा रहे हैं

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Rajesh Rana

Educator, Lawyer

3:45
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आज के समाज में शिक्षकों के सामने और चुनौतियां बहुत बड़ी बड़ी चुनौतियां हैं एक चुनौती नहीं सबसे बड़ी चुनौती जो शिक्षक के सामने हैं वो ये कि जो शिक्षा के उद्देश्य हैं वही क्लियर नहीं बच्ची को क्यों पढ़ाया जाए यही के लिए बाबा को भी क्लियर नहीं है सरकार को भी क्लियर नहीं दूसरी बातें कैसे पढ़ाई कितना पड़ गया से यह बहुत बड़ी समस्या है हम कैसे समाज की रचना करना चाहते इसका निर्धारण सरकार को करना होता है और सरकार की सोच पर ही ऐसी कोई चीज बनती है अगर आप आ बच्चे को अन विश्वास में डालना चाहते हैं तो आपकी शिक्षा में वो सारे अंतिम शामिल हो जाएंगे अगर बच्चे को वैज्ञानिक शिक्षा देना चाहते हैं तो आप लेकिन जरूरी तो नहीं कि सरकार हमेशा से ही काम करें अब समाज को छोड़ जाता है सरकार को छोरो चाहते हैं अब इन दोनों के बीच में बंद हो जाओ दीपक सुभाष भीम समस्याओं से गुजर रहा है सरकार इसके बारे में दूसरी बात यह है कि शिक्षा जो है पार्टी बनकर रह गई है शिक्षा में जो कंटेंट्स इतना ज्यादा दे दिया गया है क्या एक बच्चे को छठी सातवीं आठवीं के बच्चे को 10 वीं 12 वीं के सिलेबस पड़ा इसे पूरा करना दूसरी बात यह है कि एक शिक्षक होते हो फुल टाइम स्कूल में 5 घंटे तक फुल टाइम कोर्स पूरा दिन बचा है कुछ नहीं कर पा रहा है तो फिर ऐसे में स्कूल में जाता है जब उसकी पूर्ति नहीं हो पा रहा कोई नहीं कर पाएगा जिससे एक शिक्षक दूसरा ध्यान में रखते हुए सबसे बड़ी बात क्या है प्लास्टिक के ठेके में शामिल किया उसका मानसिक विकास होगा जब उसका मानसिक विकास नहीं होगा तो इस देश का विकास शिक्षा के जुड़े उद्देश्य

aaj ke samaj mein shikshakon ke saamne aur chunautiyaan bahut badi badi chunautiyaan hain ek chunauti nahi sabse badi chunauti jo shikshak ke saamne hain vo ye ki jo shiksha ke uddeshya hain wahi clear nahi bachi ko kyon padhaya jaaye yahi ke liye baba ko bhi clear nahi hai sarkar ko bhi clear nahi dusri batein kaise padhai kitna pad gaya se yah bahut badi samasya hai hum kaise samaj ki rachna karna chahte iska nirdharan sarkar ko karna hota hai aur sarkar ki soch par hi aisi koi cheez banti hai agar aap aa bacche ko an vishwas mein dalna chahte hain toh aapki shiksha mein vo saare antim shaamil ho jaenge agar bacche ko vaigyanik shiksha dena chahte hain toh aap lekin zaroori toh nahi ki sarkar hamesha se hi kaam kare ab samaj ko chod jata hai sarkar ko choro chahte hain ab in dono ke beech mein band ho jao deepak subhash bhim samasyaon se gujar raha hai sarkar iske bare mein dusri baat yah hai ki shiksha jo hai party bankar reh gayi hai shiksha mein jo contents itna zyada de diya gaya hai kya ek bacche ko chathi satvi aatthvi ke bacche ko 10 vi 12 vi ke syllabus pada ise pura karna dusri baat yah hai ki ek shikshak hote ho full time school mein 5 ghante tak full time course pura din bacha hai kuch nahi kar paa raha hai toh phir aise mein school mein jata hai jab uski purti nahi ho paa raha koi nahi kar payega jisse ek shikshak doosra dhyan mein rakhte hue sabse badi baat kya hai plastic ke theke mein shaamil kiya uska mansik vikas hoga jab uska mansik vikas nahi hoga toh is desh ka vikas shiksha ke jude uddeshya

आज के समाज में शिक्षकों के सामने और चुनौतियां बहुत बड़ी बड़ी चुनौतियां हैं एक चुनौती नहीं

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

5:04
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शिक्षक जीवन अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण होता है वाक्य में देखा जाए तो शिक्षक का अपना जीवन अपने लिए होते ही नहीं क्योंकि एक शिक्षक जय शिक्षा अध्ययन कर दो शिक्षक उन चुनौतियों को अपने समक्ष पाता है जोर को भविष्य में जिसका उसे सामना करना है सबसे बड़ी चीज दिए हैं शिक्षक एक इंसान होता है एक अभिभावक होता है एक कर्मचारी होता है एक समाज सेवक को हटाने और प्राणी मात्र के जिम्मेदारियां कम अगर वह हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाता है तो निश्चित रूप से विभिन्न संस्थाएं चुनौतियों के रूप में आएंगे और वह अपने ज्ञान के बल पर अनुभव के बल पर शिक्षा के बल पर उनका सामना भी करता है उन समस्याओं को हल करता है क्योंकि शिक्षक पर भरोसा जताया जा सकता है लेकिन यह तभी संभव है जब आपने शिक्षक बनने के साथ-साथ यह निर्णय भी किया हो कि मैं शिक्षा का प्रसार करूंगा प्रचार करूंगा और शिक्षा का वह अपने जीवन का अपने जीवन के अमूल्य ही मान लो अगर शिक्षा को रोजगार का साधन बना लिया व्यवसाय बना लिया तो फिर एक व्यापारी में और आप में कोई अंतर नहीं रहेगा क्योंकि व्यापार में लाभ हानि होती है उसके लिए चुनौतियां होती हैं लेकिन इस शिक्षक की जिंदगी में लाभ हानि नहीं होती है बल्कि सामाजिक आर्थिक राजनैतिक व्यवहारी व्यवहारी व्यक्तिगत समस्याएं होती हैं इसलिए मैं उन्हें चुनौतियों के रूप में मानता हूं और उनको आर्मी करना होता है यह नहीं समझ पा रहा हूं कि मैंने जो आपको उत्तर दिया है यह संक्षिप्त में देना उचित था या इतना विस्तार से जो मैंने अपनी बात रखी है क्योंकि अगर अब पूर्ण ज्ञान हम आपके सामने रखें तो आप समझ सकते हैं कि एक टीचर की एक शिक्षक की जो आप इमेज अपने मन में बनाएंगे वह कैसी होगी तो शिक्षक आधार होता है हर चुनौती का सामना करने के लिए तीन व्यक्तियों की भूमिका बहुत में पहुंची है हमारे देश के जवान जो हर चुनौती को स्वीकार करते हुए देश की जनता की रक्षा करते हैं और हमारे शिक्षक महोदय डॉक्टर जो मरीज को बचाने के लिए कठोर श्रम करते हैं उनके सामने चुनौतियां होती हैं जिस तरह से वह मरीज की उस बीमारी का अंत करें और अध्यापक इसके सामने हर तरह की चुनौतियां होती हैं और उनको मिटाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन लगा देते हैं अध्यापक महोदय की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है क्योंकि एक जवानी आए डॉक्टर न्यायाधीश महोदय प्यार करने में शिक्षक की भूमिका होती है

shikshak jeevan apne aap mein bahut mahatvapurna hota hai vakya mein dekha jaaye toh shikshak ka apna jeevan apne liye hote hi nahi kyonki ek shikshak jai shiksha adhyayan kar do shikshak un chunautiyon ko apne samaksh pata hai jor ko bhavishya mein jiska use samana karna hai sabse baadi cheez diye hai shikshak ek insaan hota hai ek abhibhavak hota hai ek karmchari hota hai ek samaj sevak ko hatane aur prani matra ke zimmedariyan kam agar vaah har kshetra mein apni bhumika nibhata hai toh nishchit roop se vibhinn sansthayen chunautiyon ke roop mein aayenge aur vaah apne gyaan ke bal par anubhav ke bal par shiksha ke bal par unka samana bhi karta hai un samasyaon ko hal karta hai kyonki shikshak par bharosa jataya ja sakta hai lekin yah tabhi sambhav hai jab aapne shikshak banne ke saath saath yah nirnay bhi kiya ho ki main shiksha ka prasaar karunga prachar karunga aur shiksha ka vaah apne jeevan ka apne jeevan ke amuly hi maan lo agar shiksha ko rojgar ka sadhan bana liya vyavasaya bana liya toh phir ek vyapaari mein aur aap mein koi antar nahi rahega kyonki vyapar mein labh hani hoti hai uske liye chunautiyaan hoti hai lekin is shikshak ki zindagi mein labh hani nahi hoti hai balki samajik aarthik rajnaitik vyavahari vyavahari vyaktigat samasyaen hoti hai isliye main unhe chunautiyon ke roop mein manata hoon aur unko army karna hota hai yah nahi samajh paa raha hoon ki maine jo aapko uttar diya hai yah sanshipta mein dena uchit tha ya itna vistaar se jo maine apni baat rakhi hai kyonki agar ab purn gyaan hum aapke saamne rakhen toh aap samajh sakte hai ki ek teacher ki ek shikshak ki jo aap image apne man mein banayenge vaah kaisi hogi toh shikshak aadhaar hota hai har chunauti ka samana karne ke liye teen vyaktiyon ki bhumika bahut mein pahuchi hai hamare desh ke jawaan jo har chunauti ko sweekar karte hue desh ki janta ki raksha karte hai aur hamare shikshak mahoday doctor jo marij ko bachane ke liye kathor shram karte hai unke saamne chunautiyaan hoti hai jis tarah se vaah marij ki us bimari ka ant kare aur adhyapak iske saamne har tarah ki chunautiyaan hoti hai aur unko mitne ke liye apna sampurna jeevan laga dete hai adhyapak mahoday ki jimmedari aur bhi badh jaati hai kyonki ek jawaani aaye doctor nyayadhish mahoday pyar karne mein shikshak ki bhumika hoti hai

शिक्षक जीवन अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण होता है वाक्य में देखा जाए तो शिक्षक का अपना जीवन

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नमस्कार मित्र आप जानना चाहते हैं कि वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए क्या चुनौतियां हैं तो मैं आपको बताना चाहूंगा शिक्षकों के लिए वर्तमान समय में काफी सारी चुनौतियां की सबसे बड़ी चुनौती जो है उसके सामने वह तो यही है कि वह अपने बच्चों को सिखा सके क्या सच है तो सीखने के लिए प्रेरित कर सके तो एक अच्छा शिक्षक वही है जो अपने बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करते समय और भी कई समस्याएं सामने चुनौतियां हैं जो सार्वभौमिक चुनौतियों की बात करेंगे तो वह सब्जेक्ट वाइज भी अलग अलग हो सकती है इसके अलावा भाषा वाइज अलग अलग हो सकती है तो डिपेंड करता है कि आप किस तरह की चुनौतियों के बारे में बात कर रहे हैं चुनौती है कई प्रकार की हो सकती है तो यदि प्रश्न पूछेंगे नेक्स्ट टाइम से तो आपको बताया जाएगा कि वह स्पेशल चुनौती है क्या होती है क्या क्या चुनौतियां बाकी जो सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए किसी भी बच्चे को सीखने के लिए प्रेरित कर पाना को एक सबसे बड़ी चुनौती है कि बच्चा जो है वह अच्छे तरीके से एक बढ़िया तरीके से सीखे सीखने के लिए प्रेरित हो सकें उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती है छत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह बालक में मानवीय गुणों का विकास कर सकें और लोकतांत्रिक गुणों का विकास कर सकें उसमें सद्गुणों का विकास कर सके यह सब जो है वह यह शारीरिक शिक्षा के सामने चुनौतियां होती हैं यदि आप स्पेशलिस्ट द पॉइंट पर यदि सब्जेक्ट होते तो शायद और बेहतर तरीके से बता

namaskar mitra aap janana chahte hain ki vartaman samay mein shikshakon ke liye kya chunautiyaan hain toh main aapko bataana chahunga shikshakon ke liye vartaman samay mein kaafi saree chunautiyaan ki sabse badi chunauti jo hai uske saamne vaah toh yahi hai ki vaah apne baccho ko sikha sake kya sach hai toh sikhne ke liye prerit kar sake toh ek accha shikshak wahi hai jo apne baccho ko sikhne ke liye prerit karte samay aur bhi kai samasyaen saamne chunautiyaan hain jo sarvabhaumik chunautiyon ki baat karenge toh vaah subject wise bhi alag alag ho sakti hai iske alava bhasha wise alag alag ho sakti hai toh depend karta hai ki aap kis tarah ki chunautiyon ke bare mein baat kar rahe hain chunauti hai kai prakar ki ho sakti hai toh yadi prashna puchenge next time se toh aapko bataya jaega ki vaah special chunauti hai kya hoti hai kya kya chunautiyaan baki jo sabse badi chunauti maante hue kisi bhi bacche ko sikhne ke liye prerit kar paana ko ek sabse badi chunauti hai ki baccha jo hai vaah acche tarike se ek badhiya tarike se sikhe sikhne ke liye prerit ho sake uske saamne sabse badi chunauti hai chhat ke saamne sabse badi chunauti hai ki vaah balak mein manviya gunon ka vikas kar sake aur loktantrik gunon ka vikas kar sake usme sadgunon ka vikas kar sake yah sab jo hai vaah yah sharirik shiksha ke saamne chunautiyaan hoti hain yadi aap specialist the point par yadi subject hote toh shayad aur behtar tarike se bata

नमस्कार मित्र आप जानना चाहते हैं कि वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए क्या चुनौतियां हैं तो

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