मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है - ईश्वर या भोजन?...


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mohit

8307747204 Founder Abhyasa Yogshala

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ऐसे और सवाल
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Vinita Rastogi

Career Counsellor / Life Coach

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Ankur Kanwar

Yoga Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सबसे पहले तो भोजन यह तो रिक्वायरमेंट है शरीर की तो वह तो इंपॉर्टेंट है या मगर पेट भर गया उसके बाद क्या करोगे उसके बाद भी तो कुछ करना होगा ईश्वर भी ईश्वर तो सबसे इंपॉर्टेंट है वैसे सच में मगर सर्वाइकल के लिए भोजन जरूरी है और एक बार जब पेट भर जाए अच्छे से भोजन कर लिया आपने तो फिर ईश्वर की प्राप्ति के लिए भी उपाय करो

sabse pehle toh bhojan yah toh requirement hai sharir ki toh vaah toh important hai ya magar pet bhar gaya uske baad kya karoge uske baad bhi toh kuch karna hoga ishwar bhi ishwar toh sabse important hai waise sach me magar cervical ke liye bhojan zaroori hai aur ek baar jab pet bhar jaaye acche se bhojan kar liya aapne toh phir ishwar ki prapti ke liye bhi upay karo

सबसे पहले तो भोजन यह तो रिक्वायरमेंट है शरीर की तो वह तो इंपॉर्टेंट है या मगर पेट भर गया उ

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Bharat Bhushan Sharma

Doctorate/Traveller

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे विचार में इस सवाल का उत्तर की मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन बहुत ही सरल है वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए लॉजिकल बारे में सोचा जाए तो इसका एक ही उत्तर हो सकता है वह है भोजन वैज्ञानिक रूप से हम जानते हैं कि शरीर को चलाने के लिए हमें ऊर्जा की जरूरत पड़ती है और ऊर्जा हमें भोजन से ही मिलती है अगर व्यक्ति आर्थिक है आस्तिक व्यक्ति को भी भगवान का स्मरण करने के लिए ध्यान करने के लिए पहले भोजन चाहिए उसको ऊर्जा चाहिए तो इस प्रकार भोजन अपने आप ही महत्वपूर्ण हो जाता है लेकिन अगर हम कुछ पल के लिए यह मान भी लें कि ईश्वर भोजन से अधिक महत्वपूर्ण है तो इसका मतलब शायद ही होगा कि व्यक्ति ईश्वर के बिना जीवित नहीं रह सकता और भोजन के बिना जीवित रह सकता है पर क्या आपने कभी कोई ऐसा उदाहरण देखा है मेरे विचार में तो नहीं देखा होगा क्योंकि मैंने भी कोई ऐसा उदाहरण मैंने नहीं देखा है जहां पर कोई व्यक्ति बिना भोजन के जीवित है केवल ईश्वर के सहारे लेकिन हां इसका विपरीत मैंने जरूर देखा है और शायद आप सब ने भी देखा होगा दुनिया में बहुत सारे लोग हैं जो नास्तिक हैं किसी ईश्वर को नहीं मानते पर फिर भी वह जीवित हैं बहुत सारे देश जहां पर कम्युनिस्ट डिक्टेटरशिप चलती है वह तो नास्तिकता को अपनी स्टेट आईडी मुझे मानते हैं उदाहरण के लिए पीपल रिपब्लिक नॉर्थ कोरिया या फिर भूतपूर्व सोवियत संघ इन देशों ने अपनी स्टेट को नास्तिकता बाद के आधार पर चलाया इन स्टेट्स का ईश्वर में कोई भी विश्वास नहीं रहा क्या ईश्वर में विश्वास नहीं होने के कारण उनका जीवन खतरे में पढ़ा नहीं वह जीवित रहे और आज भी जीवित हैं वह भोजन से अपनी ऊर्जा प्राप्त करते हैं जैसे कि सभी लोग करते हैं जैसे कि आस्तिक व्यक्ति भी करते हैं और वैसे ही जी रहे हैं जैसे कि एक आशिक व्यक्ति जी रहा हो भोजन आस्तिक या नास्तिक में भेज नहीं कर रहा जो बायोकेमिकल रिएक्शंस एक आस्तिक व्यक्ति के शरीर में होती हैं वही बाइक एक नास्तिक व्यक्ति के शरीर में भी होती हैं आस्तिक व्यक्ति को भी जीने के लिए उन्हें ऊर्जा चाहिए और नास्तिक व्यक्ति को भी जीने के लिए और क्या चाहिए इस प्रकार से इसका उत्तर बहुत ही सरल है वह यह है कि मानव जीवन में अगर ईश्वर और भोजन की बात की जाए तो भोजन ही अधिक महत्वपूर्ण है धन्यवाद

mere vichar me is sawaal ka uttar ki manav jeevan me kya adhik mahatvapurna hai ishwar ya bhojan bahut hi saral hai vaigyanik drishti se dekha jaaye logical bare me socha jaaye toh iska ek hi uttar ho sakta hai vaah hai bhojan vaigyanik roop se hum jante hain ki sharir ko chalane ke liye hamein urja ki zarurat padti hai aur urja hamein bhojan se hi milti hai agar vyakti aarthik hai astik vyakti ko bhi bhagwan ka smaran karne ke liye dhyan karne ke liye pehle bhojan chahiye usko urja chahiye toh is prakar bhojan apne aap hi mahatvapurna ho jata hai lekin agar hum kuch pal ke liye yah maan bhi le ki ishwar bhojan se adhik mahatvapurna hai toh iska matlab shayad hi hoga ki vyakti ishwar ke bina jeevit nahi reh sakta aur bhojan ke bina jeevit reh sakta hai par kya aapne kabhi koi aisa udaharan dekha hai mere vichar me toh nahi dekha hoga kyonki maine bhi koi aisa udaharan maine nahi dekha hai jaha par koi vyakti bina bhojan ke jeevit hai keval ishwar ke sahare lekin haan iska viprit maine zaroor dekha hai aur shayad aap sab ne bhi dekha hoga duniya me bahut saare log hain jo nastik hain kisi ishwar ko nahi maante par phir bhi vaah jeevit hain bahut saare desh jaha par communist dictatorship chalti hai vaah toh nastikata ko apni state id mujhe maante hain udaharan ke liye pipal Republic north korea ya phir bhutpurv soviet sangh in deshon ne apni state ko nastikata baad ke aadhar par chalaya in states ka ishwar me koi bhi vishwas nahi raha kya ishwar me vishwas nahi hone ke karan unka jeevan khatre me padha nahi vaah jeevit rahe aur aaj bhi jeevit hain vaah bhojan se apni urja prapt karte hain jaise ki sabhi log karte hain jaise ki astik vyakti bhi karte hain aur waise hi ji rahe hain jaise ki ek aashik vyakti ji raha ho bhojan astik ya nastik me bhej nahi kar raha jo biochemical Reactions ek astik vyakti ke sharir me hoti hain wahi bike ek nastik vyakti ke sharir me bhi hoti hain astik vyakti ko bhi jeene ke liye unhe urja chahiye aur nastik vyakti ko bhi jeene ke liye aur kya chahiye is prakar se iska uttar bahut hi saral hai vaah yah hai ki manav jeevan me agar ishwar aur bhojan ki baat ki jaaye toh bhojan hi adhik mahatvapurna hai dhanyavad

मेरे विचार में इस सवाल का उत्तर की मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन बहु

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Awadhesh Chandravanshi

Motivational Speaker || News Anchor || Journlist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत ही सारगर्भित सवाल आपके द्वारा पूछा गया है मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ऐश्वर्या भोजन मैं बिल्कुल कम शब्दों में कहूं तो ईश्वर रूपी भोजन जो हम सबके लिए बहुत ही आवश्यक है ईश्वर रूपी भोजन कैसे देखिए शरीर के लिए भोजन जरूरी है और आत्मा के लिए ईश्वर जरूरी है ईश्वर में सकारात्मक ईश्वर की यह शरीर रूपी ईश्वर की मूर्ति पूजन आके इस तरह की बात मैं नहीं कर रहा हूं ईश्वर को प्राप्त करने का मतलब होता है स्वयं को प्राप्त करना परमात्मा को प्राप्त करना इसके लिए आपको तमाम किताबें या कई ऐसी संरचना है जिनको आप पढ़ेंगे तो आप समझ जाएंगे लेकिन मैं यही मानना है कि मानव जीवन के लिए ईश्वर रूपी भोजन जरूरी है जितना ही शरीर के लिए भोजन जरूरी है उतना ही आत्मा के लिए परमात्मा जरूरी है और आप जाने अनजाने में कहीं ना कहीं हमेशा ईश्वर रूपी श्रृंगार से आलोकित होते ही होते हैं जैसे मैं कहूं सोना ईश्वर को है क्या ईश्वर को जानना क्या है ईश्वर की उपासना क्या ईश्वर की उपासना आप किससे उपासना है अहम् ब्रह्मास्मि का है इस वाक्य को आपने जरूर सुना होगा तू स्वयं को जानना स्वयं को पहचानना स्वयं की सेवा करना भी आपका कहीं ना कहीं ईश्वर के प्रति ही दायित्व है इस प्रकृति ने ही हमें यह शरीर दिया है और इस शरीर की देखभाल करना भी इस शरीर को भोजन कराना भी आप ईश्वर की उपासना कर रहे हैं लेकिन अगर इसको हम सारिक श्रृंखला में देखें तो यह केवल शब्द का विभेद है बहुत स्पष्ट रूप से है लेकिन समझने में थोड़ी सी परेशानी हो सकती है कि मेरे कहने का तात्पर्य क्या है कि शरीर के लिए भोजन जरूरी है बिल्कुल भोजन जरूरी है शरीर के लिए स्वर्ण ही जरूरी है फिर आप बात समझ जाएगा शरीर के लिए बिल्कुल केवल और सिर्फ और सिर्फ भोजन जरूरी है लेकिन आत्मा के लिए हृदय के लिए मन के लिए चित्र के लिए ईश्वर चुनौती है और दोनों को कहीं मिक्स ने किया जा सकता है होता यह उल्टा है हमारे जीवन में हम आत्मा को मन को भोजन से लगा बैठते हैं कहीं ना कहीं आत्मा और मन से हम भोजन के बारे में सोचते और शरीर से कठिनाई के साथ नंगे पैर कल के सुबह 4:00 बजे उठकर 3:00 बजे नहा कर पूजा अर्चना करके हम उसको ईश्वर में लगाते हैं बिल्कुल उल्टा है शरीर को हम इश्वर में लगाते हैं और मन को हम भोजन में लगाते हैं बल्कि होना क्या चाहिए कि हमारे मन को शरीर में हो मन को हमारे ईश्वर में होना चाहिए और शरीर को हमारे भोजन ना होना चाहिए तो हमारी किसी प्रकार की कोई श्रृंखला नहीं बिगड़ेगी और यह प्राकृतिक चक्र पूर्णरूपेण ईश्वर रूपेण चलता रहेगा बहुत कम शब्दों में मैंने अपनी बात आप को समझाने का प्रयास किया है और उम्मीद है कि मैं अपनी जहां तक समझ थी मेरी वह मैं अपने कम शब्दों में वह कल ऐप के माध्यम से सभी को समझा पाया बहुत-बहुत धन्यवाद

bahut hi saragarbhit sawaal aapke dwara poocha gaya hai manav jeevan me kya adhik mahatvapurna hai aishwarya bhojan main bilkul kam shabdon me kahun toh ishwar rupee bhojan jo hum sabke liye bahut hi aavashyak hai ishwar rupee bhojan kaise dekhiye sharir ke liye bhojan zaroori hai aur aatma ke liye ishwar zaroori hai ishwar me sakaratmak ishwar ki yah sharir rupee ishwar ki murti pujan aake is tarah ki baat main nahi kar raha hoon ishwar ko prapt karne ka matlab hota hai swayam ko prapt karna paramatma ko prapt karna iske liye aapko tamaam kitaben ya kai aisi sanrachna hai jinako aap padhenge toh aap samajh jaenge lekin main yahi manana hai ki manav jeevan ke liye ishwar rupee bhojan zaroori hai jitna hi sharir ke liye bhojan zaroori hai utana hi aatma ke liye paramatma zaroori hai aur aap jaane anjaane me kahin na kahin hamesha ishwar rupee shringar se alokit hote hi hote hain jaise main kahun sona ishwar ko hai kya ishwar ko janana kya hai ishwar ki upasana kya ishwar ki upasana aap kisse upasana hai aham brahmasmi ka hai is vakya ko aapne zaroor suna hoga tu swayam ko janana swayam ko pahachanana swayam ki seva karna bhi aapka kahin na kahin ishwar ke prati hi dayitva hai is prakriti ne hi hamein yah sharir diya hai aur is sharir ki dekhbhal karna bhi is sharir ko bhojan krana bhi aap ishwar ki upasana kar rahe hain lekin agar isko hum sarik shrinkhala me dekhen toh yah keval shabd ka vibhed hai bahut spasht roop se hai lekin samjhne me thodi si pareshani ho sakti hai ki mere kehne ka tatparya kya hai ki sharir ke liye bhojan zaroori hai bilkul bhojan zaroori hai sharir ke liye swarn hi zaroori hai phir aap baat samajh jaega sharir ke liye bilkul keval aur sirf aur sirf bhojan zaroori hai lekin aatma ke liye hriday ke liye man ke liye chitra ke liye ishwar chunauti hai aur dono ko kahin mix ne kiya ja sakta hai hota yah ulta hai hamare jeevan me hum aatma ko man ko bhojan se laga baithate hain kahin na kahin aatma aur man se hum bhojan ke bare me sochte aur sharir se kathinai ke saath nange pair kal ke subah 4 00 baje uthakar 3 00 baje naha kar puja archna karke hum usko ishwar me lagate hain bilkul ulta hai sharir ko hum ishvar me lagate hain aur man ko hum bhojan me lagate hain balki hona kya chahiye ki hamare man ko sharir me ho man ko hamare ishwar me hona chahiye aur sharir ko hamare bhojan na hona chahiye toh hamari kisi prakar ki koi shrinkhala nahi bigdegi aur yah prakirtik chakra poornroopen ishwar rupen chalta rahega bahut kam shabdon me maine apni baat aap ko samjhane ka prayas kiya hai aur ummid hai ki main apni jaha tak samajh thi meri vaah main apne kam shabdon me vaah kal app ke madhyam se sabhi ko samjha paya bahut bahut dhanyavad

बहुत ही सारगर्भित सवाल आपके द्वारा पूछा गया है मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ऐश्वर

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mr Balkrishana

Yoga Trainer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मानव जीवन में क्या अत्यधिक महत्वपूर्ण ईश्वर या भोजन लेकिन मानव जीवन जीने के लिए अधिक जो महत्वपूर्ण है वह हमारा शरीर है हमारा शरीर अगर नहीं रहेगा तो हम क्या ईश्वर का करेंगे क्या भोजन के दिन के भोजन करण तो तब करेंगे जब हमारा शरीर भगवान की आराधना तब करेंगे जब हमारा शरीर लेगा बखान की बत्ती तब करेंगे जब हमारा शरीर ले जब हमारा शरीर नहीं रहेगा तो ना ही हम भोजन ग्रहण कर सकते हैं ना हम भक्ति कर सकते हैं भगवान की मानव जीवन जीने के लिए शरीर का स्वस्थ होना अत्यधिक महत्वपूर्ण है धन्यवाद

manav jeevan me kya atyadhik mahatvapurna ishwar ya bhojan lekin manav jeevan jeene ke liye adhik jo mahatvapurna hai vaah hamara sharir hai hamara sharir agar nahi rahega toh hum kya ishwar ka karenge kya bhojan ke din ke bhojan karan toh tab karenge jab hamara sharir bhagwan ki aradhana tab karenge jab hamara sharir lega bakhan ki batti tab karenge jab hamara sharir le jab hamara sharir nahi rahega toh na hi hum bhojan grahan kar sakte hain na hum bhakti kar sakte hain bhagwan ki manav jeevan jeene ke liye sharir ka swasth hona atyadhik mahatvapurna hai dhanyavad

मानव जीवन में क्या अत्यधिक महत्वपूर्ण ईश्वर या भोजन लेकिन मानव जीवन जीने के लिए अधिक जो मह

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DR. MANISH

MULTI TASKER & DR.M.D (A.M.), B-PHARMA, PGDM-M

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देख लो तुम्हारा सवाल है कि मानव के जीवन में महत्वपूर्ण ज्यादा क्या है ईश्वर है यह भोजन है तो सबसे पहले तुम ही समझो के शरीर का भोजन है आटा दाल चावल चीनी निगम खाते हैं और ईश्वर का भजन ए भजन ओर ही बात महत्वपूर्ण की देखो मैं तुम दोनों होते हैं क्योंकि ईश्वर ने ही भोजन को बनाया है ईश्वर नहीं मोनू को बनाया है यह मानव भोजन का भक्षण करता है और ईश्वर का गुणगान करता है इसमें कहानी है जो मैं तुम्हें सुनाना चाहूंगा इससे तुम्हें बिल्कुल स्पष्ट समझ में आ जाएगा कि ईश्वर महत्वपूर्ण आइए भोजन में तू एक बार तुम्हारी रानी पूछे तो इसका मतलब है ईश्वर की चीज पर शक है ऐसे क्या हुआ एक बार एक आदमी ने विचार लगाया कि मुझे भगवान का भगत बनना चाहिए और इंसान इतना कुछ व्यापारी है कि वह हमेशा अपने लाभ हानि का ध्यान पहले रखता है अब उस आदमी ने सोचा मन ही मन विचार लगाया करो भगवान का भगत तो उसमें याद करा भगवान प्रकट हो गए सतयुग का टाइम था आरती भगवान और बोलो बताओ भगवान जी जो आपका इस संसार में सबसे प्रिय भगत है उसके दर्शन कर रहे हैं उससे मिलना है उसके बाद ही भक्ताई करूंगा और मुनव्वर पुरानी जगह चला जो जंगल में वहां पर हो मेरा भरोसा मकाजो सबसे मेरा तगड़ा भगत हो मिलेगा और प्रभु गायब हो गया उस आदमी ने बैठे-बैठे विचार लगाया प्रभु का महत्त्व जंगल में का सोने का महल होगा नौकरशाह करदाशियां पकवान सोने की थाली भगवान खाता होगा मैं तो उसने विचार लगा दिया पूरा क्रिप्टो करेंसी खाना-पीना महल अटारी समिति आदमी वहां पर कपड़े फटे हुए हैं और पानी पानी पानी आंखें खुली आंखों चंद्र से आंसू बह रहे हैं और वह चला रहा पानी पानी पानी और आदमी गया था वह तो यह सोचेगा कि भगवान के भगत दोहे सबसे बड़ी है वह पैसे वाला होगा ऐसो आराम में रहता होगा महलों में रहता होगा यहां देखा तुझे तो फिर टीचर है इसके पास तो पीने का पानी नहीं है मरने को हो रही है तो और यहां को पानी पिलाने वाला भी नहीं है उसे श्रद्धा डोली शरदा हिल गई दिमाग घूम गया रे तू मत बनो का चिल्ला नहीं तो तेरी ऐसी तैसी हो जाएगी फिर उसने आदमी को पानी पिला दो घूमते बच्चों का दो ना बनाकर कहीं से पानी कट्ठा करके नदी में से लाया इतने में देखा तो आदमी मर गया फिर उसने भी करने लग गया क्योंकि उनसे काफी है अब उसने चिल्लाया हे भगवान इतने कैसा न्याय है अब न बदल दे पानी पानी पीने दिया मार दिया लकड़ी लेगा इतने आगे भगवान प्रकट हो गए और कुछ समझ में नहीं आया तुम्हारा तो फिर भगवान ने भगवान जी का लीला है भगवान की व्रत तूने तो इसकी शरीर की प्यास देखी है लेकिन दोस्त आंखों से आंसू भर दो भगवान से इसका मिलन हो गया इसकी जो हो प्यास थी भगवान से मिलने की वह समाप्त होगी इस खुशी के आंसू भरे थे बल्ब फिर इसके लाभ देने के लिए जा रहा था लकड़ी ले गया भगवान रखवाली है उसको तेरी लकड़ी की जरूरत नहीं है उसको अपने पास उसने अपने बंदों के लिए पहले बनवा दिया तुम समझदार हो समझ जाना इस बात को और ध्यान रखना पड़ा धन्यवाद

dekh lo tumhara sawaal hai ki manav ke jeevan me mahatvapurna zyada kya hai ishwar hai yah bhojan hai toh sabse pehle tum hi samjho ke sharir ka bhojan hai atta daal chawal chini nigam khate hain aur ishwar ka bhajan a bhajan aur hi baat mahatvapurna ki dekho main tum dono hote hain kyonki ishwar ne hi bhojan ko banaya hai ishwar nahi monu ko banaya hai yah manav bhojan ka bhakshan karta hai aur ishwar ka gunagan karta hai isme kahani hai jo main tumhe sunana chahunga isse tumhe bilkul spasht samajh me aa jaega ki ishwar mahatvapurna aaiye bhojan me tu ek baar tumhari rani pooche toh iska matlab hai ishwar ki cheez par shak hai aise kya hua ek baar ek aadmi ne vichar lagaya ki mujhe bhagwan ka bhagat banna chahiye aur insaan itna kuch vyapaari hai ki vaah hamesha apne labh hani ka dhyan pehle rakhta hai ab us aadmi ne socha man hi man vichar lagaya karo bhagwan ka bhagat toh usme yaad kara bhagwan prakat ho gaye satayug ka time tha aarti bhagwan aur bolo batao bhagwan ji jo aapka is sansar me sabse priya bhagat hai uske darshan kar rahe hain usse milna hai uske baad hi bhaktai karunga aur munavwar purani jagah chala jo jungle me wahan par ho mera bharosa makajo sabse mera tagada bhagat ho milega aur prabhu gayab ho gaya us aadmi ne baithe baithe vichar lagaya prabhu ka mahatva jungle me ka sone ka mahal hoga naukarashah karadashiyan pakvaan sone ki thali bhagwan khaata hoga main toh usne vichar laga diya pura crypto currency khana peena mahal atari samiti aadmi wahan par kapde phate hue hain aur paani paani paani aankhen khuli aakhon chandra se aasu wah rahe hain aur vaah chala raha paani paani paani aur aadmi gaya tha vaah toh yah sochega ki bhagwan ke bhagat dohe sabse badi hai vaah paise vala hoga aiso aaram me rehta hoga mahalon me rehta hoga yahan dekha tujhe toh phir teacher hai iske paas toh peene ka paani nahi hai marne ko ho rahi hai toh aur yahan ko paani pilane vala bhi nahi hai use shraddha doli sardar hil gayi dimag ghum gaya ray tu mat bano ka chilla nahi toh teri aisi taisi ho jayegi phir usne aadmi ko paani pila do ghumte baccho ka do na banakar kahin se paani kattha karke nadi me se laya itne me dekha toh aadmi mar gaya phir usne bhi karne lag gaya kyonki unse kaafi hai ab usne chillaya hai bhagwan itne kaisa nyay hai ab na badal de paani paani peene diya maar diya lakdi lega itne aage bhagwan prakat ho gaye aur kuch samajh me nahi aaya tumhara toh phir bhagwan ne bhagwan ji ka leela hai bhagwan ki vrat tune toh iski sharir ki pyaas dekhi hai lekin dost aakhon se aasu bhar do bhagwan se iska milan ho gaya iski jo ho pyaas thi bhagwan se milne ki vaah samapt hogi is khushi ke aasu bhare the bulb phir iske labh dene ke liye ja raha tha lakdi le gaya bhagwan rakhawali hai usko teri lakdi ki zarurat nahi hai usko apne paas usne apne bando ke liye pehle banwa diya tum samajhdar ho samajh jana is baat ko aur dhyan rakhna pada dhanyavad

देख लो तुम्हारा सवाल है कि मानव के जीवन में महत्वपूर्ण ज्यादा क्या है ईश्वर है यह भोजन है

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Dr Bhanu Shrivastav

Author, Astrologer, Spiritual Guru

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मानव जीवन में दोनों का बहुत अधिक महत्व एवं धर्म के माध्यम से जीवन के मार्ग प्रशस्त करता है और तीन तरीकों से जिससे जीवन तरीकों में से माना जाता है धर्म में जीवन की सही राह दिखाता है जो कि भोजन हमारी बहुत आवश्यकता है भोजन के बिना जीवन को किसी के दोनों अपनी-अपनी स्थान उत्तर प्रदेश वन निगम के लिए भोजन करें

manav jeevan me dono ka bahut adhik mahatva evam dharm ke madhyam se jeevan ke marg prashast karta hai aur teen trikon se jisse jeevan trikon me se mana jata hai dharm me jeevan ki sahi raah dikhaata hai jo ki bhojan hamari bahut avashyakta hai bhojan ke bina jeevan ko kisi ke dono apni apni sthan uttar pradesh van nigam ke liye bhojan kare

मानव जीवन में दोनों का बहुत अधिक महत्व एवं धर्म के माध्यम से जीवन के मार्ग प्रशस्त करता है

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Manish Bhati

Life Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार जैसा कि मैंने आपको क्वेश्चन को पढ़ा आफ कॉशन बहुत दिलचस्प ले ईश्वर या भोजन और दोनों ही अपनी अपनी जरूरतों के अनुसार बहुत जरूरी है इन दोनों बातों के लिए मैं आपको क्लियर करना चाहता हूं कर्म और धर्म कर्म क्या भोजन कमा सकते हैं खा सकते हैं परिवार का पालन पोषण धर्म से आप भगवान का विश्वास कर सकते हैं पूजा पाठ कर सकते हैं तो जीवन जीने के लिए या मानव जीवन जीने के लिए दोनों चीजों की अति आवश्यक है धन्यवाद

namaskar jaisa ki maine aapko question ko padha of caution bahut dilchasp le ishwar ya bhojan aur dono hi apni apni jaruraton ke anusaar bahut zaroori hai in dono baaton ke liye main aapko clear karna chahta hoon karm aur dharm karm kya bhojan kama sakte hain kha sakte hain parivar ka palan poshan dharm se aap bhagwan ka vishwas kar sakte hain puja path kar sakte hain toh jeevan jeene ke liye ya manav jeevan jeene ke liye dono chijon ki ati aavashyak hai dhanyavad

नमस्कार जैसा कि मैंने आपको क्वेश्चन को पढ़ा आफ कॉशन बहुत दिलचस्प ले ईश्वर या भोजन और दोनों

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Ramesh Bait

Astrologer & Spiritual Healer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ईश्वर और भोजन दोनों का महत्व है क्योंकि ईश्वरी आपको भोजन दिलाता है सृष्टि में वनस्पति निर्माण करता है अच्छे अच्छे फल आते हैं ईश्वर की कृपा से और आपको खा सकते हो मुझे मान लो आप ने उपवास कर लिया ईश्वर के लिए अभी आप कुछ नहीं खा रहे हो एक वक्त आएगा आप इश्वर को भूल जाओगे और आप भूख से तेल मिल आओगे और आपको ईश्वर से रोटी में नजर आएगा जब तक रूठी भगवान का ध्यान करोगे तो आपको रोटी दिखेगी सब्जी दिखेगी चावल दिखेगा फल देखेंगे कि वह चीज अधिक ज्यादा चाहिए रहेगी जिंदा रहने के लिए इसलिए दोनों ईश्वर मन को शांत करता है भोजन शरीर की भूख मिटाता तुम मुझे शरीर के लिए भोजन चाहिए और मन के लिए ईश्वर चाहिए और जीवन मन और शरीर दोनों से बनता है जीवन का मतलब सिर्फ शरीर नहीं है यह जीवन का मतलब सिर्फ मन नहीं है और शरीर आना हो तो मन क्या करेगा अरमान है और शरीर नहीं है तो भी प्रॉब्लम है और शरीर है और मन ही नहीं है कुछ पता ही नहीं चल रहा है कोई कोमा में आदमी पढ़ा रहे थे वैसे रहेगा मानव जीवन में अधिक महत्वपूर्ण है दोनों है भोजन भी है और ईश्वर भी है दोनों की इंपोर्ट दोनों का इंपॉर्टेंट है हर वक्त हर चीज को जब चाहिए तब हमें जो चीज ज्यादा अच्छी लगती है यह जो उस वक्त चाहिए रहती है उसको हमको इंपॉर्टेंट देना चाहिए धन्यवाद

ishwar aur bhojan dono ka mahatva hai kyonki ISHWARI aapko bhojan dilata hai shrishti me vanaspati nirmaan karta hai acche acche fal aate hain ishwar ki kripa se aur aapko kha sakte ho mujhe maan lo aap ne upvaas kar liya ishwar ke liye abhi aap kuch nahi kha rahe ho ek waqt aayega aap ishvar ko bhool jaoge aur aap bhukh se tel mil aaoge aur aapko ishwar se roti me nazar aayega jab tak ruthi bhagwan ka dhyan karoge toh aapko roti dikhegi sabzi dikhegi chawal dikhega fal dekhenge ki vaah cheez adhik zyada chahiye rahegi zinda rehne ke liye isliye dono ishwar man ko shaant karta hai bhojan sharir ki bhukh mitata tum mujhe sharir ke liye bhojan chahiye aur man ke liye ishwar chahiye aur jeevan man aur sharir dono se banta hai jeevan ka matlab sirf sharir nahi hai yah jeevan ka matlab sirf man nahi hai aur sharir aana ho toh man kya karega armaan hai aur sharir nahi hai toh bhi problem hai aur sharir hai aur man hi nahi hai kuch pata hi nahi chal raha hai koi coma me aadmi padha rahe the waise rahega manav jeevan me adhik mahatvapurna hai dono hai bhojan bhi hai aur ishwar bhi hai dono ki import dono ka important hai har waqt har cheez ko jab chahiye tab hamein jo cheez zyada achi lagti hai yah jo us waqt chahiye rehti hai usko hamko important dena chahiye dhanyavad

ईश्वर और भोजन दोनों का महत्व है क्योंकि ईश्वरी आपको भोजन दिलाता है सृष्टि में वनस्पति निर

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Dr. Ved Parkash Agarwal

Orthopaedic Surgeon

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इसको मैं ऐसे जाकर करूंगा ईश्वर का मतलब मानसिक स्थिति हम कैसे सोच रहे हैं कैसे प्रसन्न है या में दिखाई नहीं दे रही भोजन का मतलब चीजें दिखाई दे दी है मेरा आप लोगों से जो शुरू कर दी है इंसानों के लिए हमारी ईश्वरी फैक्ट्री जीवन के लिए दोनों ही चीजें अगर शरीर नहीं होगा तो मन नहीं होगा बंद नहीं होगा तो आत्मा कहां जाएगी और हम सोच नहीं सकते तो भोजन जरूरी है उस दिन में अगर आत्मा नहीं होगी हम खुश लगी होंगे दूसरी बीवी हो तो दोनों चीजें जरूरी है

isko main aise jaakar karunga ishwar ka matlab mansik sthiti hum kaise soch rahe hain kaise prasann hai ya me dikhai nahi de rahi bhojan ka matlab cheezen dikhai de di hai mera aap logo se jo shuru kar di hai insano ke liye hamari ISHWARI factory jeevan ke liye dono hi cheezen agar sharir nahi hoga toh man nahi hoga band nahi hoga toh aatma kaha jayegi aur hum soch nahi sakte toh bhojan zaroori hai us din me agar aatma nahi hogi hum khush lagi honge dusri biwi ho toh dono cheezen zaroori hai

इसको मैं ऐसे जाकर करूंगा ईश्वर का मतलब मानसिक स्थिति हम कैसे सोच रहे हैं कैसे प्रसन्न है य

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बस कार आपका पसंद है मानव जीवन के लिए क्या महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन देखिए मानव जीवन में ईश्वर तो सदा सदा उसके साथ है जहां तक भोजन की बात है कहीं ना कहीं हमारे को इस शरीर को चलाने के लिए कुछ ऊर्जा चाहिए और इस शरीर को बनाए रखने के लिए जल और भोजन चाहिए इसलिए कुछ प्रश्नों के उत्तर इस तरह से नहीं जा सकते आप कल पूछ सकते हैं कि भोजन ज्यादा जरूरी है या हवा हम बोलेंगे हवा तो आप बोलेंगे हवा जो भी है कि पानी तो यह प्रश्न केवल और केवल दिमागी खेल है और आप उसे खेलते रहेंगे कोई लाभ नहीं होगा धन्यवाद

bus car aapka pasand hai manav jeevan ke liye kya mahatvapurna hai ishwar ya bhojan dekhiye manav jeevan me ishwar toh sada sada uske saath hai jaha tak bhojan ki baat hai kahin na kahin hamare ko is sharir ko chalane ke liye kuch urja chahiye aur is sharir ko banaye rakhne ke liye jal aur bhojan chahiye isliye kuch prashnon ke uttar is tarah se nahi ja sakte aap kal puch sakte hain ki bhojan zyada zaroori hai ya hawa hum bolenge hawa toh aap bolenge hawa jo bhi hai ki paani toh yah prashna keval aur keval dimagi khel hai aur aap use khelte rahenge koi labh nahi hoga dhanyavad

बस कार आपका पसंद है मानव जीवन के लिए क्या महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन देखिए मानव जीवन में

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

5:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन मेरे भाई मेरे प्रिय पहले यह बताइए जब मानव जीवन में अपने पदार्पण किया उस समय सबसे पहले आपको किस चीज की आवश्यकता थी भगवान की या भोजन की जब बच्चा कोई मां के गर्भ से जन्म लेता है बच्चा कोई मां के गर्भ से बाहर जन्म लेता है किसी का भी हो जानवरों का हो इंसान का हो तो उठते ही जन्म लेते ही क्यों भगवान को याद करता है भगवान पर एक सिस्टम है कोई चीज नहीं है भगवान तो एक सिस्टम है भगवान के सिस्टम के द्वारा ही उसका जन्म हुआ है मगर महत्वपूर्ण क्या है वह सिस्टम है सिस्टर महत्वपूर्ण नहीं होता है महत्वपूर्ण होता है जब बच्चा पैदा हुआ पैदा होने के तत्काल बाद आपने देखा होगा कि मां का दूध पीता है वह रोता है भोजन की आवश्यकता होती है उसको पैदा होते ही तुरंत वह रोता है चीखता है चिल्लाता है अब जब जब मां के स्तनों में लग जाता है तो उस शांत हो जाता तुझे प्रारंभ पैदा ही होते समय हमारी महत्वपूर्ण चीज भोजन हो गई तो वही तो विधि पूरे जीवन चलती रहेगी इसमें मतलब क्या हुआ तो प्रश्न पूछा है कि मानव जीवन में अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन भोजन ही महत्वपूर्ण है भोजन करेंगे तभी तो ईश्वर का चिंतन कर सकते हैं जब भोजन नहीं करेंगे शरीर के अंदर परीक्षण होगा शरीर के अंदर ताकत नहीं होगी तो ईश्वर का चिंतन कैसे करेंगे बेकार पड़े रहेंगे निर्जीव से ताकत नहीं ताकत होगी नहीं तो फिर ईश्वर की याद कैसे करेंगे हमने आपको एक बचपन का उदाहरण दिया कि जन्म के बाद बच्चा जन्म लेता है उसके तत्काल पश्चात मां के स्तन से जुड़कर के स्तनपान करके भोजन की प्रक्रिया को पूर्ण करने लगता है होते ही यही आगे पूरे जीवन भर चलता रहता है भले आप भूल जाएं मगर भोजन ही महत्वपूर्ण है अब आगे की दुनिया में लिखा गया है कि एक आदमी माला जप रहा है एक आदमी भूखा है तो फिर उसको ऋषि होने योग्य ने कविता में डाल के लिखा है कि भूखे भजन न होय गोपाला यह लो अपनी कंठी माला भूखे भजन न होय गोपाला परमात्मा का भजन भूखे पेट नहीं हो सकता है तो भोजन महत्वपूर्ण है भोजन ईश्वर और ईश्वर और भोजन में भोजन महत्वपूर्ण नहीं है भोजन महत्वपूर्ण है अब ईश्वर क्या है ईश्वर तो भोजन के पहले भी था और भोजन के बाद भी रहेगा ईश्वर तो है ही है अब उसको अनुभव करने के लिए उसको जानने के लिए तपस्या करने के लिए ध्यान करने के लिए उसको अनुभव करने के लिए क्या आवश्यकता है आवश्यकता है आपकी और आप को जीवित रहने के लिए आवश्यकता है भोजन के इसलिए भोजन महत्वपूर्ण है ईश्वर तो महत्वपूर्ण है ही है उसको तो महत्वपूर्ण और बिना मैं बिना महत्वपूर्ण का का कोई प्रश्न ही नहीं है वह तो आपके जन्म के भोजन के पहले भी था और बाद में मैं भी रहेगा ईश्वर नहीं तो पूरी कायनात बनाई है आप को जन्म दिया है आपको ही नहीं आपकी मां को भी जन्म दिया है आगे भी संस्थान में सब को जन्म देता रहेगा तो ईश्वर तो अलग का विषय हो गया विषय की ईश्वर को अनुभव कैसे किया जा अनुभव करने के लिए बिना भोजन के आपके शरीर में ताकत और बल नहीं होगा और जब शरीर में बाल नहीं होगा तो चिंतन नहीं कर सकते हैं आत्म तत्व का चिंतन ईश्वर का अनुभव ईश्वर की खोज नहीं कर सकते हैं इसके लिए भोजन की आवश्यकता है तभी कहा गया है कि भूखे भजन न होय गोपाला यह लो अपनी कंठी माला

prashna hai manav jeevan me kya adhik mahatvapurna hai ishwar ya bhojan mere bhai mere priya pehle yah bataiye jab manav jeevan me apne padarpan kiya us samay sabse pehle aapko kis cheez ki avashyakta thi bhagwan ki ya bhojan ki jab baccha koi maa ke garbh se janam leta hai baccha koi maa ke garbh se bahar janam leta hai kisi ka bhi ho jaanvaro ka ho insaan ka ho toh uthte hi janam lete hi kyon bhagwan ko yaad karta hai bhagwan par ek system hai koi cheez nahi hai bhagwan toh ek system hai bhagwan ke system ke dwara hi uska janam hua hai magar mahatvapurna kya hai vaah system hai sister mahatvapurna nahi hota hai mahatvapurna hota hai jab baccha paida hua paida hone ke tatkal baad aapne dekha hoga ki maa ka doodh pita hai vaah rota hai bhojan ki avashyakta hoti hai usko paida hote hi turant vaah rota hai chikhta hai chillaata hai ab jab jab maa ke stanon me lag jata hai toh us shaant ho jata tujhe prarambh paida hi hote samay hamari mahatvapurna cheez bhojan ho gayi toh wahi toh vidhi poore jeevan chalti rahegi isme matlab kya hua toh prashna poocha hai ki manav jeevan me adhik mahatvapurna hai ishwar ya bhojan bhojan hi mahatvapurna hai bhojan karenge tabhi toh ishwar ka chintan kar sakte hain jab bhojan nahi karenge sharir ke andar parikshan hoga sharir ke andar takat nahi hogi toh ishwar ka chintan kaise karenge bekar pade rahenge nirjeev se takat nahi takat hogi nahi toh phir ishwar ki yaad kaise karenge humne aapko ek bachpan ka udaharan diya ki janam ke baad baccha janam leta hai uske tatkal pashchat maa ke stan se judakar ke stanpaan karke bhojan ki prakriya ko purn karne lagta hai hote hi yahi aage poore jeevan bhar chalta rehta hai bhale aap bhool jayen magar bhojan hi mahatvapurna hai ab aage ki duniya me likha gaya hai ki ek aadmi mala jap raha hai ek aadmi bhukha hai toh phir usko rishi hone yogya ne kavita me daal ke likha hai ki bhukhe bhajan na hoy gopala yah lo apni kanthi mala bhukhe bhajan na hoy gopala paramatma ka bhajan bhukhe pet nahi ho sakta hai toh bhojan mahatvapurna hai bhojan ishwar aur ishwar aur bhojan me bhojan mahatvapurna nahi hai bhojan mahatvapurna hai ab ishwar kya hai ishwar toh bhojan ke pehle bhi tha aur bhojan ke baad bhi rahega ishwar toh hai hi hai ab usko anubhav karne ke liye usko jaanne ke liye tapasya karne ke liye dhyan karne ke liye usko anubhav karne ke liye kya avashyakta hai avashyakta hai aapki aur aap ko jeevit rehne ke liye avashyakta hai bhojan ke isliye bhojan mahatvapurna hai ishwar toh mahatvapurna hai hi hai usko toh mahatvapurna aur bina main bina mahatvapurna ka ka koi prashna hi nahi hai vaah toh aapke janam ke bhojan ke pehle bhi tha aur baad me main bhi rahega ishwar nahi toh puri kayanat banai hai aap ko janam diya hai aapko hi nahi aapki maa ko bhi janam diya hai aage bhi sansthan me sab ko janam deta rahega toh ishwar toh alag ka vishay ho gaya vishay ki ishwar ko anubhav kaise kiya ja anubhav karne ke liye bina bhojan ke aapke sharir me takat aur bal nahi hoga aur jab sharir me baal nahi hoga toh chintan nahi kar sakte hain aatm tatva ka chintan ishwar ka anubhav ishwar ki khoj nahi kar sakte hain iske liye bhojan ki avashyakta hai tabhi kaha gaya hai ki bhukhe bhajan na hoy gopala yah lo apni kanthi mala

प्रश्न है मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन मेरे भाई मेरे प्रिय पहले य

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महेश दुबे

कवि साहित्यकार

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हमारे सनातन धर्म में अन्य को तो वैसे ही ब्रह्म कहा गया है और हिंदू धर्म के लोग भोजन की थाली आने पर पहले अवश्य उसे प्रणाम करते हैं उसके बाद ही आदमी करते हैं अन्य तो ईश्वर है ही अगर शरीर में न जाए तो शरीर चल ही नहीं सकता

hamare sanatan dharm mein anya ko toh waise hi Brahma kaha gaya hai aur hindu dharm ke log bhojan ki thali aane par pehle avashya use pranam karte hain uske baad hi aadmi karte hain anya toh ishwar hai hi agar sharir mein na jaaye toh sharir chal hi nahi sakta

हमारे सनातन धर्म में अन्य को तो वैसे ही ब्रह्म कहा गया है और हिंदू धर्म के लोग भोजन की थाल

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Shashi

Author, Spiritual Blogger

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बहुत अच्छा है क्या भूखे पेट भजन हमारी गजब बहुत खाते हैं हम लोग खाली को गोद में भौतिक चीजों से बहुत लगा घूमे रे कोशिका कौन सी गाड़ी है मेरे पड़ोसी के पास मेरे पास कितने मकान है वह इतना ही करेंगे हम लोग एक अच्छी लड़की जो आपको कॉल किया आप अगर जी को अपने लोगों को अपने आसपास के निकट संबंधियों को कुछ एक अच्छा जीवन दे सकते हैं रोजमर्रा की इच्छा को पूरा करने के बाद आपको भौतिक इच्छाओं और द फिजिकल फीचर ऑफ़ गोरखनाथ की बातचीत जाते हैं उसके बाद ही आप शायद ईश्वर से आपके पास मिल पाएंगे

bahut accha hai kya bhukhe pet bhajan hamari gajab bahut khate hain hum log khaali ko god mein bhautik chijon se bahut laga ghume ray koshika kaun si gaadi hai mere padosi ke paas mere paas kitne makan hai vaah itna hi karenge hum log ek achi ladki jo aapko call kiya aap agar ji ko apne logo ko apne aaspass ke nikat sambandhiyon ko kuch ek accha jeevan de sakte hain rozmarra ki iccha ko pura karne ke baad aapko bhautik ikchao aur the physical feature of gorakhnath ki batchit jaate hain uske baad hi aap shayad ishwar se aapke paas mil payenge

बहुत अच्छा है क्या भूखे पेट भजन हमारी गजब बहुत खाते हैं हम लोग खाली को गोद में भौतिक चीजों

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Spiritual Guru Shri Pradeep Ji

Meditation Teacher, Spiritual Guide

6:22
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इस ब्रह्मांड में जो भी जीवित चीज है उसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है उस उर्जा से ही इस ब्रह्मांड की हर चीज चलाएं मान है जो भी चीज गति कर रही है जो भी चीज कार्य कर रही है बुखार करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है आप ही देखें अपनी चारों तरफ कोई भी बस कोई भी गाड़ी कोई प्लेन कोई भी चीज जो चल रही है उसके लिए ऊर्जा आवश्यक है यदि उर्जा नहीं होगी तो वह चीज चलायमान नहीं हो वह चीज खत्म हो जाएगी उसकी भी हो जाए उसी प्रकार हमारे शरीर को भी चलाने के लिए उसको व्यवस्थित और सुचारू रूप से प्रतिमान और चला रखने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है उस ऊर्जा को हम भोजन के रूप में लेते हैं एवं पूजन खाते हैं तो हमारा जो सभी का जो सिस्टम है जो पोस्टिक तंत्र है या जो हम कहे डाइजेस्टिव सिस्टम है उस खाने को बचाता है और उस खाने की वजह से हम को ऊर्जा मिलती हैं और ऊर्जा से ही हम अपने सारे गाने कर पाते हैं इस ऊर्जा का हमारे शरीर में हमारे जीवन में उतना ही महत्व है जितना कि हमारे जीवन में हमारे लिए स्वास को ले हम सोचने लगे कोई भी कार्य नहीं कर पाएंगे इसलिए महत्वपूर्ण है उसका प्रश्न नहीं होता यह हमारी एक बेसिक नीड है हमारी वह जरूरत है जिसके बिना हम जिंदा रहना हमारे लिए संभव नहीं है इसकी बरामसर बात नहीं कर सकते इसका कंपैरिजन ईश्वर से करना निरर्थक है हर चीज को बनाया और उसको बनाने के लिए उसको बनाने की बात को चलाने के लिए एक सिस्टम को डेवलप किया एक तंत्र विकसित किया उस तंत्र को चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है यह ऊर्जा जीवन प्रमाण हर चीज उसी की बनाई हुई है उसकी भी होना संभव नहीं उस काम को धन्यवाद देना चाहिए उसका हमको हमेशा याद रखना चाहिए कि उन्हें इतनी ईश्वर ने इतनी खूबसूरत प्रकृति को उसी को बना कर दिया और हम यहां पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं हमको हमेशा उसका धन्यवाद देना चाहिए वह तो हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है ही उसके बिना कुछ भी संभव नहीं है इसलिए ध्यान करके हमेशा अपने आप को पहचानने उस ईश्वर को पहचानने उस ईश्वरीय शक्ति को पहचान है और उसकी अनुभूति मात्र से ही आपको उसकी उपयोगिता या उसकी जो महत्वपूर्ण ता है वह आपको अपने आपको यह चीज होगा अपने आपको यह बहुत होगा कि वह उसका अनुभव एक अलग ही है वही एक सार्वभौमिक सत्य है वही एक प्राथमिक सकते हैं उसके अलावा कुछ नहीं जवाब कुछ अलग से गुजरते हैं तो आपको यह लगता है कि हमारे जीवन की जो कुछ है हमारे जीवन की जो महत्वपूर्ण प्रश्न मारेला उड़ते हैं कि हम कौन हैं हमारा अस्तित्व क्या है हमें सर जी पर क्यों आए हैं हमारे जीवन के सवालों के जवाब आपको मिल जाते हैं उनके माध्यम से आप जोड़ते हैं अनुभव आपके जीवन को पूरी तरह से रूपांतरित कर देता है उसके बाद आपके अंदर कोई प्रश्न नहीं भरा जीवन को सही रूप में उसके सही प्रारूप में आप जीना हराम कर दे कर देते हैं पर आपके जीवन से चिंता दुख जलन विषय सब खत्म हो जाती है और आपका जीवन बहुत ही सुख में और आनंद में हो जाता है मेरी बात सुनने के लिए बहुत धन्यवाद प्रधान

is brahmaand mein jo bhi jeevit cheez hai uske liye urja ki avashyakta padti hai us urja se hi is brahmaand ki har cheez chalaye maan hai jo bhi cheez gati kar rahi hai jo bhi cheez karya kar rahi hai bukhar karne ke liye urja ki avashyakta hoti hai aap hi dekhen apni charo taraf koi bhi bus koi bhi gaadi koi plane koi bhi cheez jo chal rahi hai uske liye urja aavashyak hai yadi urja nahi hogi toh vaah cheez chalayman nahi ho vaah cheez khatam ho jayegi uski bhi ho jaaye usi prakar hamare sharir ko bhi chalane ke liye usko vyavasthit aur sucharu roop se pratiman aur chala rakhne ke liye urja ki avashyakta hoti hai us urja ko hum bhojan ke roop mein lete hain evam pujan khate hain toh hamara jo sabhi ka jo system hai jo paustik tantra hai ya jo hum kahe digestive system hai us khane ko bachata hai aur us khane ki wajah se hum ko urja milti hain aur urja se hi hum apne saare gaane kar paate hain is urja ka hamare sharir mein hamare jeevan mein utana hi mahatva hai jitna ki hamare jeevan mein hamare liye swas ko le hum sochne lage koi bhi karya nahi kar payenge isliye mahatvapurna hai uska prashna nahi hota yah hamari ek basic need hai hamari vaah zarurat hai jiske bina hum zinda rehna hamare liye sambhav nahi hai iski baramasar baat nahi kar sakte iska kampairijan ishwar se karna nirarthak hai har cheez ko banaya aur usko banane ke liye usko banane ki baat ko chalane ke liye ek system ko develop kiya ek tantra viksit kiya us tantra ko chalane ke liye urja ki avashyakta hoti hai yah urja jeevan pramaan har cheez usi ki banai hui hai uski bhi hona sambhav nahi us kaam ko dhanyavad dena chahiye uska hamko hamesha yaad rakhna chahiye ki unhe itni ishwar ne itni khoobsurat prakriti ko usi ko bana kar diya aur hum yahan par jeevan vyatit kar rahe hain hamko hamesha uska dhanyavad dena chahiye vaah toh hamare jeevan mein mahatvapurna hai hi uske bina kuch bhi sambhav nahi hai isliye dhyan karke hamesha apne aap ko pahachanne us ishwar ko pahachanne us ishwariya shakti ko pehchaan hai aur uski anubhuti matra se hi aapko uski upayogita ya uski jo mahatvapurna ta hai vaah aapko apne aapko yah cheez hoga apne aapko yah bahut hoga ki vaah uska anubhav ek alag hi hai wahi ek sarvabhaumik satya hai wahi ek prathmik sakte hain uske alava kuch nahi jawab kuch alag se gujarate hain toh aapko yah lagta hai ki hamare jeevan ki jo kuch hai hamare jeevan ki jo mahatvapurna prashna marela udte hain ki hum kaun hain hamara astitva kya hai hamein sir ji par kyon aaye hain hamare jeevan ke sawalon ke jawab aapko mil jaate hain unke madhyam se aap jodte hain anubhav aapke jeevan ko puri tarah se rupantarit kar deta hai uske baad aapke andar koi prashna nahi bhara jeevan ko sahi roop mein uske sahi prarup mein aap jeena haraam kar de kar dete hain par aapke jeevan se chinta dukh jalan vishay sab khatam ho jaati hai aur aapka jeevan bahut hi sukh mein aur anand mein ho jata hai meri baat sunne ke liye bahut dhanyavad pradhan

इस ब्रह्मांड में जो भी जीवित चीज है उसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है उस उर्जा से ही इस

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

3:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दिखे जब हम कोई कंपैरिजन करते हैं दो चीजों के बीच में तो कोई लॉजिक होना चाहिए उसके बीच में कोई बेसिस होना चाहिए जिसके के हिसाब से हम कंपैरिजन करते हैं अभी यहां पर आप कंपेयर कर रहे हैं ईश्वर को और भोजन से भाई यह दोनों ही एकदम विपरीत एकदम अलग चीजें आप ऐसे कैसे कंपेयर कर सकते हैं मान लीजिए आप कंपेयर करते हैं भाई फलों में सेक्सी बारे का अनारकली चलो समझ आता है अब आप एक असीम को कंपेयर करेंगे भाई आलू से तो फिर यह कैसे कंपैरिजन हुआ या एक सेब को आपका प्यार करेंगे चीनी के के दाने से तू ही कैसे कंपैरिजन हुआ चलिए कोई बात नहीं फिर भी आपने अगर पूछना है तो मैं बताता हूं कि मानव जी ने जीवन के लिए यह एक महत्वपूर्ण है इसीलिए कंपैरिजन के बाद कहा था क्योंकि आपका सवाल ही ऐसा है कि क्या महत्वपूर्ण है अब सोचिए अब आप बोलते हैं एक तरफ भूषण दूसरी तरह बोलते हैं ईश्वर ईश्वर को तो आप तब प्राप्त करेंगे उनका गोंडा नाश्ता करेंगे या पूजा प्रार्थना अर्चना तब करेंगे जब आप जीवित रहेंगे आप जीवित कब रहेंगे जब आप खाएंगे कुछ अगर आप भूतनी नहीं खाएंगे तो आप जीवित नहीं रहेंगे तो आप जीवित नहीं रह कर पूजा कैसे कर सकते हैं ध्यान कैसे कर सकते हैं तो वह इस हिसाब से देखा जाए तो वह बिना भोजन के तो आप कुछ दिन के बाद नहीं रह पाएंगे पानी पीकर भी आप कुछ दिन तक रह सकते हैं लेकिन भोजन तो चाहिए होगा ना एनर्जी ऊर्जा तो चाहिए होगी अब कुछ दिन तो आप निकाल लेंगे उसके बाद क्या तो भाई भोजन इंपोर्टे सबसे पहले इस शरीर को फिजिकल फॉर्म को जीवित रखने के लिए जवाब जी भी थे उसके बाद बात आती है कि हां भाई चलिए ईश्वर में ध्यान कर लिया से पूजा अर्चना कर लिया चाय वगैरा-वगैरा है ना सोच कर देखें तो मेरे हिसाब से अगर हम सबसे आगे रमेश तरीके से देखें तो भोजन पहले आता है और उसके बाद ही ईश्वर लेकिन अगर आप भोजन यहां पानी डाल दे कुछ और चीज की बात कहते हैं तब मैं बोलता हूं कि ईश्वर में आस्था रखना बहुत जरूरी होते हैं बहुत इंपॉर्टेंट है वैसे जीवन आपका आपका जैसा अमन आप अगर रखना चाहे रखे नहीं रखना चाहिए नहीं रखी है लेकिन यहां पर मैं जब बात करता हूं तो यहां पर मैं ईश्वर की पूजा अर्चना इनकी बात नहीं करता मैं यह बताओ कि जो जो हमारा मानव जीवन है या धर्म है इसका अमीन करते हुए यह है कि हर चीज में आप समझ ही ईश्वर का ही प्रतिबिंब है उसी ने बनाया है सीधी से लेकर उस पहाड़ तक उसमें आप और हम भी शामिल हैं तो जब उन्होंने बनाए हैं तो हमें उस रचना का भी आदर करने से उनके प्रति भी हमारी 9aqqs श्रद्धा हो नीचे निष्ठा होनी चाहिए इसीलिए आप देखेंगे कि भारत में यह प्रचलन था और हम करते थे अभी थोड़ा कम हो गया है कि भाई एक चींटी को भी हटा खिलाते थे आटा रखते थे उसके लिए और एक का पहाड़ की पर्वत की भी और चांद की भी और सूरज के बीच हम पूजा करते थे और करते भी हैं स्वदेशी लॉजिक बिहाइंड एवरी थिंग व्हाट ए बॉर्बी 2MB आप इंटरव्यू सोफा तो एनीवेज तो यह मेरा रिस्पांस है

dikhen jab hum koi kampairijan karte hain do chijon ke beech mein toh koi logic hona chahiye uske beech mein koi basis hona chahiye jiske ke hisab se hum kampairijan karte hain abhi yahan par aap compare kar rahe hain ishwar ko aur bhojan se bhai yah dono hi ekdam viprit ekdam alag cheezen aap aise kaise compare kar sakte hain maan lijiye aap compare karte hain bhai falon mein sexy bare ka anarkali chalo samajh aata hai ab aap ek asim ko compare karenge bhai aalu se toh phir yah kaise kampairijan hua ya ek seb ko aapka pyar karenge chini ke ke daane se tu hi kaise kampairijan hua chaliye koi baat nahi phir bhi aapne agar poochna hai toh main batata hoon ki manav ji ne jeevan ke liye yah ek mahatvapurna hai isliye kampairijan ke baad kaha tha kyonki aapka sawaal hi aisa hai ki kya mahatvapurna hai ab sochiye ab aap bolte hain ek taraf bhushan dusri tarah bolte hain ishwar ishwar ko toh aap tab prapt karenge unka gonda nashta karenge ya puja prarthna archna tab karenge jab aap jeevit rahenge aap jeevit kab rahenge jab aap khayenge kuch agar aap bhootni nahi khayenge toh aap jeevit nahi rahenge toh aap jeevit nahi reh kar puja kaise kar sakte hain dhyan kaise kar sakte hain toh vaah is hisab se dekha jaaye toh vaah bina bhojan ke toh aap kuch din ke baad nahi reh payenge paani peekar bhi aap kuch din tak reh sakte hain lekin bhojan toh chahiye hoga na energy urja toh chahiye hogi ab kuch din toh aap nikaal lenge uske baad kya toh bhai bhojan importe sabse pehle is sharir ko physical form ko jeevit rakhne ke liye jawab ji bhi the uske baad baat aati hai ki haan bhai chaliye ishwar mein dhyan kar liya se puja archna kar liya chai vagaira vagaira hai na soch kar dekhen toh mere hisab se agar hum sabse aage ramesh tarike se dekhen toh bhojan pehle aata hai aur uske baad hi ishwar lekin agar aap bhojan yahan paani daal de kuch aur cheez ki baat kehte hain tab main bolta hoon ki ishwar mein astha rakhna bahut zaroori hote hain bahut important hai waise jeevan aapka aapka jaisa aman aap agar rakhna chahen rakhe nahi rakhna chahiye nahi rakhi hai lekin yahan par main jab baat karta hoon toh yahan par main ishwar ki puja archna inki baat nahi karta main yah batao ki jo jo hamara manav jeevan hai ya dharm hai iska ameen karte hue yah hai ki har cheez mein aap samajh hi ishwar ka hi pratibimb hai usi ne banaya hai seedhi se lekar us pahad tak usme aap aur hum bhi shaamil hain toh jab unhone banaye hain toh hamein us rachna ka bhi aadar karne se unke prati bhi hamari 9aqqs shraddha ho niche nishtha honi chahiye isliye aap dekhenge ki bharat mein yah prachalan tha aur hum karte the abhi thoda kam ho gaya hai ki bhai ek chinti ko bhi hata khilaate the atta rakhte the uske liye aur ek ka pahad ki parvat ki bhi aur chand ki bhi aur suraj ke beech hum puja karte the aur karte bhi hain swadeshi logic Behind every thing what a barbi 2MB aap interview Sofa toh enivej toh yah mera response hai

दिखे जब हम कोई कंपैरिजन करते हैं दो चीजों के बीच में तो कोई लॉजिक होना चाहिए उसके बीच में

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

0:45
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है मनोज मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन बहुत सुंदर प्रश्न आपने किया है कि इंसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है भगवान या भोजन दोनों अलग दोनों ही महत्वपूर्ण है और दोनों का अपना अलग स्थान है भगवान भैया उसके लिए आवश्यक है और भोजन भी आपके लिए आवश्यक है भोजन आपका शारीरिक क्रिया चलाने के लिए भोजन जरूरी है लेकिन भगवान में आस्था रखने के लिए आपका मन की खुराक के लिए आपको ईश्वर की आवश्यकता है धन्यवाद

aapka prashna hai manoj manav jeevan mein kya adhik mahatvapurna hai ishwar ya bhojan bahut sundar prashna aapne kiya hai ki insaan ke liye sabse mahatvapurna kya hai bhagwan ya bhojan dono alag dono hi mahatvapurna hai aur dono ka apna alag sthan hai bhagwan bhaiya uske liye aavashyak hai aur bhojan bhi aapke liye aavashyak hai bhojan aapka sharirik kriya chalane ke liye bhojan zaroori hai lekin bhagwan mein astha rakhne ke liye aapka man ki khurak ke liye aapko ishwar ki avashyakta hai dhanyavad

आपका प्रश्न है मनोज मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन बहुत सुंदर प्रश्न

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

1:27
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देखिए मानव जीवन में क्या महत्वपूर्ण है यह प्रश्न आपने पूछा है ईश्वर या भोजन आपने देखा होगा सभी लोग हिंदू लोग जितने भी हैं वह जब भी ईश्वर के सामने प्रार्थना करते हैं तो उसको उनको प्रसाद के रूप में कुछ न कुछ चढ़ाते हैं कई लोग भोजन का भोग लगाते हैं कई मिठाई का भोग लगाते हैं आंखें बंद करके भगवान को अर्पित करते हैं क्या आपने कभी उनको कुछ भी खाते हुए देखा है क्या वह भोजन खत्म हो जाता है नहीं वह भोजन खाता है फिर वह हमें लोग खाते हैं हम इंसान खाते हैं और उस भोजन से ही हमारे जीवन चलता है तो भोजन हमारे लिए बहुत आवश्यक है जिसको हमें खाना पड़ता है और उसे ही हमारा शरीर और दिमाग चलता है इसमें ईश्वर की तो ईश्वर की कोई डिमांड नहीं होती है उनकी तो आप दिल से पूजा करिए भाव रखिए श्रद्धा रखिए उनके प्रति आप भोजन आप अपने शरीर के लिए करें जब आपका वह कहावत है कि भूखे भजन न होय गोपाला मतलब भूखे रहेंगे तो आप भजन भी करने का आपका मन नहीं करेगा ईश्वर की भक्ति में भी मन नहीं लगेगा तो आपको खाना बहुत महत्वपूर्ण है अगर आपको जीना है तो खाना भी जरूरी है धन्यवाद

dekhiye manav jeevan mein kya mahatvapurna hai yah prashna aapne poocha hai ishwar ya bhojan aapne dekha hoga sabhi log hindu log jitne bhi hain vaah jab bhi ishwar ke saamne prarthna karte hain toh usko unko prasad ke roop mein kuch na kuch chadhate hain kai log bhojan ka bhog lagate hain kai mithai ka bhog lagate hain aankhen band karke bhagwan ko arpit karte kya aapne kabhi unko kuch bhi khate hue dekha hai kya vaah bhojan khatam ho jata hai nahi vaah bhojan khaata hai phir vaah hamein log khate hain hum insaan khate hain aur us bhojan se hi hamare jeevan chalta hai toh bhojan hamare liye bahut aavashyak hai jisko hamein khana padta hai aur use hi hamara sharir aur dimag chalta hai isme ishwar ki toh ishwar ki koi demand nahi hoti hai unki toh aap dil se puja kariye bhav rakhiye shraddha rakhiye unke prati aap bhojan aap apne sharir ke liye kare jab aapka vaah kahaavat hai ki bhukhe bhajan na hoy gopala matlab bhukhe rahenge toh aap bhajan bhi karne ka aapka man nahi karega ishwar ki bhakti mein bhi man nahi lagega toh aapko khana bahut mahatvapurna hai agar aapko jeena hai toh khana bhi zaroori hai dhanyavad

देखिए मानव जीवन में क्या महत्वपूर्ण है यह प्रश्न आपने पूछा है ईश्वर या भोजन आपने देखा होगा

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है या भोजन विक्की मानव जीवन को अग्रसर वाइपर ना जाने चलाना है और अपना अस्तित्व इंसान को ठिकाना है तो भोजन अनिवार्य है इससे उसका शरीर इस संसार में रहता है और इस शरीर को अच्छी तरह से चलाना है तू उसे ईश्वर में विश्वास करना पड़ेगा इसलिए सॉरी क्योंकि जब कोई भी भोजन खाद्य सामग्री वह खाता है कोई इंसान होता है इसमें स्कूल के आगे भूख लगा लेता है भी भोजन को और फिर वही भोजन ग्रहण करता है तो उसे प्रसाद कैसे क्योंकि उसने ईश्वर की भक्ति ईश्वर की आस्था जो है उसके साथ भोजन के साथ जुड़ गई इसलिए प्रसाद कहलाता है इसलिए मानव जीवन में भोजन और ईश्वर दोनों ही महत्वपूर्ण रोल है और इसे हमें अवश्य मानना चाहिए ताकि हमारा जीवन सुख पूर्वक शांतिपूर्वक सदाचार थे हम अच्छे रास्ते पर जी सके विश यू ऑल द बेस्ट

manav jeevan mein kya adhik mahatvapurna hai ya bhojan vicky manav jeevan ko agrasar wiper na jaane chalana hai aur apna astitva insaan ko thikana hai toh bhojan anivarya hai isse uska sharir is sansar mein rehta hai aur is sharir ko achi tarah se chalana hai tu use ishwar mein vishwas karna padega isliye sorry kyonki jab koi bhi bhojan khadya samagri vaah khaata hai koi insaan hota hai isme school ke aage bhukh laga leta hai bhi bhojan ko aur phir wahi bhojan grahan karta hai toh use prasad kaise kyonki usne ishwar ki bhakti ishwar ki astha jo hai uske saath bhojan ke saath jud gayi isliye prasad kehlata hai isliye manav jeevan mein bhojan aur ishwar dono hi mahatvapurna roll hai aur ise hamein avashya manana chahiye taki hamara jeevan sukh purvak shantipurvak sadachar the hum acche raste par ji sake wish you all the best

मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है या भोजन विक्की मानव जीवन को अग्रसर वाइपर ना जाने चल

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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माय मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या पूजा ईश्वर मिल जाएगी तो भोजन अपने आप मिल जाएगा भोजन मिलेगा तो हम ईश्वर की भक्ति भी कर पाएंगे ठीक है सभी महत्वपूर्ण भोजन भोजन भोजन भोजन अपने आप मिल जाएगा ईश्वर बोलते हैं पहले भोजन करो फिर मेरी भक्ति करो तो मैं तुम्हें बहुत अच्छे से मिलूंगा आराम से मुझे ठीक है आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

my manav jeevan mein kya adhik mahatvapurna hai ishwar ya puja ishwar mil jayegi toh bhojan apne aap mil jaega bhojan milega toh hum ishwar ki bhakti bhi kar payenge theek hai sabhi mahatvapurna bhojan bhojan bhojan bhojan apne aap mil jaega ishwar bolte hain pehle bhojan karo phir meri bhakti karo toh main tumhe bahut acche se milunga aaram se mujhe theek hai aapka din shubha ho dhanyavad

माय मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या पूजा ईश्वर मिल जाएगी तो भोजन अपने आप मि

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

7:11
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मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन देखिए ईश्वर जो है वह आध्यात्मिक संतुष्टि काव्य आध्यात्मिक संतुष्टि का विषय है और शरीर को भोजन की आवश्यकता है शरीर भोजन शरीर को भोजन चाहिए और भोजन जो है भोजन का बनाना भी पड़ता है और सामग्री के लिए धन भी जुटाना पड़ता है अतः या व्यक्ति को चाहिए जोश का कर्तव्य है कि मैंने तो श्रम करें मैंने तो श्रम करने से जो उसको पारा सुमित मिले उससे सामग्री का जुटाए और उससे भोजन प्राप्त करें जिससे कि शरीर पुष्ट होता है और अन्यथा जो शहीद है यदि इसमें भोजन आदि व्यवस्था नहीं होगी तो यह श्री कृष्णाय हो जाएगा और समाप्त भी हो सकता है शरीर का जो धर्म है इसको सुख-दुख इसको ठंडी गर्मी भी लगती है इसको भूख प्यास भी लगती है और इसके बगैर यह शरीर नहीं रहा करता है क्या प्रत्यक्ष बात है और शरीर को भेजो आवश्यकताएं हैं वह जो कुर्तियां है वह कर्म के ही द्वारा हुआ करती हैं तो व्यक्ति अपने जो कर्तव्य है उसका पालन करें इससे शरीर हष्ट पुष्ट भी रहेगा स्वस्थ रहेगा निरोगी रहेगा और जहां तक परिसर का है यह जो मनुष्य का शरीर है और इसकी जो संत आत्मिक संतुष्टि है उसके लिए यू सर का होना भी बहुत जरूरी है और अगर यह व्यक्ति की नहीं होगा तो तो मनुष्य का जो जीवन है उसे उचित उल्लू बना रहेगा और अपना आज उसने सम किया है इस कम करने के बाद में जो उसको धना आज मिला है उसने सामग्री एकत्रित करके और भोजन किया तो भोजन और निंद्रा इसलिए आवश्यक है मनुष्य को शरीर के लिए भोजन की आवश्यकता होती है और आत्मिक संतुष्टि के लिए ईश्वर की आवश्यकता है यद्यपि यह दोनों ही महत्वपूर्ण है और ईश्वर में ही भोजन भी निवेश है ईश्वर की अभी कृपा है तो जंगल की बीरानू में भी आप को भोजन उपलब्ध हो जाएगा और ईश्वर नहीं चाहता है उसकी मर्जी नहीं है तो आप को भूखा प्यासा भी रहना पड़े लेकिन वह सब की व्यवस्था किया करता है हो सकता है कि व्यक्ति एक-दो दिन भूखा रहे लेकिन सर उसकी व्यवस्था किया करता है यदि उसने आपको जन्म दिया है तो पालन-पोषण का भी दायित्व उसी का है और वह किया करता है फिर भी जो मनुष्य है उसको उसको जो कर्तव्यनिष्ठ है उसका पालन करना चाहिए और ईश्वर के भरोसे ही नहीं बैठ जाना चाहिए जय श्री जंगलों में धन की क्या आवश्यकता हुआ करती है आप बताएं जंगल है आता आपके पास धन है और उस जंगल में रुपए घन कि यदि आपके पास है भी तो वह व्यर्थ हो जाया करते हैं जैसे-जैसे गांव और शहर और गांव और शहर नजदीक आने लगती हैं वही धन उसके लिए उपयोगी हो जाया करता है तो जंगल में गण का कोई महत्व नहीं है वह कंकण पंकज और पत्रों के समान है आपका वजन लेकिन उसका जो महत्व है वह है गांव और शहरों में आकर के धन का महत्व हो जाया करता है इसलिए व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करता रहे और उससे जो भी अर्जन हो उसे शरीर को पुष्ट करें और जो हाथ में एक शरीर में और दोस्त की आत्मिक संतुष्टि है आत्मा की जो संतुष्टि है वह संतुष्टि तो ईश्वर को प्राप्त करके ही उसको मिलेगी अन्यथा जो जीव है या पुरानी है ऐसे ही भटकता रहेगा 8400000 योनियों में मानव जीवन है मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए यह तभी दोनों चीजों की आवश्यकता है लेकिन इन शर्तों सर्वव्यापी है उसको यदि आपने साथ-साथ लिया तो भोजन पानी तो आपको सहज ही उपलब्ध हो जाया करेंगे वह कोई ऐसा चिंता का विषय नहीं है धन्यवाद

manav jeevan mein kya adhik mahatvapurna hai ishwar ya bhojan dekhiye ishwar jo hai vaah aadhyatmik santushti kavya aadhyatmik santushti ka vishay hai aur sharir ko bhojan ki avashyakta hai sharir bhojan sharir ko bhojan chahiye aur bhojan jo hai bhojan ka banana bhi padta hai aur samagri ke liye dhan bhi jutana padta hai atah ya vyakti ko chahiye josh ka kartavya hai ki maine toh shram kare maine toh shram karne se jo usko para sumit mile usse samagri ka jutaye aur usse bhojan prapt kare jisse ki sharir pusht hota hai aur anyatha jo shaheed hai yadi isme bhojan aadi vyavastha nahi hogi toh yah shri krishnay ho jaega aur samapt bhi ho sakta hai sharir ka jo dharm hai isko sukh dukh isko thandi garmi bhi lagti hai isko bhukh pyaas bhi lagti hai aur iske bagair yah sharir nahi raha karta hai kya pratyaksh baat hai aur sharir ko bhejo aavashyakataen hain vaah jo kurtiyan hai vaah karm ke hi dwara hua karti hain toh vyakti apne jo kartavya hai uska palan kare isse sharir hasth pusht bhi rahega swasthya rahega nirogee rahega aur jaha tak parisar ka hai yah jo manushya ka sharir hai aur iski jo sant atmik santushti hai uske liye you sir ka hona bhi bahut zaroori hai aur agar yah vyakti ki nahi hoga toh toh manushya ka jo jeevan hai use uchit ullu bana rahega aur apna aaj usne some kiya hai is kam karne ke baad mein jo usko dhana aaj mila hai usne samagri ekatrit karke aur bhojan kiya toh bhojan aur nindra isliye aavashyak hai manushya ko sharir ke liye bhojan ki avashyakta hoti hai aur atmik santushti ke liye ishwar ki avashyakta hai yadyapi yah dono hi mahatvapurna hai aur ishwar mein hi bhojan bhi nivesh hai ishwar ki abhi kripa hai toh jungle ki biranu mein bhi aap ko bhojan uplabdh ho jaega aur ishwar nahi chahta hai uski marji nahi hai toh aap ko bhukha pyaasa bhi rehna pade lekin vaah sab ki vyavastha kiya karta hai ho sakta hai ki vyakti ek do din bhukha rahe lekin sir uski vyavastha kiya karta hai yadi usne aapko janam diya hai toh palan poshan ka bhi dayitva usi ka hai aur vaah kiya karta hai phir bhi jo manushya hai usko usko jo kartavyanishth hai uska palan karna chahiye aur ishwar ke bharose hi nahi baith jana chahiye jai shri jungalon mein dhan ki kya avashyakta hua karti hai aap bataye jungle hai aata aapke paas dhan hai aur us jungle mein rupaye ghan ki yadi aapke paas hai bhi toh vaah vyarth ho jaya karte hain jaise jaise gaon aur shehar aur gaon aur shehar nazdeek aane lagti hain wahi dhan uske liye upyogi ho jaya karta hai toh jungle mein gan ka koi mahatva nahi hai vaah kankan pankaj aur patron ke saman hai aapka wajan lekin uska jo mahatva hai vaah hai gaon aur shaharon mein aakar ke dhan ka mahatva ho jaya karta hai isliye vyakti apne kartavyon ka palan karta rahe aur usse jo bhi arjan ho use sharir ko pusht kare aur jo hath mein ek sharir mein aur dost ki atmik santushti hai aatma ki jo santushti hai vaah santushti toh ishwar ko prapt karke hi usko milegi anyatha jo jeev hai ya purani hai aise hi bhatakta rahega 8400000 yoniyon mein manav jeevan hai manav jeevan ko behtar banane ke liye yah tabhi dono chijon ki avashyakta hai lekin in sharton sarvavyapi hai usko yadi aapne saath saath liya toh bhojan paani toh aapko sehaz hi uplabdh ho jaya karenge vaah koi aisa chinta ka vishay nahi hai dhanyavad

मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन देखिए ईश्वर जो है वह आध्यात्मिक संतुष्

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Ankit Saini

Civil Engineer | Businessman

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जिस सुस्ती पर जन्मा है उसे खाने के लिए एनर्जी लेने के लिए भोजन की जरूरत पड़ती पड़ती है और वह भोजन इसका भगवान होता ठीक है जब आप अंदर उस जीव को सातवा को तृप्त करते हैं तो आप उस पर आप खुद परेशान नहीं कर रहे हैं आप अपने भगवान को तृप्त कर रहे हैं ठीक है

jis susti par janma hai use khane ke liye energy lene ke liye bhojan ki zarurat padti padti hai aur vaah bhojan iska bhagwan hota theek hai jab aap andar us jeev ko satva ko tript karte hain toh aap us par aap khud pareshan nahi kar rahe hain aap apne bhagwan ko tript kar rahe hain theek hai

जिस सुस्ती पर जन्मा है उसे खाने के लिए एनर्जी लेने के लिए भोजन की जरूरत पड़ती पड़ती है और

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Radha Rangoli

Holistic Healer And Energy Therapist

4:29
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देखे आपको क्वेश्चन है मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ऐश्वर्या भोजन ईश्वर जो है वह कण कण में है भोजन जो है वह हमारे इस शरीर की नीड है क्योंकि हमें शरीर को चलाना है तो हमें भोजन की जरूरत है अगर हमें शरीर में ऊर्जा देनी है तो भोजन की नीड है लेकिन ईश्वर जो ही हमारा विश्वास है तो एक इंसान का विश्वास अगर खत्म हो जाए तो वैसे ही खत्म हो जाता है फिर उसको किसी चीज की जरूरत ही नहीं होती लेकिन भोजन जो है वह उसके शरीर की ऊर्जा है उसको ऊर्जा चाहिए होती है अपने शरीर को चलाने के लिए उससे भी ज्यादा जरूरी अगर किसी के अंदर की इच्छा शक्ति खत्म कर दी जाए तो उसके लिए भोजन भी उसके उसके पर काम नहीं करेगा नहीं खा तक भोजन काम करता है शरीर के लेवल पर लेकिन अगर किसी का विश्वास ही तोड़ दिया जाए उसके ईश्वर से गैस के स्तर के ऊपर तो उसके ऊपर भोजन भी काम नहीं करता तो यह दोनों की दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू आप बोल सकते हैं क्योंकि जीवन मानव जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होता है इसी इसी इसी को बोलते हैं कि ईश्वर हमारे शरीर में निवास करते हैं तो ईश्वर कोई बाहर कहीं नहीं होते हैं कि हमने किसी पत्थर में या मूर्ति में या किसी चीज में उसको बोल दिया और वह इस वर्ष में हुई क्योंकि मूर्तियां भी जो इंसान के द्वारा ही तो बनाई जाती है किसी मूर्ति को पूछ रहे हैं तो वह भी तो इंसान के द्वारा ही बनाई गई है तो फिर वह इंसान के द्वारा बनाई गई है इसलिए तो वह पूजनीय है तो ईश्वर ऐसे कोई पर्टिकुलर कोई ऐसी जगह नहीं है जहां पर वह नहीं है ईश्वर हर जगह हर एक कण में हर एक क्षण में हर एक सांस में आती आती सांस में जाति सांस में हर क्षण में विश्व और भोजन जो हमारे शरीर की बेसिक नीड है वह भी वह हमारे अन्य में कोर्स जिसको अन्य से तैयार होता है जो हमारा शरीर उसकी इमेज भोजन हमारे शरीर के पांच स्तर 5 लेवल है जिसमें जो पहले लेवल का जो सेवर शरीर है उसकी जो नीड ए वह भोजन दूसरे लेवल का जूस शरीर है उसकी उसकी जो वीडियो को प्राण ऊर्जा शक्ति है जो जो वही उसको बोला गया है वह है फिर ऐसे अलग-अलग लेवल है फिर भाव शरीर है फिर ऐसे आनंदमय आनंदमय शरीर है आक्रोश है ज्ञान में कोशिश शरीर हमारे पास लेवल की शादी है तो ईश्वर और ईश्वर जरूरी है या भोजन जरूरी है तो अगर आप ऐसा क्वेश्चन आपका है तो देख ईश्वर की भी उतनी जरूरत है जब तक हमारे अंदर विश्वास नहीं होगा हमारे अंदर जीने की शक्ति भी नहीं होगी तो आपने देखा होगा बहुत से लोग ऐसा कुछ खाते हैं उल्टा सीधा और बहुत ज्यादा बीमार हो जाते हैं तब एक लेवल पर आकर उनके शरीर में भोजन भी काम करना छोड़ देता है तो तब सिर्फ और सिर्फ उसको इसकी विश्वास की शक्ति जागृत करती है मौसी मूवीस में टीवी में भी देखा हुआ अपने की कोई इंसान है जो बैठे पड़ा हुआ है एग्जांपल के तौर पर तो उन्होंने बताया कि कैसे एक विश्वास कितनी शक्ति होती उसकी सूअर की किस के अंदर उसके शरीर में भोजन भी होता है वह उठ कर बैठ जाता है और उस पर की भक्ति करने लगता है तो यह भी एक बहुत बड़ा एग्जांपल है हमारे सामने देखने के लिए कि राजेश्वर है और भोजन है दोनों के दोनों कहीं ना कहीं एक ही सिक्के के दो पहलू हैं क्योंकि भोजन भी जो है वह हमें धरती से मिलता है धरती के अंदर जो भी तत्व है पोषक तत्व होते हैं मतलब कि कहीं ना कहीं वह हमें हर एक कण में ईश्वर है इसीलिए वो हमारे अंदर ईश्वर के रूप में ही जाता है तो भोजन भी ईश्वर का ही रूप बोलना चाहूंगी क्योंकि हम लोगों को बताया जाता है कि एनर्जी जोहार 11 में मौजूद है तो उसी तरह से ईश्वर भी एक कार्ड हरकत में मौजूद है और जो भोजन हम करते हैं उसके अंदर भी भाव से आप ईश्वर को ही माने क्योंकि वह भी ईश्वर का ही रूप होता है भोजन जो है थैंक यू सो मच

dekhe aapko question hai manav jeevan mein kya adhik mahatvapurna hai aishwarya bhojan ishwar jo hai vaah kan kan mein hai bhojan jo hai vaah hamare is sharir ki need hai kyonki hamein sharir ko chalana hai toh hamein bhojan ki zarurat hai agar hamein sharir mein urja deni hai toh bhojan ki need hai lekin ishwar jo hi hamara vishwas hai toh ek insaan ka vishwas agar khatam ho jaaye toh waise hi khatam ho jata hai phir usko kisi cheez ki zarurat hi nahi hoti lekin bhojan jo hai vaah uske sharir ki urja hai usko urja chahiye hoti hai apne sharir ko chalane ke liye usse bhi zyada zaroori agar kisi ke andar ki iccha shakti khatam kar di jaaye toh uske liye bhojan bhi uske uske par kaam nahi karega nahi kha tak bhojan kaam karta hai sharir ke level par lekin agar kisi ka vishwas hi tod diya jaaye uske ishwar se gas ke sthar ke upar toh uske upar bhojan bhi kaam nahi karta toh yah dono ki dono ek hi sikke ke do pahaloo aap bol sakte hain kyonki jeevan manav jeevan mein bahut mahatvapurna hota hai isi isi isi ko bolte hain ki ishwar hamare sharir mein niwas karte hain toh ishwar koi bahar kahin nahi hote hain ki humne kisi patthar mein ya murti mein ya kisi cheez mein usko bol diya aur vaah is varsh mein hui kyonki murtiya bhi jo insaan ke dwara hi toh banai jaati hai kisi murti ko puch rahe hain toh vaah bhi toh insaan ke dwara hi banai gayi hai toh phir vaah insaan ke dwara banai gayi hai isliye toh vaah pujaniya hai toh ishwar aise koi particular koi aisi jagah nahi hai jaha par vaah nahi hai ishwar har jagah har ek kan mein har ek kshan mein har ek saans mein aati aati saans mein jati saans mein har kshan mein vishwa aur bhojan jo hamare sharir ki basic need hai vaah bhi vaah hamare anya mein course jisko anya se taiyar hota hai jo hamara sharir uski image bhojan hamare sharir ke paanch sthar 5 level hai jisme jo pehle level ka jo sevar sharir hai uski jo need a vaah bhojan dusre level ka juice sharir hai uski uski jo video ko praan urja shakti hai jo jo wahi usko bola gaya hai vaah hai phir aise alag alag level hai phir bhav sharir hai phir aise anandamay anandamay sharir hai aakrosh hai gyaan mein koshish sharir hamare paas level ki shadi hai toh ishwar aur ishwar zaroori hai ya bhojan zaroori hai toh agar aap aisa question aapka hai toh dekh ishwar ki bhi utani zarurat hai jab tak hamare andar vishwas nahi hoga hamare andar jeene ki shakti bhi nahi hogi toh aapne dekha hoga bahut se log aisa kuch khate hain ulta seedha aur bahut zyada bimar ho jaate hain tab ek level par aakar unke sharir mein bhojan bhi kaam karna chod deta hai toh tab sirf aur sirf usko iski vishwas ki shakti jagrit karti hai mausi Movies mein TV mein bhi dekha hua apne ki koi insaan hai jo baithe pada hua hai example ke taur par toh unhone bataya ki kaise ek vishwas kitni shakti hoti uski suar ki kis ke andar uske sharir mein bhojan bhi hota hai vaah uth kar baith jata hai aur us par ki bhakti karne lagta hai toh yah bhi ek bahut bada example hai hamare saamne dekhne ke liye ki rajeshwar hai aur bhojan hai dono ke dono kahin na kahin ek hi sikke ke do pahaloo hain kyonki bhojan bhi jo hai vaah hamein dharti se milta hai dharti ke andar jo bhi tatva hai poshak tatva hote hain matlab ki kahin na kahin vaah hamein har ek kan mein ishwar hai isliye vo hamare andar ishwar ke roop mein hi jata hai toh bhojan bhi ishwar ka hi roop bolna chahungi kyonki hum logo ko bataya jata hai ki energy johar 11 mein maujud hai toh usi tarah se ishwar bhi ek card harkat mein maujud hai aur jo bhojan hum karte hain uske andar bhi bhav se aap ishwar ko hi maane kyonki vaah bhi ishwar ka hi roop hota hai bhojan jo hai thank you so match

देखे आपको क्वेश्चन है मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ऐश्वर्या भोजन ईश्वर जो है वह क

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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देखिए मानव जीवन में शरीर के लिए भोजन जरूरी है यदि शरीर के लिए भोजन नहीं करेंगे तो ईश्वर की साधना कैसे करेंगे और यदि हम भोजन करते रहे और ईश्वर का ध्यान नहीं किया तो हमें मोक्ष कैसे मिलेगा यानी कि हम जन्मों के बंधन से कैसे मुक्त होंगे जीवन के लिए दोनों ही उपयोगी है हम भोजन करके अपने शरीर को कोई भोजन की उर्जा के द्वारा शक्ति संपन्न बनाते हैं और फिर ईश्वर का ध्यान करते हैं जो भोजन छोड़कर ईश्वर का ध्यान करते हैं तो वह इस शरीर के साथ नाइंसाफी करते हैं तो ईश्वर जिसे कभी माफ नहीं करेगा

dekhiye manav jeevan mein sharir ke liye bhojan zaroori hai yadi sharir ke liye bhojan nahi karenge toh ishwar ki sadhna kaise karenge aur yadi hum bhojan karte rahe aur ishwar ka dhyan nahi kiya toh hamein moksha kaise milega yani ki hum janmon ke bandhan se kaise mukt honge jeevan ke liye dono hi upyogi hai hum bhojan karke apne sharir ko koi bhojan ki urja ke dwara shakti sampann banate hain aur phir ishwar ka dhyan karte hain jo bhojan chhodkar ishwar ka dhyan karte hain toh vaah is sharir ke saath nainsafi karte hain toh ishwar jise kabhi maaf nahi karega

देखिए मानव जीवन में शरीर के लिए भोजन जरूरी है यदि शरीर के लिए भोजन नहीं करेंगे तो ईश्वर की

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Vimla Bidawatka

Spiritual Thinker

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आपका प्रश्न है कि मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ऐश्वर्या भोजन दोनों अलग-अलग चीजें हैं दोनों को मिला नहीं सकते हैं ईश्वर है वह मन की शक्ति है वह आपको शक्ति देता है और जो भोजन है वह शरीर की जरूरत है अगर हमको विश्वास है ईश्वर पर विश्वास है तो हमको भोजन किसी भी तरह से मिल जाता है अगर विश्वास नहीं है तो फिर भोजन मिले नहीं मिले कोई बात नहीं है तो भोजन से शरीर में शक्ति आती है वह शरीर की जरूरत है लेकिन ईश्वर है वह विश्वास है ऐसा विश्वास है हर किसी को विश्वास नहीं है इस पर कोई कोई बोलते हैं कि नहीं ईश्वर है या नहीं है लेकिन ईश्वर है हम को चलाने वाला कौन है हम सबसे पहले देखे कि हमारे शरीर में कैसे हम कैसे कुछ मुंह में खा रहे हैं किस तरह से ब्लड बन रहा है किस तरह से अलग अलग उसके यूरिन बनके जा रहा है तू बनके जा रहा है कि मतलब क्या क्या हो रहा है तू ही चमत्कार कौन कर रहा है ईश्वरी तो कर की शक्ति के बिना यह सब कुछ नहीं हो सकता है जैसे बोलने के लिए हम बोलते हैं उसकी मर्जी के बिना पत्ता नहीं मिलता तो फिर हमारा शरीर कैसे चलेगा तो इस पर एक विश्वास और भोजन शरीर की जरूरत है तो अलग-अलग ऐसा नहीं है कि कौन महत्वपूर्ण है दोनों महत्वपूर्ण है अपनी-अपनी जगह दोनों महत्वपूर्ण है

aapka prashna hai ki manav jeevan mein kya adhik mahatvapurna hai aishwarya bhojan dono alag alag cheezen hain dono ko mila nahi sakte hain ishwar hai vaah man ki shakti hai vaah aapko shakti deta hai aur jo bhojan hai vaah sharir ki zarurat hai agar hamko vishwas hai ishwar par vishwas hai toh hamko bhojan kisi bhi tarah se mil jata hai agar vishwas nahi hai toh phir bhojan mile nahi mile koi baat nahi hai toh bhojan se sharir mein shakti aati hai vaah sharir ki zarurat hai lekin ishwar hai vaah vishwas hai aisa vishwas hai har kisi ko vishwas nahi hai is par koi koi bolte hain ki nahi ishwar hai ya nahi hai lekin ishwar hai hum ko chalane vala kaun hai hum sabse pehle dekhe ki hamare sharir mein kaise hum kaise kuch mooh mein kha rahe hain kis tarah se blood ban raha hai kis tarah se alag alag uske urine banke ja raha hai tu banke ja raha hai ki matlab kya kya ho raha hai tu hi chamatkar kaun kar raha hai ISHWARI toh kar ki shakti ke bina yah sab kuch nahi ho sakta hai jaise bolne ke liye hum bolte hain uski marji ke bina patta nahi milta toh phir hamara sharir kaise chalega toh is par ek vishwas aur bhojan sharir ki zarurat hai toh alag alag aisa nahi hai ki kaun mahatvapurna hai dono mahatvapurna hai apni apni jagah dono mahatvapurna hai

आपका प्रश्न है कि मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ऐश्वर्या भोजन दोनों अलग-अलग चीजें

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मनुष्य को अपने भरण-पोषण के लिए अपने जीवन को नई गति प्रदान करने के लिए आगे बढ़ाने के लिए शिक्षण की आवश्यकता व कीर्तन भजन कहते हैं लॉय का प्रथम मनुष्य के जीवन से पैमाने पर इस्तेमाल अपनी जीत का पूजन करता है और सृष्टि प्राप्त कर अपने काम के माध्यम से भय से प्राप्त करते और अपने जीवन यापन करता है और भक्ति वजह है ईश्वर को प्राप्त करने का एक माध्यम है भगवान को आराधना उपासना भक्ति और अमन ने जयपुर के द्वारा भगवान प्राप्त करने के लिए प्रयास किया जाता है उसके भक्ति कहते हैं तो वह एक ज्ञापन प्राप्त करने का मार्ग अपने जीवन में संपूर्ण सुख-सुविधाओं को भोगने के पश्चात और सब कुछ से प्राप्त करने के पश्चात जब चाहोगे तब एहसास होता है और उसे लगता है कि उसके उसे किसी ऐसे उपाय करना चाहिए इसके जीवन मरण और अन्य सभी जो है सरकार के मुखिया भगवान ईश्वर की प्राप्ति हो जिसके बारे में सबसे जो है मोक्ष प्राप्त कर अपने जीवन को सफल बना सके ऐसा क्या करता है सही है उसी को कहते हैं जो भयंकर परी कार्यकर्ता ईश्वर उनके हमसे कर कर और जिससे हम जैसे ईश्वर की भक्ति उपासना रत्नाकर और जिसे प्राप्त कर अपने जीवन को सफल बना सकते हैं इस पर है और कोई जन्म जो मनुष्य को अपने जीवन को अपने जिसका पालन के लिए जनरल वस्तुओं की जनता के पैसों की आवश्यकता होती है कोई अंतर है सरकार को जो हम समझ सकते तो ईश्वर द्वारा रचित दृष्टि में से अपने पोषण के लिए जो हम वस्तुओं को नियमित प्राप्त करते हैं उसे भी दिन बैठते हैं थैंक यू चंदा

manushya ko apne bharan poshan ke liye apne jeevan ko nayi gati pradan karne ke liye aage badhane ke liye shikshan ki avashyakta va kirtan bhajan kehte hain lay ka pratham manushya ke jeevan se paimane par istemal apni jeet ka pujan karta hai aur shrishti prapt kar apne kaam ke madhyam se bhay se prapt karte aur apne jeevan yaapan karta hai aur bhakti wajah hai ishwar ko prapt karne ka ek madhyam hai bhagwan ko aradhana upasana bhakti aur aman ne jaipur ke dwara bhagwan prapt karne ke liye prayas kiya jata hai uske bhakti kehte hain toh vaah ek gyapan prapt karne ka marg apne jeevan me sampurna sukh suvidhaon ko bhogane ke pashchat aur sab kuch se prapt karne ke pashchat jab chahoge tab ehsaas hota hai aur use lagta hai ki uske use kisi aise upay karna chahiye iske jeevan maran aur anya sabhi jo hai sarkar ke mukhiya bhagwan ishwar ki prapti ho jiske bare me sabse jo hai moksha prapt kar apne jeevan ko safal bana sake aisa kya karta hai sahi hai usi ko kehte hain jo bhayankar pari karyakarta ishwar unke humse kar kar aur jisse hum jaise ishwar ki bhakti upasana ratnakar aur jise prapt kar apne jeevan ko safal bana sakte hain is par hai aur koi janam jo manushya ko apne jeevan ko apne jiska palan ke liye general vastuon ki janta ke paison ki avashyakta hoti hai koi antar hai sarkar ko jo hum samajh sakte toh ishwar dwara rachit drishti me se apne poshan ke liye jo hum vastuon ko niyamit prapt karte hain use bhi din baithate hain thank you chanda

मनुष्य को अपने भरण-पोषण के लिए अपने जीवन को नई गति प्रदान करने के लिए आगे बढ़ाने के लिए शि

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mahadeva (mukesh k)

MAHADEVA YOG.https://youtu.be/vN6ns7rL0_8

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मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन मानव जीवन में सबसे पहले तो यह देखेंगे भोजन ही जरूरी है भोजन नहीं होगा तो जीवन फिर किससे कहोगे जब कुछ शरीर के अंदर जाएगा तभी तो जीवन रहेगा जिसको हम जीवन कह रहे हैं क्योंकि ईश्वर क्यों पाना चाहते हैं ईश्वर को क्यों जरूरी समझ रहे हैं उसको जरूरी ना समझो वह सत्य है उसको जरूरी समझने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि वह आपके भीतर ही क्योंकि आप ही ईश्वर के अंश हो वह तो हर जगह ही है हर जगह ही व्याप्त है तो उसको जरूरी समझने की जरूरत क्या है जरूरी तो जो चीज जीवन को चला रहा है जो इस देश को चला रहा है उसको हम जरूरी कहेंगे वह भोजन के रूप में कुछ भी हो सकता है

manav jeevan me kya adhik mahatvapurna hai ishwar ya bhojan manav jeevan me sabse pehle toh yah dekhenge bhojan hi zaroori hai bhojan nahi hoga toh jeevan phir kisse kahoge jab kuch sharir ke andar jaega tabhi toh jeevan rahega jisko hum jeevan keh rahe hain kyonki ishwar kyon paana chahte hain ishwar ko kyon zaroori samajh rahe hain usko zaroori na samjho vaah satya hai usko zaroori samjhne ki zarurat hi nahi hai kyonki vaah aapke bheetar hi kyonki aap hi ishwar ke ansh ho vaah toh har jagah hi hai har jagah hi vyapt hai toh usko zaroori samjhne ki zarurat kya hai zaroori toh jo cheez jeevan ko chala raha hai jo is desh ko chala raha hai usko hum zaroori kahenge vaah bhojan ke roop me kuch bhi ho sakta hai

मानव जीवन में क्या अधिक महत्वपूर्ण है ईश्वर या भोजन मानव जीवन में सबसे पहले तो यह देखेंगे

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मना जीवन में अधिक महत्वपूर्ण ईश्वर है या भोजन सवाल बहुत अच्छा है एक किसान अनाज को बोने से पहले वह खेत थी अनाज की पूजा करने के बाद ही आना कब होता है पाकिस्तान उगाए गए अनाज को ही ईश्वर का रूप मानता है लेकिन जो आता है वह खाता नहीं और जो खाता है वह आस्तिक या नास्तिक कुछ भी हो सकता है लेकिन जो वास्तविक यह है कि जो अनाज हमें शक्ति देती है शक्ति का सम्मान करते हैं और पूजा भी करते हैं भोजन की कोई भी नाम हो सकता है भगवान की भी कई प्रकार के नाम हो सकते हैं निश्चित नहीं हो सकता या क्षेत्रीय हो सकता है अलग-अलग संस्कृति में अलग-अलग नाम हो सकते हैं अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग नाम हो सकते हैं इस प्रकार भोजन कभी कोई निश्चित नहीं दिया जा सकता भोजन का एक रूप ही भगवान है उसे किसी प्रकार की एक भगवान दूसरे भगवाने बांटने की कोशिश नहीं किया जाना चाहिए भोजन ही एक भगवान का रूप है इसका सम्मान भी करना चाहिए धन्यवाद

mana jeevan me adhik mahatvapurna ishwar hai ya bhojan sawaal bahut accha hai ek kisan anaaj ko bone se pehle vaah khet thi anaaj ki puja karne ke baad hi aana kab hota hai pakistan ugaye gaye anaaj ko hi ishwar ka roop maanta hai lekin jo aata hai vaah khaata nahi aur jo khaata hai vaah astik ya nastik kuch bhi ho sakta hai lekin jo vastavik yah hai ki jo anaaj hamein shakti deti hai shakti ka sammaan karte hain aur puja bhi karte hain bhojan ki koi bhi naam ho sakta hai bhagwan ki bhi kai prakar ke naam ho sakte hain nishchit nahi ho sakta ya kshetriya ho sakta hai alag alag sanskriti me alag alag naam ho sakte hain alag alag dharmon me alag alag naam ho sakte hain is prakar bhojan kabhi koi nishchit nahi diya ja sakta bhojan ka ek roop hi bhagwan hai use kisi prakar ki ek bhagwan dusre bhagvane baantne ki koshish nahi kiya jana chahiye bhojan hi ek bhagwan ka roop hai iska sammaan bhi karna chahiye dhanyavad

मना जीवन में अधिक महत्वपूर्ण ईश्वर है या भोजन सवाल बहुत अच्छा है एक किसान अनाज को बोने से

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