भगवान कभी-कभी हमारी प्रार्थना क्यों नहीं सुनते हैं?...


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Pratibha

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आपका प्रश्न है भगवान कभी-कभी हमारी प्रार्थना क्यों नहीं कर रहे हैं बेगाने की हां मुझे लॉटरी लग जाए या अचानक खड़ा हुआ धन मिल जाए मेरा यह काम सफल हो जाए उसके लिए आपका कर्म कुछ भी नहीं है और आप से प्रार्थना कर रहे हैं तो ऐसी प्रार्थना है जिसमें आपका कर्म शामिल नहीं होता है वह ईश्वर द्वारा कबूल नहीं होती नहीं होती और हमारी आत्मा हमारे कार्यक्रमों पर भी निर्भर रहता है हमारी आत्मा कई जन्मों के संस्कार लेकर कई जन्मों का अपने कार्यकाल में अकाउंट लेकर आती है कार्मिक अकाउंट के द्वारा भी हमारी डेस्टिनी तय है बट हम कुछ और की डिमांड कर रहे हैं तो हो नहीं सकता अगर हम नींद में चाय मीठा हो जाए तो नहीं हो गई है उसको काकटकर प्रार्थना और कई बार हमारी प्रार्थना में किसी के लिए नेगेटिविटी भी होती है हम इतने सच्चे ह्रदय से प्रार्थना नहीं करते हैं जबकि हमारी प्रार्थनाएं माने नहीं होती है एक बच्चे की आपने देखा होगा एक छोटा बच्चा जब भी प्रे करता है उसकी ईश्वर जल्दी सुन लेता है उसकी प्रार्थना कबूल होती है क्योंकि से परे होता है और हम स्वार्थ पर किसी का अहित करने के लिए अपना हित सिद्ध करने के लिए स्वार्थी बन कर प्रार्थना करते हैं जब हम निस्वार्थ भाव से प्रार्थना करेंगे तो हंड्रेड परसेंट हर प्रार्थना को बोलोगे तो ऐसा नहीं है कि ईश्वर हमारी प्रार्थना है कि नहीं सुनते हैं कि उन्हें हम हमारे से कोई दुश्मनी है हमारे मांगने में ही प्रार्थना करने में ही कहीं कोई कमी होती है जिसकी वजह से हमारी प्रार्थनाएं मान्य नहीं होती है

aapka prashna hai bhagwan kabhi kabhi hamari prarthna kyon nahi kar rahe hain begane ki haan mujhe lottery lag jaaye ya achanak khada hua dhan mil jaaye mera yah kaam safal ho jaaye uske liye aapka karm kuch bhi nahi hai aur aap se prarthna kar rahe hain toh aisi prarthna hai jisme aapka karm shaamil nahi hota hai vaah ishwar dwara kabool nahi hoti nahi hoti aur hamari aatma hamare karyakramon par bhi nirbhar rehta hai hamari aatma kai janmon ke sanskar lekar kai janmon ka apne karyakal me account lekar aati hai karmik account ke dwara bhi hamari destiny tay hai but hum kuch aur ki demand kar rahe hain toh ho nahi sakta agar hum neend me chai meetha ho jaaye toh nahi ho gayi hai usko kakatakar prarthna aur kai baar hamari prarthna me kisi ke liye negativity bhi hoti hai hum itne sacche hriday se prarthna nahi karte hain jabki hamari prarthanaen maane nahi hoti hai ek bacche ki aapne dekha hoga ek chota baccha jab bhi prey karta hai uski ishwar jaldi sun leta hai uski prarthna kabool hoti hai kyonki se pare hota hai aur hum swarth par kisi ka ahit karne ke liye apna hit siddh karne ke liye swaarthi ban kar prarthna karte hain jab hum niswarth bhav se prarthna karenge toh hundred percent har prarthna ko bologe toh aisa nahi hai ki ishwar hamari prarthna hai ki nahi sunte hain ki unhe hum hamare se koi dushmani hai hamare mangne me hi prarthna karne me hi kahin koi kami hoti hai jiski wajah se hamari prarthanaen manya nahi hoti hai

आपका प्रश्न है भगवान कभी-कभी हमारी प्रार्थना क्यों नहीं कर रहे हैं बेगाने की हां मुझे लॉटर

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