भगवान कभी-कभी हमारी प्रार्थना क्यों नहीं सुनते हैं?...


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Dr. Swapnil Patel

Ayurvedic Doctor

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नमस्कार जैसा कि आपने प्रश्न किया है कि कभी-कभी भगवान जो है हमारी प्रार्थना क्यों क्यों नहीं सुनते हैं प्रार्थना भगवान शिव की सुनते हैं अब नहीं सुनते हैं उसके पीछे जो एकमत तर्क दे सकता हूं कभी-कभी ऐसा होता है क्योंकि देखिए आज जब हम मॉडल में परिपेक्ष्या अपने वर्तमान परिस्थितियों का उदाहरण देकर चीजों को समझाने की कोशिश करते हैं तो अच्छे से समझ में आता है वर्तमान चीजों को यह जो है कि समझाना चाहूंगा कि यदि आप जैसे भगवान को प्रार्थना सुनाना है आज के जनरेसन वैसे किसी से आपको बात करनी है मोबाइल फोन है अब उसमें सिगनल्स नहीं है बैलेंस नहीं है और चार्जिंग नहीं हो सर आज कुछ आप फोन लगाने से आपके पास फोन होने से उनके तक उनकी बात नहीं पहुंच सकती है उसी प्रकार से जो आपका पूजा अनुष्ठान योग तब सही दिशा में हो रहा है सही माध्यम से हो रहा है तभी जो है कि भगवान तक जाएगी आपकी बात पहुंच सकती है और वह आपकी बातों को सुन सकते हैं अन्यथा जो है कि वही जैसे एक मूवी आई थी ना पीके कि वह फिरकी ले रहा है कोई आपकी भी फिरकी लेने लगेगा ऐसा भी नहीं है भगवान नहीं आध्यात्मिकता नहीं है वह बातें नहीं सुनते हैं सब कुछ है और आज के जैन समाज में आज के समय में वही हो चुका है कि जो मीडियम था बीच में कनेक्टिंग का भगवान का वह हम भूल चुके हैं वह पद वह ज्ञान वह जो दिव्य ज्ञान था वह हमको चुके थे ऐसे आज का समय और पहले हो जाए उसकी कई साल बाद लोगों को मोबाइल फोन मिले लोग यह सोचे कि इससे बात करते थे उसे हम बात कर सकते हैं लेकिन उस प्रलय में टावर जैसी एक्सचेंज ऐसी चीजें तहस-नहस हो चुकी हैं और वह विधाओं पद्धति भी समाप्त हो चुकी है जिसके थ्रू कन्वर्सेशन होता था और लोग झूठा फोन लेकर नंबर लगाए जा रहे हैं नंबर लगाया जाए उसी तरीके से मारा शास्त्र वेद पुराण ज्ञान जो था वह एक माध्यम होता था जो है कि जिस के थ्रू भगवान से कनेक्टिविटी होती थी योग्यता पर इत्यादि लेकिन मुगलों अंग्रेजों का जब शासन हुआ नालंदा विश्वविद्यालय जलाया गया अन्य सारी चीजें हुई तो उसमें यह विधा ज्ञान कहीं न कहीं जो है कि विलुप्त सा हो गया है उसी के परिणाम स्वरूप जो है कि हम भगवान तक खुद को जोड़ नहीं पा रहे हैं उनको अपनी बातें बता समझाने वहां तक हमारी चीजें जा नहीं पा रही हैं हम सही माध्यम इसे सही तरीके से जानने की कोशिश करेंगे तो चीजें यथासंभव सकती है छोटी सी चीज में समझाना चाहूंगा कि हम फल फूल प्रसाद अगरबत्ती बहुत सारी ऐसी चीजें हैं इसको चढ़ाते हैं और मैंने जब पढ़ा दिन किया उसके बाद मुझे पता चला कि भगवान यह जो भी स्वर्ग में जाते हैं स्वर्ग का मतलब है कि वहां पर जैसे हम भोजन करते हैं वहां यज्ञ अंश की जरूरत पड़ती है यज्ञ का आंसर था इसीलिए यज्ञ होता है और योग यज्ञ में ही सारे जो भी चढ़ावा होता है मिष्ठान पकवान सारी चीजों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में विधायक योग्य के ही माध्यम से जाता है यदि आप जो है कि पूजा पाठ और अन्य विधियों से कर रहे हैं और यज्ञ नहीं कर रहे हैं तो फिर तू जितना मुझे नाले ज्ञान है उसे मैं कह सकता हूं कि उतना अच्छा फल नहीं मिलेगा जितना आप यज्ञ के साथ पूजा करेंगे अपनी दैनिक जीवन में इन्हीं सब चीजों का पालन करें और इससे जुड़ने की कोशिश करें सब मंगलमय होगा हर हर महादेव

namaskar jaisa ki aapne prashna kiya hai ki kabhi kabhi bhagwan jo hai hamari prarthna kyon kyon nahi sunte hain prarthna bhagwan shiv ki sunte hain ab nahi sunte hain uske peeche jo ekamat tark de sakta hoon kabhi kabhi aisa hota hai kyonki dekhiye aaj jab hum model me paripekshya apne vartaman paristhitiyon ka udaharan dekar chijon ko samjhane ki koshish karte hain toh acche se samajh me aata hai vartaman chijon ko yah jo hai ki samajhana chahunga ki yadi aap jaise bhagwan ko prarthna sunana hai aaj ke janaresan waise kisi se aapko baat karni hai mobile phone hai ab usme siganals nahi hai balance nahi hai aur charging nahi ho sir aaj kuch aap phone lagane se aapke paas phone hone se unke tak unki baat nahi pohch sakti hai usi prakar se jo aapka puja anushthan yog tab sahi disha me ho raha hai sahi madhyam se ho raha hai tabhi jo hai ki bhagwan tak jayegi aapki baat pohch sakti hai aur vaah aapki baaton ko sun sakte hain anyatha jo hai ki wahi jaise ek movie I thi na pk ki vaah firkee le raha hai koi aapki bhi firkee lene lagega aisa bhi nahi hai bhagwan nahi aadhyatmikta nahi hai vaah batein nahi sunte hain sab kuch hai aur aaj ke jain samaj me aaj ke samay me wahi ho chuka hai ki jo medium tha beech me connecting ka bhagwan ka vaah hum bhool chuke hain vaah pad vaah gyaan vaah jo divya gyaan tha vaah hamko chuke the aise aaj ka samay aur pehle ho jaaye uski kai saal baad logo ko mobile phone mile log yah soche ki isse baat karte the use hum baat kar sakte hain lekin us pralay me tower jaisi exchange aisi cheezen tahas nahas ho chuki hain aur vaah vidhaon paddhatee bhi samapt ho chuki hai jiske through conversation hota tha aur log jhutha phone lekar number lagaye ja rahe hain number lagaya jaaye usi tarike se mara shastra ved puran gyaan jo tha vaah ek madhyam hota tha jo hai ki jis ke through bhagwan se connectivity hoti thi yogyata par ityadi lekin mugalon angrejo ka jab shasan hua nalanda vishwavidyalaya jalaya gaya anya saari cheezen hui toh usme yah vidhaa gyaan kahin na kahin jo hai ki vilupt sa ho gaya hai usi ke parinam swaroop jo hai ki hum bhagwan tak khud ko jod nahi paa rahe hain unko apni batein bata samjhane wahan tak hamari cheezen ja nahi paa rahi hain hum sahi madhyam ise sahi tarike se jaanne ki koshish karenge toh cheezen yathasambhav sakti hai choti si cheez me samajhana chahunga ki hum fal fool prasad agarbatti bahut saari aisi cheezen hain isko chadhate hain aur maine jab padha din kiya uske baad mujhe pata chala ki bhagwan yah jo bhi swarg me jaate hain swarg ka matlab hai ki wahan par jaise hum bhojan karte hain wahan yagya ansh ki zarurat padti hai yagya ka answer tha isliye yagya hota hai aur yog yagya me hi saare jo bhi chadhava hota hai mishthan pakvaan saari chijon ko thodi thodi matra me vidhayak yogya ke hi madhyam se jata hai yadi aap jo hai ki puja path aur anya vidhiyon se kar rahe hain aur yagya nahi kar rahe hain toh phir tu jitna mujhe naale gyaan hai use main keh sakta hoon ki utana accha fal nahi milega jitna aap yagya ke saath puja karenge apni dainik jeevan me inhin sab chijon ka palan kare aur isse judne ki koshish kare sab mangalmay hoga har har mahadev

नमस्कार जैसा कि आपने प्रश्न किया है कि कभी-कभी भगवान जो है हमारी प्रार्थना क्यों क्यों नही

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