संसार में ऐसा क्या है जिसका किसी से कोई संबंध नहीं वह अपनी ही तपस्या में लीन रहता है?...


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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

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श्रीमान जी आपने पूछा है संसार में ऐसा क्या है जिसका किसी से कोई संबंध नहीं वह अपनी तपस्या में लीन रहता है क्योंकि संसार का जो सुख है झूठा है नाशवान है इसलिए जो लोग अपनी तपस्या से परमात्मा का सुख प्राप्त करने लगते हैं आत्मा का सुख जी ने प्राप्त होने लगता है सिर्फ संसार के सुख को समझने लगते हैं वह वास्तविकता को समझ जाते हैं कि यह जो झूठा सुख है इसमें कुछ नहीं रखा जब उन्हें सत्य का ज्ञान होने लगता है वास्तविक सुख प्राप्त होने लगता है प्रभु झूठे सुख के लिए क्यों किसी से संबंध बनाएगा क्यों उन संबंधों की फिक्र करेगा एक ही संबंध रखते हैं वह परमात्मा का एक संबंध में स्थान प्राप्त कर लेते हैं और वहां से प्रेम वहां से शांति वहां से वह सब कुछ मिल जाता है जो संसार में नहीं मिलता संसार से दूर भागने की कोशिश करते हैं तो जितने भी तपस्सु हैं वह संसार को छोड़ने के लिए तपस्या करते हैं जब उन्हें भानु जाता है कि संसार एक मृग मरीचिका है इस सुख दिखता है लेकिन सुख है नहीं जब उन्हें यह ज्ञान हो जाता है तब फिर अपना सुख आत्मा में ढूंढने लगते हो जब उन्हें आत्म सुख मिलने लगता है फिर वह संसार से वास्ता खत्म कर देते इसलिए ऐसा कुछ भी नहीं है जिसकी वजह से संसार में सुख ढूंढा जाए तपस्या में लीन रहने लगता है तु सुसुक परमात्मा का सुख मिलने लगता है और वह सुख मिल जाता है इसके लिए संसार से बर्ताव नहीं करता

shriman ji aapne poocha hai sansar me aisa kya hai jiska kisi se koi sambandh nahi vaah apni tapasya me Lean rehta hai kyonki sansar ka jo sukh hai jhutha hai nashvan hai isliye jo log apni tapasya se paramatma ka sukh prapt karne lagte hain aatma ka sukh ji ne prapt hone lagta hai sirf sansar ke sukh ko samjhne lagte hain vaah vastavikta ko samajh jaate hain ki yah jo jhutha sukh hai isme kuch nahi rakha jab unhe satya ka gyaan hone lagta hai vastavik sukh prapt hone lagta hai prabhu jhuthe sukh ke liye kyon kisi se sambandh banayega kyon un sambandhon ki fikra karega ek hi sambandh rakhte hain vaah paramatma ka ek sambandh me sthan prapt kar lete hain aur wahan se prem wahan se shanti wahan se vaah sab kuch mil jata hai jo sansar me nahi milta sansar se dur bhagne ki koshish karte hain toh jitne bhi tapassu hain vaah sansar ko chodne ke liye tapasya karte hain jab unhe bhanu jata hai ki sansar ek mrig marichika hai is sukh dikhta hai lekin sukh hai nahi jab unhe yah gyaan ho jata hai tab phir apna sukh aatma me dhundhne lagte ho jab unhe aatm sukh milne lagta hai phir vaah sansar se vasta khatam kar dete isliye aisa kuch bhi nahi hai jiski wajah se sansar me sukh dhundha jaaye tapasya me Lean rehne lagta hai tu susuk paramatma ka sukh milne lagta hai aur vaah sukh mil jata hai iske liye sansar se bartaav nahi karta

श्रीमान जी आपने पूछा है संसार में ऐसा क्या है जिसका किसी से कोई संबंध नहीं वह अपनी तपस्या

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