निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है?...


user

Amit vishwakarma

Psychologist

0:58
Play

Likes  14  Dislikes    views  225
WhatsApp_icon
29 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तुमको जो बात नहीं जान प्राप्त हो जाता है तो उनमें बदलाव आ जाता है तो सांसारिक ता से परे हो जाते हो जानते हैं अभी जो कुछ है ही नहीं सब छोड़ जाना वह सब सही पूरा शरीर नश्वर है सच है तो हमारी आत्मा और ईश्वर आत्मा को ईश्वर से अपने आप जोड़ लेता है उज्जैन उसको संसार बिल्कुल मिथ्या समझ में आता

tumko jo baat nahi jaan prapt ho jata hai toh unmen badlav aa jata hai toh sansarik ta se pare ho jaate ho jante hain abhi jo kuch hai hi nahi sab chhod jana vaah sab sahi pura sharir nashwar hai sach hai toh hamari aatma aur ishwar aatma ko ishwar se apne aap jod leta hai ujjain usko sansar bilkul mithya samajh me aata

तुमको जो बात नहीं जान प्राप्त हो जाता है तो उनमें बदलाव आ जाता है तो सांसारिक ता से परे हो

Romanized Version
Likes  220  Dislikes    views  2849
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मृत्यु एक ऐसा अटल सत्य है जो आज नहीं तो कल इस जीवन में जो आया है उसे मरना ही होगा अब यह सवाल है कि यह लोगों को कहते बदल देता है जैसे किसी को पता चल जाए मेरी मौत आने वाली है तो अपने आप को कैसे बदल लेता है देखिए मैं इसका सबसे अच्छा उदाहरण बताता हूं अभी जिस समय में हम जी रहे हैं अभी कोरोनावायरस का समय चल रहा है हम सभी को पता है यदि हम अपनी सावधानिया नहीं रखेंगे तो हमारी मृत्यु हो जाएगी कोरोनावायरस हो जाएंगे जिस ने हम सब को बदल दिया है यानी कि हमें यदि कोरोनावायरस होता है तो हमारी मृत्यु निश्चित है ऐसा हमें आभास होने लगता है तो हमने क्या करना लगा हम अपने अपने आप को बदल लिया सावधानियां को प्रयोग करने लगे जब भी घर से बाहर निकलते हैं मुंह पर मास्क लगाने लगे हाथों में उपलब्ध करने लगे सेनीटाइजर करने लगे यानी कि हम यह कह सकते हैं निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को होने लगा तो उसने हमको बदल दिया यह मेरा जवाब है

mrityu ek aisa atal satya hai jo aaj nahi toh kal is jeevan me jo aaya hai use marna hi hoga ab yah sawaal hai ki yah logo ko kehte badal deta hai jaise kisi ko pata chal jaaye meri maut aane wali hai toh apne aap ko kaise badal leta hai dekhiye main iska sabse accha udaharan batata hoon abhi jis samay me hum ji rahe hain abhi coronavirus ka samay chal raha hai hum sabhi ko pata hai yadi hum apni savadhaniya nahi rakhenge toh hamari mrityu ho jayegi coronavirus ho jaenge jis ne hum sab ko badal diya hai yani ki hamein yadi coronavirus hota hai toh hamari mrityu nishchit hai aisa hamein aabhas hone lagta hai toh humne kya karna laga hum apne apne aap ko badal liya savdhaniya ko prayog karne lage jab bhi ghar se bahar nikalte hain mooh par mask lagane lage hathon me uplabdh karne lage senitaijar karne lage yani ki hum yah keh sakte hain nikat mrityu ka anubhav logo ko hone laga toh usne hamko badal diya yah mera jawab hai

मृत्यु एक ऐसा अटल सत्य है जो आज नहीं तो कल इस जीवन में जो आया है उसे मरना ही होगा अब यह सव

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  123
WhatsApp_icon
user

Preeti Bindal

Writer And Counselor Spritually

9:43
Play

Likes  79  Dislikes    views  1059
WhatsApp_icon
user

Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

0:18
Play

Likes  688  Dislikes    views  4983
WhatsApp_icon
user

Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

1:03
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है देखिए या व्यक्ति की मृत्यु निकट आया जाया करती है और व्यक्ति या समझने लगता है कि वह उसकी मृत्यु हो नजदीक आ गई है तो वह अपनी आचरण को बदल दिया करता है वह सभी से किसने किया करता है और प्यार किया करता है और उसका जो आचरण है जाएं पूरे जीवन भर कठोर क्यों ना रहा हो उस समय हुआ है कोमल भी हो जाया करता है और जो सांसारिक माया मोह है वह भी व्यक्ति के अंतिम समय पर कम जो कम हो जाया करती और जो व्यक्ति है वह बदल जाया करता है

nikat mrityu ka anubhav logo ko kaise badal deta hai dekhiye ya vyakti ki mrityu nikat aaya jaya karti hai aur vyakti ya samjhne lagta hai ki vaah uski mrityu ho nazdeek aa gayi hai toh vaah apni aacharan ko badal diya karta hai vaah sabhi se kisne kiya karta hai aur pyar kiya karta hai aur uska jo aacharan hai jayen poore jeevan bhar kathor kyon na raha ho us samay hua hai komal bhi ho jaya karta hai aur jo sansarik maya moh hai vaah bhi vyakti ke antim samay par kam jo kam ho jaya karti aur jo vyakti hai vaah badal jaya karta hai

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है देखिए या व्यक्ति की मृत्यु निकट आया जाया कर

Romanized Version
Likes  234  Dislikes    views  1926
WhatsApp_icon
user

Rajkumar

Astrologer

3:00
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि निकट मृत्यु का अनुभव मनुष्य को बदल देता है बिल्कुल सही बात है मृत्यु संसार में सबसे भयंकर भयंकर और ऐसी कड़वी सच्चाई है कि उसको इससे हर एक दिन सबको गुजारना पड़ेगा इस मृत्यु की घड़ी से प्रत्येक क्यों हर एक को एक दिन एक घड़ी से गुजारना पड़ेगा लेकिन जब मृत्यु नहीं होती है जब वह जान लेता है क्या मेरा बचना असंभव है तो उसी समय उसे अपने किए हुए पाप कर्म और जो समय उसने व्यतीत कर रहा है वर्ष में व्यर्थ में व्यतीत करा है व्यर्थ में जो समय जब आया है उस समय उसे उस समय उसे पता पड़ता है को वह समय कितना क्योंकि था क्यों क्योंकि मृत्यु का भय इतना भयंकर होता है कि एक क्षण में सारे रिश्ते नाते सब कुछ सब कुछ हमसे छीन लेता है और मृत्यु के बाद हम कहां जाएंगे मृत्यु के बाद हम कहां जाएंगे यह भी पता नहीं होता है तुम पहली बात तो यह है कि मृत्यु के बाद का जल्दी से उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है इसलिए हर मनुष्य मृत्यु से भयभीत होता है और जनप्रतिनिधि काफी है तो उसे अपने किए कराए पर पश्चाताप होता है हां अगर कोई ज्ञानी है या कोई ज्ञानवान पुरुष जिसने उस परमात्मा के मार्ग पर चलकर उसका बोर्ड प्राप्त कर लिया हो तो उसे दुख नहीं होगा क्योंकि उसने जान लिया है दृष्टि के रास्ते खुशी-खुशी अपना शरीर त्याग एक जय श्री राम

aapka prashna hai ki nikat mrityu ka anubhav manushya ko badal deta hai bilkul sahi baat hai mrityu sansar me sabse bhayankar bhayankar aur aisi kadavi sacchai hai ki usko isse har ek din sabko gujarana padega is mrityu ki ghadi se pratyek kyon har ek ko ek din ek ghadi se gujarana padega lekin jab mrityu nahi hoti hai jab vaah jaan leta hai kya mera bachna asambhav hai toh usi samay use apne kiye hue paap karm aur jo samay usne vyatit kar raha hai varsh me vyarth me vyatit kara hai vyarth me jo samay jab aaya hai us samay use us samay use pata padta hai ko vaah samay kitna kyonki tha kyon kyonki mrityu ka bhay itna bhayankar hota hai ki ek kshan me saare rishte naate sab kuch sab kuch humse cheen leta hai aur mrityu ke baad hum kaha jaenge mrityu ke baad hum kaha jaenge yah bhi pata nahi hota hai tum pehli baat toh yah hai ki mrityu ke baad ka jaldi se uske bare me koi jaankari nahi hai isliye har manushya mrityu se bhayabhit hota hai aur janapratinidhi kaafi hai toh use apne kiye karae par pashchaataap hota hai haan agar koi gyani hai ya koi gyaanvaan purush jisne us paramatma ke marg par chalkar uska board prapt kar liya ho toh use dukh nahi hoga kyonki usne jaan liya hai drishti ke raste khushi khushi apna sharir tyag ek jai shri ram

आपका प्रश्न है कि निकट मृत्यु का अनुभव मनुष्य को बदल देता है बिल्कुल सही बात है मृत्यु संस

Romanized Version
Likes  49  Dislikes    views  1262
WhatsApp_icon
user

Sunil Kumar Pandey

Editor & Writer

1:05
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न एक लिखित अमित अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है क्योंकि सबको पता है उसकी मृत्यु निश्चित है और अब जल्दी ही आने वाली है और अपनी जो आपके रहता है उसके सामने उसे पटेल पास में वह सुता कि काश मैंने ऐसा ना किया होता तो आज मेरी यह स्थिति ना होती कुछ नहीं बचा था क्योंकि उसने जो कहता है वही हम क्या करें

namaskar aapka prashna ek likhit amit anubhav logo ko kaise badal deta hai kyonki sabko pata hai uski mrityu nishchit hai aur ab jaldi hi aane wali hai aur apni jo aapke rehta hai uske saamne use patel paas me vaah suta ki kash maine aisa na kiya hota toh aaj meri yah sthiti na hoti kuch nahi bacha tha kyonki usne jo kahata hai wahi hum kya kare

नमस्कार आपका प्रश्न एक लिखित अमित अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है क्योंकि सबको पता है उसकी

Romanized Version
Likes  173  Dislikes    views  1507
WhatsApp_icon
user

Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

1:31
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न हकीकत मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है आपको बता दूं बेटियों से करीब 30 से 40 मिनट पहले वह अपने द्वारा किए गए पाप कर्मों को एक चलचित्र के भक्ति सबने में उभरने लगता है और तब वह पश्चाताप करता है जो हमने इतना पाप किया उसका परिणाम क्या होगा और इससे वह अपने आप को बदलने का कोशिश करता है क्योंकि उसमें और बता जो है वह ज्ञान की ओर बढ़ने लगता है लेकिन अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत आधा घंटा 40 मिनट के लिए आप अपने आप को बदल कर के भी क्या करें जब बदलना था तब तो आप बदले गए अब बदलने से क्या होगा धन्यवाद

namaskar aapka prashna haqiqat mrityu ka anubhav logo ko kaise badal deta hai aapko bata doon betiyon se kareeb 30 se 40 minute pehle vaah apne dwara kiye gaye paap karmon ko ek chalchitra ke bhakti sabane me ubharane lagta hai aur tab vaah pashchaataap karta hai jo humne itna paap kiya uska parinam kya hoga aur isse vaah apne aap ko badalne ka koshish karta hai kyonki usme aur bata jo hai vaah gyaan ki aur badhne lagta hai lekin ab pachtaye hot kya jab chidiya chug gayi khet aadha ghanta 40 minute ke liye aap apne aap ko badal kar ke bhi kya kare jab badalna tha tab toh aap badle gaye ab badalne se kya hoga dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न हकीकत मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है आपको बता दूं बेटियों स

Romanized Version
Likes  11  Dislikes    views  137
WhatsApp_icon
user

Sumeet Sahni

Psychologist, Life Coach, Trainer

1:57
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक बार गुरुनानक देवी से किसी ने पूछा कि दुनिया का सबसे बड़ा सच क्या है और दुनिया का सबसे बड़ा झूठ क्या है गुरु नानक देव जी ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा सच यह है कि हर इंसान को एक न एक दिन मरना है और दुनिया का सबसे बड़ा झूठ यह है कि व्यक्ति सोचता है कि मैं अभी नहीं मरूंगा मुझे तो बहुत दिन है जितने भी व्यक्ति हैं हम लोग जब भी मौत के बारे में सोचते हैं तुम सोचते हैं कि अभी तो मैं तो जल्दी नहीं मारूंगा मैं भी नहीं मर सकता ठीक है और हम जो है जीवन उसी हिसाब से जीते हैं आप कितनी बार हम लोगों ने देखा है कि अगर हम कुछ नहीं चीज भी खरीदते हैं तो मुस्काया तो पॉलिथीन चढ़ा रहने देते हैं यार अभी इस्तेमाल नहीं करना इसको तो लंबे तुम्हारी करना पर यही चीजें जो भी हमारी सोच होती है जब किसी व्यक्ति को नियर डेथ एक्सपीरियंस बिहारी की मृत्यु होने पर जिसको हम कहते हैं होता है तो उसकी पूरी की पूरी सूची लग जाती है जब उसका आमना-सामना मृत्यु से होता है तो उसको तभी एहसास होता है कि जो मैं सोच कर बैठा था कि किसी ना किसी को मरना है वह चीज बहुत ही बड़ी सच है और पैसा नहीं है कि मैं वृद्ध होकर ही मारूंगा यह मौत कभी भी आ सकती है तो वह आगे के लिए ना जी के प्रेजेंट मोमेंट में करंट में आज के लिए ही जीना चालू कर देता है वह ऐसी चीजें जो सोचता था मैं आगे जाकर करूंगा या बुद्धा होकर करूंगा या रिटायर होकर करूंगा सब चीजों को आज ही करने के लिए तत्पर हो जाता है और साथ ही साथ उसको उन चीजों की है मैं तो जाती है जो कि शायद उससे पहले नाम तो व्यक्ति का पूरा का पूरा नगरिया सोचने का नजरिया बदल जाता है अगर उसको मिले टैक्टिक्स पीने से निकट मृत्यु का अनुभव होता है

ek baar gurunanak devi se kisi ne poocha ki duniya ka sabse bada sach kya hai aur duniya ka sabse bada jhuth kya hai guru nanak dev ji ne kaha ki duniya ka sabse bada sach yah hai ki har insaan ko ek na ek din marna hai aur duniya ka sabse bada jhuth yah hai ki vyakti sochta hai ki main abhi nahi marunga mujhe toh bahut din hai jitne bhi vyakti hain hum log jab bhi maut ke bare me sochte hain tum sochte hain ki abhi toh main toh jaldi nahi marunga main bhi nahi mar sakta theek hai aur hum jo hai jeevan usi hisab se jeete hain aap kitni baar hum logo ne dekha hai ki agar hum kuch nahi cheez bhi kharidte hain toh muskaya toh polythene chadha rehne dete hain yaar abhi istemal nahi karna isko toh lambe tumhari karna par yahi cheezen jo bhi hamari soch hoti hai jab kisi vyakti ko near death experience bihari ki mrityu hone par jisko hum kehte hain hota hai toh uski puri ki puri suchi lag jaati hai jab uska aamna samana mrityu se hota hai toh usko tabhi ehsaas hota hai ki jo main soch kar baitha tha ki kisi na kisi ko marna hai vaah cheez bahut hi badi sach hai aur paisa nahi hai ki main vriddh hokar hi marunga yah maut kabhi bhi aa sakti hai toh vaah aage ke liye na ji ke present moment me current me aaj ke liye hi jeena chaalu kar deta hai vaah aisi cheezen jo sochta tha main aage jaakar karunga ya buddha hokar karunga ya retire hokar karunga sab chijon ko aaj hi karne ke liye tatpar ho jata hai aur saath hi saath usko un chijon ki hai main toh jaati hai jo ki shayad usse pehle naam toh vyakti ka pura ka pura nagaria sochne ka najariya badal jata hai agar usko mile tactics peene se nikat mrityu ka anubhav hota hai

एक बार गुरुनानक देवी से किसी ने पूछा कि दुनिया का सबसे बड़ा सच क्या है और दुनिया का सबसे ब

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  96
WhatsApp_icon
user

Dr.Paramjit Singh

Health and Fitness Expert/ Lecturer In Physical Education/

1:12
Play

Likes  126  Dislikes    views  2223
WhatsApp_icon
user

DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

1:44
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकट में चूक अनमोल लोगों को कैसे बदल देते हैं जब लोगों के मन में इस तरह के हाव भाव आते हैं तो किचन में चौखट होती है तो इंसान की आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है और हर इंसान को मृत्यु अवश्य चाहिए और बाबा से बात का प्रतीक होता है कि अपने जीवन के कर्म औसत कर्मों का देखा देखा सुन लो और उसके जीवन का जो है आधार निश्चित कर लो चौकी में जो संकेत देती है और उसे इंसान के शिष्य उनका आचरण पहचान हाउ हाउ सोच समझ से बदल जाती है सिर्फ वह बच्चों की तरफ ने बिना किसी रुके नहीं आता रहता है कि कबूतर की ज्योति आएगी कब उसके प्राणों का हरण करके आत्मा को निकाल के चली जाए कुछ लोग उसका मुस्कुराते भी स्वागत करते हैं कुछ लोग विलाप करते हुए चिल्लाते हुए ठिकानों की मीठी चटनी

nikat me chuk anmol logo ko kaise badal dete hain jab logo ke man me is tarah ke hav bhav aate hain toh kitchen me chaukhat hoti hai toh insaan ki aakhon ke aage andhera cha jata hai aur har insaan ko mrityu avashya chahiye aur baba se baat ka prateek hota hai ki apne jeevan ke karm ausat karmon ka dekha dekha sun lo aur uske jeevan ka jo hai aadhar nishchit kar lo chowki me jo sanket deti hai aur use insaan ke shishya unka aacharan pehchaan how how soch samajh se badal jaati hai sirf vaah baccho ki taraf ne bina kisi ruke nahi aata rehta hai ki kabootar ki jyoti aayegi kab uske pranon ka haran karke aatma ko nikaal ke chali jaaye kuch log uska muskurate bhi swaagat karte hain kuch log vilap karte hue chillate hue thikanon ki mithi chatni

निकट में चूक अनमोल लोगों को कैसे बदल देते हैं जब लोगों के मन में इस तरह के हाव भाव आते हैं

Romanized Version
Likes  447  Dislikes    views  5171
WhatsApp_icon
user

Anjana Baliga

Counselor

1:29
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जो लोग इस जीवन में ऐसे ही पीते हैं जिनको मृत्यु का ज्ञान नहीं होता और मृत्यु का भय होता है तो निकट मृत्यु होने से उनके उनके सामने आ जाता वह बड़े भयभीत हो जाते हैं वह अपनी इस दुनिया से छोड़ना नहीं चाहते उनके जीवन की इच्छाएं कुछ अलग होती है वह अपने रिश्तेदारों से छोड़ नहीं पाते तो जो उनका संबंध सगे संबंधियों से है वह उनको खींचता है तो और ईश्वर उनको लेकर जाना चाहता है तो वह जाना नहीं चाहते तो उनका जो प्रतिक्रिया होती है मृत्यु को देखकर वह बड़ी भयानक होती है और कई लोगों का तो यह मानना है उनको एक श्वेत प्रकाश ऐसे दिखता है और वह उनको दिखता है कि उनके शरीर से कुछ निकल गया और जब वह वापस आ जाते हैं उनका यह मानना है कि ऐसे लगा कि मेरे शरीर से कुचला और कुछ देर बाद शरीर के अंदर कुछ प्रवेश कर गया और मुझे एक नया जीवन मिल गया यह मैं नहीं कह रही जिन लोगों ने इसको अनुभव किया है उनके कथन है क्योंकि ऐसे यूट्यूब में बहुत सारे डॉक्यूमेंट्री हैं जो इसके बारे में पुष्टि करते हैं कि मृत्यु के बाद जिन जिन लोगों ने इस तरह का अनुभव किया है उन्होंने यह बताया है ऐसा करती हूं धन्यवाद

jo log is jeevan me aise hi peete hain jinako mrityu ka gyaan nahi hota aur mrityu ka bhay hota hai toh nikat mrityu hone se unke unke saamne aa jata vaah bade bhayabhit ho jaate hain vaah apni is duniya se chhodna nahi chahte unke jeevan ki ichhaen kuch alag hoti hai vaah apne rishtedaron se chhod nahi paate toh jo unka sambandh sage sambandhiyon se hai vaah unko khinchata hai toh aur ishwar unko lekar jana chahta hai toh vaah jana nahi chahte toh unka jo pratikriya hoti hai mrityu ko dekhkar vaah badi bhayanak hoti hai aur kai logo ka toh yah manana hai unko ek shwet prakash aise dikhta hai aur vaah unko dikhta hai ki unke sharir se kuch nikal gaya aur jab vaah wapas aa jaate hain unka yah manana hai ki aise laga ki mere sharir se kuchala aur kuch der baad sharir ke andar kuch pravesh kar gaya aur mujhe ek naya jeevan mil gaya yah main nahi keh rahi jin logo ne isko anubhav kiya hai unke kathan hai kyonki aise youtube me bahut saare documentary hain jo iske bare me pushti karte hain ki mrityu ke baad jin jin logo ne is tarah ka anubhav kiya hai unhone yah bataya hai aisa karti hoon dhanyavad

जो लोग इस जीवन में ऐसे ही पीते हैं जिनको मृत्यु का ज्ञान नहीं होता और मृत्यु का भय होता है

Romanized Version
Likes  413  Dislikes    views  5763
WhatsApp_icon
user

Shashi

Author, Spiritual Blogger

2:05
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

परिवार में किसी एक का निकटतम संबंधी अपने परिवार के धन का बिछड़ना एक बहुत बड़ी बात होती है मनुष्य को हार्दिक और के अलावा मानसिक तौर पर यह किरण एक और एक आदमी को हिला कर रख देती को भविष्य को गीत बात कराता है कि हमने कहा कि हम लोगों की टिकट की बुकिंग का जोर जोर आता है तू कभी समय हम लोगों को हमेशा जाना चाहिए कि एक कदम और कदम कदम किसी एक दिशा में जा रहा और यह निकट एक ही एक ही तरीका होना चाहिए कि इस प्रधान को पूरी तरह से मीनू चौधरी और शायद मिली

parivar mein kisi ek ka nikatam sambandhi apne parivar ke dhan ka bichadana ek bahut badi baat hoti hai manushya ko hardik aur ke alava mansik taur par yah kiran ek aur ek aadmi ko hila kar rakh deti ko bhavishya ko geet baat karata hai ki humne kaha ki hum logo ki ticket ki booking ka jor jor aata hai tu kabhi samay hum logo ko hamesha jana chahiye ki ek kadam aur kadam kadam kisi ek disha mein ja raha aur yah nikat ek hi ek hi tarika hona chahiye ki is pradhan ko puri tarah se meenu choudhary aur shayad mili

परिवार में किसी एक का निकटतम संबंधी अपने परिवार के धन का बिछड़ना एक बहुत बड़ी बात होती है

Romanized Version
Likes  54  Dislikes    views  1340
WhatsApp_icon
play
user
0:30

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब मनुष्य मृत्यु के निकट जाता है और उसका अनुभव कर लेता है और बच्चों के मुख से बचकर जाता है तो निश्चित रूप से मनुष्य के अंदर कई परिवर्तन आते हैं और उसका जीवन बदलता है लेकिन यह उसे अनुभव होता है जो कि मृत्यु के मुख में से जाकर आया

jab manushya mrityu ke nikat jata hai aur uska anubhav kar leta hai aur baccho ke mukh se bachakar jata hai toh nishchit roop se manushya ke andar kai parivartan aate hain aur uska jeevan badalta hai lekin yah use anubhav hota hai jo ki mrityu ke mukh mein se jaakar aaya

जब मनुष्य मृत्यु के निकट जाता है और उसका अनुभव कर लेता है और बच्चों के मुख से बचकर जाता है

Romanized Version
Likes  91  Dislikes    views  1807
WhatsApp_icon
user

Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:42
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है वह बहुत अच्छे बुरे होते हैं उसके मन में मानसिक जो विकार होते हैं बुरे विकार उसको वह फिनिश कर देता है अपने आप ही खत्म हो जाता है और वह अच्छी सोच भी अच्छे रास्ते पर चलने की शुरुआत कर देता में कितना फर्क पड़ता है जब वह मरता है कितना फर्क होता है आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

nikat mrityu ka anubhav logo ko kaise badal deta hai vaah bahut acche bure hote hain uske man mein mansik jo vikar hote hain bure vikar usko vaah finish kar deta hai apne aap hi khatam ho jata hai aur vaah achi soch bhi acche raste par chalne ki shuruat kar deta mein kitna fark padta hai jab vaah marta hai kitna fark hota hai aapka din shubha ho dhanyavad

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है वह बहुत अच्छे बुरे होते हैं उसके मन में मान

Romanized Version
Likes  413  Dislikes    views  5154
WhatsApp_icon
user

Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

3:01
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इसके लिए संस्कृति नीतिशास्त्र क्यों भेजें कुमकुम भाग्य 14 मृत्यु ना किसी योग्य विद्वान व्यक्ति को धन और ध्यान दोनों को अपने आपको अगर मगर मान करके हमेशा संग्रह करने में लगे रहना चाहिए तन करते रहना चाहिए आपकी के प्रयास में रहना चाहिए और बीमारी पकड़ रखे हमारी मानव बच्चों निश्चित है जीवन 12578 है इसलिए हमें दम टेकारी भी करनी चाहिए परोपकार के कार्य करने चाहिए और सन सेवा को महत्व देना चाहिए देखो मेरे पिक्चर तू हमारी खड़े खड़े हमने शाम के चलो जब हमने जन्म लिया है तो हमारी बिट्टू सुनिश्चित होगी तो जानने वाले लोग हैं मैं तो शुरु से ही परोपकार और पर सेवा पर ध्यान देकर दोनों के संग अभियान दीप्ति अधिकारी कार्य करते हैं जिससे वह मर भी जाए तो उनके संस्थानों तथा उनके नाम के जोक्स लोग युगों तक जाते को जोड़ो ओम लोग साधारण लोग लोग लोग लालच में हुए अपने जीवन को इंदौर लालच से युक्त बना लेते हैं आप देखते हो बहुत से लोगों का इस लोभ लालच करते हुए मतदान आदि के साजन इनमें पूरा जीवन बदल जाता है एक समय में जो अच्छा लगता जाती है और वो कुछ भी ऐसा नहीं कर जाते हैं इसके लोग उनके नाम को जांच घर वाले भी होते हैं उसके बाद मिलते नहीं भूल जाते हैं आदमी को पति मृत्यु से बच्चों का ध्यान रखना चाहिए तू तो मारी जुदाई किसी भी चला सकती है इसलिए हमें परोपकार के कार्य करते रहना चाहिए और सेवा करनी चाहिए दूसरों की सहायता करनी चाहिए व्यवहार रखना चाहिए सदाचरण करना चाहिए

iske liye sanskriti nitishastra kyon bheje kumkum bhagya 14 mrityu na kisi yogya vidhwaan vyakti ko dhan aur dhyan dono ko apne aapko agar magar maan karke hamesha sangrah karne mein lage rehna chahiye tan karte rehna chahiye aapki ke prayas mein rehna chahiye aur bimari pakad rakhe hamari manav baccho nishchit hai jeevan 12578 hai isliye hamein dum tekari bhi karni chahiye paropkaar ke karya karne chahiye aur san seva ko mahatva dena chahiye dekho mere picture tu hamari khade khade humne shaam ke chalo jab humne janam liya hai toh hamari bittu sunishchit hogi toh jaanne waale log hain main toh shuru se hi paropkaar aur par seva par dhyan dekar dono ke sang abhiyan dipti adhikari karya karte hain jisse vaah mar bhi jaaye toh unke sansthano tatha unke naam ke jokes log yugon tak jaate ko jodon om log sadhaaran log log log lalach mein hue apne jeevan ko indore lalach se yukt bana lete hain aap dekhte ho bahut se logo ka is lobh lalach karte hue matdan aadi ke sajan inme pura jeevan badal jata hai ek samay mein jo accha lagta jaati hai aur vo kuch bhi aisa nahi kar jaate hain iske log unke naam ko jaanch ghar waale bhi hote hain uske baad milte nahi bhool jaate hain aadmi ko pati mrityu se baccho ka dhyan rakhna chahiye tu toh mari judai kisi bhi chala sakti hai isliye hamein paropkaar ke karya karte rehna chahiye aur seva karni chahiye dusro ki sahayta karni chahiye vyavhar rakhna chahiye sadacharan karna chahiye

इसके लिए संस्कृति नीतिशास्त्र क्यों भेजें कुमकुम भाग्य 14 मृत्यु ना किसी योग्य विद्वान व्

Romanized Version
Likes  66  Dislikes    views  1295
WhatsApp_icon
user

J.P. Y👌g i

Psychologist

10:00
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रशन है निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है मृत्यु जो शब्द है एक ऐसा भाव अपने अंदर से स्वस्थ रखता है कि हर इंसान को जब मृत्यु का प्रतिरोध होता है मृत्यु का जो अर्थ अनुमान लगाते हैं के उसके संपूर्ण अस्तित्व का जो भौतिक जगत में प्रत्यक्षीकरण है उसका विलुप्त हो जाना यानी पुनः स्थापित नहीं होना और इसके बाद कोई मान नहीं रहे क्या और ना ही किसी से क्षमता का कोई उल्लेख बनेगा तो इतना बड़ा चाप उस पर पड़ता है कि यानी दबाव के उसको सबसे बड़ी बात अपने अस्तित्व की गहराई का भान होने लगता है और अस्तित्व अस्तित्व के भान के अंदर वह कुछ निष्कर्ष पर आ जाता है कि वास्तविक मेरी जो चंचलता उड़ जाए और जीवन की जो चली थी और उसमें जो मैं प्रथम रात रहा हूं और वह चीज मेरे किस काम आ रही है इस समय तो वहां बहुत असहाय अवस्था में अपने आप को प्राप्त रहता है और बहुत ही ज्यादा चेस्ट अमृत रहता है तो ऐसी दशा में मनुष्य की धारणाएं बहुत त्रिविता के साथ पल पेंसिल दशा में आती है हेलो कुछ संकलन और कुछ करने का विचार रहता है कि मुझे क्या करना चाहिए था और कैसे रहना चाहिए था और किस भरोसे के सहारे मेरा जीवन अंधे में चल रहा था और आज मेरे पास कुछ भी कोई सामर्थ नहीं है और मैं एक बहुत ही दिन असहाय अवस्था के अवसर में गुजर रहा हूं और मेरे को अपनी सताती है घमंड का औकात पता चल रहा है कि अच्छा है कुछ नहीं है तो मनुष्य के अंदर तीन नियम 10 जून 10 शाह जाती है कि वह वास्तव में झकझोर देता है उसके अंत करण को और एक संकल्प के दिन इनकी भावना से किसी प्रक्षेत्र प्रभाव या जो भावना है उसको प्राप्त रहती है उसके प्रति उसकी उत्कंठा आती है और जब कभी कभी इंसान के जीवन में ऐसा होता है कि जो दुर्घटना आती है अजय मृत्यु के बाद ऐसी महसूस होते कि मैं वापस लौटा हूं और अब मेरे को जीवन में क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए तो वह बहुत ज्यादा सचेत हो जाते और बदलाव की संभावना रहती है और वह बहुत सचेत रूप से जीवन का अर्थ समझते हैं और से वह कुछ ना कुछ अच्छे कर्म के लिए अपने आप को प्रयोजन में रखते हैं कि मेरी सार्थकता इस नियुक्ति सताए उन कर्मों में होगी हमारे शरीर को जो मेरे को लाभ गिरते मेरी है सर शरीर के माध्यम से मैं इसका सदुपयोग कर सकूं और फिर वह आध्यात्म की गहराई बहुत त्रिविता से हो धारण करता है और उस लक्षण लक्षण में कहीं ना कहीं आप अपने आप को स्थापित करने की चेष्टा करता है और जो दूसरी बेटी होती की कोई चीज हमसे भी ज्यादा सामर्थ्य वाद दिया कोई ऐसी शिक्षण की विधि या तत्व राशि भावनाएं है तो मैं उसका अवलोकन कर लूंगा उसके शनिदेव की भाग लूंगा इस प्रकार की मात्रा से प्रवर्तन होता है क्योंकि उन्हें सतत आभास हो जाता है कि वास्तव में मृत्यु एक ऐसी दशा है कि जहां हमारा स्थिति विलुप्त हो जाता है संसार में संसार के लिए और जो हर चीज में मां और इच्छाएं हैं खुद अमित हो रहे हैं या उसके परिवार किस तरह करना चाहिए या नहीं करना चाहिए यदि भानेज के अंदर उत्पन्न हो जाती है तो निश्चित ही कुछ ना कुछ बदलाव और पर्यटन का एक भूमिका बन जाती है तो इस प्रकार से अधिकांश लोगों में लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं कि जो सहज तरीके से मृत्यु को समझ नहीं पाते हैं बदमाश कुख्यात किस्म के लोग हो जाते हैं और अपने जीवन को गर्त में डालने की कोशिश में तत्पर हो जाता है से रूढ़िवाद में भी आ रहा है धर्मों के प्रति अपने आप को बलिदान करने की कोशिश कर रहे हैं और जो कि कोई सिद्ध महत्वता नहीं होती कि स्वर्गीय आज्ञा है आदेश है ईश्वर ने रचना करके जीवन दिया है जीने के लिए सिर्फ तो यही है अगर यह पहलू इंसान रखता है तो लेकिन प्रकृति में माइंड भी है कि दिमाग भी आशा है कि अच्छी सोच के लिए मजबूर रखता है कि हमारा अंत होना है लेकिन अध्यात्म कभी भी अंत किस सीढ़ी पर नहीं जाता वह कृष किसी ने में जाता है अपने नवनिर्माण भूमिका में जाता है कि कुछ सूक्ष्म और अनवीकरणीय अध्यात्म अनुभव के आधार पर उसका प्रकाशमान होता है जो अंतरण कि जिनके अंदर 10 साल सितम प्रकाश पर आती है तो उनका विषय बनता है और वह अपना सूचित हो कर के प्रकृति का दूसरा लेते हैं वह ऐसी बात नहीं है कि उस उप लक्षण के अंदर एक चीज की क्या जरा मार और आनंददायक है तो ऐसा गुणसूत्र होता है कि जब अजर और अमर आनंद दायक है अर्थात का विनाश ही बोलते हैं तो यहां से अध्यात्म का एक दोस्ती है और अंदर छेद आकाश मंडल के अंदर वह शिक्षण मानसिक धाराओं के जो व्यक्ति या होती है उसमें अन्वेषण करता है और कुछ चयन के आधार पर अपने उच्च शिक्षण दशा को प्राप्त करता है जो हमारा परिष्कृत माइंड होता है जिसमें अल्लो की दृष्टि में कहते हैं दिव्य मंडल में प्रतिष्ठा क्यों किसको भविष्य ज्ञान हो रहा है और उसकी प्रकृति कुछ नेचर से अलग जा रहे हैं और की सामर्थ भी बंद नहीं यादें तो जब ध्यान रूप से इंसान अपने जीवन को महत्वपूर्ण दे देता तो निश्चित होता है कि उत्तम कार्य के लिए अपने आप को स्थापित करेगा अब बदलाव लाएगा मिट्ठू बहुत बड़ा कारण बन जाता है पर यही चीजें उत्पीड़ित भगवान गौतम बुध पर भी दर्शाया गया था जो उत्पीड़न और जो प्रवर्तन देखी हो रही थी उससे पूछो अभी तो ऐसा नहीं चाहते थे कि उनके मन मांग में इस तरह का भविष्य उनको अति संवेदनशील और प्रशिक्षण बुद्धि के कारण उन्होंने उस मार्ग को अध्ययन कराया किया था नहीं होना चाहिए क्यों हो रहा है इसके लिए उन्होंने बहुत संघर्ष करा अपने आपको गुरुओं के अफसाने जीवन में हर तरह के अनुभव में अध्यात्म के अनुभव की सीढ़ियों को उन्होंने अपने अंत करण में पक्के और अंकित है उनको समूचे भावनाओं का उनको रास्ता मिला और वह मोदी को प्राप्त हुए अर्थात सतयुग में विलय पत्र है और वह संसाधन को अपने अध्याय में आया भी प्रश्न में भी आया कि भगवान गौतम बुद्ध ने भक्तों ने किस ईश्वर की चर्चा नहीं करें क्योंकि वह समझ रहे थे कि जनसाधारण का विषय नहीं हो सकता और इसमें कभी लाभ होता है तो धर्म की पृष्ठभूमि में बहुत सारे अनुशासन बनते हैं और मानव समाज में काफी थक जाता है इसलिए ही उन्होंने ज्यादातर सप्ताह के अंत करण और विकास के लिए मार्ग निश्चित किया गया नंबर इस प्रकार यह भी एक मित्र की संज्ञा दी जिसने परिवर्तन करा था तो मनुष्य अगर अंत करण से इतनी सचेतना में होता कि संवेदनशील होता है कि उसको पुलाव हाउस का अनुभव होने लग जाता है थोड़ी सी भावना के अंदर ही प्रति संवेदनशील होने के कारण

prashan hai nikat mrityu ka anubhav logo ko kaise badal deta hai mrityu jo shabd hai ek aisa bhav apne andar se swasthya rakhta hai ki har insaan ko jab mrityu ka pratirodh hota hai mrityu ka jo arth anumaan lagate hain ke uske sampurna astitva ka jo bhautik jagat mein pratyaksheekaran hai uska vilupt ho jana yani punh sthapit nahi hona aur iske baad koi maan nahi rahe kya aur na hi kisi se kshamta ka koi ullekh banega toh itna bada chap us par padta hai ki yani dabaav ke usko sabse badi baat apne astitva ki gehrai ka bhan hone lagta hai aur astitva astitva ke bhan ke andar vaah kuch nishkarsh par aa jata hai ki vastavik meri jo chanchalata ud jaaye aur jeevan ki jo chali thi aur usme jo main pratham raat raha hoon aur vaah cheez mere kis kaam aa rahi hai is samay toh wahan bahut asahay avastha mein apne aap ko prapt rehta hai aur bahut hi zyada chest amrit rehta hai toh aisi dasha mein manushya ki dharnae bahut trivita ke saath pal pencil dasha mein aati hai hello kuch sankalan aur kuch karne ka vichar rehta hai ki mujhe kya karna chahiye tha aur kaise rehna chahiye tha aur kis bharose ke sahare mera jeevan andhe mein chal raha tha aur aaj mere paas kuch bhi koi samarth nahi hai aur main ek bahut hi din asahay avastha ke avsar mein gujar raha hoon aur mere ko apni satati hai ghamand ka aukat pata chal raha hai ki accha hai kuch nahi hai toh manushya ke andar teen niyam 10 june 10 shah jaati hai ki vaah vaastav mein jhakjhor deta hai uske ant karan ko aur ek sankalp ke din inki bhavna se kisi prakshetra prabhav ya jo bhavna hai usko prapt rehti hai uske prati uski utkantha aati hai aur jab kabhi kabhi insaan ke jeevan mein aisa hota hai ki jo durghatna aati hai ajay mrityu ke baad aisi mehsus hote ki main wapas lauta hoon aur ab mere ko jeevan mein kya karna chahiye kya nahi karna chahiye toh vaah bahut zyada sachet ho jaate aur badlav ki sambhavna rehti hai aur vaah bahut sachet roop se jeevan ka arth samajhte hain aur se vaah kuch na kuch acche karm ke liye apne aap ko prayojan mein rakhte hain ki meri sarthakta is niyukti sataye un karmon mein hogi hamare sharir ko jo mere ko labh girte meri hai sir sharir ke madhyam se main iska sadupyog kar saku aur phir vaah aadhyatm ki gehrai bahut trivita se ho dharan karta hai aur us lakshan lakshan mein kahin na kahin aap apne aap ko sthapit karne ki cheshta karta hai aur jo dusri beti hoti ki koi cheez humse bhi zyada samarthya vad diya koi aisi shikshan ki vidhi ya tatva rashi bhaavnaye hai toh main uska avalokan kar lunga uske shanidev ki bhag lunga is prakar ki matra se pravartan hota hai kyonki unhe satat aabhas ho jata hai ki vaastav mein mrityu ek aisi dasha hai ki jaha hamara sthiti vilupt ho jata hai sansar mein sansar ke liye aur jo har cheez mein maa aur ichhaen hain khud amit ho rahe hain ya uske parivar kis tarah karna chahiye ya nahi karna chahiye yadi bhanej ke andar utpann ho jaati hai toh nishchit hi kuch na kuch badlav aur paryatan ka ek bhumika ban jaati hai toh is prakar se adhikaansh logo mein lekin kuch log aise hote hain ki jo sehaz tarike se mrityu ko samajh nahi paate hain badamash kukhat kism ke log ho jaate hain aur apne jeevan ko gart mein dalne ki koshish mein tatpar ho jata hai se roodhivaad mein bhi aa raha hai dharmon ke prati apne aap ko balidaan karne ki koshish kar rahe hain aur jo ki koi siddh mahatvata nahi hoti ki swargiya aagya hai aadesh hai ishwar ne rachna karke jeevan diya hai jeene ke liye sirf toh yahi hai agar yah pahaloo insaan rakhta hai toh lekin prakriti mein mind bhi hai ki dimag bhi asha hai ki achi soch ke liye majboor rakhta hai ki hamara ant hona hai lekin adhyaatm kabhi bhi ant kis sidhi par nahi jata vaah krish kisi ne mein jata hai apne Navanirmaṇa bhumika mein jata hai ki kuch sukshm aur anveekaraneeya adhyaatm anubhav ke aadhaar par uska prakashman hota hai jo antran ki jinke andar 10 saal sitam prakash par aati hai toh unka vishay baata hai aur vaah apna suchit ho kar ke prakriti ka doosra lete hain vaah aisi baat nahi hai ki us up lakshan ke andar ek cheez ki kya zara maar aur anand dayak hai toh aisa gunasutra hota hai ki jab ajar aur amar anand dayak hai arthat ka vinash hi bolte hain toh yahan se adhyaatm ka ek dosti hai aur andar ched akash mandal ke andar vaah shikshan mansik dharaon ke jo vyakti ya hoti hai usme anveshan karta hai aur kuch chayan ke aadhaar par apne ucch shikshan dasha ko prapt karta hai jo hamara parishkrit mind hota hai jisme allo ki drishti mein kehte hain divya mandal mein prathishtha kyon kisko bhavishya gyaan ho raha hai aur uski prakriti kuch nature se alag ja rahe hain aur ki samarth bhi band nahi yaadain toh jab dhyan roop se insaan apne jeevan ko mahatvapurna de deta toh nishchit hota hai ki uttam karya ke liye apne aap ko sthapit karega ab badlav layega mitthu bahut bada karan ban jata hai par yahi cheezen utpidit bhagwan gautam buddha par bhi darshaya gaya tha jo utpidan aur jo pravartan dekhi ho rahi thi usse pucho abhi toh aisa nahi chahte the ki unke man maang mein is tarah ka bhavishya unko ati samvedansheel aur prashikshan buddhi ke karan unhone us marg ko adhyayan karaya kiya tha nahi hona chahiye kyon ho raha hai iske liye unhone bahut sangharsh kara apne aapko guruon ke afasane jeevan mein har tarah ke anubhav mein adhyaatm ke anubhav ki sidhiyon ko unhone apne ant karan mein pakke aur ankit hai unko samuche bhavnao ka unko rasta mila aur vaah modi ko prapt hue arthat satayug mein vilay patra hai aur vaah sansadhan ko apne adhyay mein aaya bhi prashna mein bhi aaya ki bhagwan gautam buddha ne bhakton ne kis ishwar ki charcha nahi kare kyonki vaah samajh rahe the ki janasadharan ka vishay nahi ho sakta aur isme kabhi labh hota hai toh dharm ki prishthbhumi mein bahut saare anushasan bante hain aur manav samaj mein kaafi thak jata hai isliye hi unhone jyadatar saptah ke ant karan aur vikas ke liye marg nishchit kiya gaya number is prakar yah bhi ek mitra ki sangya di jisne parivartan kara tha toh manushya agar ant karan se itni sachetna mein hota ki samvedansheel hota hai ki usko pulav house ka anubhav hone lag jata hai thodi si bhavna ke andar hi prati samvedansheel hone ke karan

प्रशन है निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है मृत्यु जो शब्द है एक ऐसा भाव अपन

Romanized Version
Likes  60  Dislikes    views  1186
WhatsApp_icon
user

Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:06
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकट मृत्यु का अनुभव को कैसे बदल देता है लोग डूबते हैं उन्हें सो जाता है कि सब लोग को यह पास भी होता लेकिन कुछ कुछ लोगों को एहसास हो जाता है को दिमाग में ऐसी बात आ जाती है कि बस अब मैं ज्यादा दिन का मेहमान नहीं और वैसे लोगों को ऐसा विचार आता है सादा सकता है वैसे लोगों को ता है जिन्होंने आजीवन अच्छे कर्म किए हुए लोगों की भलाई की हो बहुत से लोगों के आंखों के आंसू पोछे अपने धन का सदुपयोग किया अपने परिवार का भी भला किया और प्रभु का नाम दिया हो भगवान की भक्ति की हो और आध्यात्मिकता उनके मन में दिमाग में जो होती तो कुदरती रूप पूर्वाभास हो जाता है और इसके अलावा जो लोग हैं जो कभी भलाई का काम नहीं करते हैं या खाली काम लोग लोगों को उनकी मृत्यु कब आ जाती है पास में उनको जब ज्ञात होता है तो उस कुछ ही समय का उनके पास समय होता है इस पीहू कुछ नहीं कर पाती शिवाय का सामना करके और मृत्यु से जो हर एक इंसान है वह चाहिए क्योंकि जिसका जन्म है कि मृत्यु निश्चित यही रंगमंच है दुनिया यह दुनिया एक रंगमंच है और हम सब उनके किरदार हैं सब अपने-अपने सोच अपनी-अपनी बुद्धि और अपने अपने दिमाग से अपना रोल अदा करते हैं और कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी को जैसे एक्सीडेंट हो गया और वह इंसान बच जाता है तब उसे भी अब भी वह बच्चे खेलने में से वापस आया तब भी उसके जीवन में सीता युवक पहुंचा हो जाता है और कभी-कभी किस्तों में भी देखा गया है कि जब किसी को अटैक आता है रुपए का होता है और उनका से बंद हो जाता है करीबन 30 40 50 सेकंड के लिए जूते बंद हो जाता है और जो लाइफ सेविंग जो मैसेज है जो हृदय को पंपिंग किया जाता है सेक्स किया जाता है उसमें उनका जीवन जीना और जीवन अच्छी तरह जीना वही हमको सीखना चाहिए कि हम जीवन को कैसे अच्छी तरह से मरना तो सबको एक दिन है लेकिन मरने के बाद लोग उन्हें अपने कर्मों से याद रखें वही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि धन्यवाद जय हिंद

vikat mrityu ka anubhav ko kaise badal deta hai log dubte hain unhe so jata hai ki sab log ko yah paas bhi hota lekin kuch kuch logo ko ehsaas ho jata hai ko dimag mein aisi baat aa jaati hai ki bus ab main zyada din ka mehmaan nahi aur waise logo ko aisa vichar aata hai saada sakta hai waise logo ko ta hai jinhone aajivan acche karm kiye hue logo ki bhalai ki ho bahut se logo ke aankho ke aasu poche apne dhan ka sadupyog kiya apne parivar ka bhi bhala kiya aur prabhu ka naam diya ho bhagwan ki bhakti ki ho aur aadhyatmikta unke man mein dimag mein jo hoti toh kudarati roop purvabhas ho jata hai aur iske alava jo log hain jo kabhi bhalai ka kaam nahi karte hain ya khaali kaam log logo ko unki mrityu kab aa jaati hai paas mein unko jab gyaat hota hai toh us kuch hi samay ka unke paas samay hota hai is pihu kuch nahi kar pati shivay ka samana karke aur mrityu se jo har ek insaan hai vaah chahiye kyonki jiska janam hai ki mrityu nishchit yahi rangamanch hai duniya yah duniya ek rangamanch hai aur hum sab unke kirdaar hain sab apne apne soch apni apni buddhi aur apne apne dimag se apna roll ada karte hain aur kabhi kabhi aisa bhi hota hai ki kisi ko jaise accident ho gaya aur vaah insaan bach jata hai tab use bhi ab bhi vaah bacche khelne mein se wapas aaya tab bhi uske jeevan mein sita yuvak pohcha ho jata hai aur kabhi kabhi kiston mein bhi dekha gaya hai ki jab kisi ko attack aata hai rupaye ka hota hai aur unka se band ho jata hai kariban 30 40 50 second ke liye joote band ho jata hai aur jo life saving jo massage hai jo hriday ko pumping kiya jata hai sex kiya jata hai usme unka jeevan jeena aur jeevan achi tarah jeena wahi hamko sikhna chahiye ki hum jeevan ko kaise achi tarah se marna toh sabko ek din hai lekin marne ke baad log unhe apne karmon se yaad rakhen wahi jeevan ki sabse badi upalabdhi dhanyavad jai hind

विकट मृत्यु का अनुभव को कैसे बदल देता है लोग डूबते हैं उन्हें सो जाता है कि सब लोग को यह प

Romanized Version
Likes  58  Dislikes    views  1089
WhatsApp_icon
user

Rasbihari Pandey

लेखन / कविता पाठ

0:25
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मृत्यु समीप आ गई है यह जानकर बहुत सारे लोग अपने दुश्मनों को याद करने लगते हैं और पछताने लगते हैं कि हाय मैंने बहुत गलत किया तो पश्चाताप की वजह से लोगों का व्यवहार बहुत कुछ बदल जाता है और वह कुछ अच्छा कर्म करने लगते हैं यह बात है

mrityu sameep aa gayi hai yah jaankar bahut saare log apne dushmano ko yaad karne lagte hain aur pachtane lagte hain ki hi maine bahut galat kiya toh pashchaataap ki wajah se logo ka vyavhar bahut kuch badal jata hai aur vaah kuch accha karm karne lagte hain yah baat hai

मृत्यु समीप आ गई है यह जानकर बहुत सारे लोग अपने दुश्मनों को याद करने लगते हैं और पछताने लग

Romanized Version
Likes  14  Dislikes    views  236
WhatsApp_icon
user

Harish Chand

Social Worker

1:06
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों कैसे बनता है जब किसी व्यक्ति की मृत्यु निकट आती है तो उसको पूर्व आभास हो जाता है तो उसके अंदर आप देखोगे कि चेंजिंग आ गई है बहुत से लोग तुम हो के कारण अपने बच्चों को पुकारते हैं बहुत से लोग जिनको मृत्यु का आभास होता है अपने आसपास के सिस्टम में देखोगे कि किसी को मृत्यु का आभास होना क्या किसी की मृत्यु होने वाली है या हुई है तो आप देखोगे कि आसपास के लोगों बदल जाते हैं किस जीवन में कुछ साथ नहीं जाना अगर कुछ साथ जाएगा तो वह हमारे कर्म जाएंगे तो इस चीज को देख कर के ही लोगों का जीवन चेंज हो जाता है उनके जीवन में बहुत बड़ा परी क्या बदलाव देखने को मिलता है ठीक है मित्र

nikat mrityu ka anubhav logo kaise banta hai jab kisi vyakti ki mrityu nikat aati hai toh usko purv aabhas ho jata hai toh uske andar aap dekhoge ki changing aa gayi hai bahut se log tum ho ke karan apne baccho ko pukarte hain bahut se log jinako mrityu ka aabhas hota hai apne aaspass ke system mein dekhoge ki kisi ko mrityu ka aabhas hona kya kisi ki mrityu hone wali hai ya hui hai toh aap dekhoge ki aaspass ke logo badal jaate hain kis jeevan mein kuch saath nahi jana agar kuch saath jaega toh vaah hamare karm jaenge toh is cheez ko dekh kar ke hi logo ka jeevan change ho jata hai unke jeevan mein bahut bada pari kya badlav dekhne ko milta hai theek hai mitra

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों कैसे बनता है जब किसी व्यक्ति की मृत्यु निकट आती है तो उसको पूर्

Romanized Version
Likes  53  Dislikes    views  152
WhatsApp_icon
user
1:13
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है निखत मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदलते पाए इसके लिए आपको सिर्फ और कुछ नहीं सुनना चाहिए एक छोटा से प्रयोग के श्मशान घाट में जाएं और वहां पर जो चिता पर बैठा हुआ लिखा हुआ होता है पहले तो उस पूरे कि राष्ट्रपति को कैसे आया कैसे मिटाया अक्षर लिखने वाली हो यह पहले देख कर अपनी आंखें बंद करके अनुभव करो कि यह सब मेरे पर हो रहा है जब विचार ऐसा होता जाएगा होता जाएगा तो फिर एकदम ऐसा लगे जब उसको आग लगेगी तो ऐसा लगेगा मेरे सभी में प्यार ना किया तो ऐसे करते-करते जब आपको पता पड़ेगा कि क्या हुआ वह फिर आपका आपसे जब हर श्मशान घाट से जब निकलोगे तो पहले जो आदमी थे अब दूसरे आओगे क्योंकि खुद पर प्रयोग करना पड़ता है दूसरे के अनुभवों से नहीं आता है

aapka prashna hai nikhat mrityu ka anubhav logo ko kaise badalte paye iske liye aapko sirf aur kuch nahi sunana chahiye ek chota se prayog ke shmashan ghat mein jayen aur wahan par jo chita par baitha hua likha hua hota hai pehle toh us poore ki rashtrapati ko kaise aaya kaise mitaya akshar likhne wali ho yah pehle dekh kar apni aankhen band karke anubhav karo ki yah sab mere par ho raha hai jab vichar aisa hota jaega hota jaega toh phir ekdam aisa lage jab usko aag lagegi toh aisa lagega mere sabhi mein pyar na kiya toh aise karte karte jab aapko pata padega ki kya hua vaah phir aapka aapse jab har shmashan ghat se jab nikloge toh pehle jo aadmi the ab dusre aaoge kyonki khud par prayog karna padta hai dusre ke anubhavon se nahi aata hai

आपका प्रश्न है निखत मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदलते पाए इसके लिए आपको सिर्फ और कुछ नही

Romanized Version
Likes  127  Dislikes    views  1046
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे विचार से यह दुनिया में जो आया है उसको दुनिया के वापस जाना है और इस दुनिया में जो वह शुभ होता है शुभ कार्य करता है वह उस भगवान की दी हुई ईश्वर केरला की दी हुई नियमित है जो है कहना चाहिए जो उसकी दी हुई दुनिया की तमाम चीजें जो उसने इंसान के लिए पैदा की है उसको उठाने के बाद वापस जाने के बाद उसको अपने भगवान को यह बताना है कि उसने उन चीजों का क्या इस्तेमाल किया और जिंदगी का सफाई कैसे पैसा पैदा किया उसका खर्चा किया गरीबों की मदद की या निस्सहाय का सहारा दिया यह सारी चीजें जो है वह हमें अनुशासन की ओर ले जाती है और हमारी जिंदगी सामाजिक आर्थिक सोशल हरे क्षेत्र में स्वस्थ और स्वतंत्र और मैंने चाहिए अनुशासनात्मक तौर पर स्थित

mere vichar se yah duniya me jo aaya hai usko duniya ke wapas jana hai aur is duniya me jo vaah shubha hota hai shubha karya karta hai vaah us bhagwan ki di hui ishwar kerala ki di hui niyamit hai jo hai kehna chahiye jo uski di hui duniya ki tamaam cheezen jo usne insaan ke liye paida ki hai usko uthane ke baad wapas jaane ke baad usko apne bhagwan ko yah batana hai ki usne un chijon ka kya istemal kiya aur zindagi ka safaai kaise paisa paida kiya uska kharcha kiya garibon ki madad ki ya nissahaye ka sahara diya yah saari cheezen jo hai vaah hamein anushasan ki aur le jaati hai aur hamari zindagi samajik aarthik social hare kshetra me swasth aur swatantra aur maine chahiye anushasnatmak taur par sthit

मेरे विचार से यह दुनिया में जो आया है उसको दुनिया के वापस जाना है और इस दुनिया में जो वह श

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  93
WhatsApp_icon
Likes  82  Dislikes    views  1473
WhatsApp_icon
user
0:36
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकट मृत्यु का अनमोल जैसे लोगों को सत्य के रास्ते पर और ईश्वर के शरण में जाने का है यह लोग मुझे पत्रिका कर लेते हैं उन सब के रास्ते पर चलना चाहिए और ईश्वर की शरण में हमें आनंद की प्राप्ति होती है तो ईश्वर की उपासना आराधना भक्ति आदि के माध्यम से अपने जीवन को श्रेष्ठ करो सफल बनाना चाहिए तो ऐसा ही है अक्सर यही होता थैंक यू धन्यवाद

nikat mrityu ka anmol jaise logo ko satya ke raste par aur ishwar ke sharan me jaane ka hai yah log mujhe patrika kar lete hain un sab ke raste par chalna chahiye aur ishwar ki sharan me hamein anand ki prapti hoti hai toh ishwar ki upasana aradhana bhakti aadi ke madhyam se apne jeevan ko shreshtha karo safal banana chahiye toh aisa hi hai aksar yahi hota thank you dhanyavad

निकट मृत्यु का अनमोल जैसे लोगों को सत्य के रास्ते पर और ईश्वर के शरण में जाने का है यह लोग

Romanized Version
Likes  15  Dislikes    views  373
WhatsApp_icon
user
2:07
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है लिखे इंसान को यह तो वशी ज्ञात होता है कि जन्म लिया है तो मृत्यु क्या होता है कि चनिया अननोन समय पर मृत्यु आ जाती है तुम मुझसे खुश चीज का कोई पता नहीं होता है कि शुरू हो जाती है बुढ़ापा होना शुरू हो जाता है या किसी बीमारी के चलते हुए इंसान को लगता है कि अभी नहीं समय मेरे पास एक कार है जो साल में 6 महीने हैं ऐसी कोई बीमारी लग जाती और बुढ़ापे के समय भी होता ही है मनुष्य को भी पता नहीं कब अब 8090 साल क्रॉस कर गए हैं तो सब भगवान का बुलावा आ जाए ऐसी स्थिति में मनुष्य को यह पता है कि आप मेरे जाने के दिन आ रहे हैं तो उस समय जब आदमी का जो है वह भी एक बार अवश्य ही बदल जाता है वह सब के प्रति थोड़ा नॉर्मल सा अलार्म दिन का होना शुरू हो जाता है अपने बच्चे हैं रिश्तेदार है भाई बहन हैं पति-पत्नी का जो है क्या होती है यह सोचता है कश्यप रिश्ते को निभाने के लिए कुछ ज्यादा कुछ कर पाता वह अपनी पुरानी है जो भी बातें हैं गलतियां हम को दोहराते हुए बहुत ज्यादा अपने अपने ही रोता है इसलिए यह जरूर शाम को कि वर्तमान में हमेशा किसी को दुख ना दें क्योंकि जब मृत्यु का जो अनुभव है वह बहुत अनोखा है और आनी तो होती ही है मृत्यु सबको एक लाइक उस दौर से गुजरना होता है तो वह बड़ा भया भेज एक्सपीरियंस अपने आप में ही एक दिल दहलाने वाला सोच है अनुभव

nikat mrityu ka anubhav logo ko kaise badal deta hai likhe insaan ko yah toh vashi gyaat hota hai ki janam liya hai toh mrityu kya hota hai ki chaniya unknown samay par mrityu aa jaati hai tum mujhse khush cheez ka koi pata nahi hota hai ki shuru ho jaati hai budhapa hona shuru ho jata hai ya kisi bimari ke chalte hue insaan ko lagta hai ki abhi nahi samay mere paas ek car hai jo saal me 6 mahine hain aisi koi bimari lag jaati aur budhape ke samay bhi hota hi hai manushya ko bhi pata nahi kab ab 8090 saal cross kar gaye hain toh sab bhagwan ka bulava aa jaaye aisi sthiti me manushya ko yah pata hai ki aap mere jaane ke din aa rahe hain toh us samay jab aadmi ka jo hai vaah bhi ek baar avashya hi badal jata hai vaah sab ke prati thoda normal sa alarm din ka hona shuru ho jata hai apne bacche hain rishtedar hai bhai behen hain pati patni ka jo hai kya hoti hai yah sochta hai kashyap rishte ko nibhane ke liye kuch zyada kuch kar pata vaah apni purani hai jo bhi batein hain galtiya hum ko dohrate hue bahut zyada apne apne hi rota hai isliye yah zaroor shaam ko ki vartaman me hamesha kisi ko dukh na de kyonki jab mrityu ka jo anubhav hai vaah bahut anokha hai aur aani toh hoti hi hai mrityu sabko ek like us daur se gujarana hota hai toh vaah bada bhaya bhej experience apne aap me hi ek dil dahlane vala soch hai anubhav

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों को कैसे बदल देता है लिखे इंसान को यह तो वशी ज्ञात होता है कि ज

Romanized Version
Likes  27  Dislikes    views  443
WhatsApp_icon
user
0:37
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों कैसे बदल देता है यह एक कहानी के माध्यम से बताना चाहूंगा एक ऋषि थे उसने राजा को कहा कि 7 दिनों के साथ में 1 मिनट हो जाएगी आप अच्छे से जी आपने परिवार से मिले तो राजा अच्छे से अपने परिवार से मिलता अच्छे से काम करता तुम अच्छे से पूछा था लेकिन जब किसी के पास आखिरी दिन में पहुंचा कि मेरी मिर्ची आपके समक्ष हो तो ऋषि बोलता क्या की मृत्यु नहीं होगी मैंने झूठ बोला था आप जिंदगी को ऐसे ही चाहिए जो कल है आज है इस जिंदगी को जी अनुवाद

nikat mrityu ka anubhav logo kaise badal deta hai yah ek kahani ke madhyam se batana chahunga ek rishi the usne raja ko kaha ki 7 dino ke saath me 1 minute ho jayegi aap acche se ji aapne parivar se mile toh raja acche se apne parivar se milta acche se kaam karta tum acche se poocha tha lekin jab kisi ke paas aakhiri din me pohcha ki meri mirchi aapke samaksh ho toh rishi bolta kya ki mrityu nahi hogi maine jhuth bola tha aap zindagi ko aise hi chahiye jo kal hai aaj hai is zindagi ko ji anuvad

निकट मृत्यु का अनुभव लोगों कैसे बदल देता है यह एक कहानी के माध्यम से बताना चाहूंगा एक ऋषि

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  132
WhatsApp_icon
user

Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

1:35
Play

Likes  84  Dislikes    views  1322
WhatsApp_icon
user
1:29
Play

Likes  24  Dislikes    views  415
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!