हमारे देश में सभी लोग IAS क्रैक करने के पीछे क्यों भागते हैं, जैसे यह एक जुनून हो?...


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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

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मनुष्य के जीवन में जो सबसे गहरा वायरस उसके भीतर है उसका अहंकार है उसे लगता है कि जब हम किसी ऊंचे पद पर गए तो हमारा जीवन सार्थक हो क्या प्रक्रिया लागू नहीं होता कई लोग अपने सिवा करने का माध्यम भी चुनते हैं यस होने को लेकिन कुछ अपवाद छोड़ दिया जाए तो ऐसा होने के बाद प्रायर वह उसी में उलझ कर अपने निजी संपदा को बढ़ाना दूसरों के साथ नियमों की अवहेलना करके अपने को एक सोशल स्टेटस मान लिया है तो इसके बारे में कोई सही जवाब एकदम लागू नहीं होगा पर मनुष्य के लगभग लगभग सभी बीमारियों का एक कारण है उसका अहंकार कबीर नबी का है जो हम में है हरि हरि मतलब आनंद नहीं है तो व्यक्ति अपने मां को जितना प्रगाढ़ करेगा उतना भीतर से खोखला होगा और आनंद नहीं मिलेगा पर कोई कबीर कोई रैदास कोई गुरु नानक अपने मैं कोई मीरा अपने मैं भाव को अपने गुरु के चरणों में समर्पित कर देते हैं और आनंद के प्रमुख स्रोत बन जाते हैं उनके पीछे करोड़ों करोड़ों लोग अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए प्लेटफार्म बातें हैं इसलिए मनुष्य की प्रवृतियां बहुत वैरायटी में है आपको इस छोटे से उत्तर से अगर समझ सके तो अच्छा होगा अन्यथा क्वेश्चन को दोबारा भी आप रिपीट कर सकते हैं

manushya ke jeevan me jo sabse gehra virus uske bheetar hai uska ahankar hai use lagta hai ki jab hum kisi unche pad par gaye toh hamara jeevan sarthak ho kya prakriya laagu nahi hota kai log apne siva karne ka madhyam bhi chunte hain Yes hone ko lekin kuch apavad chhod diya jaaye toh aisa hone ke baad prior vaah usi me ulajh kar apne niji sampada ko badhana dusro ke saath niyamon ki avhelna karke apne ko ek social status maan liya hai toh iske bare me koi sahi jawab ekdam laagu nahi hoga par manushya ke lagbhag lagbhag sabhi bimariyon ka ek karan hai uska ahankar kabir nabi ka hai jo hum me hai hari hari matlab anand nahi hai toh vyakti apne maa ko jitna pragadh karega utana bheetar se khokhla hoga aur anand nahi milega par koi kabir koi raidas koi guru nanak apne main koi meera apne main bhav ko apne guru ke charno me samarpit kar dete hain aur anand ke pramukh srot ban jaate hain unke peeche karodo karodo log apne jeevan ko sundar banane ke liye platform batein hain isliye manushya ki pravritiyan bahut Variety me hai aapko is chote se uttar se agar samajh sake toh accha hoga anyatha question ko dobara bhi aap repeat kar sakte hain

मनुष्य के जीवन में जो सबसे गहरा वायरस उसके भीतर है उसका अहंकार है उसे लगता है कि जब हम किस

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