IFS अधिकारी IAS अधिकारियों की तरह प्रसिद्ध क्यों नहीं होते, हालांकि IFS में प्रवेश करना ज़्यादा कठिन होता है?...


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Ansh jalandra

Motivational speaker

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पीआईएफ नदरई बताएं कि अपने विदेशी राजदूतों ने कार्यभार संभालते जब याद आती है और वह काफी हद तक जनता के मुकाबला

PIF nadrai bataye ki apne videshi rajduton ne karyabhar sambhalate jab yaad aati hai aur vaah kaafi had tak janta ke muqabla

पीआईएफ नदरई बताएं कि अपने विदेशी राजदूतों ने कार्यभार संभालते जब याद आती है और वह काफी हद

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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Vinod uttrakhand Tiwari

Author,You Tuber(Thoght Of सक्सेस)

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कि आपका प्रश्न आईएफएस अधिकारी आईएएस अधिकारियों तक शादी क्यों नहीं होती है फर्स्ट में प्रवेश करना जा सकता है यहां आई एफ एस अर्थात इंडियन फॉरेन सर्विस में प्रवेश करना इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के अधिकारियों की तरह जल कृष्ण अवतार सबसे टॉप की रैंकिंग युवती है आईएएस की परीक्षा में सबसे टॉप की रंगीन बड़े लोगों को ही आईएफएच में स्थान दिया जाता है और यह विदेशों में भारतीय दूतावास में राजनयिक अधिकारी के रूप में प्रवेश होते हैं शिवा में सेकंड ग्रेड ऑफिसर फर्स्ट ग्रेड ऑफीसर फर्स्ट थर्ड ग्रेड सेकंड सेकेंडरी फर्स्ट सेक्रेटरी उसके बाद उनका पोषण होता है सीधी चीजें राजदूत के रूप में उनकी सेवाएं विदेशों में होती हैं इसलिए इनका नाम भी जनता के संपर्क में भारतीय जनता के संपर्क में नहीं आती और विदेशों में ही अपनी सेवाएं राजनयिक शुरू से देते हैं और उस देश से जहां सोते हैं अपने देश के हितों का ध्यान उस दृश्य देखा जाए तो अधिकारियों का काम जिंदा है या देवता है यह उस देश में भारत किया था प्रस्तुत करती है लेकिन का सीधा सीधा जनता से जुड़ाव नहीं होता है भारतीय जनता से तो बिल्कुल नहीं होता है इसलिए आईएस अधिकारी होते हैं जो सेवा में आते ही 5000 साल में जिलाधिकारी हो जाते हैं और फिर प्रमोशन पाते पाते प्रमुख सचिव के पद तक पहुंचे क्योंकि यह भारतीय जनमानस में अधिकारी के रूप में जनता के संपर्क में रहते हैं जनता के बहुत काम आती है जनता के काम करते हैं इसलिए यह जनता में और जनमानस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दोनों की है एक जनता के बीच में है कि जनता में प्रसिद्ध है और दूसरा अपना चुपचाप काम कर रहा है खेत में इतना कुछ नहीं होता

ki aapka prashna IFS adhikari IAS adhikaariyo tak shaadi kyon nahi hoti hai first me pravesh karna ja sakta hai yahan I f S arthat indian foreign service me pravesh karna indian administrative service ke adhikaariyo ki tarah jal krishna avatar sabse top ki ranking yuvati hai IAS ki pariksha me sabse top ki rangeen bade logo ko hi IFH me sthan diya jata hai aur yah videshon me bharatiya dootavaas me rajanayik adhikari ke roop me pravesh hote hain shiva me second grade officer first grade officer first third grade second secondary first secretary uske baad unka poshan hota hai seedhi cheezen rajdut ke roop me unki sevayen videshon me hoti hain isliye inka naam bhi janta ke sampark me bharatiya janta ke sampark me nahi aati aur videshon me hi apni sevayen rajanayik shuru se dete hain aur us desh se jaha sote hain apne desh ke hiton ka dhyan us drishya dekha jaaye toh adhikaariyo ka kaam zinda hai ya devta hai yah us desh me bharat kiya tha prastut karti hai lekin ka seedha seedha janta se judav nahi hota hai bharatiya janta se toh bilkul nahi hota hai isliye ias adhikari hote hain jo seva me aate hi 5000 saal me jiladhikari ho jaate hain aur phir promotion paate paate pramukh sachiv ke pad tak pahuche kyonki yah bharatiya janmanas me adhikari ke roop me janta ke sampark me rehte hain janta ke bahut kaam aati hai janta ke kaam karte hain isliye yah janta me aur janmanas me mahatvapurna zimmedariyan dono ki hai ek janta ke beech me hai ki janta me prasiddh hai aur doosra apna chupchap kaam kar raha hai khet me itna kuch nahi hota

कि आपका प्रश्न आईएफएस अधिकारी आईएएस अधिकारियों तक शादी क्यों नहीं होती है फर्स्ट में प्रवे

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

3:50

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं यह प्रश्न आपके दिमाग में क्यों आया की आईएफएस अधिकारी आईएएस अधिकारी की तरह प्रसिद्ध क्यों नहीं होते आप प्रसिद्ध होने के लिए सब करना चाह रहे हैं क्या टप्पू प्रसिद्धि मिलती है प्रसिद्धि किसी को इंटरनल मिलती है किसी को एक्सटर्नल मिलती है सबसे बड़ी प्रसिद्धि काम से संतुष्टि होती है काम की सफलता होती है अब इन दोनों में कुछ तो फर्क है इसलिए इन फर्क के आधार पर जो अपने कर्तव्य को निष्ठावान और बड़े सिद्धांत से निभाता है इसमें कोई संदेह नहीं क्योंकि वह अपना काम कर रहा है मणि इमानदारी से कर रहा है जनता के हित के लिए करना जनता के कल्याण के लिए कर रहा है और उसने जो प्रण किया उस पल को निभाने के लिए वह पूरी तरह से अपनी ड्यूटी में समर्पित हो गया है इसलिए जग जन समुदाय को एक अच्छा परिणाम एक अच्छा रूप देखने को मिलता है तो चर्चा का विषय तो हो नहीं है इस चर्चा के विषय को ही प्रसिद्ध जी कहते प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए आपको किसी प्रकार के ढोको से ले या किसी प्रकार के प्रोपेगंडा करने की जरूरत नहीं है सिर्फ अपना काम करिए प्रसिद्धि आपको अवश्य मिलेगी और प्रसिद्धि के पीछे भागे इब्राहिम इसलिए बहुत से काम हम अपने जीवन में दूसरों की भलाई के लिए करते हैं मिस्टर इब्राहिम मिलती है अब इन दोनों बातों में क्या फर्क है हम भलाई के लिए कार्य कर रहे हैं आपके हित के लिए कार्य कर रहे हैं आपको लगता है कि हमारा कोई स्वार्थ है यह भी तो प्रसिद्धि है आप उसको नकारात्मक निगाह में देख रहे जब तक रात में कुछ समय बाद नेगेटिव लक्ष्मी चेंज हो जाएगा पॉजिटिव हो जाएगा क्योंकि प्रसिद्धि नहीं है हां अब बाकी रही है वह फाइनेंस ट्रैक्टर से जुड़ी होती है इस चैप्टर का मूल काम क्या होता है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था को वित्तीय प्रबंध को मजबूत करना और उससे समस्त लक्ष्यों को प्राप्त करना जो मैंने देश की योजनाएं चल रही हैं या जो हमारे देश के लिए बहुत जरूरी है प्रत्यक्ष रूप से नहीं होता जबकि प्रशासन प्रत्यक्ष रूप से होता है योजनाओं उनका काम चक्र आत्मक उनका काम किसी चीज को पूरा करने में किसी लक्ष्य को पूरा करने में अदृश्य रूप से होता है लेकिन प्रशासनिक अधिकारी प्रैक्टिस शुरू चाकर जनता के समक्ष आकर वह अपने काम को करते हैं जो सबको नजर आता है इन दोनों में 25 जी के चंदन में यही अंतर है बाकी काम दोनों करते हैं अच्छा काम करते हैं हमें तो आपको एक बात और सोऊंगा प्रसिद्धि की बाजार में बिकती नहीं है क्या करने से मिलती है आप किसी भी काम को करो तो क्या का प्रणाम आपको हमेशा आपकी प्रशंसा के रूप में और आपकी प्रसिद्ध जी के रूप में आपको प्राप्त होता काश आपके जीवन में ऐसा अवसर आए तो आपको यह चीज समझ में आएगी

nahi yah prashna aapke dimag mein kyon aaya ki IFS adhikari IAS adhikari ki tarah prasiddh kyon nahi hote aap prasiddh hone ke liye sab karna chah rahe kya tappu prasiddhi milti hai prasiddhi kisi ko internal milti hai kisi ko external milti hai sabse badi prasiddhi kaam se santushti hoti hai kaam ki safalta hoti hai ab in dono mein kuch toh fark hai isliye in fark ke aadhaar par jo apne kartavya ko nisthawan aur bade siddhant se nibhata hai isme koi sandeh nahi kyonki vaah apna kaam kar raha hai mani imaandari se kar raha hai janta ke hit ke liye karna janta ke kalyan ke liye kar raha hai aur usne jo pran kiya us pal ko nibhane ke liye vaah puri tarah se apni duty mein samarpit ho gaya hai isliye jag jan samuday ko ek accha parinam ek accha roop dekhne ko milta hai toh charcha ka vishay toh ho nahi hai is charcha ke vishay ko hi prasiddh ji kehte prasiddhi prapt karne ke liye aapko kisi prakar ke dhoko se le ya kisi prakar ke propaganda karne ki zarurat nahi hai sirf apna kaam kariye prasiddhi aapko avashya milegi aur prasiddhi ke peeche bhaage ibrahim isliye bahut se kaam hum apne jeevan mein dusro ki bhalai ke liye karte hain mister ibrahim milti hai ab in dono baaton mein kya fark hai hum bhalai ke liye karya kar rahe hain aapke hit ke liye karya kar rahe hain aapko lagta hai ki hamara koi swarth hai yah bhi toh prasiddhi hai aap usko nakaratmak nigah mein dekh rahe jab tak raat mein kuch samay baad Negative laxmi change ho jaega positive ho jaega kyonki prasiddhi nahi hai haan ab baki rahi hai vaah finance tractor se judi hoti hai is chapter ka mul kaam kya hota hai ki hamare desh ki arthavyavastha ko vittiy prabandh ko majboot karna aur usse samast lakshyon ko prapt karna jo maine desh ki yojanaye chal rahi hain ya jo hamare desh ke liye bahut zaroori hai pratyaksh roop se nahi hota jabki prashasan pratyaksh roop se hota hai yojnao unka kaam chakra aatmkatha unka kaam kisi cheez ko pura karne mein kisi lakshya ko pura karne mein adrishya roop se hota hai lekin prashaasnik adhikari practice shuru chakar janta ke samaksh aakar vaah apne kaam ko karte hain jo sabko nazar aata hai in dono mein 25 ji ke chandan mein yahi antar hai baki kaam dono karte hain accha kaam karte hain hamein toh aapko ek baat aur sounga prasiddhi ki bazaar mein bikti nahi hai kya karne se milti hai aap kisi bhi kaam ko karo toh kya ka pranam aapko hamesha aapki prashansa ke roop mein aur aapki prasiddh ji ke roop mein aapko prapt hota kash aapke jeevan mein aisa avsar aaye toh aapko yah cheez samajh mein aaegi

नहीं यह प्रश्न आपके दिमाग में क्यों आया की आईएफएस अधिकारी आईएएस अधिकारी की तरह प्रसिद्ध क्

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय महान गणितज्ञ रामानुजम अगर आप परिचित नहीं है तो मैं बताना चाहूंगा कि वह एक महान गणितज्ञ की श्रेणी में आते थे जब बचपन में पढ़ाई करते थे तो वह सिर्फ मैथमेटिक्स नहीं पास होते थे जिसमें उनके मार्क्स 19980 तित al00 होते थे और बाकी सारे विषय में फेल हो जाते थे फिर भी हो जाते थे तो क्या कभी आपने ऐसा चिंतन किया कि ऐसा क्यों हुआ कठिन और आसान है ऐसी कोई चीज नहीं होती है वर्क मैथ अच्छा लगता है आप मैथ में इंटरेस्टेड है तो आपको मैं तो अच्छा रहेगा आप की हिस्ट्री में इंटरेस्ट नहीं है तो आपको इस टिकट लगेगा जैसा राम भजन के साथ हुआ है तो यह सिर्फ एक कहने की बातें होती हैं यह कठिन है यह आसान है सब कुछ आपके फोकस के ऊपर डिपेंड करता है जिसमें अपनी ज्यादा फोकस जाएंगे वह चीजें आपको आसान रहे लगेंगे जिसने आप को कष्ट कम रहेंगे वह चीज आपको कटने लगेंगे यही सत्य है दस रोते

bharatiya mahaan ganitagya ramanujam agar aap parichit nahi hai toh main batana chahunga ki vaah ek mahaan ganitagya ki shreni me aate the jab bachpan me padhai karte the toh vaah sirf mathematics nahi paas hote the jisme unke marks 19980 tit al00 hote the aur baki saare vishay me fail ho jaate the phir bhi ho jaate the toh kya kabhi aapne aisa chintan kiya ki aisa kyon hua kathin aur aasaan hai aisi koi cheez nahi hoti hai work math accha lagta hai aap math me interested hai toh aapko main toh accha rahega aap ki history me interest nahi hai toh aapko is ticket lagega jaisa ram bhajan ke saath hua hai toh yah sirf ek kehne ki batein hoti hain yah kathin hai yah aasaan hai sab kuch aapke focus ke upar depend karta hai jisme apni zyada focus jaenge vaah cheezen aapko aasaan rahe lagenge jisne aap ko kasht kam rahenge vaah cheez aapko katane lagenge yahi satya hai das rote

भारतीय महान गणितज्ञ रामानुजम अगर आप परिचित नहीं है तो मैं बताना चाहूंगा कि वह एक महान गणित

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