भगवान में गैर-विश्वासी दिन-प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं? क्या यह एक अच्छा संकेत है या एक बुरा शगुन?...


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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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डा आचार्य महेंद्र

Astroloser,Vastusastro,pravchankarta

1:38
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान में गैर विश्वास के दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं बढ़ते जा रहे हैं क्या या एक अच्छा संकेत है या एक बुरा शगुन आपने सही लिखा है भगवान में विश्वास करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम हो जाए इसका मूल कारण शिक्षा पद्धति से संस्कारों की उपज पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा पद्धति का मूल उद्देश्य पेशा उपार्जित करना ही रह गया और जब केवल पैसा उपार्जन ही उद्देश्य रह गया तो जीवन का उद्देश्य भी ब्लॉक हो गया है जीवन का उद्देश्य सा विद्या या विमुक्तए रहकर करके भोग विलासिता मात्र रह गई है अब इसमें अच्छे बुरे की जहां तक बात है कोई भी यही रास्ता भटकता है तो स्वभाविक है उसको परेशान होना ही पड़ेगा इसलिए जैसा आदमी कर्म करेगा फल उसके अध्ययन ही होने वाला है

bhagwan me gair vishwas ke din pratidin kyon badhte ja rahe hain badhte ja rahe hain kya ya ek accha sanket hai ya ek bura shagun aapne sahi likha hai bhagwan me vishwas karne walon ki sankhya din pratidin kam ho jaaye iska mul karan shiksha paddhatee se sanskaron ki upaj pichle kuch varshon me shiksha paddhatee ka mul uddeshya pesha upaarjit karna hi reh gaya aur jab keval paisa uparjan hi uddeshya reh gaya toh jeevan ka uddeshya bhi block ho gaya hai jeevan ka uddeshya sa vidya ya vimuktye rahkar karke bhog vilasita matra reh gayi hai ab isme acche bure ki jaha tak baat hai koi bhi yahi rasta bhatakta hai toh swabhavik hai usko pareshan hona hi padega isliye jaisa aadmi karm karega fal uske adhyayan hi hone vala hai

भगवान में गैर विश्वास के दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं बढ़ते जा रहे हैं क्या या एक अ

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राकेश

Journalist

0:26
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह कहना गलत है कि लोगों का भगवान पर से विश्वास था जाना है वह विश्वास नहीं कर रहे हैं समय के साथ कुछ बदलाव जरूर हुआ है लोग शायद पहले की तुलना में अब मंदिर जाना है याद आना कम हुआ है लेकिन ऐसा नहीं है कि विश्वास नहीं है हर कोई अपने अपने तरीके से भगवान को मानते

yah kehna galat hai ki logo ka bhagwan par se vishwas tha jana hai vaah vishwas nahi kar rahe hain samay ke saath kuch badlav zaroor hua hai log shayad pehle ki tulna me ab mandir jana hai yaad aana kam hua hai lekin aisa nahi hai ki vishwas nahi hai har koi apne apne tarike se bhagwan ko maante

यह कहना गलत है कि लोगों का भगवान पर से विश्वास था जाना है वह विश्वास नहीं कर रहे हैं समय क

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नमस्कार आपका पर्सनल है भगवान में गैर विश्वासी दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छा संकेत है या एक बुरा शुक्ल देखिए या अपने देखने का नजरिया है हमारे हिसाब से तो आज भगवान के प्रति लोगों की मान्यता और अधिक बढ़ती जा रही है आज नई जनरेशन भगवान को अच्छे तरीके से मान रही है और अपने कार्यों में उत्तरा की चीजों को शामिल कर रही है जैसे कि पूजा पाठ को परंतु हर किसी के मानने का और जाहिर करने का तरीका अलग होता है इसलिए समय के साथ कुछ बदलाव हुए हैं लेकिन उन्हें अंधविश्वास कहना या गैर विश्वासी कहना यह ठीक नहीं है क्योंकि किसी के अभाव और क्रियाओं से ही चीजों को नहीं मंचल सकता इसलिए आप अपनी यह धारणा बदले कि लोग भगवान के गैर विश्वासी हो रहे हैं आज आपको विश्वास नहीं होगा बहुत पढ़े लिखे लोग और जो बहुत अच्छा पैसा कमा रहे हैं जिनका परिवार बहुत समृद्ध है वह भी हमसे ज्योतिष के बारे में ज्ञान लेते हैं और अगर हम उन्हें कोई ऐसी बात बोलते हैं जो उन्हें माननी चाहिए तो वह पक्का मानते हैं जबकि उनकी पढ़ाई लिखाई में इन बातों का मजाक उड़ाया है वह कहते हैं विश्वास अलग चीज है और पढ़ाई अलग जगह पर है इसलिए आज हमारे जो प्लांट है वह बड़े से बड़े राजनेता और फिल्म चार और साथ-साथ साइंटिस्ट डॉक्टर इंजीनियर सभी क्षेत्रों के लोग हमसे मिलते हैं और फायदा उठाते हैं इसलिए उन्हें गैर विश्वासी नहीं कहना चाहिए धन्यवाद

namaskar aapka personal hai bhagwan me gair vishwasi din pratidin kyon badhte ja rahe hain kya yah ek accha sanket hai ya ek bura shukla dekhiye ya apne dekhne ka najariya hai hamare hisab se toh aaj bhagwan ke prati logo ki manyata aur adhik badhti ja rahi hai aaj nayi generation bhagwan ko acche tarike se maan rahi hai aur apne karyo me uttara ki chijon ko shaamil kar rahi hai jaise ki puja path ko parantu har kisi ke manne ka aur jaahir karne ka tarika alag hota hai isliye samay ke saath kuch badlav hue hain lekin unhe andhavishvas kehna ya gair vishwasi kehna yah theek nahi hai kyonki kisi ke abhaav aur kriyaon se hi chijon ko nahi manchal sakta isliye aap apni yah dharana badle ki log bhagwan ke gair vishwasi ho rahe hain aaj aapko vishwas nahi hoga bahut padhe likhe log aur jo bahut accha paisa kama rahe hain jinka parivar bahut samriddh hai vaah bhi humse jyotish ke bare me gyaan lete hain aur agar hum unhe koi aisi baat bolte hain jo unhe maanani chahiye toh vaah pakka maante hain jabki unki padhai likhai me in baaton ka mazak udaya hai vaah kehte hain vishwas alag cheez hai aur padhai alag jagah par hai isliye aaj hamare jo plant hai vaah bade se bade raajneta aur film char aur saath saath scientist doctor engineer sabhi kshetro ke log humse milte hain aur fayda uthate hain isliye unhe gair vishwasi nahi kehna chahiye dhanyavad

नमस्कार आपका पर्सनल है भगवान में गैर विश्वासी दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह

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Veer Bhupinder Singh Ji

The Visionary, www.thelivingtreasure.org

1:05
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इस दुनिया में गैर विश्वासी लोग बढ़ रहे हैं इसका कारण है कि जिन लोगों ने अपने आप के ऊपर लेबल गया ओके हम घर भी है उनका व्यवहार अच्छा नहीं जो धर्मी लोग अपने आपको कहलाते हैं धर्म का पता अपने माथे पर लगा कर चलते हैं यह सारी दुनिया को बताते हैं कि हम धर्म वाले आएंगे हमारी भेजो रखी है कि हमारी इसके बदले में कोई की गॉड हाई क्वालिटी के साथ लोगों को सुख मिले और बाकी लोग महसूस कर सके घर आज की दुनिया में वर्ल्ड वार से लेकर जो कुछ भी हो रहा है वह कम्युनल ही ट्रेड के कारण हो रहा है तभी दुनिया में धर्म के नाम पर भगवान के नाम पर विश्वास करता जा रहा है और लोग बुरे व्यवहार की तरफ अट्रैक्ट हो रहे हैं इसका मतलब इसकी रचना राम का नाम अपने माथे पर लिख आने वाली ओके ऊपर आती है उनका भी होगा अच्छा

is duniya mein gair vishwasi log badh rahe hain iska karan hai ki jin logo ne apne aap ke upar lebal gaya ok hum ghar bhi hai unka vyavhar accha nahi jo dharami log apne aapko kehlate hain dharm ka pata apne mathe par laga kar chalte hain yah saree duniya ko batatey hain ki hum dharm waale aayenge hamari bhejo rakhi hai ki hamari iske badle mein koi ki god high quality ke saath logo ko sukh mile aur baki log mehsus kar sake ghar aaj ki duniya mein world war se lekar jo kuch bhi ho raha hai vaah communal hi trade ke karan ho raha hai tabhi duniya mein dharm ke naam par bhagwan ke naam par vishwas karta ja raha hai aur log bure vyavhar ki taraf attract ho rahe hain iska matlab iski rachna ram ka naam apne mathe par likh aane wali ok upar aati hai unka bhi hoga accha

इस दुनिया में गैर विश्वासी लोग बढ़ रहे हैं इसका कारण है कि जिन लोगों ने अपने आप के ऊपर लेब

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान में गैर विश्वासी दिन-प्रतिदिन बिल्कुल नहीं बोल रहे हैं और यह सोचना और भी जानना गलत है बल्कि इस समय कलयुग का समय है और मध्यम युग चल रहा है कलयुग में और इसमें तो भगवान के प्रति और दिन पर दिन प्रति भक्ति बढ़ती जा रही है और यह एक अच्छा संकेत है इसे आप बुरा संकेत कतई नहीं मान सकते और दिन प्रतिदिन ईश्वर के प्रति लोगों की भक्ति बढ़ रही है

bhagwan mein gair vishwasi din pratidin bilkul nahi bol rahe hain aur yah sochna aur bhi janana galat hai balki is samay kalyug ka samay hai aur madhyam yug chal raha hai kalyug mein aur isme toh bhagwan ke prati aur din par din prati bhakti badhti ja rahi hai aur yah ek accha sanket hai ise aap bura sanket katai nahi maan sakte aur din pratidin ishwar ke prati logo ki bhakti badh rahi hai

भगवान में गैर विश्वासी दिन-प्रतिदिन बिल्कुल नहीं बोल रहे हैं और यह सोचना और भी जानना गलत ह

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J.P. Y👌g i

Psychologist

9:39
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान में गैर विश्वास से दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह शायद अलग हुआ इसमें हमारी चिंता कोई विषय नहीं बनता है कि लोग यह विश्वास हो रहे भगवान के प्रति भगवान तो दूर की चीजें हैं और ऐसे लोग शायद हम पर भी विश्वास नहीं कर सकते होंगे भगवान है कहां सपोज दैट हम यही कहते भगवान है भी नहीं लेकिन अपने आप कोशिश तो मान सकते हैं हमारी कहीं भी ऐसी चीज शब्द रूप में यह प्रकट नहीं है या हमारे अंदर ऐसा लग रहा है कि हम अच्छे पर चीजों को सर्जन कर रहे हैं तो वह वह अक्षांश अगर हमारे अंदर सूरत हो रहा है तो वह उसकी भी तो हम मान्यता दे सकते हैं तो हाथ में तत्वों से बिछड़ा हुआ कर आत्मा से विश्वकर्मा समाज बन रहा है तो दुख के सादर सबसे ज्यादा भागीदार भुगतने वाले व क्योंकि हमारे कोई एक ऑप्शन मिला रहता है जहां हम अपने को विराम और शांति से और कुछ सारा पाते सपोर्ट लेते हैं और हमारे को दृढ़ता मिलती है जब हमें ऐसी चीज का हाथ कर देंगे तो हमें किसी भी दुख से परेशान होकर गलत कदम पर चल सकते हैं क्योंकि भरोसा खत्म हो जाता है जगत में मनुष्य मनुष्य के लिए सबसे बड़ा कठिन और कुटिल है इसका भजना बहुत कठिन हो जाता है और मनुष्य शैतान शेयर उड़ता होते हैं कोई ऐसा नहीं होता सुपरहिट दर्शन किसी भी प्रत्यक्ष व्यक्ति को देखकर उसके व्यक्तिगत के बारे में समझा जा सकता हूं जब तक उसका प्रदर्शन भाव प्रकट नहीं होता तब तक कोई समझ आती नहीं है तो इसमें हमारा चिंता का कोई विषय नहीं बनता जो लोग इस सपोर्ट में है भगवान के विश्वास के सहारे में कुछ ना कुछ उसके अंदर शांति और धैर्य अवश्य रहती है और उसके अंदर विवेक भी रहता है और स्थिरता भी रहती है अगर हम ऐसा नहीं समझ कर चल पा रहे हैं विश्वास और आस्था पर नहीं रह पा रहे हैं तो अपनी बुद्धि खोपड़ी और अपने कर्म के क्रम भोक्ता होते हैं और वह भोक्ता पर करता पंख आधार बनता जो करता है तो वही कर्मों के फलों का भक्ताई बनता है तो यह नहीं है कि कौन सा कर्म अच्छा है कौन सा बुरा है किस कर्म से सुख मिलेगा किस काम से दुख मिलेगा किस ज्ञान से मुक्ति मिलेगी तो और के कपड़ों का तो ऐसा परते होती है जिस प्रकार प्याज की झिल्ली चढ़ी रहती है कि पर एक परत बनी रहती है इस तरह मनुष्य की मस्त-मस्त विवेचना है वीडियो तो वह इस प्रकार इतने पर्दे पर पता चला जा रहा है कि उसी में ही उसका पर्दाफाश नहीं हो पाता एक छोटा था तो दूसरा दूसरा छोड़ा था और वह भी उसी गुणों समूह का बना हुआ पीछे सूक्ष्मता में चला जाता है तो उसका भंजन होता ही नहीं है तो मनुष्य के व्यवहार में घटित हो रहा है काल के दरमियान जी रहा है लेकिन जब प्रकृति का एक नियम है कि जो रासायनिक परिवर्तन काल के अनुसार हो रहा है वह भी हो रहा है तो उसका असर पड़ता है बेशर्म नहीं है और जबकि मंकी अंदर किसी भी जीवात्मा के अंदर यह नहीं होता कि वह मृत्यु को चाहे वह सास्वत एक दृष्टा के रूप में हमेशा बना रहना चाहता है शरीर के माध्यम से हो शाहरुख हमेशा चाहता है तो इसी प्रकार यह सारी चीज माया की तरह है जो फैली हुई है सजीव का अच्छा दिन क्यों है और जी को एक गलत रजिस्टर है उसके अंदर है उसी प्रकार यह संसार के अंदर भी भी यही जब तक ज्ञान से अज्ञानता की ओर नहीं निकलता तब तक वह उसके बाद एक है एक बल्ब के अंदर संसार की जितनी भी बेच रहा जो हमारी समिति में आ रही है और जा रही है बुद्धि में आधा यह सब एक बल्ब के अंदर है तो इसका निकालने इस प्रकृति खुद कर देती है जब भी मृत्यु के प्रावधान की रचना है इसी में वह तभी उसका भंजन होता है और फिर दोबारा वह जनम के फेरे में आता है इस प्रकार से समझना बहुत जरूरी होता है और जो हमारे पे जगत का पंछी भावनाए होती है मेरा नाम यह है मेरा देश है मेरा मकान यह है मेरा यह चीज है और यह संसार इक्विटी से जो अच्छा अधिक रहता है लेकिन जूता तू की दृष्टि से होता है वह जानते हैं कि यह प्रकृति प्रक्रिया है इसके नेता हमारा उद्गम है लेकिन मूल्य हमारा सीड्स चेतन है वह अंश खुशी ब्रह्म का अंश है किसी और क्षेत्र का अंश है इस उसको समझ पाना मुश्किल पड़ता है तो हम वास्तविक रूप से अपने रिलेशनशिप को नहीं समझ पाते हैं जैसे कि मां-बाप से उत्पत्ति हुई और मां-बाप हमारा सारा जगत में बनकर कर रहे हैं लेकिन आध्यात्मिक चरणों में यह भी भजन हो जाता है दूसरी चीज आती है कि वास्ते कौन है और हम ज्यादा दाधिकार जीव के महत्व का में जीते हैं जो हम प्रभाव पर आओ ज्ञान परीक्षेत्र में नहीं प्रवेश हो पाते हैं ना हमेशा ज्ञान संस्कार मिला होता है ना ही वातावरण से जल्द रहता है ऐसा जिसमें हम व्यतीत करते हैं अपने जीवन के पलों को पुलिस से जो हट करके जिसके अंदर ऐसा संस्कार गया है जो अतिक्रमण कर गया है वह लोग उस क्षेत्र में अपने को स्थापित रखते हैं और वही विष इस नजारे को समझते हैं बखूबी अन्यथा सब लोग इस जगत में लिप्त हो रहते हैं तो निर्मल लिप्त अवस्था के अंदर चेतन के तो उसकी हंता उसमें कर्म बंध नहीं होता है यह मुक्ति का एक दर्शन होता है और फिर जब इतनी हमारे अंदर जब सहूलियत मिलती है शांति और चित्त आकाश निर्मल होता है तब भगवान की योजना के बारे में पाठ आता है तो यह क्रम आगे होना आत्मक अनुभूति पर होता है और जो गिने-चुने स्तर के लोगों में इसकी पकड़ होती यार नेताजी जनसाधारण सामान्य में समझने की योग्यता नहीं आ पाती है तो यू जगत में जिन परेशानियों से जिन शरीर सबवे को से जूझ रहा है उसी में फंसा हुआ है तो यह जानते हुए भी कि जिस प्रकृति सर्फर्स प्रमाण देने की जन्म भी हो रहा है मृत्यु भी हो रही है लेकिन का प्रयोजन क्या जा रहा है क्या नहीं हो रहा है तो यह समझ के ऊपर बात आती है तो इन शब्दों से ऊपर कुछ जानने की चेष्टा कर रहे हैं वह अपनी दूसरी पद गरिमा में स्थापित हो रहा है तो मैं यही कहूंगा कि और 1 दिन इस विश्वास में आना ही पड़ेगा अरे भगवान नहीं तो कम से कम सता के अंत करण में तो विश्वास स्थापित होगा और जब सत्ता में होने लगेगा तो वह दिशा अपने आप ही उसको संकेत में दे देगी कि हर कोई श्रेष्ठ है कि नहीं है और उसे भी इस सारी स्थापना हुई है चाय संत महात्मा सिद्ध जितने भी है वही पर उसी बिंदु धारा पर स्थित होते हैं तो वहीं प्रक्रिया के माध्यम से होता है मैं यही कहूंगा धन्यवाद हमें चिंता की कोई बात नहीं है और सेल्फ होते चले गए क्योंकि आजकल आदमी ही देख रहा है कि जिन प्रश्नों में सामान्य जन परेशान हो जाते और दूसरा उसे भी भीषण संकट में भी स्थित बना रहता तो उनके नेता ताकि किस कारण से स्थिति बनी हुई है उसकी जो स्थल है तो यही कहूंगा यह समझने का अवलोकन करने का अपना रुझान है जो इन अंत करण संस्कार वाले हैं वह उनके लिए है और ऐसी कोई बात नहीं है और रास्ता 1 दिन उसी पर आना पड़ेगा चाहे पटक के या दुख दर्द के माध्यम से और यही अंतिम रूप है मैं इतना ही कहूंगा धन्यवाद सुबह का अच्छा है

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kahunga dhanyavad hamein chinta ki koi baat nahi hai aur self hote chale gaye kyonki aajkal aadmi hi dekh raha hai ki jin prashnon mein samanya jan pareshan ho jaate aur doosra use bhi bhishan sankat mein bhi sthit bana rehta toh unke neta taki kis karan se sthiti bani hui hai uski jo sthal hai toh yahi kahunga yah samjhne ka avalokan karne ka apna rujhan hai jo in ant karan sanskar waale hai vaah unke liye hai aur aisi koi baat nahi hai aur rasta 1 din usi par aana padega chahen patak ke ya dukh dard ke madhyam se aur yahi antim roop hai itna hi kahunga dhanyavad subah ka accha hai

भगवान में गैर विश्वास से दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह शायद अलग हुआ इसमें ह

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है भगवान में गैर विश्वासी दिन-प्रतिदिन के बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छा संकेत है या एक बुरा संघ ने भी संकेत बुरा भी संकेत है मगर में जितने मानते हैं अच्छा संकेत बुरा मानता है नहीं मानते सुबह सा गुण धर्म के हिसाब से गिना जा सकता है नई दुनिया फिर से जी नई शुरुआत होगी संयुक्त सचिव क्लिप चल रहा है सतयुग आएगा अच्छा बीमा लीजिए शगुन बीमा लीजिए जैसे मानना है

aapka prashna hai bhagwan mein gair vishwasi din pratidin ke badhte ja rahe kya yah ek accha sanket hai ya ek bura sangh ne bhi sanket bura bhi sanket hai magar mein jitne maante hain accha sanket bura manata hai nahi maante subah sa gun dharm ke hisab se gina ja sakta hai nayi duniya phir se ji nayi shuruat hogi sanyukt sachiv clip chal raha hai satayug aayega accha bima lijiye shagun bima lijiye jaise manana hai

आपका प्रश्न है भगवान में गैर विश्वासी दिन-प्रतिदिन के बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छा सं

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Bhuvi Jain

Engineer, Educator, Writer

4:04
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तू नहीं समझती हूं कि यह अंदर एक कशमकश है हरित जो जवान जो आजकल जो सोचते हैं जो युवा अंदर मन में कशमकश है कि भगवान चुप है यह रोल भी मतलब विनोद जालिम जो भगवान भी है और अच्छे वाले भगवान यह दोनों एक कैसे हो इसकी वजह से आशा की जो युवा है वह अब भगवान से विश्वास कम होने लगे तो कोई दुर्घटनाएं है और इतनी चीजों के बारे में सुनने में आता है दुनिया में इतना कुछ खराब हो रहा है अच्छे से ज्यादा खराब हो रहा है तो उससे लगता है कि अगर वाकई नहीं भगवान है तो वह क्या ऐसी चीजें जो भी हुआ है उनके दिमाग में यह दूसरी बात जो हमारा जो जनरेशन हमारे से पहले वाला मेरे से पहले वाला जो जेनरेशन है वह काफी कर्मा पर विश्वास करता था पिछले जन्म के कर्म अच्छे नहीं होंगे इसलिए इस जन्म में अपने आप को दिलासा देते थे कि हां भगवान है जो ऊपर हिसाब रखें और मैंने पिछले जन्म में कुछ खराब किया होगा अब तो युवा है उनकी बीच में यह चीज हो समझ नहीं पा रहे कि एक कर्म वाली जो बात है यह क्या जो मैंने आज अच्छा किया तो मुझे उसका नतीजा आज मिलना चाहिए मैं क्यों अगले जन्म क्यों इंतजार क्यों कौन बड़ा इंटरेस्टिंग सुनाओ मीनिंग ऑफ स्पिरिचुअल ग्रोथ फ्रॉम काफी युवा पीढ़ी जो है वह उसकी तरफ जा रही है बड़ी हमें अपने आपको हिंदू पहले जो था जो कि भगवान पर विश्वास है कि कोई स्पिरिचुअल है कि हम अपने आप को सुधारें तो फिर दुनिया निबंध इन हार्मनी विद नेचर दुनिया अपने आप सुधर जाएगा मगर दूसरों के साथ रहना चाहती रखेंगे फिर वह हमारी स्पिरिचुअल ग्रोथ भगवान है कि हम दूसरों के साथ अच्छी तरह से पेश आएं अपने अपने आप को सुधारो है जो है उसको आफ स्पिरिचुअल मारने लगे ना कि एक भगवान पर विश्वास और मंदिर में जाकर घंटी बजाना पूजा करना इतना नहीं हुआ फिर इसमें विश्वास नहीं करती वह आत्म चिंतन में विश्वास करने की यह नहीं करना चाहिए तो बच्चे पूछेंगे कि अगर तेरी कि नहीं करना तो नहीं करना आजकल के बच्चे क्यों ज्यादा कुछ उपाय आई डोंट नो वाले की हमसे हमें पता नहीं है इसलिए हम इसके बारे में हमारा कोई अभिप्राय नहीं है भगवान है तो फिर अगर ऐसे भगवान क्यों हैं और नहीं है तो फिर भगवान किस तरीके से हमारे पास प्रूफ दोनों तरीके से भगवान थे भगवान में विश्वास नहीं करते क्योंकि भगवान इतनी क्रुएल कैसे हो सकने की छोटे-छोटे बच्चों को के आठवें होल हो गया इस तरीके बच्चे पैदा हो रहे हैं यह सब का क्या इसमें नेशन है आजकल के बच्चे वह कर्म पर इतना विश्वास नहीं करते वह यही कहते हैं कि दुनिया तो अपने आप से साइंटिफिक तरीके से चल रही है ना कि कोई भगवान को देख रहे हैं कि पूरा

tu nahi samajhti hoon ki yah andar ek kashmakash hai harit jo jawaan jo aajkal jo sochte hain jo yuva andar man mein kashmakash hai ki bhagwan chup hai yah roll bhi matlab vinod jalim jo bhagwan bhi hai aur acche waale bhagwan yah dono ek kaise ho iski wajah se asha ki jo yuva hai vaah ab bhagwan se vishwas kam hone lage toh koi durghatanaen hai aur itni chijon ke bare mein sunne mein aata hai duniya mein itna kuch kharab ho raha hai acche se zyada kharab ho raha hai toh usse lagta hai ki agar vaakai nahi bhagwan hai toh vaah kya aisi cheezen jo bhi hua hai unke dimag mein yah dusri baat jo hamara jo generation hamare se pehle vala mere se pehle vala jo generation hai vaah kaafi karma par vishwas karta tha pichle janam ke karm acche nahi honge isliye is janam mein apne aap ko dilasa dete the ki haan bhagwan hai jo upar hisab rakhen aur maine pichle janam mein kuch kharab kiya hoga ab toh yuva hai unki beech mein yah cheez ho samajh nahi paa rahe ki ek karm wali jo baat hai yah kya jo maine aaj accha kiya toh mujhe uska natija aaj milna chahiye main kyon agle janam kyon intejar kyon kaun bada interesting sunao meaning of Spiritual growth from kaafi yuva peedhi jo hai vaah uski taraf ja rahi hai badi hamein apne aapko hindu pehle jo tha jo ki bhagwan par vishwas hai ki koi Spiritual hai ki hum apne aap ko sudhare toh phir duniya nibandh in harmony with nature duniya apne aap sudhar jaega magar dusro ke saath rehna chahti rakhenge phir vaah hamari Spiritual growth bhagwan hai ki hum dusro ke saath achi tarah se pesh aaen apne apne aap ko sudharo hai jo hai usko of Spiritual maarne lage na ki ek bhagwan par vishwas aur mandir mein jaakar ghanti bajana puja karna itna nahi hua phir isme vishwas nahi karti vaah aatm chintan mein vishwas karne ki yah nahi karna chahiye toh bacche puchenge ki agar teri ki nahi karna toh nahi karna aajkal ke bacche kyon zyada kuch upay I dont no waale ki humse hamein pata nahi hai isliye hum iske bare mein hamara koi abhipray nahi hai bhagwan hai toh phir agar aise bhagwan kyon hain aur nahi hai toh phir bhagwan kis tarike se hamare paas proof dono tarike se bhagwan the bhagwan mein vishwas nahi karte kyonki bhagwan itni kruel kaise ho sakne ki chote chhote baccho ko ke aathven hole ho gaya is tarike bacche paida ho rahe hain yah sab ka kya isme nation hai aajkal ke bacche vaah karm par itna vishwas nahi karte vaah yahi kehte hain ki duniya toh apne aap se scientific tarike se chal rahi hai na ki koi bhagwan ko dekh rahe hain ki pura

तू नहीं समझती हूं कि यह अंदर एक कशमकश है हरित जो जवान जो आजकल जो सोचते हैं जो युवा अंदर मन

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Shashi

Author, Spiritual Blogger

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मुझे नहीं लगता कि धरती लोगों का विश्वास चुनाव लड़ रहे हैं आजकल की लड़कियां नौजवान युवा को श्री की दृष्टि से देखते थे इंटरनेशनल योगा डे मनाया जाता है कि भौतिक सुख भी बहुत सारी ऐसी चीज जिसको जो हमको खुशी दे सकती है अजी का बहुत बड़ा संकट मुझे आज कल के स्कूल के लड़के लड़कियों के दिखता है जो लोग पुराने जमाने की आप अगर अनुलोम-विलोम कर रहे हैं आप अगर जिंदा कर रहे हैं आप आप स्वीकार करें तथा पाश्चात्य जगत बहुत अच्छा

mujhe nahi lagta ki dharti logo ka vishwas chunav lad rahe hain aajkal ki ladkiyan naujawan yuva ko shri ki drishti se dekhte the international yoga day manaya jata hai ki bhautik sukh bhi bahut saree aisi cheez jisko jo hamko khushi de sakti hai aji ka bahut bada sankat mujhe aaj kal ke school ke ladke ladkiyon ke dikhta hai jo log purane jamane ki aap agar anulom vilom kar rahe hain aap agar zinda kar rahe hain aap aap sweekar kare tatha pashchayat jagat bahut accha

मुझे नहीं लगता कि धरती लोगों का विश्वास चुनाव लड़ रहे हैं आजकल की लड़कियां नौजवान युवा को

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Mahesh Kumar

M.no 8360366118.Business Owner,spiritual.social Worker.

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विकी तो आपने कहा है कि दिन में आपकी बात बिल्कुल सही है दिन प्रतिदिन ऐसे लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है उसको परमेश्वर पर विश्वास नहीं कर रहे हैं यह तो बात आज हो रही है इसके बारे में बाइबल में पहले लिखा हुआ है जी बाय द स्टडी करेंगे तो बाइबिल में से में लिखा है कि अंतिम दिनों में ऐसी कठिन समय आएंगे कि बहुत सारे ऐसे लोगों के चोप रमेश को नहीं मानेंगे परमेश्वर से दूर होना चाहेंगे डेट घमंडी खुद को चाहने वाले तू ऐसी बहुत सारी बातें लिखी हुई है भाई बस स्टडी करेंगे तो उसमें आपको समझ में आएगा बाइबिल में दो नीचे में पुराना लीजिए मरने या नहीं अगर आप ध्यान केंद्रित करेंगे तो ज्यादा 10 शेगाव वह यशस्वी के आने की बात थी उसमें इंफॉर्मेशन है और पुरानी में प्रभु यीशु के आने से पहले इंफॉर्मेशन स्टार्ट करें कुछ लुक्का यूनियन का चैप्टर वहां से पढ़िए आपको परमेश्वर के बारे में नॉलेज मिलेगी और पता लगा कि दिन भर दिन क्यों लोगों का प्रेम ठंडा पड़ता बैगन में यह भी लिखा कि हम तो कितने लोगों का प्रेम ठंडा हो जाएगा तो परमेश्वर के प्रति लोगों का प्रेम ठंडा हो जाएगा यह बात बड़ी इस्पात की बारे में लिखती है लोगों को प्रेम परमेश्वर के प्रति ठंडा हो रहा है तो आप स्टडी करिए तो आपको सवाल का आंसर और अच्छी तरह से मिल जाएगा

vicky toh aapne kaha hai ki din me aapki baat bilkul sahi hai din pratidin aise logo ki tadad badhti ja rahi hai usko parmeshwar par vishwas nahi kar rahe hain yah toh baat aaj ho rahi hai iske bare me bible me pehle likha hua hai ji bye the study karenge toh bible me se me likha hai ki antim dino me aisi kathin samay aayenge ki bahut saare aise logo ke chop ramesh ko nahi manenge parmeshwar se dur hona chahenge date ghamandi khud ko chahne waale tu aisi bahut saari batein likhi hui hai bhai bus study karenge toh usme aapko samajh me aayega bible me do niche me purana lijiye marne ya nahi agar aap dhyan kendrit karenge toh zyada 10 shegav vaah yashashvi ke aane ki baat thi usme information hai aur purani me prabhu yeshu ke aane se pehle information start kare kuch luckka union ka chapter wahan se padhiye aapko parmeshwar ke bare me knowledge milegi aur pata laga ki din bhar din kyon logo ka prem thanda padta baigan me yah bhi likha ki hum toh kitne logo ka prem thanda ho jaega toh parmeshwar ke prati logo ka prem thanda ho jaega yah baat badi ispaat ki bare me likhti hai logo ko prem parmeshwar ke prati thanda ho raha hai toh aap study kariye toh aapko sawaal ka answer aur achi tarah se mil jaega

विकी तो आपने कहा है कि दिन में आपकी बात बिल्कुल सही है दिन प्रतिदिन ऐसे लोगों की तादाद बढ़

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बहुत सही कहा आपने आज के इस भौतिकता वादी युग में भगवान में विश्वास ना करने वाले लोगों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है भौतिकता वादी इस युग में पैसा कमाने की आपाधापी में लोग अपने मानवीय मूल्यों को भूलते जा रहे हैं और ऐसे आचरण कर रहे हैं जो समाज देश और परिवार के हित में नहीं है मानवीय मूल्यों का जो यह शरण हुआ है वह धर्म से विमुख होने के कारण ही रहा है क्योंकि धर्म का अर्थ होता है धारण करना और वह भी 7 गुणों को धारण करना अच्छे गुणों को धारण करना ही धर्म कहलाता है जैसे हिंदू सनातन धर्म बट वृक्ष या बरगद पेड़ या पीपल वृक्ष भगवान नारायण का अवतार बताया गया है क्योंकि विज्ञान भी यह सिद्ध कर चुकी है कि यह 24 घंटे ऑक्सीजन देता है और ऑक्सीजन मारी प्राण भाई हुए और उसी तरह भगवान जो नारायण आया था विष्णु जग के पालन करता बताया कि उसी तरह जो तुलसी का पौधा होता है उसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं इसलिए उसकी पूजा का विधान और हर घर में तुलसी का पौधा रखने को धर्म से जोड़ा गया था इसी तरह पानी की बचाकर उपयोग करना जैसी बातों को धर्म से जोड़ा गया जिससे व्यक्ति थोड़ा डरता था और मानवीय मूल्यों पर आधारित व्यवहार करता था आपसी प्रेम आपसी सद्भाव हार और एक दूसरे के संबंधों को समझना एक दूसरे के लिए त्याग करना जैसे * में नहीं थे लेकिन आज जब धर्म से विमुख हो रहा है तो पारिवारिक जो संबंध में वह टूट रहे हैं केवल पैसा कमाने की आपाधापी ए लोग पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं अपने आपको बेच सकते हैं पारिवारिक संबंधों को तोड़ सकते हैं देश के सम्मान को गिरवी रख सकते हैं इसका प्रमुख कारण भी है धर्म से विमुख होने के अपने कारण उनमें से सबसे पहले जो हमारे धर्म गुरु हैं उनका गैर मर्यादित आचरण है वह जब गैर मर्यादित आचरण करते हैं तो लोगों का विश्वास टूटता है चाहे वह हिंदू धर्म से हूं मुस्लिम धर्म से ऊंचा अन्य धर्म से हो कई धर्म गुरुओं का भ्रष्टाचार में लिप्त होना और अन्य जो गैर मरिया देते हैं अर्थात जिनको मैं नहीं कह सकता और आप लोग जानते हैं ऐसे आचरण से लोगों का विश्वास धर्म से उठता जा रहा है आवश्यकता है कि जो हमारे धर्म गुरु है वह धन लोलुप और गैर मर्यादित आचरण करना छोड़ दें तभी हम इस सनातन संस्कृति को बचाकर रख सकते हैं और लोगों को मर्यादित आचरण करने के लिए प्रेरित कर सकते धन्यवाद

bahut sahi kaha aapne aaj ke is bhautikata wadi yug me bhagwan me vishwas na karne waale logo ki sankhya pratidin badhti ja rahi hai bhautikata wadi is yug me paisa kamane ki apadhapi me log apne manviya mulyon ko bhulte ja rahe hain aur aise aacharan kar rahe hain jo samaj desh aur parivar ke hit me nahi hai manviya mulyon ka jo yah sharan hua hai vaah dharm se vimukh hone ke karan hi raha hai kyonki dharm ka arth hota hai dharan karna aur vaah bhi 7 gunon ko dharan karna acche gunon ko dharan karna hi dharm kehlata hai jaise hindu sanatan dharm but vriksh ya bargad ped ya pipal vriksh bhagwan narayan ka avatar bataya gaya hai kyonki vigyan bhi yah siddh kar chuki hai ki yah 24 ghante oxygen deta hai aur oxygen mari praan bhai hue aur usi tarah bhagwan jo narayan aaya tha vishnu jag ke palan karta bataya ki usi tarah jo tulsi ka paudha hota hai usme entibaiktiriyal aur antibiotic gun paye jaate hain isliye uski puja ka vidhan aur har ghar me tulsi ka paudha rakhne ko dharm se joda gaya tha isi tarah paani ki bachakar upyog karna jaisi baaton ko dharm se joda gaya jisse vyakti thoda darta tha aur manviya mulyon par aadharit vyavhar karta tha aapasi prem aapasi sadbhav haar aur ek dusre ke sambandhon ko samajhna ek dusre ke liye tyag karna jaise me nahi the lekin aaj jab dharm se vimukh ho raha hai toh parivarik jo sambandh me vaah toot rahe hain keval paisa kamane ki apadhapi a log paise ke liye kuch bhi kar sakte hain apne aapko bech sakte hain parivarik sambandhon ko tod sakte hain desh ke sammaan ko girvi rakh sakte hain iska pramukh karan bhi hai dharm se vimukh hone ke apne karan unmen se sabse pehle jo hamare dharm guru hain unka gair maryadit aacharan hai vaah jab gair maryadit aacharan karte hain toh logo ka vishwas tootata hai chahen vaah hindu dharm se hoon muslim dharm se uncha anya dharm se ho kai dharm guruon ka bhrashtachar me lipt hona aur anya jo gair moryya dete hain arthat jinako main nahi keh sakta aur aap log jante hain aise aacharan se logo ka vishwas dharm se uthata ja raha hai avashyakta hai ki jo hamare dharm guru hai vaah dhan lolup aur gair maryadit aacharan karna chhod de tabhi hum is sanatan sanskriti ko bachakar rakh sakte hain aur logo ko maryadit aacharan karne ke liye prerit kar sakte dhanyavad

बहुत सही कहा आपने आज के इस भौतिकता वादी युग में भगवान में विश्वास ना करने वाले लोगों की सं

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भगवान की जो है उसमें जो है जिस प्रकार के माया का जवाब है उसको माया के जो है प्रभाव और मकान के बारे में प्रकृति मैसेज भेजो है अपने क्षेत्रों पर मनुष्य अपने जीवन को अपने अनुसार जीने का प्रयास करता है मनुष्य आभास होता है कि उसे सबसे बड़ी जो शक्ति खत्म थोड़ी सकती है इस अवसर पर स्वीकार कर लेना चाहिए और जयंत कमाए मैं उसको तुरंत स्वीकार कर उनके चिंतन मनन आराधना उपासना और अन्य व्यक्ति और अनुभवों के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास करता है ऐसा कहा जाता है कि राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट अंत काल पछतायेगा जब प्राण जाएंगे छूट फोन सुमित कॉलेज में जब अर्थव्यवस्था के पश्चात उसे आभास होता है उसका के पश्चात ऐसे कार्यक्रम आना राजनगर पन का प्यार करता है और उनको जैसे मुंह से जीवन मरण और इन सभी बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करने का प्रयास करता है जिसके अंदर हकीकत में तो यही है मनुष्य अपने जीवन में जो है जब तक उसे मुझे इस बात का आभास नहीं होता कि वह अपने जीवन में अधूरा महसूस करता है तब तक वह भक्ति और भगवान की भक्ति से जो है और सभी प्रकार के आध्यात्म और आराधना उपासना से दूर रहता है और अंत में जब उसे ज्ञान होता है कि इससे बड़ी शक्ति जो है वह कर सकती है स्वीकार करो भेजो है आराधना उपासना चिंतन मनन कर उसे प्राप्त करना चाहिए भक्ति के मार्ग की ओर अग्रसर होकर भगवान समाप्त करने का प्रयास करता है यही है मनुष्य मर जाता है कि लंबाई जाता है इस प्रकार से जो मनुष्य अपने कार्यों द्वारा जाना जाता है खामोशी ज्ञान होता है और वहां भगवान प्राप्त करने के बाद सब करते हैं कि धन्यवाद

bhagwan ki jo hai usme jo hai jis prakar ke maya ka jawab hai usko maya ke jo hai prabhav aur makan ke bare me prakriti massage bhejo hai apne kshetro par manushya apne jeevan ko apne anusaar jeene ka prayas karta hai manushya aabhas hota hai ki use sabse badi jo shakti khatam thodi sakti hai is avsar par sweekar kar lena chahiye aur jayant kamaye main usko turant sweekar kar unke chintan manan aradhana upasana aur anya vyakti aur anubhavon ke madhyam se prapt karne ka prayas karta hai aisa kaha jata hai ki ram naam ki loot hai loot sake toh loot ant kaal pachatayega jab praan jaenge chhut phone sumit college me jab arthavyavastha ke pashchat use aabhas hota hai uska ke pashchat aise karyakram aana rajnagar pan ka pyar karta hai aur unko jaise mooh se jeevan maran aur in sabhi bandhanon se mukt hokar moksha prapt karne ka prayas karta hai jiske andar haqiqat me toh yahi hai manushya apne jeevan me jo hai jab tak use mujhe is baat ka aabhas nahi hota ki vaah apne jeevan me adhura mehsus karta hai tab tak vaah bhakti aur bhagwan ki bhakti se jo hai aur sabhi prakar ke aadhyatm aur aradhana upasana se dur rehta hai aur ant me jab use gyaan hota hai ki isse badi shakti jo hai vaah kar sakti hai sweekar karo bhejo hai aradhana upasana chintan manan kar use prapt karna chahiye bhakti ke marg ki aur agrasar hokar bhagwan samapt karne ka prayas karta hai yahi hai manushya mar jata hai ki lambai jata hai is prakar se jo manushya apne karyo dwara jana jata hai khamoshi gyaan hota hai aur wahan bhagwan prapt karne ke baad sab karte hain ki dhanyavad

भगवान की जो है उसमें जो है जिस प्रकार के माया का जवाब है उसको माया के जो है प्रभाव और मकान

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Arpit Kumar Mishra

Vocalist, Ghazal, Bhajan &classical

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मुझे नहीं लगता है कि ऐसा है भगवान जिगर विश्वासी दिन तक दिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं ऐसा बिल्कुल नहीं है इतने सारे टेस्ट हुए वैज्ञानिकों ने भी बहुत सारी हिंदू या जो हमारी प्राचीन सभ्यताएं भगवान से जुड़ी हुई है धार्मिक चीजें चीजों से जुड़ी हुई वह उनका टेस्ट किया गया वैज्ञानिकों के द्वारा और वह कहीं ना कहीं सत्य साबित हो रही है सच साबित हो रही है इसमें लोग की मान्यताएं और बढ़ती जा रहे हैं ना की गति जारी और सबका अपना देखने का नजरिया अब अपने अपने हिसाब से देख लेना अगर कोई एलर्जी मानता है एलर्जी सकती है उसे या तो नेगेटिव एनर्जी से विश्वास होगा है नेगेटिव एनर्जी उसकी बहुत सारी रानी कहां एयरफोर्स प्रेत या कुछ ऐसी चीज मांगता है सजा लगना और कई जगह कोई मान लेता है क्योंकि एक मानना ही होगा यार विश्वास नहीं होगा और अगर पॉजिटिव एनर्जी कुछ किसी के अच्छा बोलने से कोई कार्य करने से यह अच्छा इसका फल मिलता है या कोई शक्ति है या कुछ भी अगर इस तरह कोई मानता है तो यह एक विश्वास ही ऐसा मानने वाले बहुत सारे लोग और बहुत कम ऐसा नहीं मानते हैं मरने के ऊपर यह सब चीजें काम भी करती अगर आप विश्वास नहीं करेंगे तो वह सारी चीजें आपको फिर नहीं हो पाएगी इसका फिर नहीं आएगा और वह सब पढ़कर आप मानते हैं तो आपको एहसास होगा आपको किस किस फिलिंग आएगी कि हां ऐसा है और यही सही मैंने बहुत सारे अच्छे अच्छे गुरुओं के प्रवचन सुनने हैं अच्छे-अच्छे मतलब अच्छे अच्छे का मतलब जो टीवी में आते हैं ऐसे सबसे लो उनकी जो बैठ गए हैं कथा बस रहे हैं सुनो जेल जिनको सारी दुनिया में जिसके फॉलो करते हैं और अच्छे वाले जांबिया छायावाद

mujhe nahi lagta hai ki aisa hai bhagwan jigar vishwasi din tak din kyon badhte ja rahe hain aisa bilkul nahi hai itne saare test hue vaigyaniko ne bhi bahut saari hindu ya jo hamari prachin sabhyatayen bhagwan se judi hui hai dharmik cheezen chijon se judi hui vaah unka test kiya gaya vaigyaniko ke dwara aur vaah kahin na kahin satya saabit ho rahi hai sach saabit ho rahi hai isme log ki manyatae aur badhti ja rahe hain na ki gati jaari aur sabka apna dekhne ka najariya ab apne apne hisab se dekh lena agar koi allergy maanta hai allergy sakti hai use ya toh Negative energy se vishwas hoga hai Negative energy uski bahut saari rani kaha airforce pret ya kuch aisi cheez mangta hai saza lagna aur kai jagah koi maan leta hai kyonki ek manana hi hoga yaar vishwas nahi hoga aur agar positive energy kuch kisi ke accha bolne se koi karya karne se yah accha iska fal milta hai ya koi shakti hai ya kuch bhi agar is tarah koi maanta hai toh yah ek vishwas hi aisa manne waale bahut saare log aur bahut kam aisa nahi maante hain marne ke upar yah sab cheezen kaam bhi karti agar aap vishwas nahi karenge toh vaah saari cheezen aapko phir nahi ho payegi iska phir nahi aayega aur vaah sab padhakar aap maante hain toh aapko ehsaas hoga aapko kis kis feeling aayegi ki haan aisa hai aur yahi sahi maine bahut saare acche acche guruon ke pravachan sunne hain acche acche matlab acche acche ka matlab jo TV me aate hain aise sabse lo unki jo baith gaye hain katha bus rahe hain suno jail jinako saari duniya me jiske follow karte hain aur acche waale jambiya chaayavaad

मुझे नहीं लगता है कि ऐसा है भगवान जिगर विश्वासी दिन तक दिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं ऐसा बिल्

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Pramodan swami (PK.VERMAN)

Prem Hi Dharm Hai Premi Karm Hi Prem Hi Safar

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आपने पूछा है भगवान में गहरा विश्वास ही दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छा संकेत है यही पुराण शकुन आपका सवाल आज की स्थिति के अनुसार सही है गैर विश्वासी और नास्तिक इसलिए बोल रहे हैं कि धर्म और अध्यात्म और परमात्मा की गलत शिक्षा के कारण उन पर थोपी गई श्रद्धा और आस्था के कारण न्यूज़ चंद लोग इसकी तरफ आकर्षित होते हैं तो उन्हें भी हम दबाव में आकर एहसास स्वीकार करवाते हैं जब भी कोई खुद को समर्पण करता है अध्यात्म में तो विचार करना उसका सही है लेकिन जब भी कोई धर्म पर यातायात में या परमात्मा के संबंध में कोई विचार करता है संदेश दर्शाता है तो उसे हम नास्तिक यह उसे अधर्मी कहने लगते हैं यहीं से गैर विश्व वासियों की संख्या बढ़ती है अगर किसी के मन में धर्म के प्रति है परमात्मा के प्रति संदेह है अगर उस संदेही को मिटा दें आत्मा से पूरी श्रद्धा से उसकी भक्ति में लीन हो जाएगा लेकिन अगर धर्म है परमात्मा के संबंध में कोई विचार करता है या कोई संदेह करता है तो उसे धर्म और समाज स्वीकार नहीं करता उसकी निंदा और उसकी आलोचना इतनी हो जाती है कि वह नास्तिक होने पर मजबूर हो जाता है अगर जिसके लिए हम अपना पूरा जीवन समर्पित कर रहे हैं अपने जीवन का आधार रख रहे हैं तो उस से जांच ना हमारा कर्तव्य है क्योंकि सबसे बड़ा धर्म अपने जीवन की रक्षा है अगर हम बिना सोचे समझे अपने जीवन का आधार रख देंगे बिना किसी परवाह के तो आगे क्या होगा क्या नहीं होगा इस बंदे मन में रहता है अगर यह संदेह कोई मिटा दे तो यकीनन हर एक व्यक्ति अध्यात्म में जाना चाहता है सब को सुकून की जरूरत है सबको शांति चाहिए और हर कोई जानता है कि सुकून और शांति सिर्फ और सिर्फ अध्यात्म है लेकिन गलत शिक्षा और गलत इसका प्रचार व्यक्ति को उसके मार्ग से भटका देता है

aapne poocha hai bhagwan me gehra vishwas hi din pratidin kyon badhte ja rahe hain kya yah ek accha sanket hai yahi puran shakun aapka sawaal aaj ki sthiti ke anusaar sahi hai gair vishwasi aur nastik isliye bol rahe hain ki dharm aur adhyaatm aur paramatma ki galat shiksha ke karan un par thopi gayi shraddha aur astha ke karan news chand log iski taraf aakarshit hote hain toh unhe bhi hum dabaav me aakar ehsaas sweekar karwaate hain jab bhi koi khud ko samarpan karta hai adhyaatm me toh vichar karna uska sahi hai lekin jab bhi koi dharm par yatayat me ya paramatma ke sambandh me koi vichar karta hai sandesh darshata hai toh use hum nastik yah use adharmee kehne lagte hain yahin se gair vishwa vasiyo ki sankhya badhti hai agar kisi ke man me dharm ke prati hai paramatma ke prati sandeh hai agar us sandehi ko mita de aatma se puri shraddha se uski bhakti me Lean ho jaega lekin agar dharm hai paramatma ke sambandh me koi vichar karta hai ya koi sandeh karta hai toh use dharm aur samaj sweekar nahi karta uski ninda aur uski aalochana itni ho jaati hai ki vaah nastik hone par majboor ho jata hai agar jiske liye hum apna pura jeevan samarpit kar rahe hain apne jeevan ka aadhar rakh rahe hain toh us se jaanch na hamara kartavya hai kyonki sabse bada dharm apne jeevan ki raksha hai agar hum bina soche samjhe apne jeevan ka aadhar rakh denge bina kisi parvaah ke toh aage kya hoga kya nahi hoga is bande man me rehta hai agar yah sandeh koi mita de toh yakinan har ek vyakti adhyaatm me jana chahta hai sab ko sukoon ki zarurat hai sabko shanti chahiye aur har koi jaanta hai ki sukoon aur shanti sirf aur sirf adhyaatm hai lekin galat shiksha aur galat iska prachar vyakti ko uske marg se bhataka deta hai

आपने पूछा है भगवान में गहरा विश्वास ही दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छ

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Rajinder Kumar

Business Owner

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हाय गाइस भगवान में गैर विश्वासी दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छा संकेत या एक बुरा शगुन तो दोस्तों में कहना चला कि भगवान में गैर विश्वासी दिन प्रतिदिन इसलिए भी बढ़ रहे हैं क्योंकि आज का जो इंसान है वह मतलबी हो गया है सेल्फिश है क्यों क्यों ज्यादा हर चीज में अपने मतलब को ढूंढता है अगर कहीं पूजा भी करता है तो कहीं ना कहीं अपने मतलब के लिए पूजा करता है कहीं खड़ा हो गया अरदास प्रार्थना विनती करता है तो उसमें उसका कोई ना कोई स्वार्थ छिपा होता है और जिस स्वार्थ में जिस चीज में स्वार्थ छिपा हो वह विश्वासी मेरे हिसाब से कमी होती है क्योंकि उसमें विश्वास जागृत नहीं हो पाता है और जब हम विश्वास विश्वास से बंद कर प्रार्थना करें तो हमारे अंदर कुछ स्वार्थी न होगा तो अच्छा संकेत तो नहीं कह सकते हैं लेकिन हां दुष्प्रभाव जरूर है एसआई युग का भी प्रभाव होता है लेकिन इंसान को अच्छी राह मिल जाए अच्छा रास्ता दिख जाए तो अच्छे संकेत भी हो सकते हैं कोई इसमें वह अच्छा बन भी सकता है और अच्छाई को ग्रहण भी कर सकता है तो मेरा तो यही माता है धन्यवाद

hi guys bhagwan me gair vishwasi din pratidin kyon badhte ja rahe hain kya yah ek accha sanket ya ek bura shagun toh doston me kehna chala ki bhagwan me gair vishwasi din pratidin isliye bhi badh rahe hain kyonki aaj ka jo insaan hai vaah matlabi ho gaya hai selfish hai kyon kyon zyada har cheez me apne matlab ko dhundhta hai agar kahin puja bhi karta hai toh kahin na kahin apne matlab ke liye puja karta hai kahin khada ho gaya ardas prarthna vinati karta hai toh usme uska koi na koi swarth chhipa hota hai aur jis swarth me jis cheez me swarth chhipa ho vaah vishwasi mere hisab se kami hoti hai kyonki usme vishwas jagrit nahi ho pata hai aur jab hum vishwas vishwas se band kar prarthna kare toh hamare andar kuch swaarthi na hoga toh accha sanket toh nahi keh sakte hain lekin haan dushprabhav zaroor hai si yug ka bhi prabhav hota hai lekin insaan ko achi raah mil jaaye accha rasta dikh jaaye toh acche sanket bhi ho sakte hain koi isme vaah accha ban bhi sakta hai aur acchai ko grahan bhi kar sakta hai toh mera toh yahi mata hai dhanyavad

हाय गाइस भगवान में गैर विश्वासी दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छा संकेत

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Hemant K. Prajapati

Educator | M.Phil., M.Sc., M.A. B.Ed.

3:06
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आपका प्रश्न है भगवान में गैर विश्वास ही दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्छा संकेत है यह एक पूरा शक देखिए यह सब जनरेशन गैप का मामला है जैसे-जैसे जनरेशन कैफिपीडिया बढ़ती जाएगी सुबह से ऐसे लोग प्रैक्टिकल होते जाएंगे और ऐसे लोग होंगे जो शिफ्ट कल पर विश्वास करेंगे जो शुरू होगी उसी को मारेंगे अभी तक यह प्रूफ नहीं हुआ है कि भगवान है या फिर भगवान नहीं है यह भी अपनी हुए मतलब यह कोई नहीं कह सकता कि भगवान है यह भी नहीं कह सकता कि भगवान नहीं है तो दो तरह के लोग हैं जो कुछ भगवान पर विश्वास करते हैं और कुछ भगवान पर विश्वास नहीं करते हैं जो भगवान पर विश्वास नहीं करते हैं प्रैक्टिकल लोग हैं उनको हर चीज तू चाहिए तभी हमारे साइंटिफिक एंगल से सोचने वाले लोग होते हैं जो कि भगवान पर विश्वास नहीं करते हम देखते हैं कि लोग तीर्थ यात्रा में जाते जाते समय लौटते समय तीर्थ यात्रा से उनकी बस की बस खाई में गिर जाती है और सारे लोग खत्म हो जाते हैं ऐसा क्यों होता है वह तो भगवान के दर्शन करके आ रहे हैं भगवान की कृपा पाकर आ रहे हैं भगवान का हाथ उनके साथ है भगवान का आशीर्वाद उनके साथ है उनके साथ ऐसी दुर्घटनाएं क्यों होती है यह सारी घटनाएं और छोटी-छोटी बहुत सी घटनाएं होती है जो कि लोगों लोगों को लोग इन लोग उनको उस पर विश्वास करते नहीं करते भगवान पर और इसी तरह से भगवान पर विश्वास कम अभी जैसे कि कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है अभी हाल है कि जब मैं न्यूज़ देख रहा था आज की टीवी में जो मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर है वहां पर पुजारी पुजारी से खड़े हुए थे और जो सुरक्षा बल खड़े हुए थे भक्त जा रहे थे ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था जिनके चेहरे पर मास्क में लगा हूं भाई भगवान भगवान का घर है एक मंदिर है वहां पर करुणा का कैसे हटता वहां तो भगवान को रोना को ऐसे ही गायब कर सकता है लेकिन आप भगवान पर विश्वास नहीं है वहां पर और एक मास्टर विश्वास कर रहे हैं भगवान के सामने खड़े होकर भी आप मस्त लगा रहे हैं यह पिक्चर क्लियर होती है कि भगवान के मंदिर पर खड़ा है जो पूजारी पूजा करवाता है जो भगवान भगवान के प्रसाद लोगों को बांटता है उसको कि भगवान पर विश्वास नहीं है कि भगवान मुझे इस बीमारी से बचाएगा तो दूसरे लोग कैसे विश्वास कर सकते हैं मतलब साईं से ही सब कुछ है आजकल टेक्नोलॉजी और साइंस और जैसे-जैसे पीढ़ियां पीढ़ियां बढ़ेगी भगवान के विश्वास का जो है दर्द हुकम ता जाएगा कविता जाएगा क्योंकि लोग दिन भाई डेंसिकल होते जाएंगे

aapka prashna hai bhagwan me gair vishwas hi din pratidin kyon badhte ja rahe hain kya yah ek accha sanket hai yah ek pura shak dekhiye yah sab generation gap ka maamla hai jaise jaise generation kaifipidiya badhti jayegi subah se aise log practical hote jaenge aur aise log honge jo shift kal par vishwas karenge jo shuru hogi usi ko marenge abhi tak yah proof nahi hua hai ki bhagwan hai ya phir bhagwan nahi hai yah bhi apni hue matlab yah koi nahi keh sakta ki bhagwan hai yah bhi nahi keh sakta ki bhagwan nahi hai toh do tarah ke log hain jo kuch bhagwan par vishwas karte hain aur kuch bhagwan par vishwas nahi karte hain jo bhagwan par vishwas nahi karte hain practical log hain unko har cheez tu chahiye tabhi hamare scientific Angle se sochne waale log hote hain jo ki bhagwan par vishwas nahi karte hum dekhte hain ki log tirth yatra me jaate jaate samay lautate samay tirth yatra se unki bus ki bus khai me gir jaati hai aur saare log khatam ho jaate hain aisa kyon hota hai vaah toh bhagwan ke darshan karke aa rahe hain bhagwan ki kripa pakar aa rahe hain bhagwan ka hath unke saath hai bhagwan ka ashirvaad unke saath hai unke saath aisi durghatanaen kyon hoti hai yah saari ghatnaye aur choti choti bahut si ghatnaye hoti hai jo ki logo logo ko log in log unko us par vishwas karte nahi karte bhagwan par aur isi tarah se bhagwan par vishwas kam abhi jaise ki corona virus ka khatra bana hua hai abhi haal hai ki jab main news dekh raha tha aaj ki TV me jo mumbai ka sidhivinayak mandir hai wahan par pujari pujari se khade hue the aur jo suraksha bal khade hue the bhakt ja rahe the aisa koi vyakti nahi tha jinke chehre par mask me laga hoon bhai bhagwan bhagwan ka ghar hai ek mandir hai wahan par karuna ka kaise hatata wahan toh bhagwan ko rona ko aise hi gayab kar sakta hai lekin aap bhagwan par vishwas nahi hai wahan par aur ek master vishwas kar rahe hain bhagwan ke saamne khade hokar bhi aap mast laga rahe hain yah picture clear hoti hai ki bhagwan ke mandir par khada hai jo pujari puja karwata hai jo bhagwan bhagwan ke prasad logo ko bantata hai usko ki bhagwan par vishwas nahi hai ki bhagwan mujhe is bimari se bachega toh dusre log kaise vishwas kar sakte hain matlab sai se hi sab kuch hai aajkal technology aur science aur jaise jaise peedhiyaan peedhiyaan badhegi bhagwan ke vishwas ka jo hai dard huqam ta jaega kavita jaega kyonki log din bhai densikal hote jaenge

आपका प्रश्न है भगवान में गैर विश्वास ही दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ते जा रहे हैं क्या यह एक अच्

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देखिए भगवान अपने आप में एक बस सर्वशक्तिमान सकती है उसके प्रति लोगों का नास्तिक होना लोगों के लिए यह हमारे समाज के लिए घातक है भगवान वास्तव में एक ऐसी शक्ति है इस पर एस्से शक्ति है जो सबका पालनहार है और वह समय-समय पर अपनी विद्या मानता में बता चुका है बरसात कब होती है क्यों होती है कैसे होती है यार इतना बड़ा आसमान भी नाकाम ओके कैसे खड़ा है ऐसे तो कोई सलमान सर्वशक्तिमान सकती है जैसा करती हमारे स्वास्थ्य के प्रति भी हम देख सकते हैं कि हमारा स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन गीता का चला जाता है यदि भगवान या सर्वशक्तिमान नहीं होती तो क्या हम ऑपरेशन या दवाइयों के बल पर हजारों साल नहीं जी सकते नहीं यह कैसी सर्वशक्तिमान सकती है उसके प्रति नास्तिक होना एक बुरा शगुन है लोगों को इसमें विश्वास रखना चाहिए और धर्म आचरण करना चाहिए

dekhiye bhagwan apne aap me ek bus sarvshaktimaan sakti hai uske prati logo ka nastik hona logo ke liye yah hamare samaj ke liye ghatak hai bhagwan vaastav me ek aisi shakti hai is par essay shakti hai jo sabka palanahar hai aur vaah samay samay par apni vidya maanta me bata chuka hai barsat kab hoti hai kyon hoti hai kaise hoti hai yaar itna bada aasman bhi nakam ok kaise khada hai aise toh koi salman sarvshaktimaan sakti hai jaisa karti hamare swasthya ke prati bhi hum dekh sakte hain ki hamara swasthya din pratidin geeta ka chala jata hai yadi bhagwan ya sarvshaktimaan nahi hoti toh kya hum operation ya dawaiyo ke bal par hazaro saal nahi ji sakte nahi yah kaisi sarvshaktimaan sakti hai uske prati nastik hona ek bura shagun hai logo ko isme vishwas rakhna chahiye aur dharm aacharan karna chahiye

देखिए भगवान अपने आप में एक बस सर्वशक्तिमान सकती है उसके प्रति लोगों का नास्तिक होना लोगों

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