जब लोग नौकरशाही की इतनी आलोचना करते हैं, तो आपको कैसा लगता है क्या आपको लगता है कि उनका ऐसा महसूस करना गलत हैं?...


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Ansh jalandra

Motivational speaker

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

1:00
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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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Shakuntala Raghava

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका क्वेश्चन है जब लोग नौकरशाही की इतनी आलोचना करते हैं तो आपको कैसा लगता है क्या आपको लगता है कि उनका ऐसा महसूस करना गलत है जी नहीं ऐसा कुछ नहीं हम हम संविधान के अंदर हैं और हमें स्वतंत्रता है कि हम किसी चाहे वह क्वेश्चन सामाजिक हो नौकरी से संबंधित हो पॉलिटिक्स का हो कैसा भी हो तो हम हर बात के लिए स्वतंत्र है भारत का नागरिक क्यों है तो वह गलत नहीं हो सकता हां इसमें हर किसी को अधिकार है कि उसके मन में यदि कोई ऐसा कोई क्वेश्चन आ रहा है क्योंकि क्वेश्चन भी तभी आता है जब वहां पर किसी तरह की कुछ इस तरह से उसके साथ ज्यादती हो रही हो या वह खुद महसूस कर रहा हो या किसी की सुनी भी बात पर भी कई लोग इस तरह की चर्चा करने लगते हैं लेकिन उसके बावजूद भी हर किसी को अधिकार है हर तरह की जानकारी लेना मैं नहीं समझती नौकरशाही की आलोचना करना और अब आलोचना ही नहीं होगी तो उन चीजों में सुधार कैसे होगा तो मैं नहीं समझती थी ऐसा कोई भी ऐसा बोले कि नौकरशाही को आलोचना क्यों की जा रही है क्योंकि आपको मालूम है हमारा देश भ्रष्टाचार से भी भरा हुआ है ऊपर से नीचे तक सभी अधिकारी इमानदारी से भी काम करने वाले हैं रिश्वत लेने वाले भी हैं और किस तरह से लोगों पर ज्यादती करने वाले भी हैं अपनी पोस्ट का बहुत रौब दिखाते हैं इस तरह से आलोचना करना कोई बुरी बात नहीं है और मैं करिश्मा संस्थान दिल्ली से बात कर रही हूं मैन सिटी पैलेस कौन से राजा नर्सरी प्रिंसिपल रिटायर्ड हूं आप मेरा व्हाट्सएप नंबर ले सकते हैं क्योंकि मैं बचपन से ही सोशल वर्कर हूं पार्ट टाइम और अब तो मेरा 31 दिसंबर 2017 को मैं रिटायर हो चुकी हूं जो मेरा बाकी का जीवन है वह समाज के लिए है अपने देश के लिए है और विदेश में भी क्योंकि मैं इंटरनेशनल हेल्थ पर भी काम कर रही हूं और सेल्फ एंप्लॉयमेंट का ही मैं काम कर रही हूं किसी की कोई गुलामी नहीं करनी गाइड करना मेरा काम है तो मैं तीन-चार तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूं पढ़े लिखो के लिए भी मेरे पास काम है और जो बेचारे पर ही पाए हैं किसी वजह से मजबूरी में या बीच में पढ़ाई कम पड़े तो सभी को यही ईश्वर से दुआ की है मालिक लोगों से मिलने बता सकूं जिससे कि हम एकदम नेम

aapka question hai jab log naukarshahi ki itni aalochana karte hain toh aapko kaisa lagta hai kya aapko lagta hai ki unka aisa mehsus karna galat hai ji nahi aisa kuch nahi hum hum samvidhan ke andar hain aur hamein swatantrata hai ki hum kisi chahen vaah question samajik ho naukri se sambandhit ho politics ka ho kaisa bhi ho toh hum har baat ke liye swatantra hai bharat ka nagarik kyon hai toh vaah galat nahi ho sakta haan isme har kisi ko adhikaar hai ki uske man me yadi koi aisa koi question aa raha hai kyonki question bhi tabhi aata hai jab wahan par kisi tarah ki kuch is tarah se uske saath jyadati ho rahi ho ya vaah khud mehsus kar raha ho ya kisi ki suni bhi baat par bhi kai log is tarah ki charcha karne lagte hain lekin uske bawajud bhi har kisi ko adhikaar hai har tarah ki jaankari lena main nahi samajhti naukarshahi ki aalochana karna aur ab aalochana hi nahi hogi toh un chijon me sudhaar kaise hoga toh main nahi samajhti thi aisa koi bhi aisa bole ki naukarshahi ko aalochana kyon ki ja rahi hai kyonki aapko maloom hai hamara desh bhrashtachar se bhi bhara hua hai upar se niche tak sabhi adhikari imaandari se bhi kaam karne waale hain rishwat lene waale bhi hain aur kis tarah se logo par jyadati karne waale bhi hain apni post ka bahut raub dikhate hain is tarah se aalochana karna koi buri baat nahi hai aur main karishma sansthan delhi se baat kar rahi hoon man city Palace kaun se raja nursery principal retired hoon aap mera whatsapp number le sakte hain kyonki main bachpan se hi social worker hoon part time aur ab toh mera 31 december 2017 ko main retire ho chuki hoon jo mera baki ka jeevan hai vaah samaj ke liye hai apne desh ke liye hai aur videsh me bhi kyonki main international health par bhi kaam kar rahi hoon aur self employment ka hi main kaam kar rahi hoon kisi ki koi gulaami nahi karni guide karna mera kaam hai toh main teen char tarah ke project par kaam kar rahi hoon padhe likho ke liye bhi mere paas kaam hai aur jo bechare par hi paye hain kisi wajah se majburi me ya beech me padhai kam pade toh sabhi ko yahi ishwar se dua ki hai malik logo se milne bata sakun jisse ki hum ekdam name

आपका क्वेश्चन है जब लोग नौकरशाही की इतनी आलोचना करते हैं तो आपको कैसा लगता है क्या आपको लग

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Pamela Satpathy

IAS Officer, Telangana

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कॉमन मैन इन फॉर्म 10e आईएस को कम अनबन नहीं समझती तो नौकरी के बारे में जब आलोचना करते हैं तो अब मैं मानती हूं कि कई बार उनका ऐसा करना गलत नहीं होता उनके साथ कई बार किसी अफसर ने आप किसी सरकारी दफ्तर में बुरा व्यवहार होने के कारण या फिर उनकी कोई ग्रीन हो जाने के कारण फॉर्म नहीं हो पाने के कारण उनके मन में ऐसी धारणा जाग सकती है लेकिन मुझे लगता है कि जनरलाइजेशन हमें नहीं करना चाहिए कि सारे ऑफिसर या सारी नौकरशाही ऐसी होती है नौकरशाही में नौकरी वर्ल्ड लोग भूल जाते हैं अटेंड प्रदेश पब्लिक सर्विस भी पब्लिक होता है और सर्वेंट होता है तो कई बार जब स्पेशली सोशल मीडिया पर लोग कुछ भी लिखने लग जाते हैं कि पूरा विश्वास है तो काफी हटकर क्योंकि 10 में से 2 घटनाएं घटती है तो बाकी आठ को भी जिम्मेदार ठहराते हैं एंड इनसेंसेटिव कॉमेंट्स मैंने कई बार देखी है तो दुख होता है लेकिन हम तो हमको निष्काम कर्म में ब्लीच करना होता है कि जिस पब्लिक के लिए भी हम कुछ कर रहे हैं वह भले हमें पसंद करें ना करें हमें अपना कर्तव्य करते जाना है हमारे सब इसमें तो कोर्ट बहुत ही अर्जेंट है कुछ करना चाहूंगी भी चलाने हैं अमित पब्लिक कभी-कभी बढ़ भी जाती है गुस्सा भी करती है मैं ठीक है सब कुछ ऑल कम सेना ताकत

common man in form 10e ias ko kam anban nahi samajhti toh naukri ke bare mein jab aalochana karte hain toh ab main maanati hoon ki kai baar unka aisa karna galat nahi hota unke saath kai baar kisi officer ne aap kisi sarkari daftaar mein bura vyavhar hone ke karan ya phir unki koi green ho jaane ke karan form nahi ho paane ke karan unke man mein aisi dharana jag sakti hai lekin mujhe lagta hai ki generalisation hamein nahi karna chahiye ki saare officer ya saree naukarshahi aisi hoti hai naukarshahi mein naukri world log bhool jaate hain attend pradesh public service bhi public hota hai aur servant hota hai toh kai baar jab speshli social media par log kuch bhi likhne lag jaate hain ki pura vishwas hai toh kaafi hatakar kyonki 10 mein se 2 ghatnaye ghatati hai toh baki aath ko bhi zimmedar thahrate hain and insensitive comments maine kai baar dekhi hai toh dukh hota hai lekin hum toh hamko nishkam karm mein bleach karna hota hai ki jis public ke liye bhi hum kuch kar rahe hain vaah bhale hamein pasand kare na kare hamein apna kartavya karte jana hai hamare sab isme toh court bahut hi urgent hai kuch karna chahungi bhi chalane hain amit public kabhi kabhi badh bhi jaati hai gussa bhi karti hai theek hai sab kuch all kam sena takat

कॉमन मैन इन फॉर्म 10e आईएस को कम अनबन नहीं समझती तो नौकरी के बारे में जब आलोचना करते हैं त

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Salil Bijur

Civil servant (IRS)

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Nitish Kumar

RRB Railway JE

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Dr. P. N. Jha

TOPPERS IAS app. Sr.Facuty, IAS Coaching.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था उस देश में विधायकों द्वारा बनाए गए नीति निर्माण के आधार पर व्यवस्थित होता है भारत एक जनतांत्रिक देश है और आप सभी जानते हैं कि जनसंख्या की दृष्टि से यह विश्व का सबसे बड़ा जनतांत्रिक देश है और जनतांत्रिक प्रक्रिया में आए हुए हमें महज कुछ ही साल हुए 1947 में हम आजाद हुए और 50 हमारा संविधान बना और उसके बाद से हमने एक घन तांत्रिक राज्य के रूप में कार्य कर रहे हैं हमारा अनुभव अभी बहुत ज्यादा नहीं है जब हम अपनी तुलना अन्य जनतांत्रिक राज्यों से करते हैं और चाचा 100 वर्षों से लोगों को आप भी यह जनतांत्रिक का गण तांत्रिक देश का अनुभव है अब भारत में नई नई समस्याएं उभर कर सामने आ रही है भारतवर्ष का चरित्र है भारतवर्ष की जॉब नागरिकों की जो स्थिति है या भारत पर जो कह लीजिए कि भारत में जो विविधता पूर्ण आबादी है वीरता पूर्ण क्षेत्रफल है वीरता पूर्ण समस्याएं इन सब समस्याओं के अनुरूप हम नौकरशाही का यह प्रशासनिक व्यवस्था का अभी तक की निर्माण नहीं कर पाए हैं ना कि बहुत हद तक जो संघात्मक व्यवस्था में इस तरह के प्रयास किए गए हैं कि अभिषेक अनुकूल क्षेत्र के अनुकूल और नागरिकों के अनुकूल हम प्रशासनिक व्यवस्था को जिम्मेवार बनाए लेकिन कभी-कभी नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ जाती है और इस सनरूफ अपेक्षाओं के अनुरूप विधि निर्माण में सफल नहीं हो पाते हैं या फिर उस बीपी पर हम्मा ठीक ढंग से अमल नहीं कर पाते क्योंकि इसमें दोनों प्रकार के दोस्त हो सकते हैं या तो कार्टूंस का 200 उस प्रकार के हमारे पास में व्यवस्थाएं नहीं होती है जिस पर कि हम अपने निर्णय को कार्यरत कर सके और दूसरा बात है जो बहुत महत्वपूर्ण बात है वह मनोबल की बात है या फिर वह एक जो इच्छा शक्ति की बात है तो इच्छा शक्ति भी और कार्य करने का माहौल भी और इस संबंध में विधि निर्माण भी यह सब कुछ ऐसे आप पहलू हैं जो कि प्रशासनिक व्यवस्था में कहीं ना कहीं कुछ कसर छोड़ देते हैं और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुकूल नजर नहीं आते इसलिए आमतौर पर प्रशासन की आलोचना की जाती हालांकि अगर इसके मूल में जाए तो अराजकतावादी जो हमारे अनार्किस्ट्स सिद्धांत कर रहे हैं उन लोगों का कहना है कि राज्य सदैव हमेशा फोर्स के रूप में देखा जाता है इसलिए जब गांधी जी ने रामराज्य की कल्पना की मैंने कहा था कि कैसा राज्य है जहां पर की कोई पुलिस और ना कोई प्रधान संघ ना कोई दबाव हो तब दबावों से मुक्त हो पुलिस वालों से मुक्त हो राजी हो ही ना और राज्य की संकल्पना को दरकिनार कर दिया था कहीं और हमारे पैसे युवा राजनीति शास्त्र रेंज में राज्य की संकल्पना को बिल्कुल दरकिनार किया लेकिन राज्य किस राज्य की व्यवस्था के बिना मनुष्य की मार्क्स का कहना है बहुत अच्छी तरीके से की क्लासिकल जो हमारी क्लामिस्ट हैं उसके आधार पर मार्क्स कहते हैं कि मानव जो है वह स्वभाव से बहुत बड़ा यूटिलिटेरियन प्राणी है उपयोगितावाद है तो कहीं न कहीं अपनी उपयोगिता के लिए दूसरे के दूसरे की जो चीज है याद उसकी की जॉब और संपत्ति उसका वो शोषण करेगा दूसरे की शक्ति का शोषण करेगा तो ऐसे में राज्य का होना बहुत आवश्यक है और हम शामिल बाद बिगड़ना भी हासिल सके तो राज्य की शक्ति के प्रयोग के द्वारा समाजवाद तो हासिल कर ही सकते तो ऐसी स्थिति में राज्य 11 फोर्स फुल एजेंसी के रूप में में दिखाई पड़ता है जो कि अमीर और गरीब सबके बीच के भेद को कम करने का प्रयास करते हुए कहीं ना कहीं तार्किक रूप से एक का संपूर्ण समाज की संकल्पना को लेकर आगे बढ़ता है और यही कारण है कि बहुत समय में राज्य शोषणकारी संस्था के रूप में प्रकट होता है लेकिन ऐसी बात नहीं है आने वाले दिनों में जब जागरूकता का निर्माण होगा साक्षरता कब तक बढ़ेगा लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार अपने अपने अधिकार और कर्तव्य को समझेंगे तो प्रशासन थोड़ी प्रशासनिक व्यवस्था और भी जिम्मेदार होगी और प्रशासन में दीवार लोग जाएंगे उनकी इच्छाशक्ति भी अनुरूप होगी तो मेरा यह मानना है कि 111 बोली में सक्रियता देना कि प्रशासन गैर जिम्मेवार है या प्रशासन जो है वह अपनी भूमिका को निभाने में अक्षम है यह सही नहीं है हां थोड़ी बहुत तो कसर बाकी रहती है थोड़ी बहुत समस्याएं होती हैं लेकिन उन समस्याओं को समय रहते हुए क्योंकि भारत में जबरदस्त बदलाव आए हैं और वह स्थिति के साथ समय के साथ चित्र के साथ आ भारत के क्षेत्र में चार उद्योग के चरित्र होता किसी का चरित्र को लगातार बदल रहा है और क्योंकि हमें ट्रांजिशन के समय में जिसमें कि हम एक बंद बाजार से खुले बाजार की ओर हैं हमने देश से जो उसकी डिटेल देश से हम एक ऐसे देश में है जो विश्व ग्रामर विश्व नगर की सलकनपुर संकल्पना को लेकर आगे बढ़ रहे हैं तो जाहिर सी बात है हमारी संस्कृति में हमारी पद्धति में लगातार बदलाव बदलाव हो रहे हैं इसलिए प्रशासन को उसी अनुरूप थोड़ा आगे बढ़कर थोड़ा खुला होगा थोड़ा पीपल फ्रेंडली होकर थोड़ा बहुत काम करना होगा भरता करने के प्रयास किए हैं प्रशासनिक व्यवस्था में आज आप देखेंगे तो आपकी फुल साइज थ्योरी है या फिर आप अगर हम देखे तो गुड गवर्नेंस की संकल्पना है यह तमाम चीजों से हमने आखिर अच्छे प्रदर्शन देने का कार्य किया है और इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और समय ऐसा आएगा जब आप जब लोग प्रदर्शन की सराहना करेंगे ना कि आलोचना

kisi bhi desh ki prashaasnik vyavastha us desh mein vidhayakon dwara banaye gaye niti nirmaan ke aadhaar par vyavasthit hota hai bharat ek janatantrik desh hai aur aap sabhi jante hain ki jansankhya ki drishti se yah vishwa ka sabse bada janatantrik desh hai aur janatantrik prakriya mein aaye hue hamein mahaj kuch hi saal hue 1947 mein hum azad hue aur 50 hamara samvidhan bana aur uske baad se humne ek ghan tantrika rajya ke roop mein karya kar rahe hain hamara anubhav abhi bahut zyada nahi hai jab hum apni tulna anya janatantrik rajyo se karte hain aur chacha 100 varshon se logo ko aap bhi yah janatantrik ka gan tantrika desh ka anubhav hai ab bharat mein nayi nayi samasyaen ubhar kar saamne aa rahi hai bharatvarsh ka charitra hai bharatvarsh ki job nagriko ki jo sthiti hai ya bharat par jo keh lijiye ki bharat mein jo vividhata purn aabadi hai veerta purn kshetrafal hai veerta purn samasyaen in sab samasyaon ke anurup hum naukarshahi ka yah prashaasnik vyavastha ka abhi tak ki 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shaamil baad bigadana bhi hasil sake toh rajya ki shakti ke prayog ke dwara samajavad toh hasil kar hi sakte toh aisi sthiti mein rajya 11 force full agency ke roop mein mein dikhai padta hai jo ki amir aur garib sabke beech ke bhed ko kam karne ka prayas karte hue kahin na kahin tarkik roop se ek ka sampurna samaj ki sankalpana ko lekar aage badhta hai aur yahi karan hai ki bahut samay mein rajya shoshankari sanstha ke roop mein prakat hota hai lekin aisi baat nahi hai aane waale dino mein jab jagrukta ka nirmaan hoga saksharta kab tak badhega log apni avashyakta ke anusaar apne apne adhikaar aur kartavya ko samjhenge toh prashasan thodi prashaasnik vyavastha aur bhi zimmedar hogi aur prashasan mein deewaar log jaenge unki ichchhaashakti bhi anurup hogi toh mera yah manana hai ki 111 boli mein sakriyata dena ki prashasan gair jimmewar hai ya prashasan jo hai vaah apni bhumika ko nibhane mein aksham hai yah sahi nahi hai haan thodi bahut toh kesar baki rehti hai thodi bahut samasyaen hoti hain lekin un samasyaon ko samay rehte hue kyonki bharat mein jabardast badlav aaye hain aur vaah sthiti ke saath samay ke saath chitra ke saath aa bharat ke kshetra mein char udyog ke charitra hota kisi ka charitra ko lagatar badal raha hai aur kyonki hamein transition ke samay mein jisme ki hum ek band bazaar se khule bazaar ki aur hain humne desh se jo uski detail desh se hum ek aise desh mein hai jo vishwa grammar vishwa nagar ki salakanapur sankalpana ko lekar aage badh rahe hain toh jaahir si baat hai hamari sanskriti mein hamari paddhatee mein lagatar badlav badlav ho rahe hain isliye prashasan ko usi anurup thoda aage badhkar thoda khula hoga thoda pipal friendly hokar thoda bahut kaam karna hoga bharta karne ke prayas kiye hain prashaasnik vyavastha mein aaj aap dekhenge toh aapki full size theory hai ya phir aap agar hum dekhe toh good Governance ki sankalpana hai yah tamaam chijon se humne aakhir acche pradarshan dene ka karya kiya hai aur is disha mein aage badh rahe hain aur samay aisa aayega jab aap jab log pradarshan ki sarahana karenge na ki aalochana

किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था उस देश में विधायकों द्वारा बनाए गए नीति निर्माण के आधार

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

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मैं इसे किसी भी मुद्दे में पढ़ता नहीं नहीं ऐसी चीजें के बारे में सोचता हूं मैं सिर्फ एक ही चीज के जानता हूं कि आपके अंदर होना था क्षमता है आत्मविश्वास से भरी है भरोसा है तब कुछ भी हासिल कर सकते अपने जीवन में उन लोगों के लिए कायदे एक आदर्शवादी इंसान बन सकते हो लोगों के सामने अपनी छवि बना सकते नोकिया 100 से क्या लेगा दर्शाती यह वादे हुए बच्चे आपको लगता है कि आपके हिसाब से जो चाहे वही आपका व्यक्तिगत क्षणों की लिस्ट चाहिए आपको लगता नहीं सही से तो नहीं से यह सब चीज संपूर्ण रूप से आपके ऊपर निर्भर करता है पर आपका ही बच्चा व्यक्तिगत शरीफ क्या कहते हैं उसके प्रभावी रूप से कम कीजिए और अपने लक्ष्य को अपने जीवन को आगे

main ise kisi bhi mudde mein padhata nahi nahi aisi cheezen ke bare mein sochta hoon main sirf ek hi cheez ke jaanta hoon ki aapke andar hona tha kshamta hai aatmvishvaas se bhari hai bharosa hai tab kuch bhi hasil kar sakte apne jeevan mein un logo ke liye kayade ek aadarshvaadi insaan ban sakte ho logo ke saamne apni chhavi bana sakte nokia 100 se kya lega darshatee yah waade hue bacche aapko lagta hai ki aapke hisab se jo chahen wahi aapka vyaktigat kshanon ki list chahiye aapko lagta nahi sahi se toh nahi se yah sab cheez sampurna roop se aapke upar nirbhar karta hai par aapka hi baccha vyaktigat sharif kya kehte hain uske prabhavi roop se kam kijiye aur apne lakshya ko apne jeevan ko aage

मैं इसे किसी भी मुद्दे में पढ़ता नहीं नहीं ऐसी चीजें के बारे में सोचता हूं मैं सिर्फ एक ही

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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पीआर एजेंसी ज्योति है कि हां कोई व्यक्ति नौकरी करता है करीब 80% लोग होते नौकरी पेशा जो कार्य है उसको बनाते हैं क्या होता है कि मिडिल स्कूल के माध्यम से भी उसको निभा कर सकता है और एक ही ऐसा क्षेत्र माना जाता है कि सामान्य समस्या है वह नहीं रहती है और व्यक्ति का जीवन सरल तक उसको एक तरह से लेना गलत नहीं है क्योंकि आ सकती भी बिजनेस नहीं कर सकते कुछ को तो नौकरी करनी पड़ेगी और वही नौकरी करेंगे तो ही आगे का जीवन काल समाप्त कर समाज को चलता है कि नौकरी हम किस तरीके से करते हैं हमारा जो टेस्ट का लेवल है क्या हम उसमें अस्मिता बना क्विक को सही बात होता है कि जब नौकरी पेशे में क्या होता है कि आप किसी कार्य में काफी समय से हैं तो आपका दिन कैस्ट्रोल कम रहता है यार आपकी जो कार्य क्षमता है गिरिडीह जाती है और आपकी जरूरत है वह भी कम या की कोशिश कीजिए किसानों की

PR agency jyoti hai ki haan koi vyakti naukri karta hai kareeb 80 log hote naukri pesha jo karya hai usko banate kya hota hai ki middle school ke madhyam se bhi usko nibha kar sakta hai aur ek hi aisa kshetra mana jata hai ki samanya samasya hai vaah nahi rehti hai aur vyakti ka jeevan saral tak usko ek tarah se lena galat nahi hai kyonki aa sakti bhi business nahi kar sakte kuch ko toh naukri karni padegi aur wahi naukri karenge toh hi aage ka jeevan kaal samapt kar samaj ko chalta hai ki naukri hum kis tarike se karte hain hamara jo test ka level hai kya hum usme asmita bana quick ko sahi baat hota hai ki jab naukri peshe mein kya hota hai ki aap kisi karya mein kaafi samay se hain toh aapka din kaistrol kam rehta hai yaar aapki jo karya kshamta hai girdih jaati hai aur aapki zarurat hai vaah bhi kam ya ki koshish kijiye kisano ki

पीआर एजेंसी ज्योति है कि हां कोई व्यक्ति नौकरी करता है करीब 80% लोग होते नौकरी पेशा जो कार

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

5:57
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप लोग इतना करते हैं अगर जाए इस बात पर की जाती है तो जायज है लेकिन आज बात पर की जाती तो आज जो नौकरशाही है वह राजनीतिक उनके हाथ बिक चुकी है राजनीतिक अपनी आधार पर नौकर साउंड कूचे सर कानून को कमजोर कर आते हैं विपक्ष की सरकारों को कमजोर कर आते हैं और ऐसे हालात पैदा करते हैं किस में नौकरशाहों की मुख्य भूमिका होती है क्योंकि बिना उनके प्रमाण इकट्ठे किए बिना उनके सूचनाएं किए बिना उनके कारगुजारी की किसी भी सरकार का संचालन एक प्रकार दूसरे सरकार के पक्ष में यादों चित्रकार के विरोध में कार्य करती है कि केंद्र सरकार ने आज डे के मध्य प्रदेश कमलनाथ की सरकार क्यों नहीं सरकार को गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी ज्योतिराज सिंधिया जिन्होंने कांग्रेश को दगा देकर मैं इसलिए कांग्रेस को दगा देकर तुम्हें अगर कुछ चाहिए था तो ओपन कर सकते थे लेकिन क्यों नहीं आप पार्टी से क्यों नहीं सरकार में से आप बीच में छोड़कर दूसरे में शामिल होते हैं तो सबसे बड़े धोखेबाज वह लोग होते हैं चाहे वह कांग्रेस वाले बीजेपी में जाए बीजेपी वाले कांग्रेसमें जाए बिना नौकरशाही के नौकरशाही में मुकर कठिन हो जाते हैं कट्टर से भटक जाते हैं तो उनकी आलोचना जाए क्योंकि सबसे बड़ा कर्तव्य हमें जो करतब करने का मौका मिला है जिस ड्यूटी पर हमें जिस पथ पर हमने उस पथ पर कोई कितना ही हमें लालच से कितना ही मन तोड़ने की कोशिश करें कितना ही हमें भटकाने का गाना चाहिए लेकिन हर इंसान बिकाऊ है किसी भी पद पर हों टाइम कितना ही बड़ा अधिकारी हो चाय वाय पी सोया यह सब कठपुतली बन गए हैं सरकार और उसका परिणाम क्या होता है यह देश के लिए बड़ा कष्टदायक हो जाए जनता या आम आदमी शिवाय विरोध और आलोचना के आज की सरकार में करके आ पा रहा है आप कुछ बताइए आलोचना करने से कुछ नहीं हो रहा और विरोध करने से भी कुछ नहीं रख दो कि सरकार ने जो है तानाशाही भरा रास्ता अख्तियार कर रखा है बड़ा अफसोस जनक है कि जो मध्यप्रदेश में हो रहा है यह यह दिल की धड़कनों को बनाने वाला है क्योंकि सरकार घूम लेंगे जो भी जो आप बोल रहे हैं यह बीच आपको ही काटने पड़ेंगे कल को आप सत्ता से बाहर होंगे तो आपके साथ भी यही सब होगा यानी दूसरों को हौसला बुलंदी कर रहे हैं क्रिकेट काम करने सीख लो आगे से आपको ऐसा ही करना है जबकि एक सरकार के चुनाव पर करोड़ों रुपया खर्चा रुपया खर्च होता है शांति पूर्वक सरकार को चलने देना चाहिए कोई भी सरकार और चाहे केंद्र की हो यार आप लेकिन तोड़फोड़ यह बहुत अनुचित और अन्याय ऐसा कानून बनना चाहिए और हमारी सुप्रीम कोर्ट क्या करें और कि न्याय क्षेत्र में नहीं है फिर भी उनको ऐसा कानून बनाने के लिए मजबूर करना चाहिए कि जो भी सरकार में सत्ता परिवर्तन पार्टी बदलता है उसको कम से कम 10 साल का उत्पादन लगता है अगर संविधान में बदलाव भी किया जा सकता है तो हमारा मानना है कि उनकी आलोचना करना गलत नहीं है गलती अनूठा करना गलत नहीं है लेकिन सही या लोचा कर्नाटक के मुद्दे पर इस टाइम नहीं है तो उनके अनुज क्या करना चाहिए लेकिन सहयोग नजर आता है किस तरह की तोड़फोड़ केंद्र सरकार कर रही है आ जाओ तुम इतने पैसे ले लो इंसान फिल्म कुछ नहीं करने वाला और अपने एमपी कोर्ट ने मुझको बुलाया है दौलत भी मिल गई मिल जाएगी लेकिन यह भूलने की दामन छोड़कर गए हैं उनके साथ क्या हुआ और क्या होने वाला है

aap log itna karte hain agar jaaye is baat par ki jaati hai toh jayaj hai lekin aaj baat par ki jaati toh aaj jo naukarshahi hai vaah raajnitik unke hath bik chuki hai raajnitik apni aadhar par naukar sound kuche sir kanoon ko kamjor kar aate hain vipaksh ki sarkaro ko kamjor kar aate hain aur aise haalaat paida karte hain kis mein naukarashaho ki mukhya bhumika hoti hai kyonki bina unke pramaan ikatthe kiye bina unke suchnaen kiye bina unke kargujari ki kisi bhi sarkar ka sanchalan ek prakar dusre sarkar ke paksh mein yaadon chitrakar ke virodh mein karya karti hai ki kendra sarkar ne aaj day ke madhya pradesh kamalnath ki sarkar kyon nahi sarkar ko girane mein koi kesar nahi chodi jyotiraj sindhiya jinhone congress ko daga dekar main isliye congress ko daga dekar tumhe agar kuch chahiye tha toh open kar sakte the lekin kyon nahi aap party se kyon nahi sarkar mein se aap beech mein chhodkar dusre mein shaamil hote hain toh sabse bade dhokhebaj vaah log hote hain chahen vaah congress waale bjp mein jaaye bjp waale kangresamen jaaye bina naukarshahi ke naukarshahi mein mukar kathin ho jaate hain kattar se bhatak jaate hain toh unki aalochana jaaye kyonki sabse bada kartavya hamein jo kartab karne ka mauka mila hai jis duty par hamein jis path par humne us path par koi kitna hi hamein lalach se kitna hi man todne ki koshish kare kitna hi hamein bhatkane ka gaana chahiye lekin har insaan bikau hai kisi bhi pad par ho time kitna hi bada adhikari ho chai why p soya yah sab kathaputali ban gaye hain sarkar aur uska parinam kya hota hai yah desh ke liye bada kashtdayak ho jaaye janta ya aam aadmi shivay virodh aur aalochana ke aaj ki sarkar mein karke aa paa raha hai aap kuch bataye aalochana karne se kuch nahi ho raha aur virodh karne se bhi kuch nahi rakh do ki sarkar ne jo hai tanashahi bhara rasta akhtiyar kar rakha hai bada afasos janak hai ki jo madhya pradesh mein ho raha hai yah yah dil ki dhadkanon ko banane vala hai kyonki sarkar ghum lenge jo bhi jo aap bol rahe hain yah beech aapko hi katne padenge kal ko aap satta se bahar honge toh aapke saath bhi yahi sab hoga yani dusro ko hausla bulandi kar rahe hain cricket kaam karne seekh lo aage se aapko aisa hi karna hai jabki ek sarkar ke chunav par karodo rupya kharcha rupya kharch hota hai shanti purvak sarkar ko chalne dena chahiye koi bhi sarkar aur chahen kendra ki ho yaar aap lekin thorphor yah bahut anuchit aur anyay aisa kanoon bana chahiye aur hamari supreme court kya kare aur ki nyay kshetra mein nahi hai phir bhi unko aisa kanoon banne liye majboor karna chahiye ki jo bhi sarkar mein satta parivartan party badalta hai usko kam se kam 10 saal ka utpadan lagta hai agar samvidhan mein badlav bhi kiya ja sakta hai toh hamara manana hai ki unki aalochana karna galat nahi hai galti anutha karna galat nahi hai lekin sahi ya locha karnataka ke mudde par is time nahi hai toh unke anuj kya karna chahiye lekin sahyog nazar aata hai kis tarah ki thorphor kendra sarkar kar rahi hai aa jao tum itne paise le lo insaan film kuch nahi karne vala aur apne mp court ne mujhko bulaya hai daulat bhi mil gayi mil jayegi lekin yah bhulne ki daman chhodkar gaye hain unke saath kya hua aur kya hone vala hai

आप लोग इतना करते हैं अगर जाए इस बात पर की जाती है तो जायज है लेकिन आज बात पर की जाती तो आज

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Debidutta Swain

IAS Aspirant | Life Motivational Speaker,Daily Story Teller

1:31
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बीके नौकरशाही आप दो प्रकार की में बोलना चाहूंगा कि नहीं करोगी दो चीज कहां पर मिली थी कि नौकरशाही करती हो और उसी मानव धर्म और मानव समाज की करते हो जिस मानव समाज में आप खुद को आपके परिवार भी है उनकी भी नौकरी करते हैं अपने आप को समझते हैं लोग आप की रेसिपी को समझते हैं एक टेलिविजन किससे करूं चीजों को खुद की भारत में तो बिल्कुल भी कदर नहीं करते कि डेमो कैसी है जहां पर ऊपर कमेंट ही डेमो के लोग यहां की सरकार है लोगों की तो उनकी 9 घंटे में मेरे लिए कोई गलत नहीं लगता है यह आपके लिए आपके अंदर में क्रिसमस मेरे को लगता है

BK naukarshahi aap do prakar ki me bolna chahunga ki nahi karogi do cheez kaha par mili thi ki naukarshahi karti ho aur usi manav dharm aur manav samaj ki karte ho jis manav samaj me aap khud ko aapke parivar bhi hai unki bhi naukri karte hain apne aap ko samajhte hain log aap ki recipe ko samajhte hain ek television kisse karu chijon ko khud ki bharat me toh bilkul bhi kadar nahi karte ki demo kaisi hai jaha par upar comment hi demo ke log yahan ki sarkar hai logo ki toh unki 9 ghante me mere liye koi galat nahi lagta hai yah aapke liye aapke andar me Christmas mere ko lagta hai

बीके नौकरशाही आप दो प्रकार की में बोलना चाहूंगा कि नहीं करोगी दो चीज कहां पर मिली थी कि नौ

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नमस्कार आपका सवाल यह है कि जब लोग नौकरशाही की इतनी आलोचना करते हैं तो आपको कैसा ऐसा लगता है ऐसा लगता है और आगे क्या लिखा आपने क्या आपको गलत लगता है कि वह लोग मतलब बस उस जो कर रहे हैं वह गलत है आप बिल्कुल नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता है कि लोग जो सिविल सर्विस की या फिर मतलब वह नौकरशाही की आलोचना करते हैं तो कुछ लोग हैं जो नौकरशाही में मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जो जो कि गलत किए हैं लोगों के साथ तुम्हारी बातें के लोग लेकिन उस सारे नौकरशाहों को गलत कहना या आलोचना करना यह थोड़ा सा महल ठीक नहीं है लेकिन जो लोग करती हूं कभी नहीं जा सकता आप बात तो सुनी होगी कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है तो मैं कहता हूं कि एक मछली जब बंदा करी थी एक मछली को ही लोगों को और टारगेट बनाना चाहिए ना की पूरी तालाब को गंदा मान लेना चाहिए यह मेरा कंसल्टेंसी है और मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि लोग लोकशाही की आलोचना क्यों करते हैं क्योंकि हमारे कुछ लोग गलत है तो मैं क्यों हुआ किसी की आलोचनाओं को गलत समझ लूंगा ऐसा नहीं है और एक बात और भी है कि जिस हिसाब से लोग आज के दौर में काम कर रहे हैं इसमें कुछ नए युवक है अब नौकरशाही में बहुत ज्यादा सुधार हो गया है पहले के जैसा नहीं है हां कुछ न कुछ अभी भी कई जगह है जहां पर यह सब हो रहा है लेकिन मैं नहीं समझता कि यह आलोचना गलत है कुछ लोग जब इस लाइन में है कुछ लोग गलत किया है तो दर्द का तो सुनना तो पड़ेगा धन्यवाद

namaskar aapka sawaal yah hai ki jab log naukarshahi ki itni aalochana karte hain toh aapko kaisa aisa lagta hai aisa lagta hai aur aage kya likha aapne kya aapko galat lagta hai ki vaah log matlab bus us jo kar rahe hain vaah galat hai aap bilkul nahi mujhe aisa nahi lagta hai ki log jo civil service ki ya phir matlab vaah naukarshahi ki aalochana karte hain toh kuch log hain jo naukarshahi mein main kisi ka naam nahi lena chahta lekin kuch aise log hain jo jo ki galat kiye hain logo ke saath tumhari batein ke log lekin us saare naukarashaho ko galat kehna ya aalochana karna yah thoda sa mahal theek nahi hai lekin jo log karti hoon kabhi nahi ja sakta aap baat toh suni hogi ki ek machli poore taalab ko ganda kar deti hai toh main kahata hoon ki ek machli jab banda kari thi ek machli ko hi logo ko aur target banana chahiye na ki puri taalab ko ganda maan lena chahiye yah mera consultancy hai aur mujhe kabhi bhi aisa mehsus nahi hua ki log lokshahi ki aalochana kyon karte hain kyonki hamare kuch log galat hai toh main kyon hua kisi ki aalochanaon ko galat samajh lunga aisa nahi hai aur ek baat aur bhi hai ki jis hisab se log aaj ke daur mein kaam kar rahe hain isme kuch naye yuvak hai ab naukarshahi mein bahut zyada sudhaar ho gaya hai pehle ke jaisa nahi hai haan kuch na kuch abhi bhi kai jagah hai jaha par yah sab ho raha hai lekin main nahi samajhata ki yah aalochana galat hai kuch log jab is line mein hai kuch log galat kiya hai toh dard ka toh sunana toh padega dhanyavad

नमस्कार आपका सवाल यह है कि जब लोग नौकरशाही की इतनी आलोचना करते हैं तो आपको कैसा ऐसा लगता ह

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माता की सेवा करते हैं तो जनता उनको देखकर भाई होते हैं वह सिया जी हां ऐसे ऑप्शन रहेंगे तो काम करते हैं हमें अपने भलाई के लिए काम करता है जिससे वह बहुत मिस करते हैं ताकि

mata ki seva karte hain toh janta unko dekhkar bhai hote hain vaah sia ji haan aise option rahenge toh kaam karte hain hamein apne bhalai ke liye kaam karta hai jisse vaah bahut miss karte hain taki

माता की सेवा करते हैं तो जनता उनको देखकर भाई होते हैं वह सिया जी हां ऐसे ऑप्शन रहेंगे तो क

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Narendra Singh Jaat

Elementary Teacher

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जब लोग हमेशा कितने आलोचना करते हैं तो यह आपको ऐसा लगता है मुझे रहता है जहां तक मेरी बात है मैं महसूस करता हूं यह गलत है क्योंकि नौकरशाह की आलोचना करना गलत है यह उनकी आलोचना करते हो हां अगर आप किसी एचएमटी हो आज सभी नौकरशाहों को परेशानी में आलोचना करते हैं तो आप गलत हैं क्योंकि आप एक की वजह से सभी को परेशान तभी तो आलोचक नहीं मानते उसी प्रकार राजनीति में नेता एक गलत हो सकता है सभी होते हैं उसे कभी गलत होता है बाकी सब नहीं होते यह सोचने वाली बात है सिर्फ जो बात होती है दूसरों नेता है और कुछ ऐसे भी है एनी नौकरशाही जो भी होते हैं उनके बारे में क्यों नहीं होती है हां अगर आपको ऐसा लगता है तो आप वाला थे या फ डिपेंड करता क्या किस प्रकार उसको प्रस्तुत करते हैं

jab log hamesha kitne aalochana karte hain toh yah aapko aisa lagta hai mujhe rehta hai jaha tak meri baat hai main mehsus karta hoon yah galat hai kyonki naukarashah ki aalochana karna galat hai yah unki aalochana karte ho haan agar aap kisi HMT ho aaj sabhi naukarashaho ko pareshani me aalochana karte hain toh aap galat hain kyonki aap ek ki wajah se sabhi ko pareshan tabhi toh aalochak nahi maante usi prakar raajneeti me neta ek galat ho sakta hai sabhi hote hain use kabhi galat hota hai baki sab nahi hote yah sochne wali baat hai sirf jo baat hoti hai dusro neta hai aur kuch aise bhi hai any naukarshahi jo bhi hote hain unke bare me kyon nahi hoti hai haan agar aapko aisa lagta hai toh aap vala the ya f depend karta kya kis prakar usko prastut karte hain

जब लोग हमेशा कितने आलोचना करते हैं तो यह आपको ऐसा लगता है मुझे रहता है जहां तक मेरी बात है

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