यदि आत्मा मौजूद है, तो आत्मा शरीर में वास्तव में कहाँ स्थित होती है?...


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Veer Bhupinder Singh Ji

The Visionary, www.thelivingtreasure.org

1:47
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अमानी अंदर आत्मा की स्थिति है ना वह एक्शन में क्या है कि हमारे जो मन की अवस्था होती है ना हम उसी को आत्मा बोलते हैं ना यह आत्मा मारी शरीर में चुस्ती है ना मारे सही से बाहर निकलती है जैसा मेरा फोटो से सोता है वैसी ही मेरी आत्मा होती है लेकिन अगर मैं आत्मा को भगवान के साथ जोड़ दो जिसको बोलते हैं आत्मा अजर अमर है तो मेरे अंदर भगवान बसते हैं उसकी कोई जगह नहीं होती सब एक जैसे सारी सृष्टि में सारी यूनिवर्सिटी कण कण में भगवान बोलते हैं ना ऐसी मेरे रोम रोम में कंकड़ में एक-एक रूम रूम क्लीनिक यदि कैपिलरी एक्शन होते हैं वैसे मेरी जो जहां से ब्लड सप्लाई होते हैं आधे घंटे तक अगर कुदरत के लिए हम काम कर रहे हैं तुम मेरे अंदर आ बस भैया और वह वाली आत्मा भगवान है और वह है असली भाई अगर मैं अपने अंदर पूरे ख्यालों को जगा देता हूं तो मैंने अपनी आत्मा के महत्व को स्पष्ट कर दिया जो हमारे अंदर आत्मा के प्रति है उसकी कोई जगह नहीं होती हमारे दिल को दिल मतलब हॉट हॉट मतलब कौनसी-कौनसी तो ऐसे ऑफ फ्लावर के पास खड़े के पीछे आपके अंदर फ्रेगरेंस कहां बैठती है तो फ्लावर्स जवाब नहीं दे पाए जाते प्रदेश का

amani andar aatma ki sthiti hai na vaah action mein kya hai ki hamare jo man ki avastha hoti hai na hum usi ko aatma bolte hain na yah aatma mari sharir mein chusti hai na maare sahi se bahar nikalti hai jaisa mera photo se sota hai vaisi hi meri aatma hoti hai lekin agar main aatma ko bhagwan ke saath jod do jisko bolte hain aatma ajar amar hai toh mere andar bhagwan baste hain uski koi jagah nahi hoti sab ek jaise saree shrishti mein saree university kan kan mein bhagwan bolte hain na aisi mere roam roam mein kankad mein ek ek room room clinic yadi kaipilari action hote hain waise meri jo jaha se blood supply hote hain aadhe ghante tak agar kudrat ke liye hum kaam kar rahe hain tum mere andar aa bus bhaiya aur vaah wali aatma bhagwan hai aur vaah hai asli bhai agar main apne andar poore khyalon ko jagah deta hoon toh maine apni aatma ke mahatva ko spasht kar diya jo hamare andar aatma ke prati hai uski koi jagah nahi hoti hamare dil ko dil matlab hot hot matlab kaunsi kaun se toh aise of flower ke paas khade ke peeche aapke andar fregarens kahaan baithati hai toh flowers jawab nahi de paye jaate pradesh ka

अमानी अंदर आत्मा की स्थिति है ना वह एक्शन में क्या है कि हमारे जो मन की अवस्था होती है ना

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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यदि आत्मा मौजूद है तो आत्मा शरीर में वास्तव में कहां स्थित होती है हरी है तो शरीर के अंदर आत्मा है ठीक है जब शरीर नहीं है शरीर नष्ट हो जाता है तो आत्मा ऊपर चली जाती है परमात्मा के पास तो वहां से फिर उसका लेखा-जोखा करके उसमें जाएगी जाएगी ऊपर वाला ठीक है वास्तव में शरीर में कहां रहती है तू मन में रहती है ओके इतना तो मुझे धार्मिक और आध्यात्मिक के हिसाब से पता है फिर दूसरा मुझे कुछ मालूम नहीं है ठीक है आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

yadi aatma maujud hai toh aatma sharir mein vaastav mein kahaan sthit hoti hai hari hai toh sharir ke andar aatma hai theek hai jab sharir nahi hai sharir nasht ho jata hai toh aatma upar chali jaati hai paramatma ke paas toh wahan se phir uska lekha jokha karke usme jayegi jayegi upar vala theek hai vaastav mein sharir mein kahaan rehti hai tu man mein rehti hai ok itna toh mujhe dharmik aur aadhyatmik ke hisab se pata hai phir doosra mujhe kuch maloom nahi hai theek hai aapka din shubha ho dhanyavad

यदि आत्मा मौजूद है तो आत्मा शरीर में वास्तव में कहां स्थित होती है हरी है तो शरीर के अंदर

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Dr Kanahaiya

Dr Kanahaiya Reki Grand Masstr Apt .Sujok .Homyopathy .

1:21
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हमारे नबी के ऊपर आपने कभी मैसेज किया होगा कभी कोई आपको मारता है कि आप उठा कर दिया तभी तो आपको सब कुछ अच्छा लगता है आत्मा आपको ना जी दूसरी मैसेज बातम्या

hamare nabi ke upar aapne kabhi massage kiya hoga kabhi koi aapko maarta hai ki aap utha kar diya tabhi toh aapko sab kuch accha lagta hai aatma aapko na ji dusri massage batamya

हमारे नबी के ऊपर आपने कभी मैसेज किया होगा कभी कोई आपको मारता है कि आप उठा कर दिया तभी तो आ

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J.P. Y👌g i

Psychologist

10:00

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बहुत अच्छा प्रशन है यदि आत्मा मौजूद है तो शरीर मैं आत्मा वास्तव में कहां स्थित होती है इस तरह का प्रश्न यह है बड़ी उत्तम व श्रेष्ठ है पर सैनिक है लेकिन उसका विस्तार बहुल है यह 20 है अध्यात्म का यह प्रश्न आत्मा को ढूंढना और खोजना और इसी के प्रयास में अध्यात्म की पैटर्न धाराएं भाई हैं और इसी में ही अंत करण के अंदर अंतर्मुखी साधना का प्रक्षेप होता है क्योंकि ढूंढो कहां से जातक ढूंढने का एक आधार बनाते हैं खोजने का एक आधार बनाते हैं दरअसल हम जो भी चीज कुछ जानना चाहते हैं उसके लिए हम एक इंद्रिय नियोजित कर देते हैं सपोज डेट हमें सिद्ध का भाव से देखना है बेशक हमें उससे सुनना है सरोद भाव से इत्यादि पंछी ज्ञानेंद्रियों के विशेष से हम उसको टटोलना चाहते कि किस एक सूत्र को पकड़ के अंतर पत्तों में पहुंच जाए जनता तत्व है वही आत्मा का एक विवेचना बनाया गया है तो अगर हम विभागीय पूर्व देखने की भ्रांति से हमारे अंदर सृष्टि में सजी बताती है सर्फर्स स्क्रीन हमारे को सिर्फ स्पर्श कराएं रही स्पर्श का बोध करा रही है मात्र उसका यही धर्म है कि छूने पर अनुभूति हो रही है लेकिन वह पूरी स्पर्शिंडिया देख नहीं रही है इसी प्रकार नेत्र हैं उसका सिर्फ एक ही विषय चल रहा है वह विश्व दर्शन भाव में है देखती है लेकिन उसमें स्पर्श का केंद्र नहीं है इसी तरह स्रोत है इस इस वायरस है पंच ज्ञान हिंदुओं का एक विषय सब्जेक्ट है लेकिन कहीं पॉइंट में जाकर पंच ज्ञानेंद्र का विषय एक का कार्य कर रहा है यानी यह प्रतीत हो जा रहा है जगत में कि देखने वाला सुन भी रहा है स्पर्श भी कर रहा है हर चीज का स्वाद ले रहा है चित्र के साथ संजीव था मैं तो हम उपलक्ष्य निर्धारित करेंगे आत्मा को जानने का जिस तरह एक बीज होता है सपोर्ट प्रक्रिया है जो हो रही जैसे एक वृक्ष उत्पन्न हुआ वृक्ष के बाद उसमें फल आया फूल आया और यह सब दस्सा एक मिशन क्लीन होने के बाद भी अलग चित्र बनाकर अपना स्थित बनाती है उसी पेड़ से शाखा बने पत्ते निकल रहे हैं और उसी से पूछो निकालना है पर बन रहा है और सफल के अंत करण में बीज है तो बीच रास्ते अपनी जगह अलग हो रहा है हल्का अपनी जगह हो रहा है फूल का अपनी जगह हो रहा है पत्तों का अलग हो रहा है शाखाओं का अलग हो रहा है और मूंछ इसका अलग है सत्ता यह विच्छेद होते चले जाते हैं पतझड़ आता है पत्ते अलग हो जाते हैं लेकिन उस चीज से अलग पहचानने वाला फूल है वह भी रक्त होते हैं अपना नया रूप धारण करते हैं उन्होंने फलों के बीच में सीट बीच-बीच किसी ना किसी रूप से ओसियन से अलग स्वरूप बना ले लेकिन यह कहीं ना कहीं कुछ अवस्था में जाकर प्रभावित हो जाते हैं सपूत पका हुआ फल अपने आप डाली से टूट के अलग हो जाता लेकिन जब विकास होता है तो उसके अंदर उसकी तारण बड़ी रहती सिंचित होता है लेकिन वह केंद्र बना रहा है अपने अंदर सुजुकी 70 भी एक सीट है बीज है अब वह बीज वह आत्म तत्व विभक्त रूप में है प्रतिभा सिर्फ पंच ज्ञान इन दिनों से हमें संसार जगत की लोकल हो रहा है उसी के कारण से हम उसको समझ और जान पा रहे हैं लेकिन उससे रहित चीजें हैं जिसको हम नहीं समझ पा रहे मंदबुद्धि शरीर के अंगों और शेर का शिवानंद तो हम ले रहे हैं और यह जिसके द्वारा जिस ऊर्जा के द्वारा यह सब सकारात्मक और सजीव हो रही है जो चेतना आयुक्त की नियुक्ति हो रही है वह पृष्ठभूमि से हम अनभिज्ञ पूर्णता है और भी बहुत सी दशाएं हैं जिसकी मृत्यु क्वेश्चन सपोज हम याद करके कहां छोड़ दे रहे और वह किस तरह से वहां पर रुक रखा हुआ है उसके हम साक्षात्कार नहीं कर रहे लेकिन क्रिया प्रवचन होने के बाद दक्षिण हमारी मस्ती की प्रस्तुति सामने आ जाती है और हमें अबोध हो जाता है कि हम इस विषय इस बात को जाने और यह चीजें तो कहीं ना कहीं ऐसी क्षेत्र मंडल बनते हैं जहां हमारी संवेदनाएं नहीं रहती लेकिन उसके कारण हमारे को चेतना मिलती है तो वहीं चीन की धारा में हमारी भी बैठता है अध्यात्म ढूंढने का यही रास्ता होता है जो इतनी सूक्ष्मता और गहराई के साथ तल्लीनता के साथ प्राण को भी शांत करा जाता है मन की बेटे को भी ढंग से आने लगती है तब हम शिक्षा मनीष अन्वेषण के अंतर्गत उसकी ओर प्रभावित होते हैं तब हमें बहुत होता है कि यह चित्र की धारा समझ शरीर पर और निर्माण कर रही है लेकिन फिर भी अभी तक हमारे अंदर उसके अंदर पीछे से लेकर वशीभूत नहीं हो जाता और इसीलिए इसकी गहराई में सामाजिक स्थिति में वह जितने भी पर इस पर आप रोक तत्व हैं उसके अंदर जब ध्यान अवस्थित होकर हम साक्षी करण करके और इच्छाओं और मन को के वशीभूत करके जब दूसरे निर्वाण पर में अपने स्वरुप को पहचाने लगते हैं उसके द्वारा हम कार्य करने लगते हैं इसी शरीर में रहते हुए हम एक अलग अपने उस केंद्र चेतन मंडल को जब पहचानते हैं तब हमें भूल जाता है तो कहने का मतलब यह है इतनी बड़ी बात होने के पश्चात इससे पूर्व मनुष्य के अंदर इतनी जागृति नहीं हुई है इस कारण ही साधारण व्यक्ति आत्मा की खोज में 1 पॉइंट पर नहीं बता सकता दूसरी बात यह है कि कोई ऐसा कल पूजा तो है नहीं कि आप इसे खोल कर वहां दिखा देगी यह चीज है इसीलिए जब तक उसके लायक नहीं बन जाते तब तक हम उस और नहीं चलता कि जब देवता और चीता का जितनी भी हमसे क्षमता की गहराई में जाएंगे उतने ही हमारी एडवांस समर्थ मिलेगी और सूक्ष्मता के व्यवहार में हमारी कुशलता इतनी यही है मस्ती की जागृति और यही है सुख सुविधा रही बात किसी विशेष बिंदु में बताना कि यहां आत्मा है तो उसके लिए भी केंद्र बने हुए हैं सात चक्र हैं उसके बाद और योगी लोग दो चक्र गुप्त बताते हैं इसका हम भेद करके आज की अवस्था को बता सकते मूलाधार से स्टार्ट होता है पहला पॉइंट अधिष्ठान चक्र होता है ना भी मणिपुर चक्र ताहिर पैमाना होता है अगर इसके ध्यान में अगर आप आ गए केंद्रों में अलग-अलग दिव्य मंडल का कितना समय का संचरण चल रहा है यह अवस्था ऊंची ऊंची दर पैदा होता चला जाता है अंतर्मन में पूर्णता होता है यह विषय

bahut accha prashn hai yadi aatma maujud hai toh sharir main aatma vaastav mein kahaan sthit hoti hai is tarah ka prashna yah hai baadi uttam va shreshtha hai par sainik hai lekin uska vistaar bahul hai yah 20 hai adhyaatm ka yah prashna aatma ko dhundhana aur khojana aur isi ke prayas mein adhyaatm ki pattern dharayen bhai hai aur isi mein hi ant karan ke andar antarmukhi sadhna ka prakshep hota hai kyonki dhundho kahaan se jatak dhundhne ka ek aadhaar banate hai khojne ka ek aadhaar banate hai darasal hum jo bhi cheez kuch janana chahte hai uske liye hum ek indriya niyojit kar dete hai suppose date hamein siddh ka bhav se dekhna hai beshak hamein usse sunana hai sarod bhav se ityadi panchhi gyanendriyon ke vishesh se hum usko tatolana chahte ki kis ek sutra ko pakad ke antar patton mein pohch jaaye janta tatva hai wahi aatma ka ek vivechna banaya gaya hai toh agar hum vibhagiya purv dekhne ki bharntiyo se hamare andar shrishti mein saji batati hai surfers screen hamare ko sirf sparsh karaye rahi sparsh ka bodh kara rahi hai matra uska yahi dharm hai ki chune par anubhuti ho rahi hai lekin vaah puri sparshindiya dekh nahi rahi hai isi prakar netra hai uska sirf ek hi vishay chal raha hai vaah vishwa darshan bhav mein hai dekhti hai lekin usme sparsh ka kendra nahi hai isi tarah srot hai is is virus hai punch gyaan hinduon ka ek vishay subject hai lekin kahin point mein jaakar punch gyanendra ka vishay ek ka karya kar raha hai yani yah pratit ho ja raha hai jagat mein ki dekhne vala sun bhi raha hai sparsh bhi kar raha hai har cheez ka swaad le raha hai chitra ke saath sanjeev tha main toh hum upalakshya nirdharit karenge aatma ko jaanne ka jis tarah ek beej hota hai support prakriya hai jo ho rahi jaise ek vriksh utpann hua vriksh ke baad usme fal aaya fool aaya aur yah sab dassa ek mission clean hone ke baad bhi alag chitra banakar apna sthit banati hai usi ped se shakha bane patte nikal rahe hai aur usi se pucho nikalna hai par ban raha hai aur safal ke ant karan mein beej hai toh beech raste apni jagah alag ho raha hai halka apni jagah ho raha hai fool ka apni jagah ho raha hai patton ka alag ho raha hai shakhaon ka alag ho raha hai aur moonch iska alag hai satta yah vichched hote chale jaate hai patjhad aata hai patte alag ho jaate hai lekin us cheez se alag pahachanne vala fool hai vaah bhi rakt hote hai apna naya roop dharan karte hai unhone falon ke beech mein seat beech beech kisi na kisi roop se osiyan se alag swaroop bana le lekin yah kahin na kahin kuch avastha mein jaakar prabhavit ho jaate hai sapoot paka hua fal apne aap dali se toot ke alag ho jata lekin jab vikas hota hai toh uske andar uski tarana baadi rehti sinchit hota hai lekin vaah kendra bana raha hai apne andar suzuki 70 bhi ek seat hai beej hai ab vaah beej vaah aatm tatva vibhakt roop mein hai pratibha sirf punch gyaan in dino se hamein sansar jagat ki local ho raha hai usi ke karan se hum usko samajh aur jaan paa rahe hai lekin usse rahit cheezen hai jisko hum nahi samajh paa rahe mandbuddhi sharir ke angon aur sher ka shivanand toh hum le rahe hai aur yah jiske dwara jis urja ke dwara yah sab sakaratmak aur sajeev ho rahi hai jo chetna aayukt ki niyukti ho rahi hai vaah prishthbhumi se hum anbhigya purnata hai aur bhi bahut si dashaen hai jiski mrityu question suppose hum yaad karke kahaan chod de rahe aur vaah kis tarah se wahan par ruk rakha hua hai uske hum sakshatkar nahi kar rahe lekin kriya pravachan hone ke baad dakshin hamari masti ki prastuti saamne aa jaati hai aur hamein abodh ho jata hai ki hum is vishay is baat ko jaane aur yah cheezen toh kahin na kahin aisi kshetra mandal bante hai jaha hamari sanvednaen nahi rehti lekin uske karan hamare ko chetna milti hai toh wahi china ki dhara mein hamari bhi baithta hai adhyaatm dhundhne ka yahi rasta hota hai jo itni sukshmata aur gehrai ke saath tallinata ke saath praan ko bhi shaant kara jata hai man ki bete ko bhi dhang se aane lagti hai tab hum shiksha manish anveshan ke antargat uski aur prabhavit hote hai tab hamein bahut hota hai ki yah chitra ki dhara samajh sharir par aur nirmaan kar rahi hai lekin phir bhi abhi tak hamare andar uske andar peeche se lekar vashibhut nahi ho jata aur isliye iski gehrai mein samajik sthiti mein vaah jitne bhi par is par aap rok tatva hai uske andar jab dhyan avasthit hokar hum sakshi karan karke aur ikchao aur man ko ke vashibhut karke jab dusre nirvan par mein apne swarup ko pehchane lagte hai uske dwara hum karya karne lagte hai isi sharir mein rehte hue hum ek alag apne us kendra chetan mandal ko jab pehchante hai tab hamein bhool jata hai toh kehne ka matlab yah hai itni baadi baat hone ke pashchat isse purv manushya ke andar itni jagriti nahi hui hai is karan hi sadhaaran vyakti aatma ki khoj mein 1 point par nahi bata sakta dusri baat yah hai ki koi aisa kal puja toh hai nahi ki aap ise khol kar wahan dikha degi yah cheez hai isliye jab tak uske layak nahi ban jaate tab tak hum us aur nahi chalta ki jab devta aur chita ka jitni bhi humse kshamta ki gehrai mein jaenge utne hi hamari advance samarth milegi aur sukshmata ke vyavhar mein hamari kushalata itni yahi hai masti ki jagriti aur yahi hai sukh suvidha rahi baat kisi vishesh bindu mein bataana ki yahan aatma hai toh uske liye bhi kendra bane hue hai saat chakra hai uske baad aur yogi log do chakra gupt batatey hai iska hum bhed karke aaj ki avastha ko bata sakte muladhar se start hota hai pehla point adhishthan chakra hota hai na bhi manipur chakra tahir paimaana hota hai agar iske dhyan mein agar aap aa gaye kendron mein alag alag divya mandal ka kitna samay ka sancharan chal raha hai yah avastha uchi unchi dar paida hota chala jata hai antarman mein purnata hota hai yah vishay

बहुत अच्छा प्रशन है यदि आत्मा मौजूद है तो शरीर मैं आत्मा वास्तव में कहां स्थित होती है इस

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

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डिस्ट्रिक्ट दूंगा तो आप समझ नहीं पाएंगे क्योंकि जो सवाल है यह दो है आध्यात्मिक से संबंधित है और इसके लिए आपका डिलीट होना आवश्यक है लेकिन एक चीज बता सकते हो यह कौन सा चैनल में कुछ न कुछ कैसे लगे हमारे बॉडी में रहते हैं जिसके निकल जाने के बाद यह शरीर यह सोच यह बात सभी चीजें नहीं रहती इनविजिबल सकारात्मक पॉजिटिव पावरफुल पर ऑटोमेटिक एलर्जी है जो चलती रहती है सब उसी निकला मुझसे मालूम है उसी से ऑटोमेटिक हमारे सर ऐसा ही हो जाए

district dunga toh aap samajh nahi payenge kyonki jo sawaal hai yah do hai aadhyatmik se sambandhit hai aur iske liye aapka delete hona aavashyak hai lekin ek cheez bata sakte ho yah kaun sa channel mein kuch na kuch kaise lage hamare body mein rehte hain jiske nikal jaane ke baad yah sharir yah soch yah baat sabhi cheezen nahi rehti inavijibal sakaratmak positive powerful par Automatic allergy hai jo chalti rehti hai sab usi nikala mujhse maloom hai usi se Automatic hamare sir aisa hi ho jaaye

डिस्ट्रिक्ट दूंगा तो आप समझ नहीं पाएंगे क्योंकि जो सवाल है यह दो है आध्यात्मिक से संबंधित

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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यदि शरीर में आत्मा नहीं है तो शरीर मर्थ है आत्मा की सत्ता में रहकर ही शरीर से संक्रिया आना-जाना सब कुछ करिया आत्मा की कहानी करता है आत्मा के ही सत्ता में रहकर यह पुराने चकरिया होती है इंसान चलता फिरता है आप यह पूछे कि आत्मा शरीर में खामोश योग नहीं है अर्थात आत्मा पूरे शरीर में रोम रोम में रात है तभी तो इंसान चलता है फिरता है सोचता है इंसान पर जीवन है आत्मा के रहते हुए ही शरीर चलता है शरीर में ही प्राण सकता है अतः आत्मा शरीर में हर जर्रे जर्रे में मौजूद है

yadi sharir mein aatma nahi hai toh sharir mirth hai aatma ki satta mein rahkar hi sharir se sankriya aana jana sab kuch Caria aatma ki kahani karta hai aatma ke hi satta mein rahkar yah purane chakriya hoti hai insaan chalta phirta hai aap yah pooche ki aatma sharir mein khamosh yog nahi hai arthat aatma poore sharir mein roam roam mein raat hai tabhi toh insaan chalta hai phirta hai sochta hai insaan par jeevan hai aatma ke rehte hue hi sharir chalta hai sharir mein hi praan sakta hai atah aatma sharir mein har jarre jarre mein maujud hai

यदि शरीर में आत्मा नहीं है तो शरीर मर्थ है आत्मा की सत्ता में रहकर ही शरीर से संक्रिया आन

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Er Jaisingh

Mathematics Solution, 1:00PM TO 2:00PM

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यदि आत्मा मौजूद है तो आत्मा शरीर में वास्तव में कहां स्थित होती है देखिए मनीषियों का कथन है कहना है कि आत्मा जो है व्यक्तियों के दोनों व्यक्तियों के बीच स्थित है और वह सुई की नोक से 1000 गुना छोटी 1000 * छोटी है यानी इतनी छोटी है कि 1000 * यदि उसमें करें 1000 का घोड़ा करें तो है सुई की नोक के बराबर निशान बन पाएगा तो इतनी छोटी है कहां पर स्थित है दोनों बेटियों के बीच में स्थित है ठीक है तो आप इसका आंसर मिल गया होगा धन्यवाद

yadi aatma maujud hai toh aatma sharir mein vaastav mein kahaan sthit hoti hai dekhiye manishiyon ka kathan hai kehna hai ki aatma jo hai vyaktiyon ke dono vyaktiyon ke beech sthit hai aur vaah sui ki nok se 1000 guna choti 1000 choti hai yani itni choti hai ki 1000 yadi usme kare 1000 ka ghoda kare toh hai sui ki nok ke barabar nishaan ban payega toh itni choti hai kahaan par sthit hai dono betiyon ke beech mein sthit hai theek hai toh aap iska answer mil gaya hoga dhanyavad

यदि आत्मा मौजूद है तो आत्मा शरीर में वास्तव में कहां स्थित होती है देखिए मनीषियों का कथन ह

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आत्मा जो है वह शरीर का हर अंग में होता है कि की आत्मा जो है आपको एक नर्वस सिस्टम देते हैं तो यह हमेशा

aatma jo hai vaah sharir ka har ang mein hota hai ki ki aatma jo hai aapko ek nervous system dete hain toh yah hamesha

आत्मा जो है वह शरीर का हर अंग में होता है कि की आत्मा जो है आपको एक नर्वस सिस्टम देते हैं

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