क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है?...


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मनु आपका स्नेह है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है तो बंधु अध्यात्म और विज्ञान का कब ही कोई मेल नहीं अध्यात्म और विज्ञान का मेल ईमेल है जो आज का विज्ञान है वह कल के वेदों से ही हमारे वेदों से ही हिंदू सनातन धर्म के वेदों से ही उत्पन्न हुआ है विज्ञान तो मिल होगा नहीं है नहीं अभी भी आप कई चीजों पर जैसे गौर करें तो आपको मिल जाएगा उसका उदाहरण आपको मिल जाएगा जैसे हिंदू धर्म में एक परंपरा है कि हिंदू धर्म में एक परंपरा है कि टीका लगाते हैं हम माथे पर मस्तक के अपने टीका लगाते हैं तो हमने भी पढ़ा होगा कई लोगों ने भी पढ़ा होगा कि यह टीका लगाते हैं तो यह विज्ञान का वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो जो वैज्ञानिक दृष्टि से अगर हम देखते हैं इसको हिंदू धर्म का तो यह अपन समझ लो कि यह धर्म की धर्म के हिंदू धर्म में इसलिए टीका लगाते हैं आपका धार्मिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो हमारे जो दोनों बड़े हैं आंखों के बीजों के बीच में जो यहां टीका लगाते हैं तो यहां पर हमारी एक गलती होती है जिससे हमें बहुत आता है तो वहां पर टीका लगाने से क्या होता है वह ब्लेंड ग्लैंड को ब्लेंड को क्या कहता है प्रेस करता है जिसकी वजह से हमें गुस्सा कम आता है तुम मेल हो रहा है मतलब अध्यात्म और विज्ञान का मेल है होगा नहीं है कि जय श्री राम

manu aapka sneh hai kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai toh bandhu adhyaatm aur vigyan ka kab hi koi male nahi adhyaatm aur vigyan ka male email hai jo aaj ka vigyan hai vaah kal ke vedo se hi hamare vedo se hi hindu sanatan dharm ke vedo se hi utpann hua hai vigyan toh mil hoga nahi hai nahi abhi bhi aap kai chijon par jaise gaur kare toh aapko mil jaega uska udaharan aapko mil jaega jaise hindu dharm me ek parampara hai ki hindu dharm me ek parampara hai ki tika lagate hain hum mathe par mastak ke apne tika lagate hain toh humne bhi padha hoga kai logo ne bhi padha hoga ki yah tika lagate hain toh yah vigyan ka vaigyanik drishti se dekha jaaye toh jo vaigyanik drishti se agar hum dekhte hain isko hindu dharm ka toh yah apan samajh lo ki yah dharm ki dharm ke hindu dharm me isliye tika lagate hain aapka dharmik vaigyanik drishtikon se dekhen toh hamare jo dono bade hain aakhon ke beejon ke beech me jo yahan tika lagate hain toh yahan par hamari ek galti hoti hai jisse hamein bahut aata hai toh wahan par tika lagane se kya hota hai vaah blend gland ko blend ko kya kahata hai press karta hai jiski wajah se hamein gussa kam aata hai tum male ho raha hai matlab adhyaatm aur vigyan ka male hai hoga nahi hai ki jai shri ram

मनु आपका स्नेह है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है तो बंधु अध्यात्म और व

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Dr J B Tiwari

Chairman and Managing Director

0:55
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मैं डॉक्टर जेपी तिवारी आपको प्रणाम करता हूं आपका सवाल है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है बिल्कुल हो सकता है हमारा जो पूर्वज थे वह लोग वैज्ञानिक थे और आध्यात्मिक उन्होंने किया कुछ चीजें ऐसी हैं जो आज आपको मैं से करंट से जोड़ देता हूं जैसे आप हाथ पैर धोती है खाना खाएं पैर धोकर आप आकर के अंदर इंट्री करें जूता बाहर निकालने हैं सब चीजें जो थी उनको अध्यात्म सुनना जोर दिया लेकिन उनका प्रयास था कि विज्ञान सेलिंग ठोसे आफ कस्टम नेशन ना हो इसलिए उन्होंने इस तरह की से बनाया है उसका भी मतलब वैज्ञानिक ही देश कौन था तो विज्ञान और धर्म क्वालिटी तो मेल है उस काम को समझने की जरूरत है

main doctor jp tiwari aapko pranam karta hoon aapka sawaal hai kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai bilkul ho sakta hai hamara jo purvaj the vaah log vaigyanik the aur aadhyatmik unhone kiya kuch cheezen aisi hain jo aaj aapko main se current se jod deta hoon jaise aap hath pair dhoti hai khana khayen pair dhokar aap aakar ke andar intri kare juta bahar nikalne hain sab cheezen jo thi unko adhyaatm sunana jor diya lekin unka prayas tha ki vigyan selling those of custom nation na ho isliye unhone is tarah ki se banaya hai uska bhi matlab vaigyanik hi desh kaun tha toh vigyan aur dharm quality toh male hai us kaam ko samjhne ki zarurat hai

मैं डॉक्टर जेपी तिवारी आपको प्रणाम करता हूं आपका सवाल है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी क

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Pandit Ashutosh

Astrologer

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Kiran

career Counselling ,Meditation Expert

1:03
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आपका सवाल है अध्यात्म विज्ञान का कोई मेल नहीं हो सकता है तो अध्यात्म आणि विज्ञान है अगर आप जब वह ध्यान करेंगे मनन चिंतन करेंगे मैं स्टेशन करेंगे प्राणायाम करेंगे तो आपको अपने अंदर जो विज्ञान हैं आप सोचें कि आपके शरीर में 8400000 सबसे पहले तुमने 8400000 योनियों है उसके बाद हमारी बॉडी में 51 साल से 72000 7200000 और नारियां है पाइप बॉडीज है तो यह विज्ञानी तो है आप सोचे कि आप एक माटी के पुतले को बना नहीं पाते हो रहे कि यह विज्ञान है कि हमारे शरीर के अंदर पूरी नशे अपने आप काम करती है अपने आप आंखें देख लेती हैं हमारी जो नाक होती है वह सुनने का काम करती है तू ही सबसे बड़ा विज्ञान तो हम खुद ही है मतलब जो मानव है तो अध्यात्म में और विज्ञान दोनों का जोड़ है यह हमारा बॉडी

aapka sawaal hai adhyaatm vigyan ka koi male nahi ho sakta hai toh adhyaatm aani vigyan hai agar aap jab vaah dhyan karenge manan chintan karenge main station karenge pranayaam karenge toh aapko apne andar jo vigyan hain aap sochen ki aapke sharir me 8400000 sabse pehle tumne 8400000 yoniyon hai uske baad hamari body me 51 saal se 72000 7200000 aur nariyan hai pipe bodies hai toh yah vigyani toh hai aap soche ki aap ek mati ke putale ko bana nahi paate ho rahe ki yah vigyan hai ki hamare sharir ke andar puri nashe apne aap kaam karti hai apne aap aankhen dekh leti hain hamari jo nak hoti hai vaah sunne ka kaam karti hai tu hi sabse bada vigyan toh hum khud hi hai matlab jo manav hai toh adhyaatm me aur vigyan dono ka jod hai yah hamara body

आपका सवाल है अध्यात्म विज्ञान का कोई मेल नहीं हो सकता है तो अध्यात्म आणि विज्ञान है अगर आप

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Vinod Kumar Pandey

Life Coach | Career Counsellor ::Relationship Counsellor :: Parenting Counsellor

0:43
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आपने जो प्रश्न किया है उसको तक में मैं यही कहना चाहता हूं कि अध्यात्म और विज्ञान दोनों ही एक दूसरे के पूरक होते हैं इस इसको समझना बहुत जरूरी है ज्यादातर लोग अध्यात्म की सही मैंने नहीं समझ पाते हैं इसीलिए कहीं ना कहीं ऐसा मानते हैं कि अध्यात्म और विज्ञान कहीं भी दूसरे से मिलते नहीं हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होता है दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं अगर आप अपने जीवन में अपने जीवन को संपूर्ण बनाना चाहते हैं तो यह बहुत जरूरी होता है कि अध्यात्म और विज्ञान दोनों को ही आप अपने जीवन में महत्व दें कि दोनों ही मिलकर के एक दूसरे के पूरक होते हैं और दोनों मिलकर के और बनते हैं आशा करता हूं कि आप उत्तर मिल गया होगा धन्यवाद

aapne jo prashna kiya hai usko tak me main yahi kehna chahta hoon ki adhyaatm aur vigyan dono hi ek dusre ke purak hote hain is isko samajhna bahut zaroori hai jyadatar log adhyaatm ki sahi maine nahi samajh paate hain isliye kahin na kahin aisa maante hain ki adhyaatm aur vigyan kahin bhi dusre se milte nahi hain lekin aisa bilkul nahi hota hai dono hi ek dusre ke purak hain agar aap apne jeevan me apne jeevan ko sampurna banana chahte hain toh yah bahut zaroori hota hai ki adhyaatm aur vigyan dono ko hi aap apne jeevan me mahatva de ki dono hi milkar ke ek dusre ke purak hote hain aur dono milkar ke aur bante hain asha karta hoon ki aap uttar mil gaya hoga dhanyavad

आपने जो प्रश्न किया है उसको तक में मैं यही कहना चाहता हूं कि अध्यात्म और विज्ञान दोनों ही

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Vinod uttrakhand Tiwari

Author,You Tuber(Thoght Of सक्सेस)

1:32
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इस बात को स्पष्ट करना बहुत आवश्यक है कि आध्यात्मिक बिना विज्ञान अधूरा है और विज्ञान ही जब बहुत अधिक विकसित हो जाएगा तो वास्तव में माना जाता है कि अध्यात्म के नजदीक आने का उदाहरण आपको देता हूं विज्ञान को मानने वाले लोग नास्तिक वाद की बात करते हैं और वह कौन से लोग होते हैं जिन्हें विज्ञान की थोड़ी बहुत समझ होती है एक उदाहरण देता हूं अभी हाल ही में मंगल यान यान चंद्रयान को लांच किया था तो इसरो के जो चीफ साहब है kc1 वह तिरुपति गए थे या किसी मंदिर में प्रार्थना करने के लिए गए थे यानी जो चंद्रयान बना रहा है उतना बड़ा साइंटिस्ट वह तो भगवान को मानता है लेकिन जो चंद्रयान के बारे में पढ़कर की वैज्ञानिक बने हैं वह कहते हैं ना ना भगवान ने घोड़ा की बात है अखबार में चंद्रयान को पढ़ करके अपने आप को वैज्ञानिक समझने वाले लोग भगवान के अस्तित्व में सवाल उठाते हैं और जो लोग वास्तव में चंद्रयान का निर्माण किए हैं मंगलयान गन निर्माण के हैं वह हाथ जोड़ भगवान के धर्म खड़े हैं तो मूर्ख तो नहीं होंगे क्योंकि विज्ञान वैज्ञानिकों से है अब आगे आप डिसाइड कर सकते हैं और मुझे यूट्यूब पर भी जुड़ सकते हैं चैनल का नाम आपको मेरे स्क्रीन पर दिखाई देगा

is baat ko spasht karna bahut aavashyak hai ki aadhyatmik bina vigyan adhura hai aur vigyan hi jab bahut adhik viksit ho jaega toh vaastav me mana jata hai ki adhyaatm ke nazdeek aane ka udaharan aapko deta hoon vigyan ko manne waale log nastik vad ki baat karte hain aur vaah kaun se log hote hain jinhen vigyan ki thodi bahut samajh hoti hai ek udaharan deta hoon abhi haal hi me mangal yaan yaan chandrayan ko launch kiya tha toh isro ke jo chief saheb hai kc1 vaah tirupati gaye the ya kisi mandir me prarthna karne ke liye gaye the yani jo chandrayan bana raha hai utana bada scientist vaah toh bhagwan ko maanta hai lekin jo chandrayan ke bare me padhakar ki vaigyanik bane hain vaah kehte hain na na bhagwan ne ghoda ki baat hai akhbaar me chandrayan ko padh karke apne aap ko vaigyanik samjhne waale log bhagwan ke astitva me sawaal uthate hain aur jo log vaastav me chandrayan ka nirmaan kiye hain mangalyaan gun nirmaan ke hain vaah hath jod bhagwan ke dharm khade hain toh murkh toh nahi honge kyonki vigyan vaigyaniko se hai ab aage aap decide kar sakte hain aur mujhe youtube par bhi jud sakte hain channel ka naam aapko mere screen par dikhai dega

इस बात को स्पष्ट करना बहुत आवश्यक है कि आध्यात्मिक बिना विज्ञान अधूरा है और विज्ञान ही जब

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बस कार आपका प्रश्न है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है कि अध्यात्म अंतर की यात्रा है विज्ञान बाहर की यात्रा है जब अंतर्मुखी आप होंगे तभी आपका अध्यात्म की तरफ ध्यान जाएगा विज्ञान बाहर की चीजों को पाने का रास्ता है आज विज्ञान भी पूरी कोशिश कर रहा है यह जानने के लिए की आत्मा क्या है शरीर कैसे चलता है कैसे खून बनता है कैसे व्यक्ति की त्वचा है परंतु कुछ चीजों में उनको सेक्टर्स मिली है परंतु अभी पूरी जगह पर नहीं सकते मेरी आप देखिए यही विज्ञानिक मंगल और चांद पर जीवन ढूंढ रहे थे और आज एक वायरस की वजह से पृथ्वी पर रहना कठिन हो रहा है ऐसा क्यों क्योंकि कहीं ना कहीं पर्यावरण कुदरत अपने तरीके से अपने आपको बैलेंस कर रही है आज यह बीमारी समाप्त हो सकती है यदि सब चीजें कुदरत की तरफ से उनको ठीक लगी और इंसान के करने से कहीं कुछ नहीं हो पा रहा इसलिए हर चीज विज्ञान और अध्यात्म का मेल हो ना कहीं ना कहीं एकदम अलग चीजें

bus car aapka prashna hai kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai ki adhyaatm antar ki yatra hai vigyan bahar ki yatra hai jab antarmukhi aap honge tabhi aapka adhyaatm ki taraf dhyan jaega vigyan bahar ki chijon ko paane ka rasta hai aaj vigyan bhi puri koshish kar raha hai yah jaanne ke liye ki aatma kya hai sharir kaise chalta hai kaise khoon banta hai kaise vyakti ki twacha hai parantu kuch chijon me unko sectors mili hai parantu abhi puri jagah par nahi sakte meri aap dekhiye yahi vigyanik mangal aur chand par jeevan dhundh rahe the aur aaj ek virus ki wajah se prithvi par rehna kathin ho raha hai aisa kyon kyonki kahin na kahin paryavaran kudrat apne tarike se apne aapko balance kar rahi hai aaj yah bimari samapt ho sakti hai yadi sab cheezen kudrat ki taraf se unko theek lagi aur insaan ke karne se kahin kuch nahi ho paa raha isliye har cheez vigyan aur adhyaatm ka male ho na kahin na kahin ekdam alag cheezen

बस कार आपका प्रश्न है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है कि अध्यात्म अंतर

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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

0:50
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लिखे हुए जो विज्ञान है वह आध्यात्म के ऊपर ही चलता है मेल होने की बात ही नहीं यहां पर है विज्ञान अध्यात्म के ऊपर निर्भर ही है पूरी तरीके से अधातु के ऊपर ही चलता है क्यों क्योंकि जो विज्ञान है वह इंसान की समस्याओं का समाधान करता है उनका हल निकलता है अध्यात्म भी यही चीज बताता है अध्यात्म में भी इंसान की समस्याएं इंसान की जिंदगी में क्यों आती हैं इस वजह से आती हैं उन चीजों के बारे में बताता है और आध्यात्म उन समस्याओं का समाधान भी बताता है और यही चीज विज्ञान में होती है ज्यादातर जितने भी साइंटिस्ट वैज्ञानिक हैं वह आध्यात्मिक को मानकर के चलते हैं और वह तभी अपनी कोई ना कोई खोज करते हैं शुक्रिया

likhe hue jo vigyan hai vaah aadhyatm ke upar hi chalta hai male hone ki baat hi nahi yahan par hai vigyan adhyaatm ke upar nirbhar hi hai puri tarike se adhatu ke upar hi chalta hai kyon kyonki jo vigyan hai vaah insaan ki samasyaon ka samadhan karta hai unka hal nikalta hai adhyaatm bhi yahi cheez batata hai adhyaatm me bhi insaan ki samasyaen insaan ki zindagi me kyon aati hain is wajah se aati hain un chijon ke bare me batata hai aur aadhyatm un samasyaon ka samadhan bhi batata hai aur yahi cheez vigyan me hoti hai jyadatar jitne bhi scientist vaigyanik hain vaah aadhyatmik ko maankar ke chalte hain aur vaah tabhi apni koi na koi khoj karte hain shukriya

लिखे हुए जो विज्ञान है वह आध्यात्म के ऊपर ही चलता है मेल होने की बात ही नहीं यहां पर है वि

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

1:07
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आपका प्रश्न है अध्यात्म और विज्ञान कभी कैमिल हो सकता है विज्ञान के सूत्र आधार मानवता और जहां मानवता खत्म होती है जहां पर विज्ञान का है अध्यात्म वहां पर शुरू होता है आध्यात्मिक के बारे में विज्ञान उतना ही जानता है जितना अपने अपने बारे में अपने सामने खड़े होने का मतलब अध्यात्मिक रहस्य और चेतन मन की शक्ति विज्ञान के लिए अबूझ पहेली है और जब तक मनुष्य की मृत्यु इस संसार में विज्ञान भक्तों का हमेशा श्रेष्ठ स्थान रहेगा विज्ञान गुण भूमिका में रहेगा

aapka prashna hai adhyaatm aur vigyan kabhi kaimil ho sakta hai vigyan ke sutra aadhar manavta aur jaha manavta khatam hoti hai jaha par vigyan ka hai adhyaatm wahan par shuru hota hai aadhyatmik ke bare me vigyan utana hi jaanta hai jitna apne apne bare me apne saamne khade hone ka matlab adhyatmik rahasya aur chetan man ki shakti vigyan ke liye abujh paheli hai aur jab tak manushya ki mrityu is sansar me vigyan bhakton ka hamesha shreshtha sthan rahega vigyan gun bhumika me rahega

आपका प्रश्न है अध्यात्म और विज्ञान कभी कैमिल हो सकता है विज्ञान के सूत्र आधार मानवता और

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अध्यात्म विदाउट पासपोर्ट मुझे ऐसा लगता है कि अध्यात्म और साइंस का सबसे ज्यादा इतरा तक आ जाता साइंस भी एक तरह का आध्यात्मिक दिया जाए वैदिक साइंस से वेदों को ले लीजिए विज्ञान और आध्यात्म एक दूसरे पर इंटरडिपेंडेंट है अगर विज्ञान स्थित से मानवता से हीन हो जाएगा तो वह विज्ञान नहीं बेकार हो जाएगा और विज्ञान को सुगम में बनाने के लिए एथिकल बनाने के लिए आ जा हर जगह जरूरत पड़ेगी विज्ञान एक पंगु एक अपाहिज की तरह है बिना अध्यात्म के तो विज्ञान पूरा शरीर है और आध्यात्मिक पैर है उसका एक पूरी विकास की पूरी काया का एक पैर का केस का अपमान नहीं कर रही हूं बिना पैर के मनुष्य चल नहीं पाता उसे आप आ ही जाता है वैसे ही विज्ञान बिना आध्यात्म के चल नहीं सकता है तो विज्ञान और आध्यात्मिक सोते

adhyaatm without passport mujhe aisa lagta hai ki adhyaatm aur science ka sabse zyada itra tak aa jata science bhi ek tarah ka aadhyatmik diya jaaye vaidik science se vedo ko le lijiye vigyan aur aadhyatm ek dusre par interdependent hai agar vigyan sthit se manavta se heen ho jaega toh vaah vigyan nahi bekar ho jaega aur vigyan ko sugam me banane ke liye Ethical banane ke liye aa ja har jagah zarurat padegi vigyan ek pangu ek apahij ki tarah hai bina adhyaatm ke toh vigyan pura sharir hai aur aadhyatmik pair hai uska ek puri vikas ki puri kaaya ka ek pair ka case ka apman nahi kar rahi hoon bina pair ke manushya chal nahi pata use aap aa hi jata hai waise hi vigyan bina aadhyatm ke chal nahi sakta hai toh vigyan aur aadhyatmik sote

अध्यात्म विदाउट पासपोर्ट मुझे ऐसा लगता है कि अध्यात्म और साइंस का सबसे ज्यादा इतरा तक आ जा

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Bharti

Education Industry

0:36
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हां आध्यात्म और विज्ञान का मेल है अध्यात्म में जानना और समझना है प्रकृति को खुद को और दुनिया के सिस्टम को विज्ञान भी वही है समझना विज्ञान के थ्रू असल में इन दोनों की जड़ी जगह से निकलती है जिससे कि उत्सुकता जिसमें समझ की इच्छा होगी वही विज्ञान तक पहुंचेगा और वही आध्यात्म तक पहुंचेगा इस तरह से दोनों एक दूसरे में इन वर्ल्ड हैं

haan aadhyatm aur vigyan ka male hai adhyaatm me janana aur samajhna hai prakriti ko khud ko aur duniya ke system ko vigyan bhi wahi hai samajhna vigyan ke through asal me in dono ki jadi jagah se nikalti hai jisse ki utsukata jisme samajh ki iccha hogi wahi vigyan tak pahunchaega aur wahi aadhyatm tak pahunchaega is tarah se dono ek dusre me in world hain

हां आध्यात्म और विज्ञान का मेल है अध्यात्म में जानना और समझना है प्रकृति को खुद को और दुनि

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Veer Bhupinder Singh Ji

The Visionary, www.thelivingtreasure.org

1:22
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डीप सी है जो इंसान विज्ञान की खोज करता है उसकी खोज के पीछे उसकी लालच की होती कि मेरे को पैसे कमा लिया 10 विज्ञान की खोज करते हुए दुनिया का भला करना चाहते हैं ऐसे ही करता है उसका भी यही होता कि मैं भी सो जाऊं इसलिए विज्ञान और धर्म है टू हैंड चल सकते हैं और विज्ञान में कोई आतंकी और अगर कोई इंसान है तुम के साथ दूसरों को मारना चाहता है तो उस बात को बोलते हैं कि विज्ञान और धर्म अलग-अलग विज्ञान की खोज और धर्म की खोज दोनों के साथ दुनिया का भला हो मेरे अंदर का भला हड्डी बन सकते हैं विज्ञान धर्म के विज्ञान के विज्ञान खोज और धर्म बताता है कि लोग अपने पति चाहती हो तुम बुलाओगे और दूसरों का भी खिलाओगे विज्ञान को पत्र लिखकर तो सही मैंने भी उधर भी आता है वह भी ध्यान को कंधा नहीं करता है राधा विज्ञान को नमस्कार

deep si hai jo insaan vigyan ki khoj karta hai uski khoj ke peeche uski lalach ki hoti ki mere ko paise kama liya 10 vigyan ki khoj karte hue duniya ka bhala karna chahte hain aise hi karta hai uska bhi yahi hota ki main bhi so jaaun isliye vigyan aur dharm hai to hand chal sakte hain aur vigyan mein koi aatanki aur agar koi insaan hai tum ke saath dusro ko marna chahta hai toh us baat ko bolte hain ki vigyan aur dharm alag alag vigyan ki khoj aur dharm ki khoj dono ke saath duniya ka bhala ho mere andar ka bhala haddi ban sakte hain vigyan dharm ke vigyan ke vigyan khoj aur dharm batata hai ki log apne pati chahti ho tum bulaoge aur dusro ka bhi khilaoge vigyan ko patra likhkar toh sahi maine bhi udhar bhi aata hai vaah bhi dhyan ko kandha nahi karta hai radha vigyan ko namaskar

डीप सी है जो इंसान विज्ञान की खोज करता है उसकी खोज के पीछे उसकी लालच की होती कि मेरे को पै

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Vikas Singh

Political Analyst

1:49
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देखिए अध्यात्म और विज्ञान एक ही चीज है जो अध्यात्म जॉब करता है वही विज्ञान भी प्रूफ करता है मैं आपको एक उदाहरण बताना चाहता हूं जिसके माध्यम से आप को समझने में आसानी होगी आप घर का नक्शा एक इंजीनियर से बनवाई है फिर आप एक पंडित जी से घर का नक्शा बनाइए आप देखेंगे कि पंडित जी ने भी वही बताया है जो इंजीनियर ने अपने ड्राइंग में बताया तो विज्ञान और अध्यात्म का मेल है विज्ञान कभी यह नहीं कहता है कि हम भगवान से पूछे हैं विज्ञान हमेशा भगवान को मानता है विज्ञान यह कहता है कि भगवान ने कुछ ऐसी चीज बनाई है जिसको हम लोग कभी नहीं बना सकते हैं रावण अपने वायुयान से उड़ता था एक सीट हमेशा खादी डरती थी विज्ञान ने भी हवाई जहाज बनाया लेकिन विज्ञान ने अभी मैं ऐसा बयान नहीं बना पाया जिस जिस में एक सीट खाली हो तो विज्ञान मानता है भगवान की शक्ति को विज्ञान आत्मा को कभी कैद करके नहीं रख पाया ना आत्मा को विज्ञान में देख पाया कभी विज्ञान मानता है ईश्वर की शक्ति के आगे सारी शक्ति फेल है हम लोगों को भी ईश्वर ने बनाया है और हम लोगों को भगवान ने दिमाग दिया है तो हम भगवान की कृपा से ही कुछ नए नए अविष्कार को करते हैं तो ईश्वर सबसे सर्वशक्तिमान है और ईश्वर ही है जो पूरी दुनिया को चला रहा है धन्यवाद

dekhiye adhyaatm aur vigyan ek hi cheez hai jo adhyaatm job karta hai wahi vigyan bhi proof karta hai aapko ek udaharan bataana chahta hoon jiske madhyam se aap ko samjhne mein aasani hogi aap ghar ka naksha ek engineer se banwaai hai phir aap ek pandit ji se ghar ka naksha banaiye aap dekhenge ki pandit ji ne bhi wahi bataya hai jo engineer ne apne drying mein bataya toh vigyan aur adhyaatm ka male hai vigyan kabhi yah nahi kahata hai ki hum bhagwan se pooche hain vigyan hamesha bhagwan ko manata hai vigyan yah kahata hai ki bhagwan ne kuch aisi cheez banai hai jisko hum log kabhi nahi bana sakte hain ravan apne vayuyaan se udta tha ek seat hamesha khadi darti thi vigyan ne bhi hawai jahaj banaya lekin vigyan ne abhi main aisa bayan nahi bana paya jis jis mein ek seat khaali ho toh vigyan manata hai bhagwan ki shakti ko vigyan aatma ko kabhi kaid karke nahi rakh paya na aatma ko vigyan mein dekh paya kabhi vigyan manata hai ishwar ki shakti ke aage saree shakti fail hai hum logo ko bhi ishwar ne banaya hai aur hum logo ko bhagwan ne dimag diya hai toh hum bhagwan ki kripa se hi kuch naye naye avishkar ko karte hain toh ishwar sabse sarvshaktimaan hai aur ishwar hi hai jo puri duniya ko chala raha hai dhanyavad

देखिए अध्यात्म और विज्ञान एक ही चीज है जो अध्यात्म जॉब करता है वही विज्ञान भी प्रूफ करता ह

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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विज्ञान और अध्यात्म दोनों एक ही चीज है और जो अध्यात्म है वह भी एक विज्ञानी है और उपनिषद के अनुसार अमर शरीर में पांच कोष से बाहर एनिमल कोर्स के अंतर्गत प्राण मई को उसके अंदर मनोमय कोश विज्ञान और फिर आनंद तोमर शरीर में ही विज्ञान में कुछ भी होता है हमारे शरीर विज्ञान के नियमों का ही पालन करता है जिससे सांस लेते हैं तो डॉ शिवकुमार टैंकर की टक्कर सिद्धांत और स्वयं को जानना मुझे स्वयं को जानते हैं की खोज करते हैं तो जो बम प्रयोग द्वारा प्रमाण विज्ञान को विज्ञान कहते हैं राज्य के अंदर भी हम स्वयं करते हैं खुद की जर्नी करते हैं उसमें अमेजॉन बुक आपके होते हैं औरत की कोई विज्ञान कहते हैं तो अध्यात्म और विज्ञान एक ही चीज है या फिर क्यों के शक्ति की इज्जत में भी एक विज्ञान है

vigyan aur adhyaatm dono ek hi cheez hai aur jo adhyaatm hai vaah bhi ek vigyani hai aur upanishad ke anusaar amar sharir mein paanch kosh se bahar animal course ke antargat praan may ko uske andar manomay kosh vigyan aur phir anand tomar sharir mein hi vigyan mein kuch bhi hota hai hamare sharir vigyan ke niyamon ka hi palan karta hai jisse saans lete hain toh Dr. shivakumar tanker ki takkar siddhant aur swayam ko janana mujhe swayam ko jante hain ki khoj karte hain toh jo bomb prayog dwara pramaan vigyan ko vigyan kehte hain rajya ke andar bhi hum swayam karte hain khud ki journey karte hain usme amazon book aapke hote hain aurat ki koi vigyan kehte hain toh adhyaatm aur vigyan ek hi cheez hai ya phir kyon ke shakti ki izzat mein bhi ek vigyan hai

विज्ञान और अध्यात्म दोनों एक ही चीज है और जो अध्यात्म है वह भी एक विज्ञानी है और उपनिषद के

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

4:11

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं मैं इसको ना अलग नहीं देखता मैं विज्ञान को और आध्यात्म को एक ही जैसा देखता हूं आप सोचिए जो भी हमारे इग्निशन से जो भी कुछ आप देखें प्रकृति में नेचर में इस पृथ्वी पर हम को देखता है समझ आता है क्या सब के पीछे विज्ञान नहीं है सोचिए आप जब हम हमारी पृथ्वी सूरज के चक्कर काट दी और खुद अपने आप में घूमती रहती है तो क्या पूछता ही नहीं है इतनी दूरी पर ही है और इसी तरीके से डिस्टेंस बनाए हुए हैं और वह घूमती रहती है वह जाकर सूरज में टकरा नहीं चाहती है वह इतनी धुरी पर घूमती रहती है चलती रहती है विकास यही उसका फोर्स अट्रैक्शन रिपल्शन जो है वह इतनी दूरी पर ही एकदम सेट बैठा है और ऐसे चलता है जो ग्रेविटेशनल पुल है जो हम सबको पृथ्वी की तरफ खींचता है वह क्या है वह भी बढ़ाई स्टैंडर्ड है और वह भी sign-ca हर एक चीज आप आएंगे तो हर चीज में विज्ञान ही है जहां पर फिजिक्स ताला लगा लीजिए या केमिस्ट्री लगा दीजिए हालांकि फिजिक्स केमिस्ट्री यह हम नहीं बनाया है हमने इनको नाम दिए हैं बट वहां पर एक विज्ञान तो है ना हमारे शरीर के अंदर जो होता है जो भी कुछ हो रहा है वह सब विज्ञान के अंतर्गत ही तो हो रहा है 1 तरीके की प्रक्रिया ही तो चल रही है आप ऐसा करेंगे तो ऐसा होगा ऐसे करेंगे तो ऐसा होगा जिससे हम बोलते हैं ना चुराया किसने कोई लॉ बना दिया न्यूटन ने यह लोग बना दिया उसने बोला बता दिया वगैरा-वगैरा यह सारे क्या है यह जो है जितने भी साइंस के चीजें हमें पड़ी है और देखिए और नियम कानून है यह एक फॉर्म में अवेलेबल थी हमने उसको इंटरप्रेट किया है और हमने उसको यह इक्वेशन में डालकर बोला है कि हां भाई दिस होल्ड्स ट्रू और हम उसका पालन करते अनुसरण करते हैं यह साइंस ही तो है विज्ञान ही तो है जिसके बदौलत आज हम सटीक तरीके से chandrayaan-2 हो गया चंद्रेया हनुमान हो गया हम मार्च के अबे सैटलाइट भेजने की कोशिश करते हैं हम उन पर भेजते हैं वगैरह वगैरह तो इतना सटीक तभी तो हो सकते ना जब हम साइंस को जानते हैं तो आप जब हम आध्यात्म की बात कहते हैं तो आधी रात में क्या हुआ भाई आध्यात्मिक चंद्रमा को जानना नहीं हुआ सेटेलाइट भेजना नहीं हुआ भाई वह पहाड़ ऐसा क्यों है वैसे क्यों खड़ा है वह देखना नहीं हुआ आध्यात्म तो यह हुआ कि भाई मैं अपने आप को कैसे देखता हूं मैं ऐसा प्रकृति का एसी यूनिवर्स का हिस्सा किस तरीके से हूं मेरा योग क्या है इन बाकी सारी चीजों से आए इस ब्रह्मांड में या ऐसा पृथ्वी पैसा में वास करता हूं मैं अपने अंदर अपने आप को कैसे देखता हूं और कैसे आपने से बाहर आशीष को जोड़ता हूं मैं और यह बाहर की चीजें सारी एक ही तरीके के बस हमारे एनर्जी फॉर्म अलग है जब हम आध्यात्मिक बात करते हैं तो वह यह सारी चीजें होती हैं मैं को प्रकृति से या ब्रह्मांड ब्रह्मांड ऊर्जा बनाने का जो प्रकरण होता है अपने भीतर जाने का प्रकरण होता है आपने आपको महसूस करने का जो प्रकरण होता है और यह होता है आध्यात्म तो सोच कर देखेगा और अध्यात्म की जब हम बात करते हैं तो भाई यहां पर एक्जेक्टली वैसे वाली साइंस की हम बात नहीं करते क्योंकि यह भी एक प्रक्रिया है यह भी एक प्रोसेस ए तो उसके अंदर तो आप बोलेंगे कि आपके क्योंकि प्रोसेस है तो साइंस तो आता ही आते हैं लेकिन नाम इन टोटलिटी देखा जाए तो आधे हाथ में है अपने आप से अपना परिचय कराना और अपने आपको सारी चीजों में सम्मिलित होते हुए देखना सब किस चीजों मतलब यहां पर खाली नॉन लिविंग थिंग की बात नहीं कर रहा लिविंग बिंग की भी बात कर रहा हूं और तू जान ना पहचान ना अपने आप को एक साथ रखना यूनियन में रखना यह है आज का

nahi main isko na alag nahi dekhta main vigyan ko aur aadhyatm ko ek hi jaisa dekhta hoon aap sochiye jo bhi hamare ignition se jo bhi kuch aap dekhen prakriti mein nature mein is prithvi par hum ko dekhta hai samajh aata hai kya sab ke peeche vigyan nahi hai sochiye aap jab hum hamari prithvi suraj ke chakkar kaat di aur khud apne aap mein ghoomti rehti hai toh kya poochta hi nahi hai itni doori par hi hai aur isi tarike se distance banaye hue hai aur vaah ghoomti rehti hai vaah jaakar suraj mein takara nahi chahti hai vaah itni dhuri par ghoomti rehti hai chalti rehti hai vikas yahi uska force attraction ripalshan jo hai vaah itni doori par hi ekdam set baitha hai aur aise chalta hai jo gravitational pool hai jo hum sabko prithvi ki taraf khinchata hai vaah kya hai vaah bhi badhai standard hai aur vaah bhi sign ca har ek cheez aap aayenge toh har cheez mein vigyan hi hai jaha par physics tala laga lijiye ya chemistry laga dijiye halaki physics chemistry yah hum nahi banaya hai humne inko naam diye hai but wahan par ek vigyan toh hai na hamare sharir ke andar jo hota hai jo bhi kuch ho raha hai vaah sab vigyan ke antargat hi toh ho raha hai 1 tarike ki prakriya hi toh chal rahi hai aap aisa karenge toh aisa hoga aise karenge toh aisa hoga jisse hum bolte hai na churaya kisne koi law bana diya newton ne yah log bana diya usne bola bata diya vagaira vagaira yah saare kya hai yah jo hai jitne bhi science ke cheezen hamein padi hai aur dekhiye aur niyam kanoon hai yah ek form mein available thi humne usko interpret kiya hai aur humne usko yah equation mein dalkar bola hai ki haan bhai this holds TRUE aur hum uska palan karte anusaran karte hai yah science hi toh hai vigyan hi toh hai jiske badaulat aaj hum sateek tarike se chandrayaan 2 ho gaya chandreya hanuman ho gaya hum march ke abe satellite bhejne ki koshish karte hai hum un par bhejate hai vagera vagairah toh itna sateek tabhi toh ho sakte na jab hum science ko jante hai toh aap jab hum aadhyatm ki baat kehte hai toh aadhi raat mein kya hua bhai aadhyatmik chandrama ko janana nahi hua satellite bhejna nahi hua bhai vaah pahad aisa kyon hai waise kyon khada hai vaah dekhna nahi hua aadhyatm toh yah hua ki bhai main apne aap ko kaise dekhta hoon main aisa prakriti ka ac Universe ka hissa kis tarike se hoon mera yog kya hai in baki saree chijon se aaye is brahmaand mein ya aisa prithvi paisa mein was karta hoon main apne andar apne aap ko kaise dekhta hoon aur kaise aapne se bahar aashish ko Jodta hoon main aur yah bahar ki cheezen saree ek hi tarike ke bus hamare energy form alag hai jab hum aadhyatmik baat karte hai toh vaah yah saree cheezen hoti hai ko prakriti se ya brahmaand brahmaand urja banane ka jo prakaran hota hai apne bheetar jaane ka prakaran hota hai aapne aapko mehsus karne ka jo prakaran hota hai aur yah hota hai aadhyatm toh soch kar dekhega aur adhyaatm ki jab hum baat karte hai toh bhai yahan par exactly waise wali science ki hum baat nahi karte kyonki yah bhi ek prakriya hai yah bhi ek process a toh uske andar toh aap bolenge ki aapke kyonki process hai toh science toh aata hi aate hai lekin naam in totliti dekha jaaye toh aadhe hath mein hai apne aap se apna parichay krana aur apne aapko saree chijon mein sammilit hote hue dekhna sab kis chijon matlab yahan par khaali non living thing ki baat nahi kar raha living binge ki bhi baat kar raha hoon aur tu jaan na pehchaan na apne aap ko ek saath rakhna union mein rakhna yah hai aaj ka

नहीं मैं इसको ना अलग नहीं देखता मैं विज्ञान को और आध्यात्म को एक ही जैसा देखता हूं आप सोचि

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Dr. Radha kant Singh

किसान

1:29
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है तो मैं कभी अध्यात्म को बहुत ज्यादा नहीं देखा लेकिन जितना मैंने गीता को पढ़ा है श्रीमद्भागवत गीता को रामचरितमानस को तो उसमें मैंने पाया है कि जो हिंदू धर्म के हिसाब से अध्यात्म है वह संपूर्ण विज्ञान ही है उन दोनों का मेल नहीं बल्कि अध्यात्म से ही विज्ञान बना है मैं तो यह कहूंगा क्योंकि बहुत सारे अविष्कार अध्यात्म रूप से ही हम देखे जा चुके हैं हवाई जहाज की बात करें अगर रामायण की चर्चा करते हैं तो बिना डीजल पेट्रोल वाला हवाई जहाज जिसे रामचंद्र जी अयोध्या वापस लौटे के हनुमानजी बिना विमान के उड़ते थे ऐसी कहानियां हमारे अध्यात्म में हैं तो विज्ञान और अध्यात्म एक दूसरे के पूरक हैं लेकिन विज्ञान और अंधविश्वास यह एक दूसरे के पूरक नहीं है अंधविश्वास एक अलग है और आत्मा जो है आपका अध्यात्म अलग विषय है अध्यात्म वैज्ञानिक होता है वैज्ञानिक कारण होता है उसमें वैज्ञानिक रूप से ओतप्रोत होता है जबकि अंधविश्वास से लगती है

aapka prashna hai kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai toh main kabhi adhyaatm ko bahut zyada nahi dekha lekin jitna maine geeta ko padha hai shrimadbhagavat geeta ko ramcharitmanas ko toh usme maine paya hai ki jo hindu dharm ke hisab se adhyaatm hai vaah sampurna vigyan hi hai un dono ka male nahi balki adhyaatm se hi vigyan bana hai toh yah kahunga kyonki bahut saare avishkar adhyaatm roop se hi hum dekhe ja chuke hain hawai jahaj ki baat kare agar ramayana ki charcha karte hain toh bina diesel petrol vala hawai jahaj jise ramachandra ji ayodhya wapas laute ke hanumanji bina Vimaan ke udte the aisi kahaniya hamare adhyaatm mein hain toh vigyan aur adhyaatm ek dusre ke purak hain lekin vigyan aur andhavishvas yah ek dusre ke purak nahi hai andhavishvas ek alag hai aur aatma jo hai aapka adhyaatm alag vishay hai adhyaatm vaigyanik hota hai vaigyanik karan hota hai usme vaigyanik roop se otaprot hota hai jabki andhavishvas se lagti hai

आपका प्रश्न है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है तो मैं कभी अध्यात्म को ब

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Krishna Singh

Motivational Speaker

1:05
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क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है जी हां अध्यात्म और विज्ञान का मेल अभी भी है और चला आ रहा है आप शरीर के अंदर लीवर है बचाने का काम कर रहा है किडनी है फिल्ट्रेशन का काम कर रही है आंखें देखने का काम करें यह शरीर के प्रति शरीर का विज्ञान है लेकिन इस समस्त शरीर को चला कौन रहा है आपके अंदर विराजमान एक अदृश्य शक्ति आत्मा यह आध्यात्म है तो जब अध्यात्म और विज्ञान दोनों का समन्वय है तभी तो यह शरीर चल रहा है तो इसी प्रकार से संसार में कहीं पर भी आप गहराई से सोचेंगे तो परोक्ष या अपरोक्ष रूप में अध्यात्म एवं विज्ञान का मेल है ही है जिस दिन यह दोनों एकदम विपरीत दिशा में जाएंगे उस दिन महाविनाश होगा और उसमें

kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai ji haan adhyaatm aur vigyan ka male abhi bhi hai aur chala aa raha hai aap sharir ke andar liver hai bachane ka kaam kar raha hai KIDNEY hai filteration ka kaam kar rahi hai aankhen dekhne ka kaam kare yah sharir ke prati sharir ka vigyan hai lekin is samast sharir ko chala kaun raha hai aapke andar viraajamaan ek adrishya shakti aatma yah aadhyatm hai toh jab adhyaatm aur vigyan dono ka samanvay hai tabhi toh yah sharir chal raha hai toh isi prakar se sansar me kahin par bhi aap gehrai se sochenge toh paroksh ya aparoksh roop me adhyaatm evam vigyan ka male hai hi hai jis din yah dono ekdam viprit disha me jaenge us din mahavinash hoga aur usme

क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है जी हां अध्यात्म और विज्ञान का मेल अभी

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professor Govind Tripathi

Professor(P.hd in mathematics)/Social worker

1:35
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नमस्कार मैं प्रोसेसर गोविंद त्रिपाठी आपने प्रश्न पूछा है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है अध्यात्म और विज्ञान का सदा से ही मिल रहा है विज्ञान अध्यात्म पर आधारित है और अध्यात्म विज्ञान पर आधारित एक महान वैज्ञानिक हुए हैं अल्बर्ट आइंस्टाइन उन्होंने कहा क्या कहा था अलीम रिलीज लाइन विदाउट साइंस एंड साइंस इज नेम विदाउट रीजन अर्थात धर्म याद झांक के बिना साइंस लंगड़ा है और साइंस के बिना असद विज्ञान के बिना अध्यात्मिक धर्म अंडा धर्म और अध्यात्म और विज्ञान दोनों एक दूसरे के पूरक बिना धर्म के या अध्यात्म के विज्ञान एक पल भी नहीं चल सकता और बिना विज्ञान के धर्म रह नहीं सकता अर्थात धर्म और विज्ञान एक दूसरे के पूरक धन्यवाद

namaskar main processor govind tripathi aapne prashna poocha hai kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai adhyaatm aur vigyan ka sada se hi mil raha hai vigyan adhyaatm par aadharit hai aur adhyaatm vigyan par aadharit ek mahaan vaigyanik hue hain albert einstein unhone kaha kya kaha tha aleem release line without science and science is name without reason arthat dharm yaad jhank ke bina science langda hai aur science ke bina asad vigyan ke bina adhyatmik dharm anda dharm aur adhyaatm aur vigyan dono ek dusre ke purak bina dharm ke ya adhyaatm ke vigyan ek pal bhi nahi chal sakta aur bina vigyan ke dharm reh nahi sakta arthat dharm aur vigyan ek dusre ke purak dhanyavad

नमस्कार मैं प्रोसेसर गोविंद त्रिपाठी आपने प्रश्न पूछा है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी क

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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लेके आध्यात्मिक सत्य है आत्मा सकते हैं जिसे परमात्मा का आत्मज्ञान हो गया है सत्य है विज्ञान में तो परिवर्तन है आप विज्ञान से कुछ भी कोई भी तक बना सकते हैं वह भी प्रकृति के द्वारा ही प्रकृति के बिना विज्ञान भी क्या बना सकता है सूर्य से ही प्रकाश के से किस ऊर्जा बना सकते हैं इसलिए विज्ञान विज्ञान सत्य नहीं है अध्यात्म सकते हैं आत्मा सत्य है ईश्वर सत्य है विज्ञान में परिवर्तन होता है विज्ञान से हम सामाजिक प्रिया कर सकते हैं

leke aadhyatmik satya hai aatma sakte hain jise paramatma ka atmagyan ho gaya hai satya hai vigyan mein toh parivartan hai aap vigyan se kuch bhi koi bhi tak bana sakte hain vaah bhi prakriti ke dwara hi prakriti ke bina vigyan bhi kya bana sakta hai surya se hi prakash ke se kis urja bana sakte hain isliye vigyan vigyan satya nahi hai adhyaatm sakte hain aatma satya hai ishwar satya hai vigyan mein parivartan hota hai vigyan se hum samajik priya kar sakte hain

लेके आध्यात्मिक सत्य है आत्मा सकते हैं जिसे परमात्मा का आत्मज्ञान हो गया है सत्य है विज्ञा

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हां विज्ञान और अध्यात्म का मेल है ही विज्ञान और अध्यात्म में एक सिक्के के दो पहलू हैं दोनों एक दूसरे के पूरक है विज्ञान और अध्यात्म में सिर्फ इतना है कि विज्ञान में पहले उसी बात को सिद्ध किया जाता है उसके बाद माना जाता है और अध्यात्म पहले किसी बात को मानता है इतना फर्क है और दोनों एक दूसरे के पूरक है

haan vigyan aur adhyaatm ka male hai hi vigyan aur adhyaatm mein ek sikke ke do pahaloo hain dono ek dusre ke purak hai vigyan aur adhyaatm mein sirf itna hai ki vigyan mein pehle usi baat ko siddh kiya jata hai uske baad mana jata hai aur adhyaatm pehle kisi baat ko manata hai itna fark hai aur dono ek dusre ke purak hai

हां विज्ञान और अध्यात्म का मेल है ही विज्ञान और अध्यात्म में एक सिक्के के दो पहलू हैं दोनो

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Mohit Sinha

Social Worker

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Pravin

Retired Principal Worked As Campus Manager too

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इस दुनिया के जो है वास्तविक जो है एयरपोर्ट कस्टम विधाओं से ऊपर उठकर और जय हो बरसाने स्थिति से हटकर और भगवान की आराधना उपासना करना और उसकी में सभी के जो है और धूप तो जैसे निहारना और उसके सत्ता को स्वीकार करना और उसके अस्तित्व को स्वीकार कर उसके जो है भाई ईश्वर की आराधना इन फरमान करना ही आध्यात्मिक का परिचय और आपने कहा की आराधना उपासना करने के लिए मन आत्मा दिल अवस्था वर्तमान आवश्यक है और जो है विज्ञान है उसके दूर है उसके द्वारा जैसल करते संप्रदाय से हटकर जो है वह अन्य क्षेत्रों में 10 से ऊपर का आधार पर कार्य करता है जिसकी हमें ईश्वर से जाता है तो इसलिए हमें ईश्वर की आराधना उपासना चंद्र मंगल अभिमान और जमा करने का प्रयास थैंक यू धन्यवाद

is duniya ke jo hai vastavik jo hai airport custom vidhaon se upar uthakar aur jai ho barsane sthiti se hatakar aur bhagwan ki aradhana upasana karna aur uski me sabhi ke jo hai aur dhoop toh jaise niharana aur uske satta ko sweekar karna aur uske astitva ko sweekar kar uske jo hai bhai ishwar ki aradhana in farman karna hi aadhyatmik ka parichay aur aapne kaha ki aradhana upasana karne ke liye man aatma dil avastha vartaman aavashyak hai aur jo hai vigyan hai uske dur hai uske dwara jaisal karte sampraday se hatakar jo hai vaah anya kshetro me 10 se upar ka aadhar par karya karta hai jiski hamein ishwar se jata hai toh isliye hamein ishwar ki aradhana upasana chandra mangal abhimaan aur jama karne ka prayas thank you dhanyavad

इस दुनिया के जो है वास्तविक जो है एयरपोर्ट कस्टम विधाओं से ऊपर उठकर और जय हो बरसाने स्थिति

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अध्यात्म और विज्ञान का कवि को ईमेल हो सकता है अध्यात्म और किस-किस को मजबूत बनाने के अध्यात्म बहुत जरूरी है और मस्तिष्क जब है तो विज्ञान है तो अधातु में जो है वह जरूरी है तब विज्ञान है क्योंकि सोचना सोच कर करना है विज्ञान है आधार में जो है वह आपको दिमागी रूप से बहुत आगे करता है विज्ञान जो है आधा दिन के बाद है

adhyaatm aur vigyan ka kavi ko email ho sakta hai adhyaatm aur kis kis ko majboot banane ke adhyaatm bahut zaroori hai aur mastishk jab hai toh vigyan hai toh adhatu me jo hai vaah zaroori hai tab vigyan hai kyonki sochna soch kar karna hai vigyan hai aadhar me jo hai vaah aapko dimagi roop se bahut aage karta hai vigyan jo hai aadha din ke baad hai

अध्यात्म और विज्ञान का कवि को ईमेल हो सकता है अध्यात्म और किस-किस को मजबूत बनाने के अध्या

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मुनि श्री अशोक कुमार मेरा नाम है

Business Owner ज्योतिष के विशेषज्ञ जनरल रोज

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क्या अध्यात्म और विज्ञान का कोई भी मेल हो सकता है कोरी आध्यात्मिकता युग को त्राण नहीं दे पाएगी कोई वैज्ञानिकता योगदान नहीं दे पाएगी दोनों की जोड़ी मिलेगी तभी झाड़ा मुर्गी अध्यात्म के बिना विज्ञान आगे नहीं बढ़ सकता और विज्ञान के बिना अध्यात्म नहीं बस यह दोनों का एक दूसरे का मेल है जो भी नई खोज होती है उसके पीछे अध्यात्म जो भी कार्य सिद्ध किया जाता है उसके पीछे हाथ में है विज्ञान जो भी नई चीज की चाहिए आप एक माली जी हरियाली आज विज्ञान सिद्ध करता जीव है और भगवान महावीर ने ढाई हजार वर्ष पहली कह दिया वनस्पति जीव है पहले कहते थे उड़न खटोला है ढाई हजार साल पहले भी उड़न खटोला चलता था और आज चाहिए हवाई जहाज के रूप में चलता है जी आपके हेलीकॉप्टर के रूप में चलता है कोई रूप में चलता है जो चीजें अध्यात्म जगत में पहली थी विद्या महाभारत युग देख लीजिए राम का युग देख लीजिए जितना ही युद्ध हुए हैं कई आप किसी के युद्ध युद्ध को देख लीजिए पोस्ट शायरी शस्त्रों का निर्माण जितना भी हुआ है अध्यात्म जगत की स्थितियों से हुआ है और उसी में विज्ञान में उस साहित्य की खोज की और नए-नए आविष्कार की जननी हुई है इसलिए अध्यात्म और विज्ञान को आराम से एक दूसरे का मेल है और रहेगा और आगे भी रहेगा

kya adhyaatm aur vigyan ka koi bhi male ho sakta hai kori aadhyatmikta yug ko tran nahi de payegi koi vaigyanikata yogdan nahi de payegi dono ki jodi milegi tabhi jhada murgi adhyaatm ke bina vigyan aage nahi badh sakta aur vigyan ke bina adhyaatm nahi bus yah dono ka ek dusre ka male hai jo bhi nayi khoj hoti hai uske peeche adhyaatm jo bhi karya siddh kiya jata hai uske peeche hath me hai vigyan jo bhi nayi cheez ki chahiye aap ek maali ji hariyali aaj vigyan siddh karta jeev hai aur bhagwan mahavir ne dhai hazaar varsh pehli keh diya vanaspati jeev hai pehle kehte the udan khatola hai dhai hazaar saal pehle bhi udan khatola chalta tha aur aaj chahiye hawai jahaj ke roop me chalta hai ji aapke helicopter ke roop me chalta hai koi roop me chalta hai jo cheezen adhyaatm jagat me pehli thi vidya mahabharat yug dekh lijiye ram ka yug dekh lijiye jitna hi yudh hue hain kai aap kisi ke yudh yudh ko dekh lijiye post shaayari shastron ka nirmaan jitna bhi hua hai adhyaatm jagat ki sthitiyo se hua hai aur usi me vigyan me us sahitya ki khoj ki aur naye naye avishkar ki janani hui hai isliye adhyaatm aur vigyan ko aaram se ek dusre ka male hai aur rahega aur aage bhi rahega

क्या अध्यात्म और विज्ञान का कोई भी मेल हो सकता है कोरी आध्यात्मिकता युग को त्राण नहीं दे

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Anand Narayan Prabhu.

Singer, Writer

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जी अध्यात्म और विज्ञान का मेल सदैव है बस थोड़ा समझने का विषय है बिना अध्यात्म के विज्ञान नहीं है और विज्ञान वाले कहीं न कहीं बात मानते हुए हैं और आज की स्थिति में विज्ञान का भी बहुत योग है सिर्फ अभ्यास में सभी काम चलाया जा सकता है परंतु विज्ञान का बहुत सपोर्ट है इस देश में इस जीवन में और दोनों का मेल है क्योंकि दोनों एक ही घर से उत्पन्न हुए हैं और दोनों का मालिक भी एक ही है भगवान अध्यात्म और विज्ञान दोनों के साथ रहते हैं तो दोनों का मेल है बस दोनों को समझने की जरूरत है मिल तो बस तू ता है इन दोनों की पर लोग मानते नहीं थोड़ा अलग रहते हैं कुछ वैज्ञानिक अपने पर डिपेंडेड रहते हैं और कुछ अज्ञात लोगों अयोध्या पर डिपेंड आते हैं दोनों सेम है बस ऐसे भगवान के रूप अनेक हैं भगवान एक है ऐसे जितनी भी और भी मैट्रेस हैं अध्याय 9 जितने भी काम है वैज्ञानिक और भी जो भी पूरे संसार में सब एक ही है सबका मेल है सब एक ही है सब एक नहीं किया है बस हमें समझने की जरूरत है

ji adhyaatm aur vigyan ka male sadaiv hai bus thoda samjhne ka vishay hai bina adhyaatm ke vigyan nahi hai aur vigyan waale kahin na kahin baat maante hue hain aur aaj ki sthiti me vigyan ka bhi bahut yog hai sirf abhyas me sabhi kaam chalaya ja sakta hai parantu vigyan ka bahut support hai is desh me is jeevan me aur dono ka male hai kyonki dono ek hi ghar se utpann hue hain aur dono ka malik bhi ek hi hai bhagwan adhyaatm aur vigyan dono ke saath rehte hain toh dono ka male hai bus dono ko samjhne ki zarurat hai mil toh bus tu ta hai in dono ki par log maante nahi thoda alag rehte hain kuch vaigyanik apne par depended rehte hain aur kuch agyaat logo ayodhya par depend aate hain dono same hai bus aise bhagwan ke roop anek hain bhagwan ek hai aise jitni bhi aur bhi maitres hain adhyay 9 jitne bhi kaam hai vaigyanik aur bhi jo bhi poore sansar me sab ek hi hai sabka male hai sab ek hi hai sab ek nahi kiya hai bus hamein samjhne ki zarurat hai

जी अध्यात्म और विज्ञान का मेल सदैव है बस थोड़ा समझने का विषय है बिना अध्यात्म के विज्ञान न

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Sumanrajiv Bishnoi

Science Teacher

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Pramodan swami (PK.VERMAN)

Prem Hi Dharm Hai Premi Karm Hi Prem Hi Safar

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आपने पूछा क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है काफी हद तक तो नहीं हो सकता क्योंकि विज्ञान पूरा तर्क और प्रमाणिकता पर आधारित होता है लेकिन अध्यात्म तर्क और प्रमाण प्रमाणिकता जैसी किसी भी बात का समर्थन नहीं करता जो तर्क के द्वारा ना काटा जाए काटा जा सके और जो पकड़ में ना आए जिसका कोई प्रमाण ना दिया जा सके वह अध्यात्म में होता है

aapne poocha kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai kaafi had tak toh nahi ho sakta kyonki vigyan pura tark aur pramanikata par aadharit hota hai lekin adhyaatm tark aur pramaan pramanikata jaisi kisi bhi baat ka samarthan nahi karta jo tark ke dwara na kaata jaaye kaata ja sake aur jo pakad me na aaye jiska koi pramaan na diya ja sake vaah adhyaatm me hota hai

आपने पूछा क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है काफी हद तक तो नहीं हो सकता क

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Rajendra Kumar Jain

Retared servant

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Rupesh kumar Raz

SubEditor(Nikhil Avtar Media)

4:00
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नमस्कार श्रोता आज का सवाल है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है तो अध्यात्म और विज्ञान का मेल जरूर हो सकता है मगर जिस हिसाब से आप मेल की बात कर रहे हैं उस हिसाब से मिल नहीं हो सकता क्योंकि अध्यात्म से ही विज्ञान निकला हुआ विज्ञान से अध्यक्ष ने निकला हुआ है अध्यात्म से वैज्ञानिक लाभ है आप ऐसे देख सकते हैं कि मान लिया जाए एक परिवार एक परिवार में एकता दादा-दादी है और उसके बेटे बेटे की शादी हो गई अब उनके बच्चे हैं उसमें बेटा-बेटी कसम है अब एक बच्चे के कई और बच्चे तो हर आदमी अलग अलग से जुड़े हुए हैं तो अब मेरे कहने का मतलब है कि हम उसके नीचे 5 दिन में जाएंगे उसको आप समझा कि वह विज्ञान है और दादा-दादी को आप समझे कि वह तो क्या उसमें और इसमें क्या संबंध नहीं तो मेरे कहने का मतलब है कि संबंध है क्यों क्योंकि उसी के जनरेसन से आते हैं तो उसी ढंग से अध्यात्म और विज्ञान मतलब यह पूरा सृष्टि में अध्यात्म मांग लो और उसका एक पाठ 8 विज्ञान मान लो कोई ढंग से अध्यात्म और विज्ञान में अंतर है तो विज्ञान अभी बस इतने तक समझ सका है कि यह ब्रह्मांड है और यह ब्रह्मांड ऐसे काम करता है मगर इसके पीछे कौन काम करता है कैसे काम होता है वह उनको कहां से आदेश आता है उनको आदेश कौन देता है और करने वाला कौन है ठीक है ना यह 3:30 अभी रास्ते अजब यह सारा चीज राहत है तो इसका मतलब क्या है विज्ञान उसके सामने अभी बच्चा है एक छोटी सी आंधी आती है तूफान आता है पानी बरसने लगता है सारा सिस्टम सारा जो विज्ञान के रूप में जो देखने को मिलता है कि यह सिस्टम अभी काम करता है वह सारा सिस्टम फेल हो जाता है ठीक है ना अभी करो ना बात कही बात कर ली अमेरिका अपने आप को सुपर पावर समझता था कि मैंने भगवान को प्राप्त कर लिया मैंने यह कर दिया मैंने वह कर लिया सारा देश का देश तो यही समझता था कि हमने बल दिया विज्ञान में बहुत ज्यादा तरक्की की और एक छोटा सा वायरस जिसके डर से सारे लोग घर पर बैठे हुए तो कहने का सच यह है कि जो कि हर चीज हो रही है उसको विज्ञान मान रहा है मगर यहां पर दिक्कत क्या है कि अध्यात्म उससे जिस कई गुना बढ़ा है तो यहां पर यही अंतर है आध्यात्म को यहां पर अलग ढंग से लिया गया है यहां पर अध्यात्म का मीनिंग हम लोग प्ले लगाते हैं भेजो कि यहां पर अध्यात्म का मतलब जो होता है वह आध्यात्म का मतलब होता है कि हम जो आत्मा का जो अध्ययन करते हैं उसको अध्यात्म तो आत्मा क्या है वहीं अब रमन के बारे में ज्ञान का ज्ञान होता है तो मेन ज्ञान क्या है ब्रह्म के बारे में जानकारी खट्टा करना उसके बारे में ज्ञान लेना ही अध्यात्म का पूरा मतलब क्या हो गया जिसमें आत्मा का अध्ययन तो आत्मा ही ब्रह्म वही शाश्वत सत्य तो इसीलिए अध्यात्म का एक पाठ एक आणि विज्ञान हो सकता है मगर इसका मैन ऐसा ही है जैसे परिवार के लोग एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और फिर भी अलग है परिवार के लोग एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं फिर भी ठीक है धन्यवाद

namaskar shrota aaj ka sawaal hai kya adhyaatm aur vigyan ka kabhi koi male ho sakta hai toh adhyaatm aur vigyan ka male zaroor ho sakta hai magar jis hisab se aap male ki baat kar rahe hain us hisab se mil nahi ho sakta kyonki adhyaatm se hi vigyan nikala hua vigyan se adhyaksh ne nikala hua hai adhyaatm se vaigyanik labh hai aap aise dekh sakte hain ki maan liya jaaye ek parivar ek parivar me ekta dada dadi hai aur uske bete bete ki shaadi ho gayi ab unke bacche hain usme beta beti kasam hai ab ek bacche ke kai aur bacche toh har aadmi alag alag se jude hue hain toh ab mere kehne ka matlab hai ki hum uske niche 5 din me jaenge usko aap samjha ki vaah vigyan hai aur dada dadi ko aap samjhe ki vaah toh kya usme aur isme kya sambandh nahi toh mere kehne ka matlab hai ki sambandh hai kyon kyonki usi ke janaresan se aate hain toh usi dhang se adhyaatm aur vigyan matlab yah pura shrishti me adhyaatm maang lo aur uska ek path 8 vigyan maan lo koi dhang se adhyaatm aur vigyan me antar hai toh vigyan abhi bus itne tak samajh saka hai ki yah brahmaand hai aur yah brahmaand aise kaam karta hai magar iske peeche kaun kaam karta hai kaise kaam hota hai vaah unko kaha se aadesh aata hai unko aadesh kaun deta hai aur karne vala kaun hai theek hai na yah 3 30 abhi raste ajab yah saara cheez rahat hai toh iska matlab kya hai vigyan uske saamne abhi baccha hai ek choti si aandhi aati hai toofan aata hai paani barsane lagta hai saara system saara jo vigyan ke roop me jo dekhne ko milta hai ki yah system abhi kaam karta hai vaah saara system fail ho jata hai theek hai na abhi karo na baat kahi baat kar li america apne aap ko super power samajhata tha ki maine bhagwan ko prapt kar liya maine yah kar diya maine vaah kar liya saara desh ka desh toh yahi samajhata tha ki humne bal diya vigyan me bahut zyada tarakki ki aur ek chota sa virus jiske dar se saare log ghar par baithe hue toh kehne ka sach yah hai ki jo ki har cheez ho rahi hai usko vigyan maan raha hai magar yahan par dikkat kya hai ki adhyaatm usse jis kai guna badha hai toh yahan par yahi antar hai aadhyatm ko yahan par alag dhang se liya gaya hai yahan par adhyaatm ka meaning hum log play lagate hain bhejo ki yahan par adhyaatm ka matlab jo hota hai vaah aadhyatm ka matlab hota hai ki hum jo aatma ka jo adhyayan karte hain usko adhyaatm toh aatma kya hai wahi ab raman ke bare me gyaan ka gyaan hota hai toh main gyaan kya hai Brahma ke bare me jaankari khatta karna uske bare me gyaan lena hi adhyaatm ka pura matlab kya ho gaya jisme aatma ka adhyayan toh aatma hi Brahma wahi shashvat satya toh isliye adhyaatm ka ek path ek aani vigyan ho sakta hai magar iska man aisa hi hai jaise parivar ke log ek dusre se jude hue hain aur phir bhi alag hai parivar ke log ek dusre ke saath jude hue hain phir bhi theek hai dhanyavad

नमस्कार श्रोता आज का सवाल है क्या अध्यात्म और विज्ञान का कभी कोई मेल हो सकता है तो अध्यात्

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